हीमोग्लोबिन की कमी एक सामान्य समस्या है, जिसको हम प्रोटीन भी कह सकते है यह लाल रक्त कोशिकाओं (Red Blood Cells) में पाया जाता है। जैसा की हम जानते है की ये लाल कोशिकाए जो हमारे शरीर के चारो ओर ऑक्सीजन ले जाने का काम करती है, क्या आप भी गूगल पर हीमोग्लोबिन की कमी कैसे दूर करे । सर्च करते हुए हमारे इस ब्लॉग पर आये है तो आप बिलकुल सही जगह आये है, आज के इस लेख में हम आपको हीमोग्लोबिन की कमी कैसे दूर करे और साथ ही साथ हीमोग्लोबिन की कमी के कारण और घरेलु उपाय भी बताएँगे ।
हमारे शरीर में हीमोग्लोबिन की कमी से अनेक तरह की बीमारी हो सकती है, जैसे अनीमिया, किडनी में दिक्कत, आयरन की कमी इसलिए शरीर में हीमोग्लोबिन की कमी नहीं होने दे, आज के इस लेख में हम कुछ ऐसे खाद्य पदार्थों को बताएँगे जिनसे आप हीमोग्लोबिन को बढ़ा सकते है ।
हीमोग्लोबिन की कमी के कारण
नीचे हम आपको हीमोग्लोबिन के कुछ कारण बता रहे है, क्यूंकि किसी भी बीमारी को सही करने के लिए उसकी बजह पता होना बहुत जरूरी है की वह किन कारणों से हो सकती है, हीमोग्लोबिन के कारण कुछ इस प्रकार है ।
आयरन या विटामिन बी -12 की कमी हीमोग्लोबिन जैसी कमी के कारण है ।
शरीर में पूर्ण रूप से खून की कमी होना, हीमोग्लोबिन की कमी का मुख्य कारण है ।
शरीर में लाल रक्त की कोशिकाओं का नस्ट हो जाना।
यदि आपके शरीर में किसी भाग से रक्तस्राव होना या कोशिकाओं का निर्माण काम गति से होना।
हीमोग्लोबिन की कमी कैसे दूर करे
हीमोग्लोबिन की कमी दूर करने के लिए सबसे पहले रोगी को अपने खाने में हरी सब्जियों का सेवन करना चाहिए जैसे मेथी, पालक आदि। साथ ही सलाद, फल का सेवन करने से हीमोग्लोबिन की कमी दूर हो सकती है। नीचे हम आपको कुछ ऐसे खाद्य पदार्थों के बारे में बता रहे है जिनका सेवन करने से शरीर में हीमोग्लोबिन की मात्रा बढ़ती है।
चुकन्दर
चुकंदर एक ऐसा खाद्य पदार्थ है जिससे शरीर में हीमोग्लोबिन व खून की कमी दूर होती है, इसका सेवन करने से एनीमिया जैसी बीमारी से भी बच सकते है, साथ ही साथ इसकी पत्तियों में आयरन भरपूर मात्रा में होता है, क्यूंकि चुकंदर की तुलना में इसकी पत्तियों में अधिक गुना आयरन होता है।
चुकन्दर
अंगूर
अंगूर जैसे फल में कई तरह के पोषक तत्व मौजूद हैं, और आयरन भी अधिक होता है, हीमोग्लोबिन की कमी से सम्बंधित रोगी को अगर इसका सेवन सुबह-शाम करना चाहिए तो वह बहुत ही जल्द ठीक हो सकता है । इसका अधिक सेवन करने से विटामिन सी भी बढ़ती है, जो उम्र को रोकता है ।
बादाम
बादाम जिसमे कैल्शियम, मैग्नीशियम भरपूर मात्रा में होता है, साथ ही साथ 10 ग्राम ड्राई रोस्टेड बादाम में 0.5 मिलीग्राम आयरन होता है। इसका सेवन करने से हीमोग्लोबिन बढ़ता है।
गुड़ और मूंगफली
जैसा की हम जानते ही है की गुड़ में अधिक खनिज लवण होते है। इसलिए गुड़ और मूँगफली को मिलाकर दोनों को अच्छे से चबाकर इसका सेवन करे, ऐसा करने से शरीर में हीमोग्लोबिन की कमी नहीं होती है।
हरी सब्जियां
आपको ऊपर की ओर बताया की हरी सब्जिया हीमोग्लोबिन की कमी को दूर करने में सबसे ज्यादा लाभदायक होती है, क्यूंकि हरी सब्जियों में हीमोग्लोबिन बढ़ाने वाले तत्व ज्यादा मात्रा में पाये जाते है। इसलिए अपने शरीर में हीमोग्लोबिन की मात्रा भरपूर बढ़ाने के लिए ज्यादा से ज्यादा हरी सब्जियां को अपने भोजन में शामिल करे।
अंकुरित आहार
अंकुरित आहार जैसे- चना, मूंगफली, गेहूँ और मोठ आदि इन सब का सेवन अधिक करने से हीमोग्लोबिन की कमी दूर हो जाती है, अगर इसमें आप नीबू मिलाकर सेवन करते है तो और अच्छा रहता है ।
अनार
अनार में कैल्सियम और प्रोटीन, फाइबर कार्बोहाइड्रेट और साथ ही साथ आयरन की भी भरपूर मात्रा होती है, इसलिए रोज़ाना एक गिलास अनार का जूस पीने से हीमोग्लोबिन की मात्रा बढ़ती है और खून की कमी भी नहीं होती हैं ।
सूखी किशमिश
किशमिश में बी1, बी2, कैल्शियम, आयरन, फॉस्फोरस, तथा मिनरल्स, आयरन और कैल्शियम की मात्रा बहुत अधिक होती है, इसका सेवन आप सुबह को खली पेट करे ऐसा करने से हीमोग्लोबिन की कमी दूर होती है ।
सेब
सेब एक ऐसा फल है जो हीमोग्लोबिन के स्वस्थ स्तर को बनाये रखता है, और साथ ही सेब से एनीमिया जैसी बीमारियों के लिए भी लाभकारी होता है। रोज़ाना एक सेब का सेवन करे आपको हीमोग्लोबिन से सम्बंधित रोग की होगी ।
तुलसी
तुलसी में कई तरह के पोषक तत्व मौजूद हैं, जो शरीर में खून की कमी नहीं होने देते है, इसका रोज़ाना सेवन करने से हीमोग्लोबिन की मात्रा बढ़ती है ।
शरीर में हीमोग्लोबिन कितनी मात्रा में होना चाहिए
हमरे शरीर में आयरन की स्वस्थ मात्रा 20-25 ग्राम होना चाहिए, इससे हीमोग्लोबिन की कमी नहीं होती है, और नहीं अधिक होती है, इसलिए शरीर में आयरन की मात्रा स्वस्थ होना चाहिए नीचे हम आपको महिलाएं और पुरुष की हीमोग्लोबिन की मात्रा बता रहे है, इससे काम हो तो डॉक्टर की सलाह लेना अनिवार्य है ।
शरीर के किसी भी हिस्से में सूजन का होना किसी बीमारी का संकेत होता है। इनमे से मुख्य है “पैर में सूजन” होना जो कि शरीर में द्रव के इकठा होने व जमा के कारण होता है। पैर में सूजन होना वैसे तो एक आम समस्या है लेकिन इस का बार बार होना किसी बड़ी बीमारी का संकेत होता है।
पैर में सूजन गुर्दे और शरीर के कई अन्य अंगों से जुड़ी बीमारी का संकेत करती है। पैर की सूजन में पैरों पर और एड़ियों पर फुलाव होना और पैरों का आकार बड़ा दिखाई देने लगता है। कई बार पैरों में दर्द नही होता लेकिन बाद में चल कर बहुत भयानक रूप धारण कर लेती है, जो कि हमारी ज़िंदगी में रुकावट बन जाती है। इसलिए हमारे लिए जरूरी है पैर में सूजन के लक्षण जानना और समय पर पैर में सूजन का इलाज करना।
पैर में सूजन के लक्षण
शरीर के अंगों में दर्द होना और जकड़न का महसूस होना।
चेहरे, आंखों और टखनों के पास फुलाव का होना।
त्वचा का सूजा, तना व चमकदार होना।
त्वचा को उंगली से दबाने पर वहाँ कुछ सेकंड के लिए गड्ढे का बन जाना और फिर उभर कर त्वचा का आना।
कही से गिरने पर पैर के मूड जाने के कारण पैर में मोच आने से सूजन हो सकती है। बहुत देर तक पैरों को लटका कर बैठे रहने से सारा खून नीचे की और इकठा होने से भी पैरों में सूजन आने का कारण बन सकते हैं। यह होता है गृतवकर्षन बल की वजह से जिस से खून नीचे की और इकठा हो जाता है।
दूर तक चलना
दूर तक पैदल चलने से या फिर ज्यादा दौड़ना भी दोनों पैरों में सूजन के कारण हो सकता है।
ह्दय की बीमारी
जिन लोगों में ह्दय की बीमारी होती है उन के ह्दय के ठीक से काम ना करने के कारण द्रव नीचे जमा हो जाता है जिस से पैरों में सूजन हो जाती है। इस प्रकार अगर पैरों में सूजन हो तो इस का उपचार सही ढंग से कराना चहिए क्योंकि यह ह्दय से जुड़ी बीमारी के कारण भी हो सकता है।
ह्दय की बीमारी
लिवर और गुर्दे की बीमारी
जिन लोगों में लिवर व गुर्दे के रोग होते हैं उनमें अलुब्युमिन प्रोटीन कम हो जाता है। जिस से द्रव रिसने लगता है और यह पैरों में सूजन आने का कारण बनता है।
दवाएं
कई बार हमारे द्वारा किसी अन्य बीमारी के लिए लई गयी दवाइयां भी पैरों में सूजन आने का कारण बन जाती हैं।
गर्भावस्था
गर्भावस्था में पैरों की सूजन होना एक आम समस्य है अक्सर गर्भवती औरतों में यह पाई गई है। यह गर्भवती औरत में खून की मात्रा बढ़ने के कारण भी होता है। लेकिन यह गर्भावस्था के बाद खुद ही सही हो जाती है।
नस का रुक जाना व ब्लॉक हो जाना
टांग में किसी नस का रुक जाना व ब्लॉक हो जाना भी इस का एक कारण बन सकता है जिस से ह्दय में खून पम्प ना होने की वजह से पैर में सूजन होती है।
मोटापा
दोनों पैरों में सूजन के कारण है मोटापा। मोटापा होने की वजह से भी पैरों में सूजन हो सकती है।
पैरों में सूजन से बचाव
सुबह जल्दी उठें और नियमित प्राणायाम करें।
जंक फूड, बासी भोजन, ठंडे और खट्टे पदार्थों का सेवन बिल्कुल नहीं करना चाहिए।
अधिक नमक और अधिक मीठे का सेवन न करें।
सब्जियों में कद्दू का सेवन अवश्य करें। यह सूजन को कम करने में मदद करता है।
जहा तक हो सके पोष्टिक खाने का सेवन करें जिस से पाचन शक्ति मजबूत रहेगी और इस से बचाव हो सकता है।
अधिक पानी का सेवन न करें।
पैरों में सूजन का इलाज-Pairo Me Sujan Ka Ilaj
सूजन का उपचार है पैरों को हिलाते रहें जिस से जमा हुआ खून व द्रव में कम्पन पैदा होगा इस से आराम मिल सकता है।
पैरों में सूजन का इलाज है पैरों की मालिश करे जिस से पैरों में गर्मी पैदा होगी और गर्मी से खून में गति आने लगेगी।
इसकी जांच किसी डॉक्टर से करवा उनकी सलाह से दवाई लीजिये।
पैरों की सूजन कम नही होती तो ह्दय और लिवर की जांच करवाएं अगर यह लिवर की बीमारी की वजह से हो रहा है तो उस बीमारी का उपचार करवाएं।
पैर में सूजन कम करने के घरेलू उपाय
आम तौर पर पैरों का सूजन कम करने के लिए लोग सबसे पहले घरेलू नुस्ख़ों को ही आजमाते हैं। इस लेख में हम कुछ ऐसे घरेलू उपायों के बारे में बात करेंगे जिनकी मदत से पैर में सूजन का इलाज किया जा सकता है।
धनिया से करे पैर में सूजन का इलाज
धनिया के सूखे बीज और ताजा हरा धनिया दोनों में ही सूजन को ठीक करने के गुण होते है। पैरों में सूजन होने पर एक गिलास पानी को उबलने के लिए रख दें और इसमें तीन चम्मच साबुत धनिया डाल दें। इसे तब तक उबाले जब तक कि पानी आधा गिलास न रह जाये। अब इसे छान लें और एक चम्मच शहद डालकर दिन में दो बार इसे पिएँ।
पैर में सूजन का इलाज है गर्म पानी का सेंक
गरम पानी में नमक डालकर उसमें पैरों को डुबाएँ जब पानी ठण्डा हो जाए तब पैरों को निकाल लें। गरम पानी के सेंक से पैर में सूजन कम होती है।
पैरों के सूजन में फायदेमंद है कॉन्ट्रास्ट हाइड्रोथेरेपी
पैरों में सूजन को दूर करने के लिए आप कॉन्ट्रास्ट हाइड्रोथेरेपी भी कर सकते हैं। इस थेरेपी के लिए दो अलग-अलग टब में ठंडा और गर्म पानी भर लें। पहले अपने पैरों को 3-4 मिनट गर्म पानी में डाल कर रखें, इसके तुरंत बाद पैरों को 1 मिनट तक ठंडे पानी में डालें। इसी प्रक्रिया को 15 से 20 बार दोहराएँ जब तक सूजन न चली जाए। गर्मियों के मौसम में ठन्डे पानी पर इस प्रक्रिया को खत्म करे और सर्दियों के मौसम में इस प्रक्रिया को गरम पानी पर खत्म करे। इस प्रक्रिया को रोजाना दोहराएँ।
नींबू पानी भी है पैरों में सूजन का इलाज
एक गिलास गुनगुने पानी में एक नींबू का रस और एक चम्मच शहद मिलाकर नियमित रूप से सेवन करने से शरीर में मौजूद विषाक्त पदार्थ बाहर निकल जाते हैं। यह पैरों के साथ साथ शरीर के दूसरे हिस्सों में होने वाली सूजन को भी दूर करता है।
नींबू
पैर में सूजन का इलाज करता है जैतून का तेल
थोड़े से जैतून के तेल को गरम करे अब इस में दो-तीन लहसुन की कली काटकर भून लें और भून जाने पर इसमें से लहसुन अलग कर लें। इस तेल से मालिश करने से पैरों की सूजन ठीक होती है और दर्द से भी आराम मिलता है।
पैर में सूजन कम करता है अदरक का सेवन
एक गिलास पानी में एक छोटे टुकड़े अदरक को डालकर उबालें। अच्छी तरह पक जाने पर इसे गुनगुना करके पिएँ या फिर चाय में अदरक का इस्तेमाल करें।
डॉक्टर के पास कब जाना चाहिए ?
अनुचित खानपान एवं जीवनशैली के कारण कभी-कभी पैरों में सूजन आ सकती है। ऐसे में कुछ घरेलु उपाय एवं आराम करके आप खुद ही ठीक हो जाते है परंतु बार-बार पैरों में सूजन की समस्या रहने पर या एक सप्ताह से ज्यादा दिनों तक सूजन बने रहने पर यह गुर्दों से संबंधित या हृदय से संबंधित बीमारी होने का संकेत होता है। अत: इस समस्या को गंभीरता से लेते हुए डॉक्टर से सलाह लेकर उपचार करना चाहिए।
ड्राई स्कैल्प से छुटकारा पाने के लिए इस लेख में आपको कुछ घरेलू नुस्खों के बारे में बताया जा रहा है जो आपके लिए लाभकारी साबित होंगे जहां नुक्से निम्नलिखित है।
सेब का सिरका
यह एक अच्छा तथा सस्ता रास्ता है जिसके माध्यम से आप ड्राई स्कैल्प की समस्या से निदान पा सकते हैं। इसमें आपको ज्यादा तकनीकी ज्ञान की आवश्यकता नहीं है।
इस्तेमाल करने का तरीका
इसमें केवल दो से तीन चम्मच सेब का सिरका और थोड़ी सी रुई की आवश्यकता होती है चाहो तो आप दो से तीन चम्मच पानी का भी इस्तेमाल कर सकते हैं। सिरका तथा पानी को मिलाकर एक मिश्रण तैयार कर लीजिए उसके बाद रूई की सहायता से आप अपने बालों में लगाएं।
बालों में लगाने का तरीका यह है कि रूई को बालों की जड़ों तक पहुंचा सके जिससे कि वह सिरका नीचे तक अच्छे से पहुंच जाएं इस तरह से यह घरेलू नुक्से को आजमा सकते हैं।
एप्पल साइडर विनेगर
नींबू का रस
यह आमतौर से सभी लोग जानते हैं कि ड्राई स्कैल्प के लिए यह औषधि का काम करता है। नींबू का रस इसलिए लाभदायक होता है क्योंकि इसमें विटामिन सी तथा होता है साथ ही इस में एसिड भी पाया जाता है। विटामिन सी त्वचा से संबंधित विकारों को दूर करता है।
इस्तेमाल करने का तरीका
दो से तीन चम्मच नींबू का रस आपको अपने बालों में 5 मिनट तक रगड़ना है। उसके बाद उसे सूखने के लिए छोड़ दें सूखने के बाद आपको अच्छे पानी से सिर धो लेना है। आप देखेंगे कि आपके सिर में जो ड्राई स्कैल्प है उसमें कमी आ गई है। यह प्रक्रिया लगभग हफ्ते में दो से तीन बार करना है।
एलोवेरा
जैसा कि आप जानते हैं एलोवेरा एक औषधि पौधा है। जिसमें यह भी गुण होता है कि किसी फंगस तथा बैक्टीरिया को नष्ट कर सकता है। इस कारण से हम इसका इस्तेमाल ड्राई स्कैल्प में कर सकते हैं।
इस्तेमाल करने का तरीका
एक एलोवेरा की पत्ती तथा पानी की आवश्यकता होती है। एलोवेरा की पत्ती से जेल निकालकर उसको पानी में मिला दे जिससे की एक जूस बनकर तैयार हो जाएगा। जूस का इस्तेमाल आप अपने सिर में 20 मिनट तक की मालिश करने में करें यह प्रक्रिया हफ्ते में दो बार करें इससे आपको ड्राई स्कैल्प से राहत मिलेगी।
अंडा
एक शोध में पाया गया कि अंडा का इस्तेमाल भी इस ड्राई स्कैल्प के निदान के लिए किया जा सकता है । इसमें ऐसे गुण होते हैं जो स्वास्थ्य के साथ-साथ बालों से संबंधित विकारों को भी दूर करता है।
इस्तेमाल करने का तरीका
आप एक अंडे की जर्दी ले, ऑलिव आयल तथा एक चम्मच नींबू का रस लें इसको अच्छे से मिला ले मिलाने के बाद इस मिश्रण को 15 मिनट के लिए छोड़ दें। 15 मिनट के बाद आप इसको अपने सिर में लगा सकते हैं। लगाने के पश्चात 30 मिनट तक अपने बाल ना धोए उसके पश्चात आप अपने बाल धो सकते हैं।
इस प्रक्रिया को सप्ताह में एक बार या दो बार कर सकते हैं।
मेथी के बीज
मेथी के बीज में भी औषधि गुण होते हैं। यह बालों की मजबूती के साथ साथ हाइड्रेट रखने में भी सहायक होते हैं क्योंकि इन बीजों में निकोटीन एसिड तथा कुछ आवश्यक प्रोटीन पाए जाते हैं जो बालों को स्वस्थ रखने के लिए लाभकारी होते हैं।
इस्तेमाल करने का तरीका
इन बीजों का इस्तेमाल इस प्रकार करें आपको दो चम्मच मेथी के बीज लेना है तथा आधा कप पानी लेना है। मेथी के बीज को पानी में रात भर भिगोकर रख दे सुबह उठकर इसे पीस कर पेस्ट बना ले पेस्ट बनाने के बाद आप अपने बालों में अच्छे से लगाए।
इसे 30 मिनट तक लगाकर रखें तत्पश्चात आप अपने बाल ठंडे पानी से धो ले।
आप देखेंगे कि ड्राई स्कैल्प की मात्रा कम हो गई है।
बेकिंग सोडा
बेकिंग सोडे में भी एंटीबैक्टीरियल रसायन पाए जाते हैं जिससे आप अपने बालों को स्वस्थ रखने में इस्तेमाल कर सकते हैं। आपको इस बात का ध्यान रखना पड़ेगा कि इसका ज्यादा उपयोग करने से बालों को क्षति भी पहुंच सकती है।
इस्तेमाल करने का तरीका
तीन से चार चम्मच बेकिंग सोडा तथा तीन से चार चम्मच ही गुलाब जल का इस्तेमाल करें। इन दोनों को मिलाकर एक पेस्ट बनाने पेस्ट बनाने के तत्पश्चात 2 मिनट तक अपने बालों में इसे लगाकर अच्छी तरह से मालिश करें।
इस प्रक्रिया को आप चाहो तो सप्ताह में दो से तीन बार कर सकते हैं। यह आपके बालों के लिए लाभकारी सिद्ध होगा।
बालों की इस समस्या से लगभग हर कोई परेशान रहता है। इस परेशानी को दूर करने के लिए लेख में आपको महत्वपूर्ण जानकारी दी गई है। आशा करता हूं कि मेरे द्वारा दी गई जानकारी से आप संतुष्ट होंगे तथा इन घरेलू उपाय को ड्राई स्कैल्प के निदान के लिए उपयोग करेंगे।
दिव्य किट एक चमत्कारिक किट है। इसमें अधिकतर सभी बिमारियों का इलाज संभव है। इसमें एक्सरसाइज ,एक्यूप्रेशर ,हिप्नोटिस्म सभी के द्वारा इलाज होता है। इस दिव्य किट के द्वारा हम स्वंय ही उपचार कर सकते हैं। दिव्य किट इंसान के शरीर के अंदर मौजूद तत्वों को एक्टिव करती है। इसमें ज्ञान मुद्रा एक्ससरसाइज, मैडिटेशन योगा एक्यूप्रेशर हिप्नोटिज्म द्वारा बिमारियों का इलाज होता है।
कोई भी बीमारी शरीर में घर तब ही कर सकती है ,जब हमारा शरीर अंदर से कमजोर हो। ये सारी क्रियाएं हमारे शरीर को अंदर से साफ़ रखती हैं। दिव्य किट में खान पान योग, व्यायाम को अपनाकार हम अपनी बिमारियों से छुटकारा पा सकते हैं। इसमें प्राकृतिक और जैविक रूप से शुद्ध घटक पाये जाते हैं। स्वर्ण भस्म, मोती भस्म, लवण भास्कर और कई प्रकार के अन्य बहुमूल्य घटक पाये जाते हैं।
40 से 50 साल की उम्र में दिव्य किट के प्रयोग से आगे जाकर शरीर में कोई समस्या नहीं आयेगी। दिव्य किट शरीर के शुद्धि करण में उपयोगी है। यह एक आर्युवेद औषधि के रूप में शरीर की सभी स्वास्थ्य सभी समस्याओं का समाधान करती है।
दिव्य किट बिमारियों को रोकने और शरीर को रोग मुक्त करने के लिए सावधानी बरतने में उपयोगी है।
दिव्य किट के फायदे
दिव्य किट की आलौकिक शक्ति टैबलेट के फायदे
दिव्य किट में आलौकिक शक्ति नामक टैबलेट होती है। यह टैबलेट थाइरोइड के उपचार में कारगर होती है। थाइरोइड ग्रंथि के ऊपर कार्बन एवं केमिकल की परत जम जाती है। आलौकिक शक्ति टैबलेट के नियमित इस्तेमाल से यह परत हटने लगती है। इस परत के हटते ही थाइरोइड भी ठीक हो जाता है।
दिव्य किट की परम शुद्धि टैबलेट के फायदे
दिव्य किट में परम शुद्धि टैबलेट होती है। यह टेबलेट शरीर में वाले सभी तरह के फंगल इन्फेक्शन को रोकने में कारगर होता है। इसे एक दिन खाने से ही बैक्टीरिया वाइरस मर जाते हैं।
दिव्य किट
दिव्य किट में दिव्य शक्ति पाउडर
दिव्य मे पाया जाने वाला दिव्य शक्ति पाउडर शरीर पर लगाने पर नकारात्मक ऊर्जा को नष्ट करता है।
दिव्य शक्ति पाउडर शरीर के ऊर्जा पुंज को सकारात्मक बनता है।
दिव्य किट में है दिव्य साधना सी डी
दिव्य किट में दिव्य साधना नामक सी डी है जिसे पढ़कर हम बिमार नही पढेंगे। दिव्य साधना सी डी के प्रयोग से जो बिमारी है उसमें लाभ हो जायेगा।
दिव्य साधना सी डी में योग व मेडिटेशन का समावेश है। दिव्य साधना सी डी 3 मिनट की अवधि की है। दो गिलास गर्म पानी पीकर खाली पेट दिव्य साधना सीडी को फौलो करना चाहिए।
दिव्य साधना सी डी को फौलो करने से हम कभी बिमार नही पढेंगे।
दिव्य किट में है एक पुस्तक
दिव्य किट में है एक पुस्तक। इस पुस्तक में शरीर के सात ऊर्जा चक्रो के बारे में बताया गया है। इन सातों ऊर्जा चक्रो से शरीर का ऊर्जा पुंज बनता है। ये सातों ऊर्जा चक्र रीढ़ की हड्डी में पाये जाते हैं। ऊर्जा चक्रों में कमियों के कारण ही शरीर मे बीमारियां घर बनाती हैं।
इस पुस्तक में हर ऊर्जा चक्र से सम्बंधित बीमारी का नाम व उसे ठीक करने के तरीके के बारे में गया है। जिस चक्र मे समस्या है ,उस चक्र की मालिश करना सिखाया गया है। यह मालिश शरीर के सात चक्रो को संतुलित करती है।
दिव्य में है एक सी डी दिव्य्र ज्ञान
इस सी डी में क्या कब और कितना खाना है और क्या नहीं खाना है बताया गया है।
दिव्य किट के उपयोग
दिव्य किट शरीर के सात चक्रो को संतुलित करके सात उर्जा जागरूकता केंद्रों को संतुलित करता है।
दिव्य किट को आर्युवेदिक पदार्थों से बनाया गया है। दिव्य किट लिवर की कार्य क्षमता को बढ़ाने में मदद करती हैं।
दिव्य किट के साइड इफेक्ट नहीं होते जबकि थायराइडबीपी व हर्ट की बिमारियों में हम सालों साल दवाइयाँ खाते हैं। हर दवा के साइड इफेक्ट्स होते हैं जिनके कारण फाइब्राइड,यौनरोग यहां तक कि कैंसर होने की भी संभावना होती है।
सरदर्द, बदन दर्द, कमर दर्द होने पर खायी जाने वाली पेन किलर के भी काफी दुष्प्रभाव होते हैं। किडनी,लिवर में भी समस्या आती है। दिव्य किट के साइड इफेक्ट नहीं होते जबकि थायराइड बीपी व हर्ट की बिमारियों में हम सालों साल दवाइयाँ खाते हैं। हर दवा के साइड इफेक्ट्स होते हैं जिनके कारण फाइब्राइड,यौनरोग यहां तक कि कैंसर होने की भी संभावना होती है।। सरदर्द
दिव्य किट शरीर का उर्जा पुंज ठीक करता है। ब्रह्मांड से उर्जा लेकर हम ऊर्जा वान बनते हैं। दिव्य वटी शरीर की नकारात्मक ऊर्जा को सकारात्मक ऊर्जा में बदलती है। शरीर के अंदर रीढ़ की हड्डी में सात उर्जा चक्र होते हैं। सातों ऊर्जा चक्र मिला कर ऊर्जा पुंज बनाते हैं।
दिव्य किट बिमारियों से सुरक्षा प्रदान करती है। दिव्य किट बिमारियों को दूर करती है।
दिव्य किट के तरीके और एक्सरसाइज करने से थायराइड ठीक हो सकता है।
दिव्य किट का चालीस दिन का प्रयोग 4,200 रूपये का है।
दिव्य किट शरीर के सभी अंगों को स्फूर्ति प्रदान करती है। दिव्य किट वजन कम करने में मददगार है।
दिव्य किट शरीर के हार्मोनल लेवल को संतुलित करती है। दिव्य किट बिना किसी साइड इफेक्ट्स के हार्मोंस को संतुलित करती है।
दिव्य किट में जड़ी बूटी के अव्यय पाये जाते हैं। दिव्य किट शरीर को बिमारियों से सुरक्षा प्रदान करती है। दिव्य किट शरीर के हानिकारक पदार्थों को बाहर निकालती है।
दिव्य किट में उपयोगी हीलिंग तकनीक होती है। हीलिंग प्रकिया लिवर को स्वस्थ बनाए रखती है। दिव्य किट स्वस्थ जीवन पद्धति को बढावा देती है।
दिव्य किट शरीर का अंदर से शुद्धिकरण कर शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत करती है।
शतावरी एक जड़ी बूटी है। इसकी लता फैलने वाली और झाड़ीदार होती है एक एक बेल के नीचे कम से कम सौ से अधिक जड़े होती हैं। यह जड़े लगभग 20 से 30 सेंटीमीटर लंबी होती हैं। इनकी जड़ों के बीच में कड़ा रेसा होता है। जिसे शतावरी कहा जाता है। शतावरी दो प्रकार की होती है। सफेद शतावरी और पीली शतावरी। पीली शतावरी अत्यधिक लाभकारी होती है। पतंजलि शतावरी चूर्ण पीली शतावरी की जड़ों से ही बनाया गया है इस पतंजलि शतावरी चूर्ण के फायदे अनेक हैं।
यह अनिद्रा में कामगार होती है। गर्भवती महिलाओं के लिए शतावरी अति लाभकारी है। इससे गर्भस्थ शिशु स्वस्थ होता है। महिलाओं को माँ बनने के बाद स्तन में दूध की कमी होती है ऐसी स्थिति में शतावरी का चूर्ण अत्यधिक लाभदायक होता है। नवयौवना के ब्रेस्ट बढ़ने के लिए भी शतावरी का चूर्ण प्रयोग किया जाता है।ल्युकोरिया जैसी बीमारी में शतावरी का चूर्ण अत्यधिक फ़ायदेमंद होता है। तो आइए जानते हैं शतावरी के फायदे।
पतंजलि शतावरी चूर्ण के फायदे-Patanjali Shatavari Churna Benefits In hindi
शतावरी उपयोगी है स्तनों से दूध बढ़ाने में
शतावरी एक शक्तिवर्धक औषधि है वे स्त्री जो बहुत कमजोर होती है उनके स्तनों से दूध कम आता है। पतंजलि शतावरी चूर्ण को गर्म दूध के साथ पीने से मां के स्तनों में दूध की वृद्धि होती है
पतंजलि शतावरी चूर्ण फ़ायदेमंद है गर्भवती मां के लिए
पतंजलि शतावरी चूर्ण के सेवन से गर्भस्थ शिशु स्वस्थ होता है और मां भी स्वस्थ रहती है गर्भवती महिलाओं को पतंजलि शतावरी चूर्ण अश्वगंधा मुलेठी और भृगरज के साथ लेना चाहिए। यह सारी औषधियां दूध के साथ लेने पर गर्भवती महिला और उसके गर्भस्थ शिशु का स्वास्थ्य अच्छा रहता है।
पतंजलि शतावरी चूर्ण फ़ायदेमंद है स्टैमिना डिवेलप करने में
जो युवा अपना शरीर बनाना चाहते हैं उसके लिए वह जिम में जाकर घंटों एक्सरसाइज करते हैं और फिर हजारों रुपए का प्रोटीन पाउडर खरीदते हैं। उनके लिए पतंजलि शतावरी चूर्ण बहुत फ़ायदेमंद है। पतंजलि शतावरी चूर्ण को गर्म दूध के साथ लेने से मांसपेशियाँ मजबूत होती हैं।
पतंजलि शतावरी चूर्ण फ़ायदेमंद है ल्यूकोरिया में
वे महिलाएं जो सफेद पानी (ल्यूकोरिया ) की समस्या से काफी परेशान है। जिसके कारण उनके पेट और हाथ पैरों में हमेशा दर्द रहता है। उन्हें पतंजलि शतावरी चूर्ण रात को सोते समय लेना चाहिए कुछ समय में ही उनकी समस्या का समाधान होता है|
पतंजलि शतावरी चूर्ण फ़ायदेमंद है धात रोग में
पतंजलि शतावरी चूर्ण को दूध के साथ लेने से धात रोग में लाभ होता है।
पतंजलि शतावरी चूर्ण फ़ायदेमंद अनिद्रा में
वह स्त्री या पुरुष जी ने रात भर नींद नहीं आती वह नींद आने की बीमारी से परेशान है ऐसे लोगों को पतंजलि शतावरी चूर्ण को दूध में पकड़ कर लेना चाहिए। घी में मिलाकर खाने से नींद ना आने की समस्या दूर होती है।
नींद ना आना
पतंजलि शतावरी चूर्ण फ़ायदेमंद है ब्रेस्ट के विकास में
जिन युवतियों के ब्रेस्ट विकसित न हुए हो वो पतंजलि शतावरी चूर्ण का सुबह शाम दूध के साथ सेवन करती हैं तो वक्ष सुडौल होते हैं।
पतंजलि शतावरी चूर्ण फ़ायदेमंद है स्वप्नदोष में
जिन व्यक्तियों को स्वप्नदोष की समस्या होती है उन्हें शतावरी चूर्ण को मिश्री के साथ मिलाकर सुबह शाम गर्म दूध में डालकर पीना चाहिए इसे स्वप्नदोष की समस्या दूर होती है और शरीर स्वस्थ होता है।
पतंजलि शतावरी चूर्ण फ़ायदेमंद है रजोनिवृत्ति में
स्त्रियों में रजोनिवृत्ति के समय चिढ़चिढाहट होती है। थकान होती हैऔर बेचैनी होती है उन सारी परिस्थितियों में पतंजलि शतावरी चूर्ण का सेवन अत्यधिक फ़ायदेमंद है यह है मानसिक और शारीरिक थकान को दूर कर स्त्री के शरीर को ऊर्जावान बनाता है।
पतंजलि शतावरी चूर्ण स्त्रियों के प्रजनन अंगों को ताकत प्रदान करता है
पतंजलि शतावरी चूर्ण में प्राकृतिक रूप से फाइटोएस्ट्रोजन नामक हार्मोन होते हैं। जो कि गर्भाशय को मजबूत करते हैं। और साथ ही साथ स्तनों में दूध के स्तर को भी बढ़ाते हैं।
पतंजलि शतावरी चूर्ण है प्राकृतिक एंटीऑक्सीडेंट
पतंजलि शतावरी चूर्ण मुक्त कणों को कम करता है शरीर को गैस्टिक क्षेत्र के अंदर की परत की क्षति होने से बचाता है और अल्सर को बनने से रोकता है।
पतंजलि शतावरी चूर्ण दूर करता है। यूरिन की समस्याओं को पतंजलि शतावरी चूर्ण के सेवन से यूरिन का रुक-रुक कर आना दूर होता है व अन्य यूरिन की समस्याओँ का भी समाधान होता है|
पतंजलि शतावरी चूर्ण फ़ायदेमंद है पाचन तंत्र में
पतंजलि शतावरी चूर्ण के सेवन से पाचन तंत्र बेहतर काम करता है और फूड पाइप भी सुचारु रूप से काम करता है।
पतंजलि शतावरी चूर्ण शतावरी नामक जड़ी बूटी से बनाया जाता है यह एस्पैरेगस फैमिली की जड़ी बूटी होती है। शतावरी औरतों के लिए अत्यधिक लाभकारी होती है यह स्त्री के किशोरावस्था से लेकर रजोनिवृत्ति तक हर अवस्था में उसके स्वास्थ्य से जुड़ी समस्याओं के समाधान में काम आती है रखती है। बल्कि आदमियों के शरीर के लिए भी पतंजलि शतावरी चूर्ण अत्यधिक उपयोगी है यह उन्हें शारीरिक ताकत देता है उनकी दुर्बलता को दूर करता है और स्वप्नदोष जैसी बीमारियों को भी दूर करता है।
पीतल के बर्तन में रखा पानी पीने से होने वाले फायदे
पीतल तांबा जस्ता को मिलाकर बनाई गई एक मिश्र धातु है। यह धातु पीले रंग की होती हैं। इस धातु के बने बर्तनों का प्रयोग हिंदू धर्म में पूजा पाठ एवं अन्य धार्मिक व सांस्कृतिक कार्यों के आयोजन में किया जाता है। पीतल के बर्तनों का हिंदू धर्म में अत्यधिक प्रयोग किया जाता है एक बच्चे के जन्म होने से लेकर एक वृद्ध व्यक्ति के मृत्यु संस्कार तक में पीतल के बर्तनों की आवश्यकता होती है। भगवान विष्णु ,देवी मां बगलामुखी, मां लक्ष्मी इन सभी की पूजा में पीतल के बर्तन का प्रयोग किया जाता है।
पीतल के बर्तन में पानी पीने से व्यक्ति रोग मुक्त होता है
पीतल के बर्तन मे पानी पीने के फायदे अनेक हैं। पीतल की प्रकति गर्म होने के कारण पीतल के बर्तन में रखे हुए पानी से कफ दोष दूर होता है और खांसी जुकाम जैसे विकार नहीं होते।
पीतल के बर्तन में पानी पीने से वायु दोष की बीमारी भी दूर होती है पहले के लोग अपनी क्षमता अनुसार सोना चाँदी तांबा और पीतल के बर्तन प्रयोग करते थे। जिस कारण वह हमेशा स्वस्थ रहते थे। परंतु आजकल धातु के बर्तनों की जगह प्लास्टिक, एलमुनियम, काँच, मेलामाइन आदि ने ले ली है। जिसके कारण काफी सारी बीमारियाँ बढी हैं। इन बर्तनो के प्रयोग से शरीर के अंदर राहु का प्रकोप बढ़ा है। फल स्वरूप कैंसर जैसी बीमारियां शरीर में घर कर रही है।
पीतल के बर्तन न केवल शारीरिक दृष्टि से बल्कि वास्तु के अनुसार हमारे लिए लाभदायक होते हैं। पीतल के बर्तन हमारे लिए आर्थिक समृद्धि लेकर आते हैं।
पीतल के बर्तनों में बना हुआ भोजन अत्यधिक स्वादिष्ट होता है पीतल के बर्तन में बना हुआ भोजन स्वास्थ के लिए लाभदायक होता है पीतल बहुत जल्दी गर्म हो जाता है। जिस कारण गैस की बचत होती है। पीतल के बर्तनों में भोजन पकाने से ऊर्जा की बचत होती हैं। पीतल एक शुद्ध धातु है। पीतल के बर्तन मनुष्य को आरोग्यता एवं तेज़ प्रदान करते हैं। पीतल के बर्तन हमारे लिए बहुत उपयोगी होते हैं। पीतल के बर्तन हमारी आंखों के लिए पीले रंग के होने के कारण टॉनिक का काम करते हैं।
कई बीमारियों से बचाए
पीतल के बर्तन बहुत मजबूत होते हैं शुद्ध पीतल के बर्तन 70% तांबा और 30% जस्ता को मिलाकर बनाए जाते हैं पीतल एक बहुत उपयोगी और कीमती धातु है। जिसे हमारे पूर्वज प्राचीन काल से प्रयोग करते आ रहे हैं। इसलिए नहीं कि वह प्लास्टिक का प्रयोग नही जानते थे या फिर वह बहुत धनवान थे। हमारे पूर्वज पीतल के औषधीय गुणों को जानते थे। आजकल शरीर में कैंसर, टयूमर, एलर्जी जैसी छोटी बड़ी बीमारियां बढ़ती जा रही है। यह सभी बीमारियां हमारे गलत खानपान का परिणाम है।
हम सभी ने समय की बचत के लिए एवं सुंदरता और अपनी सहूलियत के लिए प्लास्टिक के बर्तनों में, कांच के बर्तनों में, नॉन स्टिक के बर्तनों में खाना बनाना खाना परोसना शुरू कर दिया है। इन सब के दुष्परिणाम भी है। जो हम नई-नई बीमारियों के रूप में देख रहे हैं। पीतल के बर्तन आजकल की दौड़ भाग वाली जिंदगी में संभाल पाना बहुत मुश्किल है। यह हम सब जानते हैं तो हर भोजन तो हम पीतल के बर्तनों में नहीं बना सकते। पर कुछ तो हमें अपने स्वास्थ्य के लिए करना ही होगा। इसलिए हमें पीतल के बर्तनों में पानी पीना चाहिए। पीतल के बर्तन में पानी पीना भी उतने ही स्वास्थ्यवर्धक है जितना पीतल के बर्तनों में खाना खाना।
पीतल के बर्तन
आँखों के लिए हैं फायदेमंद
पीतल का पीला रंग हमारी आंखों के लिए लाभदायक होता है यह हमें ऊर्जा प्रदान करता है स्वर्ण की तरह है पीतल भी अति शुभ कार्य होता है भगवान विष्णु को अति प्रिय है। बृहस्पति ग्रह की शांति के लिए पीतल बहुत लाभदायक होता है। पीतल के बर्तनों में पानी पीने से बृहस्पति ग्रह प्रबल होता है।
पानी को करे स्वच्छ
पीतल के बर्तन जल स्वच्छ करने में कारगर पीतल के बर्तन में रखा पानी पीने से पानी के अंदर मौजूद माइक्रो ऑर्गेनाइज्म खत्म हो जाते हैं और पानी स्वच्छ हो जाता है पीतल के लोटे, थाली को गरीब से गरीब परिवार भी अपनी कन्या को विवाह में देता है। उसके पीछे उद्देश्य यही होता है कि घर मैं भोजन पवित्र एवं स्वच्छ हो और साथ ही शुद्ध भी हो हर मांगलिक कार्य में पीतल के कलश या लोटे में जल भरकर रखा जाता है। उसके पीछे उद्देश्य यही होता है कि जल की कभी भी कमी ना हो।
अक्षय तृतीया के दिन सोने-चांदी तो सभी खरीदते हैं परंतु हमारे पूर्वज सदियों से पीतल के लोटे में जल भरकर भगवान के सम्मुख रखते आए हैं। उद्देश्य मात्र यही होता है कि जल की कभी भी कमी ना हो। घर में धनधान्य अन्न जल हमेशा भरा रहे। विवाह संस्कार के समय पीतल के लोटे में जल भर कर रखा जाता है। जो इस बात का प्रतीक है कि घर में पति पत्नी दोनों मिलकर रहेंगे।
घर को करे पवित्र
पीतल से जुडी परम्पराएँ बच्चे के जन्म के समय पीतल की थाली को पीटने की परंपरा है। जो बताती है कि घर में सौभाग्य आ गया है। एक नया वशंज संसार में जन्म ले चुका है। इसी प्रकार मृत्यु के समय अस्थि विसर्जन के पश्चात पीपल पर जल पीतल के कलश से ही चढ़ाया जाता है। पिंडदान के बाद पीतल के कलश में गंगाजल व सोने का टुकड़ा रखकर पूरे घर को पवित्र किया जाता है। यह सारी रीति रिवाज पीतल की पवित्रता व हमारे घर में पीतल की अनिवार्यता के विषय में बताते हैं। हम सभी को नए का प्रयोग करना चाहिए। पर नए के कारण पुराने को बिना सोचे समझे छोड़ देना कहीं की समझदारी नहीं है।
पीतल के बर्तन में पानी पीने से पानी पौष्टिक, शुद्ध स्वच्छ व शरीर के लिए लाभदायक होता है तो मैं आप सब से यही कहना चाहूंगी कि निकाल लीजिए अपने दादा दादी के जमाने के लोटे और बरतनों को और जगह दे दीजिए एक बार फिर से अपने रसोई घर में।
हमारे घर की रसोई में कई तरह के मसालों का इस्तेमाल किया जाता है। ये मसाले खाने के स्वाद को और बढ़ा देते है जिससे खाना और स्वादिष्ट हो जाता है। ऐसा ही एक मसाला है करी पत्ता। करी पता खाने के स्वाद के साथ साथ सुगंध भी बढ़ाता है। करी पत्ते का इस्तेमाल दक्षिण भारत में ज्यादा किया जाता है। इसका वैज्ञानिक नाम मुराया कोएनिजी है। करी पत्ता बहुत ही गुणकारी है। प्राचीन समय में करी पत्ते का इस्तेमाल इसकी सुगंध के कारण किया जाता था। बाद में इसके सेवन से होने वाले फ़ायदों को देखते हुए लोग इसका इस्तेमाल खाने में भी करने लगे। आज इस लेख में हम आपको करी पत्ता के फायदे और नुकसान के बारे में बताएँगे।
करी पत्ता में पाये जाने वाले पोषक तत्व
प्रति 100 ग्राम करी पत्ता में पाये जाने वाले पोषक तत्व हैं कैल्सियम 810 mg
फास्फोरस 600 mg आइरन 3.1 mg
केरोटीन 12600IU विटामिन सी 4 mg
निकोटिनीक एसिड 2.3 mg
करी पत्ता के फायदे-Kari Patta Ke Fayde
दिल के लिए है बेहतर-Kari Patta Ke Fayde In Hindi
करी पत्ता आपके दिल के लिए बहुत ही बेहतर साबित होता है। करी पत्ता में भरपूर मात्रा में एंटी ओक्सीडेंट्स और विटामिन सी पाया जाता है जो शरीर में मौजूद बैड कोलेस्ट्रॉल की मात्रा को कम करता है और गुड कोलेस्ट्रॉल की मात्रा को बढ़ाता है। इससे आपको दिल से जुड़ी बीमारियाँ होने का खतरा कम हो जाता है और आप स्वस्थ रहते हैं।
बालों की ग्रोथ में करे मदद-Kari Patta For Hair In Hindi
करी पत्ता बालों के लिए भी बहुत अच्छा होता है। ये बालों से जुड़ी कई समस्याओं को दूर करने में आपकी मदद करता है। करी पत्ता से आपके बाल मजबूत होते हैं और बालों की ग्रोथ भी अच्छी होती है। इससे बालों की जड़ें मजबूत हो जाती है। जिससे बालों का झड़ना कम हो जाता है और बाल लंबे हो जाते हैं। अगर आपके बालों में डेंड्रफ की समस्या है तो करी पत्ता इससे भी छुटकारा दिला सकता है। इसके लिए आप करी पत्ता के रस को अपने बालों में लगाएँ। फिर 1 घंटे बाद बालों को धो लें।
डायरिया और कब्ज़ में दे राहत-Kari Patta Ke Fayde
अगर आपको पेट से संबन्धित समस्याएँ जैसे डायरिया या कब्ज़ है तो आप करी पत्ता का सेवन भी कर सकते हैं। करी पत्ता डाइजेस्टीव एंज़ाइम्स को बढ़ाने में मदद करते हें। जिससे खाना अच्छे से पचता है और पेट से जुड़ी समस्याएँ नहीं होती। इसके लिए आप कच्चे करी पत्ता का सेवन भी कर सकते हैं।
कब्ज
फंगल और बेक्टीरियल संक्रमण से बचाए-Curry Leaves Benefits In Hindi
अगर आपको फंगल या बेक्टीरियल संक्रमण हुआ है तो आप करी पत्ता का प्रयोग कर सकते हैं। करी पत्ता में एंटी बेक्टीरियल गुण पाये जाते हैं जो संक्रमण को खत्म करने में मदद करते हैं। इसके लिए आप ताजे करी पत्तों को पीस कर उनका पेस्ट बना लें। अब इसे संक्रमण वाली जगह पर लगा लें।
वज़न घटाने में करे मदद-Kari Patta Ke Fayde In Hindi
अपने बढ़े हुए वज़न को घटाने के लिए आप करी पत्ता का सेवन कर सकते हैं। करी पत्ता में डाइक्लोरोमीथेन और एथिल एसीटेट पाया जाता है। ये आपके बढ़े हुए वजन को कम करने में मदद करता है। जिससे आप फिट और स्वस्थ रहते है।
डायबिटीज़ को करे कंट्रोल-Kari Patta Ke Fayde
करी पत्ता डायबिटीज़ को कंट्रोल करने के लिए भी बहुत लाभकारी साबित होता है। करी पत्ता में एंटी डाइबिटिक प्रॉपर्टीज़ पाई जाती है। जो आपके शरीर में शुगर लेवल को कंट्रोल करने में मदद करता है और इंसुलिन की मात्रा को बढ़ाने में भी सहायक है।
करी पत्ता के नुकसान
हर चीज़ की अति बुरी होती है। इसलिए करी पत्ता का ज्यादा सेवन करना आपके शरीर के लिए अच्छा नहीं होता।
गर्भवती स्त्री या स्तनपान कराने वाली स्त्रियॉं को डॉक्टर से परामर्श करने के बाद ही इसका सेवन करना चाहिए।
कई लोगों को करी पत्ते से एलर्जी भी हो सकती है। इसलिए अगर आपको एलर्जी है तो आप करी पत्ते का सेवन करने से बचें।
जब भी कोई व्यक्ति सेहत के बारे में सोचना शुरू करता है, उसे सबसे पहली सलाह दी जाती है कि गर्म पानी नींबू और शहद पीना शुरू कर दो। मोटापा घटाना हो या सुंदरता बढ़ाना दोनों के लिए नींबू शहद के गुण गाये जाते है। बहुत से कॉस्मेटिक अपने प्रोडक्ट में इनके होने का दावा करते है। लेकिन जैसा हम हमेशा कहते है हर चीज़ का एक नुकसान होता है। उसी प्रकार निम्बू और शहद के भी कुछ साइड इफ़ेक्ट होते हैं। आज हम उन्ही साइड इफ़ेक्ट के बारे में बात करेंगे। सबसे पहले बात करते है, गर्म पानी नींबू और शहद पीने की और नींबू और शहद के नुकसान की।
अगर आप सोचते है सुबह गर्म पानी नींबू और शहद पीने से आप पतले हो जाएंगे, तो आप बहुत बड़ी गलतफहमी में है।
नींबू के नुकसान-Nimbu Ke Nuksan In Hindi
निम्बू मे सिट्रिक एसिड होता है, जो अगर ज्यादा मात्रा में शरीर मे जाए तो समस्या पैदा कर सकता है। ज्यादा निम्बू के सेवन से शरीर मे डिहाइड्रेशन यानी पानी की कमी हो सकती है। इससे आपको पूरे दिन हलक सूखने की समस्या हो सकती है। गर्म पानी के साथ नींबू का रस लेने से यह डाइयूरेटिक की तरह से कार्य करता है। जरूरत से ज्यादा यूरीनेशन आपको डीहाइड्रेट कर सकता है।
ज्यादा नींबू पानी पीने से दांतों की प्रोटेक्शन लेयर यानी इनेमल को नुकसान पहुंचता है। जिससे दांत बहुत सेंसिटिव हो जाते है। आपको ठंडा गर्म लगने की समस्या हो सकती है।
इसका कारण निम्बू का एसिडिक नेचर है। आप चाहें तो नींबू पानी हमेशा स्ट्रॉ से पीएं, इससे नींबू की अम्लता दांतों को सीधे तौर पर नुकसान नहीं पहुंचाएगी।
नींबू पेप्सिन एंजाइम को एक्टीवेट करता है। यह एंजाइम प्रोटीन्स को तोड़ता है। गले और ईसोफेगस में पेप्सिन के एक्टीवेट होने से ही जलन की समस्या होती है। इसके अलावा एसिडिटी, खट्टी डकार, खराब डाइजेस्टिव सिस्टम, की समस्या होती है।
ज्यादा नींबू पानी पीने से किडनी स्टोन (पथरी) की समस्या भी हो जाती है। इसके अलावा गुर्दे और पित्ताशय की थैली में समस्या आती है।
निम्बू में उपस्थित टायरामाइन नामक तत्व माइग्रेन को बढ़ा सकता है। तो यदि आप माइग्रेन से ग्रस्त है और इसकी की दवा ले रहे हों तो उसके साथ नींबू पानी बिल्कुल न ले।
कई बार मुँह में सफेद रंग के दर्द भरे छाले हो जाते है, जिन्हें केंकर सोर्स कहते है। उसका कारण भी निम्बू का एसिडिक होना माना जाता है।
शहद के नुकसान-Shahad Ke Nuksan
अगर आप शहद से मोटापा कम करने का सोच रहे है तो भूल जाए। शहद बहुत ज्यादा मीठा होता है और इसकी जरूरत से ज्यादा मात्रा मोटापा बढ़ाती है।
शहद
आइए जानते हैं शहद का अधिक सेवन करने से होने वाले नुकसान…
स्माल इंटेस्टाइन में दिक्कत-Shahad Ke Nuksan
अगर आप लगातार शहद का अधिक सेवन कर रहे है तो, स्माल इंटेस्टाइन की न्यूट्रीटीएंट्स को सोखने की कैपेसिटी घट जाएगी। ऐसा शरीर मे फ्रक्टोज नामक तत्व की मात्रा बढ़ने से होता है। इससे शरीर धीरे धीरे कमजोर होने लगेगा।
डायबिटीज का खतरा-Shahad Ke Nuksan
शहद का लंबे समय तक अधिक सेवन करने से शरीर में शुगर की मात्रा बढ़ जाती है। अगर आप डायबिटीक पेशेंट हैं, तो शहद भूल कर भी न खाए। यदि नही तो सीमित मात्रा में सेवन करें।
वोमिट की फील-Shahad Ke Nuksan
अगर आप एक साथ अधिक मात्रा में शहद का सेवन करते हैं, तो इससे आपको उल्टी की फीलिंग हो सकती है। फ़ूड पॉइज़निंग हो सकती है। निम्बू और शहद के साथ मे सेवन करने से ब्लोटिंग सबसे बड़ी समस्या के रूप में उभरती है।
नींबू लगाने के नुकसान
त्वचा पर लेमन जूस लगाने से आपकी स्किन पर डार्क स्पॉट हो सकते हैं. खासकर यदि आप बाहर निकल रहे हो तो। क्योंकि सूर्य के प्रकाश में संपर्क में आने से सबसे खतरनाक तरह का सनबर्न हो सकता है। इस सनबर्न को Phytophotodermatitis कहते है।
नींबू के जूस में एसिड अधिक मात्रा में होता है। इसकी वजह से हाइपरपिगमेंटशन, इरिटेशन की समस्या होती है और त्वचा अत्यधिक संवेदनशील हो सकती है।
शहद लगाने के नुकसान
शहद स्किन के लिए अच्छा ही होता है और नुकसान न के बराबर होता है। लेकिन बहुत से लोग इससे एलर्जिक होते है। शहद से एलर्जी होने पर चेहरे पर लाल पैच, जलन और सूजन आ जाती है।
अर्जुन का पेड़ एक ऐसा औषधीय पेड़ है जिसके अनगिनत लाभ है। अर्जुन की छाल अंदर से लाल रंग की होती है और पेड़ से उतारने पर चिकनी चादर की तरह उतरती है। अलग अलग प्रान्त में इसे अलग अलग नाम से जाना जाता है जैसे घवल, ककुभ और नदीसर्ज। आयुर्वेद में इस पेड़ के बहुत से लाभ वर्णित हैं, आज हम बात करेंगे अर्जुन की छाल का प्रयोग कैसे करें के बारे में।
छाल में बीटा-सिटोस्टिरोल, इलेजिक एसिड, ट्राईहाइड्रोक्सी ट्राईटरपीन, मोनो कार्बोक्सिलिक एसिड, अर्जुनिक एसिड आदि भी पाए जाते हैं। पेड़ की छाल में पोटैशियम, कैल्शियम, मैगनिशियम के तत्व भी पाए जाते हैं। अर्जुन की छाल की तासीर ठंडी होती है ,यदि सर्दियों में इसका सेवन लहसुन के साथ किया जाए तो ज्यादा फायदेमंद होगा।
अर्जुन की छाल का प्रयोग कैसे करें-How To Use Arjun Ki Chaal
फ्रैक्चर होने पर पानी के साथ करे प्रयोग
ह्रदय को शक्ति देने के लिए दूध के साथ अर्जुन की छाल ली जाती है। यह फ्रैक्चर को ठीक करने में भी लाभकारी होता है। 50 मिली अर्जुन की छाल के पाउडर को पानी में मिलाकर दिन में खाना खाने से पहले एक या दो बार पिये।
एक चम्मच अर्जुन की छाल के पाउडर को 2 कप पानी में डालकर उबालें और आधा कप रह जाने पर छान कर गुनगुना पी लें। आप दूध के साथ अर्जुन की छाल को ले सकते हैं और इसके अर्क से बने कैप्सूल भी ले सकते हैं।
हाई ब्लड प्रेशर में दूध के साथ करे सेवन
तीन ग्राम चूर्ण की मात्रा सुबह-शाम दूध के साथ लेने से हाई ब्लड प्रेशर की समस्या में आराम मिलता है। चायपत्ती की बजाय इसकी छाल को पानी में उबालकर उसमें दूध व चीनी डालकर पीना हृदय रोग, हाई ब्लड प्रेशर व कोलेस्ट्रॉल में फायदेमंद है।
वजन कम करना है तो पियें काढ़ा
अर्जुन की छाल में हाइपोलिपिडेमिक पाया जाता है, जो कोलेस्ट्रॉल को कम अथवा नियंत्रित करता है। वजन कम करने में अर्जुन की छाल गुणकारी है। इसके लिए आप रोजाना सुबह और शाम के वक्त अपनी शारीरिक क्षमता अनुसार अर्जुन की छाल का काढ़ा पी सकते हैं। आपको जल्द असर देखने को मिल सकता है।
अर्जुन की छाल डायबिटीज़ रोग को भी नियंत्रित करती है। इसके लिए रोजाना रात में सोने से पहले आधा चम्मच अर्जुन की छाल पाउडर गुनगुने गर्म पानी में मिलाकर पिएं। इससे आपको बहुत जल्द डायबिटीज़ में आराम देखने को मिल सकता है।
अर्जुन की छाल का पेस्ट बढ़ाये आपकी सुन्दरता
अर्जुन की छाल सेहत और सुंदरता दोनों के लिए गुणकारी है। अगर आप त्वचा की खूबसूरती को बरकरार रखना चाहते हैं, तो अर्जुन की छाल का पाउडर और कपूर को मिलाकर अपने चेहरे पर लगाएं। इसके बाद जब पेस्ट सूख जाए, तो अपने चेहरे को साफ पानी की मदद से धो लें।
पेट दर्द होने पर साथ में लें हींग
पेट दर्द की शिकायत होने पर अर्जुन की छाल का प्रयोग किया जा सकता है। इसके लिए छाल में भुना हुआ हींग और काला नमक मिला कर दिन में दो बार इसका सेवन करना चाहिए।
एक कप पानी में तीन ग्राम अर्जुन की छाल का चूर्ण डालकर उबालें। पानी की मात्रा आधी रहने पर इसे सुबह-शाम गुनगुना पी लें। इससे बढ़ा हुआ कोलेस्ट्रॉल कम होता है।
अर्जुन की छाल के अन्य प्रयोग
अर्जुन की छाल में कसुआरिनिन (Casuarinin) नाम का एक तत्व मौजूद होता है जो स्तन कैंसर कोशिकाओं के विकास को रोकने के लिए बहुत प्रभावी है।
नारियल के तेल में इसकी छाल के चूर्ण को मिलाकर मुँह के छालों पर लगाने से मुख के छाले ठीक हो जाते हैं।
अर्जुन की छाल के चूर्ण को गुड के साथ लेने से बुखार में काफ़ी आराम मिलता है।
अर्जुन की छाल के काढ़े को यूरिन इन्फेक्शन में प्रयोग किया जा सकता है। इसके अलावा, यह गुर्दे या मूत्राशय की पथरी को निकालने में भी मदद करती है।
इसका काढ़ा बना कर पीने से ब्लीडिंग डिसऑर्डर की समस्या दूर होती है।
हड्डी टूटने, नील पड़ जाने, या अंदुरनी चोट लगने पर भी इसके काढ़े का सेवन तथा चोट पर लेप का इस्तेमाल लाभदायक है।
पीरियड के दौरान हैवी ब्लीडिंग में इसका काढ़ा तथा कान के दर्द में इसका एक बूंद रस लाभदायक है।
बारिश के मौसम के साथ ही ढेरो बीमारियां फैल जाती है। उन्ही में से एक खतरनाक बीमारी होती है डेंगू, डेंगू जो शुरू में एक सामान्य बुखार की तरह लगता है, लेकिन स्थिति बिगड़ने पर जानलेवा हो सकता है। डेंगू बुखार के लक्षण व उपचार की जानकारी के अभाव में मरीज की जान भी जा सकती है। डेंगू बुखार मादा एडीज एजिप्टी मच्छरों के काटने से होता है। जुलाई से अक्टूबर में मच्छरों के पनपने के लिए अनुकूल वातावरण होता है। इसलिए इन महीनों में बहुत ही ध्यान देने की जरूरत होती है।
इन मच्छरों के शरीर पर काली सफेद रंग की धारिया होती है। डेंगू से पीड़ित किसी इंसान को जब ये मच्छर काटता है तो खून के साथ ये वायरस भी मच्छर के शरीर मे चला जाता है। जब यहीं मच्छर किसी स्वस्थ व्यक्ति को काटता है तो उसे भी डेंगू हो जाता है।
डेंगू के लक्षण
ये तीन तरह का होता है, और उसी के आधार डेंगू के लक्षण होते है।
साधारण डेंगू के लक्षण
दिन से लेकर एक हफ्ते तक व्यक्ति बुखार से पीड़ित रहता है।
बुखार हो जाता है।
बहुत तेज ठंड महसूस होती है।
सरदर्द
आँखों मे दर्द होता है जो आंखों को हिलाने पर बढ़ जाता है।
मसल्स और जॉइंटस में दर्द होता है।
कमजोरी लगती हैं,
मुँह में कड़वापन,गले मे भी दर्द होता है।
फेस, गर्दन,और छाती पर रैशेस हो जाते है।
डेंगू हैमरेजिक बुखार के लक्षण
नाक, मुँह और मसूड़ों से खून आने की समस्या हो सकती है।
मरीज को हर समय गला सूखा महसूस होता है और प्यास लगती हैं,
स्किन पर घाव हो जाते है,
त्वचा बहुत ठंडी महसूस होती है,मरीज बेचैनी में कराहता रहता है,
सांस लेने में तकलीफ भी हो सकती हैं,
डेंगू हैमरेजिक बुखार
डेंगू शॉक सिंड्रोम के लक्षण
नाम से पता चल रहा कि मरीज शॉक में आ जाता है।
ब्लड प्रेशर गिर जाता है।
तेज बुखार महसूस होता है पर शरीर ठंडा रहता है।
मरीज का होश खोना आदि लक्षण होते है,नब्ज तेज चलने लगती है।
डेंगू बुखार से बचाव के उपाय
डेंगू से बचाव करने का सबसे सरल और जगजाहिर उपाय है, कि पानी को एक जगह इक्कठा न होने दे। पानी चाहे गंदा हो या साफ़
क्योंकि डेंगू का मच्छर रुके हुए पानी मे पनपता है,ये कुछ निम्न उपाय है जो हम अपना सकते हैं।
कूलर का पानी बदलते रहे।
पूरी बाजू के कपड़े पहने।
अगर आपकी छत या आँगन में कही भी कोई टायर, डब्बा, फालतू बाल्टी, घड़ा, बोतल जैसा कोई भी बर्तन रखा हो जिसमें पानी इक्कठा होता हो उसे तुरंत हटा दे।
पानी मे क्लोरीन का प्रयोग, डी डी टी का छिड़काव भी मददगार होता है।
इम्युनिटी बढ़ाने पर जोर दे।
फल और सब्जियों को भली प्रकार धोकर ही उपयोग करे
खुले में शौच ना करे,जंक फूड ना खाएं
डस्टबीन में गीला सूखा कचरा अलग रखें, और ढक कर रखे।
डेंगू से बचने के घरेलू उपाय
डेंगू में गिलोय का प्रयोग
डेंगू में गिलोय का प्रयोग, अब डेंगू के लिए संजीवनी बूटी की तरह प्रसिद्ध हो चुका है। यह डाइजेस्टिव सिस्टम को सही रखकर इम्युनिटी को स्ट्रांग बनाता है।
कैसे ले
डेंगू बुखार में आप गिलोय की डंडी को पानी में उबालें, पानी के आधा रह जाने पर छान लें और एक हर्बल ड्रिंक के रूप में उपयोग करें। इस पेय में कुछ तुलसी के पत्ते भी मिला सकते हैं।
तुलसी
तुलसी का प्रयोग न केवल इम्युनिटी बढ़ाता है बल्कि किसी भी तरह के संक्रमण को भी दूर करता है। इसके लिए आपको कुछ मेहनत भी नही करनी होगी।
कैसे ले
सुबह कभी भी तुलसी के पत्ते ले और पानी से निगल ले। आप तुलसी के पत्तो को साबुत दालचीनी और काली मिर्च के साथ उबाल कर काढ़ा भी बना सकते है।
मेथी
मेथी के पत्ते डेंगू से होने वाले दर्द में आराम देता है। बेचैनी से मरीज को नींद नही आती उसमें भी मेथी के पत्ते फायदेमंद है और नींद लाने में मदद करते है।
कैसे ले
मेथी के पत्तो का साग, आटे में मिलाकर रोटी या मेथी दाने का भिगोकर प्रयोग करें। रात को मेथी दाना भिगो दें और सुबह पानी से निगल ले।
डेंगू में कौन सा फल खाना चाहिए
क्या डेंगू में संतरे अच्छे होते हैं?
संतरे में मौजूद होते है,एन्टीऑक्सीडेंट जो कि किसी भी प्रकार के बैक्टीरियल या वायरल संक्रमण में प्रभावी है। साथ ही इसमे होता है विटामिन सी जो इम्युनिटी को बढ़ाता है।
कोलेजन के निर्माण में विटामिन सी की महत्वपूर्ण भूमिका के कारण यह सेलुलर मरम्मत को उत्तेजित करता है।
संतरा
कैसे ले
जूस की बजाय संतरे को खाएं, क्योंकि जूस की जगह संतरे का फाइबर ज्यादा उपयोगी है। शाम के बाद संतरे का सेवन न करें। यदि खांसी है तो संतरा न खाएं।
पपीते के पत्ते
पपीते के पत्ते में न्यूट्रिशनल एलिमेंट और आर्गेनिक एलिमेंट्स की जुगलबंदी प्लेटलेट नंबर्स बढ़ाती है। साथ ही इसमे मौजूद एंटीऑक्सिडेंट ऑक्सीडेटिव तनाव को कम करने और रक्त में अधिक विषाक्त पदार्थों को खत्म करने में सहायता करता है।
कैसे ले
पपीते के पत्तो को तुलसी या गिलोय के साथ उबालकर इस्तेमाल कर सकते है। साथ ही पपीते के पत्ते का रस निचोड़कर भी सेवन कर सकते है।
पपीते के फल को भी डाइट का हिस्सा बनाए खासकर सुबह के समय जरूर खाए।
जौं
जौ घास ब्लड प्लेटलेट्स को बढ़ाती है। इसलिए इसका सेवन बहुत लाभदायक होता है।
कैसे ले
जौ घास से बना काढ़ा पिएँ या इसे सीधे ही खा सकते है। जौं का सत्तू या रोटी के आटे में मिलाकर प्रयोग करे।
क्या डेंगू बुखार में नारियल पानी पी सकते हैं?
खूब नारियल पानी पिएँ। इसमें मौजूद जरूरी पोषक तत्व जैसे मिनरल्स और इलेक्ट्रोलाइट्स (electrolytes) शरीर को मजबूत बनाते हैं।
कैसे ले
नारियल पानी का सेवन तेज बुखार में न करे। शाम 4 बजे के बाद भी नारियल पानी न पीएं।
इनके अलावा कद्दू (पके हुए कद्दू को पीस कर उसमें एक चम्मच शहद डालकर पिएँ) चुकंदर, एलोवेरा का सेवन भी डेंगू और उसके लक्षणों में आराम देता है।
डेंगू में अक्सर डिहाइड्रेशन हो जाता है, इसलिए नारियल पानी बेहद फायदेमंद हैं ,हाइड्रेशन के साथ साथ इससे इलेक्ट्रॉलाइट्स की कमी पूरी होती है और प्लेटलेट्स काउंट बढ़ता हैं। प्लेटलेट्स की कमी का एक बड़ा कारण शरीर में लिक्विड की कमी भी होता है। नारियल पानी में मौजूद खनिज तत्व जैसे सोडियम और पोटैशियम आदि शरीर में इलेक्ट्रोलाइट्स का संतुलन बनाए रखते हैं और प्लेटलेट्स काउंटस भी बढ़ाते हैं। इसलिए मरीज को एक दिन में तीन बार नारियल पानी दे सकते हैं।
संतरा एंटीऑक्सीडेंट, फाइबर और विटामिन-सी जैसे पोषक तत्वों से भरपूर होता है। इसलिए डेंगू के मरीजो़ के लिए संतरे को अच्छा माना जाता है। इसमें भरपूर फाइबर होने से कब्ज़ की समस्या नहीं होती, रसदार होने से डिहाइड्रेशन दूर करता है, पोषक तत्वों से शरीर की कमजोरी दूर होती है। संतरा खाने का अगर रोगी का मन ना हो तो संतरे का जूस भी अच्छा विकल्प है। मुँह का स्वाद अच्छा हो इसके लिए हल्के से काले नमक के साथ भी जूस ले सकते हैं।
बुखार में शरीर का तापमान बढा़ रहता है इसलिए चावल, बहुत ज्यादा खट्टी या ठंडी चीजों को एवोइड़ करनें की सलाह दी जाती है, लेकिन रोटी आप खा सकते हैं। डेंगू बुखार में जितना हो सके हल्का भोजन ही खाना चाहिए, जैसे दाल, दलिया, खिचड़ी और तरल पदार्थ। क्योंकि बुखार में मुँह का स्वाद काफी खराब हो जाता है इसलिए स्वाद बदलने के लिए पतली दाल के साथ रोटी खा सकते हैं।
बुखार होने पर हल्के आहार का ही चुनाव करना चाहिए जो पचने में आसान हो, अक्सर बुखार में चावल और ठंडी चीजों से परहेज़ की सलाह दी जाती है लेकिन चावल की खिचड़ी खाना अच्छा माना जाता है। एक्सपर्ट भी यही कहते हैं कि डेंगू बुखार होने पर हल्का-फुल्का भोजन लेना चाहिए। लंच में आप थोड़ा चावल भी ले सकते हैं। ध्यान रखें कि शाम के वक्त चावल बिल्कुल न खाएं। चावल में कुछ ऐसे पोषक तत्व मौजूद होते हैं जो डेंगू में होने वाली शारीरिक कमजोरी को दूर करते हैं ।
डेंगू के मरीजों के लिए गिलोय बेहद फायदेमंद होता है। यह शरीर के इम्युन सिस्टम को मजबूत करता है, जिससे इंफेक्शन होने का खतरा कम हो जाता है। इसके पत्ते का जूस पीने से प्लेटलेट्स काउंट भी तेजी से बढ़ता है। गिलॉय के पत्तों का काढा़ अगर नियमित रूप से पीते हैं तो डेंगू बुखार होने की संभावना कम हो जाती है, गिलोय की बेल के 10 छोटे छोटे टुकड़े तोड़कर उसे 2 लीटर पानी में थोड़ा सा अदरक और दो चुटकी अजवाइन के साथ सात मिनट तक उबालकर, थोड़ा ठंडा करके, रोगी को खाली पेट पीने को दें तो बेहद लाभ मिलता है।
डेंगू के रोगियों को आहार में हाई प्रोटीन और आयरन से भरपूर डाइट को शामिल करने की सलाह दी जाती है। अंडे में प्रोटीन आयरन और कईं तरह के पोषक तत्व होते हैं। इसलिए डेंगू मरीज को अंडा खाने को दे सकते है। बस ध्यान रखें कि कैसे देना है * उबले हुए अंडे खाने को दें और अंडे का पीला हिस्सा हटाकर खाएं।अंडे का यह हिस्सा नुकसान पहुंचा सकता है। *अंडे को फ्राई करके खाना बिल्कुल एवोइड करें इससे उसमें फैट की मात्रा बढ़ जायेगी जो पचनें में मुश्किल करेगी। *और ध्यान रखें कि अधपके अंडे ना खायें इससे शरीर में इंफैक्शन का खतरा रहता है।
फीवर के दौरान पैरों के दर्द की शिकायत अक्सर होती हैं- डॉक्टर बताते हैं कि दो तरह के पेन सामने आते हैं, क्यूट रिएक्टिव आर्थराइटिस और क्रॉनिक जाइंट पेन। रिसर्च से ये भी पता चला है कि मांसपेशियों और जोड़ों में अधिक समय तक दर्द रहने के लक्षण एक ऑटो इम्यून स्थिति भी हो सकती है। अगर ऐसा है तो सामान्य व्यायाम और पैरासिटामोल के द्वारा इसमें आराम मिल जायेगा, लेकिन जब अधिक समय तक आराम न मिले तो फिजियोथेरेपी का सहारा लिया जा सकता है। इसके अलावा घर पर नियमित तेल मालिश भी की जा सकती है, जिससे आराम मिलेगा। मालिश के लिए नारियल, तिल और सरसो का तेल अच्छा रहेगा।
डेंगू के इलाज को लेकर कुछ लोगों का यह मानना है की डेंगू के दौरान प्लेटलेट्स की संख्या में कमी आने पर इलायची के सेवन से प्लेटलेट की संख्या बढ़ जाती है ,आइए जानते हैं ,क्या ऐसा होता है?डॉक्टर्स की माने तो इलायची के सेवन से प्लेटलेट्स की संख्या में किसी भी प्रकार की वृद्धि नहीं होती है । इलायची पाचन शक्ति को सुधारने और मरीज के मुंह का स्वाद ठीक करने के काम में आती है ।डेंगू के दौरान मरीज के शरीर में होने वाली गर्मी से भी इलायची का सेवन फायदा पहुंचाता है परंतु इसके सेवन से प्लेटलेट्स काउंट नहीं बढ़ता है ।