अश्वगंधा और दूध के फायदे और अश्वगंधा का सेवन विधि

अश्वगंधा और दूध के फायदे

हेल्लो फ्रेंड्स आज की पोस्ट में हम जानेंगे की अश्वगंधा और दूध क्यों पीना चाहिए। अश्वगंधा और दूध के फायदे और अश्वगंधा व दूध का सेवन कैसे करना चाहिए इसकी पूरी जानकारी आपको इस आर्टिकल में मिलेगी। अश्वगंधा एक प्रकार की औषधि है जिसके बारे में आज के समय में सबको पता है। अश्वगंधा के बहुत सारे लाभों के कारण से सर्दियों के मौसम में इसका उपयोग विश्वभर में किया जाता है। साथ ही वैज्ञानिक भी ये मानते है की अश्वगंधा हमारे शरीर के लिए लाभदायक होता है।

अश्वगंधा के सेवन से कई प्रकार की शारीरिक समस्याओं, विकार और अन्य कई रोगों से बचने में मदद करता है। ऐसे लोगो के मन में ये सवाल जरुर आता है की अश्वगंधा को दूध के साथ पीने से क्या फायदे होते है? क्या नुकसान होते है? और कैसे पीते है? आज हम आपको इसकी पूरी जानकारी देंगे।

अश्वगंधा और दूध क्यों पीना चाहिए

जैसा की हम सब लोगो को पता ही है की दूध में कितने सारे पौष्टिक तत्व पाए जाते है और ज्यादातर बीमारी के समय हमें डॉक्टर भी दूध पीने की सलाह देते है। ऐसे में यदि हम अश्वगंधा को दूध में मिलाकर पीते है तो वे हमारे शारीर के लिए बहुत फायदेमंद होता है। ये दोनों पौष्टिक तत्व हमारे शरीर अंदर जा कर शरीर को उर्जा प्रदान करते है जिससे बहुत सारी बीमारियों से बचने में मदद मिलती है।

यदि हम अश्वगंधा और दूध दोनों को साथ में पीते है तो शरीर मजबूत बनता है, वात दोष से भी आराम मिलता है और हमें टीबी जैसी बीमारी से राहत मिलती है। तो आइये अब अश्वगंधा और दूध का सेवन करने के फायदों के बारे में जान लेते है।

अश्वगंधा और दूध के फायदे

बांझपन में फायदेमंद 

यदि आपको बांझपन की समस्या है तो आपको दिन में दो बार दो ग्राम अश्वगंधा का दूध या मिश्री के साथ में सेवन करना चाहिए। ऐसा करने से आपको बांझपन की समस्या से राहत मिलेगी।

टीबी की बीमारी में फायदेमंद 

यदि आप रोजाना अश्वगंधा और दूध का सेवन करते है तो आपको टीबी जैसी बीमारी से राहत मिलती है। 

शारीरिक कमजोरी दूर करे अश्वगंधा और दूध

यदि आप शारीरिक रूप से कमजोर हो तो ऐसे में आपको नियमित दो ग्राम अश्वगंधा और 125 ग्राम त्रिकाटू पाउडर को दिन में दो बार दूध में मिलाकर के पीना चाहिए। त्रिकाटू पाउडर में सुखी असर्क, काली मिर्च और लम्बी मिर्च पाई जाती है जो हमारे शरीर के लिए बहुत फायदेमंद होती है। यदि आप इसका रोजाना सेवन करते हो तो कमजोरी की समस्या से छुटकारा पा सकते हो।

शारीरिक कमजोरी
शारीरिक कमजोरी

अस्थिसंधिशोथ की समस्या का उपाय

यदि आपको अस्थिसंधिशोथ की समस्या है तो आपको रोजाना दो ग्राम अश्वगंधा चूर्ण और एक ग्राम मुलेठी को गर्म दूध के साथ में मिलाकर के पीना चाहिए। जिससे आपकी अस्थिसंधिशोथ की समस्या दूर होने में बहुत मदद मिलेगी।

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ऑस्टियोपोरोसिस दूर करेअश्वगंधा

यदि आपको ऑस्टियोपोरोसिस की गम्भीर समस्या है तो आपको रोजाना दिन में दो बार दो ग्राम अश्वगंधा चूर्ण और एक ग्राम अर्जुन छाल पाउडर को दूध में मिलाकर के सेवन करना चाहिए। ऐसा करके आप ऑस्टियोपोरोसिस की समस्या से छुटकारा पा सकते हो।

उच्च रक्तचाप के लिए दूध और अश्वगंधा

यदि आपको उच्च रक्तचाप की समस्या है, तो आपको रोजाना दिन में दो बार दो ग्राम अश्वगंधा चूर्ण और 125 ग्राम मोटी पिसती को दूध में मिलाकर के पीना चाहिए। ऐसा करने से आप अपनी उच्च रक्तचाप की समस्या से छुटकारा पा सकते हो।

दूध और अश्वगंधा बच्चो के लिए

यदि आपके बच्चो में पौषकता की कमी है तो अपने बच्चो को अश्वगंधा की चाय बनाकर के पिलानी चाहिए। इस चाय को बनाने के लिए आपको आधा ग्लास पानी,आधा ग्लास दूध और एक ग्राम अश्वगंधा की जरूरत होगी, आप इसके अंदर थोड़ी बहुत चीनी भी मिला सकते हो।

यदि आप अश्वगंधा और दूध का सेवन का सेवन करना चाहते है तो इसका भी तरीका होता है जो कुछ इस प्रकार से है।

अश्वगंधा और दूध का सेवन का तरीका

सबसे पहले एक बर्तन में 4 कप दूध डाले और फिर उसमे 10 ग्राम अश्वगंधा मिला दे।
इसके बाद इसको गैस पर रखे और इसको तब तक गर्म करे जब तक इसका मिश्रण गाढ़ा ना बन जाए।
अब इसको अलग्भ्ग 5 मिनिट के लिए ठंडा होने दे।
ठंडा होने के बाद में इसमे 1 चमच चीनी मिला दे और फिर अच्छे से मिला ले और अब आप इसका सेवन कर सकते हो।

हमें अश्वगंधा और दूध के मिश्रण का सेवन रोजाना भूखे या खाली पेट ही करना चाहिए तभी आपको इसका अच्छा परिमाण देखने को मिलेगा और साथ खाली पेट इसका सेवन करने से इसका अवशोषण भी आसानी से हो जाता है।

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आपने क्या सिखा अश्वगंधा और दूध के सेवन के बारे में

हम उम्मीद करते है की अश्वगंधा और दूध क्यों पीना चाहिए, अश्वगंधा और दूध के फायदे और अश्वगंधा व दूध का सेवन कैसे करना चाहिए ? इसकी पूरी जानकारी आपको मिल गई होगी, यदि आपका इससे सम्बन्धित कोई भी सवाल है तो आप हमें कमेंट के माध्यम से पुछ सकते हो हमे आपके सवाल का जल्द से जल्द जवाब देने का प्रयास करेंगे ।

अश्वगंधा और दूध के सेवन की इस जानकारी को अपने दोस्तों व अपनी सोशल मीडिया पर जरुर से शेयर करे ताकि आपके दोस्तों को भी इसकी जानकारी मिल सके।

स्टेमिना और सेक्सुअल टाइमिंग बढ़ाने के लिए पतंजलि का अश्वगंधा कैप्सूल बहुत लाभकारी माना जाता है। अश्वगंधा कैप्सूल को खाना खाने के बाद या रात में सोने से पहले दूध के साथ लिया जा सकता है। दिन में दो बार कैप्सूल को उपयोग में लेना चाहिए। 

हिमालय अश्वगंधा टेबलेट का उपयोग दिन में किसी भी समय किया जा सकता है इसको पानी के साथ लिया जा सकता है खाना खाने के बाद। और रात में सोने से पहले गुनगुने दूध के साथ भी इसका उपयोग किया जा सकता है। 

डाबर अश्वगंधा टेबलेट एक नेचुरल तरीके से बना उत्पाद है जिसमें अश्वगंधा मिला हुआ होता है। जो की तनाव, इम्यूनिटी और स्टेमिना से जुड़ी समस्याओं को दूर करता है। इसके उपयोग से सेक्स से जुड़ी समस्याएं जैसे काम टाइमिंग, थकान जैसी समस्याएं भी दूर होती है। 

अश्वगंधा टेबलेट प्राकृतिक उत्पादों से मिकर बनी होती है इसलिए इससे किसी भी तरह का कोई साइड इफेक्ट होने का खतरा नहीं रहता है। उसको दिन के समय खाना खाने के बाद और रात में सोने से पहले उपयोग में लिया जा सकता है। 

अश्वगंधा टेबलेट को उपयोग में लेने से बहुत सी समस्याओं से राहत पायी जा सकती है। यह तनाव, नींद में कमी और स्टेमिना से जुड़ी समस्याओ में काफी कारगर होता है। इसके उपयोग से स्टेमिना में वृद्धि होती है जिससे पूरे दिनभर थकान महसूस नहीं होती है। 

अश्वगंधा प्राय चूर्ण या टेबलेट के रूप में बाजार में उपलब्ध है। चूर्ण को आप दूध, घी, पानी किसी में मिक्स कर के ले सकते हो और टेबलेट को भी दूध या पानी के साथ लिया जा सकता है। सुबह और शाम दिन में दो टेबलेट का सेवन करना चाहिए। और चूर्ण को एक छोटा चमच जितना ही। 

अश्वगंधा सिर्फ पुरुषों के लिए ही नहीं अपितु महिलाओं के लिए भी लाभकारी होता है। महिलाओं में यह सेक्सुअल इन्फेक्शन को दूर करता है और घुटनों में दर्द, थायराइड की समस्या, और जनन क्षमता की समस्या को भी दूर करता है। यह एंटी ऐजिंग प्रोडक्ट के रूप में उपयोगी है। 

यदि आपको स्टेमिना में कमी, तनाव, थकान या सेक्स से जुड़ी कोई समस्या है तो आप हिमालय अश्वगंधा टेबलेट का प्रयोग कर सकते है। आप नियमित रूप से तीन या चार महिने तक इसका प्रयोग  करते है तो आपको इसके सकारात्मक प्रभाव देखने को मिल जाएंगे।  

अश्वगंधा और मिश्री को मिक्स कर के खाने से न सिर्फ स्वाद में फर्क पड़ता है अपितु स्वास्थ्य के लिए भी बहुत ज्यादा लाभकारी है। यह शुगर को नियंत्रित करता है और घुटनों के दर्द और सेक्सुअल समस्याओं को भी दूर करता है। स्टेमिना में वृद्धि और तनाव को दूर करने में इसकी महत्वपूर्ण भूमिका है। 

अश्वगंधा को खाली पेट लेने की अपेक्षा खाना खाने के बाद प्रयोग में किया जाना चाहिए। चूंकि जब हम खाना खाने के बाद इसका उपयोग करते है तो खाने में मिले हुए तत्व अश्वगंधा के गुणकारी तत्वों को अवशोषित कर शरीर के हर हिस्से तक पहुंचाते है। दूध के साथ भी इसका प्रयोग किया जा सकता है।  

अश्वगंधा पुरुषों और महिलाओं दोनों के लिए लाभकारी है लेकिन यह पुरुषों में विशेष तय सेक्सुअल समस्याओं को जड़ से दूर करता है। जैसे पुरुषों में नपुसंकता, शुक्राणुओं की कमी, और सेक्स टाइमिंग में कमी जैसी समस्याओं के लिए यह रामबाण साबित होता है। 

अश्वगंधा का अधिक मात्रा में उपयोग करने से आपको इसके नकारात्मक प्रभाव देखने को मिल सकते है। अधिक उपयोग से यह शरीर में गर्मी पैदा करता है जिससे पेट की समस्या, मुहँ में छालों की समस्या, अपच जैसी समस्याएं देखने को मिल सकती है। अतः अधिक मात्रा में उपयोग से बचना चाहिए। 

अश्वगंधा का अधिक इस्तेमाल पेट के लिए हानिकारक हो सकता है। इसका उपयोग करने से डायरिया जैसी समस्या पैदा हो सकती है। इसलिए इसके इस्तेमाल से पहले आप डॉक्टर की सलाह लें उसके बाद ही इसका सेवन करें। और जिनको ब्लड प्रेशर की समस्या हो उनको अश्वगंधा के प्रयोग से बचना चाहिए। 

नारियल के तेल के फायदे इन हिंदी-Nariyal Tel Ke Fayde In Hindi

नारियल के तेल के फायदे इन हिंदी

नारियल के तेल का इस्तेमाल पूरी दुनिया में किया जाता है। नारियल का तेल बहुत ही गुणकारी होता है। नारियल के तेल के फायदे बहुत है। नारियल तेल खाने के स्वाद को बढ़ाता है। नारियल का तेल चेहरे पर भी इस्तेमाल किया जाता है।

नारियल का तेल आपके बालों को भी स्वस्थ रखता है। बड़े बुजुर्ग हमेशा बालों में नारियल का तेल लगाने की सलाह देते हैं। क्योंकि नारियल तेल का इस्तेमाल लंबे समय से बालों में लगाने के लिए किया जाता है। यूं तो नारियल के तेल में बहुत से गुण है लेकिन ये गुण किस तरह से हमारे बालों के लिए जरुरी है यह बात सबसे महत्वपूर्ण है।

नारियल के तेल के फायदे-Nariyal Tel Ke Fayde In Hindi

ठंडक का एहसास दिलाए नारियल तेल की मालिश

नारियल तेल से मालिश आपको ठंडक का एहसास दिलाती है। नारियल का तेल सिर दर्द की समस्या को दूर करने में मदद करता है। नारियल तेल उन लोगों के लिए भी फायदेमंद साबित होता है जिन्हें बालों में बहुत पसीना आता है।

गंजेपन और सफेद बालों की समस्या को रोके नारियल का तेल

नारियल तेल की मालिश के फायदे
नारियल तेल की मालिश के फायदे

अक्सर ज्यादा तनाव होने से हमारे शरीर में हार्मोन्स की गड़बड़ी हो जाती है जो गंजेपन का कारण होती है। ऐसे में नारियल का तेल बहुत अच्छा है। नारियल का तेल लगाने से ब्लड सर्कुलेशन तेज हो जाता है जो बालों को ठीक से बढ़ने में मदद करता है। नारियल के तेल में प्रचुर मात्रा में विटामिन्स और एंटी ऑक्सीडेंट पाएं जाते हैं। जो बालों को जल्दी सफेद होने से रोकते है और उन्हें काला बनाए रखने में मदद करते है।

बालों का झड़ना करे कम नारियल तेल की मालिश

प्रोटीन की कमी बालों के झडने की समस्या का मुख्य कारण होती है। नारियल के तेल में प्रचुर मात्रा में प्रोटीन पाया जाता है। नारियल तेल की मालिश बालों को प्रोटीन देती है और उन्हें जड़ों से मजबूत बनाता है जिससे बाल कम झड़ते है और जल्दी लंबे भी होते है। यदि आप भी बाल झड़ने की समस्या से परेशान है तो नारियल तेल से मालिश जरूर करे।

नारियल का तेल बालों को रखे हाइड्रेटेड

रूखे सूखे बालों की समस्या आज कल आम बात हो गई है। फ्रीजी बाल देखने में बिल्कुल अच्छे नहीं लगते। ऐसे में आपको नारियल के तेल का प्रयोग करना चाहिए। नारियल का तेल बालों में स्थिर बना रहता है और जल्दी से वाष्पीकृत नहीं होता जिसकी वजह से बालों में मॉश्चर बना रहता है और बाल सॉफ्ट हो जाते है।

रूसी से दे छुटकारा नारियल तेल

रुसी
नारियल तेल से मालिश के लाभ

रूसी की समस्या की वजह से सिर में हमेशा खुजली होती रहती है और साथ ही यह आपके आत्म विश्वास को भी कम करता है। नारियल तेल की मालिश आपको इस समस्या से निजात दिलाने में भी मदद करती है। इस तेल में विटामिन के और विटामिन ई प्रचुर मात्रा में होता है। इसमें फैटी एसिड्स की मात्रा भी अधिक पाई जाती है। हफ्ते में दो बार नारियल तेल से मालिश कर के  आप रूसी की समस्या से छुटकारा पा सकते है।

जूओं से बचाए नारियल तेल

जूओं की समस्या बालों का अच्छे से ख्याल ना रखने कि वजह से हो जाती है। एक बार बालों में जुएं हो जाएं तो ये आसानी से पीछा नहीं छोड़ती। इससे सिर में खुजली होती है और जुएं आपके बालों को कमजोर बना देती है। इनकी वजह से कई बार स्कैल्प पर इंफेक्शन भी हो जाता है।

नारियल के तेल में एंटी बैक्टेरियल गुण पाए जाते है जो इंफेक्शन को होने से रोकते है और उन्हें ठीक करते है। ये तेल बालों की जड़ों के अंदर तक जाता है और लीखों तथा जूओं को बालों से चिपकने से रोकता है। जिससे जूओं की समस्या दूर हो जाती है।

नारियल तेल की मालिश के फायदे-दो मुहें बालों की समस्या हो खत्म

आज कल के प्रदूषण की वजह से दो मुंहे की समस्या बढ़ गई है। इस समस्या की वजह से बाल कमजोर हो जाते है। ऐसे में नारियल तेल लगाना चाहिए। बालों को कमजोर होने से रोकता है और दोमुंहे बालों कि समस्या को कम करता है।

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Frequently Asked Questions in Hindi – सामान्य प्रश्न

नारियल तेल कौन सा अच्छा है?, सबसे अच्छा नारियल तेल कौन सा है?

कोकोनटी रॉ एक्स्ट्रा वर्जिन कोकोनट ऑयल बालों के लिए सबसे अच्छा नारियल तेल माना जाता है इसमें लॉरिक एसिड की भरपूर मात्रा मिलती है जिसे एंटी-माइक्रोबियल और एंटी-बैक्टीरियल गुणों के लिए जाना जाता है। इस गुण के कारण यह तेल स्कैल्प को फंगस की समस्या से दूर रखने का काम कर सकता है।

नारियल तेल लगाने से क्या फायदा होता है?

नारियल के तेल में विटामिन के और ई होता है जो हेयर फॉलिकल्स को हेल्दी रखता है और रुसी भी दूर करता है। वहीं नींबू में विटामिन सी के अलावा ऐंटी-फंगल प्रॉपर्टीज होती हैं जो स्कैल्प को साफ और हेल्दी रखने में मदद करती है।

कपूर और नारियल तेल लगाने से क्या फायदा होता है?

बालों में रुसी रहने की समस्या भी बहुत से लोगों को रहने लगी है जो सर्दी के मौसम में बहुत ज़्यादा बढ़ जाती है जिससे बाल कमज़ोर होकर टूटने लगते हैं। कपूर और नारियल तेल इसमे फायदा करता है।

नारियल के तेल लगाने से क्या होता है?

थोड़ा सा नारियल का तेल चेहरे पर रात को सोने से पहले लगाने से चेहरे के दाग-धब्बे दूर होते है। ये आपकी स्किन के लिए काफी फायदेमंद होगा, आप नारियल तेल को पूरे चेहरे पर लगाकर हल्के हाथों से मसाज भी कर सकते हैं, सुबह उठकर गुनगुने पानी से चेहरे को धो लें।

बादाम का तेल चेहरे पर लगाने से क्या होता है?

रात में सोने जाने से पहले, अपने हाथों को धो लें और बादाम के तेल की कुछ बूंदें लेकर अपनी हथेलियों को आपस में रगड़ें।अब इसे अपने पूरे चेहरे पर लगाएं और हल्‍के हाथों से कुछ देर मसाज करें। ऐसा नियमित करने से आपके चेहरे में चमक आएगी और दाग-धब्‍बे भी हल्‍के होंगे।

क्रीम के साथ घर पर फेशियल कैसे करे-Facial Karne Ka Tarika Hindi Me

क्रीम के साथ घर पर फेशियल कैसे करे

How To Do Facial At Home In Hindi

क्या आपकी त्वचा भी बेजान और रूखी हो गई है? इसका कारण है यह भाग दौड़ वाली जिंदगी, जिसकी वजह से आप अपनी त्वचा का ध्यान नहीं रख पाते है। धूल, धूप, मिटटी, प्रदूषण, स्ट्रेस से हमारी त्वचा का निखार चला जाता है। त्वचा को पहले जैसा स्वस्थ बनाने के लिए फेशियल करना जरूरी होता है।

फेशियल आपकी त्वचा को उसका खोया हुआ निखार वापिस देता है। घर पर फेशियल करने से आपकी त्वचा स्वस्थ और निखरी हुई रहती है। इसके साथ साथ फेशियल करने से आप जो भी एंटी एजिंग प्रोडक्ट्स का प्रयोग कर रहे है वो और ज्यादा अच्छे तरीके से काम करते है। आज के इस पोस्ट हम जानेंगे की घर पर फेशियल कैसे करे या फिर यूं कहे की पार्लर जैसा फेशियल घर पर कैसे करें?।

घर पर फेशियल कैसे करे

आपको महीने में एक बार फेशियल जरूर करवाना चाहिए। फेशियल करवाने के लिए लोग ज्यादातर पार्लर या स्पा जाते है। ऐसी जगहों पर फेशियल करवाने में काफी पैसे खर्च हो जाते है। बाहर जाकर फेशियल करवाने में समय भी ज्यादा लगता है। इसीलिए आप अपना फेशियल खुद घर पर भी कर सकते है। इस से आपका समय भी बचेगा और पैसे भी। चलिए इस पोस्ट में सबसे पहले देखते है कि खुद का फेशियल कैसे करें? और घरेलू फेशियल कैसे करें।

क्रीम के साथ फेशियल के स्टेप्स, फेशियल करने का तरीका

फेशियल करते वक़्त सबसे पहला काम होता है, अपनी स्किन को क्लीन करना और एक्सफोलिएट करना। उसके बाद आपको अपने फेस के पोर्स को अच्छे से क्लीन करना चाहिए। इसके बाद हम फेस मास्क लगता है और आखरी स्टेप होता है टोनिंग एंड मॉइस्चराइजिंग।

घर मे फेशियल कैसे करे – Facial Kaise Kare Step By Step In Hindi

  • क्लीनिंग और एक्सफोलिएशन
  • क्लीनिंग पोर्स
  • फेस मास्क
  • टोनिंग
  • मॉइस्चराइजिंग

क्लीनिंग और एक्सफोलिएशन

अपनी त्वचा को घर पर क्लीनअप करना बहुत जरुरी होता है। क्लीनिंग आपकी त्वचा का सारा अधिक तेल, चिपकी हुई धूल को हटा देता है। एक्सफोलिएशन से आपकी त्वचा के जितने भी बेजान सैल्स है वो निकल जाते है। यह बेजान सेल्स आपकी स्किन के पोर्स को ब्लॉक कर देते है। एक्सफोलिएशन के बाद आपका चेहरा चमकने लगता है।

क्लीनिंग और एक्सफोलिएशन करने के लिए नीचे दिए हुए स्टेप्स अपनाये:

  • आपकी त्वचा के अनुसार क्लीन्ज़र सेलेक्ट करें। अगर आपकी त्वचा ऑयली है तो बिना आयल वाला क्लीन्ज़र ले।
  • सबसे पहले अपना चेहरा हलके गरम पानी से धोये। क्लीन्ज़र इस्तेमाल करने से पहले यह जरूर ध्यान रखे की आपने अपने चेहरे पर किसी भी प्रकार का मेकअप नहीं लगा रखा हो।
  • थोड़ा सा क्लीन्ज़र अपने हाथ में लेके सर्कुलर मोशन में अपने चेहरे पर मसाज करे।
  • इसके बाद ठंडे पानी से आपने चेहरा धोले।
  • अब क्लीनिंग के बाद अपनी त्वचा के अनुसार एक्सफोलिएटर सेलेक्ट करे।
  • थोड़ा सा एक्सफोलिएटर अपने हाथ में लेके अपने चेहरा पर सर्कुलर मोशन में लगाए। ऐसा कुछ मिनट तक करे लेकिन आराम से। ज्यादा ज़ोर से करने से आपकी स्किन को नुक्सान भी हो सकता है।
  • थोड़ी देर बाद अपना चेहरा ठंडे पानी से धोले। स्क्रब साफ़ करने के लिए आप पानी में भीगे हुए साफ़ कपडे का भी इस्तेमाल कर सकते है।
    क्लीनिंग और एक्सफोलिएशन
    क्लीनिंग और एक्सफोलिएशन

क्लीनिंग पोर्स

फेशियल करने के दूसरे स्टेप में स्किन के पोर्स को अच्छे से क्लीन करते है। क्लीन करने के लिए हम स्टीम का इस्तेमाल करते है। स्टीम आपकी स्किन को आराम देता है और पोर्स को क्लीन करता है। इसीलिए स्टीम जरूरी है फेशियल करते वक़्त।

सही तरीके से स्टीम करने के लिए नीचे दिए हुए स्टेप अपनाये:

  • सबसे पहले एक बड़े बर्तन में गरम पानी ले।
  • अपना फेस उस बर्तन के ऊपर लेके जाएँ और अपने सर पर तौलिया रख ले। तौलिया इस प्रकार रखें की आपका चेहरा पूरी तरीके से ढक जाये। यह जरूर ध्यान रखे की आप अपना चेहरा पानी के ज्यादा पास ना ले जाए।
  • 5-10 मिनट तक अच्छे से स्टीम ले।

फेस मास्क

स्टीम करने के बाद अब जरूरत है आपकी त्वचा को पोषण देने की। फेस मास्क आपकी त्वचा को यह पोषण देता है और स्वस्थ रखने में मदद करता है। फेस मास्क के जरिये आपकी त्वचा के सरे बेजान सेल्स निकल जाते है। इसीलिए फेशियल करते वक़्त यह स्टेप भी बहुत जरुरी होता है।

  • फेस मास्क लगाने के लिए सबसे पहले आप कोई सा भी फेस मास्क प्रोडक्ट ले सकते है। अगर आपको बहार से फेस मास्क नहीं खरीदना तो आप घर पर भी फेस मास्क आसानी से बना सकते है।
  • घर पर फेस मास्क बनाने के लिए अगर आपकी सूखी त्वचा है तो 1 मसले हुए केले को 1 बड़े चमच शहद में मिला ले। अगर आपकी ऑयली त्वचा है तो एक बड़ी चमच मुलतानी मिटटी को 1 बड़े चमच शहद में मिला ले। और अगर आपकी सामान्य त्वचा है तो 1 बड़े चमच दही में 1 बड़ा चमच शहद का मिला ले।
  • अपनी स्किन के अनुसार फेस मास्क लेने के बाद अब इस फेस मास्क को आप अपने चेहरे पर लगाए। ध्यान रहे फेस मास्क की ज्यादा मोती परत ना हो।
  • 15-20 मिनट तक यह फेस मास्क आप लगाके रखे। जब तक फेस मास्क लगा हुआ है आप खीरे के 2 स्लाइस अपनी आँखों पे भी रख सकते है। इससे आपकी आँखों को ठंडक मिलेगी। समय पुरा होने के बाद हलके गरम पानी से अपना चेहरा धोले।

टोनिंग

फेस मास्क के बाद अब बारी है टोनर की। टोनर आपकी स्किन को उसकी खोयी हुई रौनक वापिस देता है। यह आपके स्किन कलर को बैलेंस करने में भी मदद करता। आप बाजार में मिलने वाले टोनर का इस्तेमाल कर सकते है। इसके अलावा आप घर में भी आसानी से टोनर बना सकते है।

  • घर में टोनर बनाने के लिए 1 बड़े चमच एप्पल साइडर विनेगर को 1 बड़े चमच पानी में मिला ले। इसके अलावा आप 1 बड़ा चमच गुलाबजल का भी 1 बड़े चमच पानी में मिलाके टोनर बना सकते है।
  • टोनर बनाने के बाद रुई की मदद से इस टोनर को अपने फेस पे अच्छे से लगालें। लगाते वक़्त यह ध्यान रखे की आप टोनर अपनी आँखों के ज्यादा पास ना लगाले ।
    टोनिंग
    टोनिंग

मॉइस्चराइजिंग

सब करने के बाद अब फैशियल का आखरी स्टेप है मॉइस्चराइजिंग। मॉइस्चराइजिंग आपकी स्किन को सूखने से बचाता है और फेशियल से मिले पोषण को आपकी स्किन में रोके रखता है। आप अपनी त्वचा के अनुसार कोई सा भी मॉइस्चराइज़र ले सकते है। आप घर में भी इसे बना सकते है।

  • अगर आपकी त्वचा सामान्य है तो आधा छोटा चमच बादाम के तेल का या जैतून के तेल का इस्तेमाल कर सकते है। यदि आपकी त्वचा सूखी है तो आप आधा छोटा चमच नारियल के तेल का इस्तेमाल कर सकते है। और अगर आपकी स्किन ऑयली है तो आप एक छोटा चमच एलो वेरा जेल का इस्तेमाल भी कर सकते है।
  • मॉइस्चराइज़र सेलेक्ट करने के बाद इसको अपने फेस पे आराम हलके हाथों से मसाज करते हुए लगाएं।

घर पर एलोवेरा से फेशियल कैसे करें

अभी तक अपने पढ़ा की क्रीम के साथ आप घर मे फेशियल कैसे करे। अब आगे इस पोस्ट में देखते है की आप घर पर एलोवेरा जेल से फेशियल  कैसे कर सकते है। एलो वेरा एक ऐसा पेड़ है जो आपकी त्वचा को बहुत सारे फायदे देता है। इसीलिए एलोवेरा जेल से फेशियल करने से आपकी स्किन निखरी हुई और स्वस्थ रहती है।

आप घर पर बड़ी ही आसानी से एलोवेरा जेल से फेशियल कर सकते है। चलिए देखते है की एलोवेरा से फेशियल कैसे करें

क्लीनिंग और एक्सफोलिएशन

फेशियल के सबसे पहले स्टेप में 1 चमच एलो वेरा जेल, 1 चमच टमाटर का पेस्ट और एक चुटकी हल्दी अच्छे से मिला ले और एक पतला पेस्ट बना ले। फिर इस पेस्ट को अपने फेस पे लगाएं और 2-3 मिनट तक अच्छे से मसाज करे। इसके बाद अपना फेस पानी से धोलें। यह एक क्लीन्ज़र की तरह काम करेगा।

फेशियल के दूसरे स्टेप में एक चमच एलोवेरा जेल को 1 चमच ब्राउन शुगर के साथ मिलाएं। आपका फेस स्क्रब तैयार है। इस स्क्रब से अपने चेहरे पर आराम से मसाज करे। 3-5 मिनट तक मसाज करने के बाद चेहरा धोलें। यह आपकी स्किन को अच्छे से एक्सफोलिएट करदेगा।

क्लीनिंग पोर्स

एक्सफोलिएशन के बाद स्किन को हाइड्रेट करना जरूरी है। इसके लिए फेशियल के वक़्त डी-टेन जेल का इस्तेमाल करे। डी- टेन जेल बनाने के 1 नींबू के रस के साथ 1 चमच एलोवेरा जेल को मिला ले। इस जेल से अपने चेहरे पर 8-10 मिनट तक मसाज करें ताकि आपकी स्किन इसको अच्छे से सोख ले।

फेस मास्क

जेल लगाने के बाद अब बारी है फेस मास्क की। फेस मास्क बनाने के लिए आपको चाहिए 1 चमच एलो वेरा जेल, 1 चमच दही, आधा चमच मुल्तानी मिटटी और आधा चमच गुलाब जल। इन सभी को एक साथ अच्छे से मिला ले। आपका फेस मास्क तैयार है। इसको अपने पुरे चेहरे और गले पर लगाएं और सूखने दे। सूखने के बाद ठंडे पानी से चेहरा धोलें।

खुद का फेशियल करने के लिए आप मुल्तानी मिट्टी या दही और हल्दी का मिक्सर प्रयोग में ले सकते है। चहरे को अच्छी तरह से धोने के बाद चहरे पर इसे लगा कर 10-15 मिनट के लिए रख ले और जब सुख जाए तब चहरे को अच्छी तरह से धो लें। 

फेशियल करने से पहले चेहरे पर यदि बाल हो तो उन्हे हटा लेना चाहिए। और बहुत से एक्सपर्ट फेशियल से पहले ब्लीच करने की राय देते है। क्योंकि इससे त्वचा पर जमे हुए धूल मिट्टी के कण और डेड स्किन दूर हो जाती है। और फेशियल अच्छी तरह से काम करता है।  

 

दही चेहरे पर पड़ी झुरीयों और डेड स्किन के लिए बहुत लाभप्रद है। दही से फेशियल करने के लिए आप एक कटोरी में दही लेकर उसे अच्छी तरह से चेहरे पर लगाए अंगुलियों को सर्कुलर मोशन में अच्छी तरह से घुमाए। चाहे तो चावल के आटते को भी दही में मिक्स कर सकते है। 

बेसन के दानों में प्राय एबसोर्व करने की क्षमता होती है। बेसन से बने फेश पैक को चेहरे पर लगाने पर यह चेहरे पर जमें धूल मिट्टी के कण और डेड सेल्स को एबसोर्व कर के दुर कर देता है। और चेहरे पर एक नेचुरल चमक लाता है।

सर्दियों में अक्सर स्किन रूखी सुखी हो जाती है।  इसके लिए स्क्रब से अच्छी तरह से चेहरे को धोने के बाद किसी ढंग की क्रीम से मसाज कर के मास्क लगा लें। उसके बाद चेहरे को अच्छी तरह से गुलाब जल युक्त पानी से पोंछ लें। 

एलोवेरा त्वचा के लिए बहुत ही ज्यादा लाभकारी है। एलोवेरा के रस के साथ नींबू को मिलाकर इसे चेहरे पर लगा कर चेहरे पर अंगुलियों को अच्छी तरह से सर्कुलर मोशन में घुमाएं। कुछ देरी तक रहने दें उसके बाद चेहरे को अच्छी तरह से पानी से धो दें। 

गोरे होने के लिए कौन सा फेशियल करें?

गोरा होने के लिए आप गोल्ड या डायमंड फेशियल का उपयोग कर सकते है। किसी बेहतर फेशियल का प्रयोग करने पर धूल मिट्टी और धूप के कारण त्वचा पर आया कालापन दूर हो जाता है। और डायमंड फेशियल त्वचा में भारी चमक देता है।

डायमंड फेशियल अलग अलग ब्रांड में अलग अलग कीमत का होता है। इसकी कीमत 1500 से लेकर 10000 तक की भी होती है। यह आप पर निर्भर करता है की आप किस ब्रांड का डायमंड फेशियल यूज करते हो।

फेशियल करवाने के बाद धूप में जाने से बचना चाहिए क्योंकि इस से चेहरा काला पड़ सकता है। और यदि धूप में जाना ही पड़े तो फेशियल के बाद सन स्क्रीन लगानी चाहिए जिससे धूप में जाने पर चेहरे में किसी तरह की कोई समस्या न आए।

कई बार उम्र से पहले ही चेहरे पर झाइयाँ देखने को मिलती है। इसको दूर करने के लिए फेशियल कारगर साबित हो सकता है। इसके लिए आप सिल्वर फेशियल का उपयोग कर सकते है और यदि आपकी स्किन ऑयली है तो पर्ल फेशियल का प्रयोग किया जा सकता है। 

घर पर ब्लीच करने के लिए आप हल्दी और दही के मिश्रण का प्रयोग कर सकते हो क्योंकि यह नेचुरल ब्लीचिंग एजेंट है। इसी के साथ किसी कंपनी का ब्लीच पाउडर लाकर इसका पेस्ट बना कर चेहरे पर लगा लें और 10-15 मिनट के बाद टिस्यू पेपर से पोंछ कर चेहरे को धो लें।  

हर महीने पार्लर पर फेशियल करवाना त्वचा के लिए सही नहीं रहता है। क्योंकि पार्लर पर विभिन्न ब्रांड के फेशियल पेक का उपयोग किया जाता है। जिसमें अनेकों तरह के केमिकल होते है जो त्वचा को कमजोर बनाते है और त्वचा संबंधी समस्या पैदा करते है। 

ग्लिसरीन के साथ गुलाब जल मिलाकर उसे फेशियल के रूप में यूज में लिया जा सकता है। इन दोनों को मिलाकर कर रात में सोने से पहले लगा दें और सुबह मुहँ को अच्छी तरह से धो दें। इससे चेहरे पर एक नेचुरल चमक आती है। 

घरेलू फेशियल करने के लिए पहले चेहरे पर यदि बाल हो उसे हटा लें। उसके बाद किसी स्क्रब से अच्छी तरह से चेहरे को धो दें। चेहरे को धोने के बाद जो भी मास्क आप यूज कर रहे है उसे चेहरे पर लगा कर 15 मिनट  तक सूखने डे और उसके बाद चेहरा धोलें। 

घर पर गोल्ड फेशियल करने के लिए सबसे पहले चेहरे को अच्छी तरह से साफ कर ले यदि चेहरे पर कोई बाल वगैरह हो तो। इसके बाद स्क्रब से चेहरे को धो कर गोल्ड फेशियल की अच्छी तरह मसाज कर लें। मसाज से पहले ब्लीच भी कर सकते है।  

चेहरे पर दही लगाना काफी हद तक फायदे मंद हो सकता है लेकिन यदि आपकी स्किन ऑयली है तो आपको चेहरे पर दही लगाने से परहेज करना चाहिए क्योंकि इस से मुहासे एर फुंसिया होने का डर रहता है। और यदि चेहरे पर अधिक मात्रा में कीले है तब भी दही लगाने से परहेज करना चाहिए। 

बेसन और दही का फेस पैक एक नेचुरल फेश पैक है जो चेहरे की झुरीयों और डेड सेल्स को दूर करने के साथ साथ चेहरे में एक नेचुरल चमक लाता है। इसके उपयोग के बाद आपको किसी तरह के मॉसराइजेशन की जरूरत नहीं पड़ेगी। यह त्वचा का रूखा सूखापन दूर कर देगा।  

रोजाना चेहरे को किसी अच्छे फेस वॉश से धोना चाहिए जिससे त्वचा पर जमे धूल मिट्टी के कण दूर हो जाए। फेशवाश से चेहरे को धोने के बाद उसमें रूखा पन आजाता है अतः इसे दूर करने के लिए किसी अच्छे मोश्चराइजेशन क्रीम का प्रयोग किया जा सकता है।

 

जानिए क्या है ग्रीन कॉफी के फायदे-Benefits Of Green Coffee In Hindi

जानिए क्या है ग्रीन कॉफी के फायदे

वर्तमान समय में कॉफी और चाय हमारी दिनचर्या का हिस्सा है। पहले समय में लोग चाय कॉफी का सेवन सिर्फ स्वाद के लिए किया करते थे परंतु आजकल स्वाद के साथ-साथ स्वास्थ्य के लिहाज से भी चाय और कॉफी का सेवन किया जाता है।आजकल ग्रीन कॉफी का चलन जोरों पर है लोग वजन घटाने से लेकर अन्य कई कामों में ग्रीन कॉफी का प्रयोग कर रहे हैं आइए जानते हैं आखिरी ग्रीन कॉफी क्या है ?
ग्रीन कॉफी सामान्य कॉफी से अलग नहीं है। फर्क सिर्फ इतना है की सामान्य कॉफी बनाने के लिए कॉफी के बीजों को भूना जाता है और ग्रीन कॉफी में कॉफी के बीजों को बिना भूने उनके प्राकृतिक  हरे रंग में ही उन्हें पीसकर ग्रीन कॉफी बनाई जाती है। कॉफी के बीजों में क्लोरोजेनिक एसिड होता है जो बीजों को भूनने के बाद खत्म हो जाता है इसलिए वैज्ञानिक ऐसा मानते हैं कि ग्रीन कॉफी में क्लोरोजेनिक एसिड मौजूद रहता है और यह हमारे शरीर के लिए बहुत ज्यादा फायदेमंद होता है। आइए जानते हैं ग्रीन कॉफी के फायदे क्या-क्या हो सकते हैं।

जानिए क्या है ग्रीन टी के फायदे-Benefits Of Green Coffee In Hindi

वजन घटाने के लिए ग्रीन कॉफी के फायदे

गलत खानपान और व्यस्त दिनचर्या के कारण आजकल अधिकांश लोग ओबीसीटी यानी मोटापे के शिकार हैं। बढ़ता हुआ मोटापा कई बीमारियों का कारण बनता है इसलिए लोग वजन घटाने का प्रयास करते हैं । जो लोग वजन घटाने का प्रयास कर रहे हैं उनके लिए ग्रीन कॉफी काफी फायदेमंद है। कई वैज्ञानिक शोधों में बढ़ते हुए वजन को कम करने के लिए ग्रीन कॉफी के फायदे देखे गए हैं। ग्रीन कॉफी में क्लोरोजेनिक एसिड पाया जाता है जो जो शरीर में जमी चर्बी को कम करता है और वजन घटाने में मदद करता है इसके अलावा यह शरीर के मेटाबॉलिज्म को बढ़ाकर जल्दी वजन घटाने में सहायक साबित होता है ।

ह्रदय के लिए ग्रीन कॉफी के फायदे

ग्रीन कॉफी में क्लोरोजेनिक एसिड के अलावा और भी कई सारे ऐसे घटक पाए जाते हैं जो मनुष्य के विदाई के लिए बेहद लाभदायक होते हैं यह सारे तत्व ह्रदय को स्वस्थ रखने में हमारी सहायता करते हैं ।

कोलेस्ट्रॉल को नियंत्रित करने में सहायक

तला भूना खाना और जंक फूड के सेवन से शरीर में कोलेस्ट्रॉल की मात्रा का बढ़ना आजकल एक आम समस्या हो गई है। ग्रीन कॉफी एक्सट्रैक्ट का उपयोग करके कोलेस्ट्रॉल के स्तर को नियंत्रित किया जा सकता है। एक शोध के अनुसार ग्रीन कॉफी बीन एक्सट्रैक्ट कोलेस्ट्रॉल और एलडीएल – सी के स्तर को कम करता है ।

एकाग्रता बढ़ाता है और मूड को अच्छा बनाता है

ग्रीन कॉफी में नियंत्रित मात्रा म में पाया जाने वाला क्या किया याददाश्त और मानसिक सुधार में लाभदायक होता है। अल्जाइमर के रोगियों पर भी ग्रीन कॉफी का उपयोग फायदेमंद साबित होता है इसमें न्यूरोप्रोटेक्टिव गुण पाए जाते हैं जो अल्जाइमर और अन्य प्रकार के मानसिक रोगों और तनाव के लिए लाभदायक हैं । प्रतिदिन एक कप ग्रीन कॉफी का सेवन हमारे मूड को अच्छा बनाता है और स्ट्रेस लेवल  को कम करता है ।

मधुमेह की समस्या में लाभदायक

आज हर चौथा व्यक्ति मधुमेह की समस्या से ग्रसित है ग्रीन कॉफी का उपयोग मधुमेह की समस्या को कम करने के लिए लाभदायक है। ग्रीन कॉफी में पाए जाने वाले क्लोरोजेनिक एसिड में हाइपोग्लाइसेमिक और एंटी डायबिटिक प्रभाव पाए जाते हैं जो मधुमेह की समस्या पर सकारात्मक प्रभाव दिखाते हैं । दवा के साथ साथ ग्रीन कॉफी का सेवन करने से मधुमेह की समस्या काफी हद तक नियंत्रित हो सकती है । प्रतिदिन एक से दो कप ग्रीन कॉफी का सेवन करके 30% तक टाइप 2  मधुमेह की समस्या में लाभ प्राप्त किया जा सकता है ।

सरदर्द की समस्या में ग्रीन कॉफी के फायदे

सर दर्द और माइग्रेन की समस्या में ग्रीन कॉफी का प्रयोग कुछ हद तक लाभदायक होता है। ग्रीन कॉफी में 1.2 प्रतिशत कैफीन पाई जाती है जो सर दर्द और माइग्रेन में लाभदायक होती है परंतु इस बात का ध्यान अवश्य रखना चाहिए की अधिक मात्रा में कैफीन का सेवन शरीर में नकारात्मक प्रभाव डालता है ।

ग्रीन कॉफी
ग्रीन कॉफी

कैंसर की बीमारी के लिए ग्रीन कॉफी के फायदे

कैंसर जैसी घातक बीमारी को रोकने में ग्रीन कॉफी काफी फायदेमंद हो सकती है । शोध के अनुसार ग्रीन कॉफी में एंटी प्रोफिलरेटिव अर्थात ट्यूमर कोशिकाओं के विस्तार को कम करने वाला गुण पाया जाता है । दवाइयों के साथ-साथ ग्रीन कॉफी का सेवन कैंसर की रोकथाम में लाभ प्रदान करता है ।

भूख पर नियंत्रण

मोटापे से ग्रसित लोगों के लिए सबसे बड़ी समस्या यह होती है कि वह अपनी भूख पर नियंत्रण नहीं रख पाते हैं ग्रीन कॉफी का सेवन करके इस समस्या पर नियंत्रण पाया जा सकता है । दरसअल ग्रीन कॉफी में भूख को कम करने की क्षमता होती है या खाने की इच्छा को नियंत्रित करती है और जिसके कारण वजन घटाने में सहायता मिलती है ।

एंटीऑक्सीडेंट गुणों का भंडार

ग्रीन कॉफी के बीजों में पाए जाने वाले क्लोरोजेनिक एसिड में एंटीऑक्सीडेंट गुण पाए जाते हैं जो शरीर को फ्री रेडिकल्स और ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस से बचाए रखते हैं ।

ब्लड प्रेशर की समस्या में ग्रीन कॉफी के फायदे

कई सारी समस्याओं के साथ-साथ ग्रीन कॉफी ब्लड प्रेशर को  कम करने में भी फायदेमंद होती है । कुछ शोधों से  पता चला है की ग्रीन कॉफी में पाए जाने वाला क्लॉरोजेनिक एसिड रक्तचाप को नियंत्रित करने में अत्यधिक लाभदायक है ।

हड्डियों की मजबूती में लाभदायक

स्वस्थ रखने  के साथ साथ ग्रीन कॉफी का उपयोग हड्डियों को मजबूत बनाने के लिए भी किया जाता है। सौ ग्राम ग्रीन कॉफी में लगभग लगभग 108 मिलीग्राम कैल्शियम की मात्रा पाई जाती है जो हड्डियों के विकास और मजबूती के लिए लाभदायक है । कैल्शियम की कमी पूरी करने और हड्डियों को मजबूत बनाने के लिए ग्रीन कॉफी का  सेवन काफी फायदेमंद है ।

बालों के लिए ग्रीन कॉफी के फायदे

लंबे घने और मजबूत बालों की चाहत सभी को होती है ऐसी स्थिति में ग्रीन कॉफी का सेवन एक अच्छा विकल्प  है जो बालों को स्वस्थ रखता है । ग्रीन कॉफी में आयरन और विटामिन सी जैसे पोषक तत्व पाए जाते हैं जो बालों को मजबूत, घना और चमकदार बनाते हैं ।

एंटी एजिंग गुणों से भरपूर

ग्रीन कॉफी बढ़ती हुई उम्र के प्रभावों को रोकने के लिए काफी मददगार है ।यह झुर्रियों को कम कर त्वचा में कसावट लाने का कार्य करती है ।

स्तन के लिए लाभदायक

एक शोध के अनुसार ग्रीन कॉफी के सेवन से महिलाओं के स्तनों के आकार में वृद्धि हो सकती है इसलिए स्तनों के आकार में वृद्धि की इच्छा रखने वाली महिलाओं को ग्रीन कॉफी का सेवन करना चाहिए ।

ग्रीन कॉफी बनाने की विधि

ग्रीन कॉफी के फायदे तो सभी जानते हैं परंतु इसे सही प्रकार से बनाने की विधि भी जानना आवश्यक है । ग्रीन कॉफी बनाने की विधि इस प्रकार है –

सामग्री –

* ग्रीन कॉफी के बीज – 10 ग्राम
*तीन चौथाई कप पानी

विधि

ग्रीन कॉफी बनाने के लिए सबसे पहले ग्रीन कॉफी बींस को रात भर के लिए पानी में भिगोकर रख दें और अगली सुबह बीजों सहित पानी को करीब 15 मिनट तक हल्की आंच पर उबाले जिसके कारण बीजों का हरा रंग पानी में आ जाएगा अब पानी को उतारकर छान लें । हल्का गुनगुना रहे जाए तो उसका सेवन करें ।

ग्रीन कॉफी के बीजों के अलावा  एक चम्मच ग्रीन कॉफी पाउडर को भी पानी में घोलकर कॉफी बनाई जा सकती है। बेहतर परिणाम के लिए ग्रीन कॉफी में चीनी अथवा शहद का प्रयोग ना करें और ना ही इसमें दूध मिलाएं ।

शहद
शहद

सेवन की मात्रा

  • ग्रीन कॉफी में कैफ़ीन की मात्रा पाई जाती है इसलिए इसका अत्यधिक सेवन नुकसानदायक होता है।
  • पूरे दिन में अधिकतम 2 कप ग्रीन कॉफी का सेवन पर्याप्त है ।
  • गर्भवती और स्तनपान करवाने वाले महिलाओं और बच्चों को ग्रीन कॉफी का सेवन नहीं करना चाहिए ।

ग्रीन कॉफी पीने का सही समय

कोई भी चीज तभी फायदा करती है जब उससे सही समय पर लिया जाए । आइए जानते हैं ग्रीन कॉफी को पीने का सही समय क्या है ?

ग्रीन कॉफी का सेवन सुबह खाली पेट या दोपहर को भोजन से आधे घंटे पहले अथवा खाने के एक घंटे बाद करना चाहिए ।

ग्रीन कॉफी के नुकसान

  •  ग्रीन कॉफी में पाई जाने वाली कैफीन की मात्रा के कारण इसका अधिक सेवन करने से तनाव, रक्त विकार ,दस्त और उच्च रक्तचाप की समस्या हो सकती है ।
  • अधिक मात्रा में ग्रीन कॉफी का सेवन यूरिनरी ट्रैक इन्फेक्शन का कारण बन सकता है ।
  • कुछ मामलों में ग्रीन कॉफी में मौजूद कैफ़ीन शरीर में कैल्शियम की मात्रा को बढ़ा देता है जिसके कारण सारा कैल्शियम  मूत्र में बह जाता और हड्डियां कमजोर हो जाती हैं ।
  • अधिक मात्रा में ग्रीन कॉफी का सेवन ह्रदय रोगों को निमंत्रण दे सकता है ।

इस प्रकार सीमित मात्रा में ग्रीन कॉफी का सेवन शरीर में सकारात्मक प्रभाव डालता है वही अधिक मात्रा में इसके सेवन से नुकसान भी होते हैं । गंभीर प्रकार की बीमारियों से ग्रसित व्यक्तियों को ग्रीन कॉफी का सेवन करने से पहले डॉक्टर की सलाह अवश्य लेनी चाहिए ।

ग्रीन कॉफी कैप्सूल क्या है ?

आजकल ग्रीन कॉफी पाउडर के अलावा ग्रीन कॉफी कैप्सूल भी चलन में है ,ग्रीन कॉफी कैप्सूल ग्रीन कॉफी बीजों के एक्सट्रैक्ट से बनाए जाते हैं । मेडिकल स्टोर्स पर कई सारे ब्रांड्स के ग्रीन कॉफी कैप्सूल आसानी से मिल जाते हैं  ग्रीन कॉफी के स्थान पर इनका सेवन करके भी लाभ प्राप्त किया जा सकता है ।

ये हो सकते हैं खाना खाने के बाद उल्टी होने का कारण-Vomiting In Hindi

खाना खाने के बाद उल्टी होने का कारण

खाया हुआ खाना अथवा पानी किसी कारण से जब तेजी के साथ पेट से बाहर आता है तो ऐसी स्थिति को उल्टी होना कहते हैं । उल्टी होने से पहले व्यक्ति का जी मिचलाता है और मतली होने लगती हैं। मतली और उल्टी दिमाग के उसी हिस्से से नियंत्रित होती है जो किसी काम को करने के प्रति इच्छा ना होने का भाव प्रकट करता है। उल्टी बच्चों ,वयस्कों और बूढ़ों किसी भी उम्र में हो सकती है। कई लोगों पर खाना खाने के तुरंत बाद उल्टी की समस्या होती है खाना पचता नहीं है और उल्टी के रूप में बाहर आ जाता है। आइए जानते हैं खाना खाने के बाद उल्टी होने का कारण क्या हैं?

खाना खाने के बाद उल्टी होने का कारण-Vomiting In Hindi

फूड पॉइजनिंग

कई बार बासी, दूषित अथवा बैक्टीरिया से संक्रमित भोजन खाने से फूड पॉइजनिंग की समस्या हो जाती है। फूड पॉइजनिंग होने पर बुखार, पेट दर्द ,दस्त, जी मिचलाना, असहजता और उल्टी आना जैसे लक्षण दिखाई देते हैं। फूड पॉइजनिंग के कारण शरीर में पानी की कमी हो जाती है। ऐसी स्थिति में व्यक्ति को पानी, तरल पदार्थ और ओ आर एस का घोल देते रहें। जंक फूड ,डेरी प्रोडक्ट और अल्कोहल से दूर रखें।

फूड पॉइजनिंग
फूड पॉइजनिंग

ज्यादा भोजन करना

जरूरत से ज्यादा खाना खाने या ओवरइटिंग करने से पेट में पड़ा भोजन ठीक प्रकार से पच नहीं पाता और उल्टी होने लगती है। जिन लोगों की  किसी भी प्रकार की सर्जरी हो रखी है उनका पाचन तंत्र कमजोर हो जाता है उन्हें ज्यादा खाना खाने से बचना चाहिए । उपचार के रूप में पुदीना, अजवाइन ,इलायची, सौंफ का सेवन करना चाहिए।

और पढ़ें: बच्चों की उल्टी का इलाज

माइग्रेन

माइग्रेन के कारण सिर में भयंकर दर्द होता है और साथ ही साथ मतली या उल्टी समस्या होती है । यदि माइग्रेन के कारण उल्टी की समस्या हो रही है तो ऐसी स्थिति में खुली हवा में सांस लेने का प्रयास करना चाहिए खिड़कियां खोल देनी चाहिए और कपड़े ढीले कर देना चाहिए । शरीर में पानी की कमी नहीं होने देनी चाहिए लेकिन एक साथ बहुत सारा पानी पीने से बचना चाहिए ।

कैंसर रोग

कैंसर से पीड़ित व्यक्तियों का इलाज करने के लिए कीमोथेरेपी की जाती है । कीमोथेरेपी के दौरान दी जाने वाली दवाइयों के कारण अक्सर मरीज को खाने के बाद उल्टी की समस्या उत्पन्न हो जाती है ।

 एसिड रिफ्लेक्स

शरीर में  एसिड या पित्त की मात्रा बढ़ने पर पाचन तंत्र में भी एसिड बढ़ जाता है । ऐसे में अन्न प्रणाली खुल जाती है और एसिड का प्रवाह गले और गर्दन के पीछे तक होने लगता है ऐसी स्थिति में कई बार खाने  के बाद उल्टी होने की समस्या हो जाती है । इस बीमारी को गैस्ट्रोएसोफैजल रिफ्लक्स डिजीज (जी. ई. आर. डी ) भी कहा जाता है। आयुर्वेदिक उपचार द्वारा इस बीमारी को बढ़ने से रोकने में काफी मदद मिलती है ।

गर्भावस्था

गर्भावस्था के दौरान गर्भवती महिला को अक्सर भोजन के बाद उल्टी करने की इच्छा होने लगती है । एक निश्चित समय के बाद क्या समस्या खत्म हो जाती है । कई बार हार्मोन परिवर्तन के कारण भी इस प्रकार की समस्या महिलाओं में होती है । वैसे तो ऐसा होना सामान्य है परंतु यदि यह स्थिति लंबे समय तक बनी रहे तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।

खाद्य पदार्थों से एलर्जी

कभी-कभी व्यक्ति को कुछ विशेष प्रकार के खाद्य पदार्थों से एलर्जी होती है और इनका सेवन, खाना खाने के बाद उल्टी होने का कारण हो सकता है। कई लोगों को गेहूं, दूध, डेरी प्रोडक्ट ,मशरूम आदि  से एलर्जी होती है ।

मनोवैज्ञानिक कारण

एनोरेक्सिया यानी तनाव और चिंता के कारण भी कई बार खाने के तुरंत बाद मतली अथवा उल्टी होने की स्थिति हो सकती है । ऐसी स्थिति में तनाव से खुद को दूर रखें और खुश रहने का प्रयास करें। जब भी तनाव की स्थिति उत्पन्न हो तो कम खाएं ।

चिकित्सकीय कारण

यदि कोई व्यक्ति किसी विशेष प्रकार की बीमारी से संबंधित दवाई ले रहा है तो ऐसी स्थिति में भी खाना खाने के बाद उल्टी और जी मिचलाने की समस्या हो जाती है । ऐसा होने पर चिकित्सक से परामर्श लेना चाहिए ।

लीवर में खराबी अथवा कम काम करना

यदि आपका लीवर ठीक से काम नहीं कर रहा है तो खाने के बाद उल्टी होना और जी मिचलाना, एसिडिटी ,अपच , मुंह से बदबू आना, त्वचा के रंग में परिवर्तन , सुबह उठने पर मुंह का कड़वा लगना, यूरिन के रंग में परिवर्तन होना आदि लक्षण दिखाई देते हैं । यदि आपको ऐसा महसूस हो रहा है तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए ।

उपरोक्त सभी कारणों के कारण व्यक्ति को आने के बाद उल्टी की समस्या होती है। वैसे तो यह कोई गंभीर रोग नहीं है परंतु यदि यह समस्या लगातार बनी रहती है तो चिकित्सक से संपर्क करने में देर नहीं करनी चाहिए ।

बच्चों में उल्टी आने के क्या है कारण, जानें बच्चों की उल्टी का इलाज

बच्चों की उल्टी का इलाज

जब पेट में मौजूद खाना या पानी पूरे दबाव के साथ मुंह के द्वारा बाहर निकल जाता है, तो यह प्रक्रिया उल्टी कहलाती है। कभी कभी यह मुंह के साथ साथ नाक से भी बाहर आ सकता है। उल्टी होने के एहसास को मितली कहा जाता है। उल्टी आने के कई कारण होते हैं जैसे गैस, बदहजमी, अपच, अधिक अथवा दूषित खाना, पेट का संक्रमण, विषाणु जनित संक्रमण, आदि । सामान्य वयस्कों की तुलना में बच्चों की रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर होती है इस कारण वे जल्दी बीमार पड़ जाते हैं। बीमार होने के कारण कई बच्चों को उल्टी की समस्या हो जाती है ऐसे समय बच्चा सुस्त हो जाता है और खाने के प्रति अरुचि दिखाने लगता है। कुछ भी खिलाने पर वह उल्टी करके बाहर निकाल देता है।

वैसे तो उल्टी करने से बिना पचा भोजन शरीर से बाहर निकल जाता है लेकिन अगर बच्चे को  बार-बार उल्टी हो रही  है तो यह अत्यधिक चिंताजनक विषय है क्योंकि इससे बच्चे के शरीर में पानी और पोषक तत्वों  की कमी हो जाती है ।

आइए जानते हैं बच्चे आमतौर पर किस प्रकार की उल्टी का अनुभव करते हैं ?

बलपूर्वक उल्टी

इस प्रकार की उल्टी में बच्चा पूरे बल के साथ पेट से भोजन को बाहर निकलता  है। ऐसे में उल्टी अधिक मात्रा में होती है । यदि कभी कभार भोजन के बाद इस प्रकार की उल्टी होती है  तो उसका कारण गैस अथवा अधिक खाना हो सकता है परंतु यदि लगातार ऐसा होता है तो यह चिंता का विषय हो सकता है।

दूध उलटना

स्तनपान करने वाले बच्चे अक्सर स्तनपान करने की तुरंत बाद थोड़ी मात्रा में दूध उलट देते हैं लेकिन ऐसा होना सामान्य है।

दूध का फटना

कभी-कभी अधिक मात्रा में स्तनपान करने पर पेट में पाए जाने वाले अम्ल से क्रिया करके दूध फट जाता है और शिशु उसे मुंह से बाहर निकाल देता है।

प्रतिवाह

इस प्रकार की  उल्टी सामान्यता छोटे बच्चों में होती है, जब कभी पेट का ऊपरी वॉल्व खुल जाता है तो पेट में आया हुआ खाना भोजन नली की विपरीत दिशा में आने लगता है ऐसे में बच्चा उल्टी करके भोजन को बाहर निकाल देता है। उल्टी का प्रतिवाह कुछ मामलों को छोड़कर सामान्यता हानि रहित होता है और जब बच्चे बैठना, उठना, चलना शुरू कर देते हैं तो ऐसा होना स्वतः बंद हो जाता है।

बच्चे का रोना
बच्चे का रोना

सामान्य मामलों में गैस, अधिक अथवा दूषित खाना खाने से उल्टी की समस्या होती है परंतु बच्चों के संबंध में इस समस्या का संभावित कारण पता करना आवश्यक है।

उल्टी के कारण

आइए जानते हैं बच्चों में उल्टी के क्या क्या कारण हो सकते हैं। बच्चों में उल्टी के निम्न कारण हो सकते हैं –

पेट में गैस

बच्चों में पेट में गैस बनना सामान्य बात है। कई बार अधिक  भोजन करने  या छोटे बच्चों द्वारा अधिक स्तनपान करने की स्थिति में पेट में गैस बनने लगती है और  गैस के कारण बिना पचा  भोजन उल्टी के रूप में शरीर से बाहर निकल जाता है।

मोशन सिकनेस

कुछ बच्चों को कार बस या रोलर कोस्टर में बैठने से उल्टी आती है ऐसा इसलिए होता है क्योंकि कान का अंदरूनी भाग हमारे शरीर के संतुलन का कार्य करता है जब बच्चा रोलर कोस्टर अथवा बस  में बैठता है तो संतुलन में बदलाव आ जाता है और मस्तिष्क द्वारा पेट की मांसपेशियों को कष्ट का संकेत मिलता है  संकेत पाते ही मांसपेशियां सक्रीय हो जाती है और बच्चे को उल्टी हो जाती है। मोशन सिकनेस की स्थिति में उल्टी के साथ सर दर्द और चक्कर भी आ सकते हैं ।

आंतों का संक्रमण

कई प्रकार के रोगजनक बैक्टीरिया के कारण बच्चों की आंतों संक्रमण में हो जाता है ,जो उल्टी का कारण बनता है। ऐसी स्थिति में बुखार ,पेट में दर्द और दस्त जैसे लक्षण दिखाई देते हैं।

खाद्य पदार्थों से एलर्जी

यदि बच्चा किसी विशेष प्रकार के भोजन को खाने के बाद उल्टी करता है तो ऐसा एलर्जी के कारण हो सकता है। एलर्जी होने की स्थिति में उल्टी के अलावा बच्चों के होठों और पलकों के आस पास की त्वचा में सूजन , पेट दर्द, त्वचा पर खुजली आदि लक्षण हो सकते हैं।

कई बार बच्चा उल्टी के साथ दूध बाहर निकालता है ऐसा तब होता है जब शरीर को दूध पचाने के लिए पर्याप्त एंजाइम नहीं मिलते  इसे लेक्टोज इनटोलरेंट कहा जाता है ।

निमोनिया

वायरल अथवा बैक्टीरियल संक्रमण के कारण फेफड़ों में एल्वियोली उत्तेजित हो जाते हैं जिसके कारण निमोनिया हो जाता है। निमोनिया की स्थिति में बच्चे को खांसी जुकाम हो जाता है और उसे सांस लेने में कठिनाई होती है ऐसी स्थिति में उसे कुछ खिलाने पिलाने पर उल्टी  हो जाती है ।

कान का संक्रमण

कान में  संक्रमण के कारण कान का अंदरूनी हिस्सा जो शरीर का संतुलन बनाए रखने में सहायता करता है वह मस्तिष्क को कष्ट के संकेत भेजता है और ऐसी स्थिति में चक्कर आना, संतुलन बनाए रखने में परेशानी होना और उल्टी की गंभीर  समस्या हो सकती है ।

लंबे समय तक रोना

कई बार बच्चे ज़िद्द अथवा अन्य कारणों से काफी देर तक रोते रहते हैं ऐसी स्थिति में भी उल्टी हो जाती है ।

इसके अलावा कई बार  बच्चों में अपेंडिक्स, हर्निया और कुछ विशेष प्रकार की दवाओं के सेवन से भी उल्टी हो सकती है । यदि बच्चे को बार बार उल्टी हो रही है तो बिना किसी देर के तुरन्त डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।

बच्चों में उल्टी के लक्षण

बच्चे अपनी समस्याओं को बता पाने में असमर्थ होते हैं ऐसे में माता पिता बच्चों में दिखने वाले निम्न लक्षणों पर ध्यान देकर उल्टी की  समस्या का इलाज कर सकते हैं –

  • मतली
  • बार बार उबकाई आना
  • शरीर में पानी की कमी होना
  • सुस्ती और थकावट होना
  • तेज सरदर्द
  • चिड़चिड़ा होना
  • हल्का बुखार
  • दस्त लगना
  • पेट में गैस होना
  • चक्कर आना
  • त्वचा का रूखा और पीला होना
  • पेट में दर्द और फूलना
  • मुंह में बार बार थूक आना या लार टपकना
  • दिल की धड़कन का तेज होना

कब करें डॉक्टर से संपर्क

उल्टी के कारण बच्चों के शरीर में पानी की कमी हो जाती है । यदि बच्चों में निम्न लक्षण दिखाई दें तो यह सीधा संकेत है कि उनके शरीर में पानी की कमी हो गई है और ऐसी स्थिति में तुरंत  डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए –

  • बार-बार प्यास लगना
  • बहुत ज्यादा नींद आना
  • गहरी और तेज सांसें
  • थकान
  • आंखों का कमजोर होना
  • बहुत ज्यादा नींद आना
  • कमजोरी महसूस होना
  • पेशाब कम आना
  • मुंह का बार-बार सूखना

बच्चे के शरीर में पानी और पोषक तत्वों की कमी गंभीर समस्या का रूप ले सकती है अतः ऐसी स्थिति में बच्चे को ज्यादा से ज्यादा तरल पदार्थों का सेवन करवाना चाहिए साथ ही ओआरएस का घोल पिलाना चाहिए ।

कैसे जाने कि शिशु दूध उलट रहा है या उल्टी कर रहा है ?

कई महिलाएं यह समझ नहीं पाती कि बच्चा दूध उलट रहा है या उल्टी कर रहा है ?

बच्चा जब उल्टी करता है तो दूध एकदम जोर से बाहर आता है और बच्चा  रोने लगता है ,उल्टी का प्रकार  बलगम जैसा भी होता है ।
जबकि जब शिशु दूध उलटता है तो थोड़ा सा दूध बिना किसी जोर के बाहर  निकलता  और ऐसा इसलिए होता है क्योंकि शुरुआती महीनों  में  शिशु की भोजन नली और पेट की मांसपेशियां विकसित नहीं होती हैं  इसलिए पिए हुए दूध का कुछ भाग मुंह से बाहर आ जाता है ।

शिशुओं की उल्टी रोकने के सावधानियां

सामान्यता शिशुओं की उल्टी को रोकना संभव नहीं होता और  उसे रोकना भी नहीं चाहिए क्योंकि ऐसा करने से शिशु को छाती में घुटन हो सकती है और यह उसके लिए खतरनाक हो सकता है । परंतु निम्न सावधानियों  को अपनाकर बच्चे में होने वाली  उल्टी को कम कर सकते हैं –

  • शिशु को हमेशा स्तनपान के दौरान थोड़ी थोड़ी देर में डकार दिलाना चाहिए ।
  • शिशु को सही समय पर और उचित मात्रा में  ही दूध दें । जरूरत से ज्यादा दूध अपच और उल्टी का कारण बनता है।
  • यदि शिशु फार्मूला दूध पीता है तो यहां ध्यान रखें कि बोतल में निप्पल का छेद ज्यादा बड़ा ना हो निप्पल का छेद ज्यादा बड़ा होने पर दूध के साथ हवा बच्चे के पेट में जाएगी ऐसी स्तिथि में उसे उल्टी हो सकती है ।
  • स्तनपान कराने के बाद शिशु को उछलने वाली कुर्सी ,झूले अथवा गोद में लेकर ना उछालें ।
  • स्तनपान अथवा खाना खिलाने के बाद शिशु को लगभग आधे घंटे तक सीधा लिटा कर रखें उसे ज्यादा ना हसाएं ।
  • स्तनपान हमेशा बैठकर सही पोजीशन में कराएं।
  • बच्चे को हमेशा आरामदायक कपड़े पहनाए । ज्यादा टाइट कपड़े और डायपर पहनने से बच्चे को गर्मी हो सकती है जिसकी वजह से वह उल्टी कर सकता है ।

बच्चों की उल्टी रोकने के घरेलू उपाय-बच्चों की उल्टी का इलाज

निम्बू का रस

यदि गर्मी की वजह से बच्चे को उल्टी हो रही है तो ऐसी स्थिति में उसे थोड़े से पानी में नमक और नींबू का रस मिलाकर  दिन में दो या तीन बार पिलाने से फायदा होता है ।

उल्टियां होने पर बच्चे को एक चम्मच नींबू  के रस के साथ थोड़ा अनार का रस मिलाकर पिलाने से उल्टियां बंद हो जाती है।

ताजा पुदीने की पत्तियों का रस निकालकर उसमें एक चम्मच नींबू का रस मिलाकर पिलाने से  बच्चों को उल्टी में राहत मिलती है ।

चावल का पानी

यदि गैस के कारण उल्टी हो रही हो तो बच्चे को उबले हुए चावल का पानी पिलाना चाहिए । दिन में दो से तीन बार चावल का पानी पिलाने से बच्चे को उल्टी आना बंद हो जाती है।

अदरक के रस से मिले आराम

एक चम्मच अदरक के रस के साथ थोड़ा सा शहद मिलाकर पिलाने से बच्चे को उल्टी की समस्या से राहत मिलती है।

इलायची के बीजों का करें प्रयोग

आधा चम्मच इलायची के बीजों को पीसकर उसमें थोड़ा सा बूरा मिलाकर बच्चे को पिलाने  से इसे उल्टी में आराम मिलता है।

लौंग देगा आराम

बड़े बच्चों के लिए एक कप पानी में दो से तीन  लौंग उबालें उस पानी में शहद डालकर बच्चे को पिलाएं उल्टी आना बंद हो जाएगी ।

सौंफ का करें इस्तेमाल

सौंफ पाचन तंत्र के लिए बहुत ज्यादा लाभदायक होती है। एक कप पानी में एक चम्मच सौंफ डालकर 5 से 10 मिनट के लिए उबालें और उस पानी को ठंडा करके छानकर बच्चे को पिलाने से उल्टी होना बंद हो जाती है ।

दालचीनी से मिलेगी राहत

एक चम्मच दालचीनी के पाउडर को पानी में उबालकर देने से भी उल्टी में राहत मिलती है आप चाहे तो इस पानी में थोड़ा शहद मिलाकर भी पिला  सकते हैं ।

दालचीनी
दालचीनी

प्याज करेगा समस्या को कम

प्याज में एंटीबैक्टीरियल तत्व पाए जाते हैं जो बच्चों की उल्टी की समस्या को कम करते हैं। प्याज के रस में बराबर मात्रा में अदरक का रस मिलाकर बच्चे को देने से  काफी फायदा होता है । स्वाद के लिए इस में थोड़ा शहद मिलाया जा सकता है।

लैवेंडर का तेल देगा राहत

लेवेंडर तेल की खुशबू से बच्चों को उल्टी में राहत मिलती है। यह तेल ताजगी बढ़ाने में मदद करता है । बच्चे के तकिए  या नैपकिन पर लेवेंडर तेल की कुछ बूंदे डाल कर सुंघाने से बच्चे को ताजगी का अनुभव होगा ।

जीरे का करें सेवन

उल्टी आने पर जीरे का सेवन करना लाभ देता है । एक चम्मच जीरे को तवे पर भून कर उसे  गुनगुने पानी में मिलाकर बच्चे को पिलाएं उसे आराम मिलेगा ।

सेब के सिरके का करें प्रयोग

सेब के सिरके में पाए जाने  वाले एंटीबैक्टीरियल तत्व बच्चों की उल्टी में लाभ प्रदान  करते हैं । एक गिलास पानी में एक छोटा चम्मच सेब का सिरका और शहद मिलाकर बच्चे को देने से उसे उल्टी में लाभ होगा ।

उपरोक्त नुस्खों से घर पर ही बच्चों की उल्टी का इलाज किया जा सकता है परंतु यदि बच्चा बार-बार उल्टी कर रहा है, लगातार दस्त हो रही है या मल में खून आ रहा है, सांस फूल रही है , पेशाब आना बिल्कुल कम हो गया हो उसे डॉक्टर के पास ले जाने में देरी नहीं करनी चाहिए ।

जानिए कौन से है आयरन की कमी से होने वाले रोग-Iron Ki Kami Se Hone Wale Rog

आयरन की कमी से रोग

हमारे शरीर मे जिन तत्वों की सबसे ज्यादा जरूरत होती है उनमें आयरन सबसे खास है। आखिर ऐसा क्यों? आज इस आर्टिकल में हम आपको विस्तार से आयरन के बारे में बताएंगे। साथ ही ये भी बताएंगे कि आयरन की कमी से कौन से रोग होते है।

आयरन शरीर मे क्यों जरूरी है

  • हीमोग्लोबीन के उत्पादन के लिए
  • मांसपेशियो के प्रोटीन बनाने के लिए
  • शरीर मे होने वाली केमिकल रिएक्शन के जरूरी एंजाइम बनाने के लिए
  • आयरन बोन मैरो में हीमोग्लोबिन बनाता है। यही हीमोग्लोबिन ऑक्सीजन को शरीर के सभी भागों तक पहुँचाता है।

तो अब आप सोच सकते है कि यदि शरीर मे आयरन की कमी हो जाए तो क्या होगा। इससे खून की कमी भी हो सकती है। जब ऐसा होता है तो रेड ब्लड सेल सामान्य से छोटे हो जाते हैं, जिससे हीमोग्लोबिन कम हो जाता है। इससे शरीर को कई बीमारिया घेर लेती हैं।

आयरन कब होता है अच्छे से अवशोषित

हमारे रोजमर्रा के भोजन में दो प्रकार के आयरन होते है

हेम आयरन

मांस, मुर्गी और मछली में हेम आयरन होता है, और यह आसानी से शरीर में अवशोषित हो जाता है।

नाॅॅॅन-हेम आयरन

पौधों, खाद्य पदार्थों जैसे कि सब्जियों, अनाज, बीन्स और मसूर में नाॅॅॅन-हेम आयरन पाया जाता है और जाेकि शरीर द्वारा अच्छी तरह से अवशोषित नहीं किया जाता।

आयरन का अवशोषण कब अच्छा होता है

आयरन का सेवन खाली पेट करे, दूध और एंटासिड के साथ या उसके आसपास आयरन खाद्य पदार्थो का सेवन न करे। कुछ लोग भोजन के साथ या खाना खाने के तुरन्त बाद चाय लेते हैं। उन्हें लगता है ऐसा करने से भोजन पच जाएगा। भोजन के साथ चाय पीने से बचें क्योंकि चाय में टैनिन भोजन से लोहे के अवशोषण को रोकता है। साथ ही शराब का सेवन भी शरीर में पोषक तत्वों के अवशोषण के साथ हस्तक्षेप करता है,

आयरन की कमी क्यों होती हैं

  • गर्भावस्था में शिशु की पोषण सम्बन्धी जरूरतें पूरी करने के कारण महिलाओं के शरीर में आयरन की कमी हो जाती है।
  • पेट में अल्सर, कोलन कैंसर होने के कारण आयरन की कमी हो जाती है।
  • आयरन युक्त आहार कम लेने से आयरन की कमी हो जाती है।
  • तीव्र ब्लड लॉस होने से भी आयरन की कमी हो जाती है।
  • कुछ दर्द की दवाइया लेने से भी आयरन की कमी हो जाती है।
  • माहवारी के दौरान अधिक रक्तस्राव होने से भी आयरन की कमी हो जाती है।

आयरन की कमी से होने वाले रोग-Iron Ki Kami Se Hone Wale Rog

बिना कारण थकान होना

हीमोग्लोबिन बनाने के लिए आयरन की आवश्यकता होती है, जो रेड ब्लड सेल्स में पाया जाता है। हीमोग्लोबिन शरीर के चारों ओर ऑक्सीजन ले जाने में मदद करता है।

जब हीमोग्लोबिन ही कम होगा तो मसल्स और टिश्यू को ऑक्सीजन के रूप में एनर्जी कैसे मिलेगी।

थकान होना
थकान होना

हार्ट पर ज़ोर पड़ना

हिमोग्लोबिन कम होंने पर जब पूरे शरीर मे ऑक्सीजन कम जा रही है, तो शरीर के जरूरी अंगों तक ऑक्सीजन पहुचाने के लिए दिल को ज्यादा मेहनत करनी पड़ती है। थकान महसूस होने का ये भी एक कारण है।

सिरदर्द और चक्कर आना

यदि आपको बार बार चक्कर या सरदर्द की शिकायत है तो ये आयरन की कमी हो सकती है। आयरन में कमी मतलब हीमोग्लोबिन में कमी और इसका मतलब की ब्रेन तक भी ऑक्सीजन सही से नही जा रही। ऐसे मे दबाव और सिरदर्द हो सकता है।

सांस फूलना

जब आयरन की कमी के दौरान आपके शरीर में हीमोग्लोबिन कम होता है, तो ऑक्सीजन का स्तर भी कम होगा। इसी कारण सामान्य कार्यो के दौरान सांस फूलने की समस्या होती है। ।

यहां तक कई बार आप बात करते हुए सांस लेने में दिक्कत महसूस करते है।

इन सबके अलावा आयरन की कमी से रोग है, त्वचा का पीलापन, रेस्टलेस् लेग सिंड्रोम(पैर में झनझनाहट महसूस करना), दर्द, जीभ और मुंह की सूजन, हाथ, पैर ठंडे होना, बार बार संक्रमण होना, कोइलोनेशिया (यह अक्सर टुटे नाखूनों से शुरू होता है जिसमे आसानी से दरार पड़ जाती है। आय़रन की कमी से भंगूर नाखून हो सकते हैं) आदि।

आयरन की कमी से बचने के लिए क्या करे

  • हरे पत्तेदार साग, साबुत अनाज और फलियां इन सभी में आयरन हैं अपने अवशोषण को बढ़ावा देने के लिए बेल-मिर्च, जामुन और ब्रोकोली जैसे विटामिन-सी युक्त खाद्य पदार्थों का भी सेवन कर सकते हैं।
  • गर्भावस्था में डॉक्टर के बताए हुए आयरन सप्पलीमेंट जरूर ले।
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