जानिए क्या है लिव 52 के फायदे

लिव 52 के फायदे

हिमालय कम्पनी का लिव 52 बहुत सी दुर्लभ जड़ीबूटियों को मिलाकर बनाया गया उत्पाद है। सामान्यतया माना जाता है कि इसका मुख्य प्रयोग लिवर को स्वस्थ्य रखने में होता है। लेकिन लिव 52 के फायदे और भी बहुत है जो आज हम आपको इस लेख में बताएंगे। सबसे पहले हम पूरी तरह से लिव 52 को जानेंगे कि ये दरअसल क्या है। लिव 52 पूर्ण रूप से आयुर्वेद पर बेस्ड एक प्रोडक्ट है जिसमे केमिकल का प्रयोग नही किया गया है।

दरअसल इसका नाम और इसकी संकल्पना ही लिवर को लेकर की गई है। लिवर से निकलने वाले जूस ही हमारे भोजन को पचाते है। यदि लिवर में ही कोई कमी आ जाए तो डायजेस्टिव सिस्टम बिगड़ जाता है। इसी डायजेस्टिव सिस्टम को मजबूत बनाने और लीवर को मजबूत करने के उपाय के लिए लिव 52 का उपयोग किया जाता है। लिव 52 लिवर को सभी संक्रमणो से दूर रखता है तथा हेपेटाइटिस बी जैसे संक्रमण से दूर रखता है।

हिमालय लिव 52 दो रूपो में मिलता है टेबलेट और सिरप। लिव 52 में प्रयुक्त होने वाली जड़ीबूटियां निम्न है।

  • हिमसरा काबरा ( Humara capparis spinosa )
  • कासनी चिकोरी (Kasani cichorium ) 34mg
  • काकमाची ( kakamachi ) 34mg
  • अर्जुना ( Arjuna ) 16mg
  • झउका ( Jhavuka ) 8mg
  • बिरंजासिफिआ ( Biranjasipha ) 8mg

लिव 52 के फायदे-LivK52 Ke Fayde

एनीमिया

एनीमिया
एनीमिया

एनीमिया यानी खून की कमी, इसका सीधा सम्बन्ध तो लिवर से नही है। पर यदि हमारे भोजन को पचाने में हमारा लिवर सक्षम नही तो सभी पौष्टिक तत्व शरीर को नही मिलेंगे। आयरन भी इन्ही में एक है, तो यदि आप एनीमिया से ग्रसित है तो लिव 52 का सेवन आपके लिए लाभकारी होगा।

हेपेटाइटिस

हेपेटाइटिस ए हो या हेपेटाइटिस बी दोनों ही स्थितियों लिवर कमजोर होने लगता है। इसका कारण लिवर में होने वाला संक्रमण है। ऐसे में लिव 52 का सेवन चाहे वो सिरप हो या टैबलेट लाभकारी रहता है।

भूख की कमी

जब लिवर सही तरीके से काम नही करेगा तो उससे निकलने वाले पाचन रस भी कार्य नही करेंगे। ऐसे में भूख की कमी हो जाती है, व्यक्ति का वजन दिन ब दिन कम होने लगता है। ऐसे में डॉक्टर्स लिव 52 की ही सलाह देते है।

लिव 52 भोजन की खपत को बढ़ाने का भी कार्य करता है। इसके अलावा हमारे शरीर से टॉक्सिन्स मटेरियल को बाहर निकालने में मदद करता है। ये सभी पाचक एंजाइम को सही प्रकार से संतुलित करके डायजेस्टिव सिस्टम को बेहतर बनाता है।

लिवर सिरोसिस

लिवर सिरोसिस का अर्थ है लिवर की कोशिकाओं को नुकसान होना। लिवर सेल्स को नुकसान होने का एक बहुत बड़ा कारण है शराब का अधिक सेवन। शराब का अधिक सेवन लीवर से संबंधित और भी तमाम बीमारिया होती है जैसे- फैटी लिवर, लिवर हेपेटाइटिस, लिवर सिरोसिस।

जब कोई व्यक्ति बहुत अधिक मात्रा में शराब का सेवन करता है तो लिवर सेल्स डैमेज होने लगती है। ऐसे में व्यक्ति को शराब का सेवन बन्द या कम से कम करके, लिव 52 का सेवन करना चाहिए।

लिव 52 लिवर के आगे होने वाले डैमेज को कम करके, damaged सेल्स को रिपेयर भी करता है। यदि शराब पीने या किसी अन्य कारण से लिवर डैमेज हो जाए तो ट्रांसप्लांट के अलावा अन्य कोई चारा नही रहता।

लिव 52 के अन्य फायदे

यदि कोई व्यक्ति अल्कोहल के सेवन के बाद हैंगओवर में है तो लिव 52 के सेवन से हैंगओवर का असर कम हो सकता है।
लेकिन सावधान रहिए हर बार ये तरीका आजमाना आपकी सेहत पर भारी पड़ सकता है।

आज कल खान पान सेहत पर कम और जंकफूड पर ज्यादा टिका है। लगातार पैकेज्ड और जंकफूड खाने से छोटी आंत में टॉक्सिन बनने लगते है। ऐसे में जंक फूड का सेवन कम करके लिव 52 लेने से डायजेस्टिव सिस्टम से टॉक्सिन बाहर निकल जाते है।

जब लिवर में बिलीरुबिन एंजाइम की मात्रा कम या समाप्त हो जाती है तो यूरिन, स्किन और आंखों का रंग पीला हो जाता है। इस स्थिति को पीलिया या जॉन्डिस कहते है। इस स्थिति में भी लिव 52 भी स्थिति में सुधार लाने में मदद करता है।

लिव 52 कितनी मात्रा में ले।

लिव52सिरप

बच्चों के लिए Liv 52 syrup का खुराक

हिमालया लिव 52 सिरप  1 चम्मच (5 ml)दिन में तीन बार  सुबह-दोपहर-शाम

व्यस्को के लिए Liv 52 syrup का खुराक

हिमालया लिव 52 सिरप 2 चम्मच (10 ml)दिन में तीन बार  सुबह-दोपहर-शाम

लिव52 टेबलेट

दिन में दो बार(चिकित्सक के परामर्श अनुसार खाने के बाद या पहले)

गर्भवती या स्तनपान कराने वाली महिलाएं डॉक्टर से सलाह लेने के बाद ही इसका सेवन करे।

जानिए सेहत से भरपूर वीट ग्रास के फायदे-Wheatgrass Ke Fayde

व्हीट ग्रास के फायदे

आज कल दुनिया में कई तरह की बीमारियाँ हैं और हर रोज़ नई तरह की बीमारियाँ पनप रही है। हमारे शरीर को इन बीमारियों से लड़ने के लिए कई तरह के विटामिन्स, मिनरल्स, कैल्शियम और प्रोटीन आदि की आवश्यकता पड़ती है। हम इन आवश्यकताओ को पूरा करने के लिए कई प्रकार की चीजों का सेवन भी करते हैं। इसके बावजूद कई बार छोटी मोटी परेशानियाँ आ ही जाती हैं। ऐसे में वीट ग्रास बहुत ही मददगार साबित होता है। वीट ग्रास के फायदे अनेक हैं। वीट ग्रास एक ऐसी चीज़ है जो शरीर में जरूरी विटामिन्स और मिनरल्स की कमी को पूरा करता है और कई बीमारियों को खत्म करता है।

क्या है वीट ग्रास-Wheatgrass In Hindi

गेहूं के पौधे पर उसके पकने से पहले जो हरी और युवा घास होती है उसे वीट ग्रास कहा जाता है। इन्हे तोड़ कर और सुखा कर इनका पाउडर बना लिया जाता है और फिर इस्तेमाल किया जाता है। कई लोग बिना सुखाये ही इनका प्रयोग कर लेते हैं। वीट ग्रास को एक सुपर फूड माना जाता है।

वीट ग्रास
वीट ग्रास

वीट ग्रास के फायदे-Wheatgrass Ke Fayde

कमजोरी को करे दूर-wheatgrass benefits in hindi

दिन भर काम करने की वजह से शरीर में कमजोरी आ जाती है और चक्कर भी आने लगते है। ऐसे में वीट ग्रास किसी रामबाण से कम नहीं। वीट ग्रास का जूस शरीर में ज़रूरी तत्वों की पूर्ति करता है और कमजोरी को दूर करता है।

पाचन में करे मदद-wheatgrass juice benefits in hindi

आज कल लोगों का खान पान ठीक ना होने के कारण पेट में भोजन ठीक से पच नहीं पाता। इससे पेट में कई विकार उत्पन्न हो जाते है और ये कई और समस्याओं को जन्म देता है। ऐसे में व्हीट ग्रास आपकी पाचन शक्ति को बढ़ाता है। वीट ग्रास में अमीनो ऐसिड और एंज़ाइम्स भरपूर मात्रा में पाये जाते हैं जो भोजन को जल्दी पचाने में मदद करते हैं और पेट को साफ रखते हैं।

शरीर को दे पोषण-benefits of wheatgrass juice in hindi

वीट ग्रास शरीर को पोषण भी देता है। इसमे भरपूर मात्रा में विटामिन ए, बी और मिनरल्स पाये जाते हैं जो आपके शरीर को पोषण देकर आपको स्वस्थ बनाए रखने में मदद करते हैं।

ग्लूकोज़ के लेवेल को करे कंट्रोल-jawara juice benefits

वीट ग्रास डायबिटीज़ के मरीजों के लिए किसी वरदान से कम नहीं है। वीट ग्रास के जूस का नियमित सेवन करने से शरीर में ग्लूकोस का स्तर कंट्रोल में रहता है जिससे डायबिटीज़ भी कंट्रोल में रहता है।

भूख को करे कम-jaware ka juice benefit in hindi

जिन लोगों को भूख बहुत ज्यादा लगती है वो लोग वीट ग्रास का सेवन कर सकते हैं। वीट ग्रास शरीर में जरूरी पोषक तत्वों की पूर्ति करके भूख को कम करने में मदद करता है। इसके लिए आप नियमित रूप से वीट ग्रास के जूस का सेवन करें या सुबह खाली पेट व्हीट ग्रास खाये।

कोलेस्ट्रॉल को करे कम-wheatgrass benefits in hindi

वीट ग्रास आपके दिल का भी खयाल रखता है। वीट ग्रास में ऐसे तत्व पाये जाते है जो बैड कोलेस्ट्रॉल को कम करते है और आपको स्वस्थ बनाए रखने में मदद करते हैं।

कैंसर से लड़े-wheatgrass juice benefits in hindi

वीट ग्रास कैंसर जैसी खतरनाक बीमारी से लड़ने में भी आपकी मदद करता है। वीट ग्रास में ऐन्टी ओक्सीडेंट्स पाये जाते है जो कैंसर को खत्म करने में मदद करते है।

जोड़ों के दर्द को करे दूर-benefits of wheatgrass juice in hindi

जैसे जैसे उम्र बढ़ती है वैसे वैसे जोड़ों में दर्द की समस्या आम हो जाती है। कई बार तो यह समस्या बहुत बढ़ जाती है और चलने फिरने में बहुत परेशानियों का सामना करना पड़ता है। इससे छुटकारा पाने के लिए आप वीट ग्रास का सेवन भी कर सकते हैं। वीट ग्रास के नियमित सेवन से जोड़ों के दर्द में आराम मिलता है।

व्हीटग्रास जूस पीने के क्या फायदे हैं?

व्हीटग्रास यानि जवारे का रस के कई फायदे हैं - 1.जवारे का रस का सेवन करने से खून की कमी पूरी होती है ,एनीमिक व्यक्ति को जवारे का जूस का सेवन करने से फायदा होता है । 2.मोटापे से ग्रसित व्यक्ति को जवारे के रस का सेवन करने से काफी लाभ होता है । इसके सेवन से शरीर को पोषक तत्व मिलते हैं । 3.जवारे के रस सेवन से पेट की अपच की समस्या में काफी लाभ होता है । 4.जवारे के रस का सेवन बैड कोलेस्ट्रॉल के लेवल को कम करता है ।जिसकी वजह से दिल की बीमारी का खतरा कम रहता है । 5.जवारे के रस का सेवन करने से ब्लड प्रेशर सामान्य रहता । 6.जवारे के रस का सेवन मधुमेह की बीमारी को मात दे सकते हैं ।जवारे के जूस पीने से शरीर में इंसुलिन की मात्रा बढ़ जाती है और खून में शुगर की मात्रा कम हो जाती है । 7.जवारे का रस गठिया की बीमारी में काफी लाभ मिलता है । इसके सेवन से घुटनों के सूजन और दर्द में भी आराम मिलता है । 8.जवारे के जूस में एंटी एगिंग गुण भी पाए जाते हैं । जो उम्र के साथ चेहरे पर आने वाली झुर्रियों को बढ़ने से रोकता है ।

गेहूं के जवारे का रस कब पीना चाहिए?

गेहूं के जवारे के रस की तासीर ठंडी होती है इसलिए इसका प्रयोग गर्मियों में ज्यादा किया जाता है। सर्दियों में गेहूं के जवारे का सेवन दोपहर के समय करना चाहिए । गेहूं के जवारे के रस का सेवन अधिकांश सुबह के समय करना चाहिए जिससे शरीर को जरूरी पोषक तत्व मिलेंगे और व्यक्ति स्वस्थ महसूस करेगा । यदि सुबह सेवन करना संभव ना हो तो दोपहर के खाने से पहले इसका सेवन करना चाहिए ।

व्हीटग्रास के क्या फायदे हैं?

व्हीट ग्रास यानी गेहूं के जवारे अत्यधिक गुणकारी होते हैं - 1. चेहरे के मुहासे को ठीक करने में व्हीट ग्रास गुणकारी है। 2.व्हीट ग्रास पाउडर के नियमित सेवन से पुरुषों और महिलाओं दोनों की प्रजनन क्षमता बढ़ती है । 3.व्हीट ग्रास में एंटीसेप्टिक गुण पाए जाते हैं जो घाव, कीड़ों के काटने ,खरोच तथा त्वचा पर चकत्ते आने पर लाभदाई है। 4.व्हीट ग्रास मे पाए जाने वाले क्लोरोफिल से शरीर में हिमोग्लोबिन का उत्पादन होता है इसीलिए एनीमिया के रोगियों को व्हीटग्रास के सेवन की सलाह दी जाती है । 5. व्हीट ग्रास में कैंसर की कोशिकाओं को रोकने की क्षमता होती है इसीलिए कैंसर के रोगियों को व्हीटग्रास पाउडर पाउडर या जूस का सेवन करना चाहिए । 6. शराब के सेवन के बाद होने वाले हैंगओवर का भी गेहूं के जवारे से इलाज किया जा सकता है । 7. अवसाद के रोगियों के लिए भी गेहूं के जवारे का सेवन फायदेमंद होता है ।

गेहूं के ज्वारे कैसे उगाये?

गेहूं के जवारे उगाने की विधि - गेहूं के ज्वारे उगाने के लिए हमेशा अच्छी किस्म के जैविक यानी ऑर्गेनिक गेहूं का प्रयोग करना चाहिए कभी इसके गुणों का भरपूर लाभ मिलता है । गेहूं के जवारे उगाने के लिए लगभग 100 ग्राम गेहूं को रात को सोते समय किसी बर्तन में भिगोकर रख दें । 7 गोलाकार गमले लेकर उनके तले के छेद को एक पतले पत्थर के टुकड़े से ढक दें । मिट्टी और खाद को अच्छी तरह से मिलाकर गमले में 2 इंच मोटी पर परत बिछा दें और पानी छिड़क दे । गेहूं के जवारे उगाने के लिए हमेशा जैविक खाद का ही प्रयोग करें ।अगले दिन गेहूं को धोकर निथार लें ।अब एक गमला लेकर उस पर गेहूं की एक परत बिछा दे। गेहुओं के ऊपर थोड़ी मिट्टी डाल दें और पानी से सीच दें ।गमले को किसी छायादार स्थान जैसे बरामदे या खिड़की के पास रख दें जहां पर्याप्त हवा और प्रकाश आता हो लेकिन धूप की सीधी किरण मामले पर नहीं पड़नी चाहिए ।अगले दिन अगला गमला लेकर उसमें गेहूं बो दीजिए और इसी तरह हर रोज एक गमले में गेहूं बोते रहें । गमलों में रोजाना कम से कम दो बार पानी दें ताकि मिट्टी नम और गीली बनी रहे। जब गेहूं के जवारे 1 इंच से बड़े हो जाएं तो एक बार ही पानी देना पर्याप्त रहता है पानी देने के लिए स्प्रे बॉटल का प्रयोग करें । 7 दिन बाद 5 से 6 पत्तियों वाला 6 से 8 इंच लंबा जवारा निकल जाएगा अब इस जवारे को जड़ सहित उखाड़ ले और पानी से अच्छे से धो कर प्रयोग कर ले । इस प्रकार आप हर रोज एक गमले से जवारे तोड़ते जाइए और रोज गमले में जवारे बोते जाइए ताकि आपको निरंतर जवारे मिलते रहे ।

व्हीटग्रास पाउडर क्या होता है?

व्हीटग्रास यानी गेहूं के जवारे हमारे शरीर के लिए बहुत ज्यादा लाभदायक होते हैं । खासकर जवारे का रस । परंतु व्हीटग्रास जूस बनाने में थोड़ा समय लगता है इसीलिए आजकल लोग व्हीटग्रास पाउडर का प्रयोग करते हैं । व्हीटग्रास पाउडर व्हीट ग्रास को धूप में सुखाकर उसे पीस कर बनाया जाता है ।इस पाउडर को पानी के साथ मिलाकर पीना लाभदायक होता है ।

जानिए क्या हैं रोगन बादाम शिरीन के फायदे

रोगन बादाम शिरीन के फायदे

बादाम प्रकृति की दी हुई ऐसी चीज़ है जो मनुष्य के लिए किसी वरदान से कम नहीं है। इन बादामों को पीसकर इनका तेल निकाला जाता है जिसे रोगन बादाम शिरीन कहा जाता है। ये हमारे लिए बहुत उपयोगी है। इनमे भरपूर मात्रा में कैल्शियम, पोटाशियम, मैग्नीशियम, विटामिन ए और विटामिन ई पाये जाते हैं। इसके इन्ही गुणों के कारण इसका प्रयोग प्राचीन समय से किया जा रहा है। चाहे त्वचा हो, बाल हो या स्वास्थ्य, ये हर तरह से आपके लिए लाभकारी है। आइये जाने रोगन बादाम शिरीन के फायदे के बारे में।

रोगन बादाम शिरीन के फायदे

दिल को बनाए स्वस्थ और जवान

बादाम रोगन आपके दिल का ख्याल रखता है। ये आपके शरीर में बैड कोलेस्ट्रॉल की मात्रा को कम करता है और गुड कोलेस्ट्रॉल की मात्रा को बढ़ता है। इसके लिए आप खाना पकाते समय उसमे थोड़ा सा बादाम रोगन डाल सकते है।

डार्क सर्कलस को हटाये

डार्क सर्कलस यानी काले घेरे देखने में बहुत बुरे लगते है और आपकी खूबसूरती को भी कम करते है। इनसे छुटकारा पाने के लिए आप बादाम रोगन का इस्तेमाल कर सकते है। बादाम रोगन में विटामिन ई भरपूर मात्रा में पाया जाता है जो आपकी आंखो को पोषण देता है और आंखो को आराम पहुंचाता है जिससे डार्क सर्कलस कम हो जाते है। इसके लिए आप रात को सोने से पहले बादाम रोगन थोड़ा सा उँगलियों पर लेकर अच्छे से आँखों के चारों तरफ मसाज करते हुए लगाए। सुबह ठंडे पानी से चेहरे को अच्छे से धो लें।

टेनिंग को करे कम

बादाम रोगन टेनिंग को कम करने में भी आपकी मदद करता है। बादाम रोगन प्राकृतिक सनस्क्रीन की तरह का करता है और आपकी त्वचा को सूरज की हानिकारक किरणों से बचाता है। साथ ही यह पहले से हुई टेनिंग को कम करने में भी मदद करता है।

पाये चमकदार और स्वस्थ त्वचा

बादाम रोगन स्वस्थ और चमकदार त्वचा पाने में भी आपकी मदद करता है। ये आपकी त्वचा को पोषण देकर उसे नमी देता है और कोमल बनाता है। साथ ही इसमे मौजूद ऐन्टी ओक्सीडेंट्स आपकी त्वचा के अंदर जाकर उसे हील करते है और त्वचा को स्वस्थ रखने में मदद करते है।

डैंड्रफ को रखे दूर

अगर आप डेंड्रफ की समस्या से परेशान है तो आप बादाम रोगन का इस्तेमाल कर सकते है। ये बालों की जड़ों को पोषण देता है और नमी को बनाए रखता है जिससे डैंड्रफ की समस्या दूर हो जाती है। इसके लिए आप रात को सोने से पहले अरंडी के तेल या नारियल के तेल में थोड़ा सा बादाम रोगन मिला कर अपने बालों की जड़ों मे मालिश करते हुए अच्छे से लगा लें। सुबह शैम्पू की सहायता से बालों को अच्छे से धो लें। ऐसा हफ्ते में दो बार जरूर करें।

डैंड्रफ को रखे दूर
डैंड्रफ को रखे दूर

दो मुहें बालों को करे रिपेयर

बादाम रोगन दो मुहें बालों की समस्या से निजात दिलाने में बहुत लाभकारी साबित होता है। इसमे मौजूद ऐन्टी ओक्सीडेंट्स आपके बालों को पोषण प्रदान करते है जिससे दो मुहें बालों की समस्या कम हो जाती है और बाल मजबूत भी बनते है।

पाचन तंत्र को करे मजबूत

बादाम रोगन पाचन तंत्र के लिए किसी वरदान से कम नहीं। इसके अंदर ऐसे मिनरल्स पाये जाते है जो आपके पाचन तंत्र को मजबूती देते है जिससे खाना जल्दी पचता है और आपको कब्ज़ जैसी समस्याओं से छुटकारा मिलता है। इसके लिए रात को गरम दूध में थोड़ा सा बादाम रोगन मिला कर इसका सेवन करें।

एजिंग को करे कम

बादाम रोगन एजिंग को कम करने में भी बहुत लाभकारी साबित होता है। इसमे ऐन्टी एजिंग प्रॉपर्टीस पाई जाती है जो एजिंग की प्रोसैस को धीमा कर देती हैं और त्वचा जवान और दमकती हुई नज़र आती है। इसके लिए आप रात को सोने से पहले बादाम रोगन की चेहरे पर अच्छे से मसाज करे। सुबह ठंडे पानी से चेहरे को अच्छे से धो लें।

त्वचा को करे मोइश्चराइज़

अगर आपकी त्वचा बहुत रूखी और ड्राई है तो आप बादाम रोगन का प्रयोग कर सकते है। बादाम रोगन आपकी त्वचा को मोइश्चराइज़ करता है और नमी को बनाए रखता है जिससे रूखापन खत्म हो जाता है। इसके लिए आप हल्के हाथो से चेहरे पर बादाम रोगन लगाए। 15 से 20 मिनट बाद चेहरे को अच्छे से पानी से धो लें।

बादाम का तेल चेहरे पर लगाने से क्या होता है?

रात में सोने जाने से पहले, अपने हाथों को धो लें और बादाम के तेल की कुछ बूंदें लेकर अपनी हथेलियों को आपस में रगड़ें।अब इसे अपने पूरे चेहरे पर लगाएं और हल्‍के हाथों से कुछ देर मसाज करें। ऐसा नियमित करने से आपके चेहरे में चमक आएगी और दाग-धब्‍बे भी हल्‍के होंगे।

जानिए घर पर कैसे करे नमक से प्रेगनेंसी टेस्ट-Pregnancy Test With Salt In Hindi

नमक से प्रेगनेंसी टेस्ट

नमक से प्रेगनेंसी टेस्ट

विवाह के बाद दूसरा पड़ाव होता है मातृत्व सुख, ऐसे में हर महीने होने वाली माहवारी कुछ खास हो जाती है। थोड़ा सी देर हुई नही की मन मे कोपलें फूटने लगती है। थोड़ा बहुत हॉर्मोनल प्रॉब्लम हो तो माहवारी आगे पीछे होना सामान्य है। पर शादी के बाद ऐसे में महिला असमंजस में हो जाती है कि ये प्रेग्नेंसी का लक्षण है या हार्मोनल अनियमितता का। अब इस उधेड़बुन में वो डॉक्टर के पास जाने की जल्दबाजी नही कर सकती। कई घरों में महिलाएं बाहर जाकर टेस्ट किट लेने में भी झिझकती है ऐसे में वो क्या करें? तो ऐसे महिलाएं बहुत से घरेलू उपाय आजमा सकती है जिनसे वो अपनी प्रेग्नेंसी कन्फर्म कर सके। ऐसा ही एक तरीका है नमक से प्रेगनेंसी टेस्ट, अगर आपकी माहवारी की डेट को निकले कम से कम एक से डेढ़ हफ्ता हो गया है तो आपको प्रेग्नेंसी टेस्ट जरूर करना चाहिए।

होता क्या है कि शारीरिक सम्बन्ध बनाने के बाद जब स्पर्म एग को fertilize करता है तो फीमेल में HCG हॉर्मोन बनने लगता है। लेकिन पेशाब में इस हॉरमोन की उपस्थिति का पता 7-14 दिन के बाद ही लगाया जा सकता है।

Pregnancy Ke Lakshan

इसलिए अगर आपके पीरियड्स मिस हो गए हो तो जल्दबाजी में कोई टेस्ट ना करे, थोड़ा धैर्य रखें। इन टेस्ट के अलावा भी आप कुछ शारीरिक और मानसिक बदलावों पर नजर रखे जैसे

  • स्तन में सूजन आना या स्तनों में अकड़न महसूस होना
  • बिना वजह थकान महसूस होना
  • स्पॉटिंग अर्थात खुल कर माहवारी होने के स्थान पर केवल कुछ धब्बे दिखाई देना
  • मसल्स और जॉइंट्स में ऐंठन महसूस होना
  • जी मिचलाना या उबकाई आना, कभी कभी उल्टी होना।
  • हर समय खाने की या कुछ विशेष खाने की इच्छा करना।
  • बार-बार कब्ज़ या सिरदर्द होना
  • मूड स्विंग्स
  • चक्कर आना
  • बॉडी टेम्परेचर बढ़ना
  • खाने से बदबू आना
    चक्कर आना
    चक्कर आना

हो सकता है ये लक्षण किसी शारीरिक रोग से सम्बंधित हो, फिर भी एक बार प्रेग्नेंसी टेस्ट जरूर करे। कई बार माहवारी समय पर ना होने के निम्न कारण हो सकते है।

  • घर या कार्यालय में तनाव
  • बहुत ज्यादा वजन बढ़ना या घटने से हार्मोन का असंतुलन होता है, जो आपके मासिक धर्म को प्रभावित करता हैं
  • कोई बीमारी, अनियमित भोजन करने की आदत,
  • कॉन्ट्रासेप्टिव तरीके अपनाना खासकर पिल्स
  • अत्यधिक काम करने से हार्मोन का संतुलन प्रभावित होता है और मासिक धर्म में देरी होती है।
  • लम्बी दूरी की यात्रा, एनवायर्नमेंटल चेंज, अनियमित नींद चक्र
  • कुछ महिलाएं प्रोलैक्टिनोमा से पीड़ित होती हैं, जिससे एस्ट्रोजेन कम हो जाता हैं और मासिक धर्म में देरी होती है।
  • पीसीओएस या थाइरोइड होना

नमक से प्रेगनेंसी टेस्ट कब करें-Pregnancy Test Kab Karna Chahiye In Hindi

अगर आप ओव्यूलेशन के पांचवें दिन नमक से प्रेग्नेंसी टेस्ट करेंगे तो परिणाम ज्यादा प्रभावी होंगे। इसके लिए पहले से ही अपना ओव्यूलेशन डेट ट्रैक करने की जरूरत पड़ती है।

नमक से प्रेगनेंसी टेस्ट कैसे करे

  • नमक से प्रेगनेंसी टेस्ट करने के लिए सबसे पहले एक खाली बर्तन ले। कोशिश करे कि बर्तन ऐसी धातु का हो जो यूरिन से रिएक्शन न करे।
  • सुबह सबसे पहले उठते ही इस बर्तन में अपना यूरिन सैम्पल ले, शुरुआती सैम्पल ही सटीक रिज़ल्ट देने में कारगर होता है।
  • अब इस बर्तन में यानी यूरिन सैम्पल में करीब तीन चौथाई चम्मच नमक मिलाएं।
  • एक या दो मिनट तक इंतजार करें और नमक का यूरीन के साथ रिएक्शन देखें।
  • प्रेग्नेंसी होने पर यूरीन में मौजूद एचसीजी हार्मोन नमक के साथ अभिक्रिया करके झाग बन जाता है।
  • प्रेग्नेंसी नहीं होने पर नमक यूरीन के साथ कोई अभिक्रिया नहीं करता है।

इस प्रकार आप नमक से अपनी प्रेग्नेंसी जाँच सकती है, ये 100 प्रतिशत सटीक रिजल्ट नही देती लेकिन कोई और उपाय ना होने पर उसे आजमाया जा सकता है।

क्योंकि सटीक रिजल्ट तो कई बार प्रेग्नेंसी टेस्ट किट भी नही देती, और इसलिए ही डॉक्टर के पास जाना और अल्ट्रासाउंड कराना ही एकमात्र उपाय है।

Frequently Asked Questions in Hindi – सामान्य प्रश्न

कोलगेट से प्रेगनेंसी टेस्ट कैसे करते हैं?

बिना प्रेगनेंसी टेस्ट किट के कुछ घरेलू चीजों की मदद से भी प्रेगनेंसी टेस्ट किया जा सकता है जैसे कोलगेट। कोलगेट के माध्यम से प्रेगनेंसी टेस्ट करने के लिए किसी बर्तन में सुबह का पहला पेशाब लें सुबह के पहले पेशाब प्रयोग करना इसलिए आवश्यक है क्योंकि इस पेशाब में एचसीजी हार्मोन की मात्रा सर्वाधिक होती है ।अब पेशाब में एक चम्मच कोलगेट मिलाएं । पेशाब में कोलगेट मिलाने के बाद यदि उसका रंग बदलकर नीला हो जाता है तो प्रेगनेंसी टेस्ट पॉजिटिव है । इसके अलावा पेशाब और कोलगेट के मिश्रण में यदि झाग इकट्ठे हो रहे हैं तब भी प्रेगनेंसी टेस्ट पॉजिटिव समझा जाएगा।इस मिश्रण में यदि किसी प्रकार का बदलाव ना दिखाई दे तो प्रेगनेंसी नहीं है ।

पेशाब में नमक डालने से क्या होता है?

आजकल घर बैठे तक प्रेगनेंसी टेस्ट करना बड़ा आसान हो गया है ,किट के अभाव में घरेलू चीज़ों की मदद से भी प्रेग्नेंसी टेस्ट किया जा सकता है । इसके लिए यूरीन में नमक मिलाएं प्रेगनेंसी होने पर यूरीन में मौजूद एचसीजी हार्मोन नमक के साथ रिजेक्ट करके झाग बनाएगा और यदि प्रेगनेंसी नहीं है तो यूरिन में नमक मिलाने से कोई भी रीएक्शन नहीं होगा । इस प्रकार हम बिना टेस्ट किट की सहायता के नमक से भी प्रेगनेंसी टेस्ट कर सकते हैं। नमक से प्रेग्नेंसी टेस्ट करते समय यह ध्यान रखना चाहिए कि सुबह के सबसे पहले यूरिन का प्रयोग ही टेस्ट के लिए किया जाए ।

साबुन से प्रेगनेंसी टेस्ट कैसे करें?

साबुन से प्रेगनेंसी टेस्ट करने के लिए हमें इन चीजों की आवश्यकता होगी - एक छोटा टुकड़ा साबुन, सुबह का पहला यूरीन और एक प्लास्टिक का कप । इस टेस्ट को करने के लिए सबसे पहले साबुन के छोटे से टुकड़े को लेकर थोड़े से पानी में इस प्रकार घोलें कि झाग बन जाए अब उस घोल में यूरिन डालें ।साबुन के घोल की मात्रा से तीन गुना यूरीन मिलाएं । सुबह का पहला यूरिन इसलिए बेहतर होता है क्योंकि उसमें कोरिओनिक गोनाडोट्रोपिन का लेवल सबसे ज्‍यादा होता है। इसके बाद 5 से 10 मिनट तक इंतजार करें । यदि प्रेगनेंसी टेस्ट पॉजिटिव है तो घोल में झाग आने लग जायेंगे और घोल का रंग हरे से बदलकर नीला हो जाएगा । प्रेगनेंसी टेस्ट नेगेटिव होने की स्थिति में 10 मिनट के बाद भी घोल के रंग में कोई परिवर्तन नहीं होगा । किसी प्रकार के संशय की स्थिति में गायनेकोलॉजिस्ट से संपर्क करें ।

बिना किट के प्रेगनेंसी टेस्ट कैसे करें?

प्रेगनेंसी कंफर्म करने के लिए महिलाएं हमेशा प्रेगनेंसी टेस्ट किट का प्रयोग करती हैं परंतु प्रेगनेंसी टेस्ट उपलब्ध ना होने की स्थिति में निम्न घरेलू तरीकों से भी प्रेगनेंसी टेस्ट किया जा सकता है - 1. कांच का ग्लास - कांच के गिलास में यूरिन डालें कुछ समय पश्चात इस पर यदि सफेद परत दिखाई दे तो आप गर्भवती हो सकती हैं । 2.विनेगर - किसी प्लास्टिक के कप में थोड़ी सी मात्रा में विनेगर लें उसमे सुबह का पहला यूरीन मिलाएं यदि घोल के रंग में कोई परिवर्तन दिखाई देता है तो प्रेगनेंसी टेस्ट पॉजिटिव हो सकता है । 3. डेटॉल टेस्ट - डेटॉल से प्रेगनेंसी टेस्ट करने के लिए एक कांच के गिलास में बराबर मात्रा में यूरीन और डेटॉल मिक्स करें यदि डिटॉल यूरिन में घुल जाता है तो प्रेगनेंसी टेस्ट नेगेटिव है परंतु यदि यूरिन डेटॉल के ऊपर परत के रूप में दिखाई देता है तो प्रेग्नेंसी टेस्ट पॉजिटिव हो सकता है । 4. ब्लीच - कांच या प्लास्टिक के बर्तन में थोड़ी ब्लीच लें उसमे यूरिन मिलाएं यदि इस घोल में झाग दिखाई दें तो यह प्रेग्नेंट होने का संकेत है । इन सभी चीजों से प्रेगनेंसी टेस्ट करते समय सुबह के पहले यूरिन का ही प्रयोग करें । घरेलू चीजों से प्रेगनेंसी टेस्ट करने के बाद असमंजस की स्थिति हो तो डॉक्टर से मिलें ।

Vitamin D-क्या है विटामिन डी, विटामिन डी की कमी को कैसे पूरा करे

क्या है विटामिन डी, विटामिन डी की कमी को कैसे पूरा करे

विटामिन डी क्या होता है?

विटामिन डी हमारे शरीर मे पाया जाने वाला एक विटामिन है जो कई प्रकार से हमारे शरीर को रोगों से लड़ने से मदद करता है और अगर इसकी कमी हो तो वही हमारे शरीर को कई प्रकार की बीमारियों का हो जाना आम बात होता है। इस लिए हमे इसके बारे में पता होना चाहिए और शरीर मे इसकी कमी नही होने देनी चाहिए। विटामिन डी वसा घुलनशील प्रो हार्मोन का स्रोत होता है।

हाल ही में हुई रिसर्च के मुताबिक भारत मे 70 फीसदी लोगों ने विटामिन डी की कमी पाई गई है। इसलिए भारतीय लोगों को इस कि कमियों को पूरा करने के स्रोत और इसकी कमी के लक्षण के बारे में जानकारी होना जरूरी है।

अगर आप में भी विटामिन डी की कमी होती है तो यह कई प्रकार की बीमारियों को न्योता देने वाली बात होती है। तो देखते हैं नीचे की विटामिन डी की कमी के क्या कारण होते है।

विटामिन डी 3 की कमी होने के कारण

  • खाने के रूप में विटामिन डी के आहार की कमी होना सबसे बड़ा कारण है।
  • खाने से विटामिन डी का निचोड़ ना निकाल पाना।
  • धूप में कम बैठना।
  • लिवर और किडनी का आहार को विटामिन डी में परिवर्तन ना कर पाना।
  • अन्य बीमारियों की दवाइयां लेने से भी कई बार विटामिन डी की कमी होने लगती है।

विटामिन डी की कमी के लक्षण

  • यदि आपके शरीर में विटामिन डी की कमी है, तो यह आपके रक्तचाप पर प्रभाव डाल सकता है। इसकी कमी से अक्सर उच्च रक्तचाप की समस्या होती है।
  • हड्डियों का कमजोर होना और मांसपेशियों में हमेशा दर्द और थकान रहता है तो यह विटामिन डी की कमी के कारण हो सकता है। आपके दांतों का कमजोर होना भी इसकी कमी का एक लक्षण है।
    थकान होना
    थकान होना
  • हमेशा सुस्ती रहनी और किसी काम को करने में आलस आना और काम करते हुए जल्दी थकावट का हो जाना भी विटामिन डी की कमी का एक लक्षण होता है।
  • कई बार विटामिन डी की कमी के कारण मूड भी अचानक बदल जाता है। विटामिन डी सेरोटोनिन का उत्पादन करता है जो हमारे मूड को अच्छा रखने में सहायक है। सेरोटोनिन की कमी मूड में कमी की एक सामान्य विशेषता है।
  • विटामिन डी की कमी से पसीना आने लगता है। पसीना आना वैसे तो एक आम बात है लेकिन अगर बहुत ज्यादा मात्रा में पसीना आ रहा है तो यह विटामिन डी की कमी का संकेत हो सकता है। यह विटामिन डी की कमी का एक शुरुआती लक्ष्म है।
  • विटामिन डी फैट को घुलनशील करने वाला पदार्थ है इस लिए अगर आप का वजन बढ़ रहा है तो इसका कारण विटामिन डी की कमी हो सकती है।
  • जल्दी बुढापे के लक्षण दिखने व बुढापा आने लगना विटामिन डी की कमी का एक लक्षण है।
  • विटामिन डी की कमी से दांत और मसूड़ों में समस्या आ जाती है। मसूड़े कमजोर हो जाते हैं और दर्द होते रहते हैं।

विटामिन डी के स्रोत

धूप

विटामिन डी की कमी को पूरा करने का पहला और सबसे बड़ा प्राकृतिक स्रोत है धूप। धूप में बैठने से हमे विटामिन डी की प्रप्ति होती है इस लिए जितना ज्यादा हो सके विटामिन डी की कमी को पूरा करने के लिए धूप में बैठे। यह एक सबसे अच्छा स्रोत है जिसके ना कोई बुरा प्रभाव है और यह एक प्रकृतिक और मुफ्त स्रोत है जिसको हर व्यक्ति ले सकता है। और सुबह की धूप इसमे बहुत फायदेमंद होती है।

भोजन में करें अंडे को शामिल

अंडे के पीले भाग (जिसे जर्दी भी कहा जाता है) में भरपूर मात्रा में विटामिन डी होता है। अपने भोजन में अंडे को शामिल करें, सुबह नाश्ते में खाने से आपको दिन के लिए ऊर्जा भी मिलेगी और विटामिन डी भी पूरा होता रहेगा।

संतरे का जूस

संतरे का जूस इसके लिए एक बहुत अच्छा स्रोत है। हर रोज़ सुबह और शाम एक एक गिलास संतरे के जूस का सेवन करे और संतरे को खाने से भी इसकी कमी पूरा होती है।

मशरूम

मशरूम में विटामिन डी भरपूर मात्रा में पाया जाता है। जैसे ही सूरज की रोशनी होती है, मशरूम के अंदर विटामिन डी के उत्पादन की प्रक्रिया बहुत तेजी से शुरू होती है, जिसके कारण इसमें विटामिन डी की बहुत अधिक मात्रा होती है।

गाजर का सेवन

अगर आपको विटामिन डी की कमी है, तो गाजर का सेवन शुरू करें। गाजर का जूस भी निकाला और पिया जा सकता है। शरीर में विटामिन डी की कमी नहीं होगी।

दूध, दही, मक्खन, पनीर

दूध में सबसे अधिक कैल्शियम पाया जाता है। दूध, दही, मक्खन, पनीर के सेवन से विटामिन डी की कमी को दूर किया जा सकता है। जिन बच्चों को दूध पसंद नहीं है उनमें विटामिन डी की कमी होती है और हड्डियां कमजोर हो जाती हैं।

मछलियों का सेवन

अगर आप मांसाहारी भोजन का सेवन करते हैं तो जितना ज्यादा हो सके मछलियों का सेवन करें इस से भी विटामिन डी की कमी पूरा होती है और मासांहारी लोगों के लिए यह एक बहुत अच्छा स्रोत है विटामिन डी की कमी पूरा करने का।

बारिश में भीगे बालों की केयर कैसे करें-Barish Me Balo Ki Dekhbhal

बारिश में भीगे बालों की केयर

बारिश का मौसम सबका मनपसंद मौसम होता है। लोग इस मौसम का बेसब्री से इंतज़ार करते है। बारिश में भीगकर सबका मन खुश हो जाता है। लेकिन आज कल के बढ़ते प्रदूषण के कारण बारिश का पानी भी प्रदूषित हो गया है। प्रदूषण के ये कण बारिश के पानी में मिलकर उसे प्रदूषित कर देते है जो हमारे बालों पर बुरा प्रभाव डालते है। ये ना सिर्फ आपके बालों को फ़्रीजी बना देते है साथ ही इससे आपको स्कैल्प पर फंगल इंफेक्शन भी हो सकता है। लेकिन आप कुछ आसान सी टिप्स को फॉलो करके बारिश में भीगे बालों की अच्छे से केयर कर सकते है ताकि आपके बाल बारिश के मौसम में भी स्वस्थ रहें और आप बिना किसी फिक्र के बारिश का मज़ा ले सकें।

बारिश में भीगे बालों की केयर कैसे करें

  • बालों को करें शैंपू
  • करें गुनगुने पानी का प्रयोग
  • करें कंडीशनर का इस्तेमाल
  • बालों को सुखाना है जरुरी
  • करें हेयर मास्क का इस्तेमाल
  • हेयर स्टाइलिंग प्रोडक्ट्स का कम करें प्रयोग

बालों को करें शैंपू

बारिश में भीगने के बाद आप नहा लें। ऐसा करना इसलिए जरूरी है क्योंकि बारिश में भीगने से उसमे मौजूद प्रदूषण के कण आपके बालों और त्वचा पर जम जाते हैं जिससे आपके बाल खराब हो जाते है और आपको बालों के झड़ने की समस्या हो सकती है। शैंपू आपके बालों में से इन प्रदूषण के कणों को निकालने में मदद करता है। आप पानी में नीम के कुछ पत्ते डाल कर उसका प्रयोग कर सकते है। नीम त्वचा और बालों में मौजूद जीवाणुओं को खत्म कर देता है और डैंड्रफ की समस्या को होने से रोकता है। अगर आपके पास नीम के पत्ते नहीं है तो आप नीम युक्त शैंपू का प्रयोग भी कर सकते हैं। ये बाज़ार में आसानी से उपलब्ध हो जाता है।

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बालों को करें शैंपू
बालों को करें शैंपू

 

करें गुनगुने पानी का प्रयोग

बारिश में भीगने के बाद नहाने के लिए हल्के गुनगुने पानी का प्रयोग करें। ये बालों में मौजूद जीवाणुओं को मार देता है और फंगल इंफेक्शन जैसी समस्या को होने से रोकता है। ध्यान रखें कि पानी ज्यादा गर्म ना हो नहीं तो ये आपके बालों को नुकसान पहुंचा सकता है।

करें कंडीशनर का इस्तेमाल

बालों को धोने के बाद कंडीशनर का इस्तेमाल जरूर करें। कंडीशनर आपके बालों को पोषण देगा और फ्रिज़ की समस्या को भी रोकने में मदद करेगा।

और पढ़ें: रूखे और बेजान हेयर को सिल्की करने के टिप्स-Hair Ko Silky Karne Ke Tips

बालों को सुखाना है जरुरी

बालों को धोने के बाद ये जरुरी हो जाता है कि आप अपने बालों को अच्छे से सूखा लें क्योंकि मॉनसून में हवा में नमी ज्यादा हो जाती है और अगर ऐसे में आपके बाल ज्यादा समय तक गीले रहें तो इससे बालों में जीवाणु जैसे बैक्टीरिया और फंगी जल्दी पनपते है। इससे आपको स्कैल्प पर संक्रमण हो सकता है। इसके लिए सबसे पहले अपने बालों को तौलिए की मदद से सुखाए। बालों को तौलिए से रगड़ें नहीं। इससे आपके बाल टूट सकते है क्योंकि गीले बाल बहुत कमजोर होते ही। इसीलिए या तो बालों को अपने आप है सूखने दे या फिर ब्लो ड्रायर का प्रयोग करें। लेकिन ब्लो ड्रायर का प्रयोग करते समय इस बात का ध्यान रखें कि ड्रायर का तापमान कम हो क्योंकि ये आपके बालों को डैमेज कर सकता है।

करें हेयर मास्क का इस्तेमाल

आप अपने बालों को स्वस्थ बनाए रखने के लिए हेयर मास्क का प्रयोग भी कर सकते है। इसके लिए आप एक कटोरी दही में 3 चम्मच जैतून का तेल मिला लें। अब इस हेयर मास्क को अपने बालों और स्कैल्प पर अच्छे से लगा लें। 30 मिनट बाद अपने बालों को धो लें। ये हेयर मास्क आपके बालों को पोषण देगा और आपके बालों के लिए प्राकृतिक कंडीशनर का भी काम करेगा।

जानिए: कौन सा है बेस्ट बाल लम्बे करने का शैम्पू-Bal Lambe Karne Ka Shampoo

हेयर स्टाइलिंग प्रोडक्ट्स का कम करें प्रयोग

कोशिश करें कि मॉनसून में कम से कम हेयर स्टाइलिंग प्रोडक्ट्स का इस्तेमाल करें। हेयर स्टाइलिंग प्रोडक्ट्स में केमिकल होता है जो आपके बालों को डैमेज करता है। इनके ज्यादा प्रयोग बाल फ्रिजी हो जाते है और झड़ने लगते हैं।

Frequently Asked Questions in Hindi – सामान्य प्रश्न

क्या गीले बालों में तेल लगाना चाहिए?

गीले बालो की जड़े कमजोर होती है तेल लगाने से जड़ से उखड़ जाते है और गीले बालो पर तेल लगाने से बदबू की समस्या भी हो सकती है 

बालों में तेल कब और कैसे लगाएं?

बालो मे तेल हमेशा रात मे लगाऐ और अगली सुबह धो ले।अपनी उंगलियों को तेल मे डुबोकर बालो के हिस्से कर के सिर पर हल्के हाथो से पूरे सिर पर लगाऐ और थोड़ी देर मसाज करे।

यूरिक एसिड में क्या क्या सावधानियां बरतें?

यूरिक एसिड में सावधानियां

यूरिक एसिड हमारे शरीर का वो अपशिष्ट एवं अवांछित तत्व है जो कि हमारे शरीर से बाहर न निकलने के कारण हमारे जोड़ों में इकट्ठा हो जाता है। यूरिक एसिड अकेला नहीं आता अपने साथ ढेर सारी समस्या लेकर आता है। यूरिक एसिड की सबसे बड़ी समस्या अर्थराइटिस एवं गठिया होती है। जिसकी वजह से हमारे शरीर के जोड़ो में दर्द होने लगता है। कुछ समय बाद हमारा चलना फिरना, अपने हाथ पैरों से काम करना मुश्किल हो जाता है। हमें अपने खान-पान का ध्यान रखना चाहिए। ऐसा करने से हम यूरिक एसिड को कंट्रोल कर सकते हैं। 

यूरिक एसिड बढ़ता क्यों है

हमारा शरीर किडनी और यूरिन के माध्यम से यूरिक एसिड को शरीर से बाहर विसर्जित करता है। अगर हम बहुत अधिक यूरिक एसिड वाली चीजें भोजन में लेते हैं तो हमारे शरीर में यूरिक एसिड की मात्रा बढ़ जाती है। इस अवस्था को हाइपरयूरीसीमिया कहा जाता है। इस अवस्था में फ्यूरिन की मात्रा अधिक होती है। ज्यादा यूरिक एसिड बढ़ने से जोड़ों में यूरेट क्रिस्टल जमा हो जाते हैं। यह यूरेट क्रिस्टल यूरिन को अधिक अम्लीय बना देते हैं। जिससे यूरिन शरीर से अच्छी तरह से बाहर नहीं निकाल पाता। जिसके कारण यह अपशिष्ट पदार्थ शरीर में जमा हो जाता है।

यूरिक एसिड बढ़ने के कारण

यूरिक एसिड बढ़ने का कारण हमारा खान-पान हो सकता है। अगर हम गरिष्ठ भोजन खाते हैं सी फूड, दाल, राजमा, पनीर और चावल जैसी चीजे लगातार खाते हैं तो हमारा यूरिक एसिड बढ़ जाता है।

डायबिटीज के मरीजों का यूरिक एसिड भी अक्सर बढ़ जाता है।

मोटापा यूरिक एसिड बढ़ने का एक महत्वपूर्ण कारण हो सकता है। मोटापे के कारण हमारी किडनी अच्छी तरह से काम नहीं कर पाती या

हम यह कह सकते हैं कि हम बहुत अधिक खाते हैं जिसके कारण हम बहुत मोटे होते हैं। बहुत मोटे होने के कारण हमारे शरीर से यूरिक एसिड यूरिन के रूप में पूरी तरह से बाहर नहीं निकल पाता।

बीमारियां भी है यूरिक एसिड बढ़ने का कारण

  • स्ट्रेस भी यूरिक एसिड बढ़ने का एक मुख्य कारण हो सकता है। स्ट्रेस के कारण हम तनाव में रहते हैं और हमारी किडनी पूरी तरह से फंक्शन नहीं कर पाती। जिसके कारण हमारे शरीर का यूरिक एसिड हमारे शरीर से बाहर नहीं निकल पाता।
  • पूर्वजों को, माता पिता को यह बीमारी हुई होती है तो हमें यूरिक एसिड होने की संभावना ज्यादा होती है।
  • अगर हमारे शरीर में किडनी की कोई परेशानी होती है तो किडनी प्रॉपर काम नहीं करती जिसके कारण यूरिक एसिड शरीर से बाहर नहीं निकल पाता।
  • हाइपोथायरायडिज्म के कारण शरीर से यूरिक एसिड बाहर नहीं निकल पाता है।
  • अगर किसी को कैंसर है तो कैंसर भी यूरिक एसिड बनने का एक कारण होता है। कैंसर में कीमोथेरेपी की जाती है। वह भी यूरिक एसिड के बढ़ने का कारण होती है।

यूरिक एसिड से कैसे बचे

अगर हमारा खान-पान ठीक नहीं है। हम ऐसे पदार्थों को अधिक मात्रा में लेते हैं जो यूरिक एसिड को बढ़ाते हैं तो हमारा यूरिक एसिड बढ़ जाता है।

  • शरीर में यूरिक एसिड का बढ़ना रोकने के लिए काफी सारा पानी पीना चाहिए। अगर व्यक्ति पानी अधिक मात्रा में पीता है यूरिक एसिड शरीर से यूरिन के रूप में बाहर निकल जाता है। किडनी को काम करने के लिए पानी की आवश्यकता होती है। 
  • धूम्रपान एवं शराब का सेवन नहीं करना चाहिए। यूरिक एसिड के लिए शराब बहुत हानिकारक है। शराब पीने से शरीर में पानी की मात्रा कम हो जाती है।  शरीर को अगर स्वस्थ रखना है तो हमें शराब नहीं पीनी चाहिए और पानी अधिक मात्रा में पीना चाहिए।
  • यूरिक एसिड से बचने के लिए सबसे पहले तो हमें अपने वेट पर ध्यान देना होता है। यूरिक एसिड अधिकतर मोटे लोगों का बढ़ा हुआ होता है। अगर हम अपने वेट को संतुलित कर दें तो यूरिक एसिड अपने आप कम हो जाएगा। 

यूरिक एसिड की सही मात्रा

यूरिक एसिड के विषय में हम सभी को पता है कि शरीर में यूरिक एसिड अधिक मात्रा में या कम मात्रा में नहीं होना चाहिए पर हमें यह नहीं पता कि कितना अधिक मात्रा या कम मात्रा में नहीं होना चाहिए। आइए जानते हैं कि शरीर में यूरिक एसिड किन लोगों में कितनी मात्रा में होना चाहिए।

पुरुषों में यूरिक एसिड की मात्रा 2.5 mg dl – 7 mg/dl है। अगर यूरिक एसिड की मात्रा पुरुषों में 2.5 एमजी से कम है तो इसका मतलब है शरीर में यूरिक एसिड की मात्रा कम है। आपको अपनी डाइट में प्रोटीन बढ़ाने की आवश्यकता है अगर शरीर में यूरिक एसिड की मात्रा 7 एमजी से अधिक है तो इसका अर्थ है कि आपको अपनी डाइट को कंट्रोल करने की आवश्यकता है आपको उपयुक्त डाइट लेनी पड़ेगी।

स्त्रीयों में यूरिक एसिड की मात्रा 1.5 mg /dl – 6.5mg,/dl है। पुरुषों की ही तरह स्त्रीयों को भी अपनी डाइट का ध्यान रखना होगा। अगर आपके शरीर में यूरिक एसिड की मात्रा अधिक है। तो आपको अपनी डाइट को कंट्रोल करना होगा और अगर शरीर में यूरिक एसिड की मात्रा कम है तो अपनी डाइट में प्रोटीन बढ़ाना होगा।

जानिए क्या है प्रेगनेंसी में चीकू खाने के नुकसान, कितना और कैसे खाये

प्रेगनेंसी में चीकू

गर्भावस्था में चीकू खाने के नुकसान स्पष्ट नहीं हैं। हांँ, अधपका चीकू खाने से मुंह कड़वा और गले में खुजली हो सकती है। साथ ही माउथ अल्सर का खतरा भी हो सकता है । इसके अलावा, चीकू में कैलोरी की मात्रा अधिक होती है, इसी वजह से माना जाता है कि इसे अधिक मात्रा में खाने से थोड़ा वजन बढ़ सकता है। ऐसा भी कहा जाता है कि चीकू के अधिक सेवन से पेट में दर्द और डायरिया जैसी समस्या हो सकती हैं। फिलहाल, इस संबंध में कोई सटीक वैज्ञानिक शोध या प्रमाण उपलब्ध नहीं है।

इसलिए प्रेगनेंसी में चीकू का सेवन करते समय कुछ बातों का ध्यान रखना जरूरी है-

  • हमेशा पका चीकू ही खाएं।
  • इसे खाते समय मात्रा का खास ध्यान रखें।
  • कोशिश करें कि एक ही बार में अधिक चीकू न खाएं, बल्कि दिन में दो से तीन बार में खाएं।
  • चीकू को खाते समय उसे अच्छे से छीलकर ही खाएं। जल्दबाजी में छीलते हुए कई बार फल में छिलका छूट जाता है, लेकिन ध्यान दें कि ऐसा न हो।
  • इसे छीलने से पहले अच्छे से हाथ जरूर धोएं ताकि किसी तरह का बैक्टीरियल इंफेक्शन न हो।

संतुलित मात्रा में सेवन

प्रकृति ने हमें अनमोल चीकू जैसे फल से नवाजा है। चीकू में मौजूद गुणकारी पोषक तत्व इसे खास बनाते हैं। गर्भावस्था में अधिक एनर्जी की जरूरत होती है, जिसकी पूर्ति करने में चीकू मदद कर सकता है। चीकू को एनर्जी यानी ऊर्जा का बेहतरीन स्रोत बताया जाता है। दरअसल, इसमें फ्रुक्टोज और सुक्रोज की अच्छी मात्रा होती है और यह दोनों प्राकृतिक तत्व एनर्जी बूस्टर की तरह कार्य करते हैं। इसी वजह से गर्भावस्था में होने वाली कमजोरी के एहसास को कम करने और महिला को ऊर्जावान बनाने में चीकू मदद कर सकता है।

आप इसका संतुलित मात्रा में सेवन करके इसके लाभ उठा सकते हैं। इसे खाते समय ध्यान दें कि गर्भावस्था में किसी भी चीज की अधिकता भारी पड़ सकती है। एक रिसर्च में बताया गया है कि प्रेगनेंसी के समय लिए जाने वाले आहार में चीकू को शामिल करने से मांँ और बच्चे दोनों का स्वास्थ्य बेहतर हो सकता है। दरअसल, इसमें कार्बोहाइड्रेट और एसेंशियल न्यूट्रिएंट्स होते हैं।

इसके सेवन से होने वाले लाभ के बारे में हम यहाँ बात कर सकते हैं।

पोषक तत्व

इसमें हड्डियों के लिए जरूरी कैल्शियम, आयरन, कॉपर और फास्फोरस जैसे पोषक तत्व होते हैं। ये सभी पोषक तत्व मिलकर हड्डियों को मजबूत बनाने और उनके विकास में मदद करते हैं।

स्ट्रेस यानी तनाव से छुटकारा

गर्भावस्था के समय होने वाले स्ट्रेस यानी तनाव से छुटकारा पाने में भी चीकू मदद कर सकता है। दरअसल, चीकू विटामिन-सी से समृद्ध होता है। यह विटामिन प्रतिरक्षा प्रणाली कमजोर होने व अन्य किसी वजह से हुए तनाव को दूर करने का काम कर सकता है।

रक्तचाप नियंत्रण

रक्तचाप नियंत्रण करने के तरीके में चीकू को भी शामिल कर सकते हैं। असल में चीकू मैग्नीशियम से समृद्ध होता है, जो रक्त वाहिकाओं को गतिशील बनाए रखने में सहायक हो सकता है। इसके अलावा, चीकू में पोटैशियम भी होता है, जिसे रक्तचाप और ब्लड सर्कुलेशन को संतुलित रखने के लिए जाना जाता है।

कब्ज से छुटकारा

नसीबीआई (नेशनल सेंटर फॉर बायोटेक्नोलॉजी इंफॉर्मेशन) की वेबसाइट पर पब्लिश एक वैज्ञानिक रिसर्च के अनुसार, गर्भावस्था के दौरान डाइजेशन से जुड़ी समस्या कब्ज का होना आम है। इस समस्या से छुटकारा पाने के लिए चीकू का सेवन लाभदायक हो सकता है। चीकू में फाइबर भरपूर मात्रा में होता है। यह लैक्सेटिव की तरह कार्य करके पेट से मल को बाहर निकालने और पाचन में मदद करने का काम कर सकता है।

अतः इसे फल की तरह या फ्रूट सलाद के रूप में सुबह या दोपहर के समय खा सकते हैं। इसके हलवे को मीठे के रूप में खाना खाने के बाद खाया जा सकता है।

अब सवाल ये उठता है कि कितना खाएं?

आइये आपको बताते हैं, गर्भावस्था में प्रतिदिन चीकू के सेवन की सुरक्षित मात्रा को लेकर किसी तरह की सटीक जानकारी उपलब्ध नहीं है। हांँ, ऐसा बताया जाता है कि प्रतिदिन 200 ग्राम तक चीकू का सेवन सुरक्षित हो सकता है। इस संबंध में प्रकाशित एक वैज्ञानिक शोध के मुताबिक, प्रतिदिन 5000 mg प्रति किलो वजन के अनुसार इसे लेना सुरक्षित है। इस हिसाब से 50 किलो वजन वाले 250 ग्राम तक चीकू का सेवन कर सकते हैं।

आप चाहें तो गर्भावस्था में चीकू के सेवन की सही मात्रा जानने के लिए आहार विशेषज्ञ से भी मदद ले सकते हैं।

Menstrual leave-क्या है भारतीय नियम और पॉलिसी

Menstrual leave-क्या है भारतीय नियम और पॉलिसी

सभी जानते हैं कि महिलाओं को पीरियड के दौरान पहले तीन दिन काफी परेशानी का सामना करना पड़ता है, पूरे विश्व की महिलाओं पर अगर सर्वे कर लिया जाये तो अमूमन यही बात निकलकर सामने आयेगी कि इस दौरान उनकी कार्यक्षमता घट जाती है और शारिरिक परेशानियों के चलते वे चिडचिडी़ भी हो जाती हैं।

हमारे समाज में इसपर खुलकर बात नहीं होती, क्योंकि इसे टैबू की तरह देखा गया है। हालत बयां करने का रास्ता नहीं दिखने और चुपचाप बैठकर पीड़ा सहन करने के चक्कर में कई बार महिलाओं की तबीयत काफी बिगड़ जाती है।

कामकाजी महिलायें इस दौरान छुट्टी भी ले लेती हैं लेकिन उसमें उनका वेतन कटता है इसलिए ये बात सामने आयी कि महिलाओं को पीरियड के दौरान छुट्टी दी जाए।

पीरियड
पीरियड

पीरियड के दौरान औरतों को दर्द का सामना करना पड़ता है। यह दर्द उनकी लाइफ को काफी प्रभावित करता है। स्पेन पहला पश्चिमी देश बनने जा रहा है, जो मासिक धर्म के पेन के कारण महिलाओं को मेंस्ट्रुअल लीव देगा। यह छुट्टी हर महीने 3 दिन की हो सकती है।

पिछले दिनों हमारे देश में ये बातें तब शुरू हुई , जब कुछ कंपनियों ने अपनी महिला कर्मचारियों को ये सुविधा देने की घोषणा की, तब तमाम तरह की प्रतिक्रियाएं सोशल मीडिया पर इस समबन्ध में आई, कुछ लोंगों ने तो इसे बराबरी में खतरे की तरह देखा।

बोलूं या न बोलूं। महिलाएं इस संकोच में चुप रह गईं , लेकिन दीपिंदर गोयल ने परवाह किए बिना पूछ डाला, ‘महीने में कितने दिन आपको पीरियड्स के दर्द की वजह से ऑफिस से छुट्टी करनी पड़ती है?’

देश के बड़े फूड डिलिवरी ऐप ज़ोमैटो के फाउंडर और चीफ एग्ज़िक्यूटिव ऑफिसर गोयल ने यह सवाल अपने चार हज़ार कर्मचारियों के सामने रखा। फिर बेबाकी से कंपनी में काम कर रहीं महिलाओं और ट्रांसजेंडर को साल में 10 छुट्टी देने का ऐलान कर दिया। ज़ोमैटो का यह फैसला तुरंत चर्चा का विषय बन गया और लौट आई वर्षों से चल रही बहस।

पीरियड के लिए अलग से छुट्टी देना कितना जायज़ है?

इसका विरोध करने वालों में सबसे आगे नाम आता है जानी-मानी पत्रकार बरखा दत्त का। उनका मानना है कि इस तरह की पॉलिसी महिलाओं के साथ भेदभाव का ज़रिया बनेगी। उन्होंने ट्वीट किया, ‘इससे महिलाओं की सेना में भर्ती होने, फाइटर जेट उड़ाने, वॉर रिपोर्टिंग करने, स्पेस में जाने जैसी इच्छाएं और बड़ी ज़िम्मेदारियों के मौके मारे जाएंगे।’ इससे पहले 2017 में भी उन्होंने पीरियड लीव के ख़िलाफ कई ट्वीट्स के ज़रिए पक्ष रखा था।

बरखा के ट्वीट का कई महिलाओं-पुरुषों ने समर्थन किया, तो बढ़-चढ़कर विरोध भी हुआ। महिलाओं के हक़ में आवाज़ उठाने वाली एक्टिविस्ट रितुपर्णा चटर्जी ने लिखा, ‘पीरियड का अनुभव सबके लिए एक-सा नहीं होता। जो वर्षों से इसके भयंकर दर्द से गुज़र रही हैं, उनका उसपर बस नहीं। उन्हें लीव का अधिकार मिलना चाहिए। छुट्टी करें या न करें, यह उनका फैसला है।’

यूँ तो महिलाओं के कल्याण के लिए बहुत सारे बिल समय समय पर सरकार की ओर से पास होते रहे हैं,लेकिन सबसे ज्यादा जरूरी “मेंसुरेशन बेनेफिट बिल 2017′” अरुणाचल प्रदेश के एक कांग्रेसी सांसद निनॉन्ग इरिंग ने 2017 में सदन में पेश किया । इस बिल में पीरियड्स के दौरान प्राइवेट और सरकारी दोनों क्षेत्रों में काम करने वाली महिलाओं को 2 दिनों की छुट्टी देने का प्रावधान था, इसके अलावा पीरियड्स के दौरान ऑफिस में महिलाओं के आराम करने की व्यवस्था करने की बात भी शामिल थी।
इस बिल को 2017 के आखिर में आम सहमति मिली और 2018 में वो संसद में पास हो गया।

हर महीने होने वाले पीरियड महिलाओं के लिए कई तरह की परेशानियां साथ लेकर आते हैं। कइयों के लिए इसका दर्द असहनीय होता है। पेट में एक अजीब ऐंठन। कमर जाम हो जाना। पैरों में फटन। कमज़ोरी और कभी-कभी तो उल्टी-बेहोशी तक नौबत पहुंच जाती है।

स्पैनिश गायनोकोलॉजी एंड ऑब्सटेट्रिक्स सोसाइटी का कहना है कि एक तिहाई महिलाएं अपने पीरियड्स के दौरान गंभीर दर्द से पीड़ित होती हैं। लक्षणों में तेज पेट दर्द, सिरदर्द, दस्त और बुखार शामिल हैं। कई महिलाओं को मासिक धर्म से पहले भी पेन होता है।

हम एक ऐसे देश में रहते हैं , जहां पीरियड्स को एक टैबू माना जाता है। यहां लड़कियों को शुरू से ही पीरियड्स पर खुलकर बात करने की इजाजत नहीं है। लेकिन हमें सोशल मीडिया का शुक्रगुजार होना चाहिए कि लोग अब इस मुद्दे पर चर्चा करने लगे हैं। यहां तक कि कई देशों ने तो वुमेन एम्प्लॉयीज के लिए पीरियड लीव भी देनी शुरू कर दी है। अच्छी बात ये है कि इनकी देखा-देखी Swiggy, Goozop, Byjus जैसी भारत की कुछ कंपनियों ने भी अपनी फीमेल एम्प्लॉयीज को पीरियड के दौरान एक या दो दिन की छुट्टी देने का सिस्टम बनाया हुआ है। अमेरिकन अकेडमी ऑफ फैमिली फिजिशियन के अनुसार, पीरियड में दर्द होना आम है। पांच में से लगभग एक महिला को इतनी तेज दर्द होता है कि उसकी रोजाना गतिविधियां भी बाधित हो जाती हैं।

तो आइए जानते हैं उन देशों के बारे में, जो महिलाओं को पीरियड लीव देते हैं, स्पेन के अलावा अन्य कईं देशों में ये प्रावाधान है, जापान, दक्षिण कोरिया, इंडोनेशिया और जाम्बिया राष्ट्रीय स्तर पर मासिक धर्म की छुट्टी की पेशकश करते हैं। संयुक्त राज्य में कुछ कंपनियां मासिक धर्म अवकाश प्रदान करती हैं।

Tomato flu, tomato fever symptoms in hindi-टोमैटो फीवर के कारण, लक्षण और उपचार

टोमैटो फीवर के कारण, लक्षण और उपचार

Tomato flu

कोरोना वायरस महामारी का खौफ अभी तक खत्म नहीं हुआ है. इस बीच एक नई बीमारी का खतरा मंडराने लगा है, और अभी तक की जो भी रिपोर्ट आई हैं उससे ऐसा प्रतीत होता है कि ये टमाटर बुखार छोटे बच्चों के लिए खतरा बना हुआ है। केरल के कई हिस्सों में ये वायरस पाया गया है, बता दें कि वायरस का पता चलने के बाद, इससे पीड़ित सभी लोगों की टेस्टिंग की जा रही है. राज्य में अब तक पाँच साल से कम उम्र के 80 से ज्‍यादा बच्चे इस वायरस से संक्रमित हुए हैं।

एक निवारक कदम के रूप में, आंँगनवाड़ी सुविधाओं को बंद कर दिया गया है, और अधिकारियों ने जागरूकता बढ़ाने के लिए छोटे क्षेत्रों में जागरूकता अभियान शुरू किया है।

टोमैटो फीवर क्या है?

टोमैटो फीवर एक अज्ञात वायरस बुखार है जो केरल में पांच साल से कम उम्र के बच्चों में पाया गया है, और वायरस के संक्रमण से फैलता है, इससे संक्रमित बच्चों को रैशेज और फ़फ़ोले हो जाते हैं, ये रैशेज और फ़फ़ोले आमतौर पर लाल होते हैं। इसलिए इसे टोमैटो फीवर कहा जाता है, बता दें कि अभी तक ये फ्लू केरल के कुछ हिस्सों में ही पाया गया है, लेकिन स्वास्थ्य अधिकारियों ने चेतावनी दी है कि अगर संक्रमण को रोकने के उपाय नहीं किए गए तो ये वायरस और फैल सकता है।

टोमैटो फीवर के लक्षण

टोमैटो फीवर के मुख्य लक्षण है

  • रेड रैशेज,
  • तेज बुखार
  • छाले,
  • स्किन में जलन
  • डिहाइड्रेशन

इसके अलावा, संक्रमित बच्चों में तेज बुखार, हाथों में दर्द, जोड़ों में सूजन, थकान, पेट में ऐंठन, जी मिचलाना, उल्टी, दस्त, खांसी, छींक और नाक बहना और हाथों के रंग में बदलाव जैसे लक्षण होते हैं.

बुखार
बुखार

क्या टोमेटो फ्लू छूत की बीमारी है?

फ्लू के अन्य मामलों की तरह, टमाटर फ्लू संक्रामक है। आपको जानकर हैरानी होगी कि टमाटर फ्लू एक छूत की बीमारी है जो छूने से फैलती है। इसलिए अगर आपके आस-पास कोई इस बीमारी से पीड़ित है तो उससे दूर रहें और खासकर बच्चों को मरीज के करीब न आने दें। यह गलती आपके बच्चे को भारी पड़ सकती है। अगर आपका बच्चा इस गंभीर बीमारी से ग्रसित हो गया है, तो उसे अलग-थलग रखें और उसके आसपास थोड़ा काम करें। फिलहाल इस लेख को लिखते समय यह राहत की बात है कि टमाटर फ्लू से अब तक किसी की मौत नहीं हुई है।

टोमैटो फीवर होने पर क्या करें?

विशेषज्ञों के पास अभी तक टोमैटो फीवर को लेकर कोई विशेष जानकारी नहीं है इसलिए इसका कोई सटीक कारण और इलाज अभी तक नहीं मिल पाया है। अभी इससे संक्रमित बच्चों का इलाज भी अन्य फ्लू की तरह से ही किया जा रहा है। टोमैटो फीवर के तेज़ी से फैलने के खतरे को देखते हुए सरकार द्वारा सलाह दी गई है कि इसके लक्षण दिखते ही डॉक्टर से संपर्क ज़रूर करें। इसके अलावा साफ-सफाई का उचित ध्यान रखने, सही डाइट और संक्रमित लोगों से दूरी बनाकर रखने से आप इस स्थिति का शिकार होने से अपने बच्चों को बचा सकते हैं और इस संक्रमण को फैलने से रोक सकते हैं।

इस तरह लें सावधानी…

  • बच्चों में कुछ भी लक्षण दिखें तो तुरंत डॉक्टर्स से सलाह लें ।
  • बच्चों को ज़्यादा से ज़्यादा पानी और तरल पदार्थों दें।
  • छालों पर खुजली ना करने दें।
  • कमरे का तापमान कम रखें जिससे छालों में जलन से परेशानी ना हो ।
  • बच्चों को कम तला और मसालें का खाना दें,सादा भोजन ही दें ।
  • बच्चों को कम से कम एक हफ्ते का बेड रेस्ट दें
  • कोई भी दवाई देने से पहले डॉक्टर की सलाह अवश्य लें ।
  • बच्चे को आइसोलेट रखें और साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखें
  • स्वस्थ बच्चों को संक्रमित बच्चों से दूर रखें ।

हमेशा याद रखिए जानकारी है तो बचाव है।

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