जानिए क्या है मुनक्का के बीज के फायदे आपकी सेहत के लिए

मुनक्का के बीज खाने से फायदा

आज हम आपको मुनक्का के बीज के फायदे के बारे में बताएंगे। मुनक्का के बीज में प्रचुर मात्रा में पोषक तत्व जैसे की मेग्नीशियम, सोडियम, पोटेशियम, जस्ता, फास्फोरस, मैगनीज, आयरन और कैल्शियम आदि पाए जाते हैं। ये पोषक तत्व हमारे शरीर के लिए बहुत लाभदायक और फायदेमंद होते हैं। दिखने में मुनक्का बहुत छोटी होती है पर बहुत ही गुणकारी होती है। मुनक्का में वसा की मात्रा ना के बराबर होती है। मुनक्का खाने में हल्की और सुपाच्य होती है।

मुनक्का को बड़ी दाख (रेजिन) के नाम से भी जाना जाता है। साधारण दाख यानि किशमिश और मुनक्का में इतना फर्क सिर्फ इतना है कि मुनक्का बीज वाली होती है और किशमिश से अधिक गुणकारी होती है। आयुर्वेद में मुनक्का को कई रोगों की सर्वश्रेष्ठ औषधि माना गया है।

मुनक्का के बीज के फायदे

मुनक्का के बीज से आपको यह सब फायदे मिलते हैं जिनको जानकर आप आश्चर्यचकित हो जाएंगे।

नोट – यदि आपको किसी भी प्रकार की कोई बीमारी है तो मुनक्का के बीज का सेवन करने से पहले अपने नजदीकी डॉक्टर से सलाह जरूर से लें।

आंखों के लिए उपयोगी

मुनक्का के बीज में प्रचुर मात्रा में विटामिन A पाया जाता है जो हमारी आंखों के लिए बहुत फायदेमंद होता है। मुनक्का में बीटा कैरोटीन पाया जाता है। विटामिन A और बीटा कैरोटीन से हमारी आंखों की रोशनी बढ़ती है। 5-7 मुनक्का को रात में पानी में भिगो कर रख दें और सुबह उठकर इसका सेवन करे।

विटामिन A
विटामिन A

त्वचा के लिए उपयोगी

मुनक्का के बीज में प्रचुर मात्रा में एंटी ऑक्सीडेंट तत्व पाया जाता है जो हमारे शरीर की त्वचा पर होने वाले नुकसान से बचाता हैं और मुनक्का के बीजों का रोजाना सेवन करने से आपकी हमारी त्वचा स्वस्थ एवं चमकदार बन जाती है। रात में मुनक्के को पानी में भिगो कर रख दे। सुबह इस पानी को भी पिए। मुनक्के का पानी हमारे शरीर में मौजूद टॉक्सिन बाहर निकालकर शरीर को डिटॉक्स करता है, जिससे हमारी त्वचा चमकदार बनती है।

यौन दुर्बलता को दूर करने में सहायक

मुनक्का के बीज में प्रचुर मात्रा में एमिनो एसिड पाया जाता है जो हमारे शरीर में यौन दुर्बलता को दूर करने में सहायता प्रदान करता है।

हड्डियों को मजबूत बनाने में सहायक

मुनक्का के बीज में प्रचुर मात्रा में पोटेशियम व कैल्शियम पाया जाता है। मुनक्का के बीज हमारी हड्डियों को और मजबूत बनाता है। कैल्शियम की कमी के कारण हमारे शरीर में जो रोग होता है वह हमारी हड्डियों को कमजोर व नाजुक बना देता है।

बालों को स्वस्थ रखने में सहायक

मुनक्का के बीज में प्रचुर मात्रा में आयरन पाया जाता है जो हमारे बालों के लिए बहुत जरूरी होता है क्योंकि आयरन की कमी के कारण हमारे बाल झड़ने लगते हैं और बालो से संबंधित रोग होने लग जाते हैं।

बुखार और जुकाम को ठीक करने में सहायक

मुनक्का के बीज में प्रचुर मात्रा में फिनोलिक पायथोन्यूट्रीएंट और जर्मिशिडल के साथ साथ एंटीओक्सीडेंट जैसे तत्व पाए जाते हैं जो हमारे शरीर में बुखार व जुकाम जैसी बीमारियों से छुटकारा पाने में सहायता प्रदान करते है।

खून की कमी को दूर करने में सहायक

मुनक्का के बीज में प्रचुर मात्रा में कॉपर पाया जाता है जो हमारे शरीर में लाल रक्त कोशिकाओं के निर्माण में सहायता प्रदान करता है जिसके कारण हमारे शरीर में खून की बढ़ोतरी होने लगती है।

कब्ज से राहत दिलाने में सहायक

मुनक्का के बीज में प्रचुर मात्रा में फाइबर, कैल्शियम और एंटी-ऑक्सीडेंट जैसे तत्व पाए जाते हैं ये तत्व हमारे पेट के अंदर जाकर वहाँ का सारा पानी सोख लेते हैं जिसके कारण कब्ज जैसी गंभीर बीमारी से छुटकारा मिलता है।

ह्रदय के लिए फायदेमंद

मुनक्का के बीज में प्रचुर मात्रा मे पोटेशियम पाया जाता है जो हमारे शरीर में रक्तचाप को कम करता है पोटेशियम हमारे शरीर में रक्तचाप को कम करने के साथ-साथ इम्यूनिटी को भी बढ़ाता है जिसके कारण हृदय संबंधित रोगों से छुटकारा मिलता है।

दांतो को स्वस्थ रखने में सहायक

मुनक्का के बीज में प्रचुर मात्रा में ओलेनोलिक नामक एसिड पाया जाता है जो हमारे शरीर में जाकर दांतों को सुरक्षित लगता है और इसके साथ-साथ हमारे दांतो को मजबूत रखने में भी सहायता प्रदान करता है।

बच्चों के स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद

मुनक्का के बीज बच्चों के लिए बहुत फायदेमंद होते हैं। बहुत बार देखा जाता है कि बच्चे महीने में 5 से 6 बार बीमार पड़ जाते हैं।  मुनक्का के बीजों का सेवन करने से उन रोगों से काफी हद तक छुटकारा मिल सकता है।

गले के संबंधित रोगों को दूर करने में सहायक

मुनक्का के बीज में प्रचुर मात्रा में एंटी बैक्टीरिया नामक तत्व पाए जाते है जो हमारे गले के लिए बहुत फायदेमंद होते है क्योंकि यह हमारे गले में होने वाली खराश व खुजली जैसी बीमारियों को ठीक करने में सहायता प्रदान करता है।

यदि आप रोजाना मुनक्का के बीजों का सेवन करते हैं या रोजाना मुनक्का के बीजों को खाते हैं तो आपको यह सब फायदे मिलेंगे।

यदि आपका मुनक्का के बीजों से संबंधित कोई भी सवाल है तो आप हमें कमेंट के माध्यम से पूछ सकते हैं।  हम आपके कमेंट का जल्द से जल्द जवाब देने का प्रयास करेंगे ।

मुनक्का के बीजों की यह जानकारी अपने दोस्तों और अपनी सोशल मीडिया पर जरूर शेयर करें ताकि आपके दोस्तों को भी मुनक्का के बीजों के फायदों के बारे में पता चल सके।

सामान्य प्रश्न

क्या मुनक्का के बीज खाने चाहिए?

मुनक्का के बीजों का सेवन करना चाहिए ।मुनक्का के बीजों में प्रचुर मात्रा में कॉपर पाया जाता है जो शरीर में खून की कमी का दूर करता है। मुनक्का के बीजों में प्रचुर मात्रा में फाइबर और एंटी ऑक्सीडेंट पाए जाते हैं जो कब्ज की समस्या को दूर करते हैं, मुनक्का के बीज में पोटेशियम पाया जाता है जो रक्तचाप को नियंत्रित करता है , यह हृदय रोगों में भी बहुत लाभदायक है। मुनक्का के बीजों का प्रयोग फायदेमंद तो है परंतु अधिक मात्रा में मुनक्का के बीजों का सेवन करने से हमारे शरीर में मोटापा बढ़ सकता है और मधुमेह की समस्या भी हो सकती हैं। मुनक्का के बीजों में पाए जाने वाले प्राकृतिक तत्वों को हमारा शरीर आसानी से पचा नहीं सकता मुझे अधिक सेवन से हमें पेट फूलना उल्टी और गैस की समस्या भी होती है ।

मुनक्का का सेवन कैसे करना चाहिए?

मुनक्का हमारे शरीर के लिए बहुत लाभदायक है। मुनक्का की तासीर गर्म होती हैं इसलिए अधिकांश इसका सेवन सर्दियों में किया जाता है। मुनक्का का सेवन करने से पहले उसे रात भर पानी में भिगोकर रखना चाहिए और सुबह खाली पेट इसका सेवन करना चाहिए । मुनक्का का सेवन गर्मियों में भी किया जा सकता है परंतु गर्मियों में इसका सेवन बहुत ही सीमित मात्रा में करना चाहिए । आप यदि चाहे तो सर्दियों में रात में भी मुनक्का का सेवन कर सकते हैं इसके मुनक्का को चार से पांच घंटे पानी में भिगो कर रखें और उसके बाद में दूध के साथ इन भीगे हुए मुनक्का का सेवन करें। यह शरीर में खून की कमी को दूर करने का रामबाण उपाय है।

खाली पेट मुनक्का खाने से क्या क्या बीमारी खत्म होगी?

रोजाना सुबह खाली पेट भीगे मुनक्का खाना बहुत लाभदायक होता है। मुनक्का में कैल्शियम पाया जाता है जो हड्डियों को मजबूत करता है । मुनक्का का सेवन शरीर में रक्त की कमी को दूर करता है । मुनक्का में फाइबर और एंटी ऑक्सीडेंट पाए जाते हैं जो कब्ज की समस्या को दूर करते हैं। मुनक्का में विटामिन ए और बीटा कैरोटीन पाया जाता है जो नेत्र ज्योति को बढ़ाता है । मोटापे की समस्या से ग्रसित लोगों के लिए मुनक्का बहुत ही लाभदायक होता है। खाली पेट भीगे मुनक्का खाने से त्वचा चमकदार होती है। ह्रदय रोग में भी है लाभदायक है और यह उच्च रक्तचाप की समस्या को भी दूर करता है।

मुनक्का और किशमिश में कौन ज्यादा फायदेमंद है?

मुनक्का और किशमिश दोनों ही अंगूर से बनते हैं और बहुत लाभदायक होते हैं परंतु यदि दोनों के बीच तुलना की जाए तो आयुर्वेद के अनुसार मुनक्का अधिक फायदेमंद होता है क्योंकि इसमें पाए जाने वाले पोषक तत्व शरीर के लगभग सभी अंगों के लिए लाभदायक होते हैं । मुनक्का में किशमिश की तुलना में आयरन और कैल्शियम ज्यादा होता है जो शरीर में रक्त की कमी को दूर करता है। किशमिश में अम्लीयता पाई जाती है जो एसिडिटी की समस्या को बढ़ावा देती है वहीं मुनक्का में फाइबर पाया जाता है जो पेट की समस्याओं को दूर करता है । पोषक तत्वों की बात की जाए तो मुनक्का में किशमिश की तुलना में अधिक पोषक तत्व पाए जाते हैं इसलिए इसे ज्यादा फायदेमंद माना जाता है ।

दूध में मुनक्का खाने से क्या होता है?

दूध के साथ मुनक्के का सेवन करने से कई लाभ हैं । रोजाना रात को दूध के साथ मुनक्के को उबालकर पीने से शरीर में रक्त की कमी दूर होती है। दूध के साथ मुनक्के का सेवन करने से नींद अच्छी आती है, यह कब्ज की समस्या को भी दूर करता है । यदि सर्दी जुकाम की समस्या से पीड़ित है तो दूध के साथ मुनक्का को उबालकर उसका सेवन करें यह सर्दी जुकाम को खत्म कर देगा । दूध के साथ मुनक्के का सेवन गठिया रोग के लिए भी लाभदायक होता है इससे हड्डियां भी मजबूत होती हैं और यह शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को भी बढ़ाता है ।

मुनक्का और किशमिश में क्या अंतर है?

मुनक्का और किशमिश दोनों अंगूर से बनते हैं फिर भी दोनों के गुणों और आकार में काफी अंतर होता है । सामान्य रूप से किशमिश बीज रहित और पीले हरे रंग के साथ छोटी होती है। दूसरी ओर मुनक्का बड़ा, बीज के साथ भूरे या हल्‍के काले रंग का होता है। किशमिश छोटे अंगूरों को सुखाकर तैयार की जाती है जबकि मुनक्का लाल रंग के बड़े अंगूरों को सुखाकर तैयार की जाती है इसमें बीज भी होता है ।

हिमालय अश्वगंधा टेबलेट के फायदे और नुकसान जो जानकर रह जाएंगे आप दंग

हिमालय अश्वगंधा टेबलेट के फायदे

हिमालय अश्वगंधा टेबलेट के फायदे

हिमालय अश्वगंधा टेबलेट के फायदे यूं तो बहुत है। यह स्किन के लिए बालों के लिए और शरीर के लिए कई और अन्य प्रकार से भी बहुत फायदेमंद है। आज के इस लेख में हम जानेंगे कि अश्वगंधा टेबलेट के फायदे क्या क्या है।

हिमालय अश्वगंधा टैबलेट लाभदायक है थायराइड की बीमारी में ( himalaya medicine for thyroid)

हिमालय अश्वगंधा टेबलेट का सेवन करने से थायराइड कंट्रोल होता है और मेटाबॉलिज्म इन ठीक होता है लेकिन अगर हम थायराइड की दवाइयाँ पहले से ही ले रहे हैं तो हिमालय अश्वगंधा टैबलेट हमें नुकसान कर सकता है चाहे वह हमारा हाइपर थायराइड हो या हाइपो थायराइड हो।

हिमालय अश्वगंधा टैबलेट का इस्तेमाल थाइरोइड ग्रंथि को उत्तेजित करने के लिए किया जा सकता है। थायरॉयड ग्रंथि पर हिमालय अश्वगंधा टैबलेट के प्रभाव इसकी जड़ों का एक्सट्रैक्ट, अगर प्रतिदिन लिया जाए, तो थायराइड हार्मोन के स्राव में वृद्धि होगी।

हिमालय अश्वगंधा के फायदे हमारे शरीर के मेटाबालिज्म को कंट्रोल करने में

हिमालय अश्वगंधा टैबलेट में बहुत सारे एंटीऑक्सीडेंट पाए जाते हैं जो शरीर के मेटाबाॅलिज्म को बढ़ाने में मददगार है।

हिमालय अश्वगंधा टैबलेट यौन शक्ति बढ़ाने में मददगार

हिमालय अश्वगंधा टैबलेट में यौनांगो की मांसपेशियों को सक्रिय करने का गुण पाया जाता है। यह मस्तिष्क और मांसपेशियों के बीच तालमेल बनाने में कारगर है हिमालय अश्वगंधा टैबलेट शरीर की चर्बी को दूर कर शरीर को ऊर्जावान बनाती है। हिमालय अश्वगंधा टैबलेट में पाये जाने वाले पोषक तत्व वीर्य की क्वालिटी बढाने में मददगार होते हैं।

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मोतियाबिंद रोग में लाभदायक

हिमालय अश्वगंधा टैबलेट के एंटीऑक्सीडेंट और साइटोप्रोटेक्टि पाए जाते हैं। जो मोतियाबिंद के असर को कम करने में उपयोगी होते हैं।

हिमालय अश्वगंधा टैबलेट उपयोगी है त्वचा की बीमारियों में

हिमालय अश्वगंधा टैबलेट में उच्च स्तर के एंटीऑक्सीडेंट होते हैं जो त्वचा को पोषण प्रदान करते हैं यह एंटीऑक्सीडेंट त्वचा में नमी बनाए रखते हैं और त्वचा के कोलेजन स्तर की रिपेयर भी करते हैं।

हिमालय अश्वगंधा टैबलेट चेहरे के काले दाग धब्बोंझाइयों को दूर करती है। हिमालय अश्वगंधा टैबलेट सोरायसिस जैसे रोग को भी दूर करने में मददगार है। इस रोग में शरीर की त्वचा रूखी और बेजान हो जाती है। हिमालय अश्वगंधा टैबलेट कोलेजन स्तर को बढ़ावा देकर त्वचा की नमी व चिकनाहट वापस लाती है|

झाइयाँ
झाइयाँ

हिमालय अश्वगंधा टैबलेट उपयोगी है बालों की समस्याओं में

हिमालय अश्वगंधा टैबलेट में पाये जाने वाले पोषक तत्व कोर्टिसोल के स्तर को कम करके बालों के झडने को रोकता है। हिमालय अश्वगंधा टैबलेट के गुणकारी तत्व बालों में मेलेनिन की हानि को कर समय से पहले बालों के ग्रे होने को रोकता है। हिमालय अश्वगंधा टैबलेट में टाइयरोसीन पाया जाता है। जो एक एमिनो एसिड है और शरीर में मेलेनिन के उत्पादन को बढाता है। मेलेनिन को बढा कर बालों को काला बनाता है।

हिमालय अश्वगंधा टैबलेट के फायदे ह्रदय रोगों में

अश्वगंधा, में सूजन कम करने के गुण,पाये जाते हैं। हिमालय अश्वगंधा टैबलेट में पाये जाने वाले एंटीऑक्सीडेंट में सूजन व तनाव कम करने के गुण पाये जाते हैं।

हिमालय अश्वगंधा टैबलेट खाने से कोलेस्ट्रॉल और ट्राइग्लिसराइड की मात्रा कम होती है।जिसके कारण ह्रदय रोग होने की संभावना कम हो जाती है। हिमालय अश्वगंधा टैबलेट हृदय की मांसपेशियों को मज़बूत बनता है।

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हिमालय अश्वगंधा टैबलेट कारगर है कैंसर में

हिमालय अश्वगंधा टैबलेट में पाये जाने वाले पोषक तत्व ट्यूमर सेल्स को नष्ट करने में कारगर होते हैं। हिमालय अश्वगंधा टैबलेट खाने से एपोप्टोसिस बढ़ता है जो कैंसर सेल्स को नष्ट करने में मददगार साबित भावी है

तनाव चिंता और अवसाद दूर करने में

हिमालय अश्वगंधा टैबलेट का प्रयोग व्यक्ति को मानसिक रुप से शांत कर देता है जिसके कारण व्यक्ति की चिंता दूर हो जाती है।हिमालय अश्वगंधा टैबलेट व्यक्ति को मानसिक रूप से प्रसन्नचित रखती है। जिसके कारण व्यक्ति को मानसिक अवसाद नही होता।

हिमालय अश्वगंधा टैबलेट है एन्टीबैक्टीरियल

हिमालय अश्वगंधा टैबलेट में जीवाणु रोधी गुण हैं। हिमालय अश्वगंधा टैबलेट घाव को पकने नही देती। घाव में पीसकर हिमालय अश्वगंधा टैबलेट लगाने से घाव जल्दी भर जाते हैं।

हिमालय अश्वगंधा टैबलेट मूत्रजनन, जठरांत्र और श्वसन तंत्र के संक्रमण में बहुत उपयोगी है। हिमालय अश्वगंधा टैबलेट इम्यून सिस्टम को बेहतर बनाता है। हिमालय अश्वगंधा टैबलेट का सेवन लाल रक्त कणिकाओं व सफेद रक्त कणिकाओं में वृद्धि करता है।

हिमालय अश्वगंधा टेबलेट रोकती है बुढ़ापे को

हिमालय हिमालय अश्वगंधा टैबलेट के सेवन से यौवनावस्था कायम रहती है और बुढापा नहीं आता। हिमालय अश्वगंधा टेबलेट शुक्राणुवर्धक एवं शक्ति प्रदान करने वाली है। हिमालय अश्वगंधा टैबलेट के सेवन से शरीर को ताकत मिलती है और स्पर्म बेहतर होते हैं।

हिमालय अश्वगंधा टेबलेट के सेवन से मजबूत होता है तंत्रिका तंत्र

हिमालय अश्वगंधा टेबलेट के सेवन से तंत्रिका तंत्र मजबूत होता है और मष्तिष्क मजबूत होता है। मस्तिष्क रीढ की हड्डी द्वारा जननांगों की मांसपेशियों को संदेश भेज कर संदेश का संचालन करता है और जननांगों की मांसपेशियों को शक्ति मिलती है।

हिमालय अश्वगंधा टेबलेट में पौष्टिक तत्व पाये जाते हैं जो शरीर के तनाव व चिंता को दूर करते हैं। हिमालय अश्वगंधा टैबलेट टेबलेट में पाये जाने वाले आयुर्वेदिक तत्व अनिद्रा, मानसिक तनाव,धकान व स्वप्न दोष को दूर करने में मददगार हैं।

स्टेमिना और सेक्सुअल टाइमिंग बढ़ाने के लिए पतंजलि का अश्वगंधा कैप्सूल बहुत लाभकारी माना जाता है। अश्वगंधा कैप्सूल को खाना खाने के बाद या रात में सोने से पहले दूध के साथ लिया जा सकता है। दिन में दो बार कैप्सूल को उपयोग में लेना चाहिए। 

हिमालय अश्वगंधा टेबलेट का उपयोग दिन में किसी भी समय किया जा सकता है इसको पानी के साथ लिया जा सकता है खाना खाने के बाद। और रात में सोने से पहले गुनगुने दूध के साथ भी इसका उपयोग किया जा सकता है। 

डाबर अश्वगंधा टेबलेट एक नेचुरल तरीके से बना उत्पाद है जिसमें अश्वगंधा मिला हुआ होता है। जो की तनाव, इम्यूनिटी और स्टेमिना से जुड़ी समस्याओं को दूर करता है। इसके उपयोग से सेक्स से जुड़ी समस्याएं जैसे काम टाइमिंग, थकान जैसी समस्याएं भी दूर होती है। 

अश्वगंधा टेबलेट प्राकृतिक उत्पादों से मिकर बनी होती है इसलिए इससे किसी भी तरह का कोई साइड इफेक्ट होने का खतरा नहीं रहता है। उसको दिन के समय खाना खाने के बाद और रात में सोने से पहले उपयोग में लिया जा सकता है। 

अश्वगंधा टेबलेट को उपयोग में लेने से बहुत सी समस्याओं से राहत पायी जा सकती है। यह तनाव, नींद में कमी और स्टेमिना से जुड़ी समस्याओ में काफी कारगर होता है। इसके उपयोग से स्टेमिना में वृद्धि होती है जिससे पूरे दिनभर थकान महसूस नहीं होती है। 

अश्वगंधा प्राय चूर्ण या टेबलेट के रूप में बाजार में उपलब्ध है। चूर्ण को आप दूध, घी, पानी किसी में मिक्स कर के ले सकते हो और टेबलेट को भी दूध या पानी के साथ लिया जा सकता है। सुबह और शाम दिन में दो टेबलेट का सेवन करना चाहिए। और चूर्ण को एक छोटा चमच जितना ही। 

अश्वगंधा सिर्फ पुरुषों के लिए ही नहीं अपितु महिलाओं के लिए भी लाभकारी होता है। महिलाओं में यह सेक्सुअल इन्फेक्शन को दूर करता है और घुटनों में दर्द, थायराइड की समस्या, और जनन क्षमता की समस्या को भी दूर करता है। यह एंटी ऐजिंग प्रोडक्ट के रूप में उपयोगी है। 

यदि आपको स्टेमिना में कमी, तनाव, थकान या सेक्स से जुड़ी कोई समस्या है तो आप हिमालय अश्वगंधा टेबलेट का प्रयोग कर सकते है। आप नियमित रूप से तीन या चार महिने तक इसका प्रयोग  करते है तो आपको इसके सकारात्मक प्रभाव देखने को मिल जाएंगे।  

अश्वगंधा और मिश्री को मिक्स कर के खाने से न सिर्फ स्वाद में फर्क पड़ता है अपितु स्वास्थ्य के लिए भी बहुत ज्यादा लाभकारी है। यह शुगर को नियंत्रित करता है और घुटनों के दर्द और सेक्सुअल समस्याओं को भी दूर करता है। स्टेमिना में वृद्धि और तनाव को दूर करने में इसकी महत्वपूर्ण भूमिका है। 

अश्वगंधा को खाली पेट लेने की अपेक्षा खाना खाने के बाद प्रयोग में किया जाना चाहिए। चूंकि जब हम खाना खाने के बाद इसका उपयोग करते है तो खाने में मिले हुए तत्व अश्वगंधा के गुणकारी तत्वों को अवशोषित कर शरीर के हर हिस्से तक पहुंचाते है। दूध के साथ भी इसका प्रयोग किया जा सकता है।  

अश्वगंधा पुरुषों और महिलाओं दोनों के लिए लाभकारी है लेकिन यह पुरुषों में विशेष तय सेक्सुअल समस्याओं को जड़ से दूर करता है। जैसे पुरुषों में नपुसंकता, शुक्राणुओं की कमी, और सेक्स टाइमिंग में कमी जैसी समस्याओं के लिए यह रामबाण साबित होता है। 

अश्वगंधा का अधिक मात्रा में उपयोग करने से आपको इसके नकारात्मक प्रभाव देखने को मिल सकते है। अधिक उपयोग से यह शरीर में गर्मी पैदा करता है जिससे पेट की समस्या, मुहँ में छालों की समस्या, अपच जैसी समस्याएं देखने को मिल सकती है। अतः अधिक मात्रा में उपयोग से बचना चाहिए। 

अश्वगंधा का अधिक इस्तेमाल पेट के लिए हानिकारक हो सकता है। इसका उपयोग करने से डायरिया जैसी समस्या पैदा हो सकती है। इसलिए इसके इस्तेमाल से पहले आप डॉक्टर की सलाह लें उसके बाद ही इसका सेवन करें। और जिनको ब्लड प्रेशर की समस्या हो उनको अश्वगंधा के प्रयोग से बचना चाहिए। 

इस साल नो स्मोकिंग डे पर छोड़े धूम्रपान इन आसान उपायों को आजमाकर

no smoking day

9 मार्च यानी आज नो स्मोकिंग डे है। इस दिन दुनिया भर में लोगों को धूम्रपान न करने के बारे में जागरूक और प्रोत्साहित किया जाता है। नो स्मोकिंग डे हर साल मार्च के दूसरे बुधवार को मनाया जाता है। इस दिन का उद्देश्य धूम्रपान की बुरी आदतों से छुटकारा पाना है। तंबाकू या सिगरेट एक हानिकारक पदार्थ है, जिसके सेवन से कई बीमारियां हो सकती हैं। इसका अधिक सेवन गंभीर बीमारियों को बढ़ावा देता है और शरीर को कमजोर बनाता है। कैंसर जैसी घातक बीमारी धूम्रपान से होती है। वहीं धूम्रपान की वजह से भी दिल से जुड़ी बीमारियां हो रही हैं। ऐसे में स्वास्थ्य विशेषज्ञ धूम्रपान न करने की सलाह देते हैं। लेकिन एक बार जब आप धूम्रपान की आदत डाल लेते हैं, तो इसे छोड़ना मुश्किल हो जाता है। लेकिन अगर आप सिगरेट या तंबाकू की लत छोड़ना चाहते हैं, तो पहले अपने भीतर संकल्प जगाएं और फिर उस फैसले पर अडिग रहें। सिगरेट छोड़ने के कुछ आसान उपाय यहां दिए गए हैं।

यह भी पढ़ें: सिगरेट कैसे छोड़े-Smoking Chodne Ke Tarike In Hindi

सिगरेट छोड़ने के उपाय

  • धूम्रपान छोड़ने के लिए सबसे पहले आपको अपना व्यवहार बदलना होगा। तय करें कि आपको सिगरेट छोड़नी होगी।
  • धीरे-धीरे सिगरेट का धूम्रपान कम करें और फिर इस लत से पूरी तरह छुटकारा पाएं।
  • आपको सिगरेट पीने का मन कर सकता है, इसलिए खुद को अन्य चीजों में व्यस्त रखें ताकि शरीर को निकोटीन की आवश्यकता महसूस न हो।
  • अगर आपको सिगरेट या तंबाकू की लत है, तो आप टॉफी या च्युइंग गम चबा सकते हैं।

और पढ़ें: क्यों छोड़े धुम्रपान, क्या है धुम्रपान छोड़ने के फायदे

सिगरेट छोड़ने के घरेलू उपाय

मुलेठी और लाल मिर्च

मुलेठी का स्वाद हल्का मीठा होता है, जो धूम्रपान करने की इच्छा को खत्म करने में मदद करता है। लाल मिर्च धूम्रपान छोड़ने में भी मदद कर सकती है, इसके लिए एक गिलास पानी में एक चुटकी लाल मिर्च मिलाएं और रोजाना इसका सेवन करें।

नींबू पानी

नींबू शरीर के लिए तो फायदेमंद होता है लेकिन धूम्रपान की लत को दूर करने में भी यह मदद करता है। सुबह सबसे पहले एक गिलास गुनगुने पानी में नींबू का रस और शहद मिलाकर पिएं। इससे आपको सिगरेट पीने की आजादी मिलेगी।

नींबू पानी
नींबू पानी

योगासन

सिगरेट की लत से छुटकारा पाने के लिए योगासन भी एक कारगर उपाय है। मन को एकाग्र करने और व्यसनों से मुक्ति पाने के लिए आपको सेतुबंधासन, भुजंगासन, बालासन और सर्वांगासन करना चाहिए। आप भी इसका लाभ उठा सकते हैं।

डॉक्टर की सलाह

डॉक्टर से सलाह लेने के बाद निकोटीन की जगह लेने से भी आपको सिगरेट की लत छोड़ने में मदद मिलेगी।

क्या है इलाज खाना खाने के बाद उल्टी आने की समस्या का

खाना खाने के बाद उल्टी आना

कुछ लोगो को शिकायत रहती है कि उन्हे खाना खाने के बाद उल्टी होती है। दरअसल उल्टी होना कोई बीमारी नहीं हैं बल्कि एक प्रक्रिया हैं जो कि कुछ कारणों से होती हैं। खाना खाते ही उल्टी होना कई कारणो से हो सकता है। ये कारण उम्र और स्थिति के अनुसार बदलते हैं जहां हर किसी को इससे संबंधित एक अलग समस्या का सामना करना पड़ता है। फूड पॉइजनिंग, मिल्क एलर्जी, ओवरईटिंग, अपच, गैस्ट्राइटिस या अल्सर आदि के कारण खाना खाने के बाद उल्टी होती है या होने की संभावना हो सकती है। अक्सर पेट में जलन हो जाता है। यह किसी सामान्य वायरस या अन्य किसी संक्रमण के कारण भी हो सकता है। इससे पेट में एक ऐंठन के साथ-साथ दर्द होने लगता है। यह उल्टी होने के कारण हो सकता है। पेट दर्द के कारण उल्टीऔर दस्त हो सकती है।

उल्टी का घरेलू इलाज-Ulti Ka Ilaj

वोमिटिंग रोकने के उपाय

लौंग से उल्टी का इलाज

दो लौंग पानी में उबालकर ठण्डा करके पीने से उल्टी की समस्या में बहुत अच्छा लाभ होता है। या दो चार लौंग लेकर दांतो के नीचे दबा लें और इसका रस चूसते रहें। इसका स्वाद उल्टी को तुरंत रोकने में कारगर होता है। आप लौंग और दालचीनी का काढ़ा बनाकर पी सकते हैं।

लौंग
लौंग

दालचीनी

दालचीनी भी उल्टी को रोकने के लिए इस्तेमाल की जाती है। इसके लिए आप एक कप पानी में एक छोटा चम्मच दालचीनी पाउडर मिलाएं और इसे अच्छे से उबाल लें। इसे पीने से उल्टी रुक जाती है। दिन भर में इसका दो से तीन बार सेवन करें। गर्भावस्था में दालचीनी का इस्तेमाल न करें।

तुलसी से उल्टी का घरेलू इलाज

तुलसी का रस निकालकर पीने से उल्टी में बहुत जल्दी आराम होता है। तुलसी की पत्तियों के रस में शहद मिलाकर भी पी सकते हैं। खाना खाने के बाद उल्टी होना तो तुलसी के बीजों को शहद में मिलाकर खूब चबा चबा कर खाने से बहुत अच्छा लाभ मिलता है। इसका कोई साइडइफेक्ट नही है।

पुदीना से उल्टी का घरेलू इलाज

पुदीने के पत्तों को नींबू के रस में भिगोकर खाने से खाना खाने के बाद उल्टी होना रुक जाता है। या उल्टी आने पर पुदीने की चाय बनाकर पी लीजिए या फिर केवल उसकी पत्ती को चबाइए। उल्टी से तुरंत राहत मिल जाएगी।

करीपत्ता करेगा खाना खाने के बाद उल्टी आना बंद

करीपत्ते को खूब चबा चबा कर खाने से भी जी साफ होता है और उल्टी से आराम मिलता है।

वोमिटिंग रोकने के उपाय है नीबू

एक गिलास पानी में एक नींबू निचोड़ लें। इसमें चीनी और नमक मिलाकर थोड़ी-थोड़ी देर बाद पीते रहें। अगर आप पानी उबालकर ठंडा करके पिएंगे तो यह ज्यादा फायदेमंद रहेगा।

प्याज है उल्टी की दवा

प्याज भी उल्टी को रोकने में बहुत मदद करता है। एक चम्मच प्याज का रस लें। इसमें एक चम्मच अदरक पीसकर मिला लें। इसका प्रयोग थोड़ी-थोड़ी देर बाद करते रहें।

उल्टी रोकने के उपाय है काली मिर्च

अगर जी मिचला रहा है, या उल्टी आ रही है, तो चार दाने काली मिर्च लेकर चूसें। उल्टी में आराम मिलता है। 5-6 काली मिर्च लेकर करेले के पत्ते के रस में मिला लें। इसे पीने से भी उल्टी बंद हो जाती है।

चावल करेगा उल्टी का घरेलू इलाज

चावल के पानी को लावा या मांड निकाल लिजीऐ। इसमें शहद और चीनी मिलाएं। इसी के बराबर मूंग की दाल का काढ़ा बनाएं, और मिला लें। इसको दिन में दो-तीन बार लेने उल्टी मे आराम मिलता है।

उल्टी का घरेलू इलाज है अदरक

अदरक और नींबू के रस की मात्रा बराबर मात्रा में डालकर रस तैयार कर लें। यह उल्टी का घरेलू इलाज है। अदरक और प्याज का रस एक चम्मच मिलाकर पिएं। इससे उल्टी में लाभ होता है। एक चम्मच अदरक के रस में थोड़ा-सा सेंधा नमक, और काली मिर्च का पाउडर मिलाकर पीने से भी उल्टी आनी बंद हो जाती है।

नीम करेगा खाना खाने के बाद उल्टी आना बंद

20 ग्राम नीम के कोमल पत्ते लेकर पीस लें। इसे एक गिलास पानी में डालें। इसे थोड़ा-थोड़ा करके थोड़ी-थोड़ी देर बाद पीने से हर एक प्रकार की उल्टी बंद हो जाती है। नीम की छाल का रस निकालकर शहद के साथ पीने से भी उल्टी में बहुत आराम मिलता है।

कलौंजी है वोमिटिंग रोकने के उपाय

आधा चम्मच कलौंजी का तेल, आधा चम्मच अदरक का रस मिलाकर उल्टी वाले रोगी को पिलाएं। इसका प्रयोग सुबह-शाम दोनों वक्त कर सकते हैं।

उल्टी रोकने के उपाय है अजवाइन

अजवाइन, देसी कपूर और पुदीना के फूल के 10-10 ग्राम की मात्रा को अच्छी तरह मिलाकर, एक कांच की बोतल में डालेंं। इसे धूप में रख दें। थोड़ी देर में वह पिघलकर रस बन जाएगा। इसकी 3-4 बूंदें उल्टी वाले रोगी को दें। इसका दिन में एक या दो बार प्रयोग कर सकते हैं। उल्टी को रोकने में बहुत उपयोगी है।

धनिया करेगा उल्टी का घरेलू इलाज

हरी धनिया का रस निकालें। इसमें थोड़ा-सा सेंधा नमक, और एक नींबू डालकर पीने से उल्टी में तुरंत लाभ होता है। आधा चम्मच धनिया का पाउडर, आधा चम्मच सौंफ का पाउडर एक गिलास पानी में डालें। इसमें थोड़ी-सी चीनी या मिश्री घोल कर पीने से उल्टी आनी बंद हो जाती है।

उल्टी की दवा है अनार का जूस

अनार का जूस निकालकर पिलाने से उल्टी बंद हो जाती है। अनार के दानों को पीस लें। इसमें थोड़ी-सी काली मिर्च और नमक मिलाकर खाने से बहुत ही लाभ मिलता है।

गिलोय है उल्टी रोकने के उपाय

गिलोय के रस में मिश्री मिलाकर दो चम्मच रस पिएं। इसका प्रयोग दिन में तीन बार कर सकते हैं। इससे उल्टी आनी बंद हो जाएगी। गिलोय का काढ़ा बनाकर भी पी सकते है।

टमाटर करेगा खाना खाने के बाद उल्टी आना बंद

एक पका हुआ टमाटर लें। उसमें चार छोटी इलायची, और 5-6 काली मिर्च को कूटकर टमाटर का रस मिला दें। उसको अच्छी तरह से घोलकर उल्टी वाले व्यक्ति को पिला दें। यह नुस्खा उल्टी रोकने में तुरंत लाभ करता है।

एप्पल साइडर विनेगर करेगा उल्टी का घरेलू इलाज

1 चम्मच शहद और 1 चम्मच एप्पल साइडर विनेगर को एक गिलास पानी में मिला लें। इसे पिएं। इस उपचार को तब तक सेवन करें, जब तक आपकी उल्टी ना बंद हो जाऐ।

अलसी के बीज से उल्टी का इलाज

अलसी के बीजों को पीस लें। इसमें गुनगुना पानी डालकर कुछ देर के लिए रख दें। कुछ देर के बाद पानी को छानकर अलसी को अलग कर दें। इस मिक्चर का सेवन करें। इसका सेवन आप दिन में दो बार कर सकते हैं।

सौंफ से उल्टी का इलाज

दिन में कई बार सौंफ चबाना उल्टी में बेहद फायदेमंद है। यह मुंह के स्वाद को बदलने के लिए भी प्रयोग किया जाता है। इसे खाने के बाद उल्टी से काफी राहत मिलती है।

संतरे का जूस से उलटी का इलाज

ताजा संतरे का जूस उल्टी में काफी लाभदायक है यह शरीर में ब्लड प्रेशर को भी नियंत्रण करता है।

जानिये नये बाल उगाने के उपाय? गंजे सिर पर बाल उगाने का तेल, शैम्पू, और देसी नुस्खे

बाल उगाने की विधि

आजकल बाल झड़ने की समस्या आम हो गई है जिसके कई कारण है जैसे-गलत खान-पान, कामिकल यूक्त शैम्पू, हेयरकलर, आदि। लेकिन कभी कभी झड़े हुऐ बालो की जगह नऐ बाल नही आते। लेकिन आप घबराईये नही आपके बाल दोबारा उग सकते हैं और पहले जैसे घने भी हो सकते हैं। बस जरूरत है तो बालों की नियमित देखभाल की। आईये जानते है बाल उगाने के विधि के बारे मे

बालों को उगाने के तरीके-Bal Ugane Ke Tarike

ग्रीन टी बालों के लिए

सिर पर बाल उगाने के लिए ग्रीन टी का प्रयोग करे इसके लिए ग्रीन टी की दो बैग लें और इसे एक कप पानी में मिलाएं, फिर इसे अपने सिर पर लगाएं। एक घंटे बाद बालों को धो लें। ग्रीन टी में एंटी-ऑक्‍सीडेंट्स होते हैं, जो बालों को झड़ने से रोककर उन्‍हें उगाने में मदद करते हैं

बालों के लिए मसाज

हेयर मसाज, बाल उगाने की सरल विधि है। स्कैल्प की अच्छी तरह मालिश करने से बालों के आसपास के सभी रोमछिद्र में अच्छे से रक्तसंचार होने में सहायता मिलती है, और बालों को उगाने मे मदद मिलती है। अपनी उंगलियों को बालों में गोलाकार घुमाते हुए स्कैल्प की अच्छी तरह मालिश करें। नये बालों को उगाने के लिए स्कैल्प में सभी जगह रक्त प्रवाह को बढ़ाने की जरूरत होती है। जब भी आप बाल धोते हैं, तब अपने स्कैल्प की मालिश करने की आदत डाले।

बालों की ग्रोथ के लिए तेल मालिश

तेल मालिश भी एक अच्छा विकल्प है। साधारण मालिश करने के मुकाबले तेल मालिश करने से रक्त प्रवाह अच्छी तरह होने में मदद मिलती है। तेल से बालों के रोमछिद्र खुल जाते हैं और नए बाल उगने में मदद मिलती है। सप्ताह में एक या दो बार अपने स्कैल्प की तेल मालिश करे। स्कैल्प की तेल मालिश करने का तरीका आसान होता है, बस थोड़ा सा तेल ले और उसके कॉटन की या हाथ की उंगलियों की मदद से जड़ो में लगाए और धीरे धीरे सर्कुलर मोशन में मसाज करे, ये काम आपको बाल धोने से पहले या एक रात पहले करना है, क्योंकि ऐसा करने से बाल धोते वक्त लगाया तेल बालों से निकल जाता है, और बालो को पोषण मिलता है, और सिर में ब्लड सिक्युलेशन भी बढ़ जाता है जो की नए बाल उगने में मदद करता है ।

बालों की ग्रोथ के लिए हेयर मास्क

हेयर मास्क
बालों की ग्रोथ के लिए हेयर मास्क

एक अच्छा हेअर-मास्क के दो फायदे हैं, एक बालों को नमी देने में और दूसरा बालों को स्वस्थ रखकर उनको घना बनाने में। अत्यन्त रूखे बालों के लिए शहद, अंडे का सफेद हिस्सा और आर्गन तेल को समान मात्रा में मिलाकर बालों की ग्रोथ के लिए हेयर मास्क बनाए। साधारण बालों के लिए शहद, ऐलो और ज़ैतून का तेल समान मात्रा में मिलाकर मास्क बनाऐ। तैलीय बालों के लिए शहद, ऐपल साइडर विनेगर, और अरंडी का तेल को समान मात्रा में मिलाकर हेयर मास्क बनाऐ। 15 मिनट तक पूरे बालों के साथ पूरे स्कैल्प को ढंकते हुए मास्क लगाए, फिर अपने बालों को हमेशा की तरह शैम्पू कर लें।

एसेन्शियल ऑयल

ऐसे कुछ तेल जो रक्त प्रवाह को बढ़ाते हैं और बालों को घना बनाते हैं। आप अपने ऑयल ट्रिटमेन्ट, मास्क और शैम्पू इन तीनो मे एसेन्शियल ऑयल की कुछ बूंदें डालने से आपके स्कैल्प को स्वस्थ रखने में मदद मिलेगी। ये कुछ एसेन्शियल ऑयल है। इनमे से किसी एक तेल की 5 बूंदें को ऑयल ट्रिटमेन्ट, मास्क और शैम्पू में मिलाकर उसका प्रयोग कर सकते है। यह बाल उगाने मे मदद करते है लैवेंडर, टी ट्री ऑयल, देवदार की लकड़ी,आर्गन ऑयल,रोजमेरी और नारियल तेल

बालों की ग्रोथ के लिए शैम्पू का प्रयोग

सल्फेट और रूखे सामग्री शामिल वाले शैम्पू का इस्तेमाल न करें व्यावसायिक रूप से उत्पादित शैम्पू मुख्य सफाई के लिए सल्फेट का इस्तेमाल करते हैं। सल्फेट बालों से प्राकृतिक तेल को निकाल लेता है और बालों को शुष्क और नाज़ुक बना देता है। इससे बाल झड़ते और टूटते हैं। जब आप सौम्य, प्राकृतिक शैम्पू का इस्तेमाल करते है तो आपके बालों को स्वस्थ और मजबूत बनाते है।

गर्म तेल की मालिश

बालों को उगाने के लिए हॉट हेयर ऑयल मसाज भी बहुत फायदेमंद है। ऑलिव, कोकोनट, कैनोला ऑयल को हल्का गर्म करें, इस तेल से सिर पर धीरे-धीरे मसाज करें। इन्हे बालों में लगाने के बाद चार घंटे तक छोड़ दें, फिर बालों को धो ले।

नीम और एलोवेरा

कुछ औषधियां जैसे नीम और एलोवेरा भी बालों के लिए हेल्दी ऑप्‍शन है. दरअसल, नीम और एलोवेरा जीवाणुरोधी होते हैं, जो बालों को उगाने में सहायक होते हैं। इसका मास्क भी बालों में लगाया जा सकता है. बालों के झड़ने की समस्‍या से निजात के लिए भी एलोवेरा जेल का भी प्रयोग कर सकते है।

प्रोटीन

बालों को उगाने के लिए प्रोटीन का सेवन करना चाहिए यदि पर्याप्‍त मात्रा में प्रोटीन का सेवन नही करते है तो बालों के झड़ने की समस्‍या होने लगती है। इसलिए रोजाना के आहार में प्रोटीन जरूर शामिल करें, इससे भी बाल घने और मजबूत बनते हैं। प्रोटीन के लिए आहार में ताजे फल, हरी सब्जियां, मीट, डेयरी प्रोडक्ट, सी फूड आदि लें सकते है।

बालों में तेल कब और कैसे लगाएं?

बालो मे तेल हमेशा रात मे लगाऐ और अगली सुबह धो ले।अपनी उंगलियों को तेल मे डुबोकर बालो के हिस्से कर के सिर पर हल्के हाथो से पूरे सिर पर लगाऐ और थोड़ी देर मसाज करे।

इंदुलेखा तेल कैसे लगाया जाता है?

इंदुलेखा हेयर ऑयल के साथ आने वाली कंघी की मदद से लगाया जाता है ये कंघी तेल को बालों की ज़ड़ों तक पहुंचता है।

बालों के लिए कौन सा तेल सही है?

बालो के लिए सबसे अच्छा कैस्टर आयल होता है। यह बालो को घना करता है।

जानिए क्या है ग्रीन कॉफी के फायदे-Benefits Of Green Coffee In Hindi

जानिए क्या है ग्रीन कॉफी के फायदे

वर्तमान समय में कॉफी और चाय हमारी दिनचर्या का हिस्सा है। पहले समय में लोग चाय कॉफी का सेवन सिर्फ स्वाद के लिए किया करते थे परंतु आजकल स्वाद के साथ-साथ स्वास्थ्य के लिहाज से भी चाय और कॉफी का सेवन किया जाता है।आजकल ग्रीन कॉफी का चलन जोरों पर है लोग वजन घटाने से लेकर अन्य कई कामों में ग्रीन कॉफी का प्रयोग कर रहे हैं आइए जानते हैं आखिरी ग्रीन कॉफी क्या है ?
ग्रीन कॉफी सामान्य कॉफी से अलग नहीं है। फर्क सिर्फ इतना है की सामान्य कॉफी बनाने के लिए कॉफी के बीजों को भूना जाता है और ग्रीन कॉफी में कॉफी के बीजों को बिना भूने उनके प्राकृतिक  हरे रंग में ही उन्हें पीसकर ग्रीन कॉफी बनाई जाती है। कॉफी के बीजों में क्लोरोजेनिक एसिड होता है जो बीजों को भूनने के बाद खत्म हो जाता है इसलिए वैज्ञानिक ऐसा मानते हैं कि ग्रीन कॉफी में क्लोरोजेनिक एसिड मौजूद रहता है और यह हमारे शरीर के लिए बहुत ज्यादा फायदेमंद होता है। आइए जानते हैं ग्रीन कॉफी के फायदे क्या-क्या हो सकते हैं।

जानिए क्या है ग्रीन टी के फायदे-Benefits Of Green Coffee In Hindi

वजन घटाने के लिए ग्रीन कॉफी के फायदे

गलत खानपान और व्यस्त दिनचर्या के कारण आजकल अधिकांश लोग ओबीसीटी यानी मोटापे के शिकार हैं। बढ़ता हुआ मोटापा कई बीमारियों का कारण बनता है इसलिए लोग वजन घटाने का प्रयास करते हैं । जो लोग वजन घटाने का प्रयास कर रहे हैं उनके लिए ग्रीन कॉफी काफी फायदेमंद है। कई वैज्ञानिक शोधों में बढ़ते हुए वजन को कम करने के लिए ग्रीन कॉफी के फायदे देखे गए हैं। ग्रीन कॉफी में क्लोरोजेनिक एसिड पाया जाता है जो जो शरीर में जमी चर्बी को कम करता है और वजन घटाने में मदद करता है इसके अलावा यह शरीर के मेटाबॉलिज्म को बढ़ाकर जल्दी वजन घटाने में सहायक साबित होता है ।

ह्रदय के लिए ग्रीन कॉफी के फायदे

ग्रीन कॉफी में क्लोरोजेनिक एसिड के अलावा और भी कई सारे ऐसे घटक पाए जाते हैं जो मनुष्य के विदाई के लिए बेहद लाभदायक होते हैं यह सारे तत्व ह्रदय को स्वस्थ रखने में हमारी सहायता करते हैं ।

कोलेस्ट्रॉल को नियंत्रित करने में सहायक

तला भूना खाना और जंक फूड के सेवन से शरीर में कोलेस्ट्रॉल की मात्रा का बढ़ना आजकल एक आम समस्या हो गई है। ग्रीन कॉफी एक्सट्रैक्ट का उपयोग करके कोलेस्ट्रॉल के स्तर को नियंत्रित किया जा सकता है। एक शोध के अनुसार ग्रीन कॉफी बीन एक्सट्रैक्ट कोलेस्ट्रॉल और एलडीएल – सी के स्तर को कम करता है ।

एकाग्रता बढ़ाता है और मूड को अच्छा बनाता है

ग्रीन कॉफी में नियंत्रित मात्रा म में पाया जाने वाला क्या किया याददाश्त और मानसिक सुधार में लाभदायक होता है। अल्जाइमर के रोगियों पर भी ग्रीन कॉफी का उपयोग फायदेमंद साबित होता है इसमें न्यूरोप्रोटेक्टिव गुण पाए जाते हैं जो अल्जाइमर और अन्य प्रकार के मानसिक रोगों और तनाव के लिए लाभदायक हैं । प्रतिदिन एक कप ग्रीन कॉफी का सेवन हमारे मूड को अच्छा बनाता है और स्ट्रेस लेवल  को कम करता है ।

मधुमेह की समस्या में लाभदायक

आज हर चौथा व्यक्ति मधुमेह की समस्या से ग्रसित है ग्रीन कॉफी का उपयोग मधुमेह की समस्या को कम करने के लिए लाभदायक है। ग्रीन कॉफी में पाए जाने वाले क्लोरोजेनिक एसिड में हाइपोग्लाइसेमिक और एंटी डायबिटिक प्रभाव पाए जाते हैं जो मधुमेह की समस्या पर सकारात्मक प्रभाव दिखाते हैं । दवा के साथ साथ ग्रीन कॉफी का सेवन करने से मधुमेह की समस्या काफी हद तक नियंत्रित हो सकती है । प्रतिदिन एक से दो कप ग्रीन कॉफी का सेवन करके 30% तक टाइप 2  मधुमेह की समस्या में लाभ प्राप्त किया जा सकता है ।

सरदर्द की समस्या में ग्रीन कॉफी के फायदे

सर दर्द और माइग्रेन की समस्या में ग्रीन कॉफी का प्रयोग कुछ हद तक लाभदायक होता है। ग्रीन कॉफी में 1.2 प्रतिशत कैफीन पाई जाती है जो सर दर्द और माइग्रेन में लाभदायक होती है परंतु इस बात का ध्यान अवश्य रखना चाहिए की अधिक मात्रा में कैफीन का सेवन शरीर में नकारात्मक प्रभाव डालता है ।

ग्रीन कॉफी
ग्रीन कॉफी

कैंसर की बीमारी के लिए ग्रीन कॉफी के फायदे

कैंसर जैसी घातक बीमारी को रोकने में ग्रीन कॉफी काफी फायदेमंद हो सकती है । शोध के अनुसार ग्रीन कॉफी में एंटी प्रोफिलरेटिव अर्थात ट्यूमर कोशिकाओं के विस्तार को कम करने वाला गुण पाया जाता है । दवाइयों के साथ-साथ ग्रीन कॉफी का सेवन कैंसर की रोकथाम में लाभ प्रदान करता है ।

भूख पर नियंत्रण

मोटापे से ग्रसित लोगों के लिए सबसे बड़ी समस्या यह होती है कि वह अपनी भूख पर नियंत्रण नहीं रख पाते हैं ग्रीन कॉफी का सेवन करके इस समस्या पर नियंत्रण पाया जा सकता है । दरसअल ग्रीन कॉफी में भूख को कम करने की क्षमता होती है या खाने की इच्छा को नियंत्रित करती है और जिसके कारण वजन घटाने में सहायता मिलती है ।

एंटीऑक्सीडेंट गुणों का भंडार

ग्रीन कॉफी के बीजों में पाए जाने वाले क्लोरोजेनिक एसिड में एंटीऑक्सीडेंट गुण पाए जाते हैं जो शरीर को फ्री रेडिकल्स और ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस से बचाए रखते हैं ।

ब्लड प्रेशर की समस्या में ग्रीन कॉफी के फायदे

कई सारी समस्याओं के साथ-साथ ग्रीन कॉफी ब्लड प्रेशर को  कम करने में भी फायदेमंद होती है । कुछ शोधों से  पता चला है की ग्रीन कॉफी में पाए जाने वाला क्लॉरोजेनिक एसिड रक्तचाप को नियंत्रित करने में अत्यधिक लाभदायक है ।

हड्डियों की मजबूती में लाभदायक

स्वस्थ रखने  के साथ साथ ग्रीन कॉफी का उपयोग हड्डियों को मजबूत बनाने के लिए भी किया जाता है। सौ ग्राम ग्रीन कॉफी में लगभग लगभग 108 मिलीग्राम कैल्शियम की मात्रा पाई जाती है जो हड्डियों के विकास और मजबूती के लिए लाभदायक है । कैल्शियम की कमी पूरी करने और हड्डियों को मजबूत बनाने के लिए ग्रीन कॉफी का  सेवन काफी फायदेमंद है ।

बालों के लिए ग्रीन कॉफी के फायदे

लंबे घने और मजबूत बालों की चाहत सभी को होती है ऐसी स्थिति में ग्रीन कॉफी का सेवन एक अच्छा विकल्प  है जो बालों को स्वस्थ रखता है । ग्रीन कॉफी में आयरन और विटामिन सी जैसे पोषक तत्व पाए जाते हैं जो बालों को मजबूत, घना और चमकदार बनाते हैं ।

एंटी एजिंग गुणों से भरपूर

ग्रीन कॉफी बढ़ती हुई उम्र के प्रभावों को रोकने के लिए काफी मददगार है ।यह झुर्रियों को कम कर त्वचा में कसावट लाने का कार्य करती है ।

स्तन के लिए लाभदायक

एक शोध के अनुसार ग्रीन कॉफी के सेवन से महिलाओं के स्तनों के आकार में वृद्धि हो सकती है इसलिए स्तनों के आकार में वृद्धि की इच्छा रखने वाली महिलाओं को ग्रीन कॉफी का सेवन करना चाहिए ।

ग्रीन कॉफी बनाने की विधि

ग्रीन कॉफी के फायदे तो सभी जानते हैं परंतु इसे सही प्रकार से बनाने की विधि भी जानना आवश्यक है । ग्रीन कॉफी बनाने की विधि इस प्रकार है –

सामग्री –

* ग्रीन कॉफी के बीज – 10 ग्राम
*तीन चौथाई कप पानी

विधि

ग्रीन कॉफी बनाने के लिए सबसे पहले ग्रीन कॉफी बींस को रात भर के लिए पानी में भिगोकर रख दें और अगली सुबह बीजों सहित पानी को करीब 15 मिनट तक हल्की आंच पर उबाले जिसके कारण बीजों का हरा रंग पानी में आ जाएगा अब पानी को उतारकर छान लें । हल्का गुनगुना रहे जाए तो उसका सेवन करें ।

ग्रीन कॉफी के बीजों के अलावा  एक चम्मच ग्रीन कॉफी पाउडर को भी पानी में घोलकर कॉफी बनाई जा सकती है। बेहतर परिणाम के लिए ग्रीन कॉफी में चीनी अथवा शहद का प्रयोग ना करें और ना ही इसमें दूध मिलाएं ।

शहद
शहद

सेवन की मात्रा

  • ग्रीन कॉफी में कैफ़ीन की मात्रा पाई जाती है इसलिए इसका अत्यधिक सेवन नुकसानदायक होता है।
  • पूरे दिन में अधिकतम 2 कप ग्रीन कॉफी का सेवन पर्याप्त है ।
  • गर्भवती और स्तनपान करवाने वाले महिलाओं और बच्चों को ग्रीन कॉफी का सेवन नहीं करना चाहिए ।

ग्रीन कॉफी पीने का सही समय

कोई भी चीज तभी फायदा करती है जब उससे सही समय पर लिया जाए । आइए जानते हैं ग्रीन कॉफी को पीने का सही समय क्या है ?

ग्रीन कॉफी का सेवन सुबह खाली पेट या दोपहर को भोजन से आधे घंटे पहले अथवा खाने के एक घंटे बाद करना चाहिए ।

ग्रीन कॉफी के नुकसान

  •  ग्रीन कॉफी में पाई जाने वाली कैफीन की मात्रा के कारण इसका अधिक सेवन करने से तनाव, रक्त विकार ,दस्त और उच्च रक्तचाप की समस्या हो सकती है ।
  • अधिक मात्रा में ग्रीन कॉफी का सेवन यूरिनरी ट्रैक इन्फेक्शन का कारण बन सकता है ।
  • कुछ मामलों में ग्रीन कॉफी में मौजूद कैफ़ीन शरीर में कैल्शियम की मात्रा को बढ़ा देता है जिसके कारण सारा कैल्शियम  मूत्र में बह जाता और हड्डियां कमजोर हो जाती हैं ।
  • अधिक मात्रा में ग्रीन कॉफी का सेवन ह्रदय रोगों को निमंत्रण दे सकता है ।

इस प्रकार सीमित मात्रा में ग्रीन कॉफी का सेवन शरीर में सकारात्मक प्रभाव डालता है वही अधिक मात्रा में इसके सेवन से नुकसान भी होते हैं । गंभीर प्रकार की बीमारियों से ग्रसित व्यक्तियों को ग्रीन कॉफी का सेवन करने से पहले डॉक्टर की सलाह अवश्य लेनी चाहिए ।

ग्रीन कॉफी कैप्सूल क्या है ?

आजकल ग्रीन कॉफी पाउडर के अलावा ग्रीन कॉफी कैप्सूल भी चलन में है ,ग्रीन कॉफी कैप्सूल ग्रीन कॉफी बीजों के एक्सट्रैक्ट से बनाए जाते हैं । मेडिकल स्टोर्स पर कई सारे ब्रांड्स के ग्रीन कॉफी कैप्सूल आसानी से मिल जाते हैं  ग्रीन कॉफी के स्थान पर इनका सेवन करके भी लाभ प्राप्त किया जा सकता है ।

जानिए कौन से है आयरन की कमी से होने वाले रोग-Iron Ki Kami Se Hone Wale Rog

आयरन की कमी से रोग

हमारे शरीर मे जिन तत्वों की सबसे ज्यादा जरूरत होती है उनमें आयरन सबसे खास है। आखिर ऐसा क्यों? आज इस आर्टिकल में हम आपको विस्तार से आयरन के बारे में बताएंगे। साथ ही ये भी बताएंगे कि आयरन की कमी से कौन से रोग होते है।

आयरन शरीर मे क्यों जरूरी है

  • हीमोग्लोबीन के उत्पादन के लिए
  • मांसपेशियो के प्रोटीन बनाने के लिए
  • शरीर मे होने वाली केमिकल रिएक्शन के जरूरी एंजाइम बनाने के लिए
  • आयरन बोन मैरो में हीमोग्लोबिन बनाता है। यही हीमोग्लोबिन ऑक्सीजन को शरीर के सभी भागों तक पहुँचाता है।

तो अब आप सोच सकते है कि यदि शरीर मे आयरन की कमी हो जाए तो क्या होगा। इससे खून की कमी भी हो सकती है। जब ऐसा होता है तो रेड ब्लड सेल सामान्य से छोटे हो जाते हैं, जिससे हीमोग्लोबिन कम हो जाता है। इससे शरीर को कई बीमारिया घेर लेती हैं।

आयरन कब होता है अच्छे से अवशोषित

हमारे रोजमर्रा के भोजन में दो प्रकार के आयरन होते है

हेम आयरन

मांस, मुर्गी और मछली में हेम आयरन होता है, और यह आसानी से शरीर में अवशोषित हो जाता है।

नाॅॅॅन-हेम आयरन

पौधों, खाद्य पदार्थों जैसे कि सब्जियों, अनाज, बीन्स और मसूर में नाॅॅॅन-हेम आयरन पाया जाता है और जाेकि शरीर द्वारा अच्छी तरह से अवशोषित नहीं किया जाता।

आयरन का अवशोषण कब अच्छा होता है

आयरन का सेवन खाली पेट करे, दूध और एंटासिड के साथ या उसके आसपास आयरन खाद्य पदार्थो का सेवन न करे। कुछ लोग भोजन के साथ या खाना खाने के तुरन्त बाद चाय लेते हैं। उन्हें लगता है ऐसा करने से भोजन पच जाएगा। भोजन के साथ चाय पीने से बचें क्योंकि चाय में टैनिन भोजन से लोहे के अवशोषण को रोकता है। साथ ही शराब का सेवन भी शरीर में पोषक तत्वों के अवशोषण के साथ हस्तक्षेप करता है,

आयरन की कमी क्यों होती हैं

  • गर्भावस्था में शिशु की पोषण सम्बन्धी जरूरतें पूरी करने के कारण महिलाओं के शरीर में आयरन की कमी हो जाती है।
  • पेट में अल्सर, कोलन कैंसर होने के कारण आयरन की कमी हो जाती है।
  • आयरन युक्त आहार कम लेने से आयरन की कमी हो जाती है।
  • तीव्र ब्लड लॉस होने से भी आयरन की कमी हो जाती है।
  • कुछ दर्द की दवाइया लेने से भी आयरन की कमी हो जाती है।
  • माहवारी के दौरान अधिक रक्तस्राव होने से भी आयरन की कमी हो जाती है।

आयरन की कमी से होने वाले रोग-Iron Ki Kami Se Hone Wale Rog

बिना कारण थकान होना

हीमोग्लोबिन बनाने के लिए आयरन की आवश्यकता होती है, जो रेड ब्लड सेल्स में पाया जाता है। हीमोग्लोबिन शरीर के चारों ओर ऑक्सीजन ले जाने में मदद करता है।

जब हीमोग्लोबिन ही कम होगा तो मसल्स और टिश्यू को ऑक्सीजन के रूप में एनर्जी कैसे मिलेगी।

थकान होना
थकान होना

हार्ट पर ज़ोर पड़ना

हिमोग्लोबिन कम होंने पर जब पूरे शरीर मे ऑक्सीजन कम जा रही है, तो शरीर के जरूरी अंगों तक ऑक्सीजन पहुचाने के लिए दिल को ज्यादा मेहनत करनी पड़ती है। थकान महसूस होने का ये भी एक कारण है।

सिरदर्द और चक्कर आना

यदि आपको बार बार चक्कर या सरदर्द की शिकायत है तो ये आयरन की कमी हो सकती है। आयरन में कमी मतलब हीमोग्लोबिन में कमी और इसका मतलब की ब्रेन तक भी ऑक्सीजन सही से नही जा रही। ऐसे मे दबाव और सिरदर्द हो सकता है।

सांस फूलना

जब आयरन की कमी के दौरान आपके शरीर में हीमोग्लोबिन कम होता है, तो ऑक्सीजन का स्तर भी कम होगा। इसी कारण सामान्य कार्यो के दौरान सांस फूलने की समस्या होती है। ।

यहां तक कई बार आप बात करते हुए सांस लेने में दिक्कत महसूस करते है।

इन सबके अलावा आयरन की कमी से रोग है, त्वचा का पीलापन, रेस्टलेस् लेग सिंड्रोम(पैर में झनझनाहट महसूस करना), दर्द, जीभ और मुंह की सूजन, हाथ, पैर ठंडे होना, बार बार संक्रमण होना, कोइलोनेशिया (यह अक्सर टुटे नाखूनों से शुरू होता है जिसमे आसानी से दरार पड़ जाती है। आय़रन की कमी से भंगूर नाखून हो सकते हैं) आदि।

आयरन की कमी से बचने के लिए क्या करे

  • हरे पत्तेदार साग, साबुत अनाज और फलियां इन सभी में आयरन हैं अपने अवशोषण को बढ़ावा देने के लिए बेल-मिर्च, जामुन और ब्रोकोली जैसे विटामिन-सी युक्त खाद्य पदार्थों का भी सेवन कर सकते हैं।
  • गर्भावस्था में डॉक्टर के बताए हुए आयरन सप्पलीमेंट जरूर ले।
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