गर्भावस्था में सोने के तरीके, जिससे बच्चे को ना हो कोई नुकसान | प्रेगनेंसी में कैसे सोना चाहिए

गर्भावस्था में सोने के तरीके

गर्भावस्था मे महिला को अपने सेहत के साथ-साथ सोने के तरीके पर ध्यान देना चाहिए। गलत पोजीशन मे सोने पर बच्चे पर बुरा असर पड़ सकता है। इसलिए गर्भावस्था मे महिला को कुछ बातो का ध्यान रखना चाहिए। इस लेख में हम बात करेंगे गर्भावस्था में सोने के तरीके के बारे में, प्रेगनेंसी में कैसे सोना चाहिए।

सबसे पहले ये जानना जरुरी है की गर्भावस्था के दौरान सोना मुश्किल क्यों होता है?

प्रेगनेंसी में नींद ना आना-Pregnancy Me Neend Na Aana

गर्भावस्था के दौरान नींद ना आना और सोने में दिक्कत होना बहुत ही सामान्य है। इसके कई कारण है। गर्भावस्था के दौरान शरीर में कई बदलाव होते है जैसे की भ्रूण व योनि का आकार बढ़ना, स्तनों का आकार बढ़ना, बार-बार पेशाब आना और सांस लेने में दिक्कत। इतना ही नहीं, गर्भावस्था में डॉक्टर पेट के बल न सोने की सलाह देते हैं, क्योंकि इससे भ्रूण पर दबाव पड़ता है। इन्ही सब बातों के चलते गर्भवती महिला को ठीक तरह से नींद नहीं आती। आइए विस्तार से जानते है गर्भावस्था में नींद ना आने के कारण और उनके उपाय।

बार-बार पेशाब आना

गर्भावस्था की पहली तिमाही में खून का प्रवाह बढ़ने के कारण बार-बार पेशाब आता है। शरीर में प्रोजेस्ट्रोन हार्मोन और गर्भाशय का आकार बढ़ने के कारण भी ऐसा होता है। बार-बार पेशाब आने की वजह से भी नींद खराब होती है।

बार-बार पेशाब आने की समस्या कम करने के लिए शाम के बाद पेय पदार्थ कम लें। दिनभर में जितना हो सके पेय पदार्थ का सेवन करें, लेकिन शाम को छह बजे के बाद पेय पदार्थ का सेवन कम कर दें। ऐसा करने से रात को सोते समय बार-बार शौचालय नहीं जाना पड़ेगा।

शरीर में दर्द

शरीर में दर्द
शरीर में दर्द

गर्भावस्था में मांसपेशियों और हड्डियों पर दबाव पड़ता है क्यूंकि आपका शरीर शिशु को संभालने के लिए तैयार हो रहा होता है। इस दवाब के कारण शरीर में दर्द महसूस होता है। इस दर्द के कारण भी रात को बार-बार नींद खराब होती है।

गर्भावस्था में रात को आराम से सोने के लिए आप अपनी सुविधानुसार शैड्यूल तैयार करें। यदि रात में ठीक तरह से नींद ना आये तो आप दिन में सो कर कुछ हद नींद पूरी कर सकती हैं।

उल्टी आना

गर्भावस्था में कभी-कभी रात को उल्टी आने की वजह से भी नींद ठीक से नहीं आती। हलांकि जी मिचलना और उल्टी सामान्यत दिन के समय ही आम है।

गर्भावस्था में खान-पान पर ध्यान रख के उल्टी और जी मिचलने की समस्या से बचा जा सकता है। तली और भुनी हुई चीज, मैदे से बनी चीजे ना खाए। पौष्टिक और संतुलित आहार खाएं। अदरक वाली चाय या फिर नींबू पानी का सेवन करें।

गर्भावस्था में सोने के तरीके-Pregnancy Me Sone Ke Tarike In Hindi

पीठ के बल सोने से बचे

गर्भावस्था के पहली तिमाही मे आप पीठ के बल सो सकती है इसमे आपको कोई चिंता करने की ज़रूरत नही है। जब आप दूसरे तिमाही मे चली जाती हैं तो आपको पीठ के बल सोने से बचना चाहिए।

तीसरे तिमाही मे पीठ के बल सोने पर गर्भाशय का पूरा भार आपकी पीठ पर रहता है जो आपके शरीर के निचले हिस्से से रक्त को आपके हृदय तक पहुंचाती है जिससे आपको बहुत सी परेशानिया हो सकती है जैसे पीठ दर्द, बवासीर, अपच, सांस लेने में तकलीफ़ और रक्त परिसंचरण में कठिनाई होती है।

दाएँ करवट कम सोयें

गर्भावस्था मे दाईं हाथ की तरफ सोना पीठ के बल सोने से ज्यादा सही है लेकिन यह उतना सुरक्षित नही है जितना की बाईं तरफ सोने से है इसका कारण यह है कि आपके दाहिने हाथ पर सोते हुए आपके जिगर पर दबाव पड़ सकता है। अगर फिर भी आपका बाई तरफ़ सोने से थकान या दबाब हो गया हो तो आप थोड़े समय के लिए दाईं तरफ करवट ले सकते हैं।

बाएँ करवट सोना होता है अच्छा

बाएँ करवट सोना
बाएँ करवट सोना

गर्भावस्था में बाएं करवट सोना अच्छा होता है यह आपको और आपके पेट मे पल रहे शिशु को स्वस्थ बनाता है | बाएं तरफ सोने से आपके और आपके शिशु के शरीर मे रक्त का प्रवाह सही तरीके से होता है जिससे आप के बेबी को भरपूर ऑक्सीजन और पोषण मिलता है। बायीं करवट मे सोने से शिशु को कोई भी चोट लगने की कम सम्भावना होती है।

गर्भावस्था मे आप बाईं तरफ मुंह और अपने घुटनो को मोड़कर सो सकते हैं इस अवस्था मे आपको बहुत तकलीफ़ तो होगी लेकिन अगर आप चाहते है की आपका शिशु स्वस्थ और निरोगी रहे तो आपको ये तो करना ही होगा।

इन बातों का भी रखें ध्यान-प्रेगनेंसी में कैसे सोना चाहिए

  • गर्भावस्था के शुरूआती महीनों में महिलाओं को सीधा होकर सोना चाहिए। इससे भ्रूण का विकास अच्छी तरह से होता है।
  • सोते समय अपने सिर के नीचे नर्म तकिए लगा लें। तकिया मोटा और सख्त नहीं होना चाहिए इससे बच्चे के साथ-साथ आपको भी नुकसान हो सकता है।
  • सोते समय अपने घुटनों को थोड़ा-सा मोड़ ले इससे पीठ को आराम मिलता है और कमर दर्द की समस्या नहीं होती। और एक ही मुद्रा मे बहुत देर तक ना सोऐ।
  • गर्भावस्था के दौरान महिला को बाई तरफ करवट लेकर सोना चाहिए। इससे भ्रूण में रक्त बढ़ता है और पोषण भी मिलता है।
  •  सोते समय तकिए को पैरों के बीच में रख ले इससे आपको आराम मिलेगा और आपके पेट को भी सहारा मिलेगा।
  • अगर आप एक तरफ करवट लेकर सोते है तो सोते समय अपनी पीठ के पीछे तकिया लगा लें। इससे आपको पीठ दर्द की समस्या नहीं होगी।

गर्भावस्था के दौरान अच्छी और गहरी नींद के लिए टिप्स

तकिया

गर्भावस्था में अच्छी नींद के लिए तकिए का उपयोग करे। सोते समय एक से अधिक तकिये का इस्तेमाल करे। एक तकिया अपने पेट के नीचे रखें और एक अपने घुटनों के बीच में रख कर आराम से लेट जाए। इससे आपको आराम मिलेगा और अच्छी नींद आएगी। साइड पोजीशन यानि करवट ले कर आराम से सोने के लिए मैटरनिटी पिलो का इस्तेमाल भी कर सकती है।

खानपान

गर्भवती महिला को रात को डिनर में मिर्च-मसाले और तले हुए भोजन का सेवन नहीं करना चाहिए। सोने से कम से कम दो घंटे पहले हल्का भोजन करें और भोजन के बाद कुछ देर टहलें।

मालिश

हाथों, पैरों, गर्दन व सिर की मालिश करवाने से भी तनाव दूर होता है और आपको अच्छी नींद आती हैं।

अच्छी और पूरी नींद हमे अगले दिन पूरी ऊर्जा के साथ फिर से काम करने के लिए तैयार करती हैं। गर्भवती महिला के लिए नींद पूरी होना और भी ज्यादा जरूरी है क्योंकि पर्याप्त नींद लेने से गर्भ में पल रहे शिशु का विकास बेहतर तरीके से होता है। हमें उम्मीद है कि इस लेख के माध्यम से आपको गर्भवती महिला के लिए पर्याप्त नींद की क्यों जरुरी है और गर्भवस्था में नींद पूरी करने के लिए आप क्या क्या कर सकते है समझ आ गया होगा।

Frequently Asked Questions in Hindi – सामान्य प्रश्न

गर्भवती महिला को कितने घंटे सोना चाहिए?

प्रेग्नेंसी के दौरान महिलाएं अच्छी नींद नहीं ले पाती हैं। जबकि हर गर्भवती महिला के लिए पूरे दिन में 7 से 8 घंटे की अच्छी नींद जरूरी है। यह गर्भ में पल रहे शिशु के लिए भी आवश्यक है, कम नींद लेने से शिशु का विकास प्रभावित हो सकता है। लेकिन शरीर केआकार में बदलाव, हारमोन्स परिवर्तन और अन्य कईं स्वास्थ्य समस्याएं होने से अक्सर गर्भवती महिला की नींद बाधित होती है। ठीक इसी तरह बिस्तर पर सारे दिन लेटे रहना भी शिशु के स्वास्थ्य के लिए नुकसानदायक हो सकता है,और एक अच्छी नींद के लिए भी ये जरूरी है कि सारा दिन बिस्तर पर न रहकर कुछ हल्के फुल्के काम करना और टहलना जरूर चाहिए। बेड़रेस्ट तभी करें, जब डॉक्टर ने सजेस्ट किया हो।

गर्भवती महिला को कैसे रहना चाहिए?

गर्भावस्था किसी औरत की जिंदगी का बहुत ही महत्वपूर्ण समय होता है, इसलिए सबसे पहले गर्भवती महिला का खुश रहना बहुत जरूरी है, इसके अलावा उसके आसपास का पारिवारिक माहौल भी खुशहाल हो तो सोने पर सुहागा। आहार पर विशेष ध्यान दें,भोजन छोटे छोटे मील में बाँटकर चार पाँच बार करें, भोजन पौष्टिक हो लेकिन अपनी रूचि का हो ताकि जी न मिचलायें,भोजन में सभी आवश्यक तत्व आइरन फोलिक एसिड़, विटामिन्स, प्रोटीन व कैल्शियम सभी हों। इसके अलावा अच्छी नींद लें,टहलें और डॉक्टर से नियमित चैकअप कराये, डॉक्टर की सलाह से आवश्यक सपलीमेंटस ले, सोनोग्राफी कराकर बच्चे का विकास सुनिश्चित करें। अच्छा साहित्य पढे़ , सोशल मीडिया पर सकारात्मक कंटेंट ही देखें, योगा और प्राणायम को किसी ट्रेनर से सीख कर अपनी दिनचर्या का हिस्सा बनायें।

प्रेगनेंसी में सुबह कितने बजे उठना चाहिए?

प्रत्येक व्यक्ति के लिए जल्दी सोना व जल्दी उठना एक आदर्श दिनचर्या का हिस्सा होता है, प्रिगनेंसी में ये और भी ज्यादा जरूरी है, अगर आप जल्दी सोकर सात घंटे की अच्छी नींद लेकर सुबह सूर्योदय के समय उठ जाती हैं और थोड़ी देर उगते सूरज की धूप लेती हैं तो सारा दिन व्यवस्थित रहेगा। एक सर्वे में पाया गया कि देर रात तक जगने वाली महिलाओं की फिटनेस सुबह उठने वालों के मुकाबले कमजोर हाेती है। ऐसी महिलाएं ज्यादातर रोजमर्रा के कामों को पूरा करने के लिए बॉडी क्लॉक के विरुद्ध जाती हैं जो शरीर की अंदरूनी कार्यशैली को अव्यवस्थित करता है। इसलिए शाम को सही समय पर हल्का भोजन करें तथा नियमित समय पर मोबाइल को खुद से दूर रखकर सोने की कोशिश करें ।

प्रेगनेंसी में सुबह उठकर क्या खाना चाहिए?

गर्भवती महिला को सुबह की अपनी पहली खुराक पौष्टिकता और अपनी रूचि के हिसाब से निर्धारित करनी चाहिए, इस विषय पर हमारी सलाह है..! *गर्भवती महिला सुबह उठकर सेब खा सकती हैं, ये रोगों से लड़ने में मदद करता है,इसमें फाइबर अच्छी मात्रा में होता हैऔर यह एक अच्छा एंटीऑक्सिडेंट भी है। *रात भर भीगे बादाम सुबह खाने से मां और गर्भ में पल रहे बच्चे दोनों के लिए पोषण और ऊर्जा मिलती है। *आप सुबह-सुबह दूध पी सकती हैं, अगर आपको दूध पीने से मितली या उल्टी आती है तो आप साथ में कुछ नट्स या बिस्कुट ले सकती हैं। *अगर आप फल नहीं खाना चाहती है तो आप जूस ले सकती है इससे आपको वो सारे पोषक तत्व मिलेंगे जो फल से मिलते हैं।

पपीता के बीज से गर्भपात कैसे होता है-papita khane se period aata hai

पपीता के बीज से गर्भपात कैसे होता है

मातृव एक बहुत ही खूबसूरत एहसास होता है अपने अंदर प्रतिपल नवजीवन को बढ़ते महसूस करना किसी भी भावी माँ के किये बेहद अनूठा होता है।ज़ाहिर है ऐसे में उसे स्वयं के एवं भावी बच्चे के बेहतरीन स्वास्थ्य के लिये एक संतुलित और स्वास्थ्य वर्द्धक ख़ुराक़ की दरकार होती है। होने वाली माँ को जहाँ बहुत सारे फल और सब्जियों के सेवन की सलाह दी जाती है,वहीँ कुछ फल विशेष हैं जिनके उपयोग के लिये सख्ती से मना किया जाता है।

ताकि भावी शिशु और उसकी माता के स्वास्थ्य पर कोई भी विपरीत प्रभाव न पड़े। कोई भी माँ अपने बच्चे में किसी भी प्रकार का शारिरिक या मानसिक दोष नहीँ सहन कर सकती । हँसता मुस्कुराता स्वस्थ सुन्दर बच्चा हर माता पिता का सपना होता है और गर्भकाल में जहाँ होने वाली माँ को अच्छी सेहत के लिये आम ,नारियल,सन्तरा, केला आदि फ़लों के सेवन की सलाह दी जाती है।

वहीँ पपीते से दूरी बनाने के निर्देश भी मिलते हैं। अक्सर मन में सवाल उठते हैं कि आखिर है तो यह भी फल ही फिर इस में ऐसा क्या है जो इस समय इसे खाने को मना किया जाता है।

कई घरों में इसे इतना पसन्द किया जाता है कि यह उनके दैनिक आहार में शामिल होता है । परन्तु गर्भवती और दूध पिलाने वाली माताओं के लिये पपीते का प्रयोग अक्सर नुकसानदेह साबित होता है। आइये जानते है कि आखिकार पपीते का प्रयोग इस समय क्यो वर्जित होता है।

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परिचय

प्रकृति के खजाने में हमारे उत्तम स्वास्थ्य के लिये बहुत सारे उपहार है फल और सब्जियों के रूप में उन्ही में से एक फल है “पपीता”। सभी वनस्पतियों  के पञ्चाङ्ग की तरह (जड़,तना, छाल, फूल,फल और पत्तीयों) पपीते की भी अपनी बहुत सी विशेषताएँ  है।

नाम

केरिका पापाया,यह सर्व सुलभ फल है और इसे बेहद आसानी से हमारे आसपास के बाजार में देखा जा सकता है।

पपीता
पपीता

पपीते में पाये जाने वाले गुण

यह एक नर्म फल है, जिसे काटने पर अंदर काले रँग के बीज प्राप्त होते हैं। कच्ची अवस्था मे यह हरा होता है,और पकने पर पीले रङ्ग का हो जाता है।

इसे कच्चे एवं पके हुए दोनों रूपों में खाया जा सकता है ,डायट पर रहने वाले लोगों का तो यह बेहद प्रिय फल है,यह रेशों (फाइबर) का भण्डार है,इसमें  विटामिन ए, कैल्शियम , तथा पेपेन पाया जाता है।

यह कोलेस्ट्रॉल तथा वजन को नियंत्रित रखने में बहुत बड़ी भूमिका अदा करता है ,इसलिए यह हर आयुवर्ग के लिये लाभप्रद है सिवाय गर्भवती स्त्रियों और दूध पीने वाले बच्चों के।

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प्रेगनेंसी में पपीता क्यों नहीं खाना चाहिए

कच्चा पपीता-पपीता कच्ची अवस्था मे गर्भवती स्त्री के लिये बहुत ही हानिकारक सिद्ध होता है। कच्चे पपीते को एक प्राकृतिक गर्भ निरोधक कहा गया है,इसकी तासीर काफी गर्म होती है।

कारण यह है कि इसमें लेटेक्स नाम का पदार्थ पाया जाता है जो गर्भाशय के संकुचन के लिये जिम्मेदार तत्व भी होता है,लेटेक्स गर्भवती के शरीर मे एस्ट्रोजन नाम के हार्मोन का स्राव को उत्तेजित करता है ,इसकी उपस्थिति पेट में मरोड़ उत्पन्न करती है। यही मरोड़ वजह बनती है असमय गर्भपात की।

एस्ट्रोजन ही वह तत्व है जो किसी महिला के शरीर में माहवारी को नियमित करता है। यदि गर्भवती इसका सेवन कर ले तो यह गर्भ के लिये बिल्कुल भी सुरक्षित नहीँ होता और गर्भपात का कारण बन जाता है।

इसकी वजह है पपीते में विटामिन सी और पपाइन का पाया जाना अक्सर कच्चे पपीते का प्रयोग माँस या कड़े प्रोटीन वाले भोज्य पदार्थ को मुलायम करने के लिये उसे उबलने के समय किया जाता है।

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बढ़ सकता है लेबर पेन

कभी कभी तो होने वाले शिशु में विकलांगता तक देखी गयी है। यह गर्भ को नुकसान दायक सिद्ध होते हैं,यहाँ तक कि यदि गर्भ की अंतिम तिमाही में भी यह लेबर पेन को बढ़ा सकता है। क्योंकि लेटेक्स लेबर पेन को बढ़ाने का काम करता है ,जो भावी माता और बच्चे दोनों के लिये ठीक नहीं होता ।

हाँ अगर महिला अगर गर्भवती नही है और उसे यदि पीरियड्स को रेगुलर करना हो तो उसके लिये कच्चे पपीते को पानी में उबाल कर 2 से 3 इस्तेमाल किया जा सकता है। यह पीरियड्स के दौरान रक्तस्राव को नियमित करता है।

पका पपीता-कच्चे पपीते की तुलना में पका पपीता थोड़ा कम हानिकारक साबित होता है। क्योंकि इसे पेड़ से तोड़े हुए थोड़ा समय ज़रूर हो जाता है।

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चिकित्सक का परामर्श लेकर करे सेवन

परन्तु इसके गुणों में कोई विशेष अंतर नहीं पड़ता यदि कोई पपीते को खाना ही चाहता है तो उसे पूरी तरह से पके हुए फल का ही सेवन करना चाहिये।

बहुत ज़्यादा इच्छा हो तो बहुत ही थोड़ी मात्रा में सेवन कर सकता है वह भी चिकित्सक का परामर्श लेकर।

पपीते में मौजूद ये एन्ज़ाइम बहुत छोटे बच्चों के लिये भी उपयुक्त नही होते ,इसलिए दूध पिलाने वाली माताओं और छोटे बच्चों को चिकित्सक इसको ज़्यादा खाने के लिए भी इसका प्रयोग मना करते हैं

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पपीता के बीज से गर्भपात

बच्चा गिराने के तरीके और घरेलू नुस्खों में विटामिन सी, पपीता, अन्नानास का रस, अजवायन,  तुलसी का काढ़ा, लहसून,  ड्राई फ्रूट्स, केले का अंकुर, अजमोद, गर्म पानी, कोहोश, बाजरा, ग्रीन टी, गाजर के बीज, तिल, ब्लड प्रेशर बढ़ाने वाली चीज़े, कैमोमाइल तेल, काली चाय, अनार के बीज का प्रयोग खूब किया जाता है।

अक्सर लोग पपीता का इस्तेमाल करने के बाद इसके बीजों को कूड़ेदान में डाल देते हैं ,परन्तु इसके भी अपने बहुत सारे गुण हैं जिनका हमें ज्ञान ही नहीं होता।

पपीते के बीज भी अपने मे बहुत से औषधीय गुण रखते हैं भली प्रकार पके हुए पपीते के बीजों को सुखाकर इनका इस्तेमाल बहुत सी बीमारियों के लाभ के लिये किया जाता है।

कैसे करे प्रयोग

  • पपीता के बीज से गर्भपात का उपयोग प्राकृतिक गर्भनिरोधक के तौर पर भी किया जाता है। यह आकार में काली मिर्च के समान ,स्वाद में कड़वे और लिसलिसे होते हैं।
  • इन्हीं बीजों को अच्छी तरह धोने के बाद इनको सुखाकर व पीसकर स्टोर किया जाता है। यदि कोई महिला गर्भधारण नही करना चाहती उसे इन पिसे हुए बीजों को पानी के साथ दो चम्मच ग्रहण करना चाहिये।
  • लेकिन अगर गर्भवती हो तो बिना चिकित्सक की सलाह लिये कोई भी क़दम नहीँ उठाना चहिये । यह होने वाली माता के साथ भावी शिशु के भी भविष्य का प्रश्न जो होता है।

पपीता खाने के कितने दिन बाद पीरियड आता है

कुछ डॉक्टरों का मानना ​​है कि पपीता वास्तव में गर्भवती महिलाओं के लिए एक लाभकारी फल है। पपीता चाहे कच्चा हो या पका, मासिक धर्म चक्र में कोई बदलाव नहीं करता है। यह एक मिथक है कि आप अपने मासिक धर्म की तारीख को आगे-पीछे कर सकती हैं। हालांकि, कच्चे पपीते में पाया जाने वाला पपैन नामक प्रोटीयोलाइटिक एंजाइम गर्भाशय के संकुचन और पाचन समस्याओं का कारण बन सकता है। इसलिए हम गर्भवती महिलाओं को कच्चे पपीते का सेवन बिल्कुल नहीं करने की सलाह देते हैं। हालांकि, गर्भावस्था के दौरान पका पपीता फायदेमंद हो सकता है।

Frequently Asked Questions in Hindi – सामान्य प्रश्न

क्या चीज खाने से बच्चा गिर जाता है?

कच्चा अण्डा खाने से बच्चा गिर जाता है इसमें सालमोनेला बैक्टीरिया होता है । शराब के सेवन से भी बच्चा गिर जाता है।पपीता खाने से भी मिसकैरेज हो जाता हैपपीता में लेटेक्स होता है जो यूटेराईन कंस्ट्रक्शन शुरू कर देता है ।ऐलोवेरा का सेवन करने से भी मिसकैरेज हो जाता है ।अदरक काफी भी सीमित मे प्रयोग करना चाहिये । चायनीज फूड को भी नहीं खाना चाहिए इसमें मोनो सोडियम गूलामेट होताऔर ज्यादा नमक भी जो बच्चे के लिये हानिकारक होता है।

अजवाइन से गर्भपात हो सकता है क्या?

अजवाईन में भरपूर मात्रा में प्रोटीन, फाइबर , कैल्शियम, आयरन, फैटी एसिड और पोषक तत्व होते है।जो कि पेट के लिये लाभदायक है। साथ ही इसमें बोलाटाईल ऑइल भी होता है जिससे इसकी खुश्बू तेज हो जाती है और इसकी तासीर गर्म हो जाती है इस कारण यह गर्भपात होने का खतरा रहता है तब ही इसे खाने से पहले डाक्टर की सलाह जरूर ले।। घरेलू नुस्खे के तौर पर इसे गर्भपात के लिये प्रयोग किया जाता है ।

पपीता से गर्भ कैसे गिराये?

गर्भपात के पपीते का सेवन सबसे कारगर उपायों में से एक है। पपीते से गर्भपात करवाने के लिए गर्भ ठहरने के शुरुआती हफ्तों में अधिक से अधिक मात्रा में कच्चे पपीते का सेवन करें । कच्चे पपीते में लेटेस्ट की मात्रा अधिक होती है इसके कारण गर्भाशय संकुचित हो जाता है और गर्भ गिर जाता है । इसके अलावा पपीते के बीजों का सेवन अनचाहे गर्भ धारण को रोकने के लिए कारगर उपाय है ।

बार बार गर्भपात करने से क्या होता है?

अनचाहे गर्भ से छुटकारा पाने के लिए कई जोड़े बार बार गर्भपात का सहारा लेते हैं। बार बार गर्भपात कराने से गर्भाशय ग्रीवा कमजोर हो जाती है किसी कारण अगली बार गर्भधारण करने में समस्या उत्पन्न हो सकती है। इसके अलावा महिला के शरीर में खून की कमी, इन्फेक्शन ,रक्तस्राव, संक्रमण, ऐंठन, एनेस्थेसिया से संबन्धित जटिलताएं, एम्बोलिज़्म, गर्भाशय में सूजन, एंडोटोक्सिक शॉक आदि कई सारी समस्याएं उत्पन्न हो सकती है इसलिए बार बार गर्भपात कराने के स्थान पर परिवार नियोजन के तरीके अपनाकर गर्भधारण को रोकना ही ज्यादा कारगर उपाय है ।

जानिए क्या है प्रेगनेंसी में चीकू खाने के नुकसान, कितना और कैसे खाये

प्रेगनेंसी में चीकू

गर्भावस्था में चीकू खाने के नुकसान स्पष्ट नहीं हैं। हांँ, अधपका चीकू खाने से मुंह कड़वा और गले में खुजली हो सकती है। साथ ही माउथ अल्सर का खतरा भी हो सकता है । इसके अलावा, चीकू में कैलोरी की मात्रा अधिक होती है, इसी वजह से माना जाता है कि इसे अधिक मात्रा में खाने से थोड़ा वजन बढ़ सकता है। ऐसा भी कहा जाता है कि चीकू के अधिक सेवन से पेट में दर्द और डायरिया जैसी समस्या हो सकती हैं। फिलहाल, इस संबंध में कोई सटीक वैज्ञानिक शोध या प्रमाण उपलब्ध नहीं है।

इसलिए प्रेगनेंसी में चीकू का सेवन करते समय कुछ बातों का ध्यान रखना जरूरी है-

  • हमेशा पका चीकू ही खाएं।
  • इसे खाते समय मात्रा का खास ध्यान रखें।
  • कोशिश करें कि एक ही बार में अधिक चीकू न खाएं, बल्कि दिन में दो से तीन बार में खाएं।
  • चीकू को खाते समय उसे अच्छे से छीलकर ही खाएं। जल्दबाजी में छीलते हुए कई बार फल में छिलका छूट जाता है, लेकिन ध्यान दें कि ऐसा न हो।
  • इसे छीलने से पहले अच्छे से हाथ जरूर धोएं ताकि किसी तरह का बैक्टीरियल इंफेक्शन न हो।

संतुलित मात्रा में सेवन

प्रकृति ने हमें अनमोल चीकू जैसे फल से नवाजा है। चीकू में मौजूद गुणकारी पोषक तत्व इसे खास बनाते हैं। गर्भावस्था में अधिक एनर्जी की जरूरत होती है, जिसकी पूर्ति करने में चीकू मदद कर सकता है। चीकू को एनर्जी यानी ऊर्जा का बेहतरीन स्रोत बताया जाता है। दरअसल, इसमें फ्रुक्टोज और सुक्रोज की अच्छी मात्रा होती है और यह दोनों प्राकृतिक तत्व एनर्जी बूस्टर की तरह कार्य करते हैं। इसी वजह से गर्भावस्था में होने वाली कमजोरी के एहसास को कम करने और महिला को ऊर्जावान बनाने में चीकू मदद कर सकता है।

आप इसका संतुलित मात्रा में सेवन करके इसके लाभ उठा सकते हैं। इसे खाते समय ध्यान दें कि गर्भावस्था में किसी भी चीज की अधिकता भारी पड़ सकती है। एक रिसर्च में बताया गया है कि प्रेगनेंसी के समय लिए जाने वाले आहार में चीकू को शामिल करने से मांँ और बच्चे दोनों का स्वास्थ्य बेहतर हो सकता है। दरअसल, इसमें कार्बोहाइड्रेट और एसेंशियल न्यूट्रिएंट्स होते हैं।

इसके सेवन से होने वाले लाभ के बारे में हम यहाँ बात कर सकते हैं।

पोषक तत्व

इसमें हड्डियों के लिए जरूरी कैल्शियम, आयरन, कॉपर और फास्फोरस जैसे पोषक तत्व होते हैं। ये सभी पोषक तत्व मिलकर हड्डियों को मजबूत बनाने और उनके विकास में मदद करते हैं।

स्ट्रेस यानी तनाव से छुटकारा

गर्भावस्था के समय होने वाले स्ट्रेस यानी तनाव से छुटकारा पाने में भी चीकू मदद कर सकता है। दरअसल, चीकू विटामिन-सी से समृद्ध होता है। यह विटामिन प्रतिरक्षा प्रणाली कमजोर होने व अन्य किसी वजह से हुए तनाव को दूर करने का काम कर सकता है।

रक्तचाप नियंत्रण

रक्तचाप नियंत्रण करने के तरीके में चीकू को भी शामिल कर सकते हैं। असल में चीकू मैग्नीशियम से समृद्ध होता है, जो रक्त वाहिकाओं को गतिशील बनाए रखने में सहायक हो सकता है। इसके अलावा, चीकू में पोटैशियम भी होता है, जिसे रक्तचाप और ब्लड सर्कुलेशन को संतुलित रखने के लिए जाना जाता है।

कब्ज से छुटकारा

नसीबीआई (नेशनल सेंटर फॉर बायोटेक्नोलॉजी इंफॉर्मेशन) की वेबसाइट पर पब्लिश एक वैज्ञानिक रिसर्च के अनुसार, गर्भावस्था के दौरान डाइजेशन से जुड़ी समस्या कब्ज का होना आम है। इस समस्या से छुटकारा पाने के लिए चीकू का सेवन लाभदायक हो सकता है। चीकू में फाइबर भरपूर मात्रा में होता है। यह लैक्सेटिव की तरह कार्य करके पेट से मल को बाहर निकालने और पाचन में मदद करने का काम कर सकता है।

अतः इसे फल की तरह या फ्रूट सलाद के रूप में सुबह या दोपहर के समय खा सकते हैं। इसके हलवे को मीठे के रूप में खाना खाने के बाद खाया जा सकता है।

अब सवाल ये उठता है कि कितना खाएं?

आइये आपको बताते हैं, गर्भावस्था में प्रतिदिन चीकू के सेवन की सुरक्षित मात्रा को लेकर किसी तरह की सटीक जानकारी उपलब्ध नहीं है। हांँ, ऐसा बताया जाता है कि प्रतिदिन 200 ग्राम तक चीकू का सेवन सुरक्षित हो सकता है। इस संबंध में प्रकाशित एक वैज्ञानिक शोध के मुताबिक, प्रतिदिन 5000 mg प्रति किलो वजन के अनुसार इसे लेना सुरक्षित है। इस हिसाब से 50 किलो वजन वाले 250 ग्राम तक चीकू का सेवन कर सकते हैं।

आप चाहें तो गर्भावस्था में चीकू के सेवन की सही मात्रा जानने के लिए आहार विशेषज्ञ से भी मदद ले सकते हैं।

गर्भावस्था में संतुलित भोजन का करें सेवन

गर्भावस्था में आहार

गर्भावस्था में क्या खाएं

गर्भावस्था के दौरान संतुलित भोजन का सेवन करना जरूरी होता है। गर्भवती महिला का भोजन सभी प्रकार के विटामिन्स, मिनरल्स और पोषक तत्वों से भरपूर होना चाहिए। अगर शरीर को पूर्ण रूप से विटामिन, प्रोटीन, कार्बोहाइड्रेट, वसा की मात्रा नहीं प्राप्त होती है, तो उसका सीधा असर बच्चों पर पड़ता है। इस दौरान शरीर को स्वस्थ रखने तथा बच्चे को तंदुरुस्त रखने के लिए पोषक तत्वों से भरपूर संतुलित आहार का सेवन करना जरूरी होता है।

गर्भावस्था में महिलाओं के शरीर में बहुत ज्यादा पोषक पदार्थों की खपत होती है और नियमित रूप से संतुलित भोजन का आहार करना होता है। इसके साथ ही कैल्शियम से भरपूर भोजन का आहार लेना होता है। गर्भावस्था के दौरान कई प्रकार की चीजें जैसे कॉफी चाहे कोल्ड ड्रिंक व बाहरी भोजन ज्यादा तैलीय पदार्थ इन सभी खाद्य पदार्थों से परहेज रखना जरूरी होता है।

गर्भावस्था में संतुलित भोजन का करें सेवन

संतुलित भोजन
संतुलित भोजन

गर्भावस्था के दौरान मां के शरीर के लिए कई प्रकार के विटामिंस की मात्रा की खपत होती है। और रोड के विकास और बच्चे के विकास के लिए प्रोटीन कैल्शियम वसा की मात्रा भरपूर चाहिए होती है। ऐसे में गर्भावस्था के दौरान मां को संतुलित भोजन का आहार लेना होता है।

ताकि बच्चा संतुलित वजन के साथ स्वस्थ पैदा हो गर्भावस्था के दौरान मां को संतुलित भोजन ना मिलने की वजह से कई प्रकार की बीमारियां बच्चे में हो सकती है। इसके साथ ही गर्भावस्था के दौरान माह में भी खून की कमी आ सकती है और बच्चे कुपोषण का शिकार हो सकते हैं।

महिलाएं गर्भधारण करते ही 12 हफ्तों तक लगातार संतुलित आहार लेना बहुत जरूरी होता है। इस दौरान महिलाओं में कई प्रकार की समस्याएं उत्पन्न होती है। जैसे कब्ज जी मिचलाना इत्यादि से बचा जा सकता है। पोस्टिक आहार माता और शिशु दोनों को स्वस्थ रखने में मदद करता है ।

मां के गर्भ धारण करने के पश्चात 200 से 300 कैलोरी वाला भोजन जरूरी है। अगर कोई महिलाएं काफी पतली और कमजोर है तो उन्हें गर्भावस्था के दौरान 65 ग्राम प्रोटीन भी लेना चाहिए।

गर्भावस्था के दौरान खाने में इन चीजों का करें प्रयोग

दूध से बने उत्पाद

गर्भावस्था के दौरान बच्चे के लिए सबसे अधिक प्रोटीन तथा कैल्शियम की जरूरत होती है और दूध के बने सभी उत्पाद प्रोटीन और कैल्शियम से भरपूर होते हैं। जो मां तथा शिशु दोनों को स्वस्थ रखते हैं। गर्भावस्था के दौरान माता को रोजाना ढाई सौ ग्राम दूध का सेवन अवश्य करना चाहिए। इसके साथ दूध से बने पदार्थ जैसे पनीर, दही ,छाछ आदि का सेवन भी अपने खाने में जरूर करें।

सूखे मेवे

गर्भावस्था के दौरान सूखे मेवे का प्रयोग करने से बहुत सारे फायदे देखने को मिलते हैं। सूखे मेवों में उपस्थित फाइबर माता के पाचन तंत्र को संतुलित रखते हैं इसके साथ ही बच्चे को प्रोटीन आयरन तथा कैल्शियम प्रदान करवाते हैं सुखी मेरे प्रेगनेंसी में बहुत ही फायदेमंद माने गए हैं । सूखे मेवों में काजू, बादाम, मूंगफली इत्यादि का सेवन करना चाहिए।

अंडे और मांस

अगर कोई महिला मांसाहारी है तो वह गर्भावस्था के दौरान अंडे तथा मांस का सेवन कर सकते हैं ।अंडे तथा मांस के सेवन करने से मां और बच्चे दोनों को प्रोटीन की भरपूर मात्रा प्राप्त होती है। जिससे शरीर तंदुरुस्त रहता है और बच्चा हेल्दी होता है ।

अंडे और मांस में उपस्थित विटामिन सी, विटामिन k और विटामिन ए, कैल्शियम, आयरन और पोटैशियम शरीर के सभी आवश्यक खनिज पोषक तत्वों की कमी की पूर्ति करते हैं ।

सेब और अनार

सेव और अनार में आयरन की मात्रा भरपूर उपस्थित होती है। जो गर्भावस्था के दौरान माता के शरीर में खून की कमी को दूर करता है। खून की कमी गर्भावस्था के दौरान बहुत ज्यादा देखने को मिलती है। इसीलिए सेव और अनार गर्भावस्था के दौरान माता को नियमित रूप से लेने चाहिए सेव तथा अनार में आयरन तथा फॉलिक एसिड बच्चे को तंदुरुस्त रखने में मदद करता है।

केला

गर्भावस्था के दौरान केला भी काफी फायदेमंद फल माना जाता है। हालांकि 12 हफ्तों तक केले का सेवन नहीं करना चाहिए।क्योंकि इस दौरान माता को कब्ज की समस्या होती है और ऐसे में केला खाने पर यह समस्या और ज्यादा बढ़ जाती है। परंतु 12 हफ्तों के पश्चात केले का नियमित रूप से सेवन करने से माता और बच्चे दोनों के वजन में बढ़ोतरी होती है। और केला में उपस्थित प्रोटीन कैल्शियम तथा फाइबर शरीर के लिए उपयोगी पदार्थ है।

हरी पत्तेदार सब्जियां

गर्भावस्था के दौरान माता को ज्यादातर हरी पत्तेदार सब्जियां खानी चाहिए ।हरी पत्तेदार सब्जियों में फाइबर की मात्रा अत्यधिक उपस्थित होती है।जो पाचन तंत्र को संतुलित रखते हैं और शरीर को कई प्रकार के पोषक पदार्थ जैसे फॉस्फोरस, पोटेशियम, कैल्शियम प्रदान करवाती है।

गर्भपात के लिए तुलसी का काढ़ा कैसे बनाये, कैसे होता है तुलसी के पत्तों से गर्भपात-Tulsi Se Garbhpat

गर्भपात के लिए तुलसी का काढ़ा कैसे बनाये

आजकल महिलाओं के लिए सबसे बड़ी समस्या अनचाहे गर्भ की होती है । प्रत्येक महिला चाहती है की यदि अनचाहा गर्भ ठहर गया है तो उसका निस्तारण घरेलू नुस्खों से हो जाए । यूं तो गर्भपात के लिए कई सारे घरेलू नुस्खे (bacha girane ke gharelu nuskhe) अपनाए जा सकते हैं परंतु इनमें से सबसे ज्यादा सुरक्षित और कारगर तरीका है तुलसी का काढ़ा। तुलसी के सेवन से गर्भाशय में संकुचन बढ़ने लगता है जिससे गर्भपात हो जाता है।
प्राकृतिक औषधीय गुणों से युक्त तुलसी एक बहुत ही लाभदायक जड़ी बूटी है जो हमारे घरों में आसानी से उपलब्ध होती है।
आइए जानते हैं गर्भपात के लिए तुलसी का काढ़ा कैसे बनाये, कैसे होता है तुलसी के पत्तों से गर्भपात (1 mahine ka garbhpat)-

1. तुलसी के बीजों में संकुचन को प्रेरित करने की क्षमता होती है जिससे गर्भपात हो जाता है ।

2. गर्भावस्था के दौरान अत्यधिक तुलसी का सेवन ब्लड शुगर लेवल को बहुत कम कर देता है जिसके कारण गर्भपात होता है ।

आइए जानते हैं गर्भपात के लिए तुलसी का काढ़ा कैसे बनाये (bacha girane ke gharelu nuskhe):

पहली विधि –

सामग्री

1. दो का पानी
2. 4 लॉन्ग
3. एक इंच अदरक का टुकड़ा
4. 5 से 6 काली मिर्च
5. 5 से 6 तुलसी के पत्ते
6. 1 इंच दालचीनी का टुकड़ा

गर्भपात के लिए तुलसी का काढ़ा कैसे बनाये: विधि

एक पतीले में दो कप गरम पानी चढ़ाएं। अब अदरक ,लॉन्ग ,काली मिर्च और दालचीनी का पेस्ट बनाएं । इस पेस्ट को पानी में मिलाएं और 20 मिनट तक गर्म उबलने दें । थोड़ा ठंडा करके इसे छाने और शहद मिलाएं ,तुलसी का काढ़ा तैयार है।

और पढ़ें: अनचाहे गर्भ का कैसे करें इलायची से गर्भपात

तुलसी का काढ़ा
तुलसी का काढ़ा

 

दूसरी विधि

सामग्री

1. आधा चम्मच तुलसी के बीज
2. 5 से 6 तुलसी के पत्ते साफ किए हुए
3. दो गिलास पानी
4. एक छोटी डली गुड़

गर्भपात के लिए तुलसी का काढ़ा कैसे बनाये: विधि

पतीले में दो गिलास पानी डालकर गरम करने के लिए रख दें ,फिर उसमें एक चम्मच तुलसी के बीज ,5 से 6 तुलसी के पत्ते और एक छोटी डली गुड़ डालकर अच्छे से करीब पानी चौथाई रह जाने तक उबालें उसे छानकर गरम गरम सेवन करें ।

इसके अलावा गर्म पानी के साथ आधा चम्मच तुलसी के बीजों के सेवन करने से भी अनचाहे गर्भ से छुटकारा मिल जाता है ।

सेवन की मात्रा – गर्भपात हेतु दिन में आधा कप तुलसी का काढ़ा प्रयोग किया जा सकता है इसे सुबह नाश्ते के बाद अथवा रात को सोने से पहले इसका सेवन किया जा सकता है।

और पढ़ें: अनचाहे गर्भ का अजवाइन से गर्भपात कैसे करे?

तुलसी की प्रवृत्ति गर्म होती है इसलिए इसका सेवन अधिक मात्रा में करने से बचना चाहिए आइए जानते हैं तुलसी के काढ़े का सेवन करते समय क्या क्या सावधानियां रखना आवश्यक है –

1. तुलसी में हमारे खून पतला करने की क्षमता मौजूद रहती है इसलिए यदि गर्भवती महिला खून पतला करने वाली दवाओं का सेवन कर रही है तो उसे तुलसी के काढ़े का सेवन नहीं करना चाहिए ।
2. तुलसी का उपयोग ब्लड शुगर को कम करने के लिए किया जाता है इसलिए यदि किसी महिला को लो ब्लड प्रेशर की समस्या है तो उससे तुलसी का काढ़ा नहीं लेना चाहिए।
3. मतली ,उल्टी और घबराहट आदि के लिए जाने वाली विशेष प्रकार की दवाओं का सेवन करने वाली महिलाओं को भी तुलसी के काढ़े का प्रयोग नहीं करना चाहिए ।
4. गंभीर प्रकार की बीमारियों जैसे कैंसर ,किडनी की समस्या आदि से प्रभावित महिलाओं को भी गर्भपात के लिए तुलसी के काढ़े का सेवन करने से बचना चाहिए ।

वैसे तो तुलसी के काढ़े और तुलसी के पत्तों से गर्भपात हो जाता है परंतु यदि किसी भी प्रकार की समस्या के लक्षण दिखाई दें तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।

Frequently Asked Questions in Hindi – सामान्य प्रश्न

6 महीने का गर्भ कैसे गिराए?

यदि आप अनचाहे गर्भ से छुटकारा पाना चाहती हैं तो इसके लिए शुरुआती 5से 6 हफ्ते का समय सबसे उचित रहता है इसके बाद जैसे-जैसे वक्त बढ़ता जाता है जटिलताएं बढ़ने लगती है । 6 महीने का गर्भ काफी बड़ा होता है इसलिए इसे गिराने के लिए किसी प्रकार के घरेलू उपाय ना अपनाएं यह गर्भवती के लिए अत्यंत हानिकारक हो सकता है । 6 महीने के गर्भ को गिराने के लिए डॉक्टर की मदद से ही हॉस्पिटल में गर्भपात करवाएं ।

गर्भपात के कितने दिन बाद प्रेगनेंसी टेस्ट करना चाहिए?

यदि आपने गर्भपात के लिए अबॉर्शन किट का प्रयोग किया है किया है तो ब्लीडिंग बंद होने के तीन से चार हफ्ते बाद प्रेगनेंसी टेस्ट करना चाहिए या सटीक परिणाम देता है परंतु अगर आप जल्दी परिणाम जानने की इच्छुक हैं तो आपको गायनेकोलॉजिस्ट से संपर्क करके अल्ट्रासाउंड या ब्लड टेस्ट करवाना चाहिए। इसके अलावा यदि आप गर्भपात के बाद गर्भधारण हेतु प्रयास कर रही हैं तो पीरियड मिस होने के हफ्ते भर बाद प्रेगनेंसी टेस्ट करना सही परिणाम देता है ।

बार बार गर्भपात करने से क्या होता है?

अनचाहे गर्भ से छुटकारा पाने के लिए कई जोड़े बार बार गर्भपात का सहारा लेते हैं। बार बार गर्भपात कराने से गर्भाशय ग्रीवा कमजोर हो जाती है किसी कारण अगली बार गर्भधारण करने में समस्या उत्पन्न हो सकती है। इसके अलावा महिला के शरीर में खून की कमी, इन्फेक्शन ,रक्तस्राव, संक्रमण, ऐंठन, एनेस्थेसिया से संबन्धित जटिलताएं, एम्बोलिज़्म, गर्भाशय में सूजन, एंडोटोक्सिक शॉक आदि कई सारी समस्याएं उत्पन्न हो सकती है इसलिए बार बार गर्भपात कराने के स्थान पर परिवार नियोजन के तरीके अपनाकर गर्भधारण को रोकना ही ज्यादा कारगर उपाय है ।

पपीता से गर्भ कैसे गिराये?

गर्भपात के पपीते का सेवन सबसे कारगर उपायों में से एक है। पपीते से गर्भपात करवाने के लिए गर्भ ठहरने के शुरुआती हफ्तों में अधिक से अधिक मात्रा में कच्चे पपीते का सेवन करें । कच्चे पपीते में लेटेस्ट की मात्रा अधिक होती है इसके कारण गर्भाशय संकुचित हो जाता है और गर्भ गिर जाता है । इसके अलावा पपीते के बीजों का सेवन अनचाहे गर्भ धारण को रोकने के लिए कारगर उपाय है ।

क्या चीज खाने से बच्चा गिर जाता है?

कच्चा अण्डा खाने से बच्चा गिर जाता है इसमें सालमोनेला बैक्टीरिया होता है । शराब के सेवन से भी बच्चा गिर जाता है।पपीता खाने से भी मिसकैरेज हो जाता हैपपीता में लेटेक्स होता है जो यूटेराईन कंस्ट्रक्शन शुरू कर देता है ।ऐलोवेरा का सेवन करने से भी मिसकैरेज हो जाता है ।अदरक काफी भी सीमित मे प्रयोग करना चाहिये । चायनीज फूड को भी नहीं खाना चाहिए इसमें मोनो सोडियम गूलामेट होताऔर ज्यादा नमक भी जो बच्चे के लिये हानिकारक होता है।

नोट- यह पोस्ट केवल आपकी जानकारी के लिए है, किसी भी प्रयोग या घरेलू नुस्खे से पहले डॉक्टर से सलाह जरूर लें।

क्या है बायो आयल के फायदे, जानिए कैसे करे इस्तेमाल

बायो आयल के फायदे

बायो ऑयल क्या होता है

बायो ऑयल विटामिन और मिनरल से बनता है। बायो ऑयल को ड्राई ऑयल भी कहा जाता है, जिसका मतलब है कि बायो ऑयल में चिपचिपाहट नहीं होती। हम बायो ऑयल को चेहरे पर भी लगा सकते हैं। लेकिन इससे पहले हम जानते हैं कि बायो ऑयल हम कहां प्रयोग कर सकते हैं कैसे प्रयोग कर सकते हैं और दैनिक जीवन में बायो ऑयल के क्या लाभ है? टीवी और मैगज़ीन में हमने बायो ऑयल के विज्ञापन तो बहुत देखे हैं पर ना जाने क्यों इन पर विश्वास करने का मन नहीं होता।

क्योंकि शायद हम बायो आयल के बारे में जानते ही नहीं है तो आइए आज जाने बायो आयल और उससे जुड़े बायो आयल के फायदे को।

बायो आयल के फायदे

बायो ऑयल में लैवेंडर रोजमेरी, कैलेमाइन जैसे एसेंशियल ऑयल होते हैं। बायो ऑयल में कई तरह की विटामिंस और मिनरल्स मिलाए जाते हैं। बायो ऑयल को इस्तेमाल करने से पहले लैब टेस्ट किया जाता है। बायो ऑयल को मार्केट के आने से पहले कुछ साल विशेषज्ञों की देखरेख में रखा जाता है। टीवी ,मोबाइल पर हम देख कर यह जानते हैं कि बायो ऑयल स्ट्रेच मार्क्स में जो गर्भवती स्त्रियों को गर्भावस्था के कारण आते हैं ,उनके लिए प्रयोग किया जाता है। लेकिन बायो ऑयल सिर्फ स्ट्रेच मार्क्स को ही दूर नहीं भगाता है बल्कि इसके और भी ढेर सारे फायदे होते हैं। यह त्वचा पर दाग धब्बों को दूर करता है। त्वचा को नाज़ुक कोमल बनाता है चोट से होने वाले निशान भी दूर करता है।बायो ऑयल के न केवल ढेर सारे फायदे हैं बल्कि हम यह भी कह सकते हैं कि एक ही प्रोडक्ट में ढेर सारी बेनिफिटस बायो ऑयल के जरिए हमें मिलते हैं।

बायो ऑयल कारगर है त्वचा के दाग धब्बे हटाने में-Bio Oil Uses In Pregnancy

चेहरे पर झाइयो के निशान हो या कील मुहाॅसे के निशान बायो ऑयल त्वचा के सारे दाग धब्बे हटाने में कारगर है। बायो ऑयल को रात में सोने से पहले अपने चेहरे को क्लीनिंग मिल्क से साफ करके अपने चेहरे पर बायो ऑयल की हल्की सी मसाज करें। पूरी रात त्वचा पर लगा रहने दे। कुछ ही दिनों में दाग धब्बे छू अंतर हो जाएंगे।

दाग धब्बे
दाग धब्बे

बायो ऑयल मिटाता है स्ट्रेच मार्क्स-Bio Oil Use In Pregnancy In Hindi

मां बनना हर औरत का सपना होता है पर मां बनने के बाद शरीर पर जो निशान रह जाते हैं उनसे एक स्त्री का आत्मविश्वास डगमगाने लगता है। बायो ऑयल स्ट्रेच मार्क्स के निशान हटाकर खोई हुई खूबसूरती फिर से वापस लाता हैं। स्ट्रेच मार्क्स ब्रेस्ट,हिप्स जांघ और पेट,कमर,हाथों पर गर्भावस्था में हो जाते हैं।

ऐसा नहीं है कि सिर्फ गर्भावस्था में ही स्ट्रेच मार्क्स पाये जाते हैं। वजन बढने या कम होने पर हेरेडिटी के कारण जेनेटिक प्रॉब्लम के कारण या हार्मोन रिप्लेसमेंट थेरेपी के कारण भी स्ट्रेच मार्क्स बनते हैं| स्ट्रेच मार्क्स के निशान हम पूरी तरह से गायब तो नहीं कर सकते लेकिन इन निशानों को कम जरूर किया जा सकता है स्ट्रेच मार्क्स को कम करने में बायो ऑयल काफी अच्छी भूमिका निभाता है

बायो ऑयल मिटाता है चेहरे की झुर्रियों को-Bio Oil Uses In Hindi

उम्र बढ़ने के साथ-साथ अपने चेहरे की चमक खोने लगती है और उम्र के निशान चेहरे पर दिखने लगते हैं बायो ऑयल चेहरे की झाइयों के निशान मिटाता है इसके लिए हमें रोज रात को सोते समय थोड़ा सा बायो है लिखें हल्के हाथ से मसाज करनी होगी और कुछ समय बाद ही हम देखेंगे कि हमारे दाग धब्बे और झुर्रियों धीरे-धीरे कम होने लगे है।

बायो ऑयल मिटाता है चोट के निशान को-Use Of Bio Oil In Hindi

चोट के निशान तकलीफ़ ही देते हैं। चाहे वह निशान बचपन में लगी चोट के हो या फिर खेल कूद के दौरान या किसी एक्सीडेंट के कारण चेहरे की चोट के हो। चोट के निशान शरीर की सुंदरता को कम करते हैं। ये निशान आसानी से समय के साथ मिटते ही भी नहीं है जब तक की हम उन्हें मिटाने के लिए अथक प्रयास ना करें। बायो ऑयल एक ऐसा तेल है जिसे चोट के निशान ऊपर लगाने से कुछ ही दिन में हमें लगेगा कि हमें कि हमारे निशान कहीं थे ही नहीं और धीरे-धीरे वह चोट के निशान कम होने लगेंगे।

बायो ऑयल मददगार है बालों का झड़ना रोकने में-Bio Oil Benefits In Hindi

सर पर बायो ऑयल की मसाज करने से मसाज करने से स्कैल्प का सूखापन खत्म होता है और रूसी के कारण या सर कारण झड़ने वाले बालों का झड़ना रुक जाता है बायो ऑयल दो मुंहे बालों की समस्या को दूर करता है और बालों को स्वस्थ करता है

बालों के झड़ने में
बालों के झड़ने में

बायो ऑयल एक बेहतरीन माइश्चराइजल-Bio Oil Uses In Hindi

बायो ऑयल को आप अपने माइश्चराइजर से रिप्लेस कर सकते हैं और यकीन मानिए कि बायो ऑयल आपको निराश नहीं करेगा। आपकी त्वचा की खोई हुई नमी बायो ऑयल वापस ला सकता है बस हमें नहाने के बाद बायो ऑयल की कुछ बूंदे अपने चेहरे पर लगानी है हल्के हाथों से उसकी मसाज करनी है बायो ऑयल में चिपचिपाहट नहीं होती इसलिए यह शरीर में आसानी से समा जाता है।

बायो ऑयल से कर सकते हैं अपने शरीर की मालिश-Use Of Bio Oil In Hindi

एक औरत के लिए मां बनने का सफर सबसे अनोखा होता है जिसमें वह अपनी भी पहचान भूल जाती हैं लेकिन मां बनने के बाद शरीर में कुछ कमजोरियां आ जाती है और कुछ तनाव के कारण शरीर ढीला और कमजोर हो जाता है।इन सभी समस्याओं का समाधान बायो ऑयल ही है बायो ऑयल पूरे शरीर पर एक दो बूंद लगाकर हल्के हाथ से मालिश करने से शरीर की सारी थकान दूर होती है शरीर में कसावट आती है स्ट्रेच मार्क्स के निशान दूर होते हैं यह तो हम सब जानते ही हैं।

बायो ऑयल है एक हानि रहित मेकअप रिमूवर-Bio Oil Benefits In Hindi

मेकअप करना तो सभी को अच्छा लगता है पर मेकअप रिमूव करने के लिए भी हमें केमिकल यूज करने पड़ते हैं। जिसके परिणाम स्वरूप हमारी सुरक्षा अपनी चमक खो देती है बायो ऑयल मेकअप रिमूवर का एक लाभदायक विकल्प हो सकता है मैं केवल यह बायो ऑयल मेकअप कर सकता है बल्कि चेहरे की खोई हुई चमक भी वापस लाता है।

बायो ऑयल है एक बेहतरीन लिप बाम-Bio Oil Uses In Hindi

बायो ऑयल इस्तेमाल करने से हमारे होंठ नरम और मुलायम होकर अपनी खोई हुई रंगत फिर से पा लेते हैं। हमारे होंठ केमिकल युक्त लिपस्टिक के इस्तेमाल से , धूल प्रदूषण से, सूरज की अल्ट्रावायलेट किरणों के प्रभाव से रूखे एवं काले होकर अपनी रंगत और चमक खो देते हैं। बायो ऑयल के नियमित प्रयोग से हमारे होंठ मौसम की मार से भी सुरक्षित रहते हैं।

तो अब तो आप सब जान गए होंगे की बायो ऑयल एक बहुत उपयोगी प्रोडक्ट है जिसे न केवल स्ट्रेच मार्क्स के लिए बल्कि और भी ढेर सारे फायदे के लिए जाना जाता है।

जानिए कौन कौन से है डिलीवरी के बाद मालिश के लिए सर्वोत्तम तेल

आफ्टर डिलीवरी मालिश के लिए सर्वोत्तम तेल

एक माँ जब बच्चे को जन्म देती है, बच्चे के साथ उसका भी पुर्नजन्म होता है। स्त्री की मांसपेशियां, हड्डियां, मन, शरीर सभी कुछ इस प्रोसेस बहुत बुरी तरह थक जाता है। ऐसे में अच्छा खानपान, भरपूर नींद के साथ मालिश एक ऐसी चीज़ है जो माँ के स्वास्थ्यलाभ के लिए बहुत जरूरी है। आज इस लेख में हम जानेंगे कि डिलीवरी के बाद मालिश करवाना क्यों जरुरी है और डिलीवरी के बाद मालिश के लिए सर्वोत्तम तेल कौन कौन से है।

नॉर्मल डिलीवरी के बाद मालिश करने से माँ की कमजोरी दूर होती है। सिजेरियन डिलीवरी के बाद मालिश बहुत ही सोच समझकर शुरू की जाती है। क्योंकि शरीर मे जख्म होते है। आफ्टर डिलीवरी एक मां की मालिश उसकी थकान को कम करती है और उसे बल और उर्जा भी प्रदान करती है।

डिलीवरी के दौरान स्त्री के पेट, पेड़ू और कूल्हों पर सबसे ज्यादा तनाव पड़ता है। ऐसे में जब इन हिस्सो की मालिश की जाती है तो ब्लड सर्कुलेशन बढ़ता है। तेज ब्लड सर्कुलेशन के साथ टोक्सिन फ्लश हो जाते है। हैप्पी हॉरमोन रिलीज होते है जिससे माँ मानसिक और शारीरिक दोनों तरह से आराम मिलता है।

नॉर्मल डिलीवरी के बाद तुरन्त मालिश की जा सकती है। लेकिन सिजेरियन के बाद कुछ बातों का ध्यान रखें जैसे

  • मालिश से पहले अपनी शारीरिक स्थिति अच्छे से समझ ले।
  • टांके की जगह और आसपास जैसे पेड़ू पेट पर मालिश न करवाए।
  • सिजेरियन और मालिश के बीच कम से कम 3 हफ़्तों का गैप रखें।
  • मालिश हल्के दबाव से शुरू करे।
  • हाथ पैर और पीठ की मालिश करवाए।
  • मालिश शुरू करवाने से पहले डॉक्टर से सलाह ले।
    पीठ की मालिश
    पीठ की मालिश

गलत तरीके से मालिश करवाने के साइड इफ़ेक्ट

  • मालिश से इंफेक्शन
  • त्वचा में एलर्जी

डिलीवरी के बाद मालिश के लिए सर्वोत्तम तेल

जैतून का तेल

जैतून का तेल थोड़ा भारी तेल होता है इसलिए इसकी मालिश तुरन्त शुरू न करे। इसमे उपस्थित विटामिन ई डिलीवरी के बाद लटकती स्किन, स्ट्रेच मार्क्स, और त्वचा के कालेपन को दूर करता है। जोड़ों का दर्द दूर होता है। एड़ियाँ कोमल व मुलायम होतीं हैं।

सरसो का तेल

आगर डिलीवरी गर्मियों में हुई है तो सरसो के तेल को ऐसे ही प्रयोग किया जा सकता है। लेकिन यदि डिलीवरी सर्दियों में हुई है तो सरसो के तेल में लहसुन या अजवाइन पकाकर इस्तेमाल करे।

सरसो के तेल की मालिश से बदन में कसावट आती है, दर्द कम होता है, मांसपेशियां मजबूत बनती है

नारियल का तेल

नारियल तेल की मालिश गर्मियों में फायदेमंद रहती है। ये हल्का होता है और आसानी से अब्सॉर्ब होता है, शारीरिक तनाव से बॉडी पर पड़ने वाले दाग धब्बो को दूर करने के अलावा मसल्स को बहुत आराम देता है

नारियल तेल में कपूर मिलाकर मालिश करने से इसका असर दुगुना हो जाता है।

अरंडी का तेल

अगर आप सामान्य तौर पर नहाने लगे है और आपकी डिलिवरी को कुछ समय बीत गया है तो अरंडी का तेल बेस्ट है। क्योंकि अब आपका पूरा ध्यान शरीर को वापस पुराने रूप में लाने पर होगा। ऐसे में अरंडी के तेल को रात को स्ट्रेच मार्क्स पर मल ले, सुबह नहाते समय हल्के हाथ से बाथ स्पंज से रगड़े।

लगातार ऐसा करने से स्ट्रेच मार्क्स हल्के पड़ेंगे और त्वचा चमकदार बनेगी।

बादाम का तेल

बादाम का तेल विटामिन ई से भरपूर होता है, इसकी मालिश प्रसूता स्त्री को शारीरिक रूप से आराम देती है। साथ ही बादाम का तेल प्रेग्नेंसी के दौरान खोई हुई उसकी सुंदरता लौटाता है।

बादाम तेल की मालिश से टांग में ऐंठन और सूजन पीठ के निचले हिस्से में दर्द, कंधों में अकड़न, कूल्हों में दर्द, अनिद्रा (इनसोमनिया) में आराम मिलता है।

डिलीवरी के बाद मालिश में बरते ये सावधानियां

  • अगर आपकी स्किन सेंसिटिव है या आपको पहले से ही कोई स्किन एलर्जी है तो मालिश से बचे। पहले सुनिश्चित करें कि आपकी त्वचा सम्बन्धी परेशानी दूर हो जाए।
  • पहले शरीर के कम भाग पर तेल की मालिश करवाए, अच्छे से जांच ले कि ये तेल आपको नुकसान तो नही कर रहा। तभी तेल को कंटिन्यू करे अन्यथा तेल बदल कर देखे। दूध पीते समय इससे कोई खतरा न हो।
  • कैमिकल युक्त उत्पादों से बचे जो कि स्ट्रेच मार्क्स को दूर करने का दावा करते है। इनमे उपस्थित कैमिकल और पैराबेन्स हार्मोन के कार्य को बाधित करते हैं और स्तन कैंसर या किसी अन्य कैंसर का कारण बन सकते  हैं।
  • जिन महिलाओं में उच्च रक्तचाप या हर्निया जैसी समस्या है वो मालिश के दौरान किसी भी प्रकार के अनावश्यक दबाव से बचे। हाई बीपी,अत्यधिक सूजन गंभीर सिरदर्द होने पर मालिश से बचे और डॉक्टर को दिखाए।
  • अगर आपकी मांसपेशियों पर मालिश के दौरान सघन तनाव पड़ रहा हो, तो शरीर को ठीक से सहारा देना जरूरी है।

क्यों होता है गर्भावस्था की पहली तिमाही में पेट दर्द

गर्भावस्था में पेट दर्द

गर्भावस्था के पहली तिमाही में पेट दर्द होना बहुत आम बात है। इसके कई कारण हो सकते है, गर्भावस्था मे गर्भाशय का आकार बड़ा होता है जिससे आंतों पर दबाव बढ़ता है, गर्भावस्था मे कब्ज होता है, पेट में मरोड़ उठती है। इन सबकी वजह से गर्भावस्था मे पेट दर्द होता है। गर्भावस्था के पहले माह में हल्का स्राव का अनुभव करना बहुत सामान्य है, क्योंकि अंडा स्वयं ही गर्भाशय में प्रत्यारोपित होता है। आरोपण प्रक्रिया स्पॉटिंग और ऐंठन का कारण हो सकती है।

कई बार पेट के ऊपरी हिस्से में दर्द एसिडिटी के कारण भी होता है। इस दौरान राउंड लिगामेंट के स्ट्रेचिंग के कारण भी पेट के निचले हिस्से में दर्द होता है, जो बाद में पेट से नीचे जांघ से ऊपर वाले हिस्से में भी महसूस होता है। गर्भावस्था की शुरुआत में आमतौर पर पेट दर्द चिंता का कारण नहीं होते हैं। मगर, यदि साथ में अन्य लक्षण भी हों, तो आपको मदद कि जरुरत हो सकती है।

गर्भावस्था की शुरुआत में गर्भपात हो जाना काफी आम है। दुर्भाग्यवश, पांच में से एक गर्भावस्था शुरुआत में ही समाप्त हो जाती है, क्योंकि शिशु उचित ढंग से विकसित नहीं हो रहा होता है।

गर्भावस्था की पहली तिमाही में पेट दर्द
गर्भावस्था की पहली तिमाही में पेट दर्द

पहली तिमाही में पेट दर्द के लक्षण

गर्भावस्था की शुरुआत में गर्भपात होने का सबसे आम लक्षण रक्तस्त्राव होना है। यह रक्तस्त्राव कई दिनों तक रुक-रुककर हो सकता है। आपको शायद पेट में मरोड़, और योनि से तरल और उत्तक का स्त्राव भी हो सकता है। इस बारे में डॉक्टर को बताएं। आपकी स्थिति को समझते हुए वे आपको अस्पताल या क्लिनिक आने से पहले लेटने या फिर आराम से बैठने की सलाह दे सकती हैं।

  • अगर आपको वैसा दर्द हो रहा है जैसा पीरियड्स में होता है, साथ में ब्लीडिंग भी, तो ये गर्भपात का लक्षण हो सकता है।
  • अगर गर्भावस्था मे पेट दर्द के अलावा बार-बार जलन के साथ यूरीनेशन हो रहा है तो आपको यूटीआई हो सकता है।
  • अगर पेट में दर्द लगातार है, बहुत तेज़ है और वक्त के साथ बढ़ रहा है तो मुमकिन है कि गर्भनाल गर्भाशय से बाहर निकल गई हो।
  • अगर प्रेगनेंसी के छटे से दसवें सप्ताह के बीच बहुत तेज़ दर्द और ब्लीडिंग हो तो ये ऐक्टॉपिक (ectopic) प्रेगनेंसी के लक्षण हो सकते है।

पहली तिमाही में पेट दर्द के कारण

  • पेट के ऊपरी हिस्से में दर्द, यह पसलियों के निचले हिस्से और नाभि के बीच में होने वाला दर्द हो सकता है।
  • पेट के ऊपरी हिस्से के बाईं ओर दर्द, यह पसलियों के निचले हिस्से और नाभि के बीच में होने वाला दर्द होता है, जैसे प्लीहा, पैनक्रिया का अंतिम भाग, बाईं ओर की निचली पसलियां, बाएं गुर्दे, बड़ी आंत व पेट का एक हिस्सा आदि।
  • पेट के ऊपरी हिस्से के दाईं ओर दर्द, यह दाएं निप्पल से नाभि तक होने वाला दर्द होता है। इस ओर लिवर, फेफडे़ का निचला भाग, किडनी जैसे अंग होते हैं, इस वजह से कभी-कभी यह दर्द हो सकता है।
  • पेट के निचले हिस्से में दर्द, यह नाभि से नीचे की ओर होने वाला दर्द है। यह दर्द किसी मेडिकल समस्या के चलते हो सकता है।
  • पेट के निचले हिस्से के बाईं ओर दर्द, यह निचले दाईं ओर के दर्द से ज्यादा आम है। इसका कारण किडनी का निचला हिस्सा, गर्भाशय, अंडाशय, फैलोपियन ट्यूब व मूत्राशय की बनावट हो सकती हैं।
  • पेट के निचले हिस्से के दाईं ओर दर्द, यह पेट के निचले दाएं भाग में होना वाला दर्द हो सकता है। यह दर्द हल्का भी हो सकता है और तेज भी। यह दर्द कभी-कभी बाईं ओर या पीछे की ओर भी फैल सकता है।

क्या है सटीक और असरदार तरीका मेथी से गर्भ गिराने का, मेथी से गर्भ कैसे गिराए?

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मेथी एक वनस्पति है जिसका पौधा एक फुट से छोटा होता है। इसकी पत्तियाँ साग बनाने के काम आतीं हैं तथा इसके दाने मसाले तथा दवाईं के रूप में प्रयुक्त होते हैं। स्वास्थ्य की दृष्टि से यह बहुत गुणकारी है। भारतीय आमतौर पर मेथी के पौधे का उपयोग सब्जियों या पराठों में करते हैं। मेथी दाना मेथी के पौधे के सुनहरे-भूरे रंग के बीज होते हैं। भारत में मेथी के बीज और पाउडर का उपयोग काफी सदियों से किया जा रहा है, रोजमर्रा में खाने और किसी विशेष परिस्थिति में दवाई के तौर पर इसका सेवन किया जाता है। खाने के अलावा यह साबुन और शैम्पू जैसे उत्पादों में भी पाया जा सकता है।

मेथी के फायदे

मेथी दाना(साबुत, पाउड़र,और मेथी पानी) के बहुत फायदे हैं,मेथी को मधुमेह, मासिक धर्म में ऐंठन, उच्च कोलेस्ट्रॉल और कई अन्य स्थितियों के नियंत्रण के लिए लिया जाता है।

मेथी प्राकृतिक रूप से एक एंटी-डिप्रेसेंट की तरह भी काम करती है।

मेथी फाइबर से भरी होती है । इसे आप किसी भी रूप में लें सब्जी और पराठें जो इसकी पत्तियों से बनते हैं, लड्डू जो मेथी दाने के पाउडर से बनते हैं और मेथी का पानी रात को मेथी दाना एक गिलास पानी में भिगोकर रख दे तो सुबह तैयार हो जाता है।

मधुमेह, हाई ब्लड प्रेशर और मोटापा का बहुत आसानी से इससे इलाज हो जाता है लेकिन इसकी प्रकृति शुष्क और गरम होती है इसलिए इसको गर्भावस्था में बहुत ध्यान रखते हुए एक निश्चित मात्रा में खाया जाता है।

मेथी के बीज
मेथी के बीज

प्रेगनेंसी में मेथी

  • प्रेगनेंसी में सही मात्रा में मेथी खाने से फायदा होता है, अगर आपको diabetes हो चुका हैं तो अधिक आशंका है आपको गर्भकालीन मधुमेह होने की, मेथी blood sugar कम करने में बहुत कारगर होता है।
  • ये शरीर में इंसुलिन सक्रिय कर शुगर की मात्रा कम करता हैं तथा pregnancy diabetes में सहायता करता है।
  • इसमें फोलिक एसिड भी होता है जो शिशु के मानसिक विकास में मदद करता हैं।
  • कुछ वैज्ञानिक परीकक्षणों में सामने आया, मेथी का सेवन महिलाओं में दूध उत्पादन करने वाले हार्मोन स्त्राव को बढ़ाता है।
  • ये प्रसव पीड़ा को भी कम करता है इसलिए इसका सेवन घर के बुजुर्ग और आयुर्वेदाचार्य प्रेगेनेंसी के आखिरी दिनों में कराते हैं।
  • और प्रसव के बाद तो इसका सेवन जच्चा को कराया ही जाता है जो सुरक्षित भी है, ये मासिक धर्म को सामान्य अवस्था में लाने में सहायक है।

यही कारण है कि अनचाही गर्भावस्था में भी बहुत सी महिलाएं गर्भपात करने के लिए इसका सेवन करती हैं, जो कि सुरक्षित तरीका नहीं है, और बिना चिकित्सीय देखभाल के तो इससे कईं अन्य परेशानियाँ भी हो सकती हैं लेकिन गर्भपात के घरेलू नुस्खों में मेथी का सेवन भी आम नुस्खा है।

वैज्ञानिक तौर पर ऐसा कोई पुष्टिकरण नहीं जो कहे मेथी से गर्भपात होता है बल्कि अधिक मात्रा में इसका सेवन करना, चाइल्ड डिफेक्ट और शिशु के विकास को बुरी तरह प्रभावित कर सकता हैं।

मेथी से गर्भ कैसे गिराए

सबसे पहली बात मेथी से गर्भपात नहीं होता, तथा गर्भपात के लिए इसके अत्यधिक सेवन से भी बचना चाहिए, फिर भी कुछ तरीके जो लोग मेथी से गर्भपात करने के लिए करते हैं,हम यहाँ बता रहे हैं –

मेथी पानी से गर्भपात

इसके लिए एक चम्मच मेथी के बीज ले, इसे एक गिलास पानी में रातभर भिगाए, तथा सुबह छानकर, इस पानी को आप खाली पेट सेवन करें!

मेथी पानी की तरह आप मेथी दानो का सेवन कर सकते है इसके लिए आप मेथी पानी के साथ इसके बीजों को भी खाएं।

मेथी के पत्तों का प्रयोग

आप फ्रेश मेथी के पत्तों का प्रयोग भी कर सकती हैं। इसके लिए एक मुट्ठी साफ मेथी के पत्ते लें, इसे सलाद के रूप में आप खा सकती है। कड़वाहट काम करने के लिए गुड़ के साथ सेवन करें। इन पत्तों से स्मूदी भी बनाया जाती है।

मेथी पाउडर

मेथी को पीसकर इसका पाउडर बनाए, इसे एक गिलास तरबूज रस के साथ मिलाए, थोड़ा नींबू का रस मिलाकर इसका सेवन करें। पाउड़र को गर्म दूध के साथ भी ले सकती है।

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मेथी कैप्सूल

आजकल मेथी कैप्सूल सप्लीमेंट भी आते हैं, आपको मेथी कैप्सूल बाजा़र में आसानी से मिल जाएंगे, ये कईं ब्रांड़ में उपलब्ध हैं जैसे झंडू, हिमालय, नैच़रस…आदि। इन सप्लीमेंट का उपयोग भी आप चिकत्सक की सलाह से कर सकते हैं।

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बच्चा गिराने के तरीके और घरेलू नुस्खों में पपीता, अजवायन, अन्नानास का रस, तुलसी का काढ़ा, ड्राई फ्रूट्स, लहसून, विटामिन सी, केले का अंकुर, अजमोद, कोहोश, गर्म पानी, बाजरा, गाजर के बीज, तिल, ग्रीन टी, ब्लड प्रेशर बढ़ाने वाली चीज़े, अनार के बीज, कैमोमाइल तेल, काली चाय का प्रयोग खूब किया जाता है।

गर्भपात से पहले सुनिश्चित कर लें कि क्या गर्भपात करना आवश्यक है, यहांँ आपको कुछ सावधानियां बरतने की भी आवश्यकता है –

  • 10 सप्ताह से पहले अबॉर्शन कराए, 10 सप्ताह के बाद केवल सर्जिकल अबॉर्शन होता हैं ।
  • बिना योग्य निरीक्षक के कुछ ना करें।
  • आपातकाल के लिए मेडिकल हेल्प सुनिश्चित करें,
  • जरूरत पड़ने पर डॉक्टर की सलाह लें।
  • अधूरे गर्भपात में मेडिकल हेल्प जरूर लें
  • गर्भपात बाद अपनी केयर करें।

याद रखिए ये बहुत सेंसिटिव इशू है, आप जो भी करने जा रही हैं उसके बारे में पूरी तरह से जागरूक रहें और जान का जोखिम बिल्कुल भी ना उठाये।

नोट- यह पोस्ट केवल आपकी जानकारी के लिए है, किसी भी प्रयोग या घरेलू नुस्खे से पहले डॉक्टर से सलाह जरूर लें।

काली चाय से गर्भपात, काली चाय से गर्भ कैसे गिराए?

काली चाय से गर्भपात, काली चाय से गर्भ कैसे गिराए?

काली चाय से गर्भपात – एक घरेलू उपाय?

आजकल कई महिलाएं गर्भपात के घरेलू उपायों की तलाश करती हैं, और इस सूची में काली चाय से गर्भ कैसे गिराएं एक आम सवाल बन चुका है। इस लेख में हम जानेंगे कि क्या काली चाय से गर्भपात संभव है, इसके संभावित प्रभाव, फायदे और नुकसान क्या हैं, और इस पर विशेषज्ञों की क्या राय है।

काली चाय से गर्भपात कैसे हो सकता है?

काली चाय में कैफीन की मात्रा अधिक होती है, जो अधिक मात्रा में सेवन करने पर गर्भ में संकुचन (uterine contractions) उत्पन्न कर सकती है। इसी कारण कुछ लोग मानते हैं कि यह एक संभावित गर्भ गिराने का घरेलू उपाय हो सकता है।

लेकिन यह medically approved method नहीं है, और इसका कोई वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है कि काली चाय से गर्भ 100% गिराया जा सकता है।

काली चाय से गर्भ कैसे गिराएं? – जानिए संभावित तरीका

कुछ महिलाएं खाली पेट या बार-बार काली चाय पीने का सहारा लेती हैं, यह सोचकर कि इससे गर्भ गिर जाएगा। हालांकि यह तरीका सुरक्षित नहीं है।

ध्यान दें:

  • अत्यधिक मात्रा में कैफीन गर्भस्थ शिशु के विकास में रुकावट डाल सकता है।
  • WHO के अनुसार, गर्भवती महिलाओं को 200mg से अधिक कैफीन नहीं लेना चाहिए।

क्या काली चाय से गर्भपात सुरक्षित है?

नहीं। काली चाय का अत्यधिक सेवन कई गंभीर दुष्प्रभावों का कारण बन सकता है:

⚠ नुकसान:

  • मतली और उल्टी
  • डिहाइड्रेशन
  • हाई ब्लड प्रेशर
  • गर्भाशय में असामान्य गतिविधि
  • गर्भस्थ शिशु को नुकसान

घरेलू उपाय vs डॉक्टर की सलाह

जहां कुछ महिलाएं सोचती हैं कि काली चाय से गर्भ कैसे गिराएं, वहीं विशेषज्ञों का मानना है कि किसी भी घरेलू उपाय को बिना चिकित्सकीय सलाह के अपनाना खतरनाक हो सकता है।

यदि आप अनचाहे गर्भ से परेशान हैं, तो डॉक्टर से परामर्श लें। मेडिकल एबॉर्शन एक सुरक्षित तरीका है, जो स्वास्थ्य की दृष्टि से बेहतर विकल्प होता है।

वैकल्पिक उपाय जिनके बारे में लोग सोचते हैं:

गुड़

गुड़

लेकिन इनमें से कोई भी उपाय 100% सुरक्षित या प्रभावी नहीं माना गया है।

सावधानी और निष्कर्ष

काली चाय से गर्भ कैसे गिराएं? इस प्रश्न का उत्तर यह है कि इसे घरेलू उपाय के रूप में उपयोग करना न तो वैज्ञानिक रूप से सिद्ध है और न ही सुरक्षित।

✅ बेहतर होगा कि आप विशेषज्ञ की राय लें और medically approved abortion methods पर ध्यान दें।

FAQs: अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

Q1: क्या काली चाय से गर्भपात संभव है?
A: कुछ लोग ऐसा मानते हैं लेकिन इसका कोई पुख्ता वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है।

Q2: काली चाय से गर्भ कैसे गिराएं?
A: अधिक मात्रा में सेवन करने पर गर्भ में संकुचन हो सकते हैं, लेकिन यह सुरक्षित नहीं है।

Q3: क्या ये तरीका 100% असरदार है?
A: नहीं, यह पूरी तरह से घरेलू उपाय है और स्वास्थ्य जोखिम बढ़ा सकता है।

Q4: सही विकल्प क्या है?
A: डॉक्टर से संपर्क करें और मेडिकल समाधान अपनाएं।

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