अनचाहे गर्भ का सीताफल के बीज से गर्भपात कैसे करें?

सीताफल के बीज से गर्भपात

कुछ महिलाओं का समुचित उपाय करने के बाद भी गर्भधारण हो जाता है। या फिर उन्हे पता ही नहीं चलता और वे गर्भ धारण कर लेती हैं। ऐसे में बहुत मुश्किल होता है इस अनचाही स्थिति से निपटना। अगर गर्भ ठहरने का पता शुरुआत में ही लग जाए तो फिर इसको आयुर्वेदिक व प्राकृतिक उपचारों के द्वारा भी गिराया जा सकता है। हम कुछ घरेलू नुस्खे के द्वारा भी गर्भपात कर सकते हैं। बस हमें ध्यान रखना होता है कि तीन हफ्ते से ज्यादा देर न हुई हो।

बच्चा गिराने के तरीके और घरेलू नुस्खों में पपीता, अजवायन, अन्नानास का रस, तुलसी का काढ़ा, ड्राई फ्रूट्स, लहसून, विटामिन सी, केले का अंकुर, अजमोद, कोहोश, गर्म पानी, बाजरा, गाजर के बीज, तिल, ग्रीन टी, ब्लड प्रेशर बढ़ाने वाली चीज़े, अनार के बीज, कैमोमाइल तेल, काली चाय का प्रयोग खूब किया जाता है।

अगर गर्भ दो महीने से अधिक का है तो फिर उसका अबॉर्शन कराना ही ठीक है। उसमे गर्भ को एनाक्सथिसिया देकर डी एन सी के द्वारा निकाल दिया जाता है। इस प्रकिया में गर्भाशय को अच्छी तरह से साफ किया जाता है। जिससे कि गर्भाशय में कुछ भी गंदगी शेष न रह जाए।  इस प्रकिया के बहुत सारे नुकसान भी है। इसीलिए पहले हमें घरेलू उपायों को अपनानते है। इन उपायों को अपनाते समय साफ सफाई का विशेष ध्यान रखना चाहिए। इसलिए हमें घरेलु नुस्खे तब तक अपनाने चाहिए जब तक कि हमारा शरीर अंदर से अच्छी तरह साफ ना हो जाए। इन्ही घरेलु नुस्खों में एक नाम आता है सीताफल के बीज का। सुनने में थोड़ा सा अजीब लगेगा कि सीताफल के बीज से भी भला गर्भपात हो सकता है। सीताफल काफी गर्म होता है। अगर उसे अधिक मात्रा में अन्य चीजों के साथ मिलाकर लिया जाए तो उससे गर्भपात भी हो सकता है। यहां पर हम कुछ ऐसे ही उपायों की बात करेंगे जिनके कारण गर्भपात आसानी से हो सकता है।

सीताफल के बीज और पपीते के साथ- Bacha Girane Ka Gharelu Nuksa Bataiye

सीताफल के बीजो को भुनकर पीसकर पपीते के साथ खाने से गर्भपात ज्लदी हो जाता है। पपीते में लेटेक्स नामक एक पदार्थ पाया जाता है। जो यूटेराइन कान्टैक्शन का क्या काम करता है। जिसकी वजह से जब हम सीताफल के बीजों को पपीते के साथ खाते हैं तो यूट्रस में संकुचन आरंभ हो जाता है। जिसके कारण अबॉर्शन हो जाता है।

आपको इस रेमिडी को सुबह-सुबह खाली पेट और रात को सोते समय लेना होता है। जब तक आपके शरीर से सारी गंदगी बाहर ना निकल जाए। रक्त आना बंद ना हो जाए तब तक आपको इस उपाय को करते रहना चाहिए।

सीताफल के बीज और अरंडी के बीज-Garbh Girane Ka Gharelu Upay

अरंडी के बीज को तोड़ लें। अरंडी एक ब्राउन कलर के मजबूत खोल के अंदर होती है। आपको इस मजबूत खोल को खोल कर सफेद बीज निकालना होता है। आप अरंडी के सफेद बीज को निकाल  कर सीताफल के बीजों के साथ मिक्स कर ले। इसके बाद दो बीज अरंडी के और आठ दस बीज सीताफल के खालें। इसको खाने के बाद गर्म पानी पी ले कुछ समय बाद ही आपको पीरियड्स आने लगेंगे।

यह उपाय आपको तब तक करना है जब तक की आपके पीरियड रेगुलर ना हो जाए और सारी गंदगी निकल ना जाए। अरंडी एक प्राकृतिक गर्भनिरोधक का काम करती है सीताफल के बीज के साथ मिलकर इसके गर्भ निरोधी गुण काफी बढ़ जाते हैं जिसके कारण आसानी से गर्भपात हो जाता है

नीम का तेल और सीताफल के बीज-Baccha Girane Ke Gharelu Upay

नीम के तेल में सीताफल के बीज को पीसकर मिला लें। इस मिश्रण को रात को सोते समय अपनी वजाइना में लगाकर सोए। सुबह तक आपको ब्लीडिंग शुरू हो जाएगी। अगर रात में ब्लीडिंग नहीं होती तो आप सुबह भी इस मिश्रण को अपनी वजाइना में लगाएं। दो या तीन बार के उपाय से ही आपकी ब्लीडिंग शुरू हो जाएगी।

इस उपाय को आपको तब तक करना है जब तक कि आप का पेट पूरी तरह से साफ ना हो जाए। आपकी ब्लीडिंग जब तक रुक ना जाए आपको इस उपाय को करना है। नीम का तेल और सीताफल के बीज दोनों ही काफी गर्म होते हैं इन दोनों को वेजाइना में लगाने से गर्मी के कारण वैजाइना में संकुचन आरंभ हो जाता है।जिससे अबॉर्शन आसानी से हो जाता है।

अदरक का रस और सीताफल के बीज- Pregnancy Girane Ki Desi Nuksa

अदरक का रस और सीताफल के बीज दोनों मिलकर एक प्राकृतिक गर्भनिरोधक का काम करते हैं। अदरक काफी गर्म होता है और और सीताफल के बीज भी काफी गर्म होते हैं। सीताफल के बीजों को भूनकर पीसकर अदरक के रस में मिला लें। सुबह दोपहर व रात को सोते समय लेने से 2 या 3 दिनों में ही आपका गर्भपात हो जाता है।

इस उपाय को जब तक आपके पीरियड शुरू ना हो जाए तब से लेकर जब तक ब्लीडिंग रुक ना जाए तब तक करना है। ऐसा इसलिए करना होता है जिससे कि पेट की सफाई अच्छे से हो जाए। पेट के अंदर भ्रूण कोई भी हिस्सा ना रहे।  अन्यथा कुछ समय बाद पेट में दर्द शुरू हो जाएगा।  इसलिए प्राकृतिक उपायों को अपनाते समय हमें इस बात का विशेष ध्यान रखना है कि पेट की सफाई अच्छे से हो जाए। 

नोट- यह पोस्ट केवल आपकी जानकारी के लिए है, किसी भी प्रयोग या घरेलू नुस्खे से पहले डॉक्टर से सलाह जरूर लें।

क्या गुड़ खाने से गर्भपात हो सकता है?, गुड़ सोंठ साथ खाने से गर्भपात हो सकता है क्या?

गुड़ खाने से गर्भपात हो सकता है

गर्भपात के विषय में सोच कर ही मन परेशान हो जाता है। एक बच्चे को दुनिया में आने से पहले ही मार देना। यही तो होता है गर्भपात। कभी-कभी परिस्थितियां ऐसी होती हैं कि आप चाह कर भी उस बच्चे को जन्म नहीं दे सकते। आपका परिवार पूरा हो चुका होता है और आपके परिवार में एक नए सदस्य के लिए कोई स्थान नहीं होता। यह भी हो सकता है कि आपके बच्चे खुद शादी शुदा हो या फिर उनकी शादी की उम्र हो। ऐसी स्थिति में मां बनना बहुत ही मुश्किल होता है।

कभी-कभी यह भी होता कि आपको पता ही नहीं चलता और गर्भधारण हो जाता है। कभी लड़के लड़कियां अनजाने में या आजकल के जमाने में तों जानबूझकर भी कुछ गलतियां कर लेते हैं। जिसकी वजह से लड़की को गर्भपात कराना होता है। क्योंकि शादी और बच्चे की जिम्मेदारी उठाने के लिए वह दोनों ही तैयार नहीं होते ऐसे में डॉक्टर के पास जाना और उन्हें अपनी परेशानियां बताना थोड़ा मुश्किल लगता है। उनको हिचकिचाहट के कारण या फिर परिस्थिति वश डॉक्टर के पास जाने में संकोच महसूस होता है। वे ऐसे प्राकृतिक गर्भनिरोधक की तलाश में होती हैं। जिनसे उनका गर्भपात प्राकृतिक रूप से ही हो जाए। बच्चा गिराने के तरीके और घरेलू नुस्खों में विटामिन सी, पपीता, अन्नानास का रस, अजवायन,  तुलसी का काढ़ा, लहसून,  ड्राई फ्रूट्स, केले का अंकुर, अजमोद, गर्म पानी, कोहोश, बाजरा, ग्रीन टी, गाजर के बीज, तिल, ब्लड प्रेशर बढ़ाने वाली चीज़े, कैमोमाइल तेल, काली चाय, अनार के बीज का प्रयोग खूब किया जाता है।

ऐसे ही एक प्राकृतिक गर्भनिरोधक है गुड़। सुनने में थोड़ा आश्चर्य होगा कि क्या गुड़ से गर्भपात हो सकता है? हां यह सच है, गुड़ से भी गर्भपात हो सकता है। गुड़ बहुत गर्म होता है अगर हम इसे लगातार कुछ समय तक कुछ चीजों के साथ मिला कर ले तो आसानी से गर्भपात हो सकता है। आइए यहां जानते हैं कि किन वस्तुओं को गुड़ के साथ लेने से गर्भपात हो सकता है।

क्या गुड़ खाने से गर्भपात हो सकता है?

तिल और गुड़ एवं तिल गुड के लड्डू

गुड और तिल दोनों ही काफी गर्म होते हैं। अगर इनका कुछ समय तक लगातार सेवन किया जाए तो गर्भपात आसानी से हो सकता है। आपको दो मुट्ठी तिल लेकर भूनने हैं। और उसे एक गुड़ की डली के साथ मिलाकर खाना है। आप तिल के लड्डू भी खा सकते हैं तिल के लड्डू, तिल को भूनकर कर उसे गुड़ की चासनी में डालकर बनाए जाते हैं।

आपको सोते समय दो या तीन तिल के लड्डू खाने हैं और गर्म दूध पीना है। ऐसा आपको लगातार दो या 3 दिन तक करना है जब तक कि आपको पीरियड ना आने लगे। आपको 2 या 3 दिन में ही पीरियड्स आना शुरू हो जाएंगे। आपको तब तक यह तिल और गुड़ लेना है जब तक की आपके पीरियड्स आना बिल्कुल रुक ना जाए। अर्थात आपके पेट की अच्छे से सफाई ना हो जाए।

गुड़ और सौठ का काढा-गुड़ सोंठ साथ खाने से गर्भपात हो सकता है क्या?

इस काढे को बनाने के लिए हमें एक पैन में थोड़ा सा देशी घी लेना है। और उसमें दो चम्मच जीरा डालकर भूनना है। इसमें आपको एक चम्मच हल्दी और एक चम्मच सौठ का पाउडर डालना है। जब यह अच्छी तरह से भुन जाए तब इसमें दो गिलास पानी डालना है। पानी जब खौल जाए तब इसमें आपको एक गुड़ की डली डाल देनी है। जब काढा खौल खौल कर आधा हो जाए। तब आप इसे गरम-गरम पी सकते हैं।

यह काढ़ा आपकी पीरियड्स के साथ साथ पेट की तकलीफ को भी दूर करता है। अगर आपको गैस बनती है तो गैस बनना बंद हो जाती है। इस कार्य को आपको तब तक लेना है जब तक कि आपकी पीरियड्स आने शुरू हो जाए। जब आपके पीरियड्स आने शुरू हो जाएंगे तो आप इसे लगातार लेते रहें जिससे कि आपके पेट की सारी गंदगी निकल जाए। जब आपका पेट अच्छी तरह से साफ हो जाए तब आप इस काढे को लेना बंद कर सकते हैं।

गुड़ और अजवाइन का काढ़ा 

गुड और अजवाइन दोनों ही काफी गर्म होते हैं। जब हम इन्हे एकसाथ लेते हैं तो हमारे पीरियड शुरू हो जाते हैं। अजवाइन पेट की अन्य बीमारियों को भी ठीक करने में कारगर होती है। इस काढे को बनाने के लिए आपको दो गिलास पानी गर्म करना है। उसमें एक चम्मच अजवाइन और एक गुड़ की डली डाल देनी है। जब यह काढ़ा खोलते खौलते आधा हो जाए तब आप इसे ले सकते हैं।

इस काढे को आप को सुबह खाली पेट लेना है। दोपहर में खाना खाने के बाद लेना है और रात को सोते समय लेना है। इस काढे को आप को लगातार तब तक लेना है जब तक कि आपके पीरियड्स होना शुरू नहीं हो जाते। जब आपके पीरियड्स आना शुरू हो जाए तब भी आपको इस काढे को लेते रहना है। जब आपके पीरियड आना बंद हो जाएंगे यानी कि आपकी शरीर की अच्छी तरह से सफाई हो जाएगी तब आप इस काढे को लेना बंद कर सकती हैं।

गुड़, हल्दी और काली मिर्च का काढ़ा 

यह काढ़ा काफी असरदार होता है। और इससे पीरियड आने बहुत जल्दी शुरू होते हैं। हल्दी और काली मिर्च गुड़ की तरह ही काफी गर्म होते हैं। इसका सेवन अगर दिन में तीन बार किया जाए तो बहुत जल्दी ही पीरियड आना शुरू हो जाते हैं। इसका काढ़ा बनाने के लिए आपको दो गिलास पानी लेकर उसे खौलाना है। खोलते पानी में एक चम्मच हल्दी और एक चम्मच काली मिर्च पिसी हुई डाल देनी है। इसी काढे में एक गुड़ की डली भी डाल देनी है। जब यह काढ़ा खौल खौल कर आधा हो जाए तब आप इसे पी सकते हैं।

इसे रात को सोते समय जरूर पीना है। बहुत जल्दी ही यह काढ़ा अपना असर दिखाएगा आपको इस काढे को तब तक पीना है जब तक कि आपकी पीरियड आने शुरु ना हो जाए। आपके शरीर की सारी गंदगी दूर ना हो जाए।

नोट- यह पोस्ट केवल आपकी जानकारी के लिए है, किसी भी प्रयोग या घरेलू नुस्खे से पहले डॉक्टर से सलाह जरूर लें।

जानिए बच्चों के दांत निकलने की उम्र क्या है-Bache Ke Daant Nikalna

बच्चों के दांत निकलने की उम्र क्या है

घर मे किसी नन्हे की किलकारियां गूंजने का अलग ही आनंद होता है। उसकी छोटी छोटी हरकतें भी परिवार के सदस्यों को भावविभोर कर देती है। इन्ही खुशनुमा पलो का हिस्सा होता है बच्चे के दांत निकलना यानी टीथिंग। अपने नन्हे नन्हे दांतो से जब वो खिलखिलाना, चीज़ों को काटना शुरु करता है, तो एक नई खुशी घर मे फैल जाती है। आज इस आर्टिकल में हम बच्चों के दांत निकलने की उम्र क्या है, बच्चों के दांत निकलने के लक्षण, बच्चों के दांत निकलने का इलाज, बच्चों के दांत आते समय परेशानियाँ, बच्चों को दांत निकलते समय कैसे राहत दें और शिशु के दांत निकलते समय क्या न करें आदि बातों के बारे मे बताएंगे।

बच्चों के दांत निकलने की उम्र और समय को लेकर भी माए चिंतित होती है, क्योकि बच्चे के दांत निकलने का समय बहुत ही असमंजस भरा भी होता है, खासकर मां के लिए। क्योकि टीथिंग के समय बच्चा बहुत सी समस्याओं से दो चार होता है। समस्या इसलिए भी ज्यादा होती कि छोटा बच्चा कुछ बोलकर बता भी नही सकता।

बच्चों के दांत निकलने की उम्र क्या है

आमतौर पर बच्चे के दांत बच्चों के दांत 6 महीने से दिखने शुरू हो जाते है। लेकिन दांत निकलने के लक्षण 4 महीने के बाद कभी भी दिखने शुरू हो सकते है।

लक्षण दिखने से लेकर सारे दांत आने में करीब दो से तीन साल का समय लग सकता है। इसके अलावा दांत निकलना पारिवारिक पैर्टन पर भी निर्भर करता है। कुछ बच्चों के दांत बहुत जल्दी दिखने लगते है तो किसी के देरी से, दांत मसूड़ों के अंदर से बाहर की ओर आते हैं।

दांत निकलने की प्रक्रिया

सबसे पहले बच्चे के निचले जबड़े में दांत आना शुरू होते हैं। इसमें बच्चे के आगे के दो दांत (सेंट्रल इनसाइजर्स)निकलते हैं जिसके बाद ऊपरी जबड़े के सामने के दो दांत (अपर सेंट्रल इनसाइजर्स) आते हैं। इसके बाद ऊपरी जबड़े के ही दो अन्य दांत आते है (अपर लेट्रल इनसाइजर्स), इन दांतों के आने के बाद निचले जबड़े में आए दांतों के दोनों तरफ दो अन्य दांत (लोअर लेट्रल इनसाइजर्स) आना शुरू होते हैं
इसके बाद बच्चे के मुंह के ऊपरी और निचले हिस्से के दाढ़ के दांत अपर व लोअर फर्स्ट मोलर्स) निकलना शुरू होते हैं। दांतों के निकलने की प्रक्रिया में इसके बाद पहले से आए हुए आगे के दांतों और दाढ़ के बीच की जगह को भरने के लिए अन्य दांत (कैनाइन) आते हैं और सबसे आखिर में जबड़े के अंतिम दाढ़ (सेकंड मोलर) निकलते हैं।

बच्चो के दांत निकलने के लक्षण

लार आना

बच्चे के मुहं से लगातार लार निकलती है, कभी कभी इतनी ज्यादा की बच्चे के कपड़े बदलने पड़ते है।

मुंह में घाव होना

लगातार लार आने के कारण बच्चे के मुंह मे रैशेज हो जाते है। बच्चे की ठोड़ी, होंठ और मुंह के आसपास की स्किन क्रेक हो जाती है।

मसूड़ों में सूजन आना

चूंकि दांत निकलते समय मसूड़ों पर दबाव पड़ता है।इसलिए बच्चे के मसूड़ों में सूजन, रेडनेस, मसूड़े फूलना और दर्द होंता है।

खांसी

बहुत ज्यादा लार बनने के कारण बच्चे को खांसी की समस्या हो सकती हूं।

दांत मिसमीसाना

जब दांत मसूड़ों से बाहर निकलने वाले होते हैं, तो बच्चा बहुत ही बेचैनी महसूस करता है। ऐसे में वो सब चीज़ों को काटने और चबाने की कोशिश करता है। तब यह स्थिति बच्चे को काफी परेशान करती है।

बेवजह रोना

चूंकि दांत निकलते समय मसूड़ो में सूजन और दर्द की समस्या होती हैं, तो बच्चा बेवजह लगातार रोता है। बच्चा चिडचिडा हो जाता है। और खेलने के समय भी असहज रहता है।

बेवजह रोना
बेवजह रोना

इन सब समस्याओं के अलावा खाने में रुचि न दिखाना, सोने में मुश्किल होना, कान खींचना और गालों को रगड़ना, जैसी समस्याएं भी होती है।

डॉक्टर से कब सम्पर्क करें

बच्चे के दांत निकलते समय होने वाली समस्याओं का समाधान

निम्नलिखित कुछ उपायों से आप बच्चों के दांत आते समय परेशानियाँ से राहत प्रदान कर सकते हैं।

  • चबाने के लिए साफ और गीला कपड़ा दे। बच्चे हर समय मुहं में कुछ न कुछ देने की कोशिश करते है। तो बेहतर है कि आप ही उसे इसका एक बेहतरीन विकल्प दे।
  • बच्चे के लिए टीथर्स का प्रयोग करें। लेकिन केवल अच्छे ब्रांड के टीथर्स ले। क्योंकि सस्ते टीथर्स में केमिकल हो सकते है। गर्मियों का मौसम हो तो टीथर्स को कुछ समय तक फ्रिज़ में रखकर बच्चे को दे। इससे बच्चे को काफी आराम मिलेगा।
  • बच्चे का ध्यान, अलग अलग खिलौने और खेल में लगाने की कोशिश करें।
  • अगर बच्चा ठोस खाने लगा है तो उसे फल या सब्जी का टुकड़ा चबाने को दे जैसे सेब और गाजर
  • जब बच्चा दांत मिसमिसा रहा हो, या चिड़चिड़ा रहा हो तो, साफ उंगली या गीले कपड़े से उसके मसूड़ो की हल्के हाथों से मसाज करें।
  • साफ-सफाई पर ध्यान रखें।

बच्चों के दांत आते समय परेशानियाँ-क्या न करें

  • बच्चे पर कोई भी घरेलू उपाय न अपनाए
  • बिना डॉक्टर की सलाह के कोई भी पेस्ट या ब्रशिंग शुरू न करें।
  • टीथर्स को फ्रिज़ में चिल्ड करके न दे।
  • किसी भी प्रकार के मिथक के बहकावे में न आएं जैसे पहले ऊपर के दांत निकले तो माँ के लिए भारी है आदि।
  • बच्चे को कोई भी गंदी चीज़ मुहं में न लेने दे।
  • सोते समय बच्चे को बिल्कुल भी डिस्टर्ब न करें।

सिजेरियन प्रसव के बाद क्या खाते हैं-Cesarean Delivery Ke Baad Kya Khana Chahiye

सिजेरियन प्रसव के बाद क्या खाते हैं

सिजेरियन ऑपरेशन आजकल बहुत ही नॉर्मल है। लेकिन सिजेरियन के बाद एक माँ की देखभाल नॉर्मल तरीके से नही होती। सिजेरियन के बाद बहुत ही खास देखभाल की जरूरत होती है। खास देखभाल मतलब एक महिला के स्वास्थ्य के सभी पहलू पर ध्यान देना होता है। आज इस आर्टिकल में हम बात करेंगे कि सिजेरियन प्रसव के बाद क्या खाते हैं, सिजेरियन डिलिवरी के बाद खान पान कैसा होना चाहिए।

सिजेरियन के बाद माँ को ऐसे भोजन की आवश्यकता होती है जो माँ को शारीरिक शक्ति प्रदान करे, बच्चे के लिए माँ के दूध में बढ़ोतरी करे। लेकिन वजन न बढ़ाये और टांकों पर अनावश्यक जोर न डालें।

सिजेरियन ऑपरेशन (C-section) के बाद सभी महिलाओं को यहीं असमंजस रहता है। क्या खाएं क्या न खाएं। इस लेख में हम आप को बताएँगे की सिजेरियन डिलिवरी के बाद खान पान कैसा होना चाहिए।

कितनी कैलोरी चाहिए

यदि एक महिला स्तनपान करा रही है तो उसे अपनी रोज की जरूरत से प्रतिदिन कम से कम 500k ज्यादा की जरूरत होती है।

सिजेरियन डिलिवरी के बाद खान पान-Cesarean Delivery Ke Baad Kya Khana Chahiye

आपरेशन के बाद जब आप खाना शुरू करे तो कुछ बातों का खास ध्यान रखें।

खाएं जो आसानी से पचे

इसके लिए खुद के शरीर को जाने, क्योंकि जरुरी नही जो खाने में हल्का हो वो आपको डाइजेस्ट हो जाए। दुसरो के कहने में न आएं। खुद सोचे कि कौन से खाद्य पदार्थ आपको गैस बनाते है, उन्हें अवॉयड करें।

ज्यादा तला भुना, मसालेदार, मैदा, बाहर के भोज्य पदार्थ खाने से बचे।

खाए जो हो फैटी एसिड से भरपूर

पता करे कि कौन से खाद्य पदार्थ फैटी एसिड युक्त है। उन सभी पदार्थो का सीमित मात्रा में सेवन करे। ऐसे आहार आप को कब्ज (constipation) से बचाएगा और साथ ही यह शिशु के विकास के लिए भी अच्छा है।

फैटी एसिड अखरोट जैसे सूखे मेवों, अलसी, सूरजमुखी, सरसों के बीज, कनोडिया या सोयाबीन, स्प्राउट्स, टोफू, गोभी, हरी बीन्स, ब्रोकली, शलजम, हरी पत्तेदार सब्जियों और स्ट्रॉबेरी, रसभरी जैसे फलों में काफी मात्रा में पाया जाता हैै।

प्रोटीन की है सख्त जरूरत

सिजेरियन के बाद जख्म को भरने और कोशिकाओं के रिपेयर होने के लिए प्रोटीन बहुत जरूरी होता है। प्रोटीन युक्त खाद्य पदार्थो जैसे मछली, अंडा, चिकन, डेरी उत्पाद, मास, मटर, दाल, राजमा, और अनेक प्रकार के सूखे मेवे को अपने आहार में शामिल करें।

पर ध्यान रहे इनमें से जो भी भोज्य पदार्थ गैस बनाते है उनका प्रयोग सिजेरियन के तुरन्त बाद न करे।

विटामिन सी को न करे नजरअंदाज

विटामिन सी किसी भी तरह के इन्फेक्शन से बचाता है, इसके अलावा माँ और बच्चे दोनों की इम्युनिटी डेवेलप करता है। आखिर शिशु को पोषण अपने माँ के खाए भोजन से तो मिलता है

इसके लिए आप संतरे, तरबूज, पपीता, स्ट्रॉबेरी, अंगूर, शक्करकंद, टमाटर, गोभी, और ब्राकोली को डाइट में शामिल कर सकती है। पर ध्यान रहे इनसे आपको खांसी न हो। इनका सेवन दिन में करें। खांसी होने से टांकों पर जोर पड़ सकता है।

सिजेरियन प्रसव के बाद क्या खाते हैं
सिजेरियन प्रसव के बाद क्या खाते हैं

पूरी करें खून की कमी

सिजेरियन है तो खून की कमी तो होगी ही, तो बहुत जरूरी है कि माँ जल्द से जल्द अपने शरीर मे इसकी पूर्ति करें। इसके लिए अंडे की जर्दी, मास, अंजीर, राजमा, और मेवे (dry fruits), अनार, भुने चने, चुकंदर, काले अंगूर का सेवन करें।

लेकिन बहुत ही सीमित मात्रा में, आयरन की मात्रा ज्यादा न होने दे। अन्यथा कब्ज हो सकती है।

जिंक बचाए डिप्रेशन से

आप शायद नही जानते होंगे कि जिंक आपको पोस्टपार्टम डिप्रेशन से बचा सकता है। इसलिए इस कम महत्व दिए जाने वाले सप्पलीमेंट को बिल्कुल न भूले।

जिंक के लिए नट्स जैसे बादाम, काजू, तिल के बीज, मूंगफली और अखरोट।, दाल जैसे काबुली चना, चवली, मूंग, राजमा, सोया का सेवन करें।

कैल्शियम है आवश्यक स्तनपान के दौरान

कैल्शियम माँ के शरीर की मास पेशियोँ को आराम पहुंचाकर उसकी थकान मिटाता है। ये दातों और हाड़ियोँ को भी मजबूत बनाता है।
दूध बनने की प्रक्रिया में माँ के शरीर से कैल्शियम बहुत तेजी से ख़त्म होता है।

अगर आप स्तनपान कराती है तो आप हर दिन कम से कम 250 to 350mg कैल्शियम लेने की आवश्यकता है।

सिजेरियन प्रसव के बाद क्या खाते हैं-किन बातों का रखे ध्यान

  • फाइबर युक्त आहार ले।
  • फलों का जूस पीने की बजाये, पूरा फल खाएं।
  • खूब तरल लें, जैसे की दूध, हर्बल चाय, नारियल का पानी, लस्सी, छाज, सूप, और फलों का जूस।
  • चाय कॉफी न ले।
  • कम वासा वाले दूध उत्पाद ले।
  • साबुत अनाज का सेवन करें।
  • दही घर की बनी ले, व आटा चक्की से पिसा ले।

सिजेरियन प्रसव के बाद क्या खाते हैं-बहुत जरूरी बातें

  • सिजेरियन में कुछ भी ठोस शुरू करने से पहले डॉक्टर से बात करें।
  • शुरुआत में खिचड़ी, दलिया, सूप ले। कम से कम 15 दिन।
  • धीरे धीरे दाल और एक फुल्का ले, केवल हींग जीरे से तड़का लगा कर
  • दूध में हल्की चायपत्ती डालकर ले।
  • सूखी सब्जी तुरन्त खाना न शुरू करें।
  • कुछ भी दिक्कत महसूस होते ही तुरन्त डॉक्टर से सम्पर्क करें।
  • दिन में कई बार गुनगुना पानी पीएं
  • ठंडी चीज़े खाने से बचें।
  • पारम्परिक खाद्य पदार्थ जैसे गुड़ की पात, केवका या साँधा जो जच्चा को खिलाए जाते है, उनका सेवन कम से कम 20 दिन बाद करें।
  • सिजेरियन बेल्ट का प्रयोग जरूर करें।
  • टांकों को बार बार न छेड़े।

Frequently Asked Questions in Hindi – सामान्य प्रश्न

सिजेरियन डिलीवरी के बाद क्या क्या परहेज करना चाहिए?

सिजेरियन डिलीवरी के बाद आपको आहार में देशी घी, कैफीनयुक्त पेय पदार्थ जैसे कॉफी और चाय, कार्बोनेटेड पेय, गोभी, फूलगोभी, ब्रोकोली, अधिक मसालेदार भोजन, तला हुआ भोजन, चावल, मिर्च और जंक फूड जैसी चीजें शामिल नहीं करना चाहिए।

सिजेरियन डिलीवरी के बाद कितने दिन आराम करना चाहिए?

प्रसव के बाद महिलाओं को कम से कम चार सप्ताह तक आराम करना चाहिए। सिजेरियन डिलीवरी के बाद ठीक होने में अधिक समय लग सकता है। वहीं अगर डिलीवरी के दौरान कोई दिक्कत हुई या ऑपरेशन के बाद कोई दिक्कत हुई तो रिकवरी का समय भी बढ़ सकता है।

प्रेगनेंसी का तीसरा महीना ,क्या क्या जानना है जरुरी- pregnancy ka tisra mahina

प्रेग्नेंसी का तीसरा महीना

प्रेगनेंसी के वो नौ महीने एक खूबसूरत कहानी की तरह होते है। जिसमे सुख दुख हंसना रोना सब कुछ होता है। लेकिन इस कहानी का अंत हमेशा खूबसूरत होता है। एक नन्ही मुन्नी जान आपके हाथों में किलकारियां भरती है। लेकिन सबको ये अंत नसीब नही होता। कई बार गर्भपात अर्थात एबॉर्शन एक पल में सब कुछ छीन लेता है। यूं तो गर्भपात कभी भी हो सकता है, लेकिन पहली तिमाही में इसका खतरा सबसे ज्यादा होता है। खासकर प्रेगनेंसी का तीसरा महीना।

आज इस आर्टिकल में हम प्रेगनेंसी का तीसरा महीना कैसा होता है उसके बारे में आपको डिटेल में बताएंगे।

प्रेग्नेंसी का तीसरा महीना-बदलाव

प्रेग्नेंसी के तीसरे महीने में बाहरी तौर पर कुछ खास फर्क नही पड़ता। मतलब देखने से प्रेग्नेंसी का पता नही चलता लेकिन अंदुरुनी तौर पर निम्न बदलाव दिखाई देने लगते है। आपके गर्भ में मौजूद डिंब एक भ्रूण के रूप में बदल जाता है।

  • प्रेग्नेंसी में कब्ज और पेट में दर्द

कब्ज और पेट में दर्द की समस्या आने लगती है। ये समस्या प्रोजेस्टेरोन की मात्रा बढ़ने और गर्भाशय के आकार बढ़ने के कारण होती हैं। क्योंकि गर्भाशय के आसपास के लिगामेंट स्ट्रेच होने लगते है। यदि पेट में दर्द लगातार बना रहे तो डॉक्टर से जरूर सम्पर्क करें।

कब्ज
कब्ज
  • प्रेग्नेंसी में थकान और मॉर्निंग सिकनेस

    थकान और मॉर्निंग सिकनेस की समस्या लगभग प्रत्येक गर्भवती में देखी जाती है। इसका कारण होता है गर्भस्थ शिशु की पोषण आवश्यकताए। इसी कारण ब्लड सुगर तथा ब्लड प्रेशर पर अच्छा खासा फर्क पड़ता है। लेकिन महीना समाप्त होते होते ये समस्या ठीक होने लगती है।

  • प्रेग्नेंसी में सीने में जलन और नसों में सूजन

    सीने में जलन और नसों में सूजन भी देखने को मिलती है। कुछ भी खाने पर एसिड बार बार ऊपर की तरफ आता हैं, क्योंकि डाइजेस्टिव सिस्टम कमजोर हो जाता है। साथ ही गर्भाशय का आकार बढ़ने से आसपास की ब्लड वेसल्स सिकुड़ने लगती है, क्योंकि उनके लिए जगह की कमी हो जाती है।

  • जब ब्लड वेसल्स सिकुड़ जाती है तो पैरों की तरफ खून का दौरा कम हो जाता है और पैरों में बहुत ज्यादा सूजन आ जाती है।
  • प्रेग्नेंसी में बार बार यूरिन जाना

    शिशु के विकास के लिए हार्मोन एच.सी.जी ज्यादा मात्रा में खून का उत्पादन करता है। जिससे यूरिनरी ट्रैक्ट पर प्रेशर पड़ता है। इसलिए बार बार यूरिन के लिए जाना पड़ता है।

  • प्रेग्नेंसी में वैजाइनल डिस्चार्ज

    ये वैजाइनल डिस्चार्ज दरअसल हर प्रकार के संक्रमण को गर्भाशय में जाने से रोकता है। इसका कारण एस्ट्रोजन लेवल बढ़ना होता है।

प्रेग्नेंसी का तीसरा महीना-शिशु का विकास

  • गर्भस्थ शिशु तीसरे महीने के अंत तक 3 से 4 इंच लंबा होगा। यह एक बड़े नीबू का आकार है।
  • गर्भस्थ शिशु का वजन करीब 28 ग्राम होगा।
  • इस समय तक बेबी के सभी जरूरी अंग जैसे बाहें, हाथ, उंगलियां, पैर, अंगूठे बन चुके होते हैं सिर्फ उनका विकास होता रहता है।
  • हार्ट अपने कार्य सम्भाल लेता है।
  • जबान, जबड़ा, आंखें, जननांग और किडनी का विकास शुरू हो जाता है।
  • मांसपेशियों और हड्डियों का ढांचा बनना शुरू हो जाता है।
  • त्वचा सही से विकसित नही हुई होती और सभी नसें दिखाई दे रही होती है।

प्रेग्नेंसी का तीसरा महीना-कैसा हो आहार

  • बहुत ही हल्का और सुपाच्य भोजन ले जिससे एसिड न बनें।
  • पर्याप्त मात्रा में पानी पीएं। जरूरत से ज्यादा पानी ना पिए, किडनी पर ज़ोर पड़ेगा। केवल पानी को ही तरल में ना गिने। आपके द्वारा लिए गए पानीदार फल और सब्जियां भी तरल पदार्थ की पूर्ति करती हैं।
    ऐसा करने से कब्ज दूर होगी और डायजेस्टिव सिस्टम सही से काम करेगा।
  • फाइबर का भरपूर सेवन करें, इससे गर्भाशय की दीवार मजबूत बनेगी और शिशु के विकास में मददगार होगी। फाइबर की मात्रा को बढ़ाने के लिए आप अपनी डाइट में मोटा अनाज, अनार, अनानास, संतरे, सेब और दूसरे फलों को शामिल कर सकती हैं।
  • कैल्शियम, आयरन, तथा अन्य विटामिंस व सप्लीमेंट डॉक्टर की सलाह अनुसार लेती रहे। इसके अलावा खानपान से इनकी पूर्ति जरूर करें। निम्न खाद्य पदार्थो को भोजन में जरूर शामिल करें।
    दूध और इससे बने दूसरे प्रोडक्ट और केले, सेब, संतरा, ब्रोकली, आलू, बिन्स, अनाज, पीनट बटर, बादाम, वाइट लीन मीट यानी यानी की वो मीट जिसमें कम फैट होता है

प्रेगनेंसी में किन बातो का ध्यान रखें

  • प्रेगनेंसी में भूखे ना रहें।
  • आरामदायक कपड़े पहने
  • पेट पर बेल्ट या किसी अन्य प्रकार का प्रेशर न डाले।
  • ज्यादा वर्कलोड न ले, बीच बीच मे आराम करें
  • फ़ास्ट फूड, मसालेदार भोजन, सिगरेट और शराब से दूर रहें।
  • ऊंची हिल वाली सैंडल न पहने।
  • प्रेगनेंसी में तनाव से बचें
  • एक्सपर्ट की देखरेख में योग, व्यायाम करें।
  • सुबह टहलने का प्रयास करें।
  • प्रेगनेंसी में सप्लीमेंट्स न खाएं
  • किसी भी तरह की कोई परेशानी होने पर तुरंत अपने डॉक्टर से मिलें और उन्हें अपनी परेशानी के बारे में बताएं।

गर्भवती होने के उपाय, प्रेग्नेंट होने के लिए क्या-क्या खाएं

गर्भवती होने के उपाय, प्रेग्नेंट होने के लिए क्या-क्या खाएं

अगर आप प्रेग्नेंट होना चाहते हैं। फैमिली प्लान कर रहे हैं तो आपको अपने सेहत पर भी पहले से ध्यान देना शुरू कर देना चाहिए। प्रेग्नेंट होने से पहले खुद को स्वस्थ रखें और अपने खानपान का अवश्य ध्यान देना शुरू कर दें।  हर महिला को प्रेग्नेंट होने से पहले अपने स्वास्थ्य के बारे में ध्यान देना चाहिए। क्योंकि अगर खुद स्वस्थ नहीं होगी तो बच्चे की सेहत पर भी असर पड़ेगा।

अपनी डाइट में उन चीजों को शामिल जरूर करें जिससे गर्भ धारण करने में आसानी हो और जिनसे गर्भ की सेहत पर भी कोई बुरा असर न पड़े। गर्भधारण करने के लिए हर महिला के पास ताकत और शक्ति होनी चाहिए। क्योंकि गर्भावस्था में महिला का शरीर नाजुक हो जाता है। इस ताकत और शक्ति को बनाए रखने के लिए आपको यह डाइट अपने खान-पान में जरूर शामिल करनी चाहिए। जिससे आपकी सेहत अच्छी बनी रहे और होने वाला शिशु भी स्वस्थ और तंदुरुस्त पैदा हो।

प्रेग्नेंट होने के लिए यह सभी डायट अपने खान-पान में शामिल करें

विटामिन बी लेना है बहुत जरूरी

प्रेग्नेंट होने से पहले हर महिला के शरीर में विटामिन बी भरपूर मात्रा में होना चाहिए। अपने शरीर में विटामिन बी की मात्रा को जरूर बढ़ाएं। हरी पत्तेदार सब्ज‍ियों, साबूत अनाज, अंडे और मांस में विटामिन बी की मात्रा भरपूर पाई जाती है जो कि आपकी सेहत के लिए काफी फायदेमंद होती है।

फोलिक एसिड को धारण जरूर करें

फोलिक एसिड हर एक गर्भधारण करने वाली महिला के शरीर में होना चाहिए। गर्भधारण करने की क्षमता को भी बढ़ाता है। वही यह गर्भ में विकास के लिए भी बहुत फायदेमंद होता है। इसको बढ़ाने के लिए सोयाबीन, आलू, चुकंदर, केला और ब्रोकली इत्यादि का नियमित रूप से सेवन करें.

शरीर में पानी की कमी नहीं होने दें

हर एक गर्भधारण करने वाली महिला को अपने शरीर में पानी की कमी नहीं होनी चाहिए। और प्रेग्नेंट होने से पहले अपने शरीर में पानी की मात्रा को भरपूर रखें। पानी की कमी शरीर में होने से गर्भावस्था के समय मां और बच्चे के लिए घातक साबित हो सकती है।

डीहाइड्रेशन
डीहाइड्रेशन

अपने खान-पान में डेयरी प्रोडक्ट शामिल करें।

डेहरी प्रोडक्ट में कैल्शियम की मात्रा भरपूर पाई जाती है। यह न केवल फर्टिलिटी को बढ़ाने का काम करते हैं। बल्कि हड्डियों को मजबूत करने के लिए भी फायदेमंद होते हैं। ऐसे में प्रेग्नेंट होने से पहले हर महिला को दूध, दही, अंडा और मछली जैसी फर्टिलिटी बढ़ने वाली चीजों को अपने खानपान में अवश्य शामिल करे।

विटामिन सी को भरपूर मात्रा में प्राप्त करें।

आमतौर पर यह माना जाता है कि विटामिन सी के सेवन से सिर्फ संक्रमण से सुरक्षा मिलती है। लेकिन विटामिन सी आयरन को सोखने का काम करता है। विटामिन सी प्राप्त करने के लिए संतरा, मौसमी, टमाटर और आंवला जैसे पदार्थ का सेवन करें।

ओमेगा 3 भी है बहुत जरूरी

प्रेग्नेंट होने से पहले हर महिला को अपने शरीर में ओमेगा 3 की मात्रा को भरपूर करना चाहिए। ओमेगा-3 अपने शरीर में बढ़ाने के लिए बादाम, अखरोट और मछली को अपने खान-पान में शामिल करना चाहिए। इन तीनों चीजों में भरपूर मात्रा में ओमेगा-3 पाया जाता है।

ओमेगा-3 को न केवल गर्भ धारण करने से पहले लेना जरूरी है। बल्कि इसको प्रेगनेंसी में भी लिया जाता है। यह प्रत्येक महिला के लिए काफी फायदेमंद होता है।

हरी पत्तेदार सब्जियां और बीटा कैरोटीन लेना है बहुत जरूरी।

हरी पत्तेदार सब्जियां सेहत के लिए बहुत जरूरी होती है। यह सामान्य महिला को भी खानी चाहिए। जिससे और स्वस्थ और तंदुरुस्त रहें। लेकिन अगर आप गर्भधारण करना चाहते हैं तो उससे पहले तो आपको हरी सब्जियों को अपना मुख्य भोजन बनाना चाहिए।

हरी सब्जियों में आयरन, फोलिक एसिड और एंटीऑक्सीडेंट बहुत ज्यादा मात्रा में पाए जाते हैं। इसके अलावा सब्जियों में कैल्शियम और प्रोटीन की मात्रा पाई जाती है जो कि हर गर्भधारण करने वाली महिला के लिए लाभदायक होते हैं।

अगर कोई महिला गर्भधारण करना चाहती है। तो उसको ऊपर दी गई यह 7 डाइट को अपने खान-पान में शामिल करना चाहिए। ऐसा करने से महिला और होने वाला शिशु दोनों स्वस्थ रहेंगे। अगर आप गर्भधारण से पहले तैलीय पदार्थ, नशा युक्त पदार्थ या जहरीले पदार्थ का सेवन करते हैं तो यह आपके गर्भावस्था और डिलीवरी के बाद भी नुकसान पहुंचाता है।

डिलीवरी के बाद बढ़े हुए पेट को कैसे करे कम-Pregnancy Ke Baad Pet Kam Karna

डिलीवरी के बाद बढ़े हुए पेट को कैसे करे कम

नॉर्मल डिलवरी हो या सिजेरियन पर हर महिला पेट को लेकर परेशान होती है कि बढे पेट को कम कैसे करे? पर आप को परेशान होने की जरुरत नही हम डिलीवरी के बाद पेट कम करने के उपाय बतला रहे है जिसके प्रयोग से आप काफी हद तक प्रसव के बाद पेट कम करना कर सकते है।

प्रसव के बाद पेट कम करना-Pregnancy Ke Baad Pet Kam Karna

मसाज-Pregnancy Ke Baad Pet Kam Karne Ke Upay

प्रसव के बाद पेट की चर्बी को कम करने का सबसे अच्छा उपाय मसाज है। बच्चे के जन्म के बाद प्रत्येक महिला को अपने पेट के उस हिस्से पर ज्यादा ध्यान देने की जरूरत पड़ती है जहां कि चर्बी सबसे ज्यादा इकट्ठी होती है। पेट के उस हिस्से पर मसाज करने से चर्बी धीरे-धीरे कम होने लगती है और नियमित लंबे समय तक मसाज करने पर महिला का पेट फिर से पहले जैसा हो जाता है।

मेथी-Delivery Ke Baad Pet Kam Kaise Kare

डिलीवरी के बाद पेट कम करने के उपाय हैं मेथी के बीज। मेथी के बीज पेट कम करने में काफी मददगार होते हैं। रात के समय में 1 चम्मच मेथी के बीजों को 1 ग्लास पानी में उबालें,पानी को हल्का गुनगुना होने पर पीएं,पेट जल्दी कम हो जाएगा।

स्तनपान-Pregnancy K Bad Pait Kam Karna

एक सोध के मुताबिक, स्तनपान कराने से शरीर में मौजूद फैट सेल्स और कैलोरीज दोनों मिलकर दूध बनाने का का काम करते हैं. जिससे बिना कुछ करे ही वजन कम हो जाता है। इसलिए स्तनपान जरुर कराऐ

गर्म पानी-Cesarean Delivery Ke Baad Pet Kaise Kam Kare

गर्म पानी पेट के लिए काफी फायदेमंद होता है। बच्चे को जन्म देने के बाद पीने के लिए सिर्फ गर्म पानी का ही इस्तेमाल करें, क्योंकि गर्म पानी ना केवल पेट कम करता है बल्कि यह शरीर के वजन को भी कम करता है।

कपड़े या बेल्ट का प्रयोग-Pregnancy Ke Baad Pet Kam Karna

आप अपने पेट को किसी गर्म कपड़े या बेल्ट की मदद से लपेट कर रखें। यह पेट को सामान्य आकार में लाने मे मदद करता है साथ ही इससे पीठ के दर्द में भी आराम मिलता है।

दालचीनी-Pregnancy Ke Baad Pet Kam Karne Ke Upay

गर्भावस्था के बाद पेट को कम करने के लिए दालचीनी और लौंग बहुत कारगार साबित होते हैं। इसके लिए 2-3 लौंग और और आधा चम्मच दालचीनी को उबाल कर उसके पानी को ठंडा करके पिऐ जल्द ही पेट कम हो जाएगा।

दालचीनी
दालचीनी

ग्रीन टी-Delivery Ke Baad Pet Kam Kaise Kare

ग्रीन टी वजन को कम करने में काफी लाभकारी होती है। यह एंटी-ऑक्सीडेंट से भरपूर होती है, साथ ही इससे बच्चे और मां की सेहत को कोई नुकसान भी नहीं पहुंचता है और वजन भी कम हो जाता है।

नियमित खानपान लें-Pregnancy K Bad Pait Kam Karna

अक्सर लोग वजन कम करने के चक्कर में खाना-पीना कम करने लगते है। लेकिन ऐसा बिल्कुल न करें। ऐसा करने से कमजोरी आ सकती है या फिर मोटापा और बढ़ सकता है। इसलिए, खाने-पीने में कटौती न करें, बस स्वस्थ खानपान लें।

थोड़ा-थोड़ा, लेकिन कई बार खाएं-Cesarean Delivery Ke Baad Pet Kaise Kam Kare

कभी भी खाना इकट्ठे नही खाना चाहिऐ दिन में कई बार थोड़ा-थोड़ा कर के खाए। थोड़ा-थोड़ा खाने से आपका पाचन तंत्र ठीक रहेगा।

कम कैलोरी लें-Pregnancy Ke Baad Pet Kam Karna

आप ऐसी चीजें खाएं, जो आपको पोषण दें और जिनमें कैलोरी कम हो। ओमेगा-3 फैटी एसिड, कैल्शियम, प्रोटीन और फाइबर युक्त चीजें खाएं जैसे- अंडे, चिकन, लीन मीट, टूना व साल्मन मछली, बीन्स और साबुत अनाज आदि।

खूब पानी पिऐ-Pregnancy Ke Baad Pet Kam Karne Ke Upay

खुद को हाइड्रेट रखना बेहद जरूरी है। इसके लिए, आप दिन में आठ से 10 गिलास पानी जरूर पिएं। इससे आपके शरीर से टॉक्सिन दूर होंगे और वजन कम करने में आसानी होगी।

व्यायाम करें-Delivery Ke Baad Pet Kam Kaise Kare

नियमित रूप से व्यायाम करना प्रसव के बाद मोटापा कम करने में काफी मदद करता है। हल्का फुल्का व्यायाम जरुर करे।

भरपूर नींद लें-Pregnancy K Bad Pait Kam Karna

बच्चे के जन्म के बाद आठ घंटे की लगातार नींद ले पाना मुश्किल हो सकता है, लेकिन आपको भरपूर नींद लेनी होगी। इसके लिए जब आप का बच्चा सो रहा हो तो उस समय आप भी सो ले। उस समय घर के अन्य काम बाकी सदस्यों को दे सकती हैं।

स्नैक्स कम खाएं-Cesarean Delivery Ke Baad Pet Kaise Kam Kare

स्तनपान कराने वालीं माताओं को बार-बार भूख लगना सामान्य है। ऐसे में कई बार आपका स्नैक्स खाने का मन करेगा, लेकिन आप स्नैक्स भी सोच समझकर खाएं। ऐसा कुछ न खाएं, जिससे आपका वजन बढ़े। इसकी जगह, आप ओट्स, सूखे मेवे व साबुत अनाज का सेवन कर सकती हैं।

तनाव से दूर रखे-Pregnancy Ke Baad Pet Kam Karna

इसमें कोई दो राय नहीं है कि वजन बढ़ने का मुख्य कारण तनाव होता है। इसलिए, जितना हो सके खुद को तनाव से दूर रखें। और हमेशा खुश रहने की कोशिश करें।

डांस करें-Pregnancy Ke Baad Pet Kam Karne Ke Upay

डांस करने से भी वजन कम करने में मदद मिलेगी। इसके लिए आप अपना पसंदीदा म्यूजिक लगाएं और डांस करें।

कैफीन और एल्कोहल से दूर रहें-Delivery Ke Baad Pet Kam Kaise Kare

डिलीवरी के बाद मोटापे को कम करने के लिए जरूरी है कि आप कैफीन और एल्कोहल से दूर रहें।

क्या होता है अपूर्ण गर्भपात, अपूर्ण गर्भपात के उपचार

क्या होता है अपूर्ण गर्भपात, अपूर्ण गर्भपात के उपचार

अपूर्ण गर्भपात के उपचार

अपूर्ण गर्भपात के उपचार के लिए कभी भी घरेलू नुस्खे ना आजमाएं। किसी योग्य चिकित्सक से परामर्श लें। उसी के अनुसार काम करें। आइए हम यहां जाने कि क्यों होता है और क्या होता है अपूर्ण गर्भपात

क्या होता है अपूर्ण गर्भपात 

कई बार अबॉर्शन के बाद गर्भाशय में एंब्रियो के कुछ बॉडी पार्ट्स रह जाते हैं। ऐसी स्थिति में महिला को रुक रुक कर ब्लीडिंग होती है। उसे लगातार हल्का दर्द रहता है। इस स्थिति को अपूर्ण गर्भपात कहते हैं। यह स्थिति तब आती है जब गर्भपात काफी समय बीत जाने के बाद किया जाता है। कभी-कभी नौसिखिया लोगों के द्वारा या घरेलू उपचार या पिल्स लेने के कारण भी अपूर्ण गर्भपात हो जाता है। अपूर्ण गर्भपात में भ्रूण पूरी तरह से गर्भनाल से बाहर नहीं निकल पाता। तीन महीने से अधिक अगर हो जाए तो गर्भपात होना बहुत मुश्किल होता है। ऐसी स्थिति में अपूर्ण गर्भपात होने के खतरे काफी बढ़ जाते हैं। 

किन परिस्थितियों में होता है अपूर्ण गर्भपात

ऐसा नहीं है कि हर अपूर्ण गर्भपात किसी लापरवाही के कारण ही होता है। आधे से अधिक मामलों में क्रोमोसोम संबंधी असामान्यतायें अपूर्ण गर्भपात की वजह होती है। किसी बीमारी के होने से जैसे हाइपरटेंशन, शुगर, लिवर, किडनी इस तरह से किसी भी प्रॉब्लम के होने से महिला में अपूर्ण गर्भपात की संभावनाएं काफी बढ़ जाती है। जो महिलाएं सिगरेट, शराब आदि का अधिक प्रयोग करती हैं उनके अपूर्ण गर्भपात के चांसेज काफी अधिक होते हैं। इसके अलावा एचआईवी रोग और कुछ अन्य यौन रोगों के कारण भी अपूर्ण गर्भपात की संभावनाएं अधिक हो जाती है। वजन का कम होना या अधिक होना भी अपूर्ण गर्भपात की एक वजह हो सकता है। ओवरी सिंड्रोम, पीलिया का होना भी अपूर्ण गर्भपात की वजह हो सकते हैं। 

कैसे जानें कि गर्भपात अपूर्ण है

बुखार
बुखार

अगर ब्लीडिंग बहुत ज्यादा हो रही है। ब्लीडिंग रूक रुक कर लगातार हो रही है। ब्लीडिंग अगर काफी दिनों बाद भी लगातार हो रही है। ब्लीडिंग में बड़े-बड़े क्लॉटस आ रहे हैं। पेट में रह रह कर दर्द होता है। कुछ लोगों में यह दर्द लगातार रहता है। कुछ लोगों में पेट में ऐठन रहती है। पेट की नसों में संकुचन सा महसूस होता है। जिस तरीके का दर्द पीरियड में होता है उसी तरीके का दर्द हमेशा रहता है। शुरू में हल्का बुखार रहता है। कुछ समय के बाद बुखार बढ़ने लगता है। कुछ लोगों में बहुत ज्यादा बुखार होता है। यह सब सिस्टम्स इंडिकेट करते हैं कि गर्भपात प्रॉपर नहीं हो पाया है। 

क्यों है जानलेवा अपूर्ण गर्भपात

अगर अपूर्ण गर्भपात के कारण महिला के गर्भाशय में भ्रूण के कुछ हिस्से रह गए हैं और उन्हें निकाला ना जाए तो जान जाने तक का खतरा हो सकता है। यह भी हो सकता है कि गर्भाशय ही निकालना पड़े और शायद वह औरत कभी माॅ ही न बन पाये।

कैसे करें अपूर्ण गर्भपात का उपचार

अपूर्ण गर्भपात का उपचार किसी सुयोग्य डाक्टर की देखरेख में ही करवायें। अपूर्ण गर्भपात के उपचार के लिए डॉक्टर डी एंड सी करते हैं। डॉक्टर वेक्यूम एस्पिरेशन के द्वारा भी अपूर्ण गर्भपात का उपचार करते हैं। डी एंड सी एक जटिल प्रक्रिया है जिसमें गर्भाशय की परत को कुरेद कर साफ किया जाता है। अगर इसे किसी योग्य चिकित्सक की देखरेख में न किया जाए तो संक्रमण होने की संभावनाएं होती है। गर्भाशय वाॅल में भी छेद हो सकता है। गर्भाशय में स्कार टिशु भी बन सकते हैं। डी एंड सी ठीक से ना हो तो हेवी ब्लीडिंग हो सकती है। 

क्या होता है डी एंड सी

डीएनसी में महिला को बेहोश करके उसकी गर्भाशय ग्रीवा को फैलाया जाता है। उसके बाद गर्भाशय को क्यूरेट की मदद से साफ किया जाता है। इस प्रक्रिया में गर्भाशय की दीवार को कुरेद कर साफ किया जाता है। जिससे गर्भाशय में अगर भ्रूण के कुछ अवशेष होते हैं तो वह भी निकल जाते हैं। इस प्रक्रिया में गर्भाशय की दीवार थोड़ी कमजोर हो जाती है, स्त्री को मासिक धर्म में अनियमितता हो सकती है। हो सकता है कि पीरियड टाइम से पहले हो जाए या यह भी हो सकता है कि पीरियड्स डिले हो जाए।

अपूर्ण गर्भपात के उपचार के बाद महिला की देखभाल

पेशेंट डी एंड सी के बाद अपने आप को कुछ समय तक कमजोर महसूस करती है। उसके शरीर में हाथ पैरों मैं दर्द रहता है। उसके पेट में हल्का हल्का ऐंठन वाला दर्द रहता है। इस प्रक्रिया के बाद कुछ समय तक ब्लीडिंग हो सकती है।

उपचार के बाद स्त्री को कुछ समय तक अपने दैनिक कार्यों को आराम से करने की आवश्यकता होती है। तीन-चार दिनों तक उसे थकाने वाले काम, नहाना, सेक्स करना, भारी सामान उठाना आदि नहीं करना चाहिए। उसे हल्का और सुपाच्य भोजन लेना चाहिए।

गर्भावस्था मे कब्ज से कैसे पायें आराम-Pregnancy Me Kabj Ke Upay In Hindi

गर्भावस्था मे कब्ज से कैसे पायें आराम

गर्भवती महिलाओं में कब्ज उन हार्मोन की वजह से होती है जो आंतों की मांसपेशियों को आराम पहुंचाती हैं और पेट बढ़ने की वजह से गर्भाशय पर पड़ने वाले दबाव को कम करते हैं। आंतों की मांसपेशियों को आराम मिलने की वजह से भोजन और अपशिष्ट पदार्थ  सिस्टम से धीरे धीरे बाहर निकलते हैं। गर्भावस्था के दूसरे महीने से गर्भावस्था के तीसरे महीने के आसपास, प्रोजेस्टेरोन का स्तर बढ़ने पर कब्ज की समस्या शुरू होती है। जैसे जैसे गर्भावस्था बढ़ती है आपका गर्भाशय भी बढ़ता है और ये समस्या बढती जाती है। कभी-कभी आयरन की गोलियां लेने की वजह से गर्भावस्था मे कब्ज हो जाती है। इसलिए आयरन सप्लिमेंट लेते समय साथ में खूब सारा पानी पिएं।

गर्भावस्था मे कब्ज के कारण

  • गर्भावस्था के दौरान कब्ज का सबसे अहम कारण प्रोजेस्ट्रोन हार्मोन का बढ़ना है।
  • अगर गर्भवती महिला अपने भोजन में फाइबर युक्त खाद्य पदार्थों को शामिल नहीं करती है, तो कब्ज हो सकती है। फाइबर पाचन तंत्र को बेहतर तरीके से काम करने में मदद करता है।
  • प्रतिदिन कम मात्रा में पानी पीने से भी कब्ज हो सकती है। साथ ही पहली तिमाही में मॉर्निंग सिकनेस के कारण भी डिहाइड्रेशन की समस्या हो सकती है, जो कब्ज का कारण बनती है।
  • गर्भावस्था में महिला के स्वभाव में बदलाव होता है और कई बार थकान भी महसूस होती है, जो कब्ज का कारण बन सकती है लेकिन रोज कुछ देर की सैर भी जरूरी है। इससे खाना हजम होता है और पेट आराम से साफ हो जाता है। अगर डॉक्टर ने आपको पूरी तरह से बेड रेस्ट के लिए बोला है, तो बात अलग है।
  • स्ट्रोक, डायबिटीज, आंत में रुकावट, आईबीएस (इर्रिटेबल बाउल सिंड्रोम) जैसी समस्याओं के कारण भी कब्ज हो सकती है।
  • आयरन व कुछ दर्द निवारक दवाइयों के कारण भी कब्ज की समस्या हो सकती है।

गर्भावस्था मे कब्ज होना सामान्य है, लेकिन इसका उपचार करना जरूरी हैं। अगर गर्भावस्था के दौरान कब्ज को ठीक न किया जाए, तो इससे कई अन्य स्वास्थ्य समस्याएं हो सकती है

और पढ़ें: क्यों होता है गर्भावस्था मे पेट दर्द-Garbhavastha Me Pet Dard

गर्भावस्था मे कब्ज के उपाय-Pregnancy Me Kabj Ke Upay In Hindi

करें

संतरे

प्रेगनेंसी में कब्ज दूर करने का घरेलू उपाय

संतरे का सेवन

दिनभर में एक से दो संतरे का सेवन करें।

यह कैसे मदद करता है

एक कप प्रून यानी सूखे आलू बुखारे का सेवन करें। वैकल्पिक रूप से आलू बुखारे के जूस का भी सेवन कर सकते हैं।

अलसी से मिलेगा आराम

अलसी को भूनकर और पीसकर पाउडर बनाया जा सकता है, जिसे किसी भी सब्जी या सलाद में इस्तेमाल किया जा सकता है। अलसी को भूनकर इसे रोटी या पराठे के आटे में मिला सकते हैं।

इसबगोल से गर्भावस्था मे कब्ज होगा दूर

एक गिलास ठंडे पानी में इसबगोल को मिक्स कर लें। फिर इसका सेवन करें।

और पढ़ें: गर्भावस्था में सोने के तरीके, जिससे बच्चे को ना हो कोई नुकसान

कीवी और सेब दे आराम

रोजाना एक कीवी का सेवन करें। या इसके जूस को भी पी सकते हैं। सेब मे पानी, सोर्बिटोल, फ्रुक्टोज, फाइबर और फाइटोकेमिकल्स होते हैं, जिस वजह से इन्हें कब्ज के इलाज के लिए उपयोगी माना जाता है। केला का सेवन करें। इसे दूध में मिक्स करके यानी शेक बनाकर भी लिया जा सकता है।

दही का सेवन या तो इसी तरह किया जा सकता है या फिर छाछ बनाकर कर सकते है।

गर्भावस्था मे कब्ज दूर करेगा अंगूर

गर्भावस्था मे कब्ज का इलाज घर में ही करने के बारे में सोच रहे हैं, तो अंगूर का सेवन कर सकते हैं। इसमें फाइबर की भरपूर मात्रा होती है, जो कब्ज से राहत दिलाने में मदद करता है।

सेंधा नमक का करें प्रयोग

नहाते समय बाल्टी या टब में सेंधा नमक डालें। करीब 15 से 20 मिनट तक उसमें आराम से लेट जाएं या नहा लें। वैकल्पिक रूप से सेंधा नमक का पानी का भी सेवन किया जा सकता है।

ग्रीन टी पीयें

एक कप गर्म पानी में ग्रीन टी या ग्रीन टी बैग डालें। करीब 5 मिनट के बाद ग्रीन टी बैग को निकाल लें। अगर पत्ती का इस्तेमाल किया है, तो पानी को छान लें। स्वाद के लिए इसमें शहद मिला सकते हैं।

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सामान्य प्रश्न

प्रेगनेंसी में पेट साफ न हो तो क्या करे?

गर्भावस्था के दौरान अधिकांश महिलाओं को कब्ज की समस्या रहती है। कब्ज की समस्या से निपटने के लिए खाने में अधिक से अधिक मात्रा में फाइबर युक्त पदार्थ जैसे दलिया ,गाजर ,मूली पत्ता गोभी , संतरा ,सेब आदि का सेवन अधिक मात्रा में करें। अधिक से अधिक मात्रा में पानी तथा तरल पदार्थों का सेवन करें यदि नारियल पानी का सेवन भी लाभप्रद रहेगा। सब की समस्या में दही का सेवन करना चाहिए क्योंकि इसमें प्रोबायोटिक होता है जो पेट को साफ रखने में मदद करता है । ताजी देसी गुलकंद का सेवन भी कब्ज की समस्या से राहत दिलाता है । किशमिश भिगोकर खाएं, सिट्रिक फलों का सेवन करें, भोजन बनाने में सेंधा नमक का प्रयोग करें । किसी भी प्रकार की दवाई अथवा जुलाब लेने से पहले डॉक्टर की सलाह लें हो सके घरेलू नुस्खा द्वारा ही कब्ज की समस्या का निदान करने का प्रयास करें ।

गर्भावस्था की शुरुआत में कब्ज?

गर्भावस्था के दौरान शरीर में प्रोजेस्ट्रोन हार्मोन बढ़ने लगता है जिसके कारण आंतों के कार्य करने की क्षमता धीमी हो जाती है ,उसी कारण कब्ज की समस्या होने लगती हैं । गर्भावस्था के शुरुआती दौर में कब्ज की समस्या होने पर घरेलू नुस्खा प्रयोग कर समस्या से निजात पाने का प्रयास करना चाहिए, इसके लिए अधिक से अधिक मात्रा में पानी तथा तरल पदार्थों का सेवन करना चाहिए । सुबह-सुबह खाली पेट गुनगुने पानी का सेवन कब्ज की समस्या में राहत दिलाता है । भोजन में फाइबर युक्त पदार्थों जैसे दलिया, पत्ता गोभी, सेब आदि भोज्य पदार्थ खाने चाहिए । दही का सेवन में समस्या में फायदेमंद होता है । गर्भावस्था का शुरुआती दौर काफी नाजुक होता है इसलिए समस्या हो तो सोच जाते समय अधिक जोर लगाने से बचना चाहिए । किसी भी प्रकार की दवा का सेवन करने से पहले डॉक्टर की सलाह लेनी चाहिए ।

जानिए शिशु के लिए हिमालय बेबी क्रीम के फायदे और साइड इफेक्ट्स

जानिए शिशु के लिए हिमालय बेबी क्रीम के फायदे

बचपन बहुत भोला होता है और बच्चों के बचपन की तरह ही बच्चे भी बहुत भोले और मासूम होते हैं। और साथ ही साथ नाज़ुक होती है उनकी त्वचा। हर माता-पिता का सपना होता है कि वह अपने बच्चों के लिए सबसे अच्छा चुने फिर चाहे वह खाने का समान हो पहनने के कपड़े हो या लगाने की क्रीम वह सबसे अच्छा ही चुनना चाहते हैं तो आइए जानते हैं हिमालय बेबी क्रीम के बारे में।

हिमालय बेबी क्रीम के फायदे

बच्चों की त्वचा बड़ों की त्वचा की अपेक्षा बहुत नाज़ुक होती है और जितनी नाज़ुक होती है उतनी ही तेजी से बच्चों की त्वचा की नमी भी खोती है। हिमालय बेबी क्रीम बच्चों की स्किन के लिए सुरक्षा कवच का काम करती है। हिमालय बेबी क्रीम पर्यावरण में मौजूद हानिकारक तत्वों से भी बेबी की सुरक्षा करती है हिमालय बेबी क्रीम में कोई हानिकारक पदार्थ नहीं है जिसके कारण यह बेबी की त्वचा के लिए उपयुक्त है।

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हिमालय बेबी क्रीम बनी है बच्चों की नाज़ुक त्वचा के लिए
हिमालय बेबी क्रीम बनी है बच्चों की नाज़ुक त्वचा के लिए

हिमालय बेबी क्रीम लगाने से क्या होता है

बच्चों की त्वचा बहुत कोमल होती है। हर मौसम का बच्चों की त्वचा पर असर पड़ता है। गर्मियों में पसीने और गर्मी के कारण बच्चों की त्वचा चिपचिपी हो जाती है। तो सर्दियों में अधिक ठंड के कारण बच्चों की त्वचा रूखी हो जाती है ठंड में बच्चों के गाल ,कुहनिया, घुटने नाक गाल फटने लगते हैं और त्वचा काली पड़ने लगती है। हिमालय बेबी क्रीम सर्दियों में त्वचा को मुलायम बनाती है। और गर्मियों में त्वचा को चिपचिपी नहीं होने देती इसलिए हिमालय बेबी क्रीम सर्दी और गर्मी दोनों में ही एक बेहतर सुरक्षा कवच है छोटे बच्चों के लिए।

हिमालय बेबी क्रीम पूरा करती है सारे मानकों को

आईआरएसके निर्धारित मानकों को पूरा करती है हिमालय बेबी क्रीम। अंतरराष्ट्रीय मानकों को भी पूरा करती है ।

हिमालय बेबी क्रीम पैराबेन फ्री है

हिमालय क्रीम में केमिकल्स नहीं है, यह टाइप सी है यह पैराबेन फ्री क्रीम है यह बच्चों की त्वचा के लिए बिल्कुल उपयुक्त है।

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हिमालय बेबी क्रीम है लैब टेस्टेड

हिमालय बेबी क्रीम लैब टेस्टेड है। बल्कि हिमालय बेबी क्रीम ने इस टेस्ट को क्वालीफाई भी किया है। हिमालय बेबी क्रीम अंतर्राष्ट्रीय मानकों की कसौटी पर पूरी तरह से खरी उतरी है।

हिमालय बेबी क्रीम में आर्टिफिशियल खुशबू और कलर नहीं है

बच्चों के लिए प्रयोग की जाने वाली क्रीम में कृत्रिम रंग या खुशबू का प्रयोग नहीं किया जाना चाहिए पर माता-पिता अपने बच्चे के लिए क्रीम की खुशबू के साथ रंग को भी वरीयता देते हैं हम यह भूल ही जाते हैं की क्रीम का काम त्वचा को माइश्चराइज करना है। हिमालय बेबी क्रीम ऐसे प्रोडक्ट से बनी है जिनके कोई साइड इफेक्ट नहीं है। हिमालय बेबी क्रीम से कोई स्किन इन्फेक्शन नहीं होता। हिमालय बेबी क्रीम की खुशबू बहुत हल्की है जो मन को मोह लेती है।

कई बार माता-पिता अपने बच्चे के लिए ऐसी क्रीम को चुनते हैं जो बच्चे की त्वचा को मॉश्चराइज करने के साथ अच्छी खूशबू भी दे। अब यहां हम इस बात को इग्नोर कर देते हैं कि कहीं इस क्रीम या प्रोड्क्ट में ऐसे एजेंट्स का तो प्रयोग नहीं हुआ जिससे बच्चे को कोई स्किन इन्फेक्शन हो। बच्चे के प्रोडक्ट के पैक पर ध्यान दें कि इसमें खूशबू के लिए इस्तेमाल होने वाले एजेंट्स आईआरएफए (IRFA) द्वारा पास और लैब टेस्टेड हों।

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आइये एक बार नजर डालते हैं हिमालय बेबी क्रीम के फ़ायदों पर

  • हिमालय बेबी क्रीम में हानिकारक रंग नहीं है।
  • हिमालय बेबी क्रीम मैं पैराबेन और खनिज तेल नहीं है
  • हिमालय बेबी क्रीम की खुशबू बहुत हल्की और मनमोहक है।
  • हिमालय बेबी क्रीम बच्चों की त्वचा में आसानी से समा जाती है।
  • हिमालय बेबी क्रीम का दाम इसकी खूबियों को देखते हुए बिल्कुल वाजिब है।
  • हिमालय बेबी क्रीम की कम मात्रा ही काफी होती है।
  • हिमालय बेबी क्रीम बहुत किफायती पैक में उपलब्ध है। हिमालय बेबी क्रीम 100 ग्राम, 15 ग्राम 200 ग्राम, 50 ग्राम के पैक में उपलब्ध है।
  • हिमालय बेबी क्रीम के बच्चों की त्वचा के लिए पूरी तरह सुरक्षित है हिमालय बेबी क्रीम बच्चे की त्वचा को नरम व मुलायम बनाती है हिमालय बेबी क्रीम बेबी की त्वचा को स्किन इन्फेक्शन से बचाती है।
  • हिमालय बेबी क्रीम में हानिकारक केमिकल्स नही है। हिमालय बेबी क्रीम सभी राष्ट्रीय व अन्तरराष्ट्रीय मानकों पर खरी उतरती है। हिमालय बेबी क्रीम ,बेबी की त्वचा का सुरक्षा कवच है।

सामान्य प्रश्न

हिमालय बेबी क्रीम लगाने से क्या होता है?

बच्चों की त्वचा काफी कोमल और नाजुक होती है इसलिए बच्चे के लिये हिमालय बेबी क्रीम कवच का काम करता है और कोमलता प्रदान करता है।हिमालया की बेबी क्रीम विशेष रूप से कोमल बच्चे के शुष्क त्वचा,फ़टे गाल और घिसी हुई कोहनी की रक्षा के लिए तैयार की जाती है। हिमालया बेबी क्रीम बच्चे की त्वचा पर जादुई प्रभाव डालती है।क्रीम में मौजूद प्रकृति तत्व बच्चे की त्वचा को कोमलता के साथ ही नमी प्रदान कर सुरक्षित रखता है।हिमालया बेबी क्रीम लैब द्वारा प्रमाणित अंतराष्ट्रीय मानकों की कसौटी पर भी खड़ी उतरी हुई है।इसमें किसी भी प्रकार का हानिकारक रसायन नही है साथ ही इसकी खुशबू भी मोहक है।बच्चें के लिये यह क्रीम सर्वश्रेष्ठ है।

बच्चों के लिए कौन सी क्रीम अच्छी है?

सर्दी में जितनी जल्दी हमारी त्वचा रूखी होती है, बच्चों की त्वचा सर्द हवाओं से और भी जल्दी डैमेज हो जाती है। हालांकि बेबी स्किन केयर से जुड़े कई तरह के प्रॉडक्ट्स इस समय आपको बाजार में मिल जाएंगे। जो बच्चों की त्वचा के लिए बेस्ट होने का दावा करते हैं। हालांकि केमिकल्स तो ज्यादातर प्रॉडक्ट्स में उपयोग होते हैं। इसलिए, आप अपने बेबी की स्किन को प्यार भरी देखभाल देने के लिए चुने हिमालया बेबी क्रीम,जो बच्चे की कोमल त्वचा सुरक्षा प्रदान करता है। इसमें कंट्री मेलो, ऑलिव ऑयल और मुलेठी को डाला गया है। ऑलिव ऑयल में मौजूद विटामिन ई शिशु की त्वचा में पोषण को पूरा करता है।यह क्रीम सभी प्रकार की एलर्जी से बच्चों को बचाता है।

बेबी क्रीम लगाने से चेहरे पर क्या होता है?

मासूम बच्चे की त्वचा कोमल होने के कारण माता पिता को सभी चीजों का काफी ध्यान रखना पड़ता है क्योंकि बच्चों की त्वचा पर बहुत जल्दी इंफेक्शन हो जाता है और गलत साबुन या क्रीम इत्यादि इस्तेमाल करने पर बच्चे की रंगत में फर्क भी आ जातें है और त्वचा पर रैशेज भी हो जातें हैं। यदि आपके शिशु के गाल नाक कोहनी और घुटने काफी रूखे सूखे रहते हैं तो यह क्रीम लगाने से शिशु की त्वचा का रूखा सूखापन खत्म हो जाता है और उनकी त्वचा को काफी कोमल और मुलायम हो जातें है। बेबी क्रीम लगाने से बच्चे की मासूमियत बरकरार रहती है।बेबी क्रीम बच्चे की त्वचा को स्वस्थ और पोषित रखते हैं।

हिमालय बेबी किट कैसे यूज़ करे?

हिमालया बेबी केयर किट बहुत ही उपयोगी और भरोसेमंद किट है।हिमालया बहुत ही प्रसिद्ध और पॉपुलर ब्रांड है।इस किट में बच्चे की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए सभी सामग्री मौजूद हैं।इसे इस्तेमाल करना बहुत आसान है। .बेबी मसाज ऑइल-बच्चे की हड्डी को मजबूत बनाने के लिये रोजाना मसाज करें। .साबुन,इससे नहाने पर बच्चे की त्वचा नर्म और मुलायम बनती है। .लोशन,क्रीम-चेहरे और बॉडी पर लगाने से कोमलता मिलती है। .शैम्पू- नहाते समय बालों में लगाने से बाल स्वस्थ रहतें है। .वाइप-हिमालय बेबी वाइप से बच्चे की त्वचा को पोछकर साफ किया जाता है। रैशेज क्रीम-छोटे बच्चे बार-बार रैशेज हो जाते हैं।इसलिए यह क्रीम रैशेज वाले जगह पर इस्तेमाल की जाती है। .पाउडर-यह बच्चे को गर्मी,घमौरी और इचिंग से बचाता है साथ ही फ्रेश रखता है।

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