क्या है नारियल तेल लगाने के नुकसान, जानकर रह जाएंगे हैरान

नारियल तेल लगाने के नुकसान

हम सभी जानते हैं कि नारियल का तेल हमारे बालों, चेहरे, त्वचा और भोजन में हमें बहुत लाभ पहुंचाता है। ऐसे में नारियल तेल के नुकसान के विषय में तो कोई सोच भी नहीं सकता। ऐसा नहीं है कि नारियल तेल के इतने सारे फायदे ही हैं ढेर सारे फायदों के साथ नारियल तेल के कुछ नुकसान भी है। क्या जानते हैं तो आइए आज जानते हैं नारियल तेल लगाने के नुकसान के बारे में।

नारियल तेल लगाने के नुकसान

नारियल तेल के नुकसान है चेहरे पर एक्ने और मुंहासे

अगर आप नारियल का तेल हफ्ते में एक बार चेहरे को साफ करके रात को सोते समय लगाते हैं और कुछ समय बाद उसे रूई से साफ कर के हटा देते हैं तो यह ना केवल आपके चेहरे को नमी प्रदान करता है बल्कि आपकी त्वचा को पोषण प्रदान करता है। अगर आप रोज रात को सोते समय चेहरे पर नारियल का तेल लगाकर सोते हैं तो आपको कुछ दिनों में मुहासे की समस्या से दो चार होना ही पड़ेगा।

नारियल का तेल काफी गर्म होता है। जिसके कारण आपकी त्वचा पर नमी और गर्मी के कारण मुहासे के वैक्टीरिया का संक्रमण होना शुरु हो जाता है। अगर आप रोज नारियल का तेल चेहरे पर लगाएंगे तो परिस्थितियां बिगड़ती रहेगी और कुछ समय बाद आपकी त्वचा मुहांसों से संक्रमित हो जाएगी।

रूखी त्वचा के लिए नारियल तेल के नुकसान

रूखी त्वचा पर हम नारियल का तेल उसे पोषण प्रदान करने के लिए लगाते हैं। वास्तव में नारियल का तेल रूखी त्वचा के अंदर समा ही नहीं पाता। नारियल का तेल उसके ऊपर एक चिकनी परत बना देता है। जिसके कारण हमारी त्वचा बेरौनक और दागदार लगने लगती है। रूखी त्वचा पर नारियल का तेल चेहरे पर लगाने का कोई फायदा नहीं है।

अगर हम रूखी त्वचा को अंदर से पोषण प्रदान करना चाहते हैं तो हमें कच्चे नारियल को खाना चाहिए। नारियल पानी भी शरीर को अंदर से पोषण प्रदान करता है। रूखी त्वचा पर नारियल का तेल लगाने के बजाय अगर हम नारियल को खाएंगे, नारियल पानी पिएंगे तो वह हमारे त्वचा को अंदर से कांतिवान बनाएगा।

नारियल का तेल बन सकता है एलर्जी का कारण

कुछ लोगों को नारियल का तेल सूट नहीं करता है अगर वे अपनी त्वचा पर नारियल का तेल लगा लेते हैं तो उनकी त्वचा पर खुजली, जलन व दाने होने लगते हैं। उनको वोमिटिंग की प्रॉब्लम होने लगती है। जी मिचलाना, चक्कर आना, एक्जिमा आदि की समस्या होना शुरु जाती है।

अगर आपको एलर्जी की समस्या है। कहीं खुजली जलन और दाने हो रहे हैं। ऐसे में आप नारियल का तेल उस जगह पर लगा लेते हैं । आपको लगता है कि आप नारियल तेल से आपकी खुजली शांत हो जाएगी। ऐसा लेकिन होता नहीं है वहां आपकी खुजली कुछ समय बाद और बढ़ जाती है। वहां पर चकत्ते और पित्ती उछलना शुरू हो जाती है।

नारियल का तेल काफी गर्म प्रकृति का होता है अगर नारियल का तेल खुजली वाली जगह पर लगाया जाता है तो वहां पर संक्रमण और अधिक बढ़ जाता है। जिसके कारण यह आप की एलर्जी को और बढ़ा सकता है।

नारियल का तेल लगाने से हो सकती है माइग्रेन की समस्या

नारियल का तेल अपने आप में एक भीनी खुशबू लिए होता है। कुछ लोग जो हाइपरसेंसेटिव होते हैं। उन के लिए नारियल का तेल सर पर लगाना या चेहरे पर लगाना बहुत हानिकारक हो सकता है। नारियल के तेल की खुशबू से उनके सर में दर्द भी हो सकता है। कुछ लोग नारियल तेल को डिटॉक्सिफिकेशन के लिए इस्तेमाल करते हैं।

कुछ लोग नारियल के तेल को मुंह में कुछ देर लेकर फिर उससे गार्गल कर देते हैं। ऐसे लोगों को भी सर दर्द की समस्या हो सकती है। वास्तव में नारियल के तेल में एक अच्छी खुशबू होती है जोकि वातावरण को खुशनुमा बनाती है। लेकिन जब नारियल तेल पुराना होता है। उसमें कुछ मिलावट होती है तो यह गंध आपके सर पर चढ़ने लगती है। जिसके कारण आपके सर में शुरू में तो हल्का हल्का दर्द होता है लेकिन कुछ समय बाद लगातार रहते लगता है।

अगर इसका उचित समय पर समाधान न किया जाए तो यह माइग्रेन में बदल जाता है। जिसके कारण उल्टी, चक्कर आना, जी मिचलाना आदि समस्याएं शुरू हो जाती है।

नारियल का तेल बढ़ाता है आपके शरीर में संतृप्त वसा की मात्रा

नारियल के तेल में गुड केलोस्ट्रोल बढ़ाने वाले तत्व पाए जाते हैं जोकि एक मानव शरीर के लिए बहुत लाभदायक होते हैं नारियल की तेल के सेवन से जब गुड कोलेस्ट्रॉल का लेवल बढ़ जाता है। शरीर से बैड कौलेस्टॉल अपने आप ही कम होने लगता है। और आपके शरीर को इससे से काफी फायदा होता है।

लेकिन अगर आपके शरीर में गुड कोलेस्ट्रॉल पहले से ही काफी अधिक मात्रा में है इस स्थिति में यह नारियल का तेल आपको फायदा नहीं कर पाता। नारियल के तेल में संतृप्त वसा काफी मात्रा में पाया जाता है। यह संतृप्त वसा आपके शरीर में बैड कौलेस्टॉल की मात्रा कों बढ़ा देता है। जोकि आपके शरीर के लिए काफी हानिकारक होता है।

जानते ही करेंगे शुरू इस्तेमाल करना बेस्ट ऑयल फॉर हेयर ग्रोथ-Best Oil For Hair Growth

Best Oil For Hair Growth

हम सभी को सुंदर दिखना बहुत पसंद होता है। बाल हमारे चेहरे की सुंदरता में चार चांद लगा देते हैं। समय के साथ हमारे बाल हमारा साथ छोड़ने लगते हैं।  बढ़ते प्रदूषण के कारण और भागदौड़ के कारण आजकल तो छोटे-छोटे बच्चों के बाल सफेद होने लगे हैं और बाल बढ़ने से पहले ही झड़ने लगे हैं। हमारे घर में ही इन सारी समस्याओं का समाधान है क्योंकि समस्याएं हैं तो समाधान तो अवश्य ही होगा। बालों की सभी समस्याओं का समाधान है एक अच्छी क्वालिटी का हेयर ऑयल। तो आइए जानते हैं हम कुछ ऐसे हेयर आयल्स जो कि बालों की ग्रोथ में बहुत मदद करते हैं, बेस्ट ऑयल फॉर हेयर ग्रोथ। 

बेस्ट ऑयल फॉर हेयर ग्रोथ-Best Oil For Hair Growth

नारियल तेल

 नारियल तेल हमारी प्राचीन सभ्यता में सदियों से खाया और बालों में लगाया जाता रहा है। यह विटामिन ई से भरपूर होता है। इसमें एंटी ऑक्सीडेंट प्रचुर मात्रा में पाए जाते हैं। जो आपके बालों की हेयर ग्रोथ को बढ़ाते हैं। आपके बालों को जड़ों से मजबूत करते हैं। आपके बालों का झड़ना रोकते हैं और आपके बालों की ग्रोथ बढ़ाते हैं। यह तेल आपके बालों को एक नई चमक प्रदान करता है।

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नारियल के तेल में एंटी फंगल, एंटी बैक्टीरियल गुण पाए जाते हैं। जिसके कारण यह आपकी स्कैल्प की इचिंग को दूर करता है। बैक्टीरियल फंगस को दूर करता है। इस तेल में प्रोटीन होते हैं जो कि बालों को पोषण देते हैं। नारियल के तेल में मैग्नीशियम कैल्शियम आयरन पोटेशियम पाए जाते हैं जो कि बालों को मुलायम बनाते हैं और उनकी ग्रोथ बढ़ाते हैं।

बादाम का तेल

बादाम का तेल आपके बालों की मजबूती प्रदान करता है। यह तेल आयुर्वेद में एक विशेष स्थान रखता है। सर से जुड़ी जितनी भी तकलीफ होती हैं, मानसिक तनाव होता है सर दर्द होता है। इन सभी को बादाम का तेल दूर करने में मदद करता है। बादाम के तेल मैं विटामिन और मैग्नीशियम पाए जाते हैं जो कि आपके बालों की हेयर ग्रोथ को बढ़ाते हैं। यह तेल हेयर फॉलिकल्स को मजबूत करता है उनको मोटा बनाता है।

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आप बदाम के तेल को खाने के साथ-साथ अपने बालों में अवश्य लगाइए यह आपके बालों की नमी को लॉक करने का काम करता है जिससे कि आपके बाल झड़ते नहीं है। यह तेल एंटीऑक्सीडेंट्स से भरपूर होता है।

अरंडी का तेल

 इसमें रिकीनोलेइक एसिड और ओलिंक एसिड पाया जाता है। जो कि आपके बालों का ऑक्सीजन लेवल बढ़ाता है। जिसमें कि आप के बालों में रक्त संचार को बढ़ाने की शक्ति होती है। यह तेल आपके बालों की हेयर फॉलिकल को मोटा करता है उनकी मजबूती बढाता है। जिससे कि आपके बालों की ग्रोथ बढाता है। अरंडी का तेल आपके बालों में इंफेक्शन को रोकता है। आपके सिर की खुजली को भी रोकता है। इसमें एंटी एंटी बैक्टीरियल, एंटी फंगल गुण पाए जाते हैं जो कि किसी भी तरह के संक्रमण को रोकने में मददगार होते हैं।

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अरंडी के तेल में मौजूद फैटी एसिड आपके बालों को सूरज के अल्ट्रावायलेट किरणों के नुकसान से बचाता है। यह शैंपू  और हेयर कलर में होने वाले केमिकल से जो आपके बालों को नुकसान होता है उससे आपके बालों को प्रोटेक्ट करता है।

आंवले का तेल

आंवले का तेल विटामिन सी, विटामिन ए, ऑक्सीजन आयरन एवं फास्फोरस से भरपूर होता है। आंवले के तेल में फैटी एसिड पाए जाते हैं जो कि बालों की ग्रोथ बढ़ाते है। यह तेल बालों को झड़ने से रोकने में भी मददगार होता है। आंवले का तेल बालों को असमय सफेद होने से बचाता है। आंवले का तेल सर की त्वचा में होने वाले इन्फेक्शन से बचाता है। सर की त्वचा का मुलायम बनाता है जिससे डैंड्रफ नहीं होता।

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आंवले का तेल बालों में लगाने से हेयर फॉलिकल्स मजबूत हो जाते हैं जिससे बालों की ग्रोथ बढ़ने लगती है। यह तेल बालों को पतला व कमजोर होने से बचाता है। यह एक हेयर कंडीशनर का काम करता है जो कि बालों को एक नेचुरल साइन प्रदान करता है। 

जैतून का तेल

 यह तेल बालों को पोषण प्रदान करता है। इस तेल में पामिटिक एसिड, ओलिंक एसिड और स्क्वैलिन होता है। जोकि आपके सर की त्वचा को कंडीशनर करता है। और उसे पोषण प्रदान करता है। जैतून का तेल टूटे-फूटे बालों को सुधारने में मददगार होता है। जैतून का तेल सर में लगाने से रक्त का संचार तेज होता है। जिससे बाल मजबूत होते हैं कम झड़ते हैं। यह बालों के विकास में काफी मददगार होता है।

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जैतून का तेल बालों में लगाने से बालों में शाइन आती है यह बालों के लिए सुरक्षा कवच का काम करता है। यह तेल बालों को मजबूत करता है। यह तेल रूखे बालों को नमी प्रदान करता है और डैंड्रफ की समस्या से निजात दिलाता है।

भृंगराज तेल

भृंगराज तेल में एंटीऑक्सीडेंट, एवं विटामिन ई पाए जाते हैं जो कि बालों के लिए काफी मददगार होते हैं। भृंगराज तेल के एंटी इंफ्लीमैंट्री गुण बालों में होने वाली एलर्जी को दूर करते हैं। यह स्कैल्प में होने वाली खुजली और जलन को दूर करने में मददगार होते हैं। भृंगराज तेल में एंटीबैक्टीरियल गुण पाए जाते हैं जो कि फंगल इन्फेक्शन को रोकते हैं। इसके एंटीऑक्सीडेंट गुण बालों में शाइन पैदा करते हैं बालों की हेयर ग्रोथ को बढाते हैं। भृंगराज तेल बालों में लगाने से बालों की ग्रोथ बढ़ती है।

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भृंगराज तेल बालों को लंबा काला और मुलायम बनाता है। यह बालों को सफेद होने से बचाता है। गंजेपन की समस्या से भी भृंगराज तेल निजात दिलाता है। बालों का झड़ना कम करता है।

गर्भावस्था मे कब्ज से कैसे पायें आराम-Pregnancy Me Kabj Ke Upay In Hindi

गर्भावस्था मे कब्ज से कैसे पायें आराम

गर्भवती महिलाओं में कब्ज उन हार्मोन की वजह से होती है जो आंतों की मांसपेशियों को आराम पहुंचाती हैं और पेट बढ़ने की वजह से गर्भाशय पर पड़ने वाले दबाव को कम करते हैं। आंतों की मांसपेशियों को आराम मिलने की वजह से भोजन और अपशिष्ट पदार्थ  सिस्टम से धीरे धीरे बाहर निकलते हैं। गर्भावस्था के दूसरे महीने से गर्भावस्था के तीसरे महीने के आसपास, प्रोजेस्टेरोन का स्तर बढ़ने पर कब्ज की समस्या शुरू होती है। जैसे जैसे गर्भावस्था बढ़ती है आपका गर्भाशय भी बढ़ता है और ये समस्या बढती जाती है। कभी-कभी आयरन की गोलियां लेने की वजह से गर्भावस्था मे कब्ज हो जाती है। इसलिए आयरन सप्लिमेंट लेते समय साथ में खूब सारा पानी पिएं।

गर्भावस्था मे कब्ज के कारण

  • गर्भावस्था के दौरान कब्ज का सबसे अहम कारण प्रोजेस्ट्रोन हार्मोन का बढ़ना है।
  • अगर गर्भवती महिला अपने भोजन में फाइबर युक्त खाद्य पदार्थों को शामिल नहीं करती है, तो कब्ज हो सकती है। फाइबर पाचन तंत्र को बेहतर तरीके से काम करने में मदद करता है।
  • प्रतिदिन कम मात्रा में पानी पीने से भी कब्ज हो सकती है। साथ ही पहली तिमाही में मॉर्निंग सिकनेस के कारण भी डिहाइड्रेशन की समस्या हो सकती है, जो कब्ज का कारण बनती है।
  • गर्भावस्था में महिला के स्वभाव में बदलाव होता है और कई बार थकान भी महसूस होती है, जो कब्ज का कारण बन सकती है लेकिन रोज कुछ देर की सैर भी जरूरी है। इससे खाना हजम होता है और पेट आराम से साफ हो जाता है। अगर डॉक्टर ने आपको पूरी तरह से बेड रेस्ट के लिए बोला है, तो बात अलग है।
  • स्ट्रोक, डायबिटीज, आंत में रुकावट, आईबीएस (इर्रिटेबल बाउल सिंड्रोम) जैसी समस्याओं के कारण भी कब्ज हो सकती है।
  • आयरन व कुछ दर्द निवारक दवाइयों के कारण भी कब्ज की समस्या हो सकती है।

गर्भावस्था मे कब्ज होना सामान्य है, लेकिन इसका उपचार करना जरूरी हैं। अगर गर्भावस्था के दौरान कब्ज को ठीक न किया जाए, तो इससे कई अन्य स्वास्थ्य समस्याएं हो सकती है

और पढ़ें: क्यों होता है गर्भावस्था मे पेट दर्द-Garbhavastha Me Pet Dard

गर्भावस्था मे कब्ज के उपाय-Pregnancy Me Kabj Ke Upay In Hindi

करें

संतरे

प्रेगनेंसी में कब्ज दूर करने का घरेलू उपाय

संतरे का सेवन

दिनभर में एक से दो संतरे का सेवन करें।

यह कैसे मदद करता है

एक कप प्रून यानी सूखे आलू बुखारे का सेवन करें। वैकल्पिक रूप से आलू बुखारे के जूस का भी सेवन कर सकते हैं।

अलसी से मिलेगा आराम

अलसी को भूनकर और पीसकर पाउडर बनाया जा सकता है, जिसे किसी भी सब्जी या सलाद में इस्तेमाल किया जा सकता है। अलसी को भूनकर इसे रोटी या पराठे के आटे में मिला सकते हैं।

इसबगोल से गर्भावस्था मे कब्ज होगा दूर

एक गिलास ठंडे पानी में इसबगोल को मिक्स कर लें। फिर इसका सेवन करें।

और पढ़ें: गर्भावस्था में सोने के तरीके, जिससे बच्चे को ना हो कोई नुकसान

कीवी और सेब दे आराम

रोजाना एक कीवी का सेवन करें। या इसके जूस को भी पी सकते हैं। सेब मे पानी, सोर्बिटोल, फ्रुक्टोज, फाइबर और फाइटोकेमिकल्स होते हैं, जिस वजह से इन्हें कब्ज के इलाज के लिए उपयोगी माना जाता है। केला का सेवन करें। इसे दूध में मिक्स करके यानी शेक बनाकर भी लिया जा सकता है।

दही का सेवन या तो इसी तरह किया जा सकता है या फिर छाछ बनाकर कर सकते है।

गर्भावस्था मे कब्ज दूर करेगा अंगूर

गर्भावस्था मे कब्ज का इलाज घर में ही करने के बारे में सोच रहे हैं, तो अंगूर का सेवन कर सकते हैं। इसमें फाइबर की भरपूर मात्रा होती है, जो कब्ज से राहत दिलाने में मदद करता है।

सेंधा नमक का करें प्रयोग

नहाते समय बाल्टी या टब में सेंधा नमक डालें। करीब 15 से 20 मिनट तक उसमें आराम से लेट जाएं या नहा लें। वैकल्पिक रूप से सेंधा नमक का पानी का भी सेवन किया जा सकता है।

ग्रीन टी पीयें

एक कप गर्म पानी में ग्रीन टी या ग्रीन टी बैग डालें। करीब 5 मिनट के बाद ग्रीन टी बैग को निकाल लें। अगर पत्ती का इस्तेमाल किया है, तो पानी को छान लें। स्वाद के लिए इसमें शहद मिला सकते हैं।

और पढ़ें: क्या है जल्दी डिलीवरी होने के उपाय-Jaldi Delivery Hone Ke Upay

सामान्य प्रश्न

प्रेगनेंसी में पेट साफ न हो तो क्या करे?

गर्भावस्था के दौरान अधिकांश महिलाओं को कब्ज की समस्या रहती है। कब्ज की समस्या से निपटने के लिए खाने में अधिक से अधिक मात्रा में फाइबर युक्त पदार्थ जैसे दलिया ,गाजर ,मूली पत्ता गोभी , संतरा ,सेब आदि का सेवन अधिक मात्रा में करें। अधिक से अधिक मात्रा में पानी तथा तरल पदार्थों का सेवन करें यदि नारियल पानी का सेवन भी लाभप्रद रहेगा। सब की समस्या में दही का सेवन करना चाहिए क्योंकि इसमें प्रोबायोटिक होता है जो पेट को साफ रखने में मदद करता है । ताजी देसी गुलकंद का सेवन भी कब्ज की समस्या से राहत दिलाता है । किशमिश भिगोकर खाएं, सिट्रिक फलों का सेवन करें, भोजन बनाने में सेंधा नमक का प्रयोग करें । किसी भी प्रकार की दवाई अथवा जुलाब लेने से पहले डॉक्टर की सलाह लें हो सके घरेलू नुस्खा द्वारा ही कब्ज की समस्या का निदान करने का प्रयास करें ।

गर्भावस्था की शुरुआत में कब्ज?

गर्भावस्था के दौरान शरीर में प्रोजेस्ट्रोन हार्मोन बढ़ने लगता है जिसके कारण आंतों के कार्य करने की क्षमता धीमी हो जाती है ,उसी कारण कब्ज की समस्या होने लगती हैं । गर्भावस्था के शुरुआती दौर में कब्ज की समस्या होने पर घरेलू नुस्खा प्रयोग कर समस्या से निजात पाने का प्रयास करना चाहिए, इसके लिए अधिक से अधिक मात्रा में पानी तथा तरल पदार्थों का सेवन करना चाहिए । सुबह-सुबह खाली पेट गुनगुने पानी का सेवन कब्ज की समस्या में राहत दिलाता है । भोजन में फाइबर युक्त पदार्थों जैसे दलिया, पत्ता गोभी, सेब आदि भोज्य पदार्थ खाने चाहिए । दही का सेवन में समस्या में फायदेमंद होता है । गर्भावस्था का शुरुआती दौर काफी नाजुक होता है इसलिए समस्या हो तो सोच जाते समय अधिक जोर लगाने से बचना चाहिए । किसी भी प्रकार की दवा का सेवन करने से पहले डॉक्टर की सलाह लेनी चाहिए ।

पतंजलि अश्वगंधा पाउडर के फायदे जो आप पहले नहीं जानते होंगे

पतंजलि अश्वगंधा पाउडर के फायदे

पतंजलि अश्वगंधा पाउडर एक आयुर्वेदिक औषधि है। प्राचीन काल से अश्वगंधा का प्रयोग कई बीमारियों के उपचार के लिए किया जा रहा है। हमारे वेदों में भी अश्वगंधा की उपयोगिता का वर्णन है। आयुर्वेद में अश्वगंधा को तनाव रोधी चिंता विकारों के इलाज में प्रयोग किया जाता है।

अश्वगंधा का नाम संस्कृत भाषा से लिया गया है संस्कृत भाषा में अश्वगंधा का अर्थ अश्व की गंध है। पसीने के कारण अश्व के पसीने से जो गंध निकलती है उसकी गंध और अश्वगंधा की जड़ और पत्तियों की गंध एक समान होती है कुछ लोग यह भी कहते हैं कि अश्वगंधा का नाम अश्व जैसी ताकत और यौन शक्ति के कारण मिला है।

अश्‍वगंधा का वानस्पतिक नाम: विथानिया सोमनिफेरा
वंश: सोलेनेसी
संस्‍कृत नाम: अश्‍वगंधा, वराहकर्णी और कमरूपिणी
सामान्‍य नाम: विंटर चेरी, भारतीय जिनसेंग, असगंध
उपयोगी भाग: अश्‍वगंधा की जड़ और पत्तियों का इस्‍तेमाल किया जाता है पर इसकी फूल व पत्तियाँ भी बहुत उपयोगी है।
भौगोलिक विवरण: अश्‍वगंधा अधिकतर भारत के शुष्‍क प्रदेशों (प्रमुख तौर पर मध्‍य प्रदेश , राजस्‍थान) और गुजरात में पायी जाती है। विदेश में नेपाल, अफ्रीका और संयुक्‍त राज्‍य अमेरिका में भी अश्वगंधा का वर्णन है।

पतंजलि ने अश्वगंधा पौधे की जड़ को आर्युवेदिक पद्धति से कूटकर,पीसकर, छानकर अस्वगंधा पाउडर बनाया है।

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तो आइए जानते हैं पतंजलि अश्वगंधा पाउडर के गुणों को

पतंजलि अश्वगंधा पाउडर लाभदायक है थायराइड की बीमारी में

पतंजलि अश्वगंधा पाउडर निश्चित मात्रा में लेने पर थायराइड कंट्रोल होता है और मेटाबॉलिज्म ठीक होता है। लेकिन अगर हम थायराइड की दवाइयाँ पहले से ही ले रहे हैं तो अश्वगंधा हमें नुकसान कर सकता है चाहे वह हमारा हाइपर थायराइड हो या हाइपो थायराइड हो।

अश्वगंधा का इस्तेमाल थाइरोइड ग्रंथि को उत्तेजित करने के लिए किया जा सकता है। पतंजलि अश्वगंधा पाउडर को अगर प्रतिदिन लिया जाए, तो थायराइड हार्मोन के स्राव में वृद्धि होगी।

अश्वगंधा पाउडर
अश्वगंधा पाउडर

पतंजलि अश्वगंधा पाउडर फ़ायदेमंद है शरीर के मेटाबालिज्म को कंट्रोल करने में

पतंजलि अश्वगंधा पाउडर में बहुत सारे एंटीऑक्सीडेंट पाए जाते हैं। जो शरीर के मेटाबाॅलिज्म को बढ़ाने में मददगार है।

पतंजलि अश्वगंधा पाउडर यौन शक्ति बढ़ाने में मददगार

पतंजलि अश्वगंधा पाउडर में यौनांगो की मांसपेशियों को सक्रिय करने का गुण पाया जाता है। यह मस्तिष्क और मांसपेशियों के बीच तालमेल बनाने में कारगर है पतंजलि अश्वगंधा पाउडर शरीर की चर्बी को दूर कर शरीर को ऊर्जावान बनाती है। पतंजलि अश्वगंधा पाउडर में पाये जाने वाले पोषक तत्व वीर्य की क्वालिटी बढाने में मददगार होते हैं।

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पतंजलि अश्वगंधा पाउडर मोतियाबिंद रोग में लाभदायक

पतंजलि अश्वगंधा पाउडर में एंटीऑक्सीडेंट और साइटोप्रोटेक्टि पाए जाते हैं। जो मोतियाबिंद के असर को कम करने में उपयोगी होते हैं।

पतंजलि अश्वगंधा पाउडर उपयोगी है त्वचा की बीमारियों में

पतंजलि अश्वगंधा पाउडर में उच्च स्तर के एंटीऑक्सीडेंट होते हैं जो त्वचा को पोषण प्रदान करते हैं यह एंटीऑक्सीडेंट त्वचा में नमी बनाए रखते हैं और त्वचा के कोलेजन स्तर की रिपेयर भी करते हैं।

पतंजलि अश्वगंधा पाउडर चेहरे के काले दाग धब्बों व झाइयों को दूर करता है। अश्वगंधा सोरायसिस जैसे रोग को भी दूर करने में मददगार है। इस रोग में शरीर की त्वचा रूखी और बेजान हो जाती है।अश्वगंधा कोलेजन स्तर को बढ़ावा देकर त्वचा की नमी व चिकनाहट वापस लाती है

पतंजलि अश्वगंधा पाउडर उपयोगी है बालों की समस्याओं में

अश्वगंधा में पाये जाने वाले पोषक तत्व कोर्टिसोल के स्तर को कम करके बालों के झडने को रोकता है। अश्वगंधा के गुणकारी तत्व बालों में मेलेनिन की हानि को रोक कर समय से पहले बालों के ग्रे होने को रोकता है। अश्वगंधा में पाये जाने वाला टाइयरोसीन है। जो एक एमिनो एसिड है और शरीर में मेलेनिन के उत्पादन को बढाता है। मेलेनिन को बढा कर बालों को काला बनाता है।

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पतंजलि अश्वगंधा पाउडर उपयोगी है ह्रदय रोगों में

पतंजलि अश्वगंधा पाउडर में सूजन कम करने के गुण पाये जाते हैं। पतंजलि अश्वगंधा पाउडर में पाये जाने वाले एंटीऑक्सीडेंट में सूजन व तनाव कम करने के गुण पाये जाते हैं। पतंजलि अश्वगंधा पाउडर खाने से कोलेस्ट्रॉल और ट्राइग्लिसराइड की मात्रा कम होती है। जिसके कारण ह्रदय रोग होने की संभावना कम हो जाती है। पतंजलि अश्वगंधा पाउडर हृदय की मांसपेशियों को मज़बूत बनाता है।

पतंजलि अश्वगंधा पाउडर कारगर है कैंसर में

पतंजलि अश्वगंधा पाउडर में पाये जाने वाले पोषक तत्व ट्यूमर सेल्स को नष्ट करने में कारगर होते हैं। पतंजलि अश्वगंधा पाउडर खाने से एपोप्टोसिस बढ़ता है जो कैंसर सेल्स को नष्ट करने में मददगार साबित हुआ है।

पतंजलि अश्वगंधा पाउडर उपयोगी है तनाव चिंता और अवसाद दूर करने में

अश्वगंधा का प्रयोग व्यक्ति को मानसिक रुप से शांत कर देता है जिसके कारण व्यक्ति की चिंता दूर हो जाती है। पतंजलि अश्वगंधा पाउडर व्यक्ति को मानसिक रूप से प्रसन्नचित रखता है। जिसके कारण व्यक्ति को मानसिक अवसाद नही होता।

स्टेमिना और सेक्सुअल टाइमिंग बढ़ाने के लिए पतंजलि का अश्वगंधा कैप्सूल बहुत लाभकारी माना जाता है। अश्वगंधा कैप्सूल को खाना खाने के बाद या रात में सोने से पहले दूध के साथ लिया जा सकता है। दिन में दो बार कैप्सूल को उपयोग में लेना चाहिए। 

हिमालय अश्वगंधा टेबलेट का उपयोग दिन में किसी भी समय किया जा सकता है इसको पानी के साथ लिया जा सकता है खाना खाने के बाद। और रात में सोने से पहले गुनगुने दूध के साथ भी इसका उपयोग किया जा सकता है। 

डाबर अश्वगंधा टेबलेट एक नेचुरल तरीके से बना उत्पाद है जिसमें अश्वगंधा मिला हुआ होता है। जो की तनाव, इम्यूनिटी और स्टेमिना से जुड़ी समस्याओं को दूर करता है। इसके उपयोग से सेक्स से जुड़ी समस्याएं जैसे काम टाइमिंग, थकान जैसी समस्याएं भी दूर होती है। 

अश्वगंधा टेबलेट प्राकृतिक उत्पादों से मिकर बनी होती है इसलिए इससे किसी भी तरह का कोई साइड इफेक्ट होने का खतरा नहीं रहता है। उसको दिन के समय खाना खाने के बाद और रात में सोने से पहले उपयोग में लिया जा सकता है। 

अश्वगंधा टेबलेट को उपयोग में लेने से बहुत सी समस्याओं से राहत पायी जा सकती है। यह तनाव, नींद में कमी और स्टेमिना से जुड़ी समस्याओ में काफी कारगर होता है। इसके उपयोग से स्टेमिना में वृद्धि होती है जिससे पूरे दिनभर थकान महसूस नहीं होती है। 

अश्वगंधा प्राय चूर्ण या टेबलेट के रूप में बाजार में उपलब्ध है। चूर्ण को आप दूध, घी, पानी किसी में मिक्स कर के ले सकते हो और टेबलेट को भी दूध या पानी के साथ लिया जा सकता है। सुबह और शाम दिन में दो टेबलेट का सेवन करना चाहिए। और चूर्ण को एक छोटा चमच जितना ही। 

अश्वगंधा सिर्फ पुरुषों के लिए ही नहीं अपितु महिलाओं के लिए भी लाभकारी होता है। महिलाओं में यह सेक्सुअल इन्फेक्शन को दूर करता है और घुटनों में दर्द, थायराइड की समस्या, और जनन क्षमता की समस्या को भी दूर करता है। यह एंटी ऐजिंग प्रोडक्ट के रूप में उपयोगी है। 

यदि आपको स्टेमिना में कमी, तनाव, थकान या सेक्स से जुड़ी कोई समस्या है तो आप हिमालय अश्वगंधा टेबलेट का प्रयोग कर सकते है। आप नियमित रूप से तीन या चार महिने तक इसका प्रयोग  करते है तो आपको इसके सकारात्मक प्रभाव देखने को मिल जाएंगे।  

अश्वगंधा और मिश्री को मिक्स कर के खाने से न सिर्फ स्वाद में फर्क पड़ता है अपितु स्वास्थ्य के लिए भी बहुत ज्यादा लाभकारी है। यह शुगर को नियंत्रित करता है और घुटनों के दर्द और सेक्सुअल समस्याओं को भी दूर करता है। स्टेमिना में वृद्धि और तनाव को दूर करने में इसकी महत्वपूर्ण भूमिका है। 

अश्वगंधा को खाली पेट लेने की अपेक्षा खाना खाने के बाद प्रयोग में किया जाना चाहिए। चूंकि जब हम खाना खाने के बाद इसका उपयोग करते है तो खाने में मिले हुए तत्व अश्वगंधा के गुणकारी तत्वों को अवशोषित कर शरीर के हर हिस्से तक पहुंचाते है। दूध के साथ भी इसका प्रयोग किया जा सकता है।  

अश्वगंधा पुरुषों और महिलाओं दोनों के लिए लाभकारी है लेकिन यह पुरुषों में विशेष तय सेक्सुअल समस्याओं को जड़ से दूर करता है। जैसे पुरुषों में नपुसंकता, शुक्राणुओं की कमी, और सेक्स टाइमिंग में कमी जैसी समस्याओं के लिए यह रामबाण साबित होता है। 

अश्वगंधा का अधिक मात्रा में उपयोग करने से आपको इसके नकारात्मक प्रभाव देखने को मिल सकते है। अधिक उपयोग से यह शरीर में गर्मी पैदा करता है जिससे पेट की समस्या, मुहँ में छालों की समस्या, अपच जैसी समस्याएं देखने को मिल सकती है। अतः अधिक मात्रा में उपयोग से बचना चाहिए। 

अश्वगंधा का अधिक इस्तेमाल पेट के लिए हानिकारक हो सकता है। इसका उपयोग करने से डायरिया जैसी समस्या पैदा हो सकती है। इसलिए इसके इस्तेमाल से पहले आप डॉक्टर की सलाह लें उसके बाद ही इसका सेवन करें। और जिनको ब्लड प्रेशर की समस्या हो उनको अश्वगंधा के प्रयोग से बचना चाहिए। 

जानिए शिशु के लिए हिमालय बेबी क्रीम के फायदे और साइड इफेक्ट्स

जानिए शिशु के लिए हिमालय बेबी क्रीम के फायदे

बचपन बहुत भोला होता है और बच्चों के बचपन की तरह ही बच्चे भी बहुत भोले और मासूम होते हैं। और साथ ही साथ नाज़ुक होती है उनकी त्वचा। हर माता-पिता का सपना होता है कि वह अपने बच्चों के लिए सबसे अच्छा चुने फिर चाहे वह खाने का समान हो पहनने के कपड़े हो या लगाने की क्रीम वह सबसे अच्छा ही चुनना चाहते हैं तो आइए जानते हैं हिमालय बेबी क्रीम के बारे में।

हिमालय बेबी क्रीम के फायदे

बच्चों की त्वचा बड़ों की त्वचा की अपेक्षा बहुत नाज़ुक होती है और जितनी नाज़ुक होती है उतनी ही तेजी से बच्चों की त्वचा की नमी भी खोती है। हिमालय बेबी क्रीम बच्चों की स्किन के लिए सुरक्षा कवच का काम करती है। हिमालय बेबी क्रीम पर्यावरण में मौजूद हानिकारक तत्वों से भी बेबी की सुरक्षा करती है हिमालय बेबी क्रीम में कोई हानिकारक पदार्थ नहीं है जिसके कारण यह बेबी की त्वचा के लिए उपयुक्त है।

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हिमालय बेबी क्रीम बनी है बच्चों की नाज़ुक त्वचा के लिए
हिमालय बेबी क्रीम बनी है बच्चों की नाज़ुक त्वचा के लिए

हिमालय बेबी क्रीम लगाने से क्या होता है

बच्चों की त्वचा बहुत कोमल होती है। हर मौसम का बच्चों की त्वचा पर असर पड़ता है। गर्मियों में पसीने और गर्मी के कारण बच्चों की त्वचा चिपचिपी हो जाती है। तो सर्दियों में अधिक ठंड के कारण बच्चों की त्वचा रूखी हो जाती है ठंड में बच्चों के गाल ,कुहनिया, घुटने नाक गाल फटने लगते हैं और त्वचा काली पड़ने लगती है। हिमालय बेबी क्रीम सर्दियों में त्वचा को मुलायम बनाती है। और गर्मियों में त्वचा को चिपचिपी नहीं होने देती इसलिए हिमालय बेबी क्रीम सर्दी और गर्मी दोनों में ही एक बेहतर सुरक्षा कवच है छोटे बच्चों के लिए।

हिमालय बेबी क्रीम पूरा करती है सारे मानकों को

आईआरएसके निर्धारित मानकों को पूरा करती है हिमालय बेबी क्रीम। अंतरराष्ट्रीय मानकों को भी पूरा करती है ।

हिमालय बेबी क्रीम पैराबेन फ्री है

हिमालय क्रीम में केमिकल्स नहीं है, यह टाइप सी है यह पैराबेन फ्री क्रीम है यह बच्चों की त्वचा के लिए बिल्कुल उपयुक्त है।

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हिमालय बेबी क्रीम है लैब टेस्टेड

हिमालय बेबी क्रीम लैब टेस्टेड है। बल्कि हिमालय बेबी क्रीम ने इस टेस्ट को क्वालीफाई भी किया है। हिमालय बेबी क्रीम अंतर्राष्ट्रीय मानकों की कसौटी पर पूरी तरह से खरी उतरी है।

हिमालय बेबी क्रीम में आर्टिफिशियल खुशबू और कलर नहीं है

बच्चों के लिए प्रयोग की जाने वाली क्रीम में कृत्रिम रंग या खुशबू का प्रयोग नहीं किया जाना चाहिए पर माता-पिता अपने बच्चे के लिए क्रीम की खुशबू के साथ रंग को भी वरीयता देते हैं हम यह भूल ही जाते हैं की क्रीम का काम त्वचा को माइश्चराइज करना है। हिमालय बेबी क्रीम ऐसे प्रोडक्ट से बनी है जिनके कोई साइड इफेक्ट नहीं है। हिमालय बेबी क्रीम से कोई स्किन इन्फेक्शन नहीं होता। हिमालय बेबी क्रीम की खुशबू बहुत हल्की है जो मन को मोह लेती है।

कई बार माता-पिता अपने बच्चे के लिए ऐसी क्रीम को चुनते हैं जो बच्चे की त्वचा को मॉश्चराइज करने के साथ अच्छी खूशबू भी दे। अब यहां हम इस बात को इग्नोर कर देते हैं कि कहीं इस क्रीम या प्रोड्क्ट में ऐसे एजेंट्स का तो प्रयोग नहीं हुआ जिससे बच्चे को कोई स्किन इन्फेक्शन हो। बच्चे के प्रोडक्ट के पैक पर ध्यान दें कि इसमें खूशबू के लिए इस्तेमाल होने वाले एजेंट्स आईआरएफए (IRFA) द्वारा पास और लैब टेस्टेड हों।

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आइये एक बार नजर डालते हैं हिमालय बेबी क्रीम के फ़ायदों पर

  • हिमालय बेबी क्रीम में हानिकारक रंग नहीं है।
  • हिमालय बेबी क्रीम मैं पैराबेन और खनिज तेल नहीं है
  • हिमालय बेबी क्रीम की खुशबू बहुत हल्की और मनमोहक है।
  • हिमालय बेबी क्रीम बच्चों की त्वचा में आसानी से समा जाती है।
  • हिमालय बेबी क्रीम का दाम इसकी खूबियों को देखते हुए बिल्कुल वाजिब है।
  • हिमालय बेबी क्रीम की कम मात्रा ही काफी होती है।
  • हिमालय बेबी क्रीम बहुत किफायती पैक में उपलब्ध है। हिमालय बेबी क्रीम 100 ग्राम, 15 ग्राम 200 ग्राम, 50 ग्राम के पैक में उपलब्ध है।
  • हिमालय बेबी क्रीम के बच्चों की त्वचा के लिए पूरी तरह सुरक्षित है हिमालय बेबी क्रीम बच्चे की त्वचा को नरम व मुलायम बनाती है हिमालय बेबी क्रीम बेबी की त्वचा को स्किन इन्फेक्शन से बचाती है।
  • हिमालय बेबी क्रीम में हानिकारक केमिकल्स नही है। हिमालय बेबी क्रीम सभी राष्ट्रीय व अन्तरराष्ट्रीय मानकों पर खरी उतरती है। हिमालय बेबी क्रीम ,बेबी की त्वचा का सुरक्षा कवच है।

सामान्य प्रश्न

हिमालय बेबी क्रीम लगाने से क्या होता है?

बच्चों की त्वचा काफी कोमल और नाजुक होती है इसलिए बच्चे के लिये हिमालय बेबी क्रीम कवच का काम करता है और कोमलता प्रदान करता है।हिमालया की बेबी क्रीम विशेष रूप से कोमल बच्चे के शुष्क त्वचा,फ़टे गाल और घिसी हुई कोहनी की रक्षा के लिए तैयार की जाती है। हिमालया बेबी क्रीम बच्चे की त्वचा पर जादुई प्रभाव डालती है।क्रीम में मौजूद प्रकृति तत्व बच्चे की त्वचा को कोमलता के साथ ही नमी प्रदान कर सुरक्षित रखता है।हिमालया बेबी क्रीम लैब द्वारा प्रमाणित अंतराष्ट्रीय मानकों की कसौटी पर भी खड़ी उतरी हुई है।इसमें किसी भी प्रकार का हानिकारक रसायन नही है साथ ही इसकी खुशबू भी मोहक है।बच्चें के लिये यह क्रीम सर्वश्रेष्ठ है।

बच्चों के लिए कौन सी क्रीम अच्छी है?

सर्दी में जितनी जल्दी हमारी त्वचा रूखी होती है, बच्चों की त्वचा सर्द हवाओं से और भी जल्दी डैमेज हो जाती है। हालांकि बेबी स्किन केयर से जुड़े कई तरह के प्रॉडक्ट्स इस समय आपको बाजार में मिल जाएंगे। जो बच्चों की त्वचा के लिए बेस्ट होने का दावा करते हैं। हालांकि केमिकल्स तो ज्यादातर प्रॉडक्ट्स में उपयोग होते हैं। इसलिए, आप अपने बेबी की स्किन को प्यार भरी देखभाल देने के लिए चुने हिमालया बेबी क्रीम,जो बच्चे की कोमल त्वचा सुरक्षा प्रदान करता है। इसमें कंट्री मेलो, ऑलिव ऑयल और मुलेठी को डाला गया है। ऑलिव ऑयल में मौजूद विटामिन ई शिशु की त्वचा में पोषण को पूरा करता है।यह क्रीम सभी प्रकार की एलर्जी से बच्चों को बचाता है।

बेबी क्रीम लगाने से चेहरे पर क्या होता है?

मासूम बच्चे की त्वचा कोमल होने के कारण माता पिता को सभी चीजों का काफी ध्यान रखना पड़ता है क्योंकि बच्चों की त्वचा पर बहुत जल्दी इंफेक्शन हो जाता है और गलत साबुन या क्रीम इत्यादि इस्तेमाल करने पर बच्चे की रंगत में फर्क भी आ जातें है और त्वचा पर रैशेज भी हो जातें हैं। यदि आपके शिशु के गाल नाक कोहनी और घुटने काफी रूखे सूखे रहते हैं तो यह क्रीम लगाने से शिशु की त्वचा का रूखा सूखापन खत्म हो जाता है और उनकी त्वचा को काफी कोमल और मुलायम हो जातें है। बेबी क्रीम लगाने से बच्चे की मासूमियत बरकरार रहती है।बेबी क्रीम बच्चे की त्वचा को स्वस्थ और पोषित रखते हैं।

हिमालय बेबी किट कैसे यूज़ करे?

हिमालया बेबी केयर किट बहुत ही उपयोगी और भरोसेमंद किट है।हिमालया बहुत ही प्रसिद्ध और पॉपुलर ब्रांड है।इस किट में बच्चे की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए सभी सामग्री मौजूद हैं।इसे इस्तेमाल करना बहुत आसान है। .बेबी मसाज ऑइल-बच्चे की हड्डी को मजबूत बनाने के लिये रोजाना मसाज करें। .साबुन,इससे नहाने पर बच्चे की त्वचा नर्म और मुलायम बनती है। .लोशन,क्रीम-चेहरे और बॉडी पर लगाने से कोमलता मिलती है। .शैम्पू- नहाते समय बालों में लगाने से बाल स्वस्थ रहतें है। .वाइप-हिमालय बेबी वाइप से बच्चे की त्वचा को पोछकर साफ किया जाता है। रैशेज क्रीम-छोटे बच्चे बार-बार रैशेज हो जाते हैं।इसलिए यह क्रीम रैशेज वाले जगह पर इस्तेमाल की जाती है। .पाउडर-यह बच्चे को गर्मी,घमौरी और इचिंग से बचाता है साथ ही फ्रेश रखता है।

खरीदने से पहले जान लीजिये “हिमालय फेयरनेस क्रीम के फायदे और नुक्सान”

रंगत निखारने वाली हिमालय फेयरनेस क्रीम के फायदे

कहते हैं कि सुंदरता वैसे तो देखने वाले की ऑखों में होती है और कहा तो यह भी जाता है कि सच्ची सुंदरता सुंदर मन पर नहीं सुंदर तन पर निर्भर करती है। पर यह भी एक बड़ी सच्चाई है कि सुंदरता का हमारे व्यक्तित्व पर सकारात्मक प्रभाव पड़ता है। अगर हम सुंदर दिखते हैं तो हम खुश भी रहते हैं। यही सकारात्मक उर्जा हमें आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करती है।

हम सभी जब बच्चे होते हैं तो सुंदर ही होते हैं चाहे हम सांवले हो या गोरे हो। सुंदरता हमारे रंग से नहीं हमारे चेहरे की चमक से दिखाई देती है। हमारी मासूमियत से दिखाई देती है। समय के साथ साथ हमारी त्वचा अपनी प्राकृतिक चमक खोने लगती है आजकल जब हर जगह प्रदूषण है तब हमारे शरीर की त्वचा भी कहाँ अछूती है। चेहरे की चमक को बरकरार करने के लिए हम न जाने क्या-क्या करते हैं। तरह तरह के प्रयास हमें चेहरे के लिए करने पड़ते हैं। क्रीम फेस और न जाने क्या-क्या।

बाज़ार में जब इतने विकल्प हों, तो यह सवाल मन में जरूर आता है कि हिमालय की सबसे अच्छी क्रीम कौन सी है? इस सवाल का जवाब ढूँढने में हम आपकी मदद करेंगे।

बाजार तरह-तरह के विकल्पों से भरा हुआ है और सही या गलत ढूंढना अपने आप में ही बड़ा काम है। इसी काम को आपके लिए आसान करने के लिए हम यहां पर लाए हैं हिमालय फेयरनेस क्रीम से जुडी कुछ जानकारियाँ, आइये जानते हैं हिमालय क्रीम के फायदे और नुकसान।

वैसे तो हिमालय के प्रोडक्ट्स सब ही बहुत अच्छे हैं पर आज हम स्किन क्रीम के फायदे बताने जा रहे हैं

हिमालय क्रीम के फायदे और नुकसान

धूल, प्रदूषण और कई अन्य चीज़ों की वजह से हमारी त्वचा अपनी प्राकृतिक आभा खो देती है। जिसके कारण त्वचा रूखी और बेजान दिखने लगती है। जो इसलिए फेयरनेस क्रीम का उपयोग करना जरूरी हो जाता है। हिमालय फेयरनेस क्रीम त्वचा को मॉइस्चराइज्ड और हाइड्रेटेड रखकर उसमे प्राकृतिक चमक लाती है।

हिमालय नेचुरल ग्लो केसर फेस क्रीम, छोटा पैकेट बड़ा धमाका है। हिमालय नाईट क्रीम के फायदे जानना भी ज़रूरी है क्योंकि यह स्किन को रातभर पोषण देती है। यह क्रीम बहुत कम कीमत में बहुत सारे फायदे देने वाली है।

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हिमालय फेयरनेस क्रीम में अल्फा हाइड्रोक्सी विटामिन और केसर होते हैं, जो त्वचा में गुलाबी रंगत लाते हैं। मुहांसों के दाग-धब्बे हल्के करने और झाइयों को कम करने में मदद करते हैं।

हिमालय क्रीम से क्या होता है ? हिमालय नाईट क्रीम के फायदे

केसर
केसर

हिमालय फेयरनेस क्रीम में है अल्फा हाइड्रोक्सी विटामिन और केसर, हिमालय फेस क्रीम में पाए जाने वाले अल्फा हाइड्रोक्सी विटामिन केसर त्वचा में गुलाबी रंगत लाती है

हिमालय फेयरनेस क्रीम झाइयों पर है असरदार

चेहरे को चमकदार बनाती हैं। मुहांसों के कारण पड़ने वाले त्वचा के दाग धब्बों को हिमालय फेयरनेस क्रीम हल्का करती है और झाइयों को धीरे धीरे कम करती हैं।

हिमालय फेयरनेस क्रीम त्वचा को पोषित करती है। हिमालय फेयरनेस क्रीम में पाई जाने वाली अल्फा हाइड्राक्सी विटामिंस और केशर त्वचा को अंदर से पोषित करते हैं जिससे त्वचा तरोताजा रहती है।

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चिपचिपी नहीं है

हिमालय फेयरनेस क्रीम चेहरे की त्वचा के भीतर समा जाती है। यह चेहरे के ऊपर चिपचिपी लेयर नहीं बनाती है।

हिमालय फेयरनेस क्रीम देती है त्वचा में निखार

हिमालय फेस क्रीम में पाए जाने वाला केशर त्वचा की रंगत निखारता है और चेहरे पर चमक प्रदान करता है। हिमालय फेयरनेस क्रीम रूखी और नॉर्मल स्किन के साथ ऑयली स्किन के लिए भी फ़ायदेमंद है हिमालय फेयरनेस क्रीम चिपचिपी नही है। इसलिए तैलीय त्वचा वाले दिन में एक बार हिमालय फेयरनेस क्रीम को लगा सकते हैं। हिमालय फेयरनेस क्रीम रूखी और सामान्य त्वचा वाले भी लगा सकते हैं ,क्योंकि यह त्वचा के अंदर समा जाती है।

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हिमालय फेयरनेस क्रीम को नाइट क्रीम की तरह प्रयोग कर सकते हैं

हिमालय फेयरनेस क्रीम को नाइट क्रीम की तरह प्रयोग कर सकते हैं। इसके इस्तेमाल से त्वचा की कोशिकाओं की मरम्मत होती है। यह क्रीम आपकी स्किन को रातभर पोषण देकर उसे नर्म व चमकदार बनाती है।

हर तरह की त्वचा और हर उम्र के लिए

हिमालय फेयरनेस क्रीम बहुत माइल्ड है इसमें कैमिकल्स न होने के कारण मैच्योर स्किन से लेकर टीनएज तक अपने चेहरे की देखभाल के लिए हिमालय फेयरनेस क्रीम को इस्तेमाल कर सकते हैं कम उम्र के टीनएज की स्किन को साफ रखती है जिससे उन्हें मुहासे आदि नहीं होते हिमालय फेयरनेस क्रीम त्वचा में आसानी से समा जाती है जिसके कारण त्वचा पोषित और निखार लगती है।

हिमालय फेयरनेस क्रीम बहुत माइल्ड है। इसमें कैमिकल्स नहीं होते, इसलिए मैच्योर स्किन से लेकर टीनएज तक कोई भी इसका उपयोग कर सकता है। यह मुहांसों को रोकती है और त्वचा को निखारती है।

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हिमालय फेयरनेस क्रीम चेहरे के दाग-धब्बों को मिटाकर एक नया सा निखार देती है

दाग धब्बे
दाग धब्बे

हिमालय फेयरनेस क्रीम चेहरे को कोमल व चमकदार बनाने में मददगार साबित हुई है। हिमालय फेयरनेस क्रीम एक हल्की क्रीम है जो त्वचा के अंदर आसानी से समा जाती है। हिमालय फेयरनेस क्रीम त्वचा को मैट फिनिश देकर त्वचा को चमकदार बनाती है।

हिमालय फेयरनेस क्रीम त्वचा पर गुलाबी चमक देकर त्वचा को निखारती है। हिमालय फेयरनेस क्रीम पैराबीन युक्त नही है अतः कोई साइड इफेक्ट भी नही है। हिमालय फेयरनेस क्रीम त्वचा पर सफेदी ना छोड़कर त्वचा में समा जाती है।

हिमालय फेयरनेस क्रीम हर तरह की त्वचा के लिए उपयोगी है। पर शुष्क त्वचा के लिए एकदम सही विकल्प है।

बजट फ्रेंडली

हिमालय फेयरनेस क्रीम के २५ ग़म पैकेट की कीमत ४४ रूपये है। इसके ५० ग़म पैक की कीमत अमेजन में ८० रूपये है। मार्केट में इस पैक की कीमत ९० रूपये है। यह टीनएज भी आराम से अफोर्ड कर सकते हैं।

ट्रैवल फ्रेंडली

हिमालय फेयरनेस क्रीम का पैक एक छोटे से कैरी बैग में आ सकता है। जो सफर में ले जाने के लिए बहुत उपयोगी है।

हिमालय फेयरनेस क्रीम है स्पिल प्रूफ

हिमालय फेयरनेस क्रीम के पैक के दक्कन स्क्रू के डिजाइन में है जो क्रीम को लीक होने से रोकता है।

हिमालय फेयरनेस क्रीम को लगाने का तरीका

बेहतर परिणाम के लिए हिमालय फेयरनेस क्रीम को लगाने से पहले हिमालय फेसवाश से चेहरा धोये। हिमालय फेयरनेस क्रीम को दिन में दो बार लगाये।

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निष्कर्ष

हिमालय फेयरनेस क्रीम एक भरोसेमंद, माइल्ड और बजट-फ्रेंडली स्किन केयर प्रोडक्ट है जो हर स्किन टाइप के लिए उपयुक्त है।

सामान्य प्रश्न

डेली यूज़ के लिए कौन सा क्रीम लगाएं?

डेली रूटीन में अच्छी क्रीम का प्रयोग करके हम अपने चेहरे को चमकदार और बेदाग रख सकते हैं।डेली स्किन केयर के लिए यदि आप एक अच्छी क्रीम चाहते हैं तो निविया इसके लिए सबसे बढ़िया क्रीम है निविया के उत्पाद अपनी गुणवत्ता और खुशबू के लिए जाने जाते हैं। यह क्रीम त्वचा को नमी प्रदान करती हैं और चमकदार बनाती है। यह सभी प्रकार की त्वचा के लिए यह कारगर है। रेगुलर निविया क्रीम के अलावा , निविया की सॉफ्ट लाइट मॉइश्चराइजर क्रीम एक बेहतरीन क्रीम है जिसमें जोजोबा ऑयल और विटामिन ई है जो त्वचा को चमकदार बनाता है । इसके अलावा हिमालया वाओ और ओले की डे क्रीम्स भी अच्छा विकल्प है ।

हिमालय की सबसे अच्छी क्रीम कौन सी है?

हिमालय के सभी उत्पाद अपनी गुणवत्ता और बेहतरीन रिजल्ट के लिए मशहूर है । हिमालय की सबसे अच्छी क्रीम की बात करें तो Himalaya Herbals Nourishing Skin Cream सबसे बेस्ट है । एलोवेरा ,Indian Kino Tree और Winter Cherry की गुणवत्ता से भरपूर यह क्रीम सभी प्रकार की स्किन के लिए बेस्ट है । यह क्रीम स्किन को मॉइश्चराइज करती है इससे त्वचा टोंड और चमकदार दिखाई देती है । इस क्रीम का प्रयोग मेकअप के बेस के तौर पर भी किया जा सकता है ।यह क्रीम हरे रंग के ढक्कन वाले सफेद बॉक्स में आता है। इस क्रीम के लीक होने का कोई खतरा नहीं होता, इसीलिए इसे आसानी से ट्रेवल के दौरान कैरी किया जा सकता है।

हिमालय की क्रीम लगाने से क्या होता है?

ब्यूटी प्रोडक्ट के क्षेत्र में हिमालय एक भरोसेमंद और जाना माना ब्रांड है। हिमालय फेस क्रीम्स की एक विशाल रेंज बाजार में उपलब्ध है । यह सभी क्रीम्स अलग-अलग प्रकार की त्वचा के अनुसार बनाई गई हैं । हिमालय क्रीम्स मुख्य रूप से त्वचा को मॉइश्चराइज और हाइड्रेट करके उसमें प्राकृतिक चमक लाती हैं । हिमालय क्रीम के लगातार प्रयोग से त्वचा के दाग धब्बे और झाइयां दूर होती हैं । हिमालय क्रीम में पाए जाने वाले नेचुरल तत्व जैसे जोजोबा ऑयल ,एलोवेरा और केसर त्वचा को अंदर से पोषित करते हैं जिससे त्वचा हमेशा तरोताजा रहती है।

हिमालय केसर फेस पैक कैसे यूज़ करें?

हिमालय का नैचुरल ग्लो केसर फ़ेस पैक बेहतरीन नेचुरल फॉर्मुलेशन है जो त्वचा की अशुद्धियों को साफ करके उसे आंतरिक चमक देता है और बेदाग बनाता है । हिमालय नेचुरल ग्लो फेस पैक को प्रयोग करने के लिए सबसे पहले चेहरे को अच्छे से साफ करें फिर हिमालय फेस पैक को चेहरे और गर्दन पर इसे समान रूप से लगाएं। आंखों के आसपास के क्षेत्र में का प्रयोग ना करें । 10 से 15 मिनट तक सूखने दें, गीले तौलिए या स्पंज से अच्छे से साफ करें। ठंडे पानी से एक बार फिर से चेहरे को अच्छे से धो लें ताकि बचा हुआ फेस पैक निकल जाए। सर्वोत्तम परिणामों के लिए इसका प्रयोग हफ्ते में दो बार करें।

हिमालय अश्वगंधा टेबलेट के फायदे और नुकसान जो जानकर रह जाएंगे आप दंग

हिमालय अश्वगंधा टेबलेट के फायदे

हिमालय अश्वगंधा टेबलेट के फायदे

हिमालय अश्वगंधा टेबलेट के फायदे यूं तो बहुत है। यह स्किन के लिए बालों के लिए और शरीर के लिए कई और अन्य प्रकार से भी बहुत फायदेमंद है। आज के इस लेख में हम जानेंगे कि अश्वगंधा टेबलेट के फायदे क्या क्या है।

हिमालय अश्वगंधा टैबलेट लाभदायक है थायराइड की बीमारी में ( himalaya medicine for thyroid)

हिमालय अश्वगंधा टेबलेट का सेवन करने से थायराइड कंट्रोल होता है और मेटाबॉलिज्म इन ठीक होता है लेकिन अगर हम थायराइड की दवाइयाँ पहले से ही ले रहे हैं तो हिमालय अश्वगंधा टैबलेट हमें नुकसान कर सकता है चाहे वह हमारा हाइपर थायराइड हो या हाइपो थायराइड हो।

हिमालय अश्वगंधा टैबलेट का इस्तेमाल थाइरोइड ग्रंथि को उत्तेजित करने के लिए किया जा सकता है। थायरॉयड ग्रंथि पर हिमालय अश्वगंधा टैबलेट के प्रभाव इसकी जड़ों का एक्सट्रैक्ट, अगर प्रतिदिन लिया जाए, तो थायराइड हार्मोन के स्राव में वृद्धि होगी।

हिमालय अश्वगंधा के फायदे हमारे शरीर के मेटाबालिज्म को कंट्रोल करने में

हिमालय अश्वगंधा टैबलेट में बहुत सारे एंटीऑक्सीडेंट पाए जाते हैं जो शरीर के मेटाबाॅलिज्म को बढ़ाने में मददगार है।

हिमालय अश्वगंधा टैबलेट यौन शक्ति बढ़ाने में मददगार

हिमालय अश्वगंधा टैबलेट में यौनांगो की मांसपेशियों को सक्रिय करने का गुण पाया जाता है। यह मस्तिष्क और मांसपेशियों के बीच तालमेल बनाने में कारगर है हिमालय अश्वगंधा टैबलेट शरीर की चर्बी को दूर कर शरीर को ऊर्जावान बनाती है। हिमालय अश्वगंधा टैबलेट में पाये जाने वाले पोषक तत्व वीर्य की क्वालिटी बढाने में मददगार होते हैं।

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मोतियाबिंद रोग में लाभदायक

हिमालय अश्वगंधा टैबलेट के एंटीऑक्सीडेंट और साइटोप्रोटेक्टि पाए जाते हैं। जो मोतियाबिंद के असर को कम करने में उपयोगी होते हैं।

हिमालय अश्वगंधा टैबलेट उपयोगी है त्वचा की बीमारियों में

हिमालय अश्वगंधा टैबलेट में उच्च स्तर के एंटीऑक्सीडेंट होते हैं जो त्वचा को पोषण प्रदान करते हैं यह एंटीऑक्सीडेंट त्वचा में नमी बनाए रखते हैं और त्वचा के कोलेजन स्तर की रिपेयर भी करते हैं।

हिमालय अश्वगंधा टैबलेट चेहरे के काले दाग धब्बोंझाइयों को दूर करती है। हिमालय अश्वगंधा टैबलेट सोरायसिस जैसे रोग को भी दूर करने में मददगार है। इस रोग में शरीर की त्वचा रूखी और बेजान हो जाती है। हिमालय अश्वगंधा टैबलेट कोलेजन स्तर को बढ़ावा देकर त्वचा की नमी व चिकनाहट वापस लाती है|

झाइयाँ
झाइयाँ

हिमालय अश्वगंधा टैबलेट उपयोगी है बालों की समस्याओं में

हिमालय अश्वगंधा टैबलेट में पाये जाने वाले पोषक तत्व कोर्टिसोल के स्तर को कम करके बालों के झडने को रोकता है। हिमालय अश्वगंधा टैबलेट के गुणकारी तत्व बालों में मेलेनिन की हानि को कर समय से पहले बालों के ग्रे होने को रोकता है। हिमालय अश्वगंधा टैबलेट में टाइयरोसीन पाया जाता है। जो एक एमिनो एसिड है और शरीर में मेलेनिन के उत्पादन को बढाता है। मेलेनिन को बढा कर बालों को काला बनाता है।

हिमालय अश्वगंधा टैबलेट के फायदे ह्रदय रोगों में

अश्वगंधा, में सूजन कम करने के गुण,पाये जाते हैं। हिमालय अश्वगंधा टैबलेट में पाये जाने वाले एंटीऑक्सीडेंट में सूजन व तनाव कम करने के गुण पाये जाते हैं।

हिमालय अश्वगंधा टैबलेट खाने से कोलेस्ट्रॉल और ट्राइग्लिसराइड की मात्रा कम होती है।जिसके कारण ह्रदय रोग होने की संभावना कम हो जाती है। हिमालय अश्वगंधा टैबलेट हृदय की मांसपेशियों को मज़बूत बनता है।

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हिमालय अश्वगंधा टैबलेट कारगर है कैंसर में

हिमालय अश्वगंधा टैबलेट में पाये जाने वाले पोषक तत्व ट्यूमर सेल्स को नष्ट करने में कारगर होते हैं। हिमालय अश्वगंधा टैबलेट खाने से एपोप्टोसिस बढ़ता है जो कैंसर सेल्स को नष्ट करने में मददगार साबित भावी है

तनाव चिंता और अवसाद दूर करने में

हिमालय अश्वगंधा टैबलेट का प्रयोग व्यक्ति को मानसिक रुप से शांत कर देता है जिसके कारण व्यक्ति की चिंता दूर हो जाती है।हिमालय अश्वगंधा टैबलेट व्यक्ति को मानसिक रूप से प्रसन्नचित रखती है। जिसके कारण व्यक्ति को मानसिक अवसाद नही होता।

हिमालय अश्वगंधा टैबलेट है एन्टीबैक्टीरियल

हिमालय अश्वगंधा टैबलेट में जीवाणु रोधी गुण हैं। हिमालय अश्वगंधा टैबलेट घाव को पकने नही देती। घाव में पीसकर हिमालय अश्वगंधा टैबलेट लगाने से घाव जल्दी भर जाते हैं।

हिमालय अश्वगंधा टैबलेट मूत्रजनन, जठरांत्र और श्वसन तंत्र के संक्रमण में बहुत उपयोगी है। हिमालय अश्वगंधा टैबलेट इम्यून सिस्टम को बेहतर बनाता है। हिमालय अश्वगंधा टैबलेट का सेवन लाल रक्त कणिकाओं व सफेद रक्त कणिकाओं में वृद्धि करता है।

हिमालय अश्वगंधा टेबलेट रोकती है बुढ़ापे को

हिमालय हिमालय अश्वगंधा टैबलेट के सेवन से यौवनावस्था कायम रहती है और बुढापा नहीं आता। हिमालय अश्वगंधा टेबलेट शुक्राणुवर्धक एवं शक्ति प्रदान करने वाली है। हिमालय अश्वगंधा टैबलेट के सेवन से शरीर को ताकत मिलती है और स्पर्म बेहतर होते हैं।

हिमालय अश्वगंधा टेबलेट के सेवन से मजबूत होता है तंत्रिका तंत्र

हिमालय अश्वगंधा टेबलेट के सेवन से तंत्रिका तंत्र मजबूत होता है और मष्तिष्क मजबूत होता है। मस्तिष्क रीढ की हड्डी द्वारा जननांगों की मांसपेशियों को संदेश भेज कर संदेश का संचालन करता है और जननांगों की मांसपेशियों को शक्ति मिलती है।

हिमालय अश्वगंधा टेबलेट में पौष्टिक तत्व पाये जाते हैं जो शरीर के तनाव व चिंता को दूर करते हैं। हिमालय अश्वगंधा टैबलेट टेबलेट में पाये जाने वाले आयुर्वेदिक तत्व अनिद्रा, मानसिक तनाव,धकान व स्वप्न दोष को दूर करने में मददगार हैं।

स्टेमिना और सेक्सुअल टाइमिंग बढ़ाने के लिए पतंजलि का अश्वगंधा कैप्सूल बहुत लाभकारी माना जाता है। अश्वगंधा कैप्सूल को खाना खाने के बाद या रात में सोने से पहले दूध के साथ लिया जा सकता है। दिन में दो बार कैप्सूल को उपयोग में लेना चाहिए। 

हिमालय अश्वगंधा टेबलेट का उपयोग दिन में किसी भी समय किया जा सकता है इसको पानी के साथ लिया जा सकता है खाना खाने के बाद। और रात में सोने से पहले गुनगुने दूध के साथ भी इसका उपयोग किया जा सकता है। 

डाबर अश्वगंधा टेबलेट एक नेचुरल तरीके से बना उत्पाद है जिसमें अश्वगंधा मिला हुआ होता है। जो की तनाव, इम्यूनिटी और स्टेमिना से जुड़ी समस्याओं को दूर करता है। इसके उपयोग से सेक्स से जुड़ी समस्याएं जैसे काम टाइमिंग, थकान जैसी समस्याएं भी दूर होती है। 

अश्वगंधा टेबलेट प्राकृतिक उत्पादों से मिकर बनी होती है इसलिए इससे किसी भी तरह का कोई साइड इफेक्ट होने का खतरा नहीं रहता है। उसको दिन के समय खाना खाने के बाद और रात में सोने से पहले उपयोग में लिया जा सकता है। 

अश्वगंधा टेबलेट को उपयोग में लेने से बहुत सी समस्याओं से राहत पायी जा सकती है। यह तनाव, नींद में कमी और स्टेमिना से जुड़ी समस्याओ में काफी कारगर होता है। इसके उपयोग से स्टेमिना में वृद्धि होती है जिससे पूरे दिनभर थकान महसूस नहीं होती है। 

अश्वगंधा प्राय चूर्ण या टेबलेट के रूप में बाजार में उपलब्ध है। चूर्ण को आप दूध, घी, पानी किसी में मिक्स कर के ले सकते हो और टेबलेट को भी दूध या पानी के साथ लिया जा सकता है। सुबह और शाम दिन में दो टेबलेट का सेवन करना चाहिए। और चूर्ण को एक छोटा चमच जितना ही। 

अश्वगंधा सिर्फ पुरुषों के लिए ही नहीं अपितु महिलाओं के लिए भी लाभकारी होता है। महिलाओं में यह सेक्सुअल इन्फेक्शन को दूर करता है और घुटनों में दर्द, थायराइड की समस्या, और जनन क्षमता की समस्या को भी दूर करता है। यह एंटी ऐजिंग प्रोडक्ट के रूप में उपयोगी है। 

यदि आपको स्टेमिना में कमी, तनाव, थकान या सेक्स से जुड़ी कोई समस्या है तो आप हिमालय अश्वगंधा टेबलेट का प्रयोग कर सकते है। आप नियमित रूप से तीन या चार महिने तक इसका प्रयोग  करते है तो आपको इसके सकारात्मक प्रभाव देखने को मिल जाएंगे।  

अश्वगंधा और मिश्री को मिक्स कर के खाने से न सिर्फ स्वाद में फर्क पड़ता है अपितु स्वास्थ्य के लिए भी बहुत ज्यादा लाभकारी है। यह शुगर को नियंत्रित करता है और घुटनों के दर्द और सेक्सुअल समस्याओं को भी दूर करता है। स्टेमिना में वृद्धि और तनाव को दूर करने में इसकी महत्वपूर्ण भूमिका है। 

अश्वगंधा को खाली पेट लेने की अपेक्षा खाना खाने के बाद प्रयोग में किया जाना चाहिए। चूंकि जब हम खाना खाने के बाद इसका उपयोग करते है तो खाने में मिले हुए तत्व अश्वगंधा के गुणकारी तत्वों को अवशोषित कर शरीर के हर हिस्से तक पहुंचाते है। दूध के साथ भी इसका प्रयोग किया जा सकता है।  

अश्वगंधा पुरुषों और महिलाओं दोनों के लिए लाभकारी है लेकिन यह पुरुषों में विशेष तय सेक्सुअल समस्याओं को जड़ से दूर करता है। जैसे पुरुषों में नपुसंकता, शुक्राणुओं की कमी, और सेक्स टाइमिंग में कमी जैसी समस्याओं के लिए यह रामबाण साबित होता है। 

अश्वगंधा का अधिक मात्रा में उपयोग करने से आपको इसके नकारात्मक प्रभाव देखने को मिल सकते है। अधिक उपयोग से यह शरीर में गर्मी पैदा करता है जिससे पेट की समस्या, मुहँ में छालों की समस्या, अपच जैसी समस्याएं देखने को मिल सकती है। अतः अधिक मात्रा में उपयोग से बचना चाहिए। 

अश्वगंधा का अधिक इस्तेमाल पेट के लिए हानिकारक हो सकता है। इसका उपयोग करने से डायरिया जैसी समस्या पैदा हो सकती है। इसलिए इसके इस्तेमाल से पहले आप डॉक्टर की सलाह लें उसके बाद ही इसका सेवन करें। और जिनको ब्लड प्रेशर की समस्या हो उनको अश्वगंधा के प्रयोग से बचना चाहिए। 

जानिए क्या है हेमपुष्पा पीने के फायदे-Hempushpa Ke Fayde In Hindi

जानिए क्या है हेमपुष्पा पीने के फायदे

हेमपुष्पा एक आर्युवेदिक औषधि है। हेमपुष्पा स्त्रियों के लिए बहुत उपयोगी औषधि है। हेमपुष्पा महिलाओं में मासिक धर्म के समय होने वाली परेशानियों को दूर करने में सहायक होती है। महिलाओं को हेमपुष्पा पीने के फायदे बहुत सारे है।

हेमपुष्पा पीने के फायदे-Hempushpa Ke Fayde In Hindi

हेमपुष्पा का सेवन रक्त शुद्धि में मदद करता है। हेमपुष्पा मानसिक व शारीरिक विकारों में सामान रूप से उपयोगी है। हेमपुष्पा उन महिलाओं के लिए भी जिन्हे कोई भी समस्या नहीं है उपयोग किया जाता है। हेमपुष्पा निरोगी महिलाओं को स्वस्थ व ऊर्जावान बनाने में मदद करती है।

हेमपुष्पा उपयोगी है मूत्र समस्या के निदान में

हेमपुष्पा यूरिन को साफ़ करने में मद करती है। पेशाब के पीलेपन को दूर करती है। पेशाब के समय होने वाली जलन को दूर करती है। हेमपुष्पा मूत्र की अशुद्धियों को साफ करके पेशाब में होने वाली जलन को दूर करने में कारगर है।

हेमपुष्पा लाभदायक है वजन घटाने में

हेमपुष्पा में पायी जाने वाली औषधियां शरीर के हानिकारक टोक्सिन को दूर करती हैं। हेमपुष्पा शरीर से विषैले पदार्थों को बाहर निकाल कर वजन घटाने में मदद करती है। हेमपुष्पा के नियमित प्रयोग से शरीर फुर्तीला एवं हल्का होता है।

वजन कम करने में मदद करे
वजन कम करने में मदद करे

हेमपुष्पा गैस्ट्रिक समस्याओं को दूर करती है

हेमपुष्पा पेट में बनने वाली गैस की समस्या को दूर करने में उपयोगी है। हेमपुष्पा छोटी आंत व बड़ी आंत की बिमारियों को दूर करती है। हेमपुष्पा आँत के विचारों को दूर कर गैस की समस्या का समाधान करती है।

हेमपुष्पा हार्मोनल असंतुलन को दूर करती है

हेमपुष्पा में पायी जानेवाली जड़ी बूटियां हार्मोनल असंतुलन को दूर करने में सहायक हैं। महिलाओं में किशोरावस्था से लेकर प्रौढ़ावस्था तक अनेक मानसिक एवं शारीरिक परिवर्तन आते हैं। इन परिवर्तनों के कारण हार्मोनल डिस्बैलेंस भी होते हैं।

इन हार्मोनल असतुंलन की वजह से मुहांसे ,अनिद्रा, बालों का झड़ना ,अनचाहे बाल, वजन का बढ़ना या कम होना, चिंता एवं तनाव आदि हो जाते हैं। हेमपुष्पा हार्मोनल असंतुलन को दूर कर शरीर को स्वस्थ रखती है।

हेमपुष्पा मासिकधर्म की अनियमितताओं को दूर करती है

हेमपुष्पा के नियमित सेवन से महिलाओं की अनियमित मासिक चक्र की समस्या दूर होती है। कुछ महिलाओं में मासिक चक्र बहुत जल्दी जल्दी आता है जिसके कारण शरीर में खून की कमी हो जाती है।

कुछ महिलाओं में मासिक चक्र की अवधि बढ़ जाती है। इन मासिक विकारों में शरीर असहनीय दर्द होता है। हेमपुष्पा मासिक विकारों को दूर करती है।

हेमपुष्पा रजोनिवृति में लाभदायक

महिलाओं में 45 से 50 वर्ष की उम्र में रजोनिवृत्ति होती है। इस समय स्त्रियों में मानसिक एवं शारीरिक परिवर्तन होते हैं। इस समय शरीर एस्ट्रोजन हार्मोन बनाना बंद कर देता है। एस्ट्रोजन हार्मोन के कारण मासिक धर्म शुरु होता है। मासिक धर्म बंद होने से शारीरिक थकान, कमर दर्द, पीठ दर्द आदि की समस्या होती है। हेमपुष्पा इन तकलीफों को दूर करती है।

हेमपुष्पा गर्भवती महिलाओं के लिए बहुत फ़ायदेमंद

हेमपुष्पा में पायी जाने वाली औषधियां गर्भवती महिलाओं की समस्याओं को दूर करती हैं। गर्भवती महिलाओं को कमज़ोरी ,थकान, भूख न लगना आदि समस्याएं हैं। मॉर्निंग सिकनेस, भूख में कमी, खून की कमी आदि में भी हेमपुष्पा लाभदायक है।

हेमपुष्पा एनीमिया में उपयोगी

हेमपुष्पा में पायी जाने वाली गुणकारी औषधियां खून की कमी को दूर करती हैं। हेमपुष्पा में पाए जाने वाले तत्व शरीर में आयरन की मात्रा बढ़ाने में उपयोगी हैं।

हेमपुष्पा लाभकारी है पीरियड्स में

हेमपुष्पा माहवारी के समय होने वाले दर्द को कम करने में फ़ायदेमंद हैं। अगर हम दर्दनिवारक दवाओं का प्रयोग दर्द दूर करने मे करेंगे तो कुछ समय बाद हमारे शरीर में दवाएं नुक्सान करना शुरू कर देती हैं। पर आर्युवेदिक हेमपुष्पा दवा के कोई साइड इफेक्ट नहीं होते।

हेमपुष्पा के कुछ समय प्रयोग से शरीर के अंदर ताकत आती है। हेमपुष्पा के नियमित प्रयोग से शरीर में दर्द सहन करने की शक्ति आती है।

हेमपुष्पा लेने का तरीका

हेमपुष्पा सिरप के साथ टेबलेट आती है हेमपुष्पा सिरप को २ टीस्पून पानी के साथ लेना है सुबह शाम लेना है व इसमें जो टेबलेट होती है। उस टेबलेट को खाने के बाद सुबह और शाम को लेना है।

हेमपुष्पा में पायी जाने वाली औषधियां

हेमपुष्पा में अनेकानेक जड़ी बूटियां डाली गयी हैं जिनमे से कुछ नाम यहाँ दिए हैं .

ये सभी आर्युवेदिक गुणों से भरपूर प्राकृतिक जड़ी बूटियां हमारे शरीर को अंदर से शक्ति प्रदान करती हैं। आर्युवेदिक जड़ी बूटियों के प्रयोग से बनी होने के कारण हेमपुष्पा के साइड इफेक्ट्स नहीं होते।

हेमपुष्पा के कुछ अन्य लाभ

  • हेमपुष्पा पीरियड्स डिले होने पर बहुत उपयोगी है। हेमपुष्पा लगातार लेने से पीरियड्स फिर से नियमित हो जाते हैं।
  • हेमपुष्पा हार्मोनल असंतुलन को दूर करती है।
  • हेमपुष्पा मुहांसों को ठीक करती है।
  • हेमपुष्पा मासिक धर्म को नियमित करता है।
  • हेमपुष्पा गर्भवती महिला के लिए बहुत लाभदायक है।

धागे वाली मिश्री के फायदे है अनेक जानकर रह जाएंगे आप भी दंग

धागे वाली मिश्री के फायदे

 हम सभी मिश्री के स्वाद और उपयोग से परिचित हैं, लेकिन क्या आप जानते हैं कि धागे वाली मिश्री (या जिसे धागा मिश्री, dhaage wali mishri और dhage wali misri भी कहा जाता है) सिर्फ स्वादिष्ट ही नहीं बल्कि स्वास्थ्य के लिए भी बेहद फायदेमंद होती है? आज हम आपको बताएंगे इसके ऐसे फायदे जो शायद ही आपने पहले सुने होंगे।

धागे वाली मिश्री क्या होती है?

धागे वाली मिश्री एक प्रकार की शुद्ध मिश्री होती है, जो सफेद धागे पर क्रिस्टल के रूप में जमती है। इसे बनाने की प्रक्रिया पारंपरिक और प्राकृतिक होती है, इसलिए इसमें किसी तरह का रसायन नहीं होता।

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धागे वाली मिश्री के प्रमुख फायदे

1. ऊर्जा का प्राकृतिक स्रोत

dhaage wali mishri शरीर में ताजगी और ऊर्जा लाने का काम करती है। यह थकावट दूर करने और मानसिक स्पष्टता बढ़ाने में मददगार है।

2. पाचन में सहायक

भोजन के बाद मिश्री और सौंफ खाने की परंपरा का वैज्ञानिक कारण है। यह पाचन क्रिया को सक्रिय करती है और गैस की समस्या को कम करती है।

3. गले की खराश में राहत

धागा मिश्री को इलायची या काली मिर्च के साथ सेवन करने से गले की खराश और खांसी में राहत मिलती है।

4. आंखों की रोशनी बढ़ाने में मददगार

प्राकृतिक मिश्री, विशेष रूप से धागे वाली मिश्री, आंखों की रोशनी को तेज करने में मदद कर सकती है, खासकर बच्चों और वृद्धों के लिए।

5. शारीरिक कमजोरी में लाभदायक

थकान होना
थकान होना

जो लोग लगातार कमजोरी या थकावट महसूस करते हैं, उनके लिए रोजाना एक टुकड़ा dhage wali misri दूध के साथ लेना लाभदायक हो सकता है।

उपयोग करने के तरीके

  • एक टुकड़ा मिश्री सुबह खाली पेट खाएं।
  • मिश्री और सौंफ को मिलाकर भोजन के बाद सेवन करें।
  • मिश्री को दूध या गुनगुने पानी में मिलाकर पी सकते हैं।

ध्यान देने योग्य बातें (नुकसान)

  • मधुमेह (डायबिटीज़) के रोगियों को dhaage wali mishri से परहेज़ करना चाहिए।
  • अधिक मात्रा में सेवन करने से मोटापा और ब्लड शुगर बढ़ सकता है।

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FAQs: अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

Q1: क्या धागे वाली मिश्री और सामान्य मिश्री में अंतर होता है?
हाँ, धागे वाली मिश्री अधिक शुद्ध और प्राकृतिक होती है, जबकि सामान्य मिश्री में शुद्धता की कमी हो सकती है।

Q2: क्या बच्चे भी इसे खा सकते हैं?
बिलकुल, लेकिन सीमित मात्रा में। यह बच्चों के लिए ऊर्जा और स्वाद दोनों देता है।

Q3: इसे दिन में कितनी बार खाना चाहिए?
दिन में एक या दो बार, भोजन के बाद या दूध के साथ सेवन करना पर्याप्त है।

Q4: क्या यह मिश्री वजन बढ़ाती है?
यदि अधिक मात्रा में ली जाए तो वजन बढ़ सकता है, लेकिन सीमित मात्रा में यह स्वास्थ्य के लिए लाभकारी है।

निष्कर्ष

धागे वाली मिश्री, जिसे हम धागा मिश्री, dhaage wali mishri, या dhage wali misri भी कहते हैं, सिर्फ स्वाद में ही नहीं, स्वास्थ्य लाभों में भी बहुत आगे है। यदि आप इसे सही मात्रा में अपने दिनचर्या में शामिल करते हैं, तो यह आपकी सेहत को बेहतर बनाने में मदद कर सकती है।

मिश्री को गन्ने से सीधा नेचुरल तरीके से बनाया जाता है। गन्ने के रस की चासनी को किसी कप में डाल कर उसका क्रिस्टलीकरण किया जाता है। क्रिस्टल बनाते समय बीच में एक धागा रखा जाता है ताकि मिश्री के क्रिस्टल को कप से निकाल सके। 

मिश्री की तासीर ठंडी होती है। प्राय देखा जाता है की गर्मी के कारण मुहँ में छाले होना और गले के काग का लटकना जैसी समस्या देखि जाती है। मिश्री का सेवन गले को ठंडक प्रदान करता है। तासीर में ठंडी होने के कारण ही यह छालों और अन्य समस्या में लाभप्रद होती है।  

धागे वाली मिश्री गन्ने के रस से प्राकृतिक रूप से बनाई जाती है। इसमें किसी तरह का कोई रसायन नहीं डाला जाता है। गन्ने के रस को किसी कप में भर कर बीच में धागा डाला दिया जाता है और रस  को क्रिस्टल फॉर्मेट में परिवर्तित कर दिया जाता है। 

इलायची और मिश्री को बारीक पीस कर मिक्स करके इसका सेवन करने से गले से जुड़ी समस्याओं से छुटकारा पाया जा सकता है। शरीर में गर्मी के कारण छालों की समस्या देखी जाती है इलायची और मिश्री का सेवन छालों की समस्या में भी लाभकारी है।  

ईसबगोल और मिश्री को बारीक पीस कर पानी में घोलकर पीने से पाचन से जुड़े हुए विकार दूर होते है। यह पेट में बनी में अपच, गैस की समस्या, बदहजमी आदि को दूर करता है। यह मिश्रण पेट में ठंडक प्रदान करता है जो की पेट में जलन आदि समस्या को दूर करता है। 

प्राय मिश्री में दो वेरायटी मिलती है जिसमें एक तो बड़े बड़े क्रिस्टल धागे से एक दूसरे से जुड़े होते है और एक प्रकार में क्रिस्टल के बीच में धागा नहीं होता है। देखा जाए तो दोनों ही एक रूप हे बस बनाने की विधि में थोड़ा फर्क रहता है।  

प्राय लोग मिश्री और चीनी को एक ही रूप में देखते है लेकिन दोनों ही अलग अलग प्रकृति के होते है। मिश्री में चीनी की अपेक्षा सुगर की मात्रा कम होती है। मिश्री के सेवन से वजन नियंत्रित रहता है। और शुगर भी संतुलित रहता है।  

मिश्री के प्रकारों में धागे वाली मिश्री को अच्छा माना जाता है क्योंकि वो आज भी पुराने तौर तरीकों से बनती है। इसका निर्माण आज भी घरेलू औधयोगिक इकाइयों में होता है जिससे इसमें किसी तरह के केमिकल का प्रयोग नहीं होता है।  

प्राय चीनी में शुगर की मात्रा बहुत अधिक होती है क्योंकि चीनी को केमिकल मिक्स कर के बनाया जाता है। परन्तु मिश्री का निर्माण नेचुरल तरीके से किया जाता है। इसलिए मिश्री को खाने से शुगर लेवल बेलेन्स रहता है। केलेस्ट्रॉल की मात्रा भी नियंत्रित रहती है।    

मिश्री को हम चीनी के विकल्प के रूप में खा सकते है। चीनी की अपेक्षा मिश्री थोड़ी कम मीठी होती है परन्तु लाभकारी होती है। देखा जाता है की कई लोग चाय में चीनी की बजाय मिश्री का प्रयोग करते है। मिश्री को छालों की समस्या में भी खाया जा सकता है। 

मिश्री सेहत के लिए अच्छी मानी जाती है। आजकल हर मीठी चीज में चीनी का उपयोग होता है जिसमें शुगर की मात्रा अधिक होती है। जबकि मिश्री में चीनी की अपेक्षा शुगर की मात्रा कम होती है। अतः मिश्री के सेवन से मधुमेह जैसी समस्या को काफी हद तक कम किया जा सकता है। 

धागा मिश्री में धागे का प्रयोग इसलिए किया जाता है की जब मिश्री को बनाया जाता है तो लंबे साँचो का उपयोग किया जाता है। उन्ही साँचो में से मिश्री के क्रिस्टल को खींच के निकाल सके इसी लिए बीच में धागा डाला जाता है। अतः इसे खाने के उद्देश्य से नहीं डाला जाता है। 

खांड को गन्ने से रस से नेचुरल तरीकों से बनाया जाता है। इसमें किसी तरह का कोई केमिकल उपयोग में नहीं लिया जाता है। गन्ने के रस को गरम कर के उसमें देशी घी मिलाकर अच्छी तरह घुटाई की जाती है। इसमें किसी तरह के अनावश्यक केमिकल का प्रयोग नहीं होता है।  

जानिए क्या है बालों के लिए जड़ी बूटियों से भरपूर सेसा तेल के फायदे

जानिए क्या है बालों के लिए जड़ी बूटियों से भरपूर सेसा तेल के फायदे

चाहे पुरुष हो या स्त्री, हर किसी को लंबे और घने बाल बहुत पसंद आते हैं। हर कोई चाहता है कि उसे बालों से जुड़ी कोई समस्या ना हो और उनके बाल लंबे, घने और सुंदर बने रहें। परंतु इन सबके लिए बालों की बहुत देखभाल करनी पड़ती है और आज कल की भागदौड़ भरी ज़िंदगी में लोगों के पास इतना समय ही नहीं होता कि वो अपने बालों पर ध्यान दे सकें। इन सबके कारण उन्हे बालों से जुड़ी कई समस्याएँ जैसे बाल झड़ना, रूसी आदि का सामना करना पड़ता हैं। इन समस्याओं से छुटकारा पाना मुश्किल सा लगता है। ऐसे में इन समस्याओं से छुटकारा पाने के लिए सेसा तेल बहुत लाभकारी है। सेसा तेल के फायदे अनेक है। इस लेख में हम सेसा तेल के इन ही फ़ायदों के बारे में आपको बताएंगे।

क्या है सेसा तेल

सेसा तेल ऐसा तेल है जिसे क्षीर पाक विधि द्वारा बनाया जाता है। इस विधि का प्रयोग प्राचीन समय से होता आ रहा है और ये विधि सर्वोत्तम मानी जाती है। इस विधि में जड़ी बूटियों को दूध यानी क्षीर के साथ पकाया जाता है।

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सेसा तेल में पायी जाने वाली जड़ी बूटियाँ

सेसा तेल में अनेक प्रकार की जड़ी बूटियाँ पायी जाती है जो आपके बालों से जुड़ी कई समस्याओं को दूर करने में मदद करती है। सेसा तेल में भृंगराज, ब्राह्मी, चमेली, धतूरा, इलायची, इंद्रवर्णी, जती, गुंजा, नील, करंज के बीज, जटामांसी, नीम, मेहँदी, त्रिफला, मंदूर भस्म, रसोत, अकरकरा, यष्टिमधु, लिम्बोडी, वज और रसवाती आदि जड़ी बूटियाँ पायी जाती हैं।

सेसा तेल के फायदे

बालों को बनाए घने और स्वस्थ

सेसा तेल बालों को घना बनाने में बहुत फायदेमंद साबित होता है। इसमे मौजूद भृंगराज और त्रिफला बालों को घना बनाते हैं और उन्हे स्वस्थ रखने में भी मदद करते हैं।

बालों को बनाए घने और स्वस्थ
बालों को बनाए घने और स्वस्थ

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ब्लड सर्कुलेशन को करे बेहतर

सेसा तेल से सिर में मालिश करने से ब्लड सर्कुलेशन भी बेहतर होता है। ब्लड सर्कुलेशन के बेहतर होने से बालों की ग्रोथ भी बढ़ती है, बाल स्वस्थ और सुंदर रहते हैं और बालों का गिरना कम होना हैं।

तनाव को करें कम

आज कल हर कोई तनाव से पीड़ित है। हर किसी को किसी ना किसी बात पर तनाव रहता ही है। ये तनाव आपके शरीर और साथ ही आपके बालों के लिए अच्छा नहीं है। ज्यादा तनाव लेने से आपको बालों से जुड़ी कई समस्याएँ जैसे बालों का झड़ना, बालों का असमय सफ़ेद होना जैसी समस्याएँ हो सकती है।

ऐसे में सेसा तेल का प्रयोग आपके लिए बहत लाभकारी साबित हो सकता है। सेसा तेल में पायी जाने वाली जड़ी बूटियाँ आपके दिमाग को शांत रखता है। साथ ही तनाव को कम करने में मदद करता है। तनाव कम होने से आपका मूड भी अच्छा रहता है और आप अच्छे से अपने काम पर फोकस कर सकते हैं।

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बालों का झड़ना रोके

अत्यधिक तनाव के कारण बालों का झड़ना भी शुरू हो जाता है। ऐसे में सेसा तेल आपके बालों को झड़ने से भी रोकता है। इसमे मौजूद जड़ी बूटियाँ बालों को जड़ों से सिरे तक पोषण देती हैं जिस कारण बालों का झड़ना कम हो जाता है।

स्केल्प पर संक्रमण को रोके

कई बार अत्यधिक पसीने की वजह से या बालों की ठीक प्रकार से देखभाल न करने के कारण स्केल्प पर संक्रमण हो जाता है। जिसके कारण सिर में खुजली भी होने लगती है. इस संक्रमण को खत्म करने के लिए आप सेसा तेल का प्रयोग कर सकते हैं। सेसा तेल में नीम पाया जाता है जिसमे ऐन्टी फंगल और ऐन्टी बेक्टीरियल गुण पाये जाते है। ये संक्रमण को खत्म करने में मदद करते है।

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बालों को असमय सफ़ेद होने से रोके

कई लोगों के बाल समय से पहले ही पकने लगते हैं और सफ़ेद हो जाते हैं। बालों के असमय सफ़ेद होने के कई कारण हो सकते हैं। अगर आप भी इस समस्या से परेशान हैं तो आप सेसा तेल का प्रयोग कर सकते हैं। सेसा तेल आपके बालों को पोषण देता हैं और बालों को जल्दी पकने से रोकता है। जिस कारण बाल जल्दी सफ़ेद नहीं होते। इसमे मेहँदी भी पायी जाती है जो बालों को काला बनाए रखने में मदद करती है।

रूसी से मिले छुटकारा

आज कल तो रूसी की समस्या आम ही हो गयी है। सर्दियों में तो रूसी की समस्या और भी बढ़ जाती है। ऐसे में सेसा तेल का प्रयोग बहुत ही फायदेमंद साबित होता है। ये त्वचा को नमी प्रदान करता है और जड़ों को पोषण देता है जिस कारण रूसी की समस्या दूर हो जाती है।

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