गर्भपात के लिए तुलसी का काढ़ा कैसे बनाये, कैसे होता है तुलसी के पत्तों से गर्भपात-Tulsi Se Garbhpat

गर्भपात के लिए तुलसी का काढ़ा कैसे बनाये

आजकल महिलाओं के लिए सबसे बड़ी समस्या अनचाहे गर्भ की होती है । प्रत्येक महिला चाहती है की यदि अनचाहा गर्भ ठहर गया है तो उसका निस्तारण घरेलू नुस्खों से हो जाए । यूं तो गर्भपात के लिए कई सारे घरेलू नुस्खे (bacha girane ke gharelu nuskhe) अपनाए जा सकते हैं परंतु इनमें से सबसे ज्यादा सुरक्षित और कारगर तरीका है तुलसी का काढ़ा। तुलसी के सेवन से गर्भाशय में संकुचन बढ़ने लगता है जिससे गर्भपात हो जाता है।
प्राकृतिक औषधीय गुणों से युक्त तुलसी एक बहुत ही लाभदायक जड़ी बूटी है जो हमारे घरों में आसानी से उपलब्ध होती है।
आइए जानते हैं गर्भपात के लिए तुलसी का काढ़ा कैसे बनाये, कैसे होता है तुलसी के पत्तों से गर्भपात (1 mahine ka garbhpat)-

1. तुलसी के बीजों में संकुचन को प्रेरित करने की क्षमता होती है जिससे गर्भपात हो जाता है ।

2. गर्भावस्था के दौरान अत्यधिक तुलसी का सेवन ब्लड शुगर लेवल को बहुत कम कर देता है जिसके कारण गर्भपात होता है ।

आइए जानते हैं गर्भपात के लिए तुलसी का काढ़ा कैसे बनाये (bacha girane ke gharelu nuskhe):

पहली विधि –

सामग्री

1. दो का पानी
2. 4 लॉन्ग
3. एक इंच अदरक का टुकड़ा
4. 5 से 6 काली मिर्च
5. 5 से 6 तुलसी के पत्ते
6. 1 इंच दालचीनी का टुकड़ा

गर्भपात के लिए तुलसी का काढ़ा कैसे बनाये: विधि

एक पतीले में दो कप गरम पानी चढ़ाएं। अब अदरक ,लॉन्ग ,काली मिर्च और दालचीनी का पेस्ट बनाएं । इस पेस्ट को पानी में मिलाएं और 20 मिनट तक गर्म उबलने दें । थोड़ा ठंडा करके इसे छाने और शहद मिलाएं ,तुलसी का काढ़ा तैयार है।

और पढ़ें: अनचाहे गर्भ का कैसे करें इलायची से गर्भपात

तुलसी का काढ़ा
तुलसी का काढ़ा

 

दूसरी विधि

सामग्री

1. आधा चम्मच तुलसी के बीज
2. 5 से 6 तुलसी के पत्ते साफ किए हुए
3. दो गिलास पानी
4. एक छोटी डली गुड़

गर्भपात के लिए तुलसी का काढ़ा कैसे बनाये: विधि

पतीले में दो गिलास पानी डालकर गरम करने के लिए रख दें ,फिर उसमें एक चम्मच तुलसी के बीज ,5 से 6 तुलसी के पत्ते और एक छोटी डली गुड़ डालकर अच्छे से करीब पानी चौथाई रह जाने तक उबालें उसे छानकर गरम गरम सेवन करें ।

इसके अलावा गर्म पानी के साथ आधा चम्मच तुलसी के बीजों के सेवन करने से भी अनचाहे गर्भ से छुटकारा मिल जाता है ।

सेवन की मात्रा – गर्भपात हेतु दिन में आधा कप तुलसी का काढ़ा प्रयोग किया जा सकता है इसे सुबह नाश्ते के बाद अथवा रात को सोने से पहले इसका सेवन किया जा सकता है।

और पढ़ें: अनचाहे गर्भ का अजवाइन से गर्भपात कैसे करे?

तुलसी की प्रवृत्ति गर्म होती है इसलिए इसका सेवन अधिक मात्रा में करने से बचना चाहिए आइए जानते हैं तुलसी के काढ़े का सेवन करते समय क्या क्या सावधानियां रखना आवश्यक है –

1. तुलसी में हमारे खून पतला करने की क्षमता मौजूद रहती है इसलिए यदि गर्भवती महिला खून पतला करने वाली दवाओं का सेवन कर रही है तो उसे तुलसी के काढ़े का सेवन नहीं करना चाहिए ।
2. तुलसी का उपयोग ब्लड शुगर को कम करने के लिए किया जाता है इसलिए यदि किसी महिला को लो ब्लड प्रेशर की समस्या है तो उससे तुलसी का काढ़ा नहीं लेना चाहिए।
3. मतली ,उल्टी और घबराहट आदि के लिए जाने वाली विशेष प्रकार की दवाओं का सेवन करने वाली महिलाओं को भी तुलसी के काढ़े का प्रयोग नहीं करना चाहिए ।
4. गंभीर प्रकार की बीमारियों जैसे कैंसर ,किडनी की समस्या आदि से प्रभावित महिलाओं को भी गर्भपात के लिए तुलसी के काढ़े का सेवन करने से बचना चाहिए ।

वैसे तो तुलसी के काढ़े और तुलसी के पत्तों से गर्भपात हो जाता है परंतु यदि किसी भी प्रकार की समस्या के लक्षण दिखाई दें तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।

Frequently Asked Questions in Hindi – सामान्य प्रश्न

6 महीने का गर्भ कैसे गिराए?

यदि आप अनचाहे गर्भ से छुटकारा पाना चाहती हैं तो इसके लिए शुरुआती 5से 6 हफ्ते का समय सबसे उचित रहता है इसके बाद जैसे-जैसे वक्त बढ़ता जाता है जटिलताएं बढ़ने लगती है । 6 महीने का गर्भ काफी बड़ा होता है इसलिए इसे गिराने के लिए किसी प्रकार के घरेलू उपाय ना अपनाएं यह गर्भवती के लिए अत्यंत हानिकारक हो सकता है । 6 महीने के गर्भ को गिराने के लिए डॉक्टर की मदद से ही हॉस्पिटल में गर्भपात करवाएं ।

गर्भपात के कितने दिन बाद प्रेगनेंसी टेस्ट करना चाहिए?

यदि आपने गर्भपात के लिए अबॉर्शन किट का प्रयोग किया है किया है तो ब्लीडिंग बंद होने के तीन से चार हफ्ते बाद प्रेगनेंसी टेस्ट करना चाहिए या सटीक परिणाम देता है परंतु अगर आप जल्दी परिणाम जानने की इच्छुक हैं तो आपको गायनेकोलॉजिस्ट से संपर्क करके अल्ट्रासाउंड या ब्लड टेस्ट करवाना चाहिए। इसके अलावा यदि आप गर्भपात के बाद गर्भधारण हेतु प्रयास कर रही हैं तो पीरियड मिस होने के हफ्ते भर बाद प्रेगनेंसी टेस्ट करना सही परिणाम देता है ।

बार बार गर्भपात करने से क्या होता है?

अनचाहे गर्भ से छुटकारा पाने के लिए कई जोड़े बार बार गर्भपात का सहारा लेते हैं। बार बार गर्भपात कराने से गर्भाशय ग्रीवा कमजोर हो जाती है किसी कारण अगली बार गर्भधारण करने में समस्या उत्पन्न हो सकती है। इसके अलावा महिला के शरीर में खून की कमी, इन्फेक्शन ,रक्तस्राव, संक्रमण, ऐंठन, एनेस्थेसिया से संबन्धित जटिलताएं, एम्बोलिज़्म, गर्भाशय में सूजन, एंडोटोक्सिक शॉक आदि कई सारी समस्याएं उत्पन्न हो सकती है इसलिए बार बार गर्भपात कराने के स्थान पर परिवार नियोजन के तरीके अपनाकर गर्भधारण को रोकना ही ज्यादा कारगर उपाय है ।

पपीता से गर्भ कैसे गिराये?

गर्भपात के पपीते का सेवन सबसे कारगर उपायों में से एक है। पपीते से गर्भपात करवाने के लिए गर्भ ठहरने के शुरुआती हफ्तों में अधिक से अधिक मात्रा में कच्चे पपीते का सेवन करें । कच्चे पपीते में लेटेस्ट की मात्रा अधिक होती है इसके कारण गर्भाशय संकुचित हो जाता है और गर्भ गिर जाता है । इसके अलावा पपीते के बीजों का सेवन अनचाहे गर्भ धारण को रोकने के लिए कारगर उपाय है ।

क्या चीज खाने से बच्चा गिर जाता है?

कच्चा अण्डा खाने से बच्चा गिर जाता है इसमें सालमोनेला बैक्टीरिया होता है । शराब के सेवन से भी बच्चा गिर जाता है।पपीता खाने से भी मिसकैरेज हो जाता हैपपीता में लेटेक्स होता है जो यूटेराईन कंस्ट्रक्शन शुरू कर देता है ।ऐलोवेरा का सेवन करने से भी मिसकैरेज हो जाता है ।अदरक काफी भी सीमित मे प्रयोग करना चाहिये । चायनीज फूड को भी नहीं खाना चाहिए इसमें मोनो सोडियम गूलामेट होताऔर ज्यादा नमक भी जो बच्चे के लिये हानिकारक होता है।

नोट- यह पोस्ट केवल आपकी जानकारी के लिए है, किसी भी प्रयोग या घरेलू नुस्खे से पहले डॉक्टर से सलाह जरूर लें।

फिगारो तेल बच्चों का: जानिए इसके बेहतरीन फायदे और उपयोग

फिगारो बेबी आयल के फायदे

हर माता-पिता अपने बच्चे की देखभाल को लेकर बेहद सजग होते हैं, खासकर जब बात शिशु की त्वचा की हो। इस मामले में, फिगारो बेबी आयल एक लोकप्रिय और विश्वसनीय विकल्प बन चुका है। यह तेल न केवल सौम्य होता है, बल्कि शिशु की त्वचा को गहराई से पोषण भी देता है।

इस लेख में हम जानेंगे कि फिगारो ऑयल बच्चों के लिए कितना फायदेमंद है, इसका सही उपयोग कैसे करें, और यह अन्य बेबी ऑयल की तुलना में कैसा है।

फिगारो तेल क्या है?

फिगारो ऑयल एक उच्च गुणवत्ता वाला ऑलिव ऑयल है, जिसे खासतौर पर त्वचा और बालों की देखभाल के लिए तैयार किया गया है। यह हल्का, गंधरहित और त्वचा पर आसानी से अवशोषित होने वाला तेल है, जो शिशु की नाज़ुक त्वचा के लिए बिल्कुल उपयुक्त है।

फिगारो बेबी आयल के फायदे

बच्चे की मालिश
बच्चे की मालिश

1. त्वचा को पोषण देता है

फिगारो तेल बच्चों का उपयोग करने से उनकी त्वचा मुलायम और मॉइस्चराइज बनी रहती है। इसमें प्राकृतिक फैटी एसिड और विटामिन E मौजूद होते हैं, जो त्वचा की गहराई से देखभाल करते हैं।

2. बेहतर मसाज के लिए उपयुक्त

Figaro oil for baby massage in Hindi में यह एक लोकप्रिय विकल्प है क्योंकि यह तेल हल्का होता है और आसानी से फैलता है, जिससे शिशु को शांत महसूस होता है और नींद भी बेहतर आती है।

3. रूखी त्वचा से राहत

सर्दियों में शिशु की त्वचा अक्सर रूखी और बेजान हो जाती है। फिगारो बेबी आयल नियमित रूप से लगाने से त्वचा की नमी बनी रहती है।

4. बालों के लिए भी फायदेमंद

फिगारो ऑयल को सिर की मालिश में भी उपयोग किया जा सकता है, जिससे बाल मजबूत होते हैं और सिर की त्वचा में ब्लड सर्कुलेशन बेहतर होता है।

यह भी पढ़ें: बालों के लिए जैतून का तेल कौन सा है बेस्ट और फायदेमंद

फिगारो ऑयल का उपयोग कैसे करें?

  • नहाने से पहले शिशु की मालिश के लिए फिगारो ऑयल का प्रयोग करें।
  • हल्के हाथों से त्वचा पर मसाज करें ताकि तेल अच्छे से अवशोषित हो जाए।
  • बालों की जड़ों में धीरे-धीरे लगाएं और 15–20 मिनट के लिए छोड़ दें।

क्या फिगारो तेल सुरक्षित है?

हाँ, फिगारो ऑयल बच्चों के लिए पूरी तरह से सुरक्षित है, लेकिन यदि आपके शिशु की त्वचा अत्यधिक संवेदनशील है तो पहले पैच टेस्ट करें। यह तेल बिना किसी रसायन के आता है, इसलिए एलर्जी की संभावना कम होती है।

यह भी जानें: हिमालय बेबी क्रीम के फायदे और साइड इफेक्ट्स

अन्य विकल्पों की तुलना

फिगारो ऑयल की तुलना में बाजार में और भी कई विकल्प मौजूद हैं जैसे कि Johnson Baby Oil, जो कि सुगंधित होता है लेकिन कुछ बच्चों को इससे एलर्जी हो सकती है।

और जानें: Johnson Baby Oil के फायदे

निष्कर्ष (Conclusion)

यदि आप अपने शिशु की त्वचा और स्वास्थ्य के लिए एक प्राकृतिक, हल्का और असरदार तेल ढूंढ रहे हैं, तो फिगारो तेल बच्चों का एक बेहतरीन विकल्प हो सकता है। यह त्वचा को नमी देता है, बालों को मज़बूती प्रदान करता है और साथ ही साथ बच्चों की नींद और मूड पर सकारात्मक असर डालता है।

उपयोग किए गए मुख्य कीवर्ड (Included Keywords):

  • फिगारो बेबी आयल
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  • फिगारो ऑयल
  • फिगारो तेल बच्चों का

अगर आप अपने बेबी की त्वचा को लंबे समय तक कोमल और स्वस्थ बनाए रखना चाहते हैं, तो फिगारो ऑयल को अपने रूटीन में ज़रूर शामिल करें।

Frequently Asked Questions in Hindi – सामान्य प्रश्न

बच्चों को जैतून का तेल कब लगाना चाहिए?

जैतून का तेल शिशु की त्वचा के लिए बहुत लाभकारी होता है, जब बच्चा पेट दर्द की वजह़ से रो रहा हो तो उसकी नाभि के आसपास हल्के हाथ से तेल की मालिश कर सकते हैं और ये जन्म के हफ्ते भर बाद से ही किया जा सकता है, इसके अलावा पूरे शरीर की मालिश भी हफ्ते बाद ही शुरू कर सकते हैं और डायपर रैशेज पर भी लगाया जा सकता है। इसके अतिरिक्त जब शिशु छः माह का हो जाए तो उसके खानें में भी एक चौथाई चम्मच जैतून का तेल यूज किया जा सकता है।

फिगारो ऑयल के क्या फायदे हैं?

फिगारो जैतून का तेल एक मल्टीपरपज़ ओयल है, ये भोजन में और त्वचा तथा बालों में लगानें के काम आता है, इसमें बेहतरीन ऐंटीआक्सीडेंटस और फैट एसिड होते हैं, जिससे ये हार्ट के लिए बहुत लाभदायक होता है। इस तेल को चेहरे पर लगाने से रंग निखरता है, इसे कई तरह के उबटन में मिलाकर भी इस्तेमाल कर सकते हैं, होठों पर लगाने से होठ फटना बंद हो जाते हैं । नवजात शिशुओं की हड्डियों और बालों के लिए काफी लाभकारी है, बहुत प्यार से फिगारो उनकी नाजुक त्वचा का पोषण करता है।

ऑलिव ऑयल लगाने से क्या फायदा होता है?

फिगारो जैतून का तेल एक मल्टीपरपज़ ओयल है, ये भोजन में और त्वचा तथा बालों में लगानें के काम आता है, ये हार्ट के लिए बहुत लाभदायक होता है। इस तेल को चेहरे पर लगाने से रंग निखरता है, इसे कई तरह के उबटन में मिलाकर भी इस्तेमाल कर सकते हैं, होठों पर लगाने से होठ फटना बंद हो जाते हैं । नवजात शिशुओं की हड्डियों और बालों के लिए काफी लाभकारी है, बहुत प्यार से फिगारो उनकी नाजुक त्वचा का पोषण करता है। जैतून का तेल शिशु की त्वचा के लिए बहुत लाभकारी होता है, जब बच्चा पेट दर्द की वजह़ से रो रहा हो तो उसकी नाभि के आसपास हल्के हाथ से तेल की मालिश कर सकते हैं और ये जन्म के हफ्ते भर बाद से ही किया जा सकता है, इसके अलावा पूरे शरीर की मालिश भी हफ्ते बाद ही शुरू कर सकते हैं और डायपर रैशेज पर भी लगाया जा सकता है।

बच्चों की मालिश के लिए कौन सा तेल सही है?

सरसों का तेल शिशु की मालिश के लिए सबसे अच्छा तेल माना जाता है। सरसों का तेल ठंड के मौसम में ठंड से बचाता है और उनकी हड्डियों को मजबूत करने के साथ-साथ बच्चे के शरीर को गर्मी भी प्रदान करता है।

हाई ब्लड प्रेशर तुरन्त कैसे कम करें-high blood pressure ko turant kaise kam kare

हाई ब्लड प्रेशर तुरन्त कैसे कम करें

हाई बल्ड प्रेशर किसे कहते है

हम आपको बहुत ही सरल शब्दो मे समझाते है। जब भी हमारा हृदय धड़कता है, तो वो ब्लड पंप करता हैं। हर पंप के साथ ब्लड आर्टरी से होता हुआ शरीर मे के हर अंग तक जाता है।
इन्हीं धमनियों से कितना खून पास हो रहा है इसे ही ब्लड प्रेशर कहते हैं। ब्लड प्रेशर यानी जब बहते हुए खून का दबाव धमनियों पर बढ़ जाता है। इसे हाई ब्लड प्रेशर कहते है।

क्या है हाई ब्लड प्रेशर की स्थिति

भारत में हर 3 में से 1 भारतीय हाई ब्लड प्रेशर से जूझ रहा है।कहा जाता था कि हाई बी पी बूढ़े लोगो की बीमारी है, लेकिन अब यंग लोगो मे भी ये बीमारी देखी जा रही है।
भारत की करीब 40 प्रतिशत शहरी आबादी हाइपरटेंशन की समस्या से पीड़ित है,और यह संख्या तेजी से बढ़ भी रही है।

हाई ब्लड प्रेशर से होने वाली दिक्कतें

  • हार्ट अटैक या स्ट्रोक
  • हार्ट फेलियर
  • किडनी पर बुरा असर
  • आंखों के ब्लड वेसल्स पर बुरा असर
  • डिमेंशिया
  • याददाश्त कमजोर आदि

हाई ब्लड प्रेशर के कारण

तनाव

हाई ब्लड प्रेशर का सबसे बड़ा कारण तनाव है। तनाव होना आजकल एक आम बात है। केवल बड़ो को ही नही, आजकल स्कूल जाने वाले बच्चे भी तनाव से पीड़ित हैं।
जरूरत से ज्यादा तनाव पूरी बॉडी पर खराब असर डालकर, बी पी बढ़ाने वाले हॉर्मोन्स सीक्रिट करता है।

तनाव
तनाव

नमक का ज्यादा सेवन

बहुत से लोग जरूरत से ज्यादा नमक खाते है। बनी हुई सब्जी में ऊपर से नमक डालना, दही और सलाद में भी नमक डालना। ये आदत बहुत ही नुकसानदायक है।
ज्यादा नमक खाने से शरीर में सोडियम की मात्रा बढ़ जाती है जिस वजह से किडनी में वॉटर रिटेंशन होने लगता है और आपके खून में ढेर सारे फ्लूइड्स बहने लगते हैं जिस वजह से रक्त धमनियों यानी ब्लड वेसल्स में प्रेशर बढ़ता है और ब्लड प्रेशर हाई हो जाता है।

स्मोकिंग और ड्रिंकिंग

शराब व सिगरेट में मौजूद निकोटिन ब्लड वेसल्स को कॉन्ट्रैक्ट कर देती है। ये आपकी फिजिकल कंडीशन पर डिपेंड करता है कि निकोटिन का असर आपको कितने सेवन के बाद होगा।

हाई बी एम आई

अगर आपका मोटापा यानी वजन बहुत ज्यादा है तो आपका बी एम आई भी बहुत ज्यादा होगा। जब ब्लड वेसल्स के चारो तरफ फैट ज्यादा होगा तो
वस्कुलर रेजिस्टेंज भी बढ़ने लगता है जिस वजह से हार्ट को दिनभर में ज्यादा खून पंप करना पड़ता है और हार्ट का काम अगर बढ़ जाता है तो यह ब्लड प्रेशर बढ़ने की सबसे बड़ी निशानी है।

प्रेगनेंसी

प्रेगनेंसी के दौरान गर्भवती महिला को भी बी.पी. बढ़ने की समस्या होती है।

हाई बी पी के लक्षण

  • हाई बी पी में सरदर्द के साथ चक्कर आते है।
  • हाई बी पी में व्यक्ति को थकावट और ज्यादा तनाव होता है।
  • कई बार सीने की तरफ दर्द और भारीपन महसूस होता है।
  • सांस लेने में परेशानी और घबराहट होती है।
  • रोगी के पैर अचानक सुन्न हो जाते हैं, और रोगी को धुंधला दिखाई पड़ता है।

बी पी की नई गाइड लाइन

पुरानी गाइड लाइन के अनुसार नॉर्मल बी पी रेंज है,
120/80 बल्कि यूरोपियन सोसायटी ऑफ कार्डियोलॉजी की गाइडलाइन के अनुसार नई बी पी रेंज है, 140/90

हाई बी पी से कैसे बचें

  • रोजाना कम से कम 20-25 मिनट एक्सरसाइज करें।
  • हरी सब्जियां व कम फैट वाला भोजन ले।
  • मैग्निशियम, कैल्शियम और पोटेशियम से भरपूर खाद्य पदार्थ अधिक खाने चाहिए।
  • केवल मौसमी फलों जैसे सेब, अमरूद, अनार, केला, अंगूर, अनानास, मौसंबी, पपीता का सेवन करे।
  • रोजाना पानी अधिक मात्रा में पीये।

हाई बी पी को तुरंत कैसे कम करें-high blood pressure ko turant kaise kam kare

  • बी पी हाई होने पर शरीर को तुरन्त आराम की अवस्था में ले आएं।
  • एक गिलास पानी मे निम्बू और चीनी का घोल बनाकर पिए, भूलकर भी नमक न डालें।
  • तनाव को कम करने की कोशिश करें, जिंदगी से जुड़ी पॉजिटिव चीज़ों के बारे में सोचें।
  • आँवले का चूर्ण और शहद बराबर मात्रा में मिलाकर सुबह-शाम ले।
  • जब ब्लड प्रेशर बढ़ा हुआ हो तो आधे गिलास गुनगुने पानी में काली मिर्च पाउडर का एक चम्मच घोल लें। इसे दो-दो घंटे के बाद पीते रहें।
  • तरबूज के बीज की गिरी तथा खसखस अलग-अलग पीसकर बराबर मात्रा में रख लें। इसका रोजाना एक-एक चम्मच सेवन करें।
  • रोज सुबह खुली हवा में नंगे पैर हरी घास पर वॉकिंग करें।
  • मौसम के अनुसार पालक, चुकंदर, अनार, गाजर का जूस पिए।
  • 3 ग्राम मेथीदाना पाउडर सुबह-शाम पानी के साथ लें। इसे प्रतिदिन खाने से लाभ मिलता है।

शुगर लेवल कम होने के लक्षण, जिन्हें जानना आपके लिए है जरुरी

शुगर लेवल कम होने के लक्षण

हमारे समाज मे शुगर लेवल ज्यादा होना एक गम्भीर समस्या माना जाता है। ब्लड शुगर कम होना कितना खतरनाक है इस पर कोई बात ही नही करता। लो ब्लड शुगर को हाइपोग्लाइसीमिया भी कहते है। शरीर में ग्लूकोज और इंसुलिन के संतुलन के बिगड़ने की वजह से हाइपोग्लाइसीमिया हो सकता है। हॉर्मोनल लेवल के बिगड़ने के कारण भी ये बीमारी हो सकती हैं। चीनी हमारी बॉडी को ऊर्जा देती है इसलिए हाइपोग्लाइसीमिया वाले लोग अक्सर थका हुआ महसूस करते हैं। आज के इस लेख में हम जानेंगे कि क्या है शुगर लेवल कम होने के लक्षण और कारण।

कब माने की शुगर लेवल कम है

सामान्य ब्लड शुगर लेवल 80-110 मिग्रा/डीएल के बीच होता है और 90 मिग्रा/डीएल को औसत ब्लड शुगर लेवल माना जाता है.
अगर ब्लड शुगर लेवल 70 से नीचे चला जाये तो संभल जाए। ऐसी स्थिति में तुरन्त डॉक्टर से सम्पर्क करें।

शुगर लेवल कम होने के कारण

बुखार और हाइपोग्लाइसीमिया जैसी स्थितियां खुद एक बीमारी नहीं होती, बल्कि ये किसी स्वास्थ्य संबंधी समस्या का संकेत करती हैं
शुगर लेवल कम होने के निम्न कारण हो सकते है

  • डायबिटीज़ की दवाइयों का मात्रा स्व ज्यादा सेवन करना।
  • यदि आप इन्सुलिन ले रहे है तो, एक्सरसाइज़ करने के दौरान और उसके बाद में हाइपोग्लाइसीमिया का ख़तरा बढ़ सकता है.
  • लंबे समय तके भूखा रहना या भूख से कम मात्रा में खाना
  • शराब का अत्यधिक सेवन
  • लिवर संबंधित गंभीर बीमारियां, जैसे गंभीर हेपेटाइटिस भी ब्लड शुगर कम होने का कारण हो सकते है
  • एड्रिनल ग्रंथि और पिट्यूटरी ग्रंथि में गड़बड़ आने के परिणामस्वरूप कुछ खास हार्मोन्स की कमी

हाइपोग्लाइसीमिया की फिजियोलॉजी

शुगर हमारे शरीर के लिए मुख्य ईंधन की तरह काम करता है और हमारा दिमाग़ भी इस पर पूरी तरह निर्भर है। जब आपका ब्लड शुगर लेवल कम होता है तो दिमाग़ के काम करने की क्षमता पर भी इसका असर पड़ता है. हाइपोग्लाइसीमिया से निपटने के लिए शरीर की अंदरूनी कार्यप्रणाली इंसुलिन के स्त्राव को कम करती है और ग्लूकागॉन का स्राव बढ़ा देती है।

शुगर लेवल कम होने के लक्षण

शुगर लेवल कम होने को अनदेखा ना करें। आप शायद नही जानते कि शुगर लेवल कम होना कितना खतरनाक हो सकता है। इससे न केवल स्ट्रोक या कोमा जैसी स्थिति हो सकती है, बल्कि जान भी जा सकती है।

आप सोच सकते है यदि आपको ड्राइविंग या सड़क पर चलने के दौरान हाइपोग्लाइसेमिक अटैक आया तो क्या होगा। आपका एक्सीडेंट हो सकता है। इसलिए बहुत जरूरी हैं कि आप कुछ लक्षणों पर जरूर ध्यान दे। यदि आप इन्हें इग्नोर करेंगे तो ये लक्षण लगातार बने रहेंगे। इससे आपकी रोजमर्रा की जीवनचर्या प्रभावित होगी।

शुगर लेवल कम होने
शुगर लेवल कम होना

यदि आपको निम्न लक्षण दिखाए दे तो सचेत हो जाए।

  • दिल का बुरी तरह से घबराना
  • किसी कार्य को करते करते या कभी कभी बिना कारण अचानक थकान महसूस होना।
  • त्वचा का पीला पड़ जाना।
  • शरीर का बुरी तरह कांपना।
  • बिना कारण स्ट्रेस महसूस होना, एंग्जायटी लेना।
  • हथेलियां पर ज्यादा पसीना आना, कभी कभी पूरे शरीर पर पसीना आना।
  • बहुत तेज भूख लगना, जैसे बहुत समय से कुछ खाया न जाए।
  • बिना कारण चिड़चिड़ापन होना।
  • मुंह के चारों ओर झुनझुनी और सनसनी महसूस होना
  • कभी कभी कुछ लोग नींद के दौरान रोते है

यदि आप इन लक्षणों को लगातार इग्नोर करते रहेंगे। तो समस्या बढ़ती चली जाएगी।

समस्या गम्भीर होने पर निम्न लक्षण दिखाई देते है।

  • रोजमर्रा की गतिविधियों को पूरा करने में असमर्थता होने लगती है।
  • आंखों की रोशनी कम होकर देखने में परेशानी होने लगती है। धुंधला दिखाई देने लगता है।
  • दौरा पड़ने की समस्या भी देखने को मिलती है।
  • अचानक ब्लड शुगर लेवल कम होने पर व्यक्ति बेहोश भी हो सकता है।
  • पीड़ित लोग किसी नशे में चूर व्यक्ति की तरह लगते हैं, जो शब्दों का स्पष्ट तरीके से उच्चारण नहीं कर पाते हैं।

शुगर लेवल कम होने पर क्या करें

अगर डायबिटीज हो तो

  • डॉक्टर द्वारा व खुद बनाए गए डायबिटीज के प्लान का ध्यानपूर्वक पालन करें।
  • निरंतर ग्लूकोज मॉनिटर (CGM) जैसे उपकरण का प्रयोग करें।
  • हाई इन्टेन्सिटी वर्कआउट करने से बचें
  • अपने पास हमेशा ग्लूकोज़ टेबलेट, जूस, मीठा फल या कार्बोहाइड्रेट युक्त पदार्थ जरुर रखे।

अगर डायबिटीज न हो तो

  • सुबह का नाश्ता कभी मिस न करें, ये दिन की बहुत ही जरूरी मील है।
  • 24 घण्टो में थोड़े थोड़े गैप पर कुछ न कुछ हल्का फुल्का खाते रहे।

पपीता के बीज से गर्भपात कैसे होता है-papita khane se period aata hai

पपीता के बीज से गर्भपात कैसे होता है

मातृव एक बहुत ही खूबसूरत एहसास होता है अपने अंदर प्रतिपल नवजीवन को बढ़ते महसूस करना किसी भी भावी माँ के किये बेहद अनूठा होता है।ज़ाहिर है ऐसे में उसे स्वयं के एवं भावी बच्चे के बेहतरीन स्वास्थ्य के लिये एक संतुलित और स्वास्थ्य वर्द्धक ख़ुराक़ की दरकार होती है। होने वाली माँ को जहाँ बहुत सारे फल और सब्जियों के सेवन की सलाह दी जाती है,वहीँ कुछ फल विशेष हैं जिनके उपयोग के लिये सख्ती से मना किया जाता है।

ताकि भावी शिशु और उसकी माता के स्वास्थ्य पर कोई भी विपरीत प्रभाव न पड़े। कोई भी माँ अपने बच्चे में किसी भी प्रकार का शारिरिक या मानसिक दोष नहीँ सहन कर सकती । हँसता मुस्कुराता स्वस्थ सुन्दर बच्चा हर माता पिता का सपना होता है और गर्भकाल में जहाँ होने वाली माँ को अच्छी सेहत के लिये आम ,नारियल,सन्तरा, केला आदि फ़लों के सेवन की सलाह दी जाती है।

वहीँ पपीते से दूरी बनाने के निर्देश भी मिलते हैं। अक्सर मन में सवाल उठते हैं कि आखिर है तो यह भी फल ही फिर इस में ऐसा क्या है जो इस समय इसे खाने को मना किया जाता है।

कई घरों में इसे इतना पसन्द किया जाता है कि यह उनके दैनिक आहार में शामिल होता है । परन्तु गर्भवती और दूध पिलाने वाली माताओं के लिये पपीते का प्रयोग अक्सर नुकसानदेह साबित होता है। आइये जानते है कि आखिकार पपीते का प्रयोग इस समय क्यो वर्जित होता है।

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परिचय

प्रकृति के खजाने में हमारे उत्तम स्वास्थ्य के लिये बहुत सारे उपहार है फल और सब्जियों के रूप में उन्ही में से एक फल है “पपीता”। सभी वनस्पतियों  के पञ्चाङ्ग की तरह (जड़,तना, छाल, फूल,फल और पत्तीयों) पपीते की भी अपनी बहुत सी विशेषताएँ  है।

नाम

केरिका पापाया,यह सर्व सुलभ फल है और इसे बेहद आसानी से हमारे आसपास के बाजार में देखा जा सकता है।

पपीता
पपीता

पपीते में पाये जाने वाले गुण

यह एक नर्म फल है, जिसे काटने पर अंदर काले रँग के बीज प्राप्त होते हैं। कच्ची अवस्था मे यह हरा होता है,और पकने पर पीले रङ्ग का हो जाता है।

इसे कच्चे एवं पके हुए दोनों रूपों में खाया जा सकता है ,डायट पर रहने वाले लोगों का तो यह बेहद प्रिय फल है,यह रेशों (फाइबर) का भण्डार है,इसमें  विटामिन ए, कैल्शियम , तथा पेपेन पाया जाता है।

यह कोलेस्ट्रॉल तथा वजन को नियंत्रित रखने में बहुत बड़ी भूमिका अदा करता है ,इसलिए यह हर आयुवर्ग के लिये लाभप्रद है सिवाय गर्भवती स्त्रियों और दूध पीने वाले बच्चों के।

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प्रेगनेंसी में पपीता क्यों नहीं खाना चाहिए

कच्चा पपीता-पपीता कच्ची अवस्था मे गर्भवती स्त्री के लिये बहुत ही हानिकारक सिद्ध होता है। कच्चे पपीते को एक प्राकृतिक गर्भ निरोधक कहा गया है,इसकी तासीर काफी गर्म होती है।

कारण यह है कि इसमें लेटेक्स नाम का पदार्थ पाया जाता है जो गर्भाशय के संकुचन के लिये जिम्मेदार तत्व भी होता है,लेटेक्स गर्भवती के शरीर मे एस्ट्रोजन नाम के हार्मोन का स्राव को उत्तेजित करता है ,इसकी उपस्थिति पेट में मरोड़ उत्पन्न करती है। यही मरोड़ वजह बनती है असमय गर्भपात की।

एस्ट्रोजन ही वह तत्व है जो किसी महिला के शरीर में माहवारी को नियमित करता है। यदि गर्भवती इसका सेवन कर ले तो यह गर्भ के लिये बिल्कुल भी सुरक्षित नहीँ होता और गर्भपात का कारण बन जाता है।

इसकी वजह है पपीते में विटामिन सी और पपाइन का पाया जाना अक्सर कच्चे पपीते का प्रयोग माँस या कड़े प्रोटीन वाले भोज्य पदार्थ को मुलायम करने के लिये उसे उबलने के समय किया जाता है।

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बढ़ सकता है लेबर पेन

कभी कभी तो होने वाले शिशु में विकलांगता तक देखी गयी है। यह गर्भ को नुकसान दायक सिद्ध होते हैं,यहाँ तक कि यदि गर्भ की अंतिम तिमाही में भी यह लेबर पेन को बढ़ा सकता है। क्योंकि लेटेक्स लेबर पेन को बढ़ाने का काम करता है ,जो भावी माता और बच्चे दोनों के लिये ठीक नहीं होता ।

हाँ अगर महिला अगर गर्भवती नही है और उसे यदि पीरियड्स को रेगुलर करना हो तो उसके लिये कच्चे पपीते को पानी में उबाल कर 2 से 3 इस्तेमाल किया जा सकता है। यह पीरियड्स के दौरान रक्तस्राव को नियमित करता है।

पका पपीता-कच्चे पपीते की तुलना में पका पपीता थोड़ा कम हानिकारक साबित होता है। क्योंकि इसे पेड़ से तोड़े हुए थोड़ा समय ज़रूर हो जाता है।

और पढ़ें: अनचाहे गर्भ का कैसे करें इलायची से गर्भपात-Pregnancy Khatam Karne Ka Tarika, elaichi se garbhpat kaise kare

चिकित्सक का परामर्श लेकर करे सेवन

परन्तु इसके गुणों में कोई विशेष अंतर नहीं पड़ता यदि कोई पपीते को खाना ही चाहता है तो उसे पूरी तरह से पके हुए फल का ही सेवन करना चाहिये।

बहुत ज़्यादा इच्छा हो तो बहुत ही थोड़ी मात्रा में सेवन कर सकता है वह भी चिकित्सक का परामर्श लेकर।

पपीते में मौजूद ये एन्ज़ाइम बहुत छोटे बच्चों के लिये भी उपयुक्त नही होते ,इसलिए दूध पिलाने वाली माताओं और छोटे बच्चों को चिकित्सक इसको ज़्यादा खाने के लिए भी इसका प्रयोग मना करते हैं

और पढ़ें: गर्भपात के बाद माहवारी कब आती है-Garbhpat Ke Baad Period Kab Aate Hain

पपीता के बीज से गर्भपात

बच्चा गिराने के तरीके और घरेलू नुस्खों में विटामिन सी, पपीता, अन्नानास का रस, अजवायन,  तुलसी का काढ़ा, लहसून,  ड्राई फ्रूट्स, केले का अंकुर, अजमोद, गर्म पानी, कोहोश, बाजरा, ग्रीन टी, गाजर के बीज, तिल, ब्लड प्रेशर बढ़ाने वाली चीज़े, कैमोमाइल तेल, काली चाय, अनार के बीज का प्रयोग खूब किया जाता है।

अक्सर लोग पपीता का इस्तेमाल करने के बाद इसके बीजों को कूड़ेदान में डाल देते हैं ,परन्तु इसके भी अपने बहुत सारे गुण हैं जिनका हमें ज्ञान ही नहीं होता।

पपीते के बीज भी अपने मे बहुत से औषधीय गुण रखते हैं भली प्रकार पके हुए पपीते के बीजों को सुखाकर इनका इस्तेमाल बहुत सी बीमारियों के लाभ के लिये किया जाता है।

कैसे करे प्रयोग

  • पपीता के बीज से गर्भपात का उपयोग प्राकृतिक गर्भनिरोधक के तौर पर भी किया जाता है। यह आकार में काली मिर्च के समान ,स्वाद में कड़वे और लिसलिसे होते हैं।
  • इन्हीं बीजों को अच्छी तरह धोने के बाद इनको सुखाकर व पीसकर स्टोर किया जाता है। यदि कोई महिला गर्भधारण नही करना चाहती उसे इन पिसे हुए बीजों को पानी के साथ दो चम्मच ग्रहण करना चाहिये।
  • लेकिन अगर गर्भवती हो तो बिना चिकित्सक की सलाह लिये कोई भी क़दम नहीँ उठाना चहिये । यह होने वाली माता के साथ भावी शिशु के भी भविष्य का प्रश्न जो होता है।

पपीता खाने के कितने दिन बाद पीरियड आता है

कुछ डॉक्टरों का मानना ​​है कि पपीता वास्तव में गर्भवती महिलाओं के लिए एक लाभकारी फल है। पपीता चाहे कच्चा हो या पका, मासिक धर्म चक्र में कोई बदलाव नहीं करता है। यह एक मिथक है कि आप अपने मासिक धर्म की तारीख को आगे-पीछे कर सकती हैं। हालांकि, कच्चे पपीते में पाया जाने वाला पपैन नामक प्रोटीयोलाइटिक एंजाइम गर्भाशय के संकुचन और पाचन समस्याओं का कारण बन सकता है। इसलिए हम गर्भवती महिलाओं को कच्चे पपीते का सेवन बिल्कुल नहीं करने की सलाह देते हैं। हालांकि, गर्भावस्था के दौरान पका पपीता फायदेमंद हो सकता है।

Frequently Asked Questions in Hindi – सामान्य प्रश्न

क्या चीज खाने से बच्चा गिर जाता है?

कच्चा अण्डा खाने से बच्चा गिर जाता है इसमें सालमोनेला बैक्टीरिया होता है । शराब के सेवन से भी बच्चा गिर जाता है।पपीता खाने से भी मिसकैरेज हो जाता हैपपीता में लेटेक्स होता है जो यूटेराईन कंस्ट्रक्शन शुरू कर देता है ।ऐलोवेरा का सेवन करने से भी मिसकैरेज हो जाता है ।अदरक काफी भी सीमित मे प्रयोग करना चाहिये । चायनीज फूड को भी नहीं खाना चाहिए इसमें मोनो सोडियम गूलामेट होताऔर ज्यादा नमक भी जो बच्चे के लिये हानिकारक होता है।

अजवाइन से गर्भपात हो सकता है क्या?

अजवाईन में भरपूर मात्रा में प्रोटीन, फाइबर , कैल्शियम, आयरन, फैटी एसिड और पोषक तत्व होते है।जो कि पेट के लिये लाभदायक है। साथ ही इसमें बोलाटाईल ऑइल भी होता है जिससे इसकी खुश्बू तेज हो जाती है और इसकी तासीर गर्म हो जाती है इस कारण यह गर्भपात होने का खतरा रहता है तब ही इसे खाने से पहले डाक्टर की सलाह जरूर ले।। घरेलू नुस्खे के तौर पर इसे गर्भपात के लिये प्रयोग किया जाता है ।

पपीता से गर्भ कैसे गिराये?

गर्भपात के पपीते का सेवन सबसे कारगर उपायों में से एक है। पपीते से गर्भपात करवाने के लिए गर्भ ठहरने के शुरुआती हफ्तों में अधिक से अधिक मात्रा में कच्चे पपीते का सेवन करें । कच्चे पपीते में लेटेस्ट की मात्रा अधिक होती है इसके कारण गर्भाशय संकुचित हो जाता है और गर्भ गिर जाता है । इसके अलावा पपीते के बीजों का सेवन अनचाहे गर्भ धारण को रोकने के लिए कारगर उपाय है ।

बार बार गर्भपात करने से क्या होता है?

अनचाहे गर्भ से छुटकारा पाने के लिए कई जोड़े बार बार गर्भपात का सहारा लेते हैं। बार बार गर्भपात कराने से गर्भाशय ग्रीवा कमजोर हो जाती है किसी कारण अगली बार गर्भधारण करने में समस्या उत्पन्न हो सकती है। इसके अलावा महिला के शरीर में खून की कमी, इन्फेक्शन ,रक्तस्राव, संक्रमण, ऐंठन, एनेस्थेसिया से संबन्धित जटिलताएं, एम्बोलिज़्म, गर्भाशय में सूजन, एंडोटोक्सिक शॉक आदि कई सारी समस्याएं उत्पन्न हो सकती है इसलिए बार बार गर्भपात कराने के स्थान पर परिवार नियोजन के तरीके अपनाकर गर्भधारण को रोकना ही ज्यादा कारगर उपाय है ।

घर बैठे करें हेयर स्पा – आसान तरीका Hair Spa Karne Ka Tarika

हेयर स्पा

बालों की देखभाल के लिए हेयर स्पा एक प्रभावी तरीका है, जो बालों को मजबूत, मुलायम और चमकदार बनाता है। यदि आप पार्लर जाने का समय या पैसा बचाना चाहते हैं, तो घर पर ही हेयर स्पा करना एक बेहतरीन विकल्प है। इस लेख में, हम आपको घर पर हेयर स्पा करने का तरीका (Hair Spa Karne Ka Tarika) बताएंगे।

हेयर स्पा क्या है? (What is Hair Spa?)

हेयर स्पा एक विशेष उपचार है जो बालों और स्कैल्प की गहराई से सफाई, पोषण और मालिश करता है। यह प्रक्रिया बालों की गुणवत्ता में सुधार करती है, डैंड्रफ को कम करती है और बालों को स्वस्थ बनाती है।

✅ हेयर स्पा के फायदे (Benefits of Hair Spa)

  • बालों को पोषण प्रदान करता है: हेयर स्पा बालों की जड़ों तक पोषण पहुंचाता है, जिससे वे मजबूत होते हैं।
  • डैंड्रफ को कम करता है: नियमित हेयर स्पा से स्कैल्प की सफाई होती है, जिससे डैंड्रफ की समस्या कम होती है।
  • बालों को मुलायम और चमकदार बनाता है: हेयर स्पा बालों को सॉफ्ट और शाइनी बनाता है।
  • तनाव को कम करता है: सिर की मालिश से मानसिक तनाव में राहत मिलती है।
  • बालों के झड़ने को रोकता है: हेयर स्पा बालों की जड़ों को मजबूत करता है, जिससे हेयर फॉल कम होता है।

️ घर पर हेयर स्पा करने का तरीका (How to Do Hair Spa at Home)

1. बालों की सफाई (Hair Wash)

माइल्ड शैम्पू से बालों को अच्छी तरह धोएं ताकि धूल और गंदगी हट जाए।

2. तेल लगाना (Hair Oiling)

गुनगुने नारियल या बादाम के तेल से स्कैल्प की मालिश करें। इससे रक्त संचार बेहतर होता है और जड़ें मजबूत होती हैं।

मसाज
मसाज

मसाज

  • 3. स्टीमिंग (Steaming)

    एक तौलिया को गर्म पानी में भिगोकर बालों में लपेटें। इससे तेल स्कैल्प में अच्छी तरह समा जाता है।

    4. हेयर मास्क लगाना (Applying Hair Mask)

    प्राकृतिक सामग्री जैसे दही, शहद, एलोवेरा जेल या मार्केट में उपलब्ध हेयर स्पा क्रीम का प्रयोग करें।

    5. 15-20 मिनट के लिए छोड़ दें

    मास्क को बालों में लगाकर 15-20 मिनट तक रहने दें।

    6. फिर से शैम्पू और कंडीशनिंग करें

    सॉफ्ट शैम्पू से बाल धोएं और हल्का कंडीशनर लगाएं।

    प्राकृतिक सामग्री से हेयर स्पा (Natural Ingredients for Hair Spa)

    सामग्री लाभ
    दही बालों को मुलायम और चमकदार बनाता है
    शहद नमी को बनाए रखता है
    एलोवेरा स्कैल्प को ठंडक और डैंड्रफ में राहत
    नारियल तेल बालों की जड़ों को मजबूत करता है

    ⚠️ हेयर स्पा करते समय ध्यान रखने योग्य बातें

    • हफ्ते में एक बार से ज़्यादा हेयर स्पा न करें।
    • हमेशा केमिकल-फ्री प्रोडक्ट्स का इस्तेमाल करें।
    • बहुत ज़्यादा गर्म पानी से परहेज करें।
    • ओवर-मसाज करने से स्कैल्प को नुकसान हो सकता है।

    ❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

    Q1: क्या घर पर हेयर स्पा करना प्रभावी होता है?
    हाँ, अगर सही तरीके से किया जाए तो घर पर हेयर स्पा बालों के लिए काफी फायदेमंद होता है।

    Q2: कौन-कौन से घरेलू उपाय सबसे अच्छे हैं?
    दही, शहद, एलोवेरा और नारियल तेल से बना हेयर मास्क काफी अच्छा होता है।

    Q3: हेयर स्पा करने का सबसे अच्छा समय क्या है?
    रात को सोने से पहले हेयर स्पा करना अच्छा रहता है ताकि बालों को पूरी तरह पोषण मिल सके।

Frequently Asked Questions in Hindi – सामान्य प्रश्न

घर पर बालों में स्पा कैसे करें?

घर पर हेयर स्पा पाँच आसान स्टेप्स में कर सकते हैं। 1. सबसे पहले ऑयल को गुनगुना करके 15 से 20 मिनट तक हल्के हाथों से सिर की मसाज करें। 2.मसाज के बाद बालों को स्टीम देने के लिए गर्म पानी में कॉटन का एक मोटा टॉवल डुबोकर निचोड़ लें, इस टॉवल को बालों के चारोंओर 10 मिनट तक लपेट कर रखें। 3. स्टीम के बाद किसी माइल्ड शैंपू से हेयर वॉश करें। हेयर वॉश करने के लिए सादे पानी का इस्तेमाल करें, सर्दियों का मौसम है तो हल्का गर्म पानी लें। 4.बालों को शैंपू करने के बाद एक अच्छी क्वॉलिटी का कंडीशनर लगाना भी जरूरी है। 5. और लास्ट में हल्के गीले बालों में हेयर मास्क लगायें कम से कम 30 मिनट तक, फिर शैम्पू से बालों को धो लें।

हेयर स्पा कराने के क्या क्या फायदे हैं?

हेयर स्‍पा बालों की खूबसूरती बढाने में मदद करता है। ये रूखे और डैमेज़ बालो को हैल्दी बनाता है। साथ ही हेयर स्पा बालों का टेक्सचर और चमकदार बनाता है। बालों के फ्रिजनेस को कम करता है, जिससे बालों को मनपसंद स्टाइल दिया जा सकता है। हेयर स्पा बालों को कई तरह की परेशानियों से बचाव भी करता है। आमतौर पर स्‍पा कराने से बालों से डैन्ड्रफ, हेयर फॉल और सिर की त्वचा की समस्याएं खत्म होती हैं। इसके अलावा स्‍पा के मदद से बालों की खोयी हुई चमक और नमी को वापस आ जाती है। हेयर स्‍पा में प्रोटीन ट्रीटमेंट्स को भी शामिल किया जा सकता है ताकि आपके बाल रोजाना की विभिन्न परिस्थितियों का सामना करने लायक मज़बूत हो सकें।

सबसे अच्छा हेयर स्पा कौन सा है?

बालों की कंडीशन के हिसाब से अलग अलग स्पा अलग अलग बालों के लिए बेस्ट होते हैं..! * ड्राई हेयर के लिए कैरेटिन युक्त स्पा सबसे बेस्ट है।यह बालों को मुलायम बनाता है। * अगर बाल ऑयली हैं, तो एलोवेरा और नींबू युक्त स्पा बेहतर रहेगा। ऐलोवेरा और नींबू का मिश्रण स्कैल्प पर तेल कम करता है। *अगर बाल प्रदूषण की वजह से खराब हो गए हैं, तो आगर्न तेल या नारियल तेल युक्त हेयर स्पा बेहतर रहेगा। ये बालों को नई जान देगा और वॉल्यूम बढा़येगा। *अगर बालों में डैंड्रफ ज्यादा है, तो आपको लैवेंडर तेल युक्त स्पा का चुनाव बेहतर है। लैवेंडर तेल रूसी रोकने का सबसे बेहतर उपाय है। *अगर बाल बहुत ज्यादा झड़ते हैं या पतले हैं, तो ओमेगा-3 फैटी एसिड युक्त हेयर स्पा सही रहेगा। *अगर आपकी स्कैल्प ड्राई है और सिर में खुजली होती है, तो नारियल तेल युक्त हेयर स्पा अच्छा विकल्प है।

हेयर स्पा में कितने पैसे लगते हैं?

हेयर स्पा से रूखे बालों, दो मुँहे बाल, बालों का झड़ना, बेजान बाल आदि समस्याओं को दूर किया जा सकता है। हेयर स्पा प्राइस इस बात पर निर्भर करता है कि आपके बालों की लेंथ कितनी है और आप इसे किस एरिया के सैलून में करा रहे हैं, अमूमन हेयर स्पा की कीमत 500 से 1500 रुपये तक की होती है। और अगर आप हैमर स्पा घर पर ही करते हैं तो जितना पैसा आपका सामंग्री खरीदनें में लगेगा, वही कीमत होगी और ये किफा़यती ही रहेगा क्योंकि मेहनत आपकी है।

दाने वाली खुजली का उपचार कैसे करें-Khujali Ke Gharelu Upay

दाने वाली खुजली का उपचार कैसे करें

खुजली जो एक बार हो जाए तो रात की नींद और दिन का चैन छीन लेती है। खुजली कभी किसी इन्फेक्शन, कभी किसी दवाई के साइड इफ़ेक्ट के कारण होती है। खुजली करने पर थोड़ा आराम जरूर लगता है पर यह समस्या गंभीर भी हो सकती है। आज के इस लेख में हम खुजली के कारण, हाथ और पैर में खुजली होने का कारण और दाने वाली खुजली का उपचार, खुजली को जड़ से खत्म करने का इलाज के बारे में बात करेंगे।

खुजली के प्रकार

खुजली कई प्रकार की होती है

प्रुरिटोसेप्टिव खुजली

ये सूजन, उम्र का असर या किसी इन्फेक्शन के कारण होने वाली खुजली होती है। इसके लिए डॉक्टर को दिखाना जरूरी होता है।

न्यूरोजेनिक खुजली

न्यूरोजेनिक मतलब न्यूरॉन्स यानी सेंट्रल नर्वस सिस्टम से रिलेटेड खुजली। ऐसी बीमारिया या दिक्कतें जो दरअसल त्वचा से नही किडनी, लिवर, खून और कैंसर से जुड़ी होती है और खुजली इन्ही में से किसी कारण से होती है।

साइकोजेनिक खुजली

ऐसी खुजली डिप्रेशन, एंग्जायटी और अन्य मानसिक विकारों के कारण हो सकती है। इसमे खुजली न होने पर भी व्यक्ति त्वचा को खुजलाता रहता है।

न्यूरोपैथिक खुजली

ये खुजली पेरिफेरल नर्वस सिस्टम से जुड़ी किसी दिक्कत के कारण होता है। यह खुजली विकार जैसे पैरेस्थेसिया (हाथों में लगातार सुई चुभने जैसा एहसास) के कारण हो सकती है। यह विकार कई बार खुजली के साथ दर्द का भी कारण बन सकते हैं।

हाथ और पैर में खुजली होने का कारण-खुजली के कारण

  • प्रदूषित हवा व पानी से
  • किसी खास भोज्य पदार्थ से एलर्जी
  • किसी दवा के साइड इफेक्ट से
  • ड्राई त्वचा
  • कॉस्मेटिक्स के साइड इफ़ेक्ट से जैसे केमिकलयुक्त हेयर डाई या हेयर कलर, क्रीम, डिओडरेंट या मेकअप प्रोडक्ट
  • मौसमी बदलाव
  • कीड़े मकोड़ो के काटने से
  • किडनी की बीमारी, आयरन की कमी या थायराइड की समस्या में हो तो खुजली हो सकती है।
  • पित्ती (हाइव्स), सोरायसिस (त्वचा पर खुजली, रैशेज और चकत्ते)
  • गर्भावस्था में पूरे शरीर में खुजली होना

दाने वाली खुजली का उपचार

दाने वाली खुजली भी कई तरह की की होती है, जैसे लाल जलन दार दानों वाली, पानी के दानों वाली, दर्दभरे दानों वाली खुजली। आज इस आर्टिकल में हम आपको दाने वाली खुजली के घरेलू उपचार बताएंगे।

आम की छाल का करें प्रयोग

आम के पेड़ की छाल और बबूल के पेड़ की छाल को बराबर मात्रा में ले। एक ली. पानी में उबाल लें और इस पानी से खुजली वाली जगह पर भाप लें। फिर इस जगह पर घी लगाएँ।

गंधक से मिले आराम

दाने वाली खुजली का उपचार करने के लिए गंधक को पीसकर नारियल के तेल में मिला ले। इस लेप को खुजली वाली जगह पर लगाए। इससे बहुत ज्यादा जलन होगी लेकिन खुजली में आराम मिलता है।

एलोवेरा दिलाये आराम

ताजे एलोवेरा को बीच से काटकर उसका पल्प खुजली की जगह रगड़े आराम मिलेगा। साथ ही ऐलोवेरा जूस का सेवन करें।

एलोवेरा
एलोवेरा

गिलोय के जूस का करें सेवन

गिलोय के जूस या काढ़े का सेवन करने से शरीर के अंदर की अशुद्धि दूर होती हैं,और खुजली में आराम मिलता है।

खुजली को जड़ से खत्म करने का इलाज है बेकिंग सोडा

नहाते समय बाथटब में एक से डेढ़ चम्मच बेकिंग सोडा मिला लें। इस पानी को खुजली वाले स्थान पर कुछ देर तक डाले और फिर साफ पानी मे नहा ले।

तुलसी के पत्तों का करें इस्तेमाल

तुलसी से दाद का इलाज करने के लिए तुलसी के पत्ते पानी मे उबाल लें। इस पानी को नहाने के पानी मे मिला ले। अब इस पानी से स्नान करें। चाहें तो तुलसी की पत्तियों का पेस्ट लगा सकते हैं। तुलसी में मौजूद एंटीमाइक्रोबियल, एंटीइंफ्लेमेटरी गुण सूजन व खुजली में आराम देते है।

नींबू से खुजली का इलाज

नीबू के रस को पानी मे मिलाकर प्रभावित स्थान पर कॉटन से लगाएं। नींबू में एंटीएजिंग गुण पाए जाते हैं, जो बढ़ती उम्र के कारण होने वाली खुजली का घरेलू इलाज करने में मदद कर सकते हैं। संवेदनशील त्वचा पर इस्तेमाल न करें।

सेब का सिरका है लाभदायक

नहाने के पानी में एक कप सेब का सिरका मिलाएं। कुछ देर प्रभावित स्थान पर डाले। बाद में साफ पानी से नहा लें।

दाने वाली खुजली का उपचार हैं नीम की पत्तियां

नीम की पत्तियों को पानी के साथ पीसकर पेस्ट बना लें। पेस्ट को खुजली वाली जगह पर लगाएं और कुछ घंटों के लिए छोड़ दें। पानी में नीम की पत्तियों को उबालकर नहा भी सकते हैं। नीम के एंटीबैक्टीरियल, एंटीफंगल एवं एंटीवायरल गुण हर प्रकार की खुजली में आराम देते है।

नीम के तेल से दाद का इलाज भी किया जा सकता है।

ओटमील का करें प्रयोग

ओटमील पानी में कुछ मिनट के लिए भिगो दें।अब एक सूती कपड़े में रखें और इसे कस लें। कपड़े में बंधे हुए ओटमील को पांच-दस मिनट के लिए नहाने के पानी में डाल दे, और स्नान करें।

इन सबके अलावा नारियल तेल, पुदीना, पेपरमिंट ऑयल का प्रयोग कर सकते है।

किन बातों का रखे ध्यान

  • साफ सफाई का ध्यान रखें
  • हल्के कपड़े पहनें।
  • तेज गर्म पानी से नहाने से बचें।
  • त्वचा को मॉइस्चराइज रखें।
  • कॉस्मेटिक्स का कम से कम प्रयोग करे
  • पानी वाले दानों को फोड़े नही
  • दर्द भरे दानों को बार बार न छेड़े

न करें नजरअंदाज और तुरन्त डॉक्टर से सम्पर्क करे जब

  • खुजली गंभीर रूप ले ले।
  • आसानी से आराम न मिले।
  • खुजली का कारण समझ न आए।

सामान्य प्रश्न

शरीर में दाना क्यों निकलते हैं?

कई बार हमारे शरीर में छोटे छोटे दाने हो जाते हैं जिन में पानी भर जाता है और खुजली होती है कई बार ये दाने फंगल इंफेक्शन की वजह से होती है परंतु कभी-कभी यह हर्पीज नामक बीमारी के लक्षण भी हो सकते हैं । इस बीमारी को शिंगल्स के नाम से भी जाना जाता है । यह रोग उन लोगों को अधिक होता है जिनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर होती है ।यह वायरस द्वारा होने वाला रोग है ।इस बीमारी के होने पर रोगी के शरीर के एक तरफ की त्वचा पर पानी वाले दाने निकलते हैं। इस वजह से रोगी को त्वचा में खुजली या दर्द या जलन या सुन्नपन या झनझनाहट की परेशानी होती है। इतना ही नहीं, जिस जगह ये दाने निकलते हैं, वहां की त्वचा बेहद संवेदनशील हो जाती है और उसे छूने पर दर्द होता है।

खुजली में कौन सा साबुन लगाना चाहिए?

दाद, खाज, खुजली शरीर में फंगल इंफेक्शन की वजह से होती है इसके लिए हमें नहाने के लिए एंटी बैक्टीरियल साबुन का प्रयोग करना चाहिए। एंटीबैक्टीरियल साबुन जैसे Ketotosc एक ऐंटिफंगल साबुन है जो सेट्रिमाइड, नीम ऑयल, एलो वेरा ऑयल और कैमोमाइल एक्स्ट्रैक्ट से भरपूर है। इसके अलावा Tetmosol Soap भी एक असरदार साबुन है खुजली से राहत दिलाता है । इन एंटीबैक्टीरियल साबुनों का इस्तेमाल किसी भी तरह की दाद, खाज, खुजली, सफेद दाग या बैक्टीरिया में भी कर सकते हैं । एंटीबैक्टीरियल साबुन का प्रयोग करते वक्त गुनगुने पानी से नहाने से अधिक फायदा मिलता है ।

खुजली की सबसे अच्छी टेबलेट कौन सी है?

Candiforce -200 काफी कारगर होती है । इसके साथ LECOPE टेबलेट लेने से और भी बेहतर परिणाम प्राप्त होते हैं । यदि शरीर में खुजली से परेशान है तो Fluka-150 टैबलेट काफी कारगर साबित हो सकती है । इसके साथ सिट्राजिन टेबलेट लेने और एंटी फंगल क्रीम और एंटीफंगल सोप का प्रयोग करके खुजली से निजात पाया जा सकता है। दाने वाली खुजली के लिए candid clotrimazol cream काफी मददगार साबित हो सकती है यह क्रीम सूखी खुजली में भी काफी लाभदायक होती है । इन सभी प्रयासों के बावजूद यदि खुजली ठीक नहीं हो रही है तो किसी अच्छे त्वचा के डॉक्टर से संपर्क करें ।

दाने वाली खुजली कैसे ठीक होती है?

स्किन एलर्जी या इन्फेक्शन होने के कारण कई बार त्वचा पर छोटे छोटे दाने निकल आते हैं जिनमें खुजली होती है और पानी निकलने लगता है। इससे राहत पाने के लिए निम्न घरेलू उपाय अपनाए जा सकते हैं = 1. एलोवेरा के पत्ते को काटकर उसका गूदा निकालकर उसे प्रभावित स्थान पर लगाने से दाने वाली खुजली ठीक हो जाती हैं। 2. शुद्ध नारियल तेल को हल्का गुनागुना करके लगाने से भी जाने वाली खुजली में आराम मिलता है । 3. टमाटर का गूदा पीसकर लगाने से भी दाने वाली खुजली में राहत मिलती है।

बीमारियों से निजात के लिए जाने हरसिंगार का पत्ता के फायदे

हरसिंगार का पत्ता के फायदे

हरसिंगार का नाम वनस्पति शास्त्र और आयुर्वेद में काफी प्रचलित है। इसका बोटैनिकल नेम निक्टेन्थिस आर्बोर्ट्रिस्टिस है। इसका लगभग हर एक भाग मेडिकल में प्रयोग किया है। दरअसल हरसिंगार के पत्तों में आर्थराइटिस को दूर करने के गुण होते हैं। इसके अलावा, पत्तियों के काढ़े से लीवर की रक्षा करने वाले, एंटी-वायरल, एंटी-फंगल, एनाल्जेसिक, एंटीपायरेटिक, एंटी-इंफ्लैमेटरी, एंटीस्पास्मोडिक, हाइपोटेंसिव जैसे गुण भी पाए जा सकते हैं। इसकी पत्तियों में एंटी-लीशमैनियल गुण भी होते हैं, जो शरीर में परजीवियों को खत्म करने, जैसे पेट की कीड़ों की समस्या दूर करने में भी मदद कर सकते हैं। आज हम आपको बताते हैं कि हरसिंगार का पत्ता के फायदे और हरसिंगार का सेवन करने से आपको किन-किन बीमारियों से निजात मिल सकती है।

हरसिंगार की पत्तियों में निम्न औषधीय गुण होते है।

  • टैनिन एसिड
  • बीटा-एमिरिन
  • बीटा-सिटोस्टेरोल
  • लिनोलिक एसिड
  • मेथिलसेलिसिलेट
  • डी-मैनिटोल
  • हेंट्रिएकॉन्टेन
  • बेंजोइक एसिड
  • एस्ट्रैगलिन
  • निकोटिफ्लोरिन
  • ओलीनोलिक एसिड
  • नेक्टेन्थिक एसिड फ्राइडेलिन
  • विटामिन सी
  • विटामिन ए

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हरसिंगार का पत्ता के फायदे-Harsingar Leaves Benefits In Hindi

जॉइंट्स पेन या गठिया

हरसिंगार के पत्तो का इस्तेमाल जोड़ो के दर्द के लिए बहुतायत से किया जाता है। शुरुआत में इसके काढ़े का प्रयोग कम मात्रा में करें। इससे आप अपने शरीर पर इसके असर से अवगत रहेंगे।

जॉइंट्स पेन
जॉइंट्स पेन

कैसे प्रयोग करें

हरसिंगार के पत्तो को धोकर छोटा छोटा काट ले, अब इसे पानी मे उबाले। पानी को ढक कर उबाले ताकि इसके गुण भाप के रूप में न उड़े।
पानी आधा रह जाने पर इसे छान लें। सुबह खाली पेट हल्का गुनगुना करके पिए। यदि आपको ये काढ़ा खाली पेट लगता है तो, हल्के नाश्ते के बाद इसका सेवन करें।

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खांसी

यदि आपको काफी लंबे समय से खांसी की समस्या है, तो इसका प्रयोग जरूर करें। खांसी के लिए आप हरसिंगार के पत्तो के साथ फूलों का इस्तेमाल भी कर सकते हैं।

कैसे प्रयोग करें

हरसिंगार के 3 से 4 पत्तियां ले, हार सिंगार का एक फूल ले, थोड़ी सी अदरक और दो पत्ते तुलसी के पानी मे उबाले।
थोड़ी देर उबलने पर छान लें। हल्का गुनगुना पी ले। इसमे बहुत थोड़ा सा शहद मिला कर दे सकते है। 5 साल से छोटे बच्चे को न दे।

बुखार

हरसिंगार के पत्तो को आप बुखार की रिकवरी स्टेज में या बुखार की शुरुआत में इस्तेमाल कर सकते है। चिकित्सको के अनुसार हरसिंगार का काढ़ा डेंगू से लेकर मलेरिया या फिर चिकनगुनिया तक, हर तरह के बूखार को खत्म करने की क्षमता इसमें होती है।

कैसे प्रयोग करें

हरसिंगार के पत्तो का रस निकाल ले या बारीक काटकर पानी मे उबाले, शहद तथा अदरक के साथ सेवन करें। बुखार में आराम मिलेगा। यदि आप स्वस्थ है, और घर मे किसी को संक्रामक बुखार है तो भी इसी का सेवन करें।

साइटिका और कमरदर्द

साइटिका और कमर दर्द में हरसिंगार पर निर्भर ना रहे, उसके लिए साइटिका और कमरदर्द का कारण और उसके हिसाब से इलाज जैसे कि फिजियोथेरेपी जरूरी है। लेकिन साथ साथ हरसिंगार का सेवन करने से इस रोग में तीव्रता से आराम मिलता है।

कैसे प्रयोग करें

दो कप पानी में हरसिंगार के लगभग 8 से 10 पत्तों को धीमी आंच पर उबालें और आधा रह जाने पर इसे अंच से उतार लें। इस काढ़े को दिन में दो बार – प्रातः खाली पेट एवं सायं भोजन के एक डेढ़ घंटा पहले पियें। इस काढ़े का प्रयोग कम से कम 7 दिन तक अवश्य करना चाहिए । एक सप्ताह में आप फर्क महसूस करेंगे।

बवासीर या पाईल्स

बवासीर या पाईल्स के लिए हरसिंगार के पत्ते तो नही लेकिन उसके बीज बहुत ही लाभदायक है। खानपान में बदलाव व उपयुक्त जीवनशैली के साथ हरसिंगार के बीजों का प्रयोग लाभ देता है।

कैसे प्रयोग करें

आप हरसिंगार के बीजों को दो प्रकार से प्रयोग कर सकते है। चाहे तो एक बीज का सेवन प्रतिदिन करें, या गुदाद्वार में सूजन या मस्से हों तो हरसिंगार के बीजों का लेप बनाकर गुदा पर लगाए।

सुंदरता बढ़ाए

चेहरे की सुंदरता की सही पहचान होती है चमकदार त्वचा। इसके लिए भी हरसिंगार के पत्ते और फूलों का इस्तेमाल किया जा सकता है।

कैसे प्रयोग करें

हरसिंगार के पत्तो और फूलों का पेस्ट बनाकर उबटन में मिलाकर चेहरे पर लगाएं। त्वचा उजली व चमकदार बनेगी। लेकिन चेहरे पर इसका प्रयोग करने से पहले स्किन पर पैच टेस्ट जरूर कर ले।

हृदय रोग व मांसपेशियों का दर्द

हृदय रोग व मांसपेशियों के दर्द में हार सिंगार के फूल व पत्तो का रस बहुत ही लाभदायक है।

कैसे प्रयोग करें

10 से 12 फूलों का रस निकाल सुबह शाम सेवन करने से हृदय मजबूत होता है। हरसिंगार के पत्तो का काढ़ा किसी भी प्रकार के संक्रमण, मांसपेशियों के दर्द में बहुत लाभ देता है।

अस्थमा

यदि आपको अस्थमा या सांस की किसी भी प्रकार की दिक्कत है तो हरसिंगार की छाल का प्रयोग करें।

कैसे प्रयोग करें

हरसिंगार की छाल का चूर्ण पंसारी की दुकान से ले ले, एक से डेढ़ चुटकी छाल का चूर्ण पान के पत्ते में रखकर धीरे धीरे चूसे। प्रदूषण वाले स्थानों से दूर रहे।

स्त्री रोग

यदि आप एक महिला है और आपको किसी भी तरह स्त्री विशेष परेशानी जैसे यूरिन इन्फेक्शन, लिकोरिया तो हरसिंगार का प्रयोग करें।
हरसिंगार की 7 कोंपलों (नयी पत्तियों) को पाँच काली मिर्च के साथ पीसकर प्रातः खाली पेट सेवन करने से विभिन्न स्त्री रोगों में लाभ मिलता है।

और पढ़ें: आपकी सेहत के लिए क्या है करी पत्ता के फायदे और नुकसान-मीठी नीम के फायदे इन हिंदी

इम्युनिटी पावर

हरसिंगार के पत्तों का रस या फिर इसकी चाय बनाकर आप नियमित रूप से भी सेवन कर सकते है। इसका सेवन करने से शरीर की इम्युनिटी बढ़ती है। इसके अलावा पेट में कीड़े होना, गंजापन, बालो मे रूसी की समस्या में भी बेहद फायदेमंद है।

Frequently Asked Questions in Hindi – सामान्य प्रश्न

हरसिंगार के पत्ते के क्या क्या फायदे हैं?

हरसिंगार को पारिजात के नाम से भी जाना जाता है। हरसिंगार के पत्ते बहुत ही फायदेमंद होते हैं । हरसिंगार के पत्ते बुखार को ठीक करने काम करते हैं । यदि किसी व्यक्ति के प्लेटलेट कम हो गया हो तो हरसिंगार के पत्तों का सेवन करने से प्लेटलेट काउंट बढ़ जाता हैं । हरसिंगार के पत्तों की सेवन से शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है । सूखी खांसी, अस्थमा तथा ब्रोंकाइटिस में भी हरसिंगार के पत्ते बहुत लाभदायक होते हैं । गठिया रोग में भी हरसिंगार के पत्तों का सेवन फायदेमंद होता है इसके अलावा लीवर के बढ़ने तथा फैटी लीवर में भी हरसिंगार के पत्तों का सेवन करने की सलाह दी जाती है । इसके पत्तों का रस निकालकर लेने से पेट के कीड़े मर जाते हैं ।

हरसिंगार के पत्ते कितने दिन पीना चाहिए?

हरसिंगार के पत्तों का सेवन मुख्य रूप से दो प्रकार से किया जा सकता है । पहला पत्तों को पीसकर उसके रस का सेवन करना ,दूसरा पत्तों का काढ़ा बनाकर उसका सेवन करना । हरसिंगार के पत्तों का सेवन लगभग एक हफ्ते तक किया जा सकता है इससे अधिक सेवन करने से बचना चाहिए। वहीं हरसिंगार के काढ़े का प्रयोग दिन में दो बार, एक हफ्ते तक किया जा सकता है । अधिक मात्रा में हरसिंगार के पत्तों का सेवन करने से नुकसान हो सकते हैं इसलिए इसका उपयोग सीमित मात्रा में करना चाहिए।

हरसिंगार के पत्तों का उपयोग कैसे करें?

हरसिंगार के पत्तों का निम्न प्रकार किया जा सकता है 1. पत्तों का रस निकालकर - प्रतिदिन पांच से सात हरसिंगार के पत्तों पीसकर उनका रस हल्का गुनगुना करके सेवन करने से गठिया, ह्रदय रोग, जुकाम खांसी जैसे कई रोगों में लाभ मिलता है। 2. काढ़ा बनाकर- 7 से 8 हरसिंगार के पत्तों को पानी में मिलाकर उनका काढ़ा बनाकर सेवन किया जाता है जिससे रक्त में प्लेटलेट्स की कमी, गठिया रोग, फैटी लीवर आदि समस्याओं से छुटकारा मिलता है । 3. पाउडर बनाकर -हरसिंगार के पत्तों को सुखाकर उनका पाउडर बनाकर उसमें थोड़ी मिश्री मिलाकर उसका सेवन करने से खांसी जुकाम में लाभ मिलता है और शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है। 4. फेस पैक बनाकर - हरसिंगार के पत्तों और फूलों को पीसकर चेहरे पर लगाने से झाइयों और दाग धब्बों से छुटकारा मिलता है ।

हरसिंगार कौन कौन सी बीमारी में काम आता है?

हरसिंगार में एंटीऑक्सीडेंट, एंटी इंफ्लेमेटरी और एंटी बैक्टीरियल गुण होते हैं । बुखार, जुकाम खांसी, फैटी लीवर या बढ़े हुए लीवर, गठिया रोग, जोड़ों के दर्द, रक्त में प्लेटलेट्स की कमी, साइटिका, बवासीर, त्वचा की झाइयोंऔर दाग दाग धब्बों , ह्रदय रोग ,अस्थमा आदि लोगों में लाभदायक होता है इसके अलावा शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को भी बढ़ाता है ।

गर्भावस्था में सोने के तरीके, जिससे बच्चे को ना हो कोई नुकसान | प्रेगनेंसी में कैसे सोना चाहिए

गर्भावस्था में सोने के तरीके

गर्भावस्था मे महिला को अपने सेहत के साथ-साथ सोने के तरीके पर ध्यान देना चाहिए। गलत पोजीशन मे सोने पर बच्चे पर बुरा असर पड़ सकता है। इसलिए गर्भावस्था मे महिला को कुछ बातो का ध्यान रखना चाहिए। इस लेख में हम बात करेंगे गर्भावस्था में सोने के तरीके के बारे में, प्रेगनेंसी में कैसे सोना चाहिए।

सबसे पहले ये जानना जरुरी है की गर्भावस्था के दौरान सोना मुश्किल क्यों होता है?

प्रेगनेंसी में नींद ना आना-Pregnancy Me Neend Na Aana

गर्भावस्था के दौरान नींद ना आना और सोने में दिक्कत होना बहुत ही सामान्य है। इसके कई कारण है। गर्भावस्था के दौरान शरीर में कई बदलाव होते है जैसे की भ्रूण व योनि का आकार बढ़ना, स्तनों का आकार बढ़ना, बार-बार पेशाब आना और सांस लेने में दिक्कत। इतना ही नहीं, गर्भावस्था में डॉक्टर पेट के बल न सोने की सलाह देते हैं, क्योंकि इससे भ्रूण पर दबाव पड़ता है। इन्ही सब बातों के चलते गर्भवती महिला को ठीक तरह से नींद नहीं आती। आइए विस्तार से जानते है गर्भावस्था में नींद ना आने के कारण और उनके उपाय।

बार-बार पेशाब आना

गर्भावस्था की पहली तिमाही में खून का प्रवाह बढ़ने के कारण बार-बार पेशाब आता है। शरीर में प्रोजेस्ट्रोन हार्मोन और गर्भाशय का आकार बढ़ने के कारण भी ऐसा होता है। बार-बार पेशाब आने की वजह से भी नींद खराब होती है।

बार-बार पेशाब आने की समस्या कम करने के लिए शाम के बाद पेय पदार्थ कम लें। दिनभर में जितना हो सके पेय पदार्थ का सेवन करें, लेकिन शाम को छह बजे के बाद पेय पदार्थ का सेवन कम कर दें। ऐसा करने से रात को सोते समय बार-बार शौचालय नहीं जाना पड़ेगा।

शरीर में दर्द

शरीर में दर्द
शरीर में दर्द

गर्भावस्था में मांसपेशियों और हड्डियों पर दबाव पड़ता है क्यूंकि आपका शरीर शिशु को संभालने के लिए तैयार हो रहा होता है। इस दवाब के कारण शरीर में दर्द महसूस होता है। इस दर्द के कारण भी रात को बार-बार नींद खराब होती है।

गर्भावस्था में रात को आराम से सोने के लिए आप अपनी सुविधानुसार शैड्यूल तैयार करें। यदि रात में ठीक तरह से नींद ना आये तो आप दिन में सो कर कुछ हद नींद पूरी कर सकती हैं।

उल्टी आना

गर्भावस्था में कभी-कभी रात को उल्टी आने की वजह से भी नींद ठीक से नहीं आती। हलांकि जी मिचलना और उल्टी सामान्यत दिन के समय ही आम है।

गर्भावस्था में खान-पान पर ध्यान रख के उल्टी और जी मिचलने की समस्या से बचा जा सकता है। तली और भुनी हुई चीज, मैदे से बनी चीजे ना खाए। पौष्टिक और संतुलित आहार खाएं। अदरक वाली चाय या फिर नींबू पानी का सेवन करें।

गर्भावस्था में सोने के तरीके-Pregnancy Me Sone Ke Tarike In Hindi

पीठ के बल सोने से बचे

गर्भावस्था के पहली तिमाही मे आप पीठ के बल सो सकती है इसमे आपको कोई चिंता करने की ज़रूरत नही है। जब आप दूसरे तिमाही मे चली जाती हैं तो आपको पीठ के बल सोने से बचना चाहिए।

तीसरे तिमाही मे पीठ के बल सोने पर गर्भाशय का पूरा भार आपकी पीठ पर रहता है जो आपके शरीर के निचले हिस्से से रक्त को आपके हृदय तक पहुंचाती है जिससे आपको बहुत सी परेशानिया हो सकती है जैसे पीठ दर्द, बवासीर, अपच, सांस लेने में तकलीफ़ और रक्त परिसंचरण में कठिनाई होती है।

दाएँ करवट कम सोयें

गर्भावस्था मे दाईं हाथ की तरफ सोना पीठ के बल सोने से ज्यादा सही है लेकिन यह उतना सुरक्षित नही है जितना की बाईं तरफ सोने से है इसका कारण यह है कि आपके दाहिने हाथ पर सोते हुए आपके जिगर पर दबाव पड़ सकता है। अगर फिर भी आपका बाई तरफ़ सोने से थकान या दबाब हो गया हो तो आप थोड़े समय के लिए दाईं तरफ करवट ले सकते हैं।

बाएँ करवट सोना होता है अच्छा

बाएँ करवट सोना
बाएँ करवट सोना

गर्भावस्था में बाएं करवट सोना अच्छा होता है यह आपको और आपके पेट मे पल रहे शिशु को स्वस्थ बनाता है | बाएं तरफ सोने से आपके और आपके शिशु के शरीर मे रक्त का प्रवाह सही तरीके से होता है जिससे आप के बेबी को भरपूर ऑक्सीजन और पोषण मिलता है। बायीं करवट मे सोने से शिशु को कोई भी चोट लगने की कम सम्भावना होती है।

गर्भावस्था मे आप बाईं तरफ मुंह और अपने घुटनो को मोड़कर सो सकते हैं इस अवस्था मे आपको बहुत तकलीफ़ तो होगी लेकिन अगर आप चाहते है की आपका शिशु स्वस्थ और निरोगी रहे तो आपको ये तो करना ही होगा।

इन बातों का भी रखें ध्यान-प्रेगनेंसी में कैसे सोना चाहिए

  • गर्भावस्था के शुरूआती महीनों में महिलाओं को सीधा होकर सोना चाहिए। इससे भ्रूण का विकास अच्छी तरह से होता है।
  • सोते समय अपने सिर के नीचे नर्म तकिए लगा लें। तकिया मोटा और सख्त नहीं होना चाहिए इससे बच्चे के साथ-साथ आपको भी नुकसान हो सकता है।
  • सोते समय अपने घुटनों को थोड़ा-सा मोड़ ले इससे पीठ को आराम मिलता है और कमर दर्द की समस्या नहीं होती। और एक ही मुद्रा मे बहुत देर तक ना सोऐ।
  • गर्भावस्था के दौरान महिला को बाई तरफ करवट लेकर सोना चाहिए। इससे भ्रूण में रक्त बढ़ता है और पोषण भी मिलता है।
  •  सोते समय तकिए को पैरों के बीच में रख ले इससे आपको आराम मिलेगा और आपके पेट को भी सहारा मिलेगा।
  • अगर आप एक तरफ करवट लेकर सोते है तो सोते समय अपनी पीठ के पीछे तकिया लगा लें। इससे आपको पीठ दर्द की समस्या नहीं होगी।

गर्भावस्था के दौरान अच्छी और गहरी नींद के लिए टिप्स

तकिया

गर्भावस्था में अच्छी नींद के लिए तकिए का उपयोग करे। सोते समय एक से अधिक तकिये का इस्तेमाल करे। एक तकिया अपने पेट के नीचे रखें और एक अपने घुटनों के बीच में रख कर आराम से लेट जाए। इससे आपको आराम मिलेगा और अच्छी नींद आएगी। साइड पोजीशन यानि करवट ले कर आराम से सोने के लिए मैटरनिटी पिलो का इस्तेमाल भी कर सकती है।

खानपान

गर्भवती महिला को रात को डिनर में मिर्च-मसाले और तले हुए भोजन का सेवन नहीं करना चाहिए। सोने से कम से कम दो घंटे पहले हल्का भोजन करें और भोजन के बाद कुछ देर टहलें।

मालिश

हाथों, पैरों, गर्दन व सिर की मालिश करवाने से भी तनाव दूर होता है और आपको अच्छी नींद आती हैं।

अच्छी और पूरी नींद हमे अगले दिन पूरी ऊर्जा के साथ फिर से काम करने के लिए तैयार करती हैं। गर्भवती महिला के लिए नींद पूरी होना और भी ज्यादा जरूरी है क्योंकि पर्याप्त नींद लेने से गर्भ में पल रहे शिशु का विकास बेहतर तरीके से होता है। हमें उम्मीद है कि इस लेख के माध्यम से आपको गर्भवती महिला के लिए पर्याप्त नींद की क्यों जरुरी है और गर्भवस्था में नींद पूरी करने के लिए आप क्या क्या कर सकते है समझ आ गया होगा।

Frequently Asked Questions in Hindi – सामान्य प्रश्न

गर्भवती महिला को कितने घंटे सोना चाहिए?

प्रेग्नेंसी के दौरान महिलाएं अच्छी नींद नहीं ले पाती हैं। जबकि हर गर्भवती महिला के लिए पूरे दिन में 7 से 8 घंटे की अच्छी नींद जरूरी है। यह गर्भ में पल रहे शिशु के लिए भी आवश्यक है, कम नींद लेने से शिशु का विकास प्रभावित हो सकता है। लेकिन शरीर केआकार में बदलाव, हारमोन्स परिवर्तन और अन्य कईं स्वास्थ्य समस्याएं होने से अक्सर गर्भवती महिला की नींद बाधित होती है। ठीक इसी तरह बिस्तर पर सारे दिन लेटे रहना भी शिशु के स्वास्थ्य के लिए नुकसानदायक हो सकता है,और एक अच्छी नींद के लिए भी ये जरूरी है कि सारा दिन बिस्तर पर न रहकर कुछ हल्के फुल्के काम करना और टहलना जरूर चाहिए। बेड़रेस्ट तभी करें, जब डॉक्टर ने सजेस्ट किया हो।

गर्भवती महिला को कैसे रहना चाहिए?

गर्भावस्था किसी औरत की जिंदगी का बहुत ही महत्वपूर्ण समय होता है, इसलिए सबसे पहले गर्भवती महिला का खुश रहना बहुत जरूरी है, इसके अलावा उसके आसपास का पारिवारिक माहौल भी खुशहाल हो तो सोने पर सुहागा। आहार पर विशेष ध्यान दें,भोजन छोटे छोटे मील में बाँटकर चार पाँच बार करें, भोजन पौष्टिक हो लेकिन अपनी रूचि का हो ताकि जी न मिचलायें,भोजन में सभी आवश्यक तत्व आइरन फोलिक एसिड़, विटामिन्स, प्रोटीन व कैल्शियम सभी हों। इसके अलावा अच्छी नींद लें,टहलें और डॉक्टर से नियमित चैकअप कराये, डॉक्टर की सलाह से आवश्यक सपलीमेंटस ले, सोनोग्राफी कराकर बच्चे का विकास सुनिश्चित करें। अच्छा साहित्य पढे़ , सोशल मीडिया पर सकारात्मक कंटेंट ही देखें, योगा और प्राणायम को किसी ट्रेनर से सीख कर अपनी दिनचर्या का हिस्सा बनायें।

प्रेगनेंसी में सुबह कितने बजे उठना चाहिए?

प्रत्येक व्यक्ति के लिए जल्दी सोना व जल्दी उठना एक आदर्श दिनचर्या का हिस्सा होता है, प्रिगनेंसी में ये और भी ज्यादा जरूरी है, अगर आप जल्दी सोकर सात घंटे की अच्छी नींद लेकर सुबह सूर्योदय के समय उठ जाती हैं और थोड़ी देर उगते सूरज की धूप लेती हैं तो सारा दिन व्यवस्थित रहेगा। एक सर्वे में पाया गया कि देर रात तक जगने वाली महिलाओं की फिटनेस सुबह उठने वालों के मुकाबले कमजोर हाेती है। ऐसी महिलाएं ज्यादातर रोजमर्रा के कामों को पूरा करने के लिए बॉडी क्लॉक के विरुद्ध जाती हैं जो शरीर की अंदरूनी कार्यशैली को अव्यवस्थित करता है। इसलिए शाम को सही समय पर हल्का भोजन करें तथा नियमित समय पर मोबाइल को खुद से दूर रखकर सोने की कोशिश करें ।

प्रेगनेंसी में सुबह उठकर क्या खाना चाहिए?

गर्भवती महिला को सुबह की अपनी पहली खुराक पौष्टिकता और अपनी रूचि के हिसाब से निर्धारित करनी चाहिए, इस विषय पर हमारी सलाह है..! *गर्भवती महिला सुबह उठकर सेब खा सकती हैं, ये रोगों से लड़ने में मदद करता है,इसमें फाइबर अच्छी मात्रा में होता हैऔर यह एक अच्छा एंटीऑक्सिडेंट भी है। *रात भर भीगे बादाम सुबह खाने से मां और गर्भ में पल रहे बच्चे दोनों के लिए पोषण और ऊर्जा मिलती है। *आप सुबह-सुबह दूध पी सकती हैं, अगर आपको दूध पीने से मितली या उल्टी आती है तो आप साथ में कुछ नट्स या बिस्कुट ले सकती हैं। *अगर आप फल नहीं खाना चाहती है तो आप जूस ले सकती है इससे आपको वो सारे पोषक तत्व मिलेंगे जो फल से मिलते हैं।

जानिए क्या है तिल के तेल की मालिश के फायदे-Til Ke Tel Ke Maalish Ke Fayde

तिल के तेल की मालिश के फायदे

मालिश शरीर की हो या बालो की अलग ही आनन्द देती है। केवल शारीरिक स्वास्थ्य के नजरिये से तो ये बेहतर ही है, साथ ही मानसिक स्वास्थ्य और सुंदरता बढ़ाने में भी मदद करती है। दरअसल तिल के तेल की मालिश करने से बॉडी का रक्तसंचार तेज होता है। रक्त संचार तेज होने से ऑक्सीजन भी उसी फ्लो से सभी बॉडी पार्ट में जाती है।

इसी कारण भोज्य पदार्थ से मिलने वाले विटामिन्स, मिनरल्स और अन्य पोषक तत्व तेजी से बॉडी सिस्टम को मिलते है। इसी का फायदा होता है कि त्वचा तो चमकदार होती ही है, अंदर से भी हेल्थ अच्छी होती है। मालिश से हैप्पी हॉरमोन ऑक्ससीटोसिन रिलीज होता है। जिससे मानसिक तनाव दूर होता है।

तो अब आप समझ गए होंगे मालिश शारीरिक मजबूती से लेकर बालों को सुंदर बनाने और तनाव को दूर करने के लिए फायदेमंद है।

तिल के तेल की मालिश के फायदे

यूँ तो मालिश के लिए बहुत से तेल इस्तेमाल होते है। पर आज इस आर्टिकल में हम तिल के तेल की मालिश की बात करेंगे। तिल का तेल वर्षो से मालिश के लिए इस्तेमाल किया जाता रहा है। तिल के तेल में विटामिन ई, बी कॉम्प्लेक्स, कैल्शि‍यम, मैग्नीशि‍यम, फॉस्फोरस और प्रोटीन पाया जाता है। तिल का तेल एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर होता है। तिल का तेल एंटीफंगल और एंटीबैक्टीरियल होता है।

हड्डियों में मजबूती

तिल के तेल में पाया जाने वाला प्रोटीन और एमिनो बोन्स को स्ट्रांग बनाने में मदद करता है। इसलिए ही बढ़ते बच्चो की मालिश तिल के तेल से करनी चाहिए। खासकर सर्दियों में इसका अलग ही फायदा होता है क्योंकि तिल के तेल की तासीर गर्म होती है।

मांसपेशियों को मजबूत करें

यदि आओ किसी प्रकार की बोन प्रॉब्लम से परेशान है तो तिल के तेल की मालिश करे। क्योंकि जब आपकी हड्डी सही प्रकार से अपना काम न कर रही हो तो, ये जरूरी है कि उस हड्डी के आसपास की मासपेशियो को मजबूत बनाया जाए।

तिल के तेल में मौजूद कैल्श‍ियम, आयरन, मैग्नीशियम, जिंक और सेलेनियम आदि मसल्‍स को एक्‍टिव रखने में मदद करते हैं।

त्वचा को प्राकृतिक रूप से मुलायम बनाए

तिल के तेल में विटामिन बी और विटामिन ई पाया जाता है, तो जब आप रेगुलर तिल के तेल से मालिश करेंगे तो त्वचा को भरपूर नमी मिलेगी।

केवल त्वचा मुलायम ही नही होती बल्कि चमकदार भी बनती है।

क्रेक हील का इलाज

अगर आप हर मौसम में फटी एड़ियों से परेशान है तो, तिल का तेल आपके लिए बहुत काम की चीज़ है। तिल के तेल और मोम को मिलाकर रख ले। पैरो को अच्छे से साफ करके इसे एड़ियो पर लगाए और कॉटन सॉक्स पहन लें। जल्दी ही आपकी एड़ियां ठीक हों जाएँगी।

क्रेक हील का इलाज
क्रेक हील का इलाज

घाव भरें

शरीर के किसी भी अंग की त्वचा के जल जाने पर, तिल को पीसकर घी और कपूर के साथ लगाने पर आराम मिलता है और घाव भी जल्दी ठीक हो जाता है।

ब्रैस्ट को सुडौल और सुंदर बनाए

तिल के तेल में विटामिन ए और विटामिन ई होता है। यदि आप रोज रात को स्तनों की मालिश तिल के तेल से करे तो स्तन सुडौल बनने के साथ सट्रेच मार्क्स भी दूर होते है।

तनाव दूर करें

तिल में कुछ ऐसे तत्व और विटामिन पाए जाते हैं जो तनाव और डिप्रेशन को कम करने में हेल्‍प करता है। यदि आप तिल के तेल से फुल बॉडी मसाज करते है तो मन को खुशी मिलती है। तनाव रिलीज होता है। आप अच्छा महसूस करते है।

किसी भी तरह का दर्द दूर करे

आपके शरीर मे किसी भी प्रकार का दर्द हो, आर्थराइटिस, गाउट, फ्रैक्चर के ठीक होने के बाद का दर्द, स्ट्रेन, स्प्रेन। सभी तरह के दर्द में तिल के मालिश गजब का असर दिखाता है।

तिल के तेल में कपूर मिलाकर प्रभावित स्थान पर मालिश करे। कुछ ही दिन में आपको दर्द में आराम मिलने लगेगा।

Frequently Asked Questions in Hindi – सामान्य प्रश्न

बालों के लिए कौन सा तेल सही है?

बालो के लिए सबसे अच्छा कैस्टर आयल होता है। यह बालो को घना करता है।

बालों में तेल कब और कैसे लगाएं?

बालो मे तेल हमेशा रात मे लगाऐ और अगली सुबह धो ले।अपनी उंगलियों को तेल मे डुबोकर बालो के हिस्से कर के सिर पर हल्के हाथो से पूरे सिर पर लगाऐ और थोड़ी देर मसाज करे।

बालों में गर्म तेल लगाने से क्या होता है?

हल्के गर्म तेल से मसाज करने पर डैंड्रफ की समस्या में काफी फायदा होता है। हल्के गर्म तेल से मसाज करने पर बालों का झड़ना कम होता है।ये बालों को पोषण देने का काम करता है जिससे बालों की जड़ें मजबूत बनती है, हल्के गर्म तेल से मसाज करने पर डैंड्रफ की समस्या में काफी फायदा होता है।

घर पर बालों के लिए तेल कैसे बनाएं?

तेल घर पर बनाने के लिए आपको 120 ग्राम आंवला पाउडर, 1 लीटर पानी और 250 मिली नारियल के तेल की जरूरत पड़ेगी। सबसे पहले 100 ग्राम आंवला पाउडर को 1 लीटर पानी के साथ तब तक उबालें जब तक कि लिक्विड आधा न रह जाए, दूसरे पैन में नारियल का तेल, बचा हुआ आंवला पाउडर और उबले हुए लिक्विड को मिलाकर धीमी आंच पर तब तक उबालें जब तक कि सारा पानी वाष्पीकृत न हो जाए। आखिर में पैन में पीला और पारदर्शी तरल शेष बचेगा। इसे किसी बोतल में भरकर रख लें।

क्या कैल्शियम की कमी से बाल झड़ते हैं?

कैल्शियम की कमी से बाल तेजी से झड़ने लगते है।

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