क्या आपको भी भूख न लगने की समस्या है? जानिए भूख लगने के घरेलू नुस्खे

भूख लगने के घरेलू नुस्खे

जब कोई बोलता है कि उसे भूख नही लगती तो इस बात को बहुत ही सरलता से लिया जाता है। जबकि भूख न लगना कई समस्याओं का कारण हो सकता है। बहुत से ऐसे लोग है जिनके खुलकर भूख नहीं लगती । डायजेस्टिस सिस्टम का सही से काम न करना, पेट मे कोई संक्रामक रोग हो जाना, भय, चिंता, तनाव, खून की कमी, लिवर की बीमारी इन सब कारणों से खुलकर भूख नहीं लगती।

भूख नहीं लगने का घरेलू उपाय

भोजन कितना भी स्वादिष्ट बना हो, व्यक्ति भोजन को देखते ही मुँह बनाने लगता है, वह न तो पेट भर खाता है ना मन से खाता है। शुरू में अरुचि के कारण भोजन कम करने की आदत धीरे धीरे परमानेंट हो जाती है। भूख न लगने के कारण व्यक्ति का वजन दिन ब दिन कम होने लगता है। भोजन में अरुचि, भूख न लगने के कारण या भूख कम लगने के अन्य कारण है।

भूख नहीं लगने का कारण

इमोशनल पेन, डिप्रेशन, हार्मोनल असंतुलन, बीमारियों के कारण, भोजन विकार, अरूचि पूर्ण भोजन, शारीरिक और मानसिक कमजोरी।
जब व्यक्ति को खुलकर भूख नहीं लगती तो वो खाने की प्लेट लिए बैठा रहता है, एक दो टुकड़े खाकर हट जाता है। बिना कुछ खाए ही खट्टी डकारें आने लगती है। धीरे धीरे कमजोरी आकर छोटे और साधारण कामो में भी दिक्कत होने लगती है।

भूख लगने के घरेलू नुस्खे -Bhukh Lagne Ke Gharelu Nuskhe In Hindi

आज हम आपको भूख लगने का घरेलू उपाय बतांएगे जो की बिलकुल घरेलु है, और आप आसानी से कर सकते हैं

आंवला-ज्यादा भूख लगने के लिए क्या खाएं?

आयुर्वेद में आंवले को बहुत सी चीज़ों के लिए फायदेमंद माना गया है, विटामिन सी की प्रचुरता इम्युनिटी बढ़ाती है। यह लिवर को साफ रखने में मदद करता है। आप आंवले का जूस, आंवला कैन्डी, या आंवले का मुरब्बा के रूप में ले सकते है। मुनक्का और आंवला 10-10 ग्राम को एक साथ पीसकर मुंह में रखकर चूसने से भूख लगने लगती है।

दालचीनी और सूखे आंवले को बराबर मात्रा में लेकर चूर्ण बना लें। यह चूर्ण दिन में 2 बार सेवन करे, आंवले का जूस रोज सुबह पीए। अगर आपके यहाँ आंवले का पेड़ है जिस पर फल नही हो तो आप, सुबह खाली पेट आंवला के 5-6 ग्राम पत्ते को सेंककर खूब चबा-चबाकर खाए।

अदरक-सबसे ज्यादा भूख कैसे लगती है?

अदरक को हमेशा से भूख बढ़ाने वाला माना जाता है, अदरक को कई प्रकार से इस्तेमाल किया जा सकता है जैसे अदरक के रस को निम्बू मिलाकर चाटे, इसके अलावा अदरक के टुकड़े पर सेंधा नमक लगाकर चूसे, साबुत धनिया और अदरक को कूट कर पानी मे उबाले। दिन में तीन बार इस पानी को 50 ml पिए।

नींबू-क्या खाने से भूख बढ़ेगी?

भूख बढ़ाने की दवा के रूप में नींबू का प्रयोग किया जा सकता है। निम्बू के साथ काले नमक और भुने जीरे की शिंकनजी बनाकर पिए। या फिर आधा निम्बू काटकर उसे आंच पर सेक ले, गर्म निम्बू पर भुना और पिसा हुआ जीरा व काल नमक छिड़के। इसे बून्द बून्द करके मुँह में निचोड़ लें।

नींबू के एक चम्मच रस में थोड़ी कालीमिर्च व सेंधा नमक का चूर्ण मिलाकर भोजन से पहले गर्म करके पीने से भूख खुलकर लगती है।

पीपल

पीपल के पेड़ पर आपने कभी न कभी पके फल देखे होंगे, यदि आप इन पके फलों का सेवन करते है तो आपको कफ, पित्त, रक्तदोष, विषदोष, जलन, उल्टी तथा अरूचि से मुक्ति मिलेगी और भूख भी बढ़ेगी।

3 ग्राम पीपल, 7 ग्राम टाटरी, 1ग्राम हींग, 1 ग्राम भुना हुआ सफेद जीरा और 30 ग्राम मिश्री को साथ मे पीस ले। इस चूर्ण को कम से कम दिन तीन बार आधा चम्मच ले।

मेथी-भूख ना लगे तो क्या खाना चाहिए

रात को एक चम्मच मेथी भिगो दें, सुबह मेथी फूल जाएगी, सुबह उठकर खाली पेट आधा चम्मच मेथी का सेवन करें। आप चाहे तो मेथी को छलनी में अंकुरित भी कर सकते है, इसके लिए मेथी को छलनी में भिगोए और अंकुरित होने तक पानी देते रहे। चाहे तो मेथी को घी डालकर भून लें, फिर उसे पीसकर एक कांच की शीशी में रख ले। अब इस चूर्ण को शहद के साथ मिलाकर ले।

अनार या अनारदाना-भूख कैसे बढ़ाएं

भूख बढ़ाने के अनार में जूस बहुत फायदेमंद होता है, अनार के जूस में कालानमक और भुना जीरा मिलाकर पी ले। अनारदाना भी स्वाद को बेहतर बनाकर अरुचि दूर करता है। पर याद रखें, कब्ज में अनार का इस्तेमाल सोच समझ कर करें। यह कब्ज को बढ़ा सकता है।

सेब-भूख बढ़ाने की जड़ी बूटी

रोज सुबह एक सेब का सेवन करें। आप चाहे तो कच्चे सेब की चटपटी सब्जी भी बना सकते है। अगर खाना देखकर आपका जी मिचलाता है तो सुबह खाली पेट सेब की फांक पर काला नमक और भुना जीरा डालकर खा ले।

लालमिर्च-ज्यादा भूख लगने के लिए क्या खाएं?

लालमिर्च को नींबू के रस में पीसकर लगभग आधे-आधे ग्राम की छोटी-छोटी गोलियां बनाकर रख लें। इस 1-1 गोली प्रतिदिन पान में रखकर 40 दिनों तक खाने से भूख खुलकर लगती है।

संतरा-क्या खाने से भूख बढ़ेगी?

संतरे का जूस पिये उसमे काला नमक डाल लें, संतरे को बिना जूस निकाले खाने में ज्यादा फायदा होता है। इसके अलावा फालसा, जामुन भी खाए।

इन सब उपायों के अलावा निम्न उपाय भी अपनाए

  • योगा, प्राणायाम व एक्सरसाइज करें।
  • पौष्टिक आहार और नियमित व्‍यायाम के साथ ही आप अपनी नींद पर नियंत्रण रखें। अच्‍छी भूख के लिए समय पर सोना और सुबह जल्‍दी उठना भी फायदेमंद होता है।
  • भोजन का समय निश्चित रखे।
  • मोटे आटे की रोटियां खाए।
  • खाने में पुराने चावल का इस्तेमाल करे।
  • स्विमिंग करे, मॉर्निंग वॉक करे
  • सड़ी-गली और बासी चीजें नही खानी चाहिए। गंदा पानी नहीं पीना चाहिए।
  • तनाव, डर और चिंता को दूर करे।
  • भूख न लगने का कारण ढूंढे और इलाज करवाए।

सामान्य प्रश्न

भूख बढ़ाने की जड़ी बूटी, भूख कैसे बढ़ाएं

भूख बढा़ने की जडी़ बूटी आपकी रसोई में ही मिलती है, बडी इलाइची, आंवला, इमली, अजवाइन, सौंफ, अदरक, हींग और लहसुन. .! आइये जानते हैं इन्हें कैसे प्रयोग करें, *इलायची को अच्छी तरह से पीस लें। बच्चों को इसे दूध में मिलाकर पीने को दें। * एक गिलास पानी में आंवला डालें और इसे गर्म कर लें। अब इस पानी में शहद मिलाकर बच्चे को पीने को दें। इससे पाचन शक्ति बढ़ेगी! * इमली की पत्ती की चटनी बनाकर खिलाएं। ये वातहारक होती है। * गुनगुने पानी के साथ अजवाइन पीसकर खिलाएं। यह पाचन प्रणाली पर प्रभावी तरीके से काम करता है। अजवाइन में मौजूद गुण एंटी फ्लैटुलेंस पाचन एंजाइमों के स्त्राव में भी सहायक होते हैं, जो भूख को बढ़ाते हैं। * सौंफ पाचन को भी दुरुस्त करता है। भूख बढाने को आप सौंफ और मिश्री खिला सकते हैं। * भूख बढ़ाने के लिए अदरक का रस ले सकते हैं । * डाइट में हींग और लहसुन को जरूर शामिल करना चाहिए।

भूख बढ़ाने की आयुर्वेदिक सिरप

आजकल बाजार में बहुत से सीरप हैं जो भूख बढाने के लिए दिए जाते हैं, इन्हें एप्टीवेट व एप्टिमस्ट नाम से जाना जाता है। इनके सेवन के तरीके भी इन्हीं की बोतल पर अंकित होते हैं। लेकिन ये कितने प्रमाणिक हैं ये कहा नहीं जा सकता। क्योंकि इनके बारे कोई भी रिसर्च प्रमाणिक तौर पर उपलब्ध नहीं है, इसलिए आप इन्हें जरूर आजमायें लेकिन लेने से पहले अपने डॉक्टर से जरूर सलाह लें ।
इसके अलावा कईं कम्पनियों के लीवर टोनिक भी भूख बढ़ाने के लिए दिये जाते हैं।

भूख ना लगे तो क्या खाना चाहिए , ज्यादा भूख लगने के लिए क्या खाएं? , क्या खाने से भूख बढ़ेगी?, अगर भूख ना लगे तो क्या खाएं?

आइये जानते हैं भूख बढ़ाने के कुछ आसान नुस्खें। •अदरक भूख बढानें में सहायक होता है, इसका रस भोजन से पहले आप ले सकते हैं या इसके छोटे छोटे टुकड़े काटकर नींबू के रस में भिगोकर खाने से पहले खाएं, स्वाद के लिए हल्का नमक मिला लें।• आंवले के सेवन से भी भूख बढ़ती है, इसके रस को खाली पेट पानी में ले सकते हैं, साथ में नींबू का रस और शहद मिला लें।•खाने से पहले अगर दो-तीन इलायची खूब चबा चबाकर खायी जाये तो भी भूख बढती हैं।• अजवाईन भी पाचन में बहुत सहायक से इसे भोजन से पहले ले सकते हैं, पाउडर की फोर्म में है तो गर्म पानी से ले लें या चबा चबाकर खा सकते हैं तो खा ले और फिर गुनगुना पानी पी लें।

भूख बढ़ाने के लिए योग

भूख बढा़ने के लिए योगासन बहुत लाभकारी होते हैं,आइये जानते है मुख्यतः प्रयोग होने वाले आसनों के बारे में।

* सबसे पहला और जरूरी आसन है पवनमुक्त आसन । कब्ज, अपच और गैस की परेशानी इस आसन को नियमित करने से दूर होती है।
इसे करने का तरीका है कि सीधे लेट जाएं पीठ के बल, सांस सामान्य लें, फिर एक पैर को उठाकर घुटनों से मोड़ते हुए छाती तक लाएं और घुटनों को चेहरे की ठोढी़ से लगाएं। यहीं प्रक्रिया दूसरे पैर के साथ भी करें। इसे दस बार दोहराएं।

*वज्रासन एक ऐसा इकलौता आसन है जिसे खाना खाने के बाद किया जा सकता है। घुटनों के बल बैठ जाएं और तलवों को पीछे फैलाकर एक पैर को अंगूठे को दूसरे अंगूठे पर रख दें। एड़ियों को अलग-अलग रखना है और ध्यान रहें वे कूल्हों को तलवों के बीच में रहें। इसे जितना हो सके उतनी देर करें कम से कम पांच सात मिनट तो जरूर।

*पाचन तंत्र को सहयोग करने वाला एक अन्य आसन है, शशांक आसन। इसका तरीका ये हैं कि, दाहिने पैर को मोड़कर पीछे की ओर दाहिने कूल्हे के नीचे ले जाएं। इसी तरह बाएं पैर से सेम प्रोसीज़र रिपीट करें और बैठ जाएं।फिर सांस लेते हुए दोनों हाथों को ऊपर की ओर ले जाएं। अब धीरे-धीरे सांस को बाहर छोड़ते हुए आगे की ओर झुकें। सिर को नीचे जमीन पर रख लें। अब सांस छोड़ते हुए पहले की स्थिति में वापस आएं।

भूख बढ़ाने की आयुर्वेदिक दवा, अगर भूख ना लगे तो क्या खाएं?

आयुर्वेद में भूख बढ़ाने के निम्नलिखित प्रयोग हैं- *एक गिलास पानी में 3 ग्राम पुदीना, जीरा, हींग, काली मिर्च, नमक डालकर गरम करके पीने से खाने के प्रति हमारी रुचि बढ़ती है। *खाना खाने से आधे घंटे पहले अदरक की चटनी खाएं इससे भूख ना लगने की बीमारी खत्म होती है। *धनिया, छोटी इलायची और काली मिर्च को समान मात्रा में पीसकर उसमें चौथाई चम्मच घी और चीनी मिला लें। इसके बाद इस मिश्रण को खाने से पहले खाएं। *इमली की कुछ पत्तियां लेकर इसकी चटनी बनाकर बनाकर खाने से भूख भी बढती है साथ ही खाना भी हजम होता है।

कब्ज में गुलकंद कैसे और कितना ले? क्या है कब्ज में गुलकंद के फायदे ?

कब्ज में गुलकंद के फायदे

गुलकंद का नाम आते ही, गुलाब के महकते ताजा फूल आँखों के सामने आ जाते हैं। जी हाँ गुलकंद  गुलाब की पंखुड़ियों से ही बनाया जाता है, ऐसे समझ लिजीए जैसे गुलाब का मुरब्बा। ये गुलाब के फूल की ताजी पंखुड़ियों से तैयार किया जाता हैं। मीठे स्वाद के लिए इसमें  चीनी का इस्तेमाल भी करतें हैं। ये तासीर में ठंडा होता है इसलिए इसका सेवन ज्यादातर गर्मियों में करते हैं।

गुलकंद स्वादिष्ट तो होता ही है साथ ही साथ यह –

कई खतरनाक बीमारियों से भी हम सबका बचाव करता है। मुख्यत  ये पेट पर कार्य करता है पाचन तंत्र से जुड़ी समस्याओं को दूर करता है, जिनमें कब्ज, बदहजमी और गैस मेन हैं। और  आप सब जानते ही हैं कि जब डाईजेशन सही रहता है तो अच्छी भूख लगती है, शरीर में ताकत बढ़ती है और नींद भी अच्छी आती है।

  • अपनी ठंडी प्रकृति के कारण गुलकंद आंखों की रोशनी बढ़ाने और आंखों में जलन तथा कंजेक्टिवाइटिस बीमारी में काफी लाभदायक होता है।
  • गुलकंद अपने बेहतरीन स्वाद और महकती खुशबू के कारण मूड को फ्रेश करता है तो यदि आपको सिर दर्द अथवा मूड स्विंग होने की समस्या है तो ऐसे में गुलकंद का प्रयोग लाभकारी रहेगा ।
  • अक्सर पेट में गर्मी और कब्ज के कारण मुंह में छाले हो जाते हैं ऐसे में गुलकंद का प्रयोग लाभदायक होता है गुलकंद मुंह के छालों को खत्म कर देता है।
  • गर्मी के मौसम में लू लगने अथवा शरीर में गर्मी होने पर गुलकंद का प्रयोग ठंडक प्रदान करता है।

लेकिन अब सवाल उठता है कि कब्ज में गुलकंद कैसे और कितना ले? जो आशानुरूप लाभ मिलें, तो चलिए बताते हैं कि उपयोग कैसे करें ..

  • रात में दूध के साथ थोड़ा सा गुलकंद लेते हैं, इसे दूध में घोलकर भी पी सकते हैं तो नींद अच्छी आती है और शरीर को ठंडक पहुँचती है ।
  • अगर  पानी के साथ मिलाकर इसे घूट-घूट करके पीते हैं तो एसिडिटी और बहदजमी से छुटकारा  मिलता है।
  • आपको अगर खाने के बाद मीठा खाने की आदत है तो आप गुलकंद खाइयें, इससे पाचनतंत्र को सपोर्ट भी मिलेगा और मीठे की तलब भी शांत होगी।

कब्ज में गुलकंद कैसे और कितना ले?

अगर किसी को ये समस्या है तो और आप कई तरह के नुस्खे आजमाकर थक चुके हैं तो गुलकंद का प्रयोग कीजिए । गुलाब की पत्तियों को चीनी के साथ मिलाकर बनाया गया गुलकंद पेट की हर समस्या को दूर करने की एक उपयोगी औषधि है। गुलकंद की तासीर ठंडी होती है इस वजह से यह पेट में होने वाली गर्मी को शांत करता है । खाना खाने के बाद 1 से 2 चम्मद गुलकंद जरूर लीजिए। इससे पाचन तंत्र बेहतर काम करेगा, धीरे धीरे कब्ज की समस्या में आराम मिलेगा।

आयुर्वेद के एक्सपर्ट बताते हैं कि  गुलकंद आंतों में हेल्पफुल गट बैक्टीरिया बढ़ाने में हैल्प करता है, जिससे आंतो की हैल्थ अच्छी होती है और खाना अच्छी तरह पचता है।

आप खुद ही अनुभव करेंगें कि सुंगध और मिठास से भरा गुलकंद पेट के लिए कितना फायदेमंद है। आप इसे कभी भी अपनी डाईट में शामिल कर सकते हैं,

लेकिन एक जरूरी बात ये कि जो मधुमेह के रोगी हैं वे बिना डॉक्टर की सलाह के नहीं लें। क्योंकि गुलकंद की तासीर ठंडी होती है इसलिए सर्दी, जुकाम ,अस्थमा और सांस संबंधी किसी भी प्रकार की समस्या होने पर इसका प्रयोग करने से बचना चाहिए तथा सर्दियों में गुलकंद का प्रयोग बहुत ही सीमित मात्रा में करना चाहिए।

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सामान्य प्रश्न

गुलकंद कितनी मात्रा में खाना चाहिए?

गुलकंद अपने आप में एक औषधि है। जो पेट से संबंधित अनेकों बीमारियों को दूर करती है। यदि आप नियमित रूप से एक चम्मच गुलकंद का सेवन करते है तो पेट से जुड़ी हुई समस्याओं से समाधान पाया जा सकता है। नॉर्मली गुलकंद का सेवन गर्मियों में किया जाता है।

कब्ज के लिए गुलकंद कब खाना चाहिए?

गर्मी में अक्सर लोगों के पेट से संबंधित समस्या और कब्ज की शिकायत रहती है। इस समस्या हेतु गुलकंद रामबाण का काम करता है। खाना खाने के बाद गुलकंद का सेवन करने से कब्ज की समस्या से छुटकारा तो मिलता ही है साथ ही साथ पाचन तंत्र भी मजबूत होता है।

गुलकंद का सेवन कैसे करें?

गुलकंद गुलाब की पंखुड़ियों से बनाया जाता है जो स्वादिष्ट होने के साथ सेहत के लिए भी है बेहतरीन होता है। गुलकंद का सेवन सीधा ही किया जा सकता है अन्यथा इसे पान के साथ भी खाया जा सकता है। गुलकंद का सेवन दूध के साथ करना भी लाभप्रद होगा।

क्या गुलकंद को खाली पेट लिया जा सकता है

गुलकंद को खाली पेट खाने की अपेक्षा इसे खाना खाने के बाद खाना चाहिए। खाना खाने के बाद इसका सेवन करने से यह पाचन से जुड़ी समस्याओं को दूर करता है। खाली पेट गुलकंद का सेवन करने की अपेक्षा इसे दूध से खाया जाना चाहिए।

कब्ज में गुलकंद के फायदे?

गुलकंद कब्ज और गैस बनने जैसी समस्या को दूर करता है। शरीर में अम्लों की अधिकता से भी अपच की समस्या पैदा हो जाती है ठंडी प्रकृति का गुलकंद इसे दूर करता है। शरीर में गर्मी बढ़ने से कब्ज की समस्या आ सकती है अतः गुलकंद इसे भी नियंत्रित करता है।

प्रेगनेंसी में गुलकंद खा सकते हैं क्या?

यदि प्रेगनेंसी सामान्य है और मधुमेह जैसी कोई समस्या नहीं है तो गुलकंद फायदे मंद हो सकता है। गुलकंद शरीर में अनेकों पोषक तत्वों की कमी पूरी करता है। चूंकि गुलकंद ठंडी प्रकृति का होता है। गर्मियों के समय में इसका सेवन पेट में ठंडक प्रदान करता है।

क्या गुड़ खाने से गर्भपात हो सकता है?, गुड़ सोंठ साथ खाने से गर्भपात हो सकता है क्या?

गुड़ खाने से गर्भपात हो सकता है

गर्भपात के विषय में सोच कर ही मन परेशान हो जाता है। एक बच्चे को दुनिया में आने से पहले ही मार देना। यही तो होता है गर्भपात। कभी-कभी परिस्थितियां ऐसी होती हैं कि आप चाह कर भी उस बच्चे को जन्म नहीं दे सकते। आपका परिवार पूरा हो चुका होता है और आपके परिवार में एक नए सदस्य के लिए कोई स्थान नहीं होता। यह भी हो सकता है कि आपके बच्चे खुद शादी शुदा हो या फिर उनकी शादी की उम्र हो। ऐसी स्थिति में मां बनना बहुत ही मुश्किल होता है।

कभी-कभी यह भी होता कि आपको पता ही नहीं चलता और गर्भधारण हो जाता है। कभी लड़के लड़कियां अनजाने में या आजकल के जमाने में तों जानबूझकर भी कुछ गलतियां कर लेते हैं। जिसकी वजह से लड़की को गर्भपात कराना होता है। क्योंकि शादी और बच्चे की जिम्मेदारी उठाने के लिए वह दोनों ही तैयार नहीं होते ऐसे में डॉक्टर के पास जाना और उन्हें अपनी परेशानियां बताना थोड़ा मुश्किल लगता है। उनको हिचकिचाहट के कारण या फिर परिस्थिति वश डॉक्टर के पास जाने में संकोच महसूस होता है। वे ऐसे प्राकृतिक गर्भनिरोधक की तलाश में होती हैं। जिनसे उनका गर्भपात प्राकृतिक रूप से ही हो जाए। बच्चा गिराने के तरीके और घरेलू नुस्खों में विटामिन सी, पपीता, अन्नानास का रस, अजवायन,  तुलसी का काढ़ा, लहसून,  ड्राई फ्रूट्स, केले का अंकुर, अजमोद, गर्म पानी, कोहोश, बाजरा, ग्रीन टी, गाजर के बीज, तिल, ब्लड प्रेशर बढ़ाने वाली चीज़े, कैमोमाइल तेल, काली चाय, अनार के बीज का प्रयोग खूब किया जाता है।

ऐसे ही एक प्राकृतिक गर्भनिरोधक है गुड़। सुनने में थोड़ा आश्चर्य होगा कि क्या गुड़ से गर्भपात हो सकता है? हां यह सच है, गुड़ से भी गर्भपात हो सकता है। गुड़ बहुत गर्म होता है अगर हम इसे लगातार कुछ समय तक कुछ चीजों के साथ मिला कर ले तो आसानी से गर्भपात हो सकता है। आइए यहां जानते हैं कि किन वस्तुओं को गुड़ के साथ लेने से गर्भपात हो सकता है।

क्या गुड़ खाने से गर्भपात हो सकता है?

तिल और गुड़ एवं तिल गुड के लड्डू

गुड और तिल दोनों ही काफी गर्म होते हैं। अगर इनका कुछ समय तक लगातार सेवन किया जाए तो गर्भपात आसानी से हो सकता है। आपको दो मुट्ठी तिल लेकर भूनने हैं। और उसे एक गुड़ की डली के साथ मिलाकर खाना है। आप तिल के लड्डू भी खा सकते हैं तिल के लड्डू, तिल को भूनकर कर उसे गुड़ की चासनी में डालकर बनाए जाते हैं।

आपको सोते समय दो या तीन तिल के लड्डू खाने हैं और गर्म दूध पीना है। ऐसा आपको लगातार दो या 3 दिन तक करना है जब तक कि आपको पीरियड ना आने लगे। आपको 2 या 3 दिन में ही पीरियड्स आना शुरू हो जाएंगे। आपको तब तक यह तिल और गुड़ लेना है जब तक की आपके पीरियड्स आना बिल्कुल रुक ना जाए। अर्थात आपके पेट की अच्छे से सफाई ना हो जाए।

गुड़ और सौठ का काढा-गुड़ सोंठ साथ खाने से गर्भपात हो सकता है क्या?

इस काढे को बनाने के लिए हमें एक पैन में थोड़ा सा देशी घी लेना है। और उसमें दो चम्मच जीरा डालकर भूनना है। इसमें आपको एक चम्मच हल्दी और एक चम्मच सौठ का पाउडर डालना है। जब यह अच्छी तरह से भुन जाए तब इसमें दो गिलास पानी डालना है। पानी जब खौल जाए तब इसमें आपको एक गुड़ की डली डाल देनी है। जब काढा खौल खौल कर आधा हो जाए। तब आप इसे गरम-गरम पी सकते हैं।

यह काढ़ा आपकी पीरियड्स के साथ साथ पेट की तकलीफ को भी दूर करता है। अगर आपको गैस बनती है तो गैस बनना बंद हो जाती है। इस कार्य को आपको तब तक लेना है जब तक कि आपकी पीरियड्स आने शुरू हो जाए। जब आपके पीरियड्स आने शुरू हो जाएंगे तो आप इसे लगातार लेते रहें जिससे कि आपके पेट की सारी गंदगी निकल जाए। जब आपका पेट अच्छी तरह से साफ हो जाए तब आप इस काढे को लेना बंद कर सकते हैं।

गुड़ और अजवाइन का काढ़ा 

गुड और अजवाइन दोनों ही काफी गर्म होते हैं। जब हम इन्हे एकसाथ लेते हैं तो हमारे पीरियड शुरू हो जाते हैं। अजवाइन पेट की अन्य बीमारियों को भी ठीक करने में कारगर होती है। इस काढे को बनाने के लिए आपको दो गिलास पानी गर्म करना है। उसमें एक चम्मच अजवाइन और एक गुड़ की डली डाल देनी है। जब यह काढ़ा खोलते खौलते आधा हो जाए तब आप इसे ले सकते हैं।

इस काढे को आप को सुबह खाली पेट लेना है। दोपहर में खाना खाने के बाद लेना है और रात को सोते समय लेना है। इस काढे को आप को लगातार तब तक लेना है जब तक कि आपके पीरियड्स होना शुरू नहीं हो जाते। जब आपके पीरियड्स आना शुरू हो जाए तब भी आपको इस काढे को लेते रहना है। जब आपके पीरियड आना बंद हो जाएंगे यानी कि आपकी शरीर की अच्छी तरह से सफाई हो जाएगी तब आप इस काढे को लेना बंद कर सकती हैं।

गुड़, हल्दी और काली मिर्च का काढ़ा 

यह काढ़ा काफी असरदार होता है। और इससे पीरियड आने बहुत जल्दी शुरू होते हैं। हल्दी और काली मिर्च गुड़ की तरह ही काफी गर्म होते हैं। इसका सेवन अगर दिन में तीन बार किया जाए तो बहुत जल्दी ही पीरियड आना शुरू हो जाते हैं। इसका काढ़ा बनाने के लिए आपको दो गिलास पानी लेकर उसे खौलाना है। खोलते पानी में एक चम्मच हल्दी और एक चम्मच काली मिर्च पिसी हुई डाल देनी है। इसी काढे में एक गुड़ की डली भी डाल देनी है। जब यह काढ़ा खौल खौल कर आधा हो जाए तब आप इसे पी सकते हैं।

इसे रात को सोते समय जरूर पीना है। बहुत जल्दी ही यह काढ़ा अपना असर दिखाएगा आपको इस काढे को तब तक पीना है जब तक कि आपकी पीरियड आने शुरु ना हो जाए। आपके शरीर की सारी गंदगी दूर ना हो जाए।

नोट- यह पोस्ट केवल आपकी जानकारी के लिए है, किसी भी प्रयोग या घरेलू नुस्खे से पहले डॉक्टर से सलाह जरूर लें।

अनचाहे गर्भ का सीताफल के बीज से गर्भपात कैसे करें?

सीताफल के बीज से गर्भपात

कुछ महिलाओं का समुचित उपाय करने के बाद भी गर्भधारण हो जाता है। या फिर उन्हे पता ही नहीं चलता और वे गर्भ धारण कर लेती हैं। ऐसे में बहुत मुश्किल होता है इस अनचाही स्थिति से निपटना। अगर गर्भ ठहरने का पता शुरुआत में ही लग जाए तो फिर इसको आयुर्वेदिक व प्राकृतिक उपचारों के द्वारा भी गिराया जा सकता है। हम कुछ घरेलू नुस्खे के द्वारा भी गर्भपात कर सकते हैं। बस हमें ध्यान रखना होता है कि तीन हफ्ते से ज्यादा देर न हुई हो।

बच्चा गिराने के तरीके और घरेलू नुस्खों में पपीता, अजवायन, अन्नानास का रस, तुलसी का काढ़ा, ड्राई फ्रूट्स, लहसून, विटामिन सी, केले का अंकुर, अजमोद, कोहोश, गर्म पानी, बाजरा, गाजर के बीज, तिल, ग्रीन टी, ब्लड प्रेशर बढ़ाने वाली चीज़े, अनार के बीज, कैमोमाइल तेल, काली चाय का प्रयोग खूब किया जाता है।

अगर गर्भ दो महीने से अधिक का है तो फिर उसका अबॉर्शन कराना ही ठीक है। उसमे गर्भ को एनाक्सथिसिया देकर डी एन सी के द्वारा निकाल दिया जाता है। इस प्रकिया में गर्भाशय को अच्छी तरह से साफ किया जाता है। जिससे कि गर्भाशय में कुछ भी गंदगी शेष न रह जाए।  इस प्रकिया के बहुत सारे नुकसान भी है। इसीलिए पहले हमें घरेलू उपायों को अपनानते है। इन उपायों को अपनाते समय साफ सफाई का विशेष ध्यान रखना चाहिए। इसलिए हमें घरेलु नुस्खे तब तक अपनाने चाहिए जब तक कि हमारा शरीर अंदर से अच्छी तरह साफ ना हो जाए। इन्ही घरेलु नुस्खों में एक नाम आता है सीताफल के बीज का। सुनने में थोड़ा सा अजीब लगेगा कि सीताफल के बीज से भी भला गर्भपात हो सकता है। सीताफल काफी गर्म होता है। अगर उसे अधिक मात्रा में अन्य चीजों के साथ मिलाकर लिया जाए तो उससे गर्भपात भी हो सकता है। यहां पर हम कुछ ऐसे ही उपायों की बात करेंगे जिनके कारण गर्भपात आसानी से हो सकता है।

सीताफल के बीज और पपीते के साथ- Bacha Girane Ka Gharelu Nuksa Bataiye

सीताफल के बीजो को भुनकर पीसकर पपीते के साथ खाने से गर्भपात ज्लदी हो जाता है। पपीते में लेटेक्स नामक एक पदार्थ पाया जाता है। जो यूटेराइन कान्टैक्शन का क्या काम करता है। जिसकी वजह से जब हम सीताफल के बीजों को पपीते के साथ खाते हैं तो यूट्रस में संकुचन आरंभ हो जाता है। जिसके कारण अबॉर्शन हो जाता है।

आपको इस रेमिडी को सुबह-सुबह खाली पेट और रात को सोते समय लेना होता है। जब तक आपके शरीर से सारी गंदगी बाहर ना निकल जाए। रक्त आना बंद ना हो जाए तब तक आपको इस उपाय को करते रहना चाहिए।

सीताफल के बीज और अरंडी के बीज-Garbh Girane Ka Gharelu Upay

अरंडी के बीज को तोड़ लें। अरंडी एक ब्राउन कलर के मजबूत खोल के अंदर होती है। आपको इस मजबूत खोल को खोल कर सफेद बीज निकालना होता है। आप अरंडी के सफेद बीज को निकाल  कर सीताफल के बीजों के साथ मिक्स कर ले। इसके बाद दो बीज अरंडी के और आठ दस बीज सीताफल के खालें। इसको खाने के बाद गर्म पानी पी ले कुछ समय बाद ही आपको पीरियड्स आने लगेंगे।

यह उपाय आपको तब तक करना है जब तक की आपके पीरियड रेगुलर ना हो जाए और सारी गंदगी निकल ना जाए। अरंडी एक प्राकृतिक गर्भनिरोधक का काम करती है सीताफल के बीज के साथ मिलकर इसके गर्भ निरोधी गुण काफी बढ़ जाते हैं जिसके कारण आसानी से गर्भपात हो जाता है

नीम का तेल और सीताफल के बीज-Baccha Girane Ke Gharelu Upay

नीम के तेल में सीताफल के बीज को पीसकर मिला लें। इस मिश्रण को रात को सोते समय अपनी वजाइना में लगाकर सोए। सुबह तक आपको ब्लीडिंग शुरू हो जाएगी। अगर रात में ब्लीडिंग नहीं होती तो आप सुबह भी इस मिश्रण को अपनी वजाइना में लगाएं। दो या तीन बार के उपाय से ही आपकी ब्लीडिंग शुरू हो जाएगी।

इस उपाय को आपको तब तक करना है जब तक कि आप का पेट पूरी तरह से साफ ना हो जाए। आपकी ब्लीडिंग जब तक रुक ना जाए आपको इस उपाय को करना है। नीम का तेल और सीताफल के बीज दोनों ही काफी गर्म होते हैं इन दोनों को वेजाइना में लगाने से गर्मी के कारण वैजाइना में संकुचन आरंभ हो जाता है।जिससे अबॉर्शन आसानी से हो जाता है।

अदरक का रस और सीताफल के बीज- Pregnancy Girane Ki Desi Nuksa

अदरक का रस और सीताफल के बीज दोनों मिलकर एक प्राकृतिक गर्भनिरोधक का काम करते हैं। अदरक काफी गर्म होता है और और सीताफल के बीज भी काफी गर्म होते हैं। सीताफल के बीजों को भूनकर पीसकर अदरक के रस में मिला लें। सुबह दोपहर व रात को सोते समय लेने से 2 या 3 दिनों में ही आपका गर्भपात हो जाता है।

इस उपाय को जब तक आपके पीरियड शुरू ना हो जाए तब से लेकर जब तक ब्लीडिंग रुक ना जाए तब तक करना है। ऐसा इसलिए करना होता है जिससे कि पेट की सफाई अच्छे से हो जाए। पेट के अंदर भ्रूण कोई भी हिस्सा ना रहे।  अन्यथा कुछ समय बाद पेट में दर्द शुरू हो जाएगा।  इसलिए प्राकृतिक उपायों को अपनाते समय हमें इस बात का विशेष ध्यान रखना है कि पेट की सफाई अच्छे से हो जाए। 

नोट- यह पोस्ट केवल आपकी जानकारी के लिए है, किसी भी प्रयोग या घरेलू नुस्खे से पहले डॉक्टर से सलाह जरूर लें।

यूरिक एसिड में मूली के फायदे जानकर आप भी रोज खायेंगे मूली

यूरिक एसिड में मूली के फायदे

यूरिक एसिड क्या होता है

यूरिक एसिड शरीर से निकलने वाला हानिकारक पदार्थ है। यूरिक एसिड को अगर शरीर में ही जमा होने दिया जाए तो हम अनेक बीमारियों के शिकार हो सकते हैं। गठिया, जोड़ों का दर्द, पथरी आमतौर पर मुख्य बीमारियां हैं। यूरिक एसिड शरीर में प्रोटीन की अधिकता से होता है। प्रोटीन में प्यूरीन नमक पदार्थ होता है। प्यूरीन शरीर से अगर ना निकले तो यह जोड़ों में जमा हो जाता है। जिसके कारण उठने बैठने में दिक्कत होने लगती है। प्रोटीन अगर शरीर में अधिक मात्रा में जमा हो जाता है तो फिर किडनी यूरिन को अच्छी तरह से साफ नहीं कर पाती। जिसके कारण किडनी में स्टोन बनना शुरू हो जाता है। परेशानियों से निजात पाने के लिए हम डॉक्टर के पास जाते हैं। डॉक्टर हमें दवाइयों के साथ अपने भोजन में कुछ ऐसे पदार्थों को शामिल करने की सलाह देते हैं जो कि शरीर में प्रोटीन की अधिकता को रोके। इन्हीं पदार्थों में मूली है। मूली आयुर्वेदिक गुणों का भंडार है। मूली के सेवन से कैंसर, बवासीर, डायबिटीज में फायदा होता है। तो आइए जानते हैं यूरिक एसिड में मूली के फायदे क्या है।

मूली है औषधीय गुणों से भरपूर

मूली में प्रोटीन, कैल्शियम, आयरन, आयोडीन प्रचुर मात्रा में पाया जाता है। मूली में विटामिन ए, बी, और सी पाया जाता है। ये शरीर को रोग प्रतिरोधक क्षमता बढाकर बीमारियों से बचाते हैं। मूली में फाइबर प्रचुर मात्रा में पाया जाता है। फाइबर छोटी आंत और बड़ी आंत की अच्छे से सफाई करने में मददगार होता है। जिसके कारण कब्ज नहीं होता।

मूली दूर करती है मोटापे की समस्या को

यूरिक एसिड की मुख्य वजह मोटापा ही है। मूली के पत्तों का और मूली का सेवन करने से पेट भरा भरा रहता है। जिसके कारण भूख कम लगती है, भोजन आसानी से पचता भी है। धीरे-धीरे यूरिक एसिड कम होने लगता है और व्यक्ति के शरीर में प्रोटीन का संतुलन होने लगता है। 

मूली दूर करती है पेट की समस्याओं को

हमारे शरीर में यूरिक एसिड की अधिकता होने से हमारा भोजन अच्छे से पच नही पाता। पेट की अधिकतर समस्याएं यूरिक एसिड के बिगड़ने के कारण होती हैं। यूरिक एसिड के बिगड़ने से हमारा पाचन तंत्र भी बिगड़ जाता है। मूली पाचन तंत्र को सुचारू रूप से चलाने में मुख्य भूमिका निभाती है। अगर हम खाने के बाद मूली का प्रयोग करते हैं तो यह भोजन को पचाने में सहायक होती है।

  • मूली को मिश्री के साथ खाने से एसीडिटी की समस्या दूर होती है। पाइल्स और खूनी बवासीर में मूली खाना फ़ायदेमंद होता है।
  • मूली के 20 मिली रस का सेवन 50 ग्राम गाय के घी के साथ करने से बवासीर में राहत मिलती है।
  • मूली के पत्तों को छाया में सुखाकर उसको 40 दिन तक 25 से 50 ग्राम की मात्रा में मिश्री के साथ सेवन करने से खूनी बवासीर में आराम मिलता है। 

मूत्र विकारों को दूर करती है मूली

जब शरीर में यूरिक एसिड की अधिकता होती है तो किडनी यूरिन की गंदगी को पूरी तरह से साफ नही कर पाती। यूरिक एसिड के यूरेट क्रिस्टल किडनी में जमा होने लगते हैं। जिसके कारण यूरिन खुलकर नहीं आ पाता। है। मूली के सेवन से धीरे धीरे यूरेट क्रिस्टल टूटने लगते हैं। यूरिक एसिड का बनना कम होता है। यूरिन खुलकर होने लगता है।

मूली के सेवन और मूली के पत्तों के सेवन से मूत्र विकार दूर होतें हैं। बीस तीस मिली लीटर मूली के रस के सेवन दिन मैं तीन से चार बार करने से मूत्र विकार दूर होते हैं।

किडनी में पथरी को खत्म करती है मूली

जब यूरिन में प्रोटीन के कारण प्यूरीन की अधिकता होती है तो किडनी शरीर से यूरिक एसिड को अच्छी तरह से बाहर नहीं निकाल पाती। प्यूरीन यूरेट क्रिस्टल के रूप में किडनी में जमा होने लगता है। यूरेट क्रिस्टल के जमा होने के कारण किडनी में पथरी या स्टोन बनने लगते हैं।

मूली के पत्ते पथरी निकालने में मददगार होते हैं। मूली के पत्ते का रस दिन में 3 बार पीने से पथरी पेशाब के रास्ते बाहर निकल जाती है। मूली के बीजों को भी दिन में तीन बार खाने से पथरी के रोग में फायदा होता है।

किडनी के रोगों में फायदेमंद है मूली

जब किडनी में यूरेट क्रिस्टल जमा होने लगते हैं तो धीरे-धीरे किडनी काम करना बंद कर देती है। जिसके कारण यूरिन बंद हो जाता है या धीरे-धीरे रुक रुक कर आता है। ऐसी स्थिति में मूली का रस पीने से बहुत फायदा होता है।

मूली के रस को दो-तीन बार दिन में सेवन करना चाहिए। इससे किडनी में जमा होने वाला यूरेट क्रिस्टल टूटने लगते हैं। धीरे-धीरे किडनी की समस्या दूर होने लगती है। किडनी के दर्द में भी काफी आराम मिलता है।

आप भी जानकर रह जाएंगे हैरान नाभि में नारियल तेल लगाने के फायदे

नाभि में नारियल तेल लगाने के फायदे

नाभि को आयुर्वेद के अनुसार रीढ़ की हड्डी के बाद आपका दूसरा मस्तिष्क कहा जाता है। नाड़ी हमारे शरीर का मुख्य अंग है। नाड़ी के विषय में आज भी हम ज्यादा नहीं जानते हैं बस हमें इतना ही पता है कि एक मां अपने बच्चे को अपनी गर्भनाल के द्वारा भोजन प्रदान करती है। शिशु गर्भ में गर्भनाल के द्वारा ही पोषित होता है। मां और बच्चे की गर्भनाल नाभि के द्वारा ही दूसरे से जुड़ी होती है। जब हम नाभि में कुछ लगाते हैं तो वह हमारे पूरे शरीर में रक्त नाड़ी के माध्यम से पहुंच जाता है। नारियल तेल की मालिश के फायदे के विषय में हम सभी जानते हैं कि यह हमारे बाल, त्वचा एवं आंखों के लिए अत्यंत फायदेमंद है तो आइए जानते हैं की नाभि में नारियल के तेल को लगाने का क्या फायदे हैं।

नाभि में नारियल तेल लगाने के फायदे

त्वचा को चमकदार बनाए रखता है नाभि में नारियल तेल

अगर आपकी त्वचा बेरौनक और दागदार हो रही है तो नारियल का तेल एक वरदान है। इसमें पाए जाने वाले कैल्शियम, आयरन, जिंक, विटामिन ई, विटामिन के के अनेक औषधीय गुण होते हैं। यह आपकी त्वचा को कांति प्रदान करते हैं। और आपकी स्किन को ऊर्जावान बनाते हैं। इसमें पाए जाने वाले पौष्टिक तत्व आपकी त्वचा को रिपेयर करते हैं और चेहरे पर चमक लाते हैं। जिसके कारण धीरे धीरे आपकी त्वचा का रंग निखरने लगता है।

  • नारियल के तेल को जब हम नाभि में लगाते हैं तो यह हमारी त्वचा के साथ-साथ यह हमारे पूरे शरीर को फायदा करता है।
  • नारियल के तेल को नीम के तेल में मिलाकर नाभि में लगाने से पिंपल्स दूर होते हैं।
  • जोड़ो का दर्द, हड्डियों में होने वाला दर्द नाभि में नारियल का तेल डालने से दूर होता है।

इतने सारे फायदे के लिए हमें करना ही क्या है बस जरा सा नारियल के तेल को रात को सोने से पहले अपनी नाभि में लगा लेना है।

नाभि में नारियल तेल महिलाओं के लिए अत्यंत मददगार है

महिलाओं के लिए पीरियड्स का समय बहुत कष्टकारी होता है। पेट दर्द, पेट में मरोड़ होना, ऐंठन और शरीर में एनर्जी की कमी होना ये महिलाओं की आम समस्याएं हैं इन समस्याओं से निजात पाने के लिए नाभि में नारियल का तेल अवश्य लगाना चाहिए।

नाभि में नारियल तेल आंखों की रोशनी बढ़ाता है

ज्यादा परिश्रम के कारण आपकी आंखें थकी थकी रहती हैं। देर तक पढ़ाई करने से, ज्यादा कंप्यूटर पर काम करने से आंखों में जलन , सूजन और सूखेपन की समस्या रहती है। आंखें धीरे धीरे कमजोर होना शुरू हो जाती है। ऐसी स्थिति में नारियल का तेल नाभि पर लगाना चाहिए।

  • नारियल का तेल नाभि में लगाने से आंखों की खोई हुई चमक फिर से वापस आने लगती है। अगर आपके पास शुद्ध नारियल तेल है तो आप इसे नाड़ी में डालने के साथ-साथ आंखों में भी काजल की तरह लगा सकते हैं ऐसा करने से आपकी आंखें हमेशा स्वस्थ रहोंगी।
  • नारियल के तेल को नाभि में डालते समय हल्का सा मसाज भी अवश्य करना चाहिए जिससे सारा का सारा तेल नाभि की मदद से पूरे शरीर में चला जाए।

नारियल के तेल को नाभि में रोज लगाने से आपकी आंखों की रोशनी भी धीरे-धीरे बढ़ने लगेगी।

नाभि में नारियल तेल सर्दी जुकाम भगाने में मददगार होता है

मौसम बदलने के कारण होने वाले सर्दी जुकाम या फिर सर्दी गर्मी, धूल के कारण होने वाली एलर्जी से होने वाले सर्दी जुकाम से बचने के लिए हमारे बड़े बूढ़े हमें बच्चों को नाभि में दो बूंद नारियल का तेल लगाने की सलाह देते थे।

नाभि में नारियल तेल बच्चों की रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाता है। अतः जिन लोगों को सर्दी गर्मी की समस्या है रहती है या फिर जिन लोगों को एलर्जी के कारण छींकें लगातार आती है उन्हें अपनी नाभि में नारियल का तेल लगाना चाहिए।

कुछ दिनों में ही उन्हें अंतर खुद ही पता चलने लगेगा। नाभि में नारियल तेल सर्दी जुखाम जो समस्याओं से बचाता है।

नाभि में नारियल तेल होंठों की रंगत बढ़ाता है

बालों में नारियल तेल लगाने के फायदे तो हम सब जानते है पर क्या आप जानते है कि रात को सोते समय नाभि में नारियल का तेल लगाने से आपके होठ मुलायम रहते हैं। मौसम के बदलने का सबसे ज्यादा असर हमारे होठों पर होता है। हमारे होंठ सूरज की गर्मी प्रदूषण से अपनी स्वाभाविक रंगत खोने लगते हैं।

ज्यादा गर्मी और ज्यादा सर्दी दोनों ही हमारे होठों पर अपना असर दिखाती है और हमारे होंठ फटने लगते हैं। कभी-कभी तो सर्दियों में होठों से खून भी आने लगता है। जब हम ज्यादा धूप में बाहर निकलते हैं तो हमारे होंठ किनारों से काले होते होते धीरे धीरे पूरी तरह से काले हो जाते हैं। हमारे होठों का अंदर का हिस्सा बहुत नाजुक होता है। वह धीरे-धीरे सफेद होता हुआ अपनी स्वाभाविक रंगत खो देता है। और फिर हम पूरी तरह से मेकअप पर निर्भर हो जाते हैं जोकि हमारे होठों का और नुकसान करता है।

नारियल के तेल में दाग धब्बे को दूर करने के गुण पाए जाते हैं। जब हम रोज नाभि में नारियल का तेल डालते हैं तो हमारे होठों पर जो पपड़ी जमने लगती है वह दूर होने लगती है हमारे होठों का कटना पटना बंद हो जाता है। जिसके कारण धीरे-धीरे आपके होठों का कालापन भी दूर होने लगता है।

गुणों से भरी काली हरड़ के फायदे-Kali Harad Ke Fayde In Hindi

काली हरड़ के फायदे

काली हरड़ त्रिफला मे से एक है। इसे हरीतकी के नाम से भी जाना जाता है। ये हरड़ होती तो छोटी सी है परंतु इस काली हरड़ के फायदे बहुत बड़े होते है। काली हरड़ बहुत ही गुणकारी होती है। हरीतकी का फल, छाल और जड़ तीनों ही बहुत ही लाभकारी होते हैं और इनका प्रयोग प्राचीन काल से किया जा रहा है।

काली हरड़ के फायदे-Kali Harad Ke Fayde In Hindi

नेत्र विकारों को करे दूर

जैसे जैसे इंसान ने तकनीकी उन्नति की है वैसे वैसे अब हम कम्प्युटर और मोबाइल पर निर्भर होते जा रहे है। परंतु इनका हमारी आँखों पर बहुत बुरा असर पड़ता है। इनके ज्यादा प्रयोग से कई नेत्र विकार उत्पन्न हो जाते है। ऐसे में आप काली हरड़ का प्रयोग कर सकते है। इसके लिए रात को हरड़ पानी में भिगो दें। सुबह उस पानी को अच्छे से छन लें। अब इस पानी से आँखों को धोएँ। ये आपकी आँखों को शीतलता प्रदान करता है।

कब्ज़ और गैस में मिले आराम

आज कल लोगो का खान पान ठीक न होने के कारण उन्हे कब्ज़ और गैस जैसी समस्याएँ हो जाती है। ऐसे में आप काली हरड़ का भी इस्तेमाल कर सकते है। इसके लिए भोजन करने के बाद काली हरड़ के एक टुकड़े को अच्छे से पानी से साफ कर लें। अब इसे मुंह में रख कर चूस लें। इसके नियमित प्रयोग से लाभ मिलेगा।

कब्ज
कब्ज

खांसी की समस्या से छुटकारा

खांसी और दमा की समस्या में काली हरड़ किसी रामबाण से कम नही। इसके लिए आप निंलिखित तरह से इसका प्रयोग कर सकते है।

  1. काली हरड़ के 2 से 5 ग्राम चूर्ण का हर रोज़ सेवन करें।
  2. हरड़ के चूर्ण और हल्दी पाउडर को बराबर मात्र में लें। अब इसमे 1 ग्राम मिश्री का पाउडर मिलाये। अब इस मिश्रण को हर रोज़ हल्के गुंगुने पानी के साथ लें।

पाचन को करे बेहतर

खान पान ठीक न होने के कारण अपच की समस्या होना आम बात है। ऐसे में काली हरड़ बहुत ही लाभकारी साबित होती है। काली हरड़ पाचन को बेहतर बनाने में बहुत मदद करती है। इसके लिए भोजन करने के बाद 3 से 5 ग्राम हरड़ का चूर्ण लें। अब इसमे बराबर मात्रा में मिश्री मिलाकर सेवन करें।

भूख बढ़ाए

कई बार लंबी बीमारी या तनाव के चलते हमें भूख कम लगती है। जिसका हमारे शरीर पर बुरा असर पड़ता है। ऐसे में काली हरड़ आपके लिए बहुत सहायक है। इसके लिए हरड़ का चूर्ण, सौंठ का पाउडर और सेंधा नमक के मिश्रण को ठंडे पानी के साथ लें। इसका सेवन रोज़ करने से लाभ मिलेगा।

त्वचा संबन्धित एलर्जी को रखे दूर

हरड़ त्वचा संबन्धित एलर्जी को दूर करने मे भी मददगार साबित होता है। इसके लिए हरड़ के फल को पानी में उबाल कर काढ़ा बना लें। अब इस काढ़े का सेवन दिन में दो बार ज़रूर करें। साथ ही इस काढ़े से एलर्जि वाली जगह को धोये।

मुंह की सूजन से मिले निजात

काली हरड़ मुंह की सूजन को दूर करने में भी बहुत मदद करती है। इसके लिए हरड़ को पानी में उबाल लें। अब इस पानी के थोड़े ठंडे होने पर इस पानी से गरारे करे। ऐसा नियमित रूप से करने पर मुंह की सूजन से आराम मिलेगा।

मुंह में छाले होने पर

आप मुंह के छालों को ठीक करने के लिए भी इसका प्रयोग कर सकते है। इसके लिए हरड़ को पानी मे घिस लें। अब इस लेप को अपने छालों पर लगाएँ।

कौन काली हरड़ का सेवन नहीं कर सकते

  • गर्भवती महिलाएं
  • 5 साल से कम उम्र के बच्चे काली हरड़ का सेवन करने से बचें।

फिटकरी का पानी पीने के फायदे जो जानकर चौंक जायेंगे आप

फिटकरी का पानी पीने के फायदे

फिटकरी एक ऐसी चीज़ है जो घर में आसानी से मिल जाती है। फिटकरी का इस्तेमाल या फिटकरी से पानी साफ करना प्राचीन काल से ही होता आ रहा है। आजकल फिटकरी का इस्तेमाल अक्सर शेविंग के बाद फ़ेस पर किया जाता है या गंदे पानी को साफ करने के लिए किया जाता है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि फिटकरी का पानी पीने के फायदे भी बहुत हैं। आज इस लेख में हम आपको इन्ही फ़ायदों को बारे में बताएँगे।

क्या है फिटकरी

फिटकरी एक रंगहीन क्रिस्टल होता है। इसे अँग्रेजी में एलम कहा जाता है। इसका वैज्ञानिक नाम पोटाशियम एल्युमिनियम सल्फ़ेट है। फिटकरी अलग अलग प्रकार की होती है जैसे पोटाशियम एलम, अमोनियम एलम, सोडियम एलम, क्रोम एलम, एल्युमिनियम एलम, सेलेनेट एलम।

फिटकरी
फिटकरी

कैसे बनाएँ फिटकरी का पानी

फिटकरी का पानी बनाना बहुत आसान है। फिटकरी का पानी बनाने के लिए पानी को उबाल लें। जब पानी अच्छे से उबाल जाये तब इसमे फिटकरी के टुकड़े डाल दें। जब ये टुकड़े अच्छे से पानी में पिघल जाये तब इसे गैस से उतार ले। जब ये ठंडा हो जाये तब इसे छान लें। फिटकरी का पानी तैयार है।

फिटकरी का पानी पीने के फायदे

हीमोग्लोबिन बढ़ाए

शरीर के अंदर हीमोग्लोबिन का स्तर बनाए रखना बहुत जरूरी होता है। इसकी कमी शरीर के लिए बहुत नुकसान दायक हो सकती है। अगर आपके शरीर में हीमोग्लोबिन की कमी है तो फिटकरी का पानी पीना आपके लिए बहुत लाभकारी साबित हो सकता है। फिटकरी में भरपूर मात्रा मे आयरन पाया जाता है जो शरीर में हीमोग्लोबिन की मात्रा को बढ़ाता है और उसके स्तर को बनाए रखता है।

कब्ज़ से दिलाये छुटकारा

आज कल ठीक से भोजन न करने के कारण कब्ज़ और अपच जैसी शिकायतें हो जाती हैं जिसके कारण पेट ठीक से साफ नहीं हो पाता। ऐसे में आप फिटकरी के पानी का सेवन कर सकते है। फिटकरी का पानी पीने से पाचन शक्ति मजबूत होती है जिससे भोजन जल्दी पच जाता है और कब्ज़ की शिकायत दूर होती है।

विषैले पदार्थों को शरीर से निकाले बाहर

फिटकरी का पानी पीने से शरीर में मौजूद विषैले पदार्थ भी बाहर निकल जाते है। फिटकरी आपके रक्त को साफ रखती है और विषैले पदार्थों को शरीर से बाहर निकाल देती है जिस कारण आपकी त्वचा भी साफ और सुंदर हो जाती है तथा आपकी त्वचा पर चमक आ जाती है।

एसिडिटी की समस्या को करे दूर

अगर आपको एसिडिटी और पेट फूलने की समस्या है तो आप फिटकरी का पानी पी सकते हैं। फिटकरी का पानी शरीर में ज्यादा उत्पन्न हुए एसिड की मात्रा हो कम करने में मदद करता है जिससे आपको एसिडिटी नहीं होती और फूला हुआ पेट भी कम हो जाता है।

इम्यूनिटी पावर बढ़ाए

कई लोग बहुत जल्दी बीमार पड़ जाते हैं। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि उनका इम्यून सिस्टम इतना मजबूत नहीं होता। इस कारण से उनका शरीर बीमारी से अच्छे से लड़ नही पाता और मौसम के बदलते ही वो बीमार हो जाते हैं। अगर आप भी जल्दी बीमार पड़ जाते हैं तो आप फिटकरी के पानी की सेवन कर सकते हैं।

फिटकरी का पानी आपकी इम्यूनिटी पावर को बढ़ाता है। जिससे आपके शरीर को बीमारियों से लड़ने की ताकत मिलती है और आप स्वस्थ रहते है। इसके सेवन से आप जल्दी बीमार भी नहीं पड़ते।

जानिए कैसे करे उपयोग ताकि मिले भरपूर कची हल्दी के फायदे

कची हल्दी के फायदे

कच्ची हल्दी रोगियों के लिए बहुत फ़ायदेमंद होती है। कच्ची हल्दी में इन्सुलिन का स्तर कम करने का गुण होता है। कच्ची हल्दी रोग पैदा करने वाले फ्री रेडिकल्स जो शरीर के प्राकृतिक सेल्स को नष्ट करते है उनको शरीर में पनपने नहीं देती। कची हल्दी के फायदे ढेर सारे होते हैं। कच्ची हल्दी का उपयोग चेहरे की सुंदरता निखारने के साथ साथ शरीर की कई बिमारियों से बचने के लिए भी किया जाता है।

सर्दी जुकाम के लिए एक चुटकी हल्दी ही जादू का काम करती है। कोरोना काल में तो हम सभी ने हल्दी के औषधीय गुण देखे ही हैं। तो आइये जानते है कच्ची हल्दी के गुणों को।

कच्ची हल्दी कैसी होती है

कच्ची हल्दी अदरक की तरह गांठ जैसी है इसमें वोलाटाइल नामक तेल पायाा जाता है जिसमे रोग प्रतिरोधक गुण होते है जो कैंसर जैसी बीमारी पर भी भी प्रभाव हैं। कच्ची हल्दी के औषधीय गुण हल्दी पाउडर की तुलना में कहीं अधिक होते  हैं। कच्ची हल्दी से निकलने वाला पीला रंग हल्दी पाउडर की तुलना में अधिक गड़ा होता है

कची हल्दी के फायदे-Kachi Haldi Ke Fayde

कच्ची हल्दी लाभकारी है इम्युनिटी बूस्टर में-Haldi Khane Ke Fayde

कची हल्दी एक प्राकृतिक इम्युनिटी बूस्टर है। कच्ची हल्दी हमारे शरीर को रोगों से लड़ने की शक्ति प्रदान करती है। इसका एक मुख्य घटक लिपोपोलीसेकराइड होता है जिसमे एन्टीवैक्टीरियल एंटीफंगल एंटीवायरल गुण पाए जाते हैं। जो शरीर की रोग प्रतिरोध क्षमता को बढ़ाते हैं। जिसके कारण कच्ची हल्दी बुखार से लेकर गले के दर्द व घुटनों के दर्द में सामान रूप से उपयोगी होती है।

कच्ची हल्दी रखे स्वस्थ पाचन तंत्र को-Haldi Ke Fayde

कच्ची हल्दी में मौजूद क्यूरक्युमिन नामक अव्यय पित्त उत्पादन को एक्टिवेट करता है। पित्त की अधिकता से खाना जल्दी से पच जाता है। पाचन क्रिया सुचारू रूप से होने के कारण पेट में सूजन और गैस की समस्या नहीं होती।

पाचन क्रिया करे दुरुस्त
पाचन क्रिया करे दुरुस्त

कच्ची हल्दी डाइबिटीज में भी है लाभकारी-Haldi Ka Upyog

कची हल्दी के सेवन से भोजन का पाचन अच्छे से होता है। कच्ची हल्दी इन्सुलिन के स्तर को संतुलित करती है। इन्सुलिन की अधिकता या कमी ही शुगर जैसी बीमारी की वजह होती है जब शरीर में इन्सुलिन की मात्रा संतुलित होती है तो डायबिटीज़ अर्थात शुगर भी कंट्रोल में रहती है।

कच्ची हल्दी उपयोगी है त्वचा व चेहरे के लिए-Kachi Haldi Benefits For Skin In Hindi

कच्ची हल्दी के चेहरे एवं शरीर पर उपयोग से त्वचा निखरती है। कच्चे दूध या दही के साथ बेसन और हल्दी मिलाकर लगाने से त्वचा की टैनिंग दूर होती है एवं त्वचा एवं चेहरे पर निखार आता है।

कच्ची हल्दी का प्रयोग दादी नानी उबटन में सदियों से करती आयी हैं। दुल्हन का रूप निखारने के लिए भी उसे कच्ची हल्दी ही लगायी जाती है।

कच्ची हल्दी फायदेमंद है दिल के लिए-Haldi Ke Gun

कच्ची हल्दी को आर्युवेद में ओषधि के रूप में प्रयोग किया जाता है। कच्ची हल्दी के निरंतर सेवन से शरीर के हानिकारक टोक्सिन बाहार निकल जाते हैं जिससे ब्लड सर्कुलेशन अच्छा होता है और धमनियों एवं शिराओ में बहने वाला रक्त गाड़ा नहीं होता एवं रक्त का परभाव सुचारू रूप से होता है।

दिल की बीमारियां काफी हद तक कम हो जाती हैं विज्ञान मे रिशर्च द्वारा भी प्रूव हुआ है कि हल्दी वाले दूध के सेवन से सर्जरी के बाद होने वाले हार्ट अटैक की दर दर में कमी आयी है। कच्ची हल्दी कोलेस्ट्रॉल के लेवल को संतुलित करने में उपयोगी होती है।

कच्ची हल्दी फायदेमंद है त्वचा के रोगों में-Kachi Haldi Benefits For Skin In Hindi

कच्ची हल्दी में एंटीसेप्टिक एवं एंटी बैक्टीरियल गुण पाए जाते हैं जो सोरायसिस जैसे त्वचा रोगों से बचाव करती है। चेहरे की झाइयों को दूर करने के लिए कच्ची हल्दी को पीस कर खीरे के रस के साथ मिलकर चेहरे पर लगाने से चेहरे की झाइयां दूर होती हैं। चर्म रोगों मे कच्ची हल्दी व आवले का रस मिलकर पीने से लाभ मिलता है।

कच्ची हल्दी में एंटीऑक्सीडेंट के गुण पाए जाते हैं जो त्वचा पर पड़ने वाली झुर्रियों व पिग्मेन्टेशन को रॉकने में प्रभावी हैं.

कच्ची हल्दी गुणकारी है अस्थमा में-Haldi Ke Labh

अस्थमा
अस्थमा

एक चौथाई चम्मच कच्ची हल्दी को आधा चम्मच शहद मिलकर खाने से अस्थमा में तत्काल लाभ मिलता है। कच्ची हल्दी का एक छोटा टुकड़ा मुँह में लेकर चूसने से लगातार रूक रूक कर होने वाली खाँसी में रहत मिलती है। जुकाम व खांसी होने पर गरम दूध में सोंठ पाउडर व कच्ची हल्दी का पाउडर डाल कर पीने से जुकाम व खासी दूर होती है।

कच्ची हल्दी लाभकारी है चोट में-Haldi Ke Faide

कच्ची हल्दी सरसों के तेल में गर्म करकेअगर चोट पर लगाई जाये तो वह घाव को पकने नहीं देती अंदरूनी चोट में गर्म दूध में हल्दी मिलकर पीने से चोट जल्दी ठीक होती है। कच्ची हल्दी, खाने वाला चूना व शहद मिलाकर चोट या मोच की जगह पर लगाने से चोट एवं मोच तुरंत ठीक होती है।

कच्ची हल्दी है रक्त शोधक-Kachi Haldi Benefits For Skin

कच्ची हल्दी में एंटीसेप्टिक व एन्टीबैक्टिरीअल गुण पाए जाते हैं जिसके कारण कच्ची हल्दी खून को साफ़ करती है व रक्त की अशुद्धि के कारण कील मुहांसों व फोड़े फुंसियों को दूर करती हैं। कच्ची हल्दी में मुहांसों की सूजन दूर करती है हल्दी तैलीय त्वचा की अतिरिक्त चिकनाहट को दूर कर त्वचा को स्निगध बनती है। आटा शहद दूध व कच्ची हल्दी का फेस पैक त्वचा को कांतिमान बनता है।

कच्ची हल्दी गुणकारी है गठियां में-Kachi Haldi Ke Fayde

कच्ची हल्दी का नियमित सेवन करने से रोगी को जोड़ों के दर्द से राहत मिलती है। कच्ची हल्दी गठिया के रोगी की जोड़ों की सूजन को कम करने में कारगर होती है। कच्ची हल्दी में मौजूद एंटीऑक्सीडेंट शरीर में हानिकारक रेडिकल्स को नष्ट करने में सहायक होते हैं।

कच्ची हल्दी है मासिक धर्म में उपयोगी-Haldi Khane Ke Fayde

कच्ची हल्दी सुबह सुबह पानी या दूध के साथ लेने से मासिक धर्म के समय होने वाले दर्द व ऐठन से राहत मिलती है एवं पीरियड भी नियमित होते हैं।

कच्ची हल्दी बढ़ाये याददाश्त-Haldi Ke Fayde In Hindi

कच्ची हल्दी में मौज़ूद टारमरों नमक अव्यय मस्तिष्क की कोशिकाओं की मरम्मत में मददगार होता है जो मानसिक बिमारियों की संभावनाओं को कम करता है। यह मस्तिष्क में प्लाक के गठन को रोकता है जिससे मस्तिष्क में रक्त एवं ऑक्सीजन का प्रवाह सुचारू रूप से होता है।

कच्ची हल्दी लाभकारी है कैंसर में-Haldi Ke Fayde

कच्ची हल्दी में मौजूद करक्यूमिन नमक घटक ट्यूमर सेल्स के प्रसार को काम करने एवं उन्हें बनने से रोकने में सक्षम होता है यह प्रोस्टेट ,स्तन व लंग्स कैंसर से बचाव में सहायक होता है।

तो इस तरह से आप सभी ने देखा की एक छोटी सी कच्ची हल्दी की गांठ में कितने सरे फायदे छुपे होते हैं तो फिर हो जाइय शुरु कच्ची हल्दी को अपने घर अपने रसोई घर में जगह देने के लिए।

जानिए क्या है नाभि में नारियल का तेल लगाने के नुकसान

नाभि में नारियल का तेल लगाने के नुकसान

नारियल के तेल के फायदें से तो हम सभी वाकिफ हैं लेकिन क्या आप जानते हैं कि नाभि में नारियल का तेल लगाना नुकसान भी दे सकता है। जी हां बिल्कुल सही सुना आपने नाभि में नारियल का तेल लगाने के नुकसान भी हैं। जैसा कि आप सभी जानते हैं अति सर्वत्रे वर्जित तो फिर कहीं ऐसा तो नहीं कि हम कुछ ऐसा ही कर रहे हैं। हम जिस नारियल तेल को अपनी नाभि में फायदे के लिए लगा रहे हैं वह हमें फायदे के बजाय नुकसान पहुंचा रहा है।

वैसे तो नारियल का तेल नाभि में लगाने के बहुत सारे फायदे है लेकिन अगर हम कुछ बातों का ध्यान न रखें तो इसके नुकसान भी कम नहीं है। तो आइए जानते हैं कि नाभि में नारियल तेल लगाने के क्या क्या नुकसान है।

नाभि में नारियल का तेल लगाने के नुकसान

नाभि में नारियल का तेल नुकसानदायक है सूखी त्वचा वालों के लिए

आमतौर पर हम सभी को लगता है कि अगर ड्राई स्किन वाले नाभि में नारियल का तेल लगाएंगे तो उनकी स्किन ग्लो करने लगेगी, लेकिन ऐसा है नहीं नारियल का तेल ड्राई स्किन पर फायदा नहीं कर पाता। यह ड्राई स्किन को पोषण नहीं प्रदान कर पाता वैसे तो नारियल का तेल त्वचा को नमी प्रदान करता है और यह शरीर के अंदर अच्छी तरह से पोषण देता है। ड्राई स्किन नारियल के तेल को अच्छी तरह से अपनी त्वचा में सोख नहीं पाती है। ड्राई स्किन के ऊपर नारियल के तेल की परत बन जाती है।

नाभि में नारियल के तेल से होते हैं मुहासे

अगर आप नाभि में नारियल का तेल लगाते हैं तो यह आपके पूरे शरीर को नमी प्रदान करता है। कुछ प्रकार की त्वचा में यह नमी मुहांसों का कारण बनती है। अगर आपकी त्वचा जरूरत से ज्यादा मास्चराइज है और आप ऐसी त्वचा को और अधिक नमी प्रदान कर रहे हैं तो यह आपकी त्वचा में पोषण का कारण तो बिल्कुल नहीं बनेगी बल्कि आपके त्वचा को तैलीय बना देगी। तैलीय त्वचा में कील- मुंहासे, ब्लैकहेड जल्दी होते हैं। नाभि में नारियल का तेल मुंहासें, गंदगी और ब्लैक हेड्स, व्हाइट हेड्स का कारण बन जाती है।

नाभि में नारियल का तेल लाता है चेहरे पर अवांछित बाल

हम सभी को चेहरे पर बाल बिल्कुल भी पसंद नहीं होते। हम सभी चाहते हैं कि हमारी त्वचा चिकनी और हेयरलैस हो अगर बात चेहरे की आती है तो हम एक भी बाल चेहरे पर नहीं चाहते। लेकिन जब हम नाभि में नारियल का तेल लगाते हैं तो धीरे-धीरे हमारे चेहरे पर बाल आने लगते हैं।

नाभि में नारियल का तेल पैदा करता है पेट की समस्या

नाभि में नारियल का तेल आमतौर पर फ़ायदेमंद होता है। गर्मियों में नारियल का तेल काफी गर्म होने के कारण और फैटी एसिड व वसा युक्त होने के कारण गैस और कब्ज की समस्या पैदा करता है। नाभि में नारियल का तेल अगर हम गर्मियों में भी कभी कभार लगाते हैं तो यह हमारे लिए फायदेमंद है लेकिन अगर हम रोज गर्मियों में अपनी नाभि में नारियल का तेल लगाते हैं तो यह काफी नुकसानदायक भी हो सकता है।

नाभि में नारियल तेल लगाने से हो सकती है एलर्जी

नारियल का तेल काफी गर्म होता है अगर हम इसे रोज लगाते हैं या गर्म मौसम में या फिर मानसून के मौसम में अपनी नाभि पर लगाते हैं तो यह हमारे लिए काफी नुकसानदायक हो सकता है। इससे हमारी त्वचा पर दाने व रैसेज हो सकते हैं। हमारी त्वचा लाल हो सकती है।

इसलिए नाभि में रोज नारियल तेल लगाना अवॉइड करना चाहिए। हम यह तो नहीं कह सकते कि नाभि में नारियल तेल लगाना फायदेमंद नहीं है। हम कुछ सावधानियों का ध्यान न रखें तो यह काफी नुकसानदायक हो सकता है। तो आइए जानते हैं कि नाभि में नारियल का तेल लगाते समय किन सावधानियों को ध्यान रखें।

रोज न लगाएं नाभि में नारियल का तेल

नाभि में नारियल का तेल गर्मियों में रोज न लगाएं नारियल का तेल काफी फायदेमंद होता है लेकिन विशेषकर सर्दियों में जब हम गर्मियों में नारियल कर रोज की नाभि पर लगाते हैं हमारे शरीर में काफी गर्मी पैदा करता है जिसके कारण हमें कई परेशानियों का सामना करना पड़ता है कील मुंहासे, एलर्जी, तैलीय त्वचा यह सब इसी के दुष्परिणाम है।

नाभि में नारियल का तेल लगाते समय साफ सफाई का विशेष ध्यान रखें

जब आप तेल लगाते हैं तो उससे पहले आपको अपनी नाभि को अच्छे से धो लेना चाहिए और उसके बाद उसे सूती कपड़े से पोछकर सुखा देना चाहिए। जब आप रोज नाभि में नारियल का तेल लगाते हैं और साफ सफाई का ध्यान रखने पर यह धीरे धीरे गंदगी के रूप में इकट्ठा होने लगता है। जिससे हमारे नाभि के आस पास दाने, फोड़े फुंसी होने लगते हैं कभी-कभी स्थिति ऐसी हो जाती है कि हमें ऑपरेशन भी कराना पड़ता है अतः अगर हमें नाभि में नारियल का तेल डालना है तो हमें नाभि को अच्छी तरह से साफ भी करना चाहिए।

अच्छी क्वालिटी का नारियल तेल प्रयोग करें

आजकल मिलावट का समय है ऐसे में नारियल के तेल में पाम आयल डालना या पैराफीन आंँयल डालना एक आम बात है तो हमें कोशिश करनी चाहिए कि हम उत्तम गुणवत्ता वाला ही नारियल का तेल प्रयोग में लाएं। हम मार्केट से या आयुर्वेदिक दुकानों से इस तेल को खुदरा भी खरीद सकते हैं। नारियल का तेल पारदर्शी होता है और नए-नए नारियल तेल में ज्यादा खुशबू नहीं होते जैसे जैसे वह पुराना होता जाता है नारियल के तेल की खुशबू बहुत तीखी होने लगती है हमें पुराना नारियल तेल नाभि में प्रयोग में नहीं लाना चाहिए।

किसी सर्जरी के बाद न प्रयोग करें नाभि में नारियल का तेल

आप ही कोई सर्जरी हुई हो या तेज हाथों से नाभि में मसाज करते हुए नारियल का तेल न लगाएं यह आपको नुकसान भी पहुंचा सकता है।

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