पीरियड मिस होने पर घरेलू उपाय,जो आप पहले नहीं जानते होंगे

पीरियड मिस होने पर घरेलू उपाय

पीरियड शुरू होने से लेकर बन्द होने तक कुछ न कुछ समस्याओं से हर महिला दो चार होती है। कभी ब्लीडिंग ज्यादा तो कभी कम, कभी समय पर तो कभी असमय, कभी हैवी तो कभी सिर्फ स्पॉटिंग। यदि आप विवाहित है तो पीरियड मिस होना एक सुखद संकेत हो सकता है, लेकिन हमेशा नही। यदि आप अविवाहित है तो अवश्य ये एक समस्या है। लगातार लंबे समय तक पीरियड मिस होना कई समस्याओं को न्यौता देता हैं, जैसे रिप्रोडक्टिव कैपेसिटी का घटना या गर्भ धारण करने में समस्या, मोटापा बढ़ना, ओवरी में समस्या, भूख न लगना, फैशियल हेयर आदि। आज इस आर्टिकल में हम बात करेंगे पीरियड के मिस होने के कारण क्या है और कैसे आप पीरियड मिस होने पर घरेलू उपाय आजमा कर इस समस्या से निजात पा सकती है।

महिलाओं में पीरियड मिस होने की समस्या के निम्न कारणों से हो सकती है।

  • असमय व गलत खान पान से
  • सिडेंटरी लाइफ स्टाइल से
  • एंग्जायटी,डिप्रेशन, हैवी वर्क लोड से
  • थायरॉइड
  • मेनोपॉज
  • आहार में जरुरी पोषक तत्वों की कमी।
  • पॉलिसिस्टिक ओवरियन सिंड्रोम या पॉलिसिस्टिक ओवरियन डिजीज
  • जरूरत से ज्यादा व्यायाम या शारीरिक श्रम करना
  • बहुत लंबे समय तक बीमार रहना
  • गर्भाशय या गर्भाशय नलिका में कोई डिफेक्ट होना
  • महिला एथलीट्स द्वारा या फिटनेस के लिए स्टेरॉयड का सेवन करना।

हमारे शरीर मे कोई भी रोग वात, पित्त, कफ के असंतुलन के कारण होते हैं। ये असंतुलन पोषक तत्वों की कमी, और अनुचित जीवन शैली, या अन्य कारणों से होता है। जब लड़की में पीरियड की शुरुआत हो तो कई बार पीरियड मिस होते है। ये एक सामान्य बात है। इसी प्रकार किसी महिला में मेनोपॉज़ के आसपास भी पीरियड मिस होना देखा जाता है।

लेकिन यदि ये समस्या लंबे समय तक बनी रहे तो स्थिति गम्भीर हो सकती है। शुरुआती दौर में इस समस्या के लिए आप घरेलू उपाय अपना सकते है। आज इस आर्टिकल में हम आपको पीरियड मिस होने पर घरेलू उपाय बताएंगे।

पीरियड मिस होने पर घरेलू उपाय-Period Lane Ke Gharelu Upay

हल्दी-Period Jaldi Lane Ke Gharelu Upay

हल्दी एन्टीबैक्टीरियल, एन्टी फंगल होने के अलावा बहुत गर्म भी मानी जाती है। इसलिए इसका उपयोग सर्दी जुकाम में किया जाता है।
यदि किसी महीने आपके पीरियड मिस हो तो गरम पानी में या एक गिलास गर्म दूध में एक चुटकी हल्दी डालकर पीरियड होने की डेट से पाँच दिन पहले सुबह-शाम पीना शुरू करे।

इससे न केवल पीरियड शुरू होंगे बल्कि छोटा मोटा इन्फेक्शन भी खत्म हो जाएगा।

गाजर के बीज-Masik Dharm Aane Ke Upay In Hindi

गाजर के बीज अत्यधिक गर्म तासीर के होते है, तो यदि आप विवाहित है, तो पीरियड मिस होने पर सोच समझकर इसका इस्तेमाल करे।
गाजर में उपस्थित केरोटीन नाम का तत्व बॉडी में एस्ट्रोजन का लेवल बढ़ाता है। इससे पीरियड समय पर खुलकर तथा समय पर होता है।इसके लिए आप गाजर के बीज को पानी मे उबाल कर उस पानी को दिन में तीन बार पिए।

इसके अलावा गाजर के बीज को पीसकर किसी चूर्ण में मिलाकर भी प्रयोग किया जा सकता है।

तिल-Period Jaldi Aane Ke Upay

तिल को आप किसी भी रूप में ले ये फायदेमंद ही होते है। आप तिल के लड्डू बनाये या भूनकर खाए। पीरियड शुरू होने के दस दिन पहले से ही इसका सेवन शुरू कर दे।

खासकर गुड़ में मिलाकर खाने से यह ज्यादा फायदा करता है।

तिल
तिल

अदरक-Period Na Aane Par Kya Kare

अदरक का ज्यादा से ज्यादा से उपयोग करें, अदरक का रस निकालकर गुड़ के साथ खाए। अदरक हल्दी की चाय बनाकर पिए, सब्जी में डालकर इसका प्रयोग करें या अचार बनाकर।

अदरक पीरियड मिस होने की समस्या में अकेला फायदा नही करेगा। अदरक का प्रयोग अन्य उपायों के साथ करे।

पपीता-Mahwari Na Aane Ka Ilaj

पीरियड होने से 4 दिन पहले एक प्लेट पपीते का फल खाएं। इसमें मौजूद कैरोटी एस्ट्रोजन हार्मोन को उत्तेजित करता है। इसके सेवन से पीरियड समय पर एवं खुलकर होता है।

धनिया-Masik Dharm Aane Ke Upay In Hindi

साबुत धनिये को रात भर पानी मे भिगोकर रखे, सुबह उस पानी को पी ले। हरे धनिये की जड़ को अच्छी तरह धोकर,उबालकर उस पानी का प्रयोग करें।

पानी को दिन में तीन बार 50ml पिए, हरे धनिये की चटनी खाए। यह उपाय भी पीरियड मिस होने पर लाभ दिलाता है। साथ ही हार्मोनल डिस्टर्बेंस को ठीक करता है।

मेथी-Period Jaldi Lane Ke Gharelu Upay

मेथी का प्रयोग केवल पीरियड के समय नही बल्कि रेगुलर किया जा सकता है। इसके लिए रोज रात को एक चम्मच मेथी भिगो दें, सुबह आधा चम्मच भीगी मेथी पानी से निगल ले।
लगातार ऐसा करने से हॉर्मोनल समस्याए भी दूर होंगी।

गुड़ की पात-Periods Jaldi Aane Ke Upay

गुड़ की पात सामान्यतया जच्चा को दी जाती है, पर पीरियड मिस होने पर भी इसका प्रयोग किया जा सकता है। ये खाने में स्वादिष्ट होने के साथ सेहतमंद भी है, इसे बनाने में अजवायन, गुड़, काजू, बादाम, गोला, घी, मखाने का इस्तेमाल किया जाता है

इन सब उपायों के अलावा आप अपनी जीवनशैली सुधारे, ताकि समस्या जड़ से दूर हो जाये।

  • विटामिन एवं खनिज जैसे पोषक तत्व से भरपूर भोजन करे।
  • सब्जियाँ, दाल, अंकुरित अनाज एवं सूखे मेवों का सेवन करें।
  • केवल मौसमी फल खाएं
  • तनाव को दूर करने के लिए ध्यान, योग, म्यूजिक का सहारा ले।
  • अत्यधिक शारीरिक श्रम एवं व्यायाम से बचें।
  • नियमित रूप से सुबह प्राणायाम एवं योगासन करें।
  • पैकेजिंग वाले और जंकफूड से बचे।

रात को चेहरे पर शहद लगाने से मिलते हैं ये 5 फायदे, नुकसान और लगाने का सही तरीका

चेहरे पर शहद लगाने के फायदे

क्या आप जानते हैं रात को चेहरे पर शहद लगाने से क्या होता है? शहद एक प्राकृतिक और बहुत फायदेमंद चीज़ है जो आपकी त्वचा के लिए बेहद उपयोगी साबित होती है। इस लेख में हम जानेंगे chehre par shahad lagane se kya hota hai, इसके 5 मुख्य फायदे, नुकसान, और इसे लगाने का सही तरीका।

 

शहद
फेस पर शहद लगाने के फायदे

 

1. चेहरे की त्वचा को गहराई से हाइड्रेट करता है

शहद एक प्राकृतिक मॉइस्चराइजर है जो आपकी त्वचा की नमी को लॉक करता है। रात को चेहरे पर शहद लगाने से आपकी त्वचा नरम, मुलायम और हाइड्रेटेड बनी रहती है। यह खास तौर पर ड्राई स्किन के लिए बहुत फायदेमंद है और प्राकृतिक मॉइस्चराइजर के रूप में काम करता है।

2. चेहरे की रंगत निखारता है

शहद में एंटीऑक्सीडेंट होते हैं जो आपकी त्वचा की डलनेस और मुरझाई हुई रंगत को कम करते हैं। नियमित रूप से chehre per shehad lagane ke fayde में यह भी शामिल है कि यह त्वचा की रंगत को निखारकर उसे स्वस्थ और चमकदार बनाता है।

3. मुंहासों और पिंपल्स को कम करता है

शहद के एंटी-बैक्टीरियल गुण त्वचा को साफ रखते हैं और मुंहासों को कम करने में मदद करते हैं। इसे नियमित इस्तेमाल करने से चेहरे की त्वचा में इंफ्लेमेशन कम होता है और मुंहासे दूर रहते हैं।

4. उम्र बढ़ने के निशान कम करता है

शहद में मौजूद प्राकृतिक एंटीऑक्सीडेंट आपकी त्वचा को झुर्रियों और उम्र बढ़ने के निशानों से बचाते हैं। इसलिए रात को चेहरे पर शहद लगाने से त्वचा जवान, स्वस्थ और चमकदार दिखती है।

5. सनबर्न और त्वचा की जलन में राहत देता है

शहद में ठंडक पहुंचाने वाले गुण होते हैं, जो सनबर्न या जलन को कम करते हैं। यह संवेदनशील त्वचा वाले लोगों के लिए भी सुरक्षित माना जाता है और त्वचा की सूजन को शांत करता है।

शहद लगाने का सही तरीका

  • सबसे पहले अपने चेहरे को हल्के साबुन से धोकर साफ करें।
  • 1 से 2 चम्मच कच्चा शहद लें।
  • इसे अपने चेहरे पर अच्छी तरह से लगाएं।
  • लगभग 15-20 मिनट तक शहद को चेहरे पर रहने दें।
  • गुनगुने पानी से इसे धो लें।
  • सप्ताह में 3-4 बार इस प्रक्रिया को दोहराएं।

शहद के नुकसान और सावधानियां

  • यदि आपकी त्वचा संवेदनशील है, तो पहले शहद को हाथ की त्वचा पर टेस्ट करें।
  • कभी-कभी शहद से एलर्जी हो सकती है, इसलिए ध्यान से इस्तेमाल करें।
  • ज्यादा देर तक चेहरे पर शहद लगाने से त्वचा चिपचिपी और असहज हो सकती है।
  • यदि आपको कोई जलन या खुजली महसूस हो तो तुरंत उपयोग बंद कर दें।

FAQS

Q: Chehre par shahad lagane se kya hota hai?

A: यह आपकी त्वचा को हाइड्रेट करता है, मुंहासों को कम करता है, और चेहरे की चमक बढ़ाता है।

Q: क्या रोजाना शहद लगाना ठीक है?

A: हफ्ते में 3-4 बार शहद लगाना सबसे अच्छा और सुरक्षित होता है।

निष्कर्ष

रात को चेहरे पर शहद लगाना एक प्राकृतिक और असरदार तरीका है अपनी त्वचा की देखभाल करने का। इससे आपकी त्वचा मुलायम, चमकदार, और स्वस्थ बनी रहती है। उचित मात्रा में और सही तरीके से शहद लगाने से आप इसके सभी फायदे महसूस कर सकते हैं।

अगर नींद ना आये तो क्या करें-agar neend na aaye to kya kare

अगर नींद ना आये तो क्या करें

वर्तमान समय में लगभग हर तीसरे को चौथा व्यक्ति नींद ना आने की समस्या से परेशान है। नींद ना आना, फास्ट लाइफ़स्टाइल, देर रात तक जगना तनाव के कारण होती है । नींद ना आने या कम नींद आने के कारण व्यक्ति चिड़चिड़ा हो जाता है ब्लड प्रेशर, सिर दर्द और अन्य कई प्रकार की बीमारियों से ग्रसित हो जाता है।

अनिद्रा के प्रकार

अनिद्रा मुख्यतः तीन प्रकार की होती है-

1. अस्थाई अनिद्रा

किसी कारणवश यदि 3 या 4 रात तक नींद ना आने की स्थिति अस्थाई अनिद्रा कहलाती है परंतु यह कुछ समय बाद  समाप्त हो जाती है ।

2. अल्पकालीन अनिद्रा

एक्यूट या अप्लकलीन अनिद्रा के लक्षण कुछ हफ्तों तक जारी रहते हैं पर्याप्त आराम करने और दवाई लेने पर यह समस्या समाप्त हो जाती हैं।

3. क्रोनिक अनिद्रा

स्थाई अथवा क्रोनिक अनिद्रा के लक्षण कई बार महीनों अथवा सालों तक चलते रहते हैं जिसे कई प्रकार की बीमारियों से ग्रसित हो जाता है ।

इसके अलावा अनिंद्रा को सुखी होने वाले कारणों के आधार पर दो भागों में बांटा गया है –

प्राथमिक अनिद्रा

इस स्थिति में व्यक्ति को सिर्फ नींद ना आने की समस्या होती है इसके अलावा उसे किसी भी प्रकार की अन्य स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं नहीं होती हैं ।

माध्यमिक अनिद्रा

इस स्थिति में व्यक्ति को अनिद्रा के कारण और भी कई सारी समस्याएं होने लगती हैं जैसे अवसाद ,गठिया, कैंसर, सीने में दर्द, जलन इत्यादि ।

किसी भी उम्र के बारे व्यक्ति को अनिद्रा की समस्या हो सकती है ऐसा शोध से पता चला है कि वयस्क पुरुषों की तुलना में वयस्क महिलाओं में यह समस्या अधिक होती है । अनिद्रा होने पर व्यक्ति एकाग्र होकर कार्य नहीं कर पाता है इसके अलावा याददाश्त से जुड़ी समस्याओं से ग्रसित हो जाता है साथ ही मोटापा और अवसाद की स्थिति में चला जाता है ।

अनिद्रा के लक्षण

अनिद्रा से ग्रसित व्यक्ति को रात में नींद नहीं आती है या फिर कम आती है और पूरी रात जागने के कारण उसे चिड़चिड़ापन, यादाश्त का कम होना और ध्यान केंद्रित करने की क्षमता प्रभावित होना थकावट आलस्य जैसे लक्षण दिखाई देने लगते हैं ।

अनिद्रा के कारण

अनिद्रा आमतौर पर गलत जीवनशैली और तनाव के कारण होती है आइए जानते हैं नींद ना आने के क्या-क्या कारण हैं ?

तनाव

वर्तमान समय में दौड़ती भागती जिंदगी में हर कोई किसी ना किसी बात को लेकर तनाव में रहता है. ऑफिस से लेकर घर तक कहीं ना कहीं किसी न किसी बात के कारण व्यक्ति मानसिक परेशानी का सामना करता है और तनाव की स्थिति में चला जाता है तनाव के कारण नींद नहीं आती है और धीरे-धीरे या एक समस्या बन जाती है .

सोने की खराब आदतें

स्मार्ट फोन, वीडियो गेम, टीवी, कंप्यूटर जैसी चीजों के आदी होने के कारण लोगों की दिनचर्या प्रभावित हो रही है देर रात तक जागना और सुबह देर तक सोना आजकल व्यक्ति की दिनचर्या का हिस्सा बन गया है जिसके कारण नींद ना आने की समस्या होने लगती है ।

काम का दबाव

कामकाजी लोगों में ऑफिस के काम का दबाव होने के कारण उन्हें देर रात तक जागना पड़ता है ,कई बार यात्राएं करनी  पड़ती है, कई  शिफ्टों में काम करना पड़ता है जिसके कारण उनके सोने की दिनचर्या खराब हो जाती है और अनिद्रा की स्थिति उत्पन्न हो जाती है।

रात में अधिक मात्रा में भोजन करना

ऐसा माना जाता है कि रात में हल्का भोजन करने से व्यक्ति का स्वास्थ्य सही रहता है परंतु तले भुने और फास्ट फूड के बढ़ते चलन के कारण लोग रात में अधिक भोजन कर लेते हैं जिसके कारण एसिडिटी और पेट में भारीपन की समस्या हो जाती है और साथ ही साथ अनिद्रा की समस्या भी होने लगती है।

नींद ना आना
नींद ना आना

अनिद्रा से बचाव के लिए क्या करें ?-agar neend na aaye to kya kare

सोने की अच्छी आदतें अनिद्रा को रोकने और अच्छी नींद लेने में मदद कर सकती हैं –

  • सोने से पहले अधिक मात्रा में भोजन करने और पेय पदार्थों के सेवन करने से बचें।
  • सोने के करीब 1 घंटे पहले कंप्यूटर टीवी और स्मार्टफोन का प्रयोग बंद कर दें।
  • सोने का कमरा साफ सुथरा और आरामदायक होना चाहिए ।
  • सोने और जागने का समय निश्चित करें और उसी समय पर सोने और जागने का प्रयास करें।
  • दिन में सोने से बचें।
  • धूम्रपान, चाय, कॉफी अथवा अल्कोहल का प्रयोग कम से कम मात्रा में करें या ना करें ।
  • यदि किसी भी प्रकार की रोग की दवाई ले रहे हैं तो डॉक्टर से सुनिश्चित करें कि कहीं दवाइयों की वजह से तो अनिद्रा नहीं हो रही।
  • सोने से पहले स्नान करें किताबे पढ़ें या धीमी आवाज में संगीत सुनें ।
  • सोने के कमरे में हल्की सुगंध वाली मोमबत्ती अथवा कपूर का प्रयोग करें ।
  • मेडिटेशन करें ।
  • नियमित रूप से व्यायाम करें और शारीरिक रूप से सक्रिय रहें ।

अनिद्रा के घरेलू उपाय

नींद ना आने पर निम्न घरेलू उपाय अपनाकर इस समस्या का समाधान पाया जा सकता है –

पैर धोएं

जिन लोगों को नींद नहीं आती है उन्हें गर्मियों में ठंडे पानी से और सर्दियों में गुनगुने पानी से पैर धो कर सोना चाहिए इससे मस्तिष्क को शीतलता मिलती है और नींद अच्छी आती है ।

मेहंदी का करे इस्तेमाल

मेंहंदी अनिद्रा के रोग के लिए बहुत ही लाभदायक है । मेहंदी को पीसकर सिर पर लगाने से मस्तिष्क को शीतलता मिलती है और नींद अच्छी आती है ।

मालिश से आएगी नींद

रीड की हड्डी की मालिश पहले नीचे से ऊपर और फिर ऊपर से नीचे तक करने से भी रात को नींद अच्छी आती है।

सलाद खाएं

सलाद के पत्तों का प्रयोग करके भी अनिद्रा की स्थिति से निजात पाया जा सकता है । गाजर का रस अनिद्रा में बहुत लाभदायक है ।

मेथी दाना से मिलेगी मदद

जिन लोगों को पेट संबंधी विकारों के कारण नींद नहीं आती उन्हें मेथी का प्रयोग करना चाहिए। दाना मेथी को भिगोकर अंकुरित करके अथवा उसकी सब्जी बनाकर खाने से लाभ होता है ।

प्याज के रस का करें प्रयोग

प्याज का रस भी अनिद्रा के रोगियों के लिए लाभदायक होता है। प्याज को छीलकर देसी घी में अच्छी तरह भून लें और उसे रोटी के साथ खाएं इससे अनिद्रा की समस्या से छुटकारा मिल जाएगा ।

कद्दू मिलेगी मदद

घिया या कद्दू के रस में तिल का तेल मिलाकर खोपड़ी पर मालिश करने से अनिद्रा रोग में लाभ होता है। इसके अलावा गर्मियों में पैरों में जलन के कारण भी नींद नहीं आती है इसके लिए कद्दू का टुकड़ा लेकर पैरों के तलवों पर मिलना चाहिए इससे रात को अच्छी नींद आती है ।

दही से होगा लाभ

दही अनिद्रा के उपचार में बहुत ही उपयोगी होता है भोजन में दही का प्रयोग करने और स्नान के समय सिर पर दही की मालिश करने से अनिद्रा रोग के उपचार में सहायता मिलती।

गरम दूध पियें

रात को सोने से पहले एक गिलास गर्म दूध में थोड़ी सी हल्दी डालकर पीने से भी नींद अच्छी आती है।

शहद है लाभकारी

शहद अनिद्रा के लोग रोगियों के लिए बहुत ही लाभदायक है सोने के से पूर्व गुनगुने पानी में दो चम्मच शुद्ध शहद का सेवन करने से नींद अच्छी आती है ।

सौंफ का करे सेवन

दो चम्मच सौंफ को पानी में डालकर अच्छी तरह उबालें और पानी आधा रह जाने पर उसमें दुगुना दूध मिलाकर दो चम्मच घी और चीनी मिलाएं और सोते समय इसका सेवन करने से नींद अच्छी आती है और प्रातः काल पेट भी आसानी से साफ हो जाता।

चन्दन है लाभकारी

चंदन को पानी में किस कर माथे पर लगाने तथा कच्चे आंवले का पेस्ट बनाकर उसको सर पर लगाने से भी अनिद्रा में लाभ होता है।

चन्दन है लाभकारी
चन्दन है लाभकारी

हरे धनिये का करे प्रयोग

गर्मियों में नींद ना आने पर हरे धनिए को अच्छी तरह पीसकर पानी और चीनी मिला कर पीने से नींद अच्छी आती है ।

घरेलू उपचार के अलावा नींद ना आने का इलाज –

यदि अनिद्रा की समस्या अधिक बढ़ गई है तो ऐसी स्थिति में एलोपैथी , होम्योपैथी आयुर्वेद योग ध्यान प्राणायाम एक्यूपंक्चर आदि कई सारे तरीकों को अपनाकर अनिद्रा की समस्या से छुटकारा पाया जा सकता है ।

अनिद्रा में क्या खाएं ?

  • दूध

दूध में ट्राइप्टोफन नामक एक अमीनो एसिड होता है जिससे किसी कारण रात को दूध का सेवन करने से नींद जल्दी आ जाती है ।

  • केले

केले में पाया जाने वाला मैग्नीशियम और पोटेशियम प्राकृतिक रूप से मांसपेशियों को शिक्षित करते हैं जिसके कारण नींद आसानी से आती है ।

  • हर्बल चाय

हर्बल चाय में कई सारे एंटी ऑक्सीडेंट पाए जाते हैं जो नींद लाने में मदद करता है ।

  • साबुत अनाज

साबुत अनाज जैसे जॉब कुट्टू आदि में मैग्नीशियम पाया जाता है जो मांसपेशियों को सुचारू रूप से काम करने में और मानसिक शांति का एहसास दिलाने में मदद करता है इस कारण नींद अच्छी आती है ।

  • कांप्लेक्स कार्ब्स

कांप्लेक्स कार्ब्स जैसे फली और चमेली चावल ( जैस्मिन राइस )धीरे-धीरे पता है और इसमें पोटेशियम पाया जाता है जो मांसपेशियों को शिथिल करने में मदद करता है और अच्छी नींद में सहायक होता है।

  • चेरी का जूस

खट्टे फलों जैसे चैरी आदि के जूस में मेला टोनिन नामक हार्मोन होता है जो नींद पर नियंत्रण रखता है।

उपरोक्त खाद्य पदार्थों का सेवन करके, अच्छी जीवनशैली अपनाकर , पर्याप्त व्यायाम करके, अनिद्रा की समस्या से छुटकारा पाया जा सकता है। परंतु यदि समस्या अधिक बढ़ रही है तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए और यदि कोई भी व्यक्ति किसी विशेष प्रकार की बीमारी से ग्रसित है तो उसे भी डॉक्टर की सलाह से ही दवाइयों और खाद्य पदार्थों का सेवन करना चाहिए ।

क्या नहीं जानते आप भी दलिया खाने से क्या होता है-daliya khane ke fayde

दलिया खाने से क्या होता है

सुबह के ब्रेकफास्ट के लिए दलिया सबसे अच्छे नाश्ते में से एक है। दलिया को सेहत के लिए बहुत फायदेमंद माना जाता है। दलिया में कैल्शियम, मैग्नीशियम, फॉस्फोरस, थाइमिन, फोलेट, पोटेशियम, कार्बोहाइट्रेड, जिंक, मिनिरल्स, विटामिन्स, आयरन, प्रोटीन, फाइबर जैसे पोषक तत्व होते हैं। इसकी सबसे बड़ी खासयित ये है कि इसमें फ़ाइबर प्रचुर मात्रा में होता है, जिससे थोडी मात्रा लेने से ही पेट भरा महसूस होता है और वजन घटाने में ये नैचुरल तरीके से साहयक हो जाता है। इसी कारण ये पाचन को बेहतर बनाता है और इसे खानें के बाद दिन भर आप खुद को ऊर्जावान महसूस करते हैं। दलिया में कैलोरी की मात्रा बहुत कम पाई जाती है और पोषक तत्व प्रचुर मात्रा में होते हैं। आइए जानते हैं दलिया खाने से क्या होता है।

दलिया खाने से क्या होता है-daliya khane ke fayde

  • दलिया में बहुत अधिक मात्रा में फाइबर होने के कारण इसका सेवन करने से कब्ज की समस्या भी दूर होती है।
    कब्ज
    कब्ज
  • दलिया वजन घटाने में मददगार होने के साथ साथ डायबिटीज के रोगियों के लिए भी बहुत फायदेमंद होता है।
  • वैसे तो हर तरह के अनाज से बना दलिया फायदेमंद होता है लेकिन अगर मिश्रित अनाज जैसे गेहूँ बाजरा रागी वगैरा से बना हो तो और भी पौष्टिक हो जाता है।
  • जैसा कि आजकल कोलेस्ट्रॉल बढ़ने की समस्या आम है, दलिया में घुलनशील और अघुलनशील दोनों ही फाइबर पाए जाते हैं, शरीर में उच्च मात्रा में फाइबर होने से कोलेस्ट्रॉल की मात्रा नियंत्रित रहती है. जिससे व्यक्ति को हृदय रोग होने की संभावना न के बराबर रहती है।
  • हड्डियों में कमजोरी भी आम समस्या होती जा रही हैं। मैग्नीशियम और कैल्शियम का खजाना होने के कारण दलिये का नियमित सेवन हड्डियों को मजबूती प्रदान करता है।
  • दलिया का नियमित सेवन करने वालों को उम्र दराज होने पर जोड़ों के दर्द की शिकायत नहीं होती है।
  • दलिया खाने से पित्त की थैली में पथरी की समस्या भी दूर होती है।
  • दलिया आयरन का अच्छा स्रोत है, जो शरीर में हीमोग्लोबिन की मात्रा को बैलेंस करता है।
  • इसके अलावा दलिया शरीर के तापमान और मेटाबॉलिज्म को भी सही मात्रा में बनाए रखता है।

दलिया को आप और अधिक पोष्टिक बनाने के लिए इसमें अपनी पसंद की सब्जियों को शामिल कर सकते हैं।  इतना ही नहीं इसे आप मीठा और नमकीन दोनों तरह से खा सकते हैं।

हाथ पांव गोरा करने का तरीका आसान और असरदार

हाथ पांव गोरा करने का तरीका आसान और असरदार

आजकल गर्मी और प्रदूषण इतना बढ़ गया है कि उसका असर हमारी त्वचा पर बहुत ज्यादा पड़ने लगा है। जिससे त्वचा पर कालेपन की समस्या भी बढ़ गई है। व्यस्त रहने के कारण हम हाथ पांव का उतना ध्यान नहीं रख पाते जितना की चेहरे की त्वचा का रखते हैं। जिसकी वजह से हाथ पांव का कालापन धीरे धीरे बढ़ता जाता है। काले हाथ पांव से आपकी पर्सनेलिटी पर बुरा असर पड़ता है। हाथों और पावों को गोरा करने के लिए आपको कुछ ज्यादा सामान नहीं चाहिए। घर पर पड़े सामान से कुछ आसान और घरेलू नुस्खे आजमाकर आप हाथों और पैरो का कालापन दूर कर सकते है। तो आइये आज हम जानते है की क्या है हाथ पांव गोरा करने का तरीका जो है बेहद ही आसान और और असरदार भी।

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हाथ पांव गोरा करने का तरीका-Hath Paon Gora Karne Ka Tarika In Hindi

हाथों की सुंदरता बढ़ाएगा चन्दन, खीरे, टमाटर और नींबू का पेस्ट

  • हाथों पैरों से कालेपन को दूर करने के लिए 2 चम्मच चन्दन पाउडर में टमाटर, खीरे और नींबू के रस को अच्छे से मिलाकर पेस्ट तैयार कर लें।
  • अब इस पेस्ट को हाथ पैर पर 15 मिनट के लिए लगाकर छोड़ दीजिए और फिर बाद पानी से धो लीजिए। इस पेस्ट को एक हफ़्ते में दो बार जरूर इस्तेमाल करें।

हाथ पांव गोरा करने का तरीका है बादाम का पेस्ट और निम्बू

  • चार बादाम भिगोकर छिलका उतार कर पीस लीजिए।
  • फिर इसमें 3-4 बूदें नींबू का रस, 1 चम्मच दूध और आधा चम्मच बेसन को मिलाकर गाढ़ा पेस्ट बनाइए और अपने हाथ पैरों पर लगा दीजिए।
  • फिर सूखने पर पानी से धो लीजिए।

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हाथों की सुंदरता बढ़ाएगा दूध, ग्लिसरीन और नींबू का रस

  • कटोरी में दूध, ग्लिसरीन, नींबू के रस की कुछ बूंदें मिलाकर अपने हाथ और पैर पर लगाइए।
  • सूख जाने पर पानी से धो लीजिए।
  • दूध और नींबू को प्राकृतिक ब्लीच मानते हैं तो इस उपाय से आपके हाथ पैर साफ और नर्म होंगे।

हाथ पांव गोरा करने का तरीका है संतरे का पेस्ट

संतरे
संतरे
  • पहले संतरे के सूखे छिलकों को पीस लीजिए।
  • फिर इस पाउडर में दूध मिलाकर अपने हाथ और पैरों पर पेस्ट बनाकर लगाइए।
  • जब सुख जाए तब धीरे से रगड़ते हुए पानी से धो लें।
  • इस पेस्ट को लगाने से आपके हाथ और पैरों से कालापन खत्म हो जाएगा और सॉफ्ट भी होंगे।

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हाथों की त्वचा गोरी करने के उपाय है मीठे तेल से मालिश

हाथो को गोरा करने के घरेलू नुस्खे है शहद और नींबू

  • हाथ पैरों की त्वचा को गोरा करने के लिए शहद और निम्बू का रस एक बहुत असरदार उपाय माना जाता है ।
  • शहद आपकी त्वचा को मुलायम बनाता है और नींबू ब्लीचिंग का काम करता है।
  • निम्बू के रस में त्वचा को गोरा करने वाले गुण मौजूद होते हैं।
  • इससे आप अपने हाथ पैरों को गोरा बना सकते हैं।
  • इसे दिन में 2 से 3 बार अपने हाथों पर आधे घंटे के लिए लगाइए और फिर धो लीजिए।
  • जिससे आपके हाथ गोरे और सुन्दर हो जाते हैं और हाथो के बाल भी कम होते हैं।

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हाथ पांव गोरा करने का तरीका है बेसन, निम्बू का रस और गुलाब जल का पेस्ट

  • एक और अच्छा उपाय ये है कि बेसन में निम्बू का रस और गुलाब जल मिलाकर गाढ़ा पेस्ट तैयार कीजिए।
  • इस पेस्ट को अपने हाथो पर सूखने तक लगाइए फिर हल्का रगड़कर धो लीजिए।
  • इस पेस्ट को रोजाना एक बार इस्तेमाल करने से कुछ ही दिनों में आपके हाथ पैर गोरे और खूबसरत बन जायंगे।

हाथो को गोरा करने के घरेलू नुस्खे है दूध और सेंधा नमक

  • हाथों और पैरों के कालेपन को दूर करके उन्हें गोरा और मुलायम बनाने के लिए दूध और सेंधा नमक का इस्तेमाल करें।
  • इसके लिए पहले 2 चम्मच सेंधा नमक में 2 चम्मच कच्चा दूध मिला लीजिए।फिर आप चाहे तो इस पेस्ट में 1 चम्मच शहद भी मिला सकते हैं।
  • पेस्ट तैयार हो जाने पर इससे अपने हाथों और पैरों पर हल्के हाथों से स्क्रब करें।
  • इस पेस्ट के उपयोग से बहुत ही जल्दी आपके हाथों पैरों से कालापन दूर हो जाएगा और वे गोरे और खूबसूरत हो जाएंगे।

और पढ़ें: रंगत निखारने वाली हिमालय फेयरनेस क्रीम के फायदे

हाथों का रंग गोरा करने के उपाय है दलिया और जैतून का तेल

  • हाथ पैरों को गोरा करने के लिए दलिया का उपयोग करने से बहुत फायदा होता है।
  • अगर आप चाहते हैं कि आपके हाथ और पैरों की त्वचा कोमल भी बन जाए तो इसके लिए दलिये को पानी में उबालकर फिर उसमें एक चम्मच जैतून का तेल मिला लीजिए।
  • फिर इस मिश्रण को कम से कम आधे घंटे तक हाथ और पैरों पर लगा रहने दीजिए और फिर पानी से इसे धो लें।
  • इसका एक बार उपयोग करके ही आप अपने हाथो और पैरों में बहुत फर्क महसूस करेंगे।

Frequently Asked Questions in Hindi – सामान्य प्रश्न

हाथो को कैसे गोरा करे?

आइए जानते हैं अपने हाथों को किस प्रकार गोरा किया जा सकता है - 1.बेसन - दो चम्मच बेसन में थोड़ा सा कच्चा दूध और चुटकी भर हल्दी मिलाकर पेस्ट तैयार करके उसे हाथों पर लगाने से हाथों का रंग गोरा होता है। 2.नींबू -नींबू के रस में चीनी अथवा नमक मिलाकर हाथों पर रगड़ने से हाथों का कालापन दूर होता है । 3. टमाटर - टमाटर के रस में थोड़ा-सा नींबू का रस मिला कर हाथों पर मसाज करें इससे हाथों का रंग गोरा होता है । इसके अलावा कच्चे दूध से हाथों पर मसाज करने से भी उसका रंग गोरा होता है।

पैरों को कैसे गोरा करें?

पैरों को गोरा कैसे बनाये? आइऐ जानते है..... 1.रात को सोने से पहले पैरों को गुनगुने पानी से धोये ।और क्रीम लगा कर सोये इससे पैरो की त्वचा नर्म और मुलायम रहेगी साथ ही पैरों को गोरा भी बनाऐ रखेगी 2.नहाने दस मिनट पहले एक चम्मच नींबू का रस,एक चम्मच खीरे के रस में हल्दी मिलाकर मसाज करे ।और कुछ समय रख कर नहा ले । 3.एक चम्मच ऐलोवेरा जैल और एक चम्मच बादाम का तेल मिला कर हफ्ते में दो बार मसाज करें। पैर गोरे रहेंगे। 4. दो चम्मच चीनी में एक चम्मच नींबू का रस और एक चम्मच गुलाबजल मिला कर हल्के हाथों से स्क्रब करें और साफ पानी से धोये।

हाथ पैर के कालेपन को दूर कैसे करें?

1.हाथ पैर का कालापन दूर करने के लिये कच्चे दूध में जायफल धिसकर लगाने से पुराने काले निशान मिट जाते है साथ ही हाथ पैर का कालापन भी दूर हो जाता है । 2. एक चम्मच कच्चे दूध में एक चम्मच नींबू का रस मिलाकर रोज कालेपन वाली जगह हाथ पैरों पर लगाये इसके नियमित प्रयोग से कालापन हटने लगेगा। 3. संतरे के छिलके सुखाकर पीस ले फिर रोज एक चम्मच संतरे के छिलके में थोड़ा दूध मिला कर हाथ पैरों पर लगा ले और सूखने के बाद धोले ।कालापन कम होने लगेगा ।

गोरे होने के लिए क्या किया जाता है?

गोरे होने के उपाय क्या है ? आइऐ जानते 1.आधा चम्मच शहद में नींबू का रस मिलाकर रात में लगाये और सुबह ठण्डे पानी से धोये । 2. अधपके केले में कच्चा दूध मिलाकर मसाज करे और दस मिनट बाद धोले । 3 . आटे के चोकर में बादाम का तेल , चंदन का बुरादा , गुलाब जल , मसूर की दाल का पाउडर मिला कर रोज उबटन करें ।त्वचा गोरी और मुलायम बनेगी 4.चावल का आटा उसमें आधा चम्मच शहद मिलाये और थोड़ा सा दूध मिलाकर पेस्ट बना ले और अपने चेहरे, हाथ , पैरो पर लगाये और सूखने पर धोले । रंगत निखर कर आयेगी

पतंजलि अश्वगंधा पाउडर के फायदे जो आप पहले नहीं जानते होंगे

पतंजलि अश्वगंधा पाउडर के फायदे

पतंजलि अश्वगंधा पाउडर एक आयुर्वेदिक औषधि है। प्राचीन काल से अश्वगंधा का प्रयोग कई बीमारियों के उपचार के लिए किया जा रहा है। हमारे वेदों में भी अश्वगंधा की उपयोगिता का वर्णन है। आयुर्वेद में अश्वगंधा को तनाव रोधी चिंता विकारों के इलाज में प्रयोग किया जाता है।

अश्वगंधा का नाम संस्कृत भाषा से लिया गया है संस्कृत भाषा में अश्वगंधा का अर्थ अश्व की गंध है। पसीने के कारण अश्व के पसीने से जो गंध निकलती है उसकी गंध और अश्वगंधा की जड़ और पत्तियों की गंध एक समान होती है कुछ लोग यह भी कहते हैं कि अश्वगंधा का नाम अश्व जैसी ताकत और यौन शक्ति के कारण मिला है।

अश्‍वगंधा का वानस्पतिक नाम: विथानिया सोमनिफेरा
वंश: सोलेनेसी
संस्‍कृत नाम: अश्‍वगंधा, वराहकर्णी और कमरूपिणी
सामान्‍य नाम: विंटर चेरी, भारतीय जिनसेंग, असगंध
उपयोगी भाग: अश्‍वगंधा की जड़ और पत्तियों का इस्‍तेमाल किया जाता है पर इसकी फूल व पत्तियाँ भी बहुत उपयोगी है।
भौगोलिक विवरण: अश्‍वगंधा अधिकतर भारत के शुष्‍क प्रदेशों (प्रमुख तौर पर मध्‍य प्रदेश , राजस्‍थान) और गुजरात में पायी जाती है। विदेश में नेपाल, अफ्रीका और संयुक्‍त राज्‍य अमेरिका में भी अश्वगंधा का वर्णन है।

पतंजलि ने अश्वगंधा पौधे की जड़ को आर्युवेदिक पद्धति से कूटकर,पीसकर, छानकर अस्वगंधा पाउडर बनाया है।

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तो आइए जानते हैं पतंजलि अश्वगंधा पाउडर के गुणों को

पतंजलि अश्वगंधा पाउडर लाभदायक है थायराइड की बीमारी में

पतंजलि अश्वगंधा पाउडर निश्चित मात्रा में लेने पर थायराइड कंट्रोल होता है और मेटाबॉलिज्म ठीक होता है। लेकिन अगर हम थायराइड की दवाइयाँ पहले से ही ले रहे हैं तो अश्वगंधा हमें नुकसान कर सकता है चाहे वह हमारा हाइपर थायराइड हो या हाइपो थायराइड हो।

अश्वगंधा का इस्तेमाल थाइरोइड ग्रंथि को उत्तेजित करने के लिए किया जा सकता है। पतंजलि अश्वगंधा पाउडर को अगर प्रतिदिन लिया जाए, तो थायराइड हार्मोन के स्राव में वृद्धि होगी।

अश्वगंधा पाउडर
अश्वगंधा पाउडर

पतंजलि अश्वगंधा पाउडर फ़ायदेमंद है शरीर के मेटाबालिज्म को कंट्रोल करने में

पतंजलि अश्वगंधा पाउडर में बहुत सारे एंटीऑक्सीडेंट पाए जाते हैं। जो शरीर के मेटाबाॅलिज्म को बढ़ाने में मददगार है।

पतंजलि अश्वगंधा पाउडर यौन शक्ति बढ़ाने में मददगार

पतंजलि अश्वगंधा पाउडर में यौनांगो की मांसपेशियों को सक्रिय करने का गुण पाया जाता है। यह मस्तिष्क और मांसपेशियों के बीच तालमेल बनाने में कारगर है पतंजलि अश्वगंधा पाउडर शरीर की चर्बी को दूर कर शरीर को ऊर्जावान बनाती है। पतंजलि अश्वगंधा पाउडर में पाये जाने वाले पोषक तत्व वीर्य की क्वालिटी बढाने में मददगार होते हैं।

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पतंजलि अश्वगंधा पाउडर मोतियाबिंद रोग में लाभदायक

पतंजलि अश्वगंधा पाउडर में एंटीऑक्सीडेंट और साइटोप्रोटेक्टि पाए जाते हैं। जो मोतियाबिंद के असर को कम करने में उपयोगी होते हैं।

पतंजलि अश्वगंधा पाउडर उपयोगी है त्वचा की बीमारियों में

पतंजलि अश्वगंधा पाउडर में उच्च स्तर के एंटीऑक्सीडेंट होते हैं जो त्वचा को पोषण प्रदान करते हैं यह एंटीऑक्सीडेंट त्वचा में नमी बनाए रखते हैं और त्वचा के कोलेजन स्तर की रिपेयर भी करते हैं।

पतंजलि अश्वगंधा पाउडर चेहरे के काले दाग धब्बों व झाइयों को दूर करता है। अश्वगंधा सोरायसिस जैसे रोग को भी दूर करने में मददगार है। इस रोग में शरीर की त्वचा रूखी और बेजान हो जाती है।अश्वगंधा कोलेजन स्तर को बढ़ावा देकर त्वचा की नमी व चिकनाहट वापस लाती है

पतंजलि अश्वगंधा पाउडर उपयोगी है बालों की समस्याओं में

अश्वगंधा में पाये जाने वाले पोषक तत्व कोर्टिसोल के स्तर को कम करके बालों के झडने को रोकता है। अश्वगंधा के गुणकारी तत्व बालों में मेलेनिन की हानि को रोक कर समय से पहले बालों के ग्रे होने को रोकता है। अश्वगंधा में पाये जाने वाला टाइयरोसीन है। जो एक एमिनो एसिड है और शरीर में मेलेनिन के उत्पादन को बढाता है। मेलेनिन को बढा कर बालों को काला बनाता है।

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पतंजलि अश्वगंधा पाउडर उपयोगी है ह्रदय रोगों में

पतंजलि अश्वगंधा पाउडर में सूजन कम करने के गुण पाये जाते हैं। पतंजलि अश्वगंधा पाउडर में पाये जाने वाले एंटीऑक्सीडेंट में सूजन व तनाव कम करने के गुण पाये जाते हैं। पतंजलि अश्वगंधा पाउडर खाने से कोलेस्ट्रॉल और ट्राइग्लिसराइड की मात्रा कम होती है। जिसके कारण ह्रदय रोग होने की संभावना कम हो जाती है। पतंजलि अश्वगंधा पाउडर हृदय की मांसपेशियों को मज़बूत बनाता है।

पतंजलि अश्वगंधा पाउडर कारगर है कैंसर में

पतंजलि अश्वगंधा पाउडर में पाये जाने वाले पोषक तत्व ट्यूमर सेल्स को नष्ट करने में कारगर होते हैं। पतंजलि अश्वगंधा पाउडर खाने से एपोप्टोसिस बढ़ता है जो कैंसर सेल्स को नष्ट करने में मददगार साबित हुआ है।

पतंजलि अश्वगंधा पाउडर उपयोगी है तनाव चिंता और अवसाद दूर करने में

अश्वगंधा का प्रयोग व्यक्ति को मानसिक रुप से शांत कर देता है जिसके कारण व्यक्ति की चिंता दूर हो जाती है। पतंजलि अश्वगंधा पाउडर व्यक्ति को मानसिक रूप से प्रसन्नचित रखता है। जिसके कारण व्यक्ति को मानसिक अवसाद नही होता।

स्टेमिना और सेक्सुअल टाइमिंग बढ़ाने के लिए पतंजलि का अश्वगंधा कैप्सूल बहुत लाभकारी माना जाता है। अश्वगंधा कैप्सूल को खाना खाने के बाद या रात में सोने से पहले दूध के साथ लिया जा सकता है। दिन में दो बार कैप्सूल को उपयोग में लेना चाहिए। 

हिमालय अश्वगंधा टेबलेट का उपयोग दिन में किसी भी समय किया जा सकता है इसको पानी के साथ लिया जा सकता है खाना खाने के बाद। और रात में सोने से पहले गुनगुने दूध के साथ भी इसका उपयोग किया जा सकता है। 

डाबर अश्वगंधा टेबलेट एक नेचुरल तरीके से बना उत्पाद है जिसमें अश्वगंधा मिला हुआ होता है। जो की तनाव, इम्यूनिटी और स्टेमिना से जुड़ी समस्याओं को दूर करता है। इसके उपयोग से सेक्स से जुड़ी समस्याएं जैसे काम टाइमिंग, थकान जैसी समस्याएं भी दूर होती है। 

अश्वगंधा टेबलेट प्राकृतिक उत्पादों से मिकर बनी होती है इसलिए इससे किसी भी तरह का कोई साइड इफेक्ट होने का खतरा नहीं रहता है। उसको दिन के समय खाना खाने के बाद और रात में सोने से पहले उपयोग में लिया जा सकता है। 

अश्वगंधा टेबलेट को उपयोग में लेने से बहुत सी समस्याओं से राहत पायी जा सकती है। यह तनाव, नींद में कमी और स्टेमिना से जुड़ी समस्याओ में काफी कारगर होता है। इसके उपयोग से स्टेमिना में वृद्धि होती है जिससे पूरे दिनभर थकान महसूस नहीं होती है। 

अश्वगंधा प्राय चूर्ण या टेबलेट के रूप में बाजार में उपलब्ध है। चूर्ण को आप दूध, घी, पानी किसी में मिक्स कर के ले सकते हो और टेबलेट को भी दूध या पानी के साथ लिया जा सकता है। सुबह और शाम दिन में दो टेबलेट का सेवन करना चाहिए। और चूर्ण को एक छोटा चमच जितना ही। 

अश्वगंधा सिर्फ पुरुषों के लिए ही नहीं अपितु महिलाओं के लिए भी लाभकारी होता है। महिलाओं में यह सेक्सुअल इन्फेक्शन को दूर करता है और घुटनों में दर्द, थायराइड की समस्या, और जनन क्षमता की समस्या को भी दूर करता है। यह एंटी ऐजिंग प्रोडक्ट के रूप में उपयोगी है। 

यदि आपको स्टेमिना में कमी, तनाव, थकान या सेक्स से जुड़ी कोई समस्या है तो आप हिमालय अश्वगंधा टेबलेट का प्रयोग कर सकते है। आप नियमित रूप से तीन या चार महिने तक इसका प्रयोग  करते है तो आपको इसके सकारात्मक प्रभाव देखने को मिल जाएंगे।  

अश्वगंधा और मिश्री को मिक्स कर के खाने से न सिर्फ स्वाद में फर्क पड़ता है अपितु स्वास्थ्य के लिए भी बहुत ज्यादा लाभकारी है। यह शुगर को नियंत्रित करता है और घुटनों के दर्द और सेक्सुअल समस्याओं को भी दूर करता है। स्टेमिना में वृद्धि और तनाव को दूर करने में इसकी महत्वपूर्ण भूमिका है। 

अश्वगंधा को खाली पेट लेने की अपेक्षा खाना खाने के बाद प्रयोग में किया जाना चाहिए। चूंकि जब हम खाना खाने के बाद इसका उपयोग करते है तो खाने में मिले हुए तत्व अश्वगंधा के गुणकारी तत्वों को अवशोषित कर शरीर के हर हिस्से तक पहुंचाते है। दूध के साथ भी इसका प्रयोग किया जा सकता है।  

अश्वगंधा पुरुषों और महिलाओं दोनों के लिए लाभकारी है लेकिन यह पुरुषों में विशेष तय सेक्सुअल समस्याओं को जड़ से दूर करता है। जैसे पुरुषों में नपुसंकता, शुक्राणुओं की कमी, और सेक्स टाइमिंग में कमी जैसी समस्याओं के लिए यह रामबाण साबित होता है। 

अश्वगंधा का अधिक मात्रा में उपयोग करने से आपको इसके नकारात्मक प्रभाव देखने को मिल सकते है। अधिक उपयोग से यह शरीर में गर्मी पैदा करता है जिससे पेट की समस्या, मुहँ में छालों की समस्या, अपच जैसी समस्याएं देखने को मिल सकती है। अतः अधिक मात्रा में उपयोग से बचना चाहिए। 

अश्वगंधा का अधिक इस्तेमाल पेट के लिए हानिकारक हो सकता है। इसका उपयोग करने से डायरिया जैसी समस्या पैदा हो सकती है। इसलिए इसके इस्तेमाल से पहले आप डॉक्टर की सलाह लें उसके बाद ही इसका सेवन करें। और जिनको ब्लड प्रेशर की समस्या हो उनको अश्वगंधा के प्रयोग से बचना चाहिए। 

धागे वाली मिश्री के फायदे है अनेक जानकर रह जाएंगे आप भी दंग

धागे वाली मिश्री के फायदे

 हम सभी मिश्री के स्वाद और उपयोग से परिचित हैं, लेकिन क्या आप जानते हैं कि धागे वाली मिश्री (या जिसे धागा मिश्री, dhaage wali mishri और dhage wali misri भी कहा जाता है) सिर्फ स्वादिष्ट ही नहीं बल्कि स्वास्थ्य के लिए भी बेहद फायदेमंद होती है? आज हम आपको बताएंगे इसके ऐसे फायदे जो शायद ही आपने पहले सुने होंगे।

धागे वाली मिश्री क्या होती है?

धागे वाली मिश्री एक प्रकार की शुद्ध मिश्री होती है, जो सफेद धागे पर क्रिस्टल के रूप में जमती है। इसे बनाने की प्रक्रिया पारंपरिक और प्राकृतिक होती है, इसलिए इसमें किसी तरह का रसायन नहीं होता।

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धागे वाली मिश्री के प्रमुख फायदे

1. ऊर्जा का प्राकृतिक स्रोत

dhaage wali mishri शरीर में ताजगी और ऊर्जा लाने का काम करती है। यह थकावट दूर करने और मानसिक स्पष्टता बढ़ाने में मददगार है।

2. पाचन में सहायक

भोजन के बाद मिश्री और सौंफ खाने की परंपरा का वैज्ञानिक कारण है। यह पाचन क्रिया को सक्रिय करती है और गैस की समस्या को कम करती है।

3. गले की खराश में राहत

धागा मिश्री को इलायची या काली मिर्च के साथ सेवन करने से गले की खराश और खांसी में राहत मिलती है।

4. आंखों की रोशनी बढ़ाने में मददगार

प्राकृतिक मिश्री, विशेष रूप से धागे वाली मिश्री, आंखों की रोशनी को तेज करने में मदद कर सकती है, खासकर बच्चों और वृद्धों के लिए।

5. शारीरिक कमजोरी में लाभदायक

थकान होना
थकान होना

जो लोग लगातार कमजोरी या थकावट महसूस करते हैं, उनके लिए रोजाना एक टुकड़ा dhage wali misri दूध के साथ लेना लाभदायक हो सकता है।

उपयोग करने के तरीके

  • एक टुकड़ा मिश्री सुबह खाली पेट खाएं।
  • मिश्री और सौंफ को मिलाकर भोजन के बाद सेवन करें।
  • मिश्री को दूध या गुनगुने पानी में मिलाकर पी सकते हैं।

ध्यान देने योग्य बातें (नुकसान)

  • मधुमेह (डायबिटीज़) के रोगियों को dhaage wali mishri से परहेज़ करना चाहिए।
  • अधिक मात्रा में सेवन करने से मोटापा और ब्लड शुगर बढ़ सकता है।

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FAQs: अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

Q1: क्या धागे वाली मिश्री और सामान्य मिश्री में अंतर होता है?
हाँ, धागे वाली मिश्री अधिक शुद्ध और प्राकृतिक होती है, जबकि सामान्य मिश्री में शुद्धता की कमी हो सकती है।

Q2: क्या बच्चे भी इसे खा सकते हैं?
बिलकुल, लेकिन सीमित मात्रा में। यह बच्चों के लिए ऊर्जा और स्वाद दोनों देता है।

Q3: इसे दिन में कितनी बार खाना चाहिए?
दिन में एक या दो बार, भोजन के बाद या दूध के साथ सेवन करना पर्याप्त है।

Q4: क्या यह मिश्री वजन बढ़ाती है?
यदि अधिक मात्रा में ली जाए तो वजन बढ़ सकता है, लेकिन सीमित मात्रा में यह स्वास्थ्य के लिए लाभकारी है।

निष्कर्ष

धागे वाली मिश्री, जिसे हम धागा मिश्री, dhaage wali mishri, या dhage wali misri भी कहते हैं, सिर्फ स्वाद में ही नहीं, स्वास्थ्य लाभों में भी बहुत आगे है। यदि आप इसे सही मात्रा में अपने दिनचर्या में शामिल करते हैं, तो यह आपकी सेहत को बेहतर बनाने में मदद कर सकती है।

मिश्री को गन्ने से सीधा नेचुरल तरीके से बनाया जाता है। गन्ने के रस की चासनी को किसी कप में डाल कर उसका क्रिस्टलीकरण किया जाता है। क्रिस्टल बनाते समय बीच में एक धागा रखा जाता है ताकि मिश्री के क्रिस्टल को कप से निकाल सके। 

मिश्री की तासीर ठंडी होती है। प्राय देखा जाता है की गर्मी के कारण मुहँ में छाले होना और गले के काग का लटकना जैसी समस्या देखि जाती है। मिश्री का सेवन गले को ठंडक प्रदान करता है। तासीर में ठंडी होने के कारण ही यह छालों और अन्य समस्या में लाभप्रद होती है।  

धागे वाली मिश्री गन्ने के रस से प्राकृतिक रूप से बनाई जाती है। इसमें किसी तरह का कोई रसायन नहीं डाला जाता है। गन्ने के रस को किसी कप में भर कर बीच में धागा डाला दिया जाता है और रस  को क्रिस्टल फॉर्मेट में परिवर्तित कर दिया जाता है। 

इलायची और मिश्री को बारीक पीस कर मिक्स करके इसका सेवन करने से गले से जुड़ी समस्याओं से छुटकारा पाया जा सकता है। शरीर में गर्मी के कारण छालों की समस्या देखी जाती है इलायची और मिश्री का सेवन छालों की समस्या में भी लाभकारी है।  

ईसबगोल और मिश्री को बारीक पीस कर पानी में घोलकर पीने से पाचन से जुड़े हुए विकार दूर होते है। यह पेट में बनी में अपच, गैस की समस्या, बदहजमी आदि को दूर करता है। यह मिश्रण पेट में ठंडक प्रदान करता है जो की पेट में जलन आदि समस्या को दूर करता है। 

प्राय मिश्री में दो वेरायटी मिलती है जिसमें एक तो बड़े बड़े क्रिस्टल धागे से एक दूसरे से जुड़े होते है और एक प्रकार में क्रिस्टल के बीच में धागा नहीं होता है। देखा जाए तो दोनों ही एक रूप हे बस बनाने की विधि में थोड़ा फर्क रहता है।  

प्राय लोग मिश्री और चीनी को एक ही रूप में देखते है लेकिन दोनों ही अलग अलग प्रकृति के होते है। मिश्री में चीनी की अपेक्षा सुगर की मात्रा कम होती है। मिश्री के सेवन से वजन नियंत्रित रहता है। और शुगर भी संतुलित रहता है।  

मिश्री के प्रकारों में धागे वाली मिश्री को अच्छा माना जाता है क्योंकि वो आज भी पुराने तौर तरीकों से बनती है। इसका निर्माण आज भी घरेलू औधयोगिक इकाइयों में होता है जिससे इसमें किसी तरह के केमिकल का प्रयोग नहीं होता है।  

प्राय चीनी में शुगर की मात्रा बहुत अधिक होती है क्योंकि चीनी को केमिकल मिक्स कर के बनाया जाता है। परन्तु मिश्री का निर्माण नेचुरल तरीके से किया जाता है। इसलिए मिश्री को खाने से शुगर लेवल बेलेन्स रहता है। केलेस्ट्रॉल की मात्रा भी नियंत्रित रहती है।    

मिश्री को हम चीनी के विकल्प के रूप में खा सकते है। चीनी की अपेक्षा मिश्री थोड़ी कम मीठी होती है परन्तु लाभकारी होती है। देखा जाता है की कई लोग चाय में चीनी की बजाय मिश्री का प्रयोग करते है। मिश्री को छालों की समस्या में भी खाया जा सकता है। 

मिश्री सेहत के लिए अच्छी मानी जाती है। आजकल हर मीठी चीज में चीनी का उपयोग होता है जिसमें शुगर की मात्रा अधिक होती है। जबकि मिश्री में चीनी की अपेक्षा शुगर की मात्रा कम होती है। अतः मिश्री के सेवन से मधुमेह जैसी समस्या को काफी हद तक कम किया जा सकता है। 

धागा मिश्री में धागे का प्रयोग इसलिए किया जाता है की जब मिश्री को बनाया जाता है तो लंबे साँचो का उपयोग किया जाता है। उन्ही साँचो में से मिश्री के क्रिस्टल को खींच के निकाल सके इसी लिए बीच में धागा डाला जाता है। अतः इसे खाने के उद्देश्य से नहीं डाला जाता है। 

खांड को गन्ने से रस से नेचुरल तरीकों से बनाया जाता है। इसमें किसी तरह का कोई केमिकल उपयोग में नहीं लिया जाता है। गन्ने के रस को गरम कर के उसमें देशी घी मिलाकर अच्छी तरह घुटाई की जाती है। इसमें किसी तरह के अनावश्यक केमिकल का प्रयोग नहीं होता है।  

जानिए क्या है मुनक्का के बीज के फायदे आपकी सेहत के लिए

मुनक्का के बीज खाने से फायदा

आज हम आपको मुनक्का के बीज के फायदे के बारे में बताएंगे। मुनक्का के बीज में प्रचुर मात्रा में पोषक तत्व जैसे की मेग्नीशियम, सोडियम, पोटेशियम, जस्ता, फास्फोरस, मैगनीज, आयरन और कैल्शियम आदि पाए जाते हैं। ये पोषक तत्व हमारे शरीर के लिए बहुत लाभदायक और फायदेमंद होते हैं। दिखने में मुनक्का बहुत छोटी होती है पर बहुत ही गुणकारी होती है। मुनक्का में वसा की मात्रा ना के बराबर होती है। मुनक्का खाने में हल्की और सुपाच्य होती है।

मुनक्का को बड़ी दाख (रेजिन) के नाम से भी जाना जाता है। साधारण दाख यानि किशमिश और मुनक्का में इतना फर्क सिर्फ इतना है कि मुनक्का बीज वाली होती है और किशमिश से अधिक गुणकारी होती है। आयुर्वेद में मुनक्का को कई रोगों की सर्वश्रेष्ठ औषधि माना गया है।

मुनक्का के बीज के फायदे

मुनक्का के बीज से आपको यह सब फायदे मिलते हैं जिनको जानकर आप आश्चर्यचकित हो जाएंगे।

नोट – यदि आपको किसी भी प्रकार की कोई बीमारी है तो मुनक्का के बीज का सेवन करने से पहले अपने नजदीकी डॉक्टर से सलाह जरूर से लें।

आंखों के लिए उपयोगी

मुनक्का के बीज में प्रचुर मात्रा में विटामिन A पाया जाता है जो हमारी आंखों के लिए बहुत फायदेमंद होता है। मुनक्का में बीटा कैरोटीन पाया जाता है। विटामिन A और बीटा कैरोटीन से हमारी आंखों की रोशनी बढ़ती है। 5-7 मुनक्का को रात में पानी में भिगो कर रख दें और सुबह उठकर इसका सेवन करे।

विटामिन A
विटामिन A

त्वचा के लिए उपयोगी

मुनक्का के बीज में प्रचुर मात्रा में एंटी ऑक्सीडेंट तत्व पाया जाता है जो हमारे शरीर की त्वचा पर होने वाले नुकसान से बचाता हैं और मुनक्का के बीजों का रोजाना सेवन करने से आपकी हमारी त्वचा स्वस्थ एवं चमकदार बन जाती है। रात में मुनक्के को पानी में भिगो कर रख दे। सुबह इस पानी को भी पिए। मुनक्के का पानी हमारे शरीर में मौजूद टॉक्सिन बाहर निकालकर शरीर को डिटॉक्स करता है, जिससे हमारी त्वचा चमकदार बनती है।

यौन दुर्बलता को दूर करने में सहायक

मुनक्का के बीज में प्रचुर मात्रा में एमिनो एसिड पाया जाता है जो हमारे शरीर में यौन दुर्बलता को दूर करने में सहायता प्रदान करता है।

हड्डियों को मजबूत बनाने में सहायक

मुनक्का के बीज में प्रचुर मात्रा में पोटेशियम व कैल्शियम पाया जाता है। मुनक्का के बीज हमारी हड्डियों को और मजबूत बनाता है। कैल्शियम की कमी के कारण हमारे शरीर में जो रोग होता है वह हमारी हड्डियों को कमजोर व नाजुक बना देता है।

बालों को स्वस्थ रखने में सहायक

मुनक्का के बीज में प्रचुर मात्रा में आयरन पाया जाता है जो हमारे बालों के लिए बहुत जरूरी होता है क्योंकि आयरन की कमी के कारण हमारे बाल झड़ने लगते हैं और बालो से संबंधित रोग होने लग जाते हैं।

बुखार और जुकाम को ठीक करने में सहायक

मुनक्का के बीज में प्रचुर मात्रा में फिनोलिक पायथोन्यूट्रीएंट और जर्मिशिडल के साथ साथ एंटीओक्सीडेंट जैसे तत्व पाए जाते हैं जो हमारे शरीर में बुखार व जुकाम जैसी बीमारियों से छुटकारा पाने में सहायता प्रदान करते है।

खून की कमी को दूर करने में सहायक

मुनक्का के बीज में प्रचुर मात्रा में कॉपर पाया जाता है जो हमारे शरीर में लाल रक्त कोशिकाओं के निर्माण में सहायता प्रदान करता है जिसके कारण हमारे शरीर में खून की बढ़ोतरी होने लगती है।

कब्ज से राहत दिलाने में सहायक

मुनक्का के बीज में प्रचुर मात्रा में फाइबर, कैल्शियम और एंटी-ऑक्सीडेंट जैसे तत्व पाए जाते हैं ये तत्व हमारे पेट के अंदर जाकर वहाँ का सारा पानी सोख लेते हैं जिसके कारण कब्ज जैसी गंभीर बीमारी से छुटकारा मिलता है।

ह्रदय के लिए फायदेमंद

मुनक्का के बीज में प्रचुर मात्रा मे पोटेशियम पाया जाता है जो हमारे शरीर में रक्तचाप को कम करता है पोटेशियम हमारे शरीर में रक्तचाप को कम करने के साथ-साथ इम्यूनिटी को भी बढ़ाता है जिसके कारण हृदय संबंधित रोगों से छुटकारा मिलता है।

दांतो को स्वस्थ रखने में सहायक

मुनक्का के बीज में प्रचुर मात्रा में ओलेनोलिक नामक एसिड पाया जाता है जो हमारे शरीर में जाकर दांतों को सुरक्षित लगता है और इसके साथ-साथ हमारे दांतो को मजबूत रखने में भी सहायता प्रदान करता है।

बच्चों के स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद

मुनक्का के बीज बच्चों के लिए बहुत फायदेमंद होते हैं। बहुत बार देखा जाता है कि बच्चे महीने में 5 से 6 बार बीमार पड़ जाते हैं।  मुनक्का के बीजों का सेवन करने से उन रोगों से काफी हद तक छुटकारा मिल सकता है।

गले के संबंधित रोगों को दूर करने में सहायक

मुनक्का के बीज में प्रचुर मात्रा में एंटी बैक्टीरिया नामक तत्व पाए जाते है जो हमारे गले के लिए बहुत फायदेमंद होते है क्योंकि यह हमारे गले में होने वाली खराश व खुजली जैसी बीमारियों को ठीक करने में सहायता प्रदान करता है।

यदि आप रोजाना मुनक्का के बीजों का सेवन करते हैं या रोजाना मुनक्का के बीजों को खाते हैं तो आपको यह सब फायदे मिलेंगे।

यदि आपका मुनक्का के बीजों से संबंधित कोई भी सवाल है तो आप हमें कमेंट के माध्यम से पूछ सकते हैं।  हम आपके कमेंट का जल्द से जल्द जवाब देने का प्रयास करेंगे ।

मुनक्का के बीजों की यह जानकारी अपने दोस्तों और अपनी सोशल मीडिया पर जरूर शेयर करें ताकि आपके दोस्तों को भी मुनक्का के बीजों के फायदों के बारे में पता चल सके।

सामान्य प्रश्न

क्या मुनक्का के बीज खाने चाहिए?

मुनक्का के बीजों का सेवन करना चाहिए ।मुनक्का के बीजों में प्रचुर मात्रा में कॉपर पाया जाता है जो शरीर में खून की कमी का दूर करता है। मुनक्का के बीजों में प्रचुर मात्रा में फाइबर और एंटी ऑक्सीडेंट पाए जाते हैं जो कब्ज की समस्या को दूर करते हैं, मुनक्का के बीज में पोटेशियम पाया जाता है जो रक्तचाप को नियंत्रित करता है , यह हृदय रोगों में भी बहुत लाभदायक है। मुनक्का के बीजों का प्रयोग फायदेमंद तो है परंतु अधिक मात्रा में मुनक्का के बीजों का सेवन करने से हमारे शरीर में मोटापा बढ़ सकता है और मधुमेह की समस्या भी हो सकती हैं। मुनक्का के बीजों में पाए जाने वाले प्राकृतिक तत्वों को हमारा शरीर आसानी से पचा नहीं सकता मुझे अधिक सेवन से हमें पेट फूलना उल्टी और गैस की समस्या भी होती है ।

मुनक्का का सेवन कैसे करना चाहिए?

मुनक्का हमारे शरीर के लिए बहुत लाभदायक है। मुनक्का की तासीर गर्म होती हैं इसलिए अधिकांश इसका सेवन सर्दियों में किया जाता है। मुनक्का का सेवन करने से पहले उसे रात भर पानी में भिगोकर रखना चाहिए और सुबह खाली पेट इसका सेवन करना चाहिए । मुनक्का का सेवन गर्मियों में भी किया जा सकता है परंतु गर्मियों में इसका सेवन बहुत ही सीमित मात्रा में करना चाहिए । आप यदि चाहे तो सर्दियों में रात में भी मुनक्का का सेवन कर सकते हैं इसके मुनक्का को चार से पांच घंटे पानी में भिगो कर रखें और उसके बाद में दूध के साथ इन भीगे हुए मुनक्का का सेवन करें। यह शरीर में खून की कमी को दूर करने का रामबाण उपाय है।

खाली पेट मुनक्का खाने से क्या क्या बीमारी खत्म होगी?

रोजाना सुबह खाली पेट भीगे मुनक्का खाना बहुत लाभदायक होता है। मुनक्का में कैल्शियम पाया जाता है जो हड्डियों को मजबूत करता है । मुनक्का का सेवन शरीर में रक्त की कमी को दूर करता है । मुनक्का में फाइबर और एंटी ऑक्सीडेंट पाए जाते हैं जो कब्ज की समस्या को दूर करते हैं। मुनक्का में विटामिन ए और बीटा कैरोटीन पाया जाता है जो नेत्र ज्योति को बढ़ाता है । मोटापे की समस्या से ग्रसित लोगों के लिए मुनक्का बहुत ही लाभदायक होता है। खाली पेट भीगे मुनक्का खाने से त्वचा चमकदार होती है। ह्रदय रोग में भी है लाभदायक है और यह उच्च रक्तचाप की समस्या को भी दूर करता है।

मुनक्का और किशमिश में कौन ज्यादा फायदेमंद है?

मुनक्का और किशमिश दोनों ही अंगूर से बनते हैं और बहुत लाभदायक होते हैं परंतु यदि दोनों के बीच तुलना की जाए तो आयुर्वेद के अनुसार मुनक्का अधिक फायदेमंद होता है क्योंकि इसमें पाए जाने वाले पोषक तत्व शरीर के लगभग सभी अंगों के लिए लाभदायक होते हैं । मुनक्का में किशमिश की तुलना में आयरन और कैल्शियम ज्यादा होता है जो शरीर में रक्त की कमी को दूर करता है। किशमिश में अम्लीयता पाई जाती है जो एसिडिटी की समस्या को बढ़ावा देती है वहीं मुनक्का में फाइबर पाया जाता है जो पेट की समस्याओं को दूर करता है । पोषक तत्वों की बात की जाए तो मुनक्का में किशमिश की तुलना में अधिक पोषक तत्व पाए जाते हैं इसलिए इसे ज्यादा फायदेमंद माना जाता है ।

दूध में मुनक्का खाने से क्या होता है?

दूध के साथ मुनक्के का सेवन करने से कई लाभ हैं । रोजाना रात को दूध के साथ मुनक्के को उबालकर पीने से शरीर में रक्त की कमी दूर होती है। दूध के साथ मुनक्के का सेवन करने से नींद अच्छी आती है, यह कब्ज की समस्या को भी दूर करता है । यदि सर्दी जुकाम की समस्या से पीड़ित है तो दूध के साथ मुनक्का को उबालकर उसका सेवन करें यह सर्दी जुकाम को खत्म कर देगा । दूध के साथ मुनक्के का सेवन गठिया रोग के लिए भी लाभदायक होता है इससे हड्डियां भी मजबूत होती हैं और यह शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को भी बढ़ाता है ।

मुनक्का और किशमिश में क्या अंतर है?

मुनक्का और किशमिश दोनों अंगूर से बनते हैं फिर भी दोनों के गुणों और आकार में काफी अंतर होता है । सामान्य रूप से किशमिश बीज रहित और पीले हरे रंग के साथ छोटी होती है। दूसरी ओर मुनक्का बड़ा, बीज के साथ भूरे या हल्‍के काले रंग का होता है। किशमिश छोटे अंगूरों को सुखाकर तैयार की जाती है जबकि मुनक्का लाल रंग के बड़े अंगूरों को सुखाकर तैयार की जाती है इसमें बीज भी होता है ।

हिमालय अश्वगंधा टेबलेट के फायदे और नुकसान जो जानकर रह जाएंगे आप दंग

हिमालय अश्वगंधा टेबलेट के फायदे

हिमालय अश्वगंधा टेबलेट के फायदे

हिमालय अश्वगंधा टेबलेट के फायदे यूं तो बहुत है। यह स्किन के लिए बालों के लिए और शरीर के लिए कई और अन्य प्रकार से भी बहुत फायदेमंद है। आज के इस लेख में हम जानेंगे कि अश्वगंधा टेबलेट के फायदे क्या क्या है।

हिमालय अश्वगंधा टैबलेट लाभदायक है थायराइड की बीमारी में ( himalaya medicine for thyroid)

हिमालय अश्वगंधा टेबलेट का सेवन करने से थायराइड कंट्रोल होता है और मेटाबॉलिज्म इन ठीक होता है लेकिन अगर हम थायराइड की दवाइयाँ पहले से ही ले रहे हैं तो हिमालय अश्वगंधा टैबलेट हमें नुकसान कर सकता है चाहे वह हमारा हाइपर थायराइड हो या हाइपो थायराइड हो।

हिमालय अश्वगंधा टैबलेट का इस्तेमाल थाइरोइड ग्रंथि को उत्तेजित करने के लिए किया जा सकता है। थायरॉयड ग्रंथि पर हिमालय अश्वगंधा टैबलेट के प्रभाव इसकी जड़ों का एक्सट्रैक्ट, अगर प्रतिदिन लिया जाए, तो थायराइड हार्मोन के स्राव में वृद्धि होगी।

हिमालय अश्वगंधा के फायदे हमारे शरीर के मेटाबालिज्म को कंट्रोल करने में

हिमालय अश्वगंधा टैबलेट में बहुत सारे एंटीऑक्सीडेंट पाए जाते हैं जो शरीर के मेटाबाॅलिज्म को बढ़ाने में मददगार है।

हिमालय अश्वगंधा टैबलेट यौन शक्ति बढ़ाने में मददगार

हिमालय अश्वगंधा टैबलेट में यौनांगो की मांसपेशियों को सक्रिय करने का गुण पाया जाता है। यह मस्तिष्क और मांसपेशियों के बीच तालमेल बनाने में कारगर है हिमालय अश्वगंधा टैबलेट शरीर की चर्बी को दूर कर शरीर को ऊर्जावान बनाती है। हिमालय अश्वगंधा टैबलेट में पाये जाने वाले पोषक तत्व वीर्य की क्वालिटी बढाने में मददगार होते हैं।

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मोतियाबिंद रोग में लाभदायक

हिमालय अश्वगंधा टैबलेट के एंटीऑक्सीडेंट और साइटोप्रोटेक्टि पाए जाते हैं। जो मोतियाबिंद के असर को कम करने में उपयोगी होते हैं।

हिमालय अश्वगंधा टैबलेट उपयोगी है त्वचा की बीमारियों में

हिमालय अश्वगंधा टैबलेट में उच्च स्तर के एंटीऑक्सीडेंट होते हैं जो त्वचा को पोषण प्रदान करते हैं यह एंटीऑक्सीडेंट त्वचा में नमी बनाए रखते हैं और त्वचा के कोलेजन स्तर की रिपेयर भी करते हैं।

हिमालय अश्वगंधा टैबलेट चेहरे के काले दाग धब्बोंझाइयों को दूर करती है। हिमालय अश्वगंधा टैबलेट सोरायसिस जैसे रोग को भी दूर करने में मददगार है। इस रोग में शरीर की त्वचा रूखी और बेजान हो जाती है। हिमालय अश्वगंधा टैबलेट कोलेजन स्तर को बढ़ावा देकर त्वचा की नमी व चिकनाहट वापस लाती है|

झाइयाँ
झाइयाँ

हिमालय अश्वगंधा टैबलेट उपयोगी है बालों की समस्याओं में

हिमालय अश्वगंधा टैबलेट में पाये जाने वाले पोषक तत्व कोर्टिसोल के स्तर को कम करके बालों के झडने को रोकता है। हिमालय अश्वगंधा टैबलेट के गुणकारी तत्व बालों में मेलेनिन की हानि को कर समय से पहले बालों के ग्रे होने को रोकता है। हिमालय अश्वगंधा टैबलेट में टाइयरोसीन पाया जाता है। जो एक एमिनो एसिड है और शरीर में मेलेनिन के उत्पादन को बढाता है। मेलेनिन को बढा कर बालों को काला बनाता है।

हिमालय अश्वगंधा टैबलेट के फायदे ह्रदय रोगों में

अश्वगंधा, में सूजन कम करने के गुण,पाये जाते हैं। हिमालय अश्वगंधा टैबलेट में पाये जाने वाले एंटीऑक्सीडेंट में सूजन व तनाव कम करने के गुण पाये जाते हैं।

हिमालय अश्वगंधा टैबलेट खाने से कोलेस्ट्रॉल और ट्राइग्लिसराइड की मात्रा कम होती है।जिसके कारण ह्रदय रोग होने की संभावना कम हो जाती है। हिमालय अश्वगंधा टैबलेट हृदय की मांसपेशियों को मज़बूत बनता है।

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हिमालय अश्वगंधा टैबलेट कारगर है कैंसर में

हिमालय अश्वगंधा टैबलेट में पाये जाने वाले पोषक तत्व ट्यूमर सेल्स को नष्ट करने में कारगर होते हैं। हिमालय अश्वगंधा टैबलेट खाने से एपोप्टोसिस बढ़ता है जो कैंसर सेल्स को नष्ट करने में मददगार साबित भावी है

तनाव चिंता और अवसाद दूर करने में

हिमालय अश्वगंधा टैबलेट का प्रयोग व्यक्ति को मानसिक रुप से शांत कर देता है जिसके कारण व्यक्ति की चिंता दूर हो जाती है।हिमालय अश्वगंधा टैबलेट व्यक्ति को मानसिक रूप से प्रसन्नचित रखती है। जिसके कारण व्यक्ति को मानसिक अवसाद नही होता।

हिमालय अश्वगंधा टैबलेट है एन्टीबैक्टीरियल

हिमालय अश्वगंधा टैबलेट में जीवाणु रोधी गुण हैं। हिमालय अश्वगंधा टैबलेट घाव को पकने नही देती। घाव में पीसकर हिमालय अश्वगंधा टैबलेट लगाने से घाव जल्दी भर जाते हैं।

हिमालय अश्वगंधा टैबलेट मूत्रजनन, जठरांत्र और श्वसन तंत्र के संक्रमण में बहुत उपयोगी है। हिमालय अश्वगंधा टैबलेट इम्यून सिस्टम को बेहतर बनाता है। हिमालय अश्वगंधा टैबलेट का सेवन लाल रक्त कणिकाओं व सफेद रक्त कणिकाओं में वृद्धि करता है।

हिमालय अश्वगंधा टेबलेट रोकती है बुढ़ापे को

हिमालय हिमालय अश्वगंधा टैबलेट के सेवन से यौवनावस्था कायम रहती है और बुढापा नहीं आता। हिमालय अश्वगंधा टेबलेट शुक्राणुवर्धक एवं शक्ति प्रदान करने वाली है। हिमालय अश्वगंधा टैबलेट के सेवन से शरीर को ताकत मिलती है और स्पर्म बेहतर होते हैं।

हिमालय अश्वगंधा टेबलेट के सेवन से मजबूत होता है तंत्रिका तंत्र

हिमालय अश्वगंधा टेबलेट के सेवन से तंत्रिका तंत्र मजबूत होता है और मष्तिष्क मजबूत होता है। मस्तिष्क रीढ की हड्डी द्वारा जननांगों की मांसपेशियों को संदेश भेज कर संदेश का संचालन करता है और जननांगों की मांसपेशियों को शक्ति मिलती है।

हिमालय अश्वगंधा टेबलेट में पौष्टिक तत्व पाये जाते हैं जो शरीर के तनाव व चिंता को दूर करते हैं। हिमालय अश्वगंधा टैबलेट टेबलेट में पाये जाने वाले आयुर्वेदिक तत्व अनिद्रा, मानसिक तनाव,धकान व स्वप्न दोष को दूर करने में मददगार हैं।

स्टेमिना और सेक्सुअल टाइमिंग बढ़ाने के लिए पतंजलि का अश्वगंधा कैप्सूल बहुत लाभकारी माना जाता है। अश्वगंधा कैप्सूल को खाना खाने के बाद या रात में सोने से पहले दूध के साथ लिया जा सकता है। दिन में दो बार कैप्सूल को उपयोग में लेना चाहिए। 

हिमालय अश्वगंधा टेबलेट का उपयोग दिन में किसी भी समय किया जा सकता है इसको पानी के साथ लिया जा सकता है खाना खाने के बाद। और रात में सोने से पहले गुनगुने दूध के साथ भी इसका उपयोग किया जा सकता है। 

डाबर अश्वगंधा टेबलेट एक नेचुरल तरीके से बना उत्पाद है जिसमें अश्वगंधा मिला हुआ होता है। जो की तनाव, इम्यूनिटी और स्टेमिना से जुड़ी समस्याओं को दूर करता है। इसके उपयोग से सेक्स से जुड़ी समस्याएं जैसे काम टाइमिंग, थकान जैसी समस्याएं भी दूर होती है। 

अश्वगंधा टेबलेट प्राकृतिक उत्पादों से मिकर बनी होती है इसलिए इससे किसी भी तरह का कोई साइड इफेक्ट होने का खतरा नहीं रहता है। उसको दिन के समय खाना खाने के बाद और रात में सोने से पहले उपयोग में लिया जा सकता है। 

अश्वगंधा टेबलेट को उपयोग में लेने से बहुत सी समस्याओं से राहत पायी जा सकती है। यह तनाव, नींद में कमी और स्टेमिना से जुड़ी समस्याओ में काफी कारगर होता है। इसके उपयोग से स्टेमिना में वृद्धि होती है जिससे पूरे दिनभर थकान महसूस नहीं होती है। 

अश्वगंधा प्राय चूर्ण या टेबलेट के रूप में बाजार में उपलब्ध है। चूर्ण को आप दूध, घी, पानी किसी में मिक्स कर के ले सकते हो और टेबलेट को भी दूध या पानी के साथ लिया जा सकता है। सुबह और शाम दिन में दो टेबलेट का सेवन करना चाहिए। और चूर्ण को एक छोटा चमच जितना ही। 

अश्वगंधा सिर्फ पुरुषों के लिए ही नहीं अपितु महिलाओं के लिए भी लाभकारी होता है। महिलाओं में यह सेक्सुअल इन्फेक्शन को दूर करता है और घुटनों में दर्द, थायराइड की समस्या, और जनन क्षमता की समस्या को भी दूर करता है। यह एंटी ऐजिंग प्रोडक्ट के रूप में उपयोगी है। 

यदि आपको स्टेमिना में कमी, तनाव, थकान या सेक्स से जुड़ी कोई समस्या है तो आप हिमालय अश्वगंधा टेबलेट का प्रयोग कर सकते है। आप नियमित रूप से तीन या चार महिने तक इसका प्रयोग  करते है तो आपको इसके सकारात्मक प्रभाव देखने को मिल जाएंगे।  

अश्वगंधा और मिश्री को मिक्स कर के खाने से न सिर्फ स्वाद में फर्क पड़ता है अपितु स्वास्थ्य के लिए भी बहुत ज्यादा लाभकारी है। यह शुगर को नियंत्रित करता है और घुटनों के दर्द और सेक्सुअल समस्याओं को भी दूर करता है। स्टेमिना में वृद्धि और तनाव को दूर करने में इसकी महत्वपूर्ण भूमिका है। 

अश्वगंधा को खाली पेट लेने की अपेक्षा खाना खाने के बाद प्रयोग में किया जाना चाहिए। चूंकि जब हम खाना खाने के बाद इसका उपयोग करते है तो खाने में मिले हुए तत्व अश्वगंधा के गुणकारी तत्वों को अवशोषित कर शरीर के हर हिस्से तक पहुंचाते है। दूध के साथ भी इसका प्रयोग किया जा सकता है।  

अश्वगंधा पुरुषों और महिलाओं दोनों के लिए लाभकारी है लेकिन यह पुरुषों में विशेष तय सेक्सुअल समस्याओं को जड़ से दूर करता है। जैसे पुरुषों में नपुसंकता, शुक्राणुओं की कमी, और सेक्स टाइमिंग में कमी जैसी समस्याओं के लिए यह रामबाण साबित होता है। 

अश्वगंधा का अधिक मात्रा में उपयोग करने से आपको इसके नकारात्मक प्रभाव देखने को मिल सकते है। अधिक उपयोग से यह शरीर में गर्मी पैदा करता है जिससे पेट की समस्या, मुहँ में छालों की समस्या, अपच जैसी समस्याएं देखने को मिल सकती है। अतः अधिक मात्रा में उपयोग से बचना चाहिए। 

अश्वगंधा का अधिक इस्तेमाल पेट के लिए हानिकारक हो सकता है। इसका उपयोग करने से डायरिया जैसी समस्या पैदा हो सकती है। इसलिए इसके इस्तेमाल से पहले आप डॉक्टर की सलाह लें उसके बाद ही इसका सेवन करें। और जिनको ब्लड प्रेशर की समस्या हो उनको अश्वगंधा के प्रयोग से बचना चाहिए। 

कैसे घटाएं वजन सिर्फ कुछ हफ्तों में बिना कुछ किये

कैसे घटाएं वजन सिर्फ कुछ हफ्तों में बिना कुछ किये

वजन को लेकर हर कोई परेशान रहता है और वजन बढ़ना प्रदूषित खानपान तथा अपने शरीर का ध्यान नहीं रखने की वजह से यह समस्या काफी ज्यादा फैल रही है। वजन घटाने के लिए कई प्रकार के उपाय जो आपको अपनी दिनचर्या में लाने होते हैं। वजन घटाने की बात जब आती है। तब आपका वजन पहले से ही ज्यादा या बड़ा हुआ हो कई लोग मोटापा घटाने के लिए कई प्रकार की मेडिसिन तथा आयुर्वेदिक व होम्योपैथिक दवाइयां लेते हैं। लेकिन यह दवाइयां ना के बराबर असर करती है।

मोटापा घटाने के लिए अपने खान-पान तथा शरीर का ध्यान रखना बेहद जरूरी होता है, और इसी आधार पर आप बिना कोई दवाइयां लिए मोटापा घटा सकते हैं।

मोटापा घटाने के लिए अपनी दिनचर्या को मैं कई नियम जोड़ने होते हैं। अपनी दिनचर्या को एक व्यवस्थित तरीके से शुरू करनी होती है और टाइम टाइम पर खान-पान और वर्कआउट बहुत जरूरी है।

सुबह मेंथी का पानी

रात को एक गिलास या किसी बर्तन में थोड़ा पानी लेकर उसमें थोड़ी मेथी डाल दें। इस पानी को रात भर पड़ा रहने दें। और सुबह उठते ही मेथी निकालकर उस मेथी के पानी को पिए मेथी का पानी आपके शरीर के मोटापे को घटाने में एक अहम भूमिका निभाता है।

मेथी में anti-obesity गुण मौजूद होते हैं जो मोटापे को घटाने में अहम भूमिका निभाते हैं, तथा मेथी शरीर में उपस्थित जहरीले पदार्थों को बाहर निकालते हैं और उपापचय क्रिया को बढ़ावा देते हैं ।

ग्रीन टी

सुबह मेथी के पानी का सेवन करने के बाद दूध वाली चाय की बजाए ग्रीन टी पीए। कई बार मोटापे के वजह से भी कई तरह की सेहत संबंधी परेशानियां होने लगती है। जिसमें दिल की बीमारी भी शामिल है।

मोटापे के कारण होने वाली बीमारियों से ग्रीन टी काफी मददगार साबित होती है, और शरीर के वजन को कम करने में भी सहायता प्रदान करती है।

ग्रीन टी
ग्रीन टी

नियमित वर्कआउट

शरीर की वजन को घटाने के लिए आपकी दिनचर्या में वर्कआउट तथा मॉर्निंग वॉक को ऐड करना काफी महत्वपूर्ण होता है। मॉर्निंग वॉक तथा सुबह के वर्कआउट से आपकी शरीर की कैलोरी बर्न होती है। जिससे आपके शरीर से पसीना निकलता है।

पसीने के साथ जहरीले पदार्थ बाहर निकलते हैं, और वजन घटाने में इस प्रकार से वर्कआउट अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

संतुलित आहार

शरीर का वजन कम करने के लिए आपको संतुलित आहार का सेवन करना होता है, और संतुलित आहार भी निश्चित रखें ज्यादा खाना नहीं खाएं। वजन को कम करने के लिए संतुलित आ रहा कम मात्रा में दिन में दो-तीन बार खाएं एक बार में ही भरपेट खाना नहीं खाए।

पैक या सोडा पेय तथा फास्ट फूड से दूर रहे

सोडा पेय कोका कोला तथा अन्य प्रकार की एनर्जी ड्रिंक और फास्ट फूड से दूर रहें इन प्रकार के पदार्थों में कई ऐसे मिनरल्स उपस्थित होते हैं।

जो आपके शरीर के वजन को बढ़ाने में मदद करते हैं और वजन घटाने के लिए इस प्रकार के किसी भी पदार्थ का सेवन ना करें इसके साथ ही ज्यादा ऑयल वाले पदार्थों का सेवन भी ना करें।

रात का डिनर हल्का व 7:30 बजे से पहले करें

रात का डिनर बिल्कुल हल्का लें इसमें सलाद फ्रूट के साथ 1-2 चपाती खाए। पेट भर के रात के समय खाना नहीं खाए, तथा रात का डिनर शाम 7:30 बजे से पहले कर लें ताकि आपका भोजन सोने से पहले अच्छी तरह से पच जाए।

खाना खाने के बाद 1 घंटे से पानी पिये

जब आप खाना खाते हैं तो खाना अच्छी तरह से चबा चबा कर खाए साथ ही खाना खाने के बाद घंटे भर तक पानी नहीं पिये। यदि आप खाना खाने के तुरंत बाद पानी पीते हैं तो ऐसे में आपके शरीर के पाचन तंत्र पर बहुत ज्यादा इफेक्ट पड़ता है, और पाचन तंत्र जल्दी से भोजन को पचा नहीं पाता है।

जब आपके शरीर में पाचन तंत्र जल्दी भोजन नहीं पच आएगा तो आपके शरीर में स्फूर्ति की बजाय आलस आने लगता है  शरीर के मोटापे को कम करने के लिए शरीर में स्फूर्ति होना बहुत जरूरी है जिससे शरीर की कैलोरी खर्च होती रहती है।

आपने क्या सिखा वजन घटाने के बारे में

हम उम्मीद करते है की हमने जो भी आपको वजन घटाने के बारे में बताया है, वो आपको अच्छा लगा होगा, और अगर आपके मन में इससे रिलेटेड कोई सवाल है, तो हमे कमेंट  करके पूछ सकते है।

तो दोस्तों अगर आपको यह जानकारी पसंद आया हो तो प्लीज अपने दोस्तों व अपनी सोशल मीडिया पर जरुर से शेयर करे ताकि आपके दोस्तों को भी इसकी जानकारी मिल सके।

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