क्या है लू लगने के लक्षण व उपचार-loo lagne ke lakshan aur upay

क्या है लू लगने के लक्षण व उपचार

loo lagne ke lakshan aur upay

गर्मियों के मौसम में जब कोई व्यक्ति ज्यादा देर तक धूप के में रहता है तो उसका सिर और चेहरा गर्म हवाओं के संपर्क में आता है इसके कारण उसके शरीर का तापमान बहुत बढ़ जाता है और  बेचैनी होने लगती है इसे लू लगना कहते हैं । लगातार 40 डिग्री से अधिक तापमान के संपर्क में रहने पर लू लग सकती है।

लू के लक्षण-loo lagne ke lakshan

लू लगने पर शरीर का तापमान बढ़ जाता है , बेचैनी होने लगती है, उल्टी होना, सिरदर्द और चक्कर आने लगते हैं । कभी-कभी सांस लेने में तकलीफ भी हो सकती है । आप शुरुआत में लू के लक्षण हल्के होते हैं परंतु यदि वक्त रहते इलाज न किया जाए तो गंभीरता बढ़ सकती है । लू लगने पर शरीर का तापमान बढ़ जाता है अधिक तापमान होने पर भी शरीर से पसीना नहीं निकलता है, कभी-कभी लू के लक्षण विपरीत भी हो सकते हैं जिसमें बहुत ज्यादा मात्रा में पसीना निकलना शुरू हो जाता है । शरीर का तापमान बढ़ने पर त्वचा का रंग भी लाल हो जाता है । लू लगने पर दस्त भी लग सकती है । उल्टी और दस्त होने के कारण शरीर में सोडियम और पोटेशियम की कमी हो जाती है । जिनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर होती है वह लोग लू लगने पर बेहोश तक हो जाते हैं ।

बच्चों को लू लगने के लक्षण-loo lagne ke lakshan in hindi

बच्चों में लू लगने का खतरा अधिक होता है। बच्चों को लू लगने पर उनके शरीर का तापमान बढ़ जाता है इसके अलावा बच्चों को लू लगने के लक्षण हैं सांसो का तेजी से चलना, बार-बार प्यास लगना, चिड़चिड़ापन,होंठ सूखना, त्वचा का लाल और शुष्क होना, चक्कर आना, सिर दर्द ,उल्टी दस्त, सुस्ती अथवा बेहोशी आदि होते हैं ।

चक्कर आना
चक्कर आना

लू लगने के घरेलू उपचार

हर साल गर्मियों के मौसम में तापमान की अधिकता के कारण कई लोग लू की चपेट में आ जाते हैं और कुछ लोगों की मृत्यु तक हो जाती है। कहते हैं सावधानी ही बचाव है इसलिए आइए जानते हैं गर्मियों के मौसम में लू लगने से कैसे बचा जा सकता है

  • ज्यादा देर धूप में रहने से बचें । ज्यादा देर धूप में रहना है तो छाते का इस्तेमाल करें।
  • गर्मियों के मौसम में कभी भी खाली पेट घर से बाहर ना निकले।
  • समय-समय पर पानी पीते रहे ,शरीर में पानी की कमी ना होने दें। यदि घर से बाहर निकल रहे हैं तो अपने साथ एक बोतल पानी अवश्य रखें।
  • हल्के रंगों वाले आरामदायक सूती कपड़े पहनें ।
  • पूरी बाजू के कपड़े पहने और नंगे पांव ना निकलें।
  • मौसमी फलों जैसे खरबूज, तरबूज इत्यादि का सेवन करें । इनमे में अत्यधिक मात्रा में पानी पाया जाता है जो शरीर को हाइड्रेटेड रखता है।

लू लगने पर क्या करें

सबसे पहले व्यक्ति को किसी छायादार स्थान पर लेकर जाकर लिटाएं। शरीर को ठंडा रखने के लिए गीले कपड़े से शरीर को पोछें । यदि व्यक्ति ने टाइट कपड़े पहन रखे हैं तो उन्हें ढीला कर दें । खिड़की दरवाजे खोल दें और ताजी हवा आने दें । कूलर अथवा एसी है तो ऑन कर दें। आराम महसूस होने पर व्यक्ति को तुरंत सादा पानी अथवा ओ आर एस का घोल पिलाएं। यदि व्यक्ति बेहोश हो गया है या गंभीर लक्षण दिखाई दे रहे हैं तो तुरंत डॉक्टर के पास लेकर जाएं ।

लू लगने के घरेलू उपचार

लू लगने पर अधिकतर घरेलू उपायों द्वारा इसे ठीक किया जा सकता है। आइए जानते हैं लू लगने के घरेलू उपचार कौन-कौन से हैं

  • लू के लक्षण लगने पर आम के पने का सेवन सबसे ज्यादा लाभदायक होता है ।
  • प्याज को भून कर उसमें पिसी हुई मिश्री और भुना हुआ जीरा मिलाकर खाने से लू में फायदा होता है। रोजाना कच्चे प्याज का सेवन करने से लू नहीं लगती ।
  • लू लगने पर नींबू पानी बनाकर पीने से भी लाभ मिलता है ।
  • पैरों के तलवे पर पुदीने की पत्तियों को पीसकर लगाने से लू में लाभ मिलता है।
  • कच्चे नारियल की गिरी को पीसकर उसके रस में काला नमक मिलाकर पीने से भी लू में तुरंत आराम मिलता है । इसके अलावा नारियल पानी के सेवन से भी लू लगने में फायदा होता है।
  • सौंफ की तासीर ठंडी होती है इसलिए सौंफ के पानी में थोड़ा सा पुदीने का रस मिलाकर देने से भी लाभ होता है ।
  • लू लगने पर व्यक्ति को अधिक से अधिक मात्रा में तरल पदार्थ जैसे नींबू पानी, छाछ, फलों का रस आदि देते रहे ।

यदि लू लगने पर गंभीर लक्षण दिखाई दे रहे हैं जैसे शरीर का सुन्न पड़ना, बेहोशी आदि ऐसी स्थिति में तुरंत डॉक्टर के पास ले कर जाएं ।

गर्भपात से जुड़े कुछ सामान्य सवाल और जरूरी जानकारी (भाग-2)

गर्भपात से जुड़ी जानकारी

कई बार इंटरकोर्स के बाद अनचाहे गर्भ का खतरा बढ़ जाता है। कुछ सावधानियों के साथ नियमित अंतराल में गर्भपात भी किया जा सकता है। आज हम आपको ऐसे ही कुछ तरीकों और उनसे जुड़े कुछ आवश्यक सवाल के बारे में बताने जा रहे हैं।

बता दें कि प्रेग्नेंसी के 3 महीने बाद तक अबॉर्शन किया जा सकता है। इसके बाद गर्भपात महिला की जान के लिए खतरा बन सकता है। इसके अलावा 18 साल से कम और 40 साल से अधिक उम्र की महिलाओं का गर्भपात बेहद खतरनाक साबित हो सकता है।

Frequently Asked Questions in Hindi – सामान्य प्रश्न

गर्भ गिराने के लिए पपीता कैसे खाएं?

गर्भ गिराने के लिए पपीते का सेवन एक कारगर नुस्खा है। गर्भ गिराने के लिए कच्चे पपीते का सेवन करना चाहिए । कच्चे पपीते में लेटेक्स नामक पदार्थ की अधिकता होती है जो गर्भाशय को संकुचित करता है जिसके कारण गर्भपात हो जाता है । इसके अलावा पपीते के बीजों का सेवन गर्भनिरोधक के रूप में किया जाता है ।

प्रेगनेंसी नहीं चाहिए तो क्या करना चाहिए?

वैसे तो मातृत्व सुखद एहसास है लेकिन अनचाहा गर्भ कोई नहीं चाहता । आइए जानते हैं प्रेगनेंसी रोकने के घरेलू नुस्खे यदि आप प्रेगनेंसी नहीं चाहती हैं तो असुरक्षित संभोग के बाद शलजम का सेवन करें गर्भधारण को रोकता है । इसके अलावा पपीते के बीज,आंवला,अदरक आदि के सेवन से भी अनचाहा गर्भ रोका जा सकता है। अनचाहे गर्भ को रोकने के लिए नीम का तेल के कारगर उपाय है इसे वेजाइना में क्रीम के रूप में लगाकर अनचाहे गर्भ को रोका जा सकता है । सेक्स के बाद अजमोद के पानी का कुछ समय तक सेवन करने से भी गर्भ नही ठहरता। इन सभी घरेलू नुस्खे उनके अलावा कंडोम, गर्भनिरोधक गोलियां, कॉपर टी आदि कई सारे विकल्प बाजार में मौजूद हैं जिनके माध्यम से अनचाहे गर्भ को रोका जा सकता है ।

गर्भपात के लिए काढ़ा कैसे बनाएं?

गर्भपात के लिए कई सारे घरेलू नुस्खे उपलब्ध है परंतु उनमें से तुलसी का काढ़ा सबसे कारगर उपाय है। आइए जानते हैं गर्भपात हेतु तुलसी का काढ़ा कैसे बनाएं सामग्री दो कप पानी एक टुकड़ा अदरक 4 से 5 लौंग काली मिर्च पांच से छह पांच से छह तुलसी पत्ती दो चम्मच शहद दालचीनी 1 इंच विधि सबसे पहले एक पतीले में दो कप पानी डालकर गर्म करने के लिए रखें । अदरक , लौंग ,काली मिर्च ,तुलसी की पत्तियों और दालचीनी का पेस्ट बनाएं ।अब इस फेस को पानी में डालकर 15 से 20 मिनट तक उबालें। थोड़ा ठंडा होने दें और कप में छान कर दो चम्मच शहद मिलाएं और सेवन करें । इस काढ़े का सेवन दिन में दो बार करें ।

क्या खाने से मिसकैरेज होता है?

गर्भावस्था के दौरान कुछ ऐसी चीजें होती है जिनका सेवन करने से गर्भपात हो सकता है । आइए जानते हैं, वो चीजें कौनसी हैं - *कच्चा पपीता - कच्चे पपीते में लेटेस्ट नामक पदार्थ पाया जाता है जो गर्भपात का कारण हो सकता है । *कच्चा अंडा - कच्चे अंडे से सेलमोनेन संकर्मण का खतरा होता है जिससे गर्भपात हो सकता है । इसके अलावा कैफीन ,अल्कोहल ,अधपका या प्रोसेस्ड मीट,एलोवेरा, अन्नानास,सहजन, तिल जैसे गर्म प्रकृति की चीजों के सेवन से गर्भपात होता है ।

बच्चा कैसे गिराना चाहिए?

गर्भावस्था के शुरुआती हफ्तों में बच्चा गिराने के तरीके - गर्भावस्था के शुरुआती हफ्तों में बच्चा गिराने के लिए घरेलू नुस्खा का प्रयोग किया जा सकता है। घरेलू नुस्खे पपीते का सेवन, तुलसी के काढ़े का सेवन आदि कुछ कारगर उपाय हैं । 2 से 4 महीने की गर्भावस्था में बच्चा गिराने के तरीके - गर्भावस्था के समय अवधि यदि 2 महीने से अधिक हो गई हो तो इसके लिए घरेलू नुस्खा के स्थान पर अनुभवी डॉक्टर से सलाह लेकर गर्भपात की गोलियां, डी एन सी अथवा डॉक्टर द्वारा सुझाए गए अन्य तरीकों का प्रयोग कर बच्चा गिरवाना चाहिए । 6 महीने की गर्भावस्था में बच्चा गिराने के तरीके -6 महीने की गर्भावस्था तक भ्रूण का विकास काफी अधिक हो चुका होता है अतः इस अवस्था में बच्चा गिराने की किसी अनुभवी डॉक्टर की सलाह लेनी चाहिए और यदि बहुत जरूरी हो तभी बच्चा गिराने के बारे में सोचना चाहिए ।

क्या पपीता खाने से गर्भ गिर जाता है?

गर्भावस्था के दौरान पपीता खाने को लेकर कई सारे तर्क दिए जाते हैं। ये सही है की गर्भावस्था के शुरुआती महीनों में कच्चे पपीते का सेवन गर्भपात का खतरा पैदा करता है । कच्चे पपीते में लेटेस्ट नाम का पदार्थ पाया जाता है जिसे कारण गर्भाशय सिकुड़ जाता है जिससे गर्भपात हो सकता है । गर्भावस्था के दौरान पापा पपीता खाया जा सकता है परंतु उसकी मात्रा बहुत ही सीमित होनी चाहिए ।

पेट में बच्चा कैसे खराब होता है?

पेट में बच्चा खराब होने के तीन प्रमुख कारण माने गए हैं 1. प्लेसेंटा अथवा गर्भनाल शिशु को पोषक तत्व, और ऑक्सीजन मिलती है यदि गर्भनाल में किसी प्रकार की समस्या होती है तो शिशु का विकास रुक जाता है और उसकी मृत्यु हो जाती है। इसके अलावा कभी-कभी गर्भनाल भशिशु की गर्दन की चारों ओर लपेट जाती है जिसके कारण भी शिशु की मौत हो जाती है । 2. यदि गर्भवती महिला किसी भी प्रकार की गंभीर बीमारी जैसे कैंसर, किडनी की समस्या अथवा हाई ब्लड प्रेशर, थायराइड , डायबिटीज से ग्रसित है तब भी कभी-कभी बच्चा पेट में मर जाता है । 3. इन सबके अलावा अधिक मात्रा में धूम्रपान करने , अल्कोहल का सेवन करने या डिप्रेशन के कारण भी गर्भ में बच्चे की मौत हो जाती है ।

10 दिन का गर्भ कैसे गिराया जाता है?

10 दिन के गर्भ हो गिराना आसान होता है । 10 दिन के गर्भ को गिराने के घरेलू नुस्खा प्रयोगी सर्वोत्तम होता है। इसके लिए कच्चे पपीते का सेवन किया जा सकता है इसके अलावा तुलसी के काढ़े से भी से भी गर्भपात हो जाता है। अधिक मात्रा में शारीरिक श्रम करने से, उछल कूद करने से तथा गर्म प्रकृति की चीजों जैसे तिल, अजवाइन आदि का सेवन करने से भी 10 दिनों के गर्भ को गिराया जा सकता है ।

क्या चीज खाने से बच्चा गिर जाता है?

कच्चा पपीता, कच्चा अंडा से गर्भपात हो सकता है। इसके अलावा कैफीन ,अल्कोहल ,अधपका या प्रोसेस्ड मीट,एलोवेरा, अन्नानास,सहजन, तिल जैसे गर्म प्रकृति की चीजों के सेवन से गर्भपात होता है ।

गलती से प्रेग्नेंट हो जाए तो क्या करें घरेलू उपाय हिंदी?

यदि आप प्रेगनेंसी नहीं चाहती हैं तो असुरक्षित संभोग के बाद शलजम का सेवन करें गर्भधारण को रोकता है । इसके अलावा पपीते के बीज,आंवला,अदरक आदि के सेवन से भी अनचाहा गर्भ रोका जा सकता है। सेक्स के बाद अजमोद के पानी का कुछ समय तक सेवन करने से भी गर्भ नही ठहरता।

क्या चीज खाने से गर्भपात हो जाता है?

*कच्चा पपीता - कच्चे पपीते में लेटेस्ट नामक पदार्थ पाया जाता है जो गर्भपात का कारण हो सकता है । *कच्चा अंडा - कच्चे अंडे से सेलमोनेन संकर्मण का खतरा होता है जिससे गर्भपात हो सकता है । इसके अलावा कैफीन ,अल्कोहल ,अधपका या प्रोसेस्ड मीट, एलोवेरा, अन्नानास, सहजन, तिल जैसे गर्म प्रकृति की चीजों के सेवन से गर्भपात होता है ।

प्रेगनेंसी में गाजर के बीज खाने से क्या होता है?

प्राचीन काल से गाजर के बीजों का सेवन गर्भनिरोधक के रूप में किया जा रहा है । गाजर के बीजों की प्रकृति गरम होती है इसलिए गर्भावस्था के दौरान इनका सेवन करने से गर्भपात होने की संभावना हो सकती है । गाजर के बीजों के स्थान पर गाजर का सेवन गर्भावस्था के दौरान लाभदायक होता है।

 

गर्भपात से जुड़े कुछ सामान्य सवाल और जरूरी जानकारी (भाग-1)

गर्भपात

अजवाइन से गर्भपात हो सकता है क्या?

अजवाइन से गर्भपात कैसे करे

अजवाईन में भरपूर मात्रा में प्रोटीन, फाइबर , कैल्शियम, आयरन, फैटी एसिड और पोषक तत्व होते है।जो कि पेट के लिये लाभदायक है। साथ ही इसमें बोलाटाईल ऑइल भी होता है जिससे इसकी खुश्बू तेज हो जाती है और इसकी तासीर गर्म हो जाती है इस कारण यह गर्भपात होने का खतरा रहता है तब ही इसे खाने से पहले डाक्टर की सलाह जरूर ले।। घरेलू नुस्खे के तौर पर इसे गर्भपात के लिये प्रयोग किया जाता है ।

क्या चीज खाने से बच्चा गिर जाता है?

कच्चा अण्डा खाने से बच्चा गिर जाता है इसमें सालमोनेला बैक्टीरिया होता है । शराब के सेवन से भी बच्चा गिर जाता है।पपीता खाने से भी मिसकैरेज हो जाता हैपपीता में लेटेक्स होता है जो यूटेराईन कंस्ट्रक्शन शुरू कर देता है ।ऐलोवेरा का सेवन करने से भी मिसकैरेज हो जाता है ।अदरक काफी भी सीमित मे प्रयोग करना चाहिये । चायनीज फूड को भी नहीं खाना चाहिए इसमें मोनो सोडियम गूलामेट होताऔर ज्यादा नमक भी जो बच्चे के लिये हानिकारक होता है।

पपीता से गर्भ कैसे गिराये?

गर्भपात के पपीते का सेवन सबसे कारगर उपायों में से एक है। पपीते से गर्भपात करवाने के लिए गर्भ ठहरने के शुरुआती हफ्तों में अधिक से अधिक मात्रा में कच्चे पपीते का सेवन करें। कच्चे पपीते में लेटेस्ट की मात्रा अधिक होती है इसके कारण गर्भाशय संकुचित हो जाता है और गर्भ गिर जाता है । इसके अलावा पपीते के बीजों का सेवन अनचाहे गर्भ धारण को रोकने के लिए कारगर उपाय है।

6 महीने का गर्भ कैसे गिराए?

यदि आप अनचाहे गर्भ से छुटकारा पाना चाहती हैं तो इसके लिए शुरुआती 5से 6 हफ्ते का समय सबसे उचित रहता है इसके बाद जैसे-जैसे वक्त बढ़ता जाता है जटिलताएं बढ़ने लगती है । 6 महीने का गर्भ काफी बड़ा होता है इसलिए इसे गिराने के लिए किसी प्रकार के घरेलू उपाय ना अपनाएं यह गर्भवती के लिए अत्यंत हानिकारक हो सकता है । 6 महीने के गर्भ को गिराने के लिए डॉक्टर की मदद से ही हॉस्पिटल में गर्भपात करवाएं ।

गर्भपात के कितने दिन बाद प्रेगनेंसी टेस्ट करना चाहिए?

यदि आपने गर्भपात के लिए अबॉर्शन किट का प्रयोग किया है किया है तो ब्लीडिंग बंद होने के तीन से चार हफ्ते बाद प्रेगनेंसी टेस्ट करना चाहिए या सटीक परिणाम देता है परंतु अगर आप जल्दी परिणाम जानने की इच्छुक हैं तो आपको गायनेकोलॉजिस्ट से संपर्क करके अल्ट्रासाउंड या ब्लड टेस्ट करवाना चाहिए। इसके अलावा यदि आप गर्भपात के बाद गर्भधारण हेतु प्रयास कर रही हैं तो पीरियड मिस होने के हफ्ते भर बाद प्रेगनेंसी टेस्ट करना सही परिणाम देता है ।

बार बार गर्भपात करने से क्या होता है?

अनचाहे गर्भ से छुटकारा पाने के लिए कई जोड़े बार बार गर्भपात का सहारा लेते हैं। बार बार गर्भपात कराने से गर्भाशय ग्रीवा कमजोर हो जाती है किसी कारण अगली बार गर्भधारण करने में समस्या उत्पन्न हो सकती है। इसके अलावा महिला के शरीर में खून की कमी, इन्फेक्शन ,रक्तस्राव, संक्रमण, ऐंठन, एनेस्थेसिया से संबन्धित जटिलताएं, एम्बोलिज़्म, गर्भाशय में सूजन, एंडोटोक्सिक शॉक आदि कई सारी समस्याएं उत्पन्न हो सकती है इसलिए बार बार गर्भपात कराने के स्थान पर परिवार नियोजन के तरीके अपनाकर गर्भधारण को रोकना ही ज्यादा कारगर उपाय है।

जानिए क्या है बेटनोवेट सी के फायदे – Betnovate c uses in hindi

बेटनोवेट सी के फायदे

बेटनोवेट सी स्किन क्रीम जो शायद एक ऐसी क्रीम है जो लगभग हर घर मे मिलती है। बेटनोवेट सी एक कॉर्टिकोस्टेरॉयड ड्रग है।साधारणतया यह त्वचा पर होने वाली किसी भी प्रकार की एलर्जी के लिए प्रयोग की जाती है। बेटनोवेट से गोरे होते है ये मिथक भी काफी प्रसिद्ध है। पर हम आपको बता दे को बेटनोवेट सी त्वचा को गोरा करने का कोई दावा नही करता। अगर आप लगातार अपने चेहरे पर बेटनोवेट सी का प्रयोग कर रहे है, तो सावधान रहे। ये आपको गोरा करने की बजाय अन्य नुकसान कर सकती है। ग्लैक्सोस्मिथक्लाइन द्वारा निर्मित बेटनोवेट सी क्रीम के बारे में ही आज ये आर्टिकल हैं। आज हम आपको बताएंगे कि बेटनोवेट सी कहाँ कहाँ इस्तेमाल होती है, बेटनोवेट सी क्रीम के फायदे और नुकसान, बेटनोवेट सी कैसे काम करती है, बेटनोवेट सी क्रीम चेहरे पर लगाने से क्या होता है और इसके क्या साइड इफेक्ट्स होते हैं।

बेटनोवेट सी क्रीम के फायदे और नुकसान

बीटामेथासोन

बीटामेथासोन वैलेरेट स्टेरॉयड नामक दवाओं के एक समूह से संबंधित है। यह सूजन और जलन को कम करने में मदद करता है।

क्लीओकुइनोल

क्लीओकुइनोल एक प्रकार का एंटी-संक्रमित दवा है। यह त्वचा के जीवाणु और फंगल संक्रमण से लड़ता है।

बेटनोवेट सी स्किन क्रीम कैसे काम करता है – Betnovate C Skin Cream Uses In Hindi

बेटनोवेट सी स्किन क्रीम एक कॉर्टिकोस्टेरॉयड ड्रग है। यह अपने एंटीबैक्टीरियल प्रभाव के कारण बैक्टीरिया को मारकर एलर्जी और खुजली आदि को दूर करता है।

बेटनोवेट सी लगाने के फायदे-Betnovate C Cream Ke Fayde In Hindi

बेटनोवेट सी कई प्रकार की त्वचा सम्बन्धी समस्याओं में फायदा करती है। आज हम आपको बताएंगे बेटनोवेट सी के फायदे, कुछ ऐसे, जिनके बारे में शायद आप न जानते हो।

त्वचा सम्बन्धी समस्याए, जैसे काले धब्बे के लिए बेटनोवेट सी

सोरयसिस [Psoriasis, खुजली [Eczema] Dermatitis [चमड़ी में खुजली दाद ], चर्म रोग [Skin disease], पिंपल्स के लिए बेटनोवेट सी [Pimple on the face], मुहाँसे[Acne], वल्गारिस, प्रुरिटस जैसी स्वास्थ्य समस्याए।

और पढ़ें: खुजली ठीक करने के उपाय दूर करे लंबे समय की खुजली

मुहाँसे
मुहाँसे

विभिन्न संक्रमण

एथ्लीट फूट [Athletic foot पैरो में फंगल होना ] वेजिनल yeast infection योनि और योनि के मुख पर सूजन, तीव्र खुजली, खाज खुजली में, Herpes simplex [सेक्सुअली ट्रांसमिटेड डिजीज, जो मुँह और योनि के किनारों को प्रभावित्त करती है), कान में संक्रमण [Ear Infection], बैक्टीरियल इन्फेक्शन[Bacterial infection]

अन्य समस्याएं

रूमेटिक डिसऑर्डर[Rheumatic disorder] बुर्सिटिस, टेंडिनाइटिस, ऑस्टियोआर्थराइटिस , रूमेटोइड गठिया, में सूजन और दर्द कम करने के लिए फैशियल हेयर, स्किन का जलने पर उपयोगी [Useful on skin burns], त्वचा पर होने वाले काले दाग धब्बे, जोड़ों की सूजन [joint inflammation] दाद ,मस्सा में उपयोगों, आंखों में होने वाले संक्रमण, एलर्जी, रसायनों के संपर्क में होने के कारण हुई आंखों की जलन, सूजन, जलने से छुटकारा पाने के लिए प्रयोग किया जाता है।

बेटनोवेट-सी क्रीम का उपयोग आदि जैसी बीमारियों से जुड़ी सूजन और दर्द को कम करने के लिए किया जाता है।

और पढ़ें: दाने वाली खुजली का उपचार कैसे करें-Khujali Ke Gharelu Upay

बेटनोवेट सी क्रीम के नुकसान

हो सकता है आपको बेटनोवेट क्रीम के किसी इंग्रीडिएंट से आपको एलर्जी हो। ऐसे में इस क्रीम से आपको निम्न साइड इफ़ेक्ट हो सकते है।

  • चकत्ते
  • सूजन
  • जलन
  • खुजली
  • त्वचा की लाली
  • फफोले
  • त्वचा की जलन
  • त्वचा का सूखापन
  • मुँहासे
  • लाल चकत्ते पड़ना

बेटनोवेट सी स्किन क्रीम को प्रयोग करने से पहले ध्यान रखे ये बात

  • शुरू में त्वचा के छोटे से हिस्से पर बेटनोवेट क्रीम का प्रयोग करके देखे, यदि आपको कोई समस्या न हो तभी बड़े हिस्से पर इसका प्रयोग करे।
  • स्तनपान और प्रेग्नेंसी के समय इस क्रीम का इस्तेमाल करने से पहले डॉक्टर से सलाह जरूर लें।
  • प्रेगनेंसी के दौरान इसका इस्तेमाल करने के लिए डॉक्टर से सलाह जरूर लें।
  • इस क्रीम का इस्तेमाल करने से पहले और बाद में अपने हाथों को अच्छे से धो लें।
  • इस क्रीम को बच्चों से दूर रखें।
  • बेटनोवेट सी क्रीम को केवल बाहरी उपयोग के लिए इस्तेमाल करे।
  • श्वास में अन्दर लेने से और निगलने से बचें
  • क्रीम को आंखों और मुंह के संपर्क में न आने दे
  • ज्यादा लम्बे समय तक प्रयोग न करे ।
  • बुजुर्गो और अस्थमा के रोगियों के लिए सोच समझ कर प्रयोग करे।
  • बहुत ज्यादा फंगल इन्फेक्शन होने, या थाइरोइड होने पर भी बेटनोवेट सी का इस्तेमाल न करें।

Frequently Asked Questions in Hindi – सामान्य प्रश्न

बेटनोवेट क्रीम का इस्तेमाल कैसे करें

बेटनोवेट सी क्रीम का उपयोग डॉक्टर के निर्देशानुसार ही करें। डॉक्टर की बताई गई खुराक के अनुसार और बताई गई अवधि के अनुसार इसकी इसे इस्तेमाल करें। इस्तेमाल करने से पहले लेबल की जांच कर ले और अच्छे से लेबल को पढ़ ले। इस्तेमाल करने के बाद हाथों को अच्छे से धो और यदि प्रभावित एरिया हाथों पर ही है तो हाथों को ना धोए।

बेटनोवेट क्रीम कैसे लगाते हैं?

बेटनोवेट क्रीम कई सारी दवाओं से मिलकर बनती है ,इसका प्रयोग स्किन इंफेक्शन के इलाज के लिए किया जाता है । बेटनोवेट क्रीम का प्रयोग त्वचा के शुष्क स्थान पर किया जाना चाहिए । क्रीम लगाने से पहले हाथों को अच्छी तरह से धो लें, जहां क्रीम लगाना है उस त्वचा को भी साफ और सूखा कर लें । अब स्क्रीन की एक मोटी परत इनफेक्टेड जगह पर लगाएं और उसे खुला छोड़ दें ,जल्दी आराम के लिए इसे रात भर लगा कर रखें। इस क्रीम को आंख, नाक वह मुंह के सीधे संपर्क में ना आने दें, यदि गलती से ऐसा हो जाए तो तुरंत पानी से धो दें ।

बेटनोवेट एन लगाने से चेहरे पर क्या होता है?

बेटनोवेट - एन एक एंटीबैक्टीरियल क्रीम है इसका प्रयोग केवल इंफेक्शन या घाव होने पर किया जाता है । बेटनोवेट -एन क्रीम का प्रयोग फेयरनेस क्रीम के रूप में नहीं करना चाहिए ।चेहरे पर बेटनोवेट -एन क्रीम को लगाने से कुछ समय के लिए ऐसा लगता है कि चेहरे पर निखार आ रहा है परंतु लगातार इसका प्रयोग करने से चेहरे का रंग काला पड़ सकता है और इस पर दाने निकल सकते हैं ।

बेटनोवेट सी कैसे यूज़ किया जाता है?

बेटनोवेट सी क्रीम का उपयोग बाहरी अंगों पर लगाने के लिए किया जाता है। इस क्रीम का प्रयोग करने के लिए त्वचा की प्रभावित हिस्से को साफ करके सुखा लें उसके बाद स्क्रीन की पतली परत प्रभावित क्षेत्र पर लगाकर उसे खुला छोड़ दें, प्रभावित क्षेत्र पर किसी प्रकार की पट्टी ना बांधे , चाहे तो रात भर लगाकर भी रख सकते हैं। क्रीम का प्रयोग आंख, नाक, मुंह अथवा योनि पर ना करें। यदि गलती से भी इन क्षेत्रों पर क्रीम लग जाता है तो उसे तुरंत पानी से साफ करें। बेटनोवेट सी क्रीम एक एंटीबैक्टीरियल क्रीम है इसका प्रयोग डॉक्टर की सलाह से ही करें ।

बेटनोवेट N क्रीम लगाने से क्या होता है?

बेटनोवेट एन क्रीम का प्रयोग त्वचा की समस्या जैसे सूजन, लालिमा, एग्जिमा , जहरीले कीड़ों के काटने अथवा सोरायसिस में किया जाता है। यह कई सारी दवाओं से मिलकर बनी एक एंटीबैक्टीरियल क्रीम है।यह क्रीम इन्फेक्शन के कारण पैदा होने वाले सूक्ष्मजीवों के खिलाफ एंटीमाइक्रोबियल एक्शन का कार्य करती है । दिन में दो बार डॉक्टर की सलाह के अनुसार क्रीम की पतली परत लगाने से त्वचा की खुजली जलन ,लालिमा ,सूजन दूर होती है।

क्या हैं रात को दलिया खाने के फायदे-Raat Me Daliya Khane Ke Fayde

दलिया खाने से क्या होता है

दलिया एक पौष्टिक और हल्का भोजन है जिसे रात को खाने के अनेक फायदे होते हैं। यदि आप सोच रहे हैं कि रात को दलिया खाने के फायदे क्या हैं, तो यह लेख आपके लिए है। दलिया न केवल आपके शरीर को पोषण देता है, बल्कि यह आपके पाचन तंत्र, नींद और वजन नियंत्रण में भी सहायक होता है।

दलिया में पाए जाने वाले पोषक तत्व

दलिया में प्रोटीन, फाइबर, विटामिन्स और खनिज जैसे कैल्शियम, आयरन, मैग्नीशियम पाए जाते हैं, जो शरीर के लिए जरूरी होते हैं। 100 ग्राम दलिया में लगभग 83 कैलोरी ऊर्जा होती है।

रात को दलिया खाने के मुख्य फायदे

  1. डायबिटीज़ नियंत्रण में मददगार:

    दलिया में मैग्नीशियम होता है जो ब्लड शुगर को नियंत्रित करता है, इसलिए यह डायबिटीज़ के मरीजों के लिए फायदेमंद है।

    मधुमेह
    मधुमेह
  2. पाचन तंत्र को मजबूत बनाए:

    दलिया में उच्च मात्रा में फाइबर होता है, जो कब्ज जैसी पाचन समस्याओं को कम करता है।

  3. वजन नियंत्रण में सहायक:

    कम कैलोरी और अधिक फाइबर की वजह से दलिया लंबे समय तक भूख को नियंत्रित करता है, जिससे वजन कम करने में मदद मिलती है।

  4. नींद में सुधार:

    दलिया में पाए जाने वाले मैग्नीशियम और ट्रिप्टोफैन मस्तिष्क को शांति देते हैं, जिससे अच्छी नींद आती है।

  5. दिल की सेहत बनाए:

    दलिया खराब कोलेस्ट्रॉल को कम करता है, जिससे हृदय रोग का खतरा घटता है।

दलिया खाने के दौरान सावधानियां

अत्यधिक सेवन से गैस या अपच हो सकता है।

  • ग्लूटेन से एलर्जी वाले लोग इसे सावधानी से लें।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

क्या रात को दलिया खाना डायबिटीज़ के लिए सही है?

हाँ, यह ब्लड शुगर को नियंत्रित करता है और डायबिटीज़ के मरीजों के लिए अच्छा विकल्प है।

रात में दलिया खाने का सबसे अच्छा समय क्या है?

सोने से लगभग 2-3 घंटे पहले हल्का भोजन करना उचित होता है।

निष्कर्ष

रात को दलिया खाने के फायदे अनेक हैं- यह न केवल स्वादिष्ट होता है बल्कि स्वास्थ्य के लिए भी लाभकारी है। इसे अपनी डाइट में शामिल करें और बेहतर स्वास्थ्य का आनंद लें।

Frequently Asked Questions in Hindi – सामान्य प्रश्न

क्या रात को दलिया खाना चाहिए?

दलिया कम फैट वाला और फाइबर से भरा खाद्य पदार्थ होता है, जो भूख तो अच्छी तरह मिटाता ही है,इसके अलावा ये आपकी कॉन्सटिपेशन और दिल से जुड़ी समस्याओं को भी खत्म करने में मदद करता है। तीन कटोरी लगभग पतला दलिया रात के खाने में पर्याप्त कैलोरी देता है इसे स्वादिष्ट और पौष्टिक बनाने के लिए आप इसे सीजनल सब्जियों के साथ बनाकर भी खा सकते हैं। अगर आप दलिया रात के खाने में शामिल करते हैं तो ये आपको अच्छी और गहरी नींद भी देता है, इसमें सेराटोनिन हॉर्मोन होता है जो स्ट्रेस को कम करने में मददगार साबित है. ये आपके मूड को बेहतर कर शरीर को भी शांत रखने में मददगार है ।

गेहूं की दलिया खाने से क्या फायदा है?

गेंहू के दलिया के अंदर 68 से 70% तक कार्बोहाइड्रेट, 8 से 24% तक प्रोटीन तथा 1 से 2% वसा होती है। गेहूँ का दलिया गेहूं की रोटी की तुलना मे बहुत अधिक फायदा करता है। क्योंकि हम इसके अंदर गेहूं के दाने को पिसते तो हैं लेकिन उसको आटे की तरह महीन नहीं पीसते हैं। जिसका फायदा यह होता है कि इसके अंदर उच्च मात्रा मे पोषक तत्व बने रहते हैं। गेहूँ के चोकर में लौह, कैल्सियम, फॉस्फोरस, पोटेशियम, मैग्नीशियम आदि खनिज पदार्थ होते हैं। लेकिन हम इसके चोकर को छानकर जानवरों को खिला देते हैं। असल मे गेहूं के दलिया मे हमको पूरा फायदा इसलिए भी मिलता है क्योंकि इसके अंदर गेहूं के छिलका (चोकर ) साथ ही रहता है।

दलिया से वजन कैसे घटाएं?

दलिया नाश्ते के लिए एक स्वस्थ और बेहतरीन विकल्प है, खासकर वजन घटाने के लिए, दलिया काफी पौष्टिक होता है। इसमें आयरन, फोलेट, कॉपर, नियासिन, मैग्नीशियम आदि पोषक तत्व होते हैं। ये फाइबर से भरपूर होता है, इसलिए पेट में ज्यादा जगह घेरता है और आप कम खुद ही मात्रा में डाइट लेते हैं । यह अनाज आपके पेट के स्वास्थ्य को भी बढ़ावा देता है और वजन बढ़ने के पीछे एक कारक कब्ज को रोकता है। दलिया में प्रोटीन, फाइबर और विटामिन बी से भरपूर होता है, जो वजन घटाने के लिए महत्वपूर्ण हैं। एक कटोरी वेजिटेबल दलिया खाने से आपको तृप्ति और पौष्टिकता दोनों मिलती हैं। आप दलिया में रागी, बाजरा, गेहूँ और भी अन्य अनाजों से विकल्प तलाश सकते हैं।

क्या दलिया खाने से मोटे होते हैं?

दलिया में कैलोरी की मात्रा बहुत होती है जिससे बॉडी को एनर्जी मिलती है। लेकिन इससे मोटापा नहीं बढ़ता है। रोजाना दलिया खाने से आपको बहुत कम मात्रा में कैलोरी मिलती है। क्योंकि इसमें बहुत अच्छी मात्रा में फ़ाइबर होता है इसलिए कम मात्रा लेने पर ही आपका पेट भर जाता है और साथ ही साथ कब्ज की समस्या नहीं रहती, पाचनतंत्र मजबूत होता है। दलिये के साथ जुडा़ कोई भी कारक ऐसा नहीं है जो वजन बढा़ने की ओर इशारा करता है।

स्वास्थ्यवर्धक डाबर च्यवनप्राश के फायदे-Dabur Chyawanprash Benefits In Hindi

स्वास्थ्यवर्धक डाबर च्यवनप्राश के फायदे

भारत में स्वास्थ्य को बढ़ावा देने वाले कई प्राकृतिक और आयुर्वेदिक उपाय सदियों से उपयोग में लाए जा रहे हैं। ऐसे ही एक अमूल्य उपहार हैं डाबर च्यवनप्राश, जो शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने में मदद करता है। इस लेख में हम जानेंगे Dabur Chyawanprash के फायदे, सेवन विधि, नुकसान, और इसे कैसे सही तरीके से उपयोग किया जाए।

Dabur Chyawanprash क्या है?

डाबर च्यवनप्राश एक प्रसिद्ध आयुर्वेदिक हर्बल टॉनिक है, जिसमें आंवला, अश्वगंधा, तुलसी, पिपली जैसे 40 से अधिक प्राकृतिक औषधीय तत्व शामिल हैं। इसे इम्युनिटी बूस्टर च्यवनप्राश के रूप में भी जाना जाता है क्योंकि यह शरीर की रोगों से लड़ने की क्षमता को मजबूती प्रदान करता है।

Dabur Chyawanprash के स्वास्थ्यवर्धक फायदे

  1. रोग प्रतिरोधक क्षमता में वृद्धि
    नियमित सेवन से शरीर की इम्युनिटी बढ़ती है, जिससे सर्दी, जुकाम और अन्य मौसमी बीमारियों से बचाव होता है। 
  2. पाचन शक्ति को बेहतर बनाता है
    इसमें मौजूद हर्ब्स जैसे त्रिकटु और पिपली पाचन तंत्र को मजबूत करते हैं और पेट की समस्याओं में राहत देते हैं। 
  3. ऊर्जा और स्टैमिना बढ़ाता है
    यह शरीर में थकान को कम कर मानसिक और शारीरिक ताकत बढ़ाता है, जिससे आप दिनभर ऊर्जावान महसूस करते हैं।

    मोटापा कम करने में मदद करे
    मोटापा कम करने में मदद करे
  4. स्मरण शक्ति और मानसिक स्वास्थ्य के लिए लाभकारी
    ब्राह्मी और शंखपुष्पी जैसे घटक मस्तिष्क की कार्यक्षमता को सुधारते हैं और ध्यान केंद्रित करने में मदद करते हैं। 
  5. त्वचा और बालों की सेहत में सुधार
    आंवला और तुलसी एंटीऑक्सिडेंट गुणों से भरपूर हैं, जो त्वचा को स्वस्थ और बालों को मजबूत बनाते हैं।


  • यौन स्वास्थ्य को बढ़ावा देता है                                                                                                          अश्वगंधा जैसे औषधीय तत्व यौन शक्ति और सहनशक्ति में सुधार करते हैं।
  • Dabur Chyawanprash का सेवन कैसे करें?

    • बच्चों के लिए (5 साल से ऊपर): आधा चम्मच दिन में एक बार, दूध के साथ सेवन करें। 
    • वयस्कों के लिए: 1 से 2 चम्मच दिन में दो बार, गुनगुने दूध या पानी के साथ। 
    • ध्यान रखें कि इसे खाली पेट लेने की बजाय भोजन के बाद लेना अधिक फायदेमंद होता है। 

    Dabur Chyawanprash के संभावित नुकसान

    यह एक प्राकृतिक हर्बल टॉनिक है और अधिकांश लोगों के लिए सुरक्षित है, लेकिन ध्यान रखें:

    • अत्यधिक मात्रा में लेने से पेट में गैस, जलन या अपच हो सकता है। 
    • कुछ लोगों को इसके गर्म प्रकृति के कारण शरीर में गर्मी महसूस हो सकती है। 
    • मधुमेह रोगियों को सेवन से पहले डॉक्टर से सलाह लेना चाहिए, क्योंकि इसमें प्राकृतिक मिठास होती है।

    Dabur Chyawanprash के बारे में अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)

    1. क्या डाबर च्यवनप्राश बच्चों के लिए सुरक्षित है?
      हाँ, 5 साल से ऊपर के बच्चों के लिए इसे आधा चम्मच दूध के साथ सेवन करना सुरक्षित और लाभकारी है।
    2. क्या यह सर्दी और जुकाम से बचाता है?
      जी हाँ, यह शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाकर मौसमी बीमारियों से बचाता है।
    3. क्या इसे रोजाना लेना चाहिए?
      हाँ, नियमित और सही मात्रा में सेवन करने से इसके फायदे लंबे समय तक मिलते हैं।

    सेहत के गुणों से भरपूर छुआरा के फायदे

    छुआरे के फायदे

    छुआरे यानी सूखे हुए खजूर, खजूर जिसे रेगिस्तान की रोटी कहा जाता है। खजूर की तरह ही छुआरे भी गुणों से भरपूर होते है। सर्दियों में केवल काजू, बादाम, अखरोट ही नही लोग छुआरे को भी डेली रूटीन में शामिल करते है। बहुत पुराने समय से हमारे बुजुर्ग, छुआरा के फायदे बताते रहे है, छुआरे का सेवन बड़े, बूढ़े, बच्चे सभी कर सकते है।

    आज इसी अनगिनत गुणों से भरपूर छुआरे के बारे में हम आपको बताएंगे। छुआरे केवल शरीर को गर्माहट नही देते बल्कि विभिन्न रोगों में आराम देता है।

    छुआरे में पाए जाने वाले पोषक तत्व

    छुआरे में प्रोटीन, फैट (वसा) 0.4, कार्बोहाइड्रेट 33.8, मिनरल्स 1.7, कैल्शियम 0.022, फास्फोरस 0.38, विटामिन बी और सी, शुगर – 85 फीसदी होते है इसके अलावा इसमें पोटेशियम, मैग्नीशियम, फाइबर भी पाया जाता है।

    छुआरा के फायदे-Chuhare Khane Ke Fayde

    ओरल हाइजीन के लिए

    छुआरा अपने एंटीमाइक्रोबियल गुण के कारण ओरल हाइजीन में फायदेमंद होता है। इसमे पाया जाने वाला प्रोटीन और विटामिन सी मुँह में होने वाले प्रत्येक संक्रमण को दूर करता है।

    मधुमेह

    यू तो मधुमेह में किसी भी प्रकार का मीठा मना होता है, लेकिन यदि मधुमेह का मरीज़ सीमित मात्रा में छुआरे का सेवन करता है तो कोई नुकसान नही होगा। क्योंकि छुआरे का प्राकृतिक मीठा कम से कम चीनी से तो बेहतर ही रहता है।

    माहवारी का दर्द

    यदि महिलाएं माहवारी से 2 दिन पहले से लेकर माहवारी समाप्त होने तक दूध के साथ छुआरे का सेवन करती है, तो माहवारी के दौरान होने वाले दर्द में आराम मिलता है। साथ ही कमर दर्द और पैरों में ऐंठन में भी आराम मिलता है, साथ ही माहवारी के दौरान कम रक्तस्राव भी ठीक होता है।

    माहवारी की समस्या
    माहवारी की समस्या

    पेट की समस्याएं

    छुआरे में पाया जाने वाला हाई फाइबर पेट के लिए बहुत फायदेमंद होता है। पेट की ज्यादातर समस्याए जैसे पेट से जुड़ी समस्या जैसे कब्ज, अपचन, इर्रिटेबल बाउल सिंड्रोम (आंत से जुड़ा विकार) में छुआरा खाना चाहिए।

    हाई फाइबर के कारण छुआरा पेट से कब्ज की समस्या को दूर करता है। इसके लिए सुबह-शाम 3 छुहारे खाने के बाद गर्म पानी पी लें।

    युवा बनाये रखें

    छुआरे में पाए जाने वाले तत्व एंटीएजिंग की तरह काम करते है। छुहारे में बहुत से एंटी ऑक्सीडेंट तत्व विटामिन ए, पैंटोथेनिक एसिड, जिंक, कॉपर व सिलेनियम,पॉलीफेनोल्स पाए जाते है।

    ये सभी तत्व त्वचा को हानिकारक तत्वों से बचाकर, युवा और हम बनाये रखते है। त्वचा की नई कोशिकाएं बनाने में पुराने डैमेज को दूर करने मदद मिलती है।

    साइटिका

    साइटिका के दर्द में पूरा आराम व्यायाम और दवाओं से ही होता है, लेकिन मासपेशियो को मजबूत करने के लिए तथा दर्द में कुछ राहत के लिए छुआरे का सेवन फ़ायदेमंद रहता है।

    मसल्स को मजबूत बनाए

    मसल्स की मजबूती के लिए सबसे जरूरी तत्व होता है प्रोटीन। और छुआरे में प्रोटीन काफी मात्रा में होता है। छुआरे में पाया जाने वाला प्रोटीन मांसपेशियों को मजबूत को मजबूत बनाता है।

    हृदय रोग में फायदेमंद

    अभी ये शोध का विषय है कि छुआरा किस हद तक हृदय रोग में फायदेमंद है। पर यह माना जाता है कि हृदय रोग के कुछ कारणों जैसे उच्च रक्तचाप, कोलेस्ट्रॉल, लिपिड ऑक्सीडेशन और ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस को कम करता है।

    छुहारे में पाया जाने वाला एंटी ऑक्सीडेंट तत्व शरीर में बैड कोलेस्ट्रॉल को कम करता है। जिससे दिल की बीमारियों का भी खतरा कम होता है।

    तुरन्त ऊर्जा प्रदान करे

    किसी भी कार्य मे लगने वाली ऊर्जा कार्बोहायड्रेट से मिलती है, कार्बोहाइड्रेट उर्जा उत्पन्न करने वाले प्रोसेस में ग्लोकोज बनाती है। इसलिए छुआरे में पाई जाने वाली नेचुरल शुगर से शरीर को इंस्टेंट एनर्जी मिलती है और स्टेमिना मजबूत होता है।

    बालो के लिए फायदेमंद

    आयरन, जिंक, सिलेनियम, विटामिन-ए और विटामिन-सी ऐसे तत्व है जो स्वस्थ्य बालो के लिए बहुत जरूरी है। ये सभी पोषक तत्व छुआरे में होते है खासतौर पर विटामिन सी और सिलेनियम।

    ये तत्व बालो को झड़ने से रोकते है। बालो को खूबसूरत बनाते है। साथ ही छुआरे का एन्टी माइक्रोबियल गुण डर्मेटाइटिस या सोरायसिस से स्कैल्प का बचाव करता है।

    इन गुणों के अलावा छुआरा कुछ अन्य बीमारियों में भी फायदेमंद है जैसे

    • ब्लडप्रेशर की समस्या
    • बच्चो की बिस्तर पर पेशाब की समस्या
    • खांसी
    • आंखों के रोग
    • सांस की बीमारी
    • एलर्जी या इन्फेक्शन
    • मानसिक रोग
    • एनीमिया
    • कैंसर

    छुआरे के साइड इफ़ेक्ट

    जरूरत से ज्यादा छुआरे के सेवन से निम्न समस्याए हो सकती है।

    • ब्लोटिंग (पेट फूलना)
    • हाइपोग्लाइसीमिया (ब्लड शुगर का स्तर कम होना)
    • अधिक नींद आना
    • अधिक पसीना आना
    • कंपकंपी आना

    छुआरा खाने का तरीका

    कैसे खाएं

    साबुत, दूध में उबालकर, मिठाई में शक्कर की जगह डालकर,आप छुहारों को साबुत खा सकते हैं,सिरेल्स या मूसली में डालकर

    जानिए क्या है गिलोय टेबलेट के फायदे

    गिलोय टेबलेट के फायदे

    महामारी कोई भी हो चाहे वो डेंगू फैले या चिकनगुनिया, लेकिन जिस आयुर्वेदिक औषधि का प्रयोग अचानक बढ़ जाता है, वो है गिलोय
    अनगिनत फायदों से भरी गिलोय एक बेल का प्रकार होता है। इसके फायदों के कारण लोग घर घर मे उगाने लगे है। इसकी पत्तियों का आकार पान के पत्तों के जैसा होता है और इनका रंग गाढ़ा हरा होता है। गिलोय को गुडूची भी कहते है।

    गिलोय के बारे में ये भी कहा जाता है की ये जिस पेड़ को आश्रय बनाती है उसके गुण ले लेती है। इसलिए बहुत से लोग नीम के पेड़ पर चढ़ी गिलोय का असरदार मानते है। गिलोय में गिलोइन नामक ग्लूकोसाइड और टीनोस्पोरिन, पामेरिन एवं टीनोस्पोरिक एसिड, कॉपर, आयरन, फॉस्फोरस, जिंक, कैल्शियम और मैगनीज भी प्रचुर मात्रा में मिलते हैं।

    आजकल गिलोय के लिए पतंजलि गिलोय घनवटी काफी चर्चा में है। सबके लिए इसे लेना आसान भी है और ये आसानी से उपलब्ध भी हैं।
    पतंजलि गिलोय घनवटी के केवल और केवल गिलोय की बेल का इस्तेमाल किया गया है। यह गिलोय के तने के जूस से मिलाकर बनाई जाती है।

    पतंजलि की गिलोय टेबलेट के फायदे

    इम्युनिटी बढ़ाये

    आज के समय मे शरीर की सबसे बड़ी जरूरत है स्ट्रांग इम्युनिटी। इम्युनिटी कमजोर होने से इंसान जल्दी जल्दी बीमार होने लगता है। ज़रा सा मौसमी बदलाव या खानपान का बदलाव सहन नही कर पाता।

    गिलोय टेबलेट व्यक्ति के शरीर की इम्युनिटी बढ़ाकर शरीर को अंदर से मजबूत बनाती है। इस प्रकार व्यक्ति हर प्रकार के संक्रामक रोग जैसे खांसी,जुकाम, बुखार, वायरल से बचता है।

    गिलोय
    गिलोय

    लिवर को स्वस्थ बनाए

    लिवर शरीर का एक बहुत ही महत्वपूर्ण हिस्सा है। लिवर में किसी भी तरह का नुकसान शरीर की दुर्गति कर देता है। लिवर के महत्व को ध्यान में रखते हुए ही पतंजलि के गिलोय घनवटी बहुत लाभदायक है। गिलोय घनवटी के एंटी-ओक्सिडेंट और एंटी-बैक्टीरियल गुण लिवर की कार्यक्षमता बढ़ाते है।

    गिलोय टेबलेट ब्लड प्यूरीफाई करके एंटीऑक्सीडेंट एंजाइम लेवल को बढ़ाती है। लिवर द्वारा किया जाने वाला कार्य तेजी से होता है। इस प्रकार लिवर की स्थिति बेहतर से बेहतर होती जाती है।

    सुंदरता बढ़ाए

    पुराने समय मे चेहरे पर कील मुँहासे या दाग धब्बे होने पर गिलोय के तने को पीसकर उसका लेप लगाया जाता था। तो सोचिए इसके सेवन से त्वचा को कितना फायदा होगा।

    गिलोय के अंदर मिलने वाला एंटीबैक्टीरियल गुण, केवल कील मुहासों को दूर नही करता। बल्कि उनके कारण को भी जड़ से खत्म करता है। इसलिए किसी भी तरह की त्वचा सम्बन्धी परेशानी दोबारा नही होती। गिलोय टेबलेट का सेवन हमारी त्वचा को सुंदर और चमकदार बनाता है।

    ब्लड प्यूरीफाई करें

    पतंजलि गिलोय घनवटी में पाए जाने वाले एंटी-ओक्सिडेंट और एंटी-बैक्टीरियल गुण ब्लड प्यूरीफाई करते है। जिससे न केवल हमारा स्वास्थ्य बेहतर होता है बल्कि सुंदरता भी निखरती है। खून की सफाई कैंसर जैसी बीमारी को दूर रखने में मदद करती है।

    डायबिटीज को करे कंट्रोल-Giloy Ghan Vati For Diabetes

    विशेषज्ञों के अनुसार गिलोय हाइपोग्लाईसेमिक एजेंट की तरह काम करती है और टाइप-2 डायबिटीज को नियंत्रित रखने में असरदार भूमिका निभाती है।

    गिलोय जूस (giloy juice) ब्लड शुगर के बढे स्तर को कम करती है, इन्सुलिन का स्राव बढ़ाती है और इन्सुलिन रेजिस्टेंस को कम करती है। इस तरह यह डायबिटीज के मरीजों के लिए बहुत उपयोगी औषधि है।

    डेंगू, मलेरिया और स्वाइन फ्लू में असरकारक

    डेंगू, मलेरिया या स्वाइन फ्लू होने पर एलोपैथी के अलावा सबसे ज्यादा गिलोय का इस्तेमाल किया जा रहा है। गिलोय का एंटीपायरेटिक गुण, बुखार में आराम देता है।

    बुखार को ठीक करने के साथ साथ ये इम्युनिटी भी बढ़ाता है। जिससे बुखार जल्दी से रिवर्स नही होता।

    डायजेस्टिव सिस्टम को बेहतर बनाए

    अगर आप कब्ज, अपच या एसिडिटी से पीड़ित है तो गिलोय इसके लिए बेहतरीन उपाय है। गिलोय टेबलेट अपच को दूर कर, कब्ज हटाती है।
    कब्ज, अपच और एसिडिटी के दूर होने से भूख खुलकर लगती है जिससे व्यक्ति का स्वास्थ्य बेहतर होता है।

    गिलोय टेबलेट के अन्य फायदे

    • सांस सम्बन्धी रोगों जैसे अस्थमा और खांसी में आराम दे।
    • गठिया रोग में आराम देता है।
    • खून की कमी दूर करे।
    • मधुमेह को कम करने में मदद करती है।
    • बुखार की समस्या में लीवर की रक्षा करती है।
    • शरीर की सुजन कम करती है।
    • हाथ-पैर में जलन की समस्या को दूर करती है।

    गिलोय का सेवन विधि-गिलोय टेबलेट का सेवन कैसे करें

    • वयस्क दिन में दो बार एक एक गोली का सेवन करे।
    • बच्चे की उम्र कम से कम 7 साल से ऊपर हो। बच्चे को एक गोली का सेवन कराए।
    • खुराक को खाली पेट ले।
    • टेबलेट लेने के एक घण्टे बाद भोजन करे।

    क्या है नवजात शिशु की मालिश के लिए सर्वोत्तम तेल- डाबर लाल तेल के फायदे

    डाबर लाल तेल के फायदे

    न जाने कितने वर्षों से भारत मे बच्चो और नवजात शिशु की मालिश का जिक्र आने पर केवल एक तेल याद आता है। वो है डाबर लाल तेल। डाबर भारत का एक जाना माना ब्रांड, जिसे किसी पहचान की जरूरत नही। उसी ब्रांड का ये प्रोडक्ट है डाबर लाल तेल, जिसके बारे हर नई मां जानती जरूर है। चाहे वो इसका इस्तेमाल करे या न करें।

    नवजात शिशुओं के लिए बना ये तेल नवजात शिशुओं के बोन्स, जॉइंट्स और मसल्स को मजबूत बनाकर तेजी से विकास करता है। डाबर लाल तेल पूर्णरूप से आयुर्वेदिक चीज़ों से बना होता है, नवजात शिशुओं के लिए ये पूर्णतः सुरक्षित है। जब बच्चा बैठना या चलना शुरू करता है तब इस तेल से बच्चे की मालिश करनी चाहिए।

    नवजात शिशु की मालिश करने के बहुत ही फायदे होते है जैसे:

    • बोन्स और मसल्स स्ट्रांग बनते है।
    • हैप्पी हार्मोन ऑक्सिटोसिन रिलीज होता है, जिससे माँ और बच्चे के मध्य बॉंडिंग मजबूत होती है।
    • ब्लड सर्कुलेशन इम्प्रूव होता है। खुल कर भूख लगती है
    • मानसिक विकास होता है।
    • शिशु को साउंड स्लीप आती हैं।
    • त्वचा चमकदार और मुलायम होती है।
    • डाउन सिंड्रोम और सेरेब्रल पाल्सी जैसे रोगों में मालिश काफी प्रभावी होती है

    डाबर लाल तेल के फायदे

    क्यों ये तेल वर्षो से इतना प्रचलित है? क्योंकि इस तेल में अनगिनत फायदे छुपे है। आज हम आपको डाबर लाल तेल के फायदों से अवगत कराएंगे। डाबर लाल तेल की 200 ml की बोतल की कीमत सामान्य बाजार में 134रुपए है। डाबर लाल तेल में शंखपुष्पी, रतनजोत, उड़द, सीसम तेल, कपूर जैसे आयुर्वेदिक तत्व है।

    आइए अब जानते है डाबर लाल के फायदों के बारे में

    संक्रमण से बचाए

    डाबर लाल तेल शिशु की त्वचा को किसी भी प्रकर के संक्रमण से बचाता है। डाबर लाल तेल में शंखपुष्पी और कपूर के एंटीफंगल और एंटीबैक्टीरियल गुण होते है। यही गुण छोटे बच्चे की त्वचा का किसी भी बाहरी संक्रमण से बचाव करते है।

    हड्डियों को मजबूत बनाये

    डाबर लाल तेल में मौजूद उड़द बच्चो के मसल्स और हड्डियों को मजबूत बनाता है। ग्रोथ फेज में बच्चे की मालिश बहुत ही जरूरी है।
    खासकर तब, जब शिशु गर्दन टिकाने की, बैठने की या चलने की कोशिश कर रहा हो।

    डाबर लाल तेल की मालिश से बच्चा जल्द से जल्द अपने सपोर्ट पर आने की कोशिश करता है। इसके लिए जरूरी है कि रेगुलर इंटरवल पर बच्चे की मालिश की जाए।

    त्वचा को मुलायम बनाए

    बहुत से तेल से जब नवजात शिशु की मालिश करते है तो बच्चे को थोड़ा चिपचिपा पन लगता है। साथ ही त्वचा खुरदुरी भी महसूस होने लगती है।

    डाबर लाल तेल में सीसम आयल होने के कारण ये बहुत ही आसानी से अब्सॉर्ब हो जाता है। इससे न केवल त्वचा मुलायम होती है बल्कि बाहरी संक्रमण से भी त्वचा की रक्षा होती है।

    त्वचा को मुलायम बनाए
    त्वचा को मुलायम बनाए

    हैप्पी हॉरमोन

    डाबर लाल तेल से मालिश होने के कारण शिशु में हैप्पी हॉरमोन रिलीज होते है। शिशु खुशनुमा रहता है। अच्छे से खेलता है और भरपूर नींद लेता है। डाबर लाल तेल से मालिश करने पर बच्चे को गहरी नींद आती है, जिससे वो चिड़चिड़ा नही होता। साथ ही शिशु और माँ के बीच बेहतरीन बॉन्डिंग बनती है।

    खून का दौरा तेज करें

    डाबर लाल तेल में मौजूद कपूर शिशु का ब्लड सर्कुलेशन इम्प्रूव करता है। खून का दौरा तेज होने से ऑक्सीजन पूरे शरीर मे अच्छे से प्रवाहित होता है।

    शिशु को भूख खुलकर लगती है और ऑक्सीजन भोजन और दूध से मिलने वाले सभी पोषक तत्वों को शरीर के हर हिस्से तक पहुचाती है।
    बच्चे का विकास तेजी से होता है और बच्चा हेल्थी होता है।

    मालिश कैसे करें

    • बच्चे की दिन में कम से कम दो बार मालिश करें।
    • गर्मियों में कम तेल का प्रयोग करें, दिन में केवल एक बार मालिश करें।
    • डाबर लाल तेल को गर्म करके न लगाए।
    • शिशु के बालों पर डाबर लाल तेल इस्तेमाल न करे।
    • डाबर लाल तेल को शिशु की आंखों में न जाने दे।

    जानिए स्टेरॉयड क्या है, क्या है स्टेरॉयड के फायदे?

    स्टेरॉयड के फायदे

    स्टेरॉयड क्या है?

    स्टेरॉइड के बारे में हमेशा आपने नकारात्मक खबरे ही सुनी होंगी। दरअसल स्टेरॉयड एक आर्टिफीसियल हॉरमोन होता है। जिस प्रकार हॉरमोन मानव शरीर मे निर्मित होते है उसी प्रकार स्टेरॉयड एक मानव निर्मित हॉरमोन है। एक प्रकार के हार्मोन होते हैं जो शरीर में स्वाभाविक रूप से बनते हैं। स्टेरॉयड दवाएं मानव निर्मित होती हैं

    स्टेरॉयड का इस्तेमाल केवल बॉडी बिल्डिंग या एथलेटिक्स में नही होता, बल्कि चिकित्सा में भी इसका इस्तेमाल होता है। लेकिन पेशेवर एथलीट और बॉडीबिल्डर जिस स्टेरॉयड का दुरुपयोग अपनी परफॉरमेंस सुधारने के लिए करते है उसे एनाबॉलिक स्टेरॉयड कहते है।

    एनाबॉलिक स्टेरॉयड मासपेशियो को तेजी से ग्रोथ देता है। ऐसा पुरुष हॉरमोन टेस्टोस्टेरॉन के इफ़ेक्ट के कारण होता है। इसलिए इसका उपयोग एथलीट्स और बहुत से युवा मसल्स को बढ़ाने में करते है। इससे शरीर मे ताकत का अहसास होता है। स्टेरॉयड लेने वाला व्यक्ति दुगुनी स्पीड और इंटेनसिटी से वर्कआउट कर पाता है।

    लेकिन गैरकानूनी रूप से स्टेरॉयड लेना एक अपराध है। ऐसा करने वाले एथलेटिक्स या स्पोर्ट्स प्लेयर को कानूनी रूप से प्रतिबंधित किया जाता है, साथ ही जुर्माना भी लगता है। शारीरिक, और मानसिक क्षति तो होती ही है, समाज मे बेइज्जती होती है सो अलग। स्टेरॉयड अलग अलग प्रकार से प्रयोग किये जाते है जैसे प्रेडनीसीलोन- गोलियां, सिरप और तरल पदार्थ बीक्लोमेटासोन और फ्लुटाइकसोन-इनहेलर्स और नाक में डालने वाले स्प्रे मेथाईलप्रेडनिसोलोन-इंजेक्शन। हाइड्रोकोर्टिसोन-क्रीम, लोशन और जैल

    स्टेरॉयड के फायदे

    स्टेरॉयड हमेशा नुकसान दायक नही होते। स्टेरॉयड के कुछ फायदे भी होते है जो आज हम आपको बताएंगे। अगर एक एक्सपर्ट की देखरेख में सही प्रकार से आप स्टेरॉयड का प्रयोग करते है तो आपको निम्न लाभ होंगे।

    कॉर्टिकोस्टेरॉइड्स के लाभ

    • कॉर्टिकोस्टेरॉइड्स स्वेलिंग को कम करके इम्युनिटी को बढ़ाने का काम करता है। इसलिए ही इस स्टेरॉयड का प्रयोग अस्थमा और एक्जिमा जैसी समस्याओं के लिए किया जाता है।
    • बहुत सी ऑटोइम्यून बीमारी, जैसे रह्यूमोटोइड आर्थराइटिस, ऑटोइम्यून हैपेटाइटिस या सिस्टमिक लुपस एरिथेमैटोसस (एसएलई) का इलाज करने में चिकित्सक इसका प्रयोग करते है।
      अस्थमा
      अस्थमा

    कॉर्टिकोस्टेरॉइड लेते समय रखे इन बातों का ध्यान

    • डॉक्टर को अच्छे से अवगत कराएं की पहले कभी आपको किस स्टेरॉयड से रिएक्शन हुआ था।
    • स्टेरॉयड के जो साइड इफ़ेक्ट आपने पहले अपने ऊपर देखे है, डॉक्टर को जरूर बताए।
    • डॉक्टर को अपनी मेडिकल हिस्ट्री जरूर बताए कि आप फिलहाल और कौन सी दवाइया ले रहे है।

    एनाबॉलिक स्टेरॉयड के फायदे

    • बिना फैट बढ़े, मसल्स बिल्डउप होती हैं। जिनमे न केवल ग्रोथ दिखती है। बल्कि ये मसल्स शक्तिशाली भी होती है।
    • ये स्टेरॉयड भूख बढ़ाते है, एनर्जी और डेडिकेशन में इम्प्रूवमेंट लाते है। व्यक्ति का कॉन्फिडेंस अलग ही लेवल पर होता है।
    • स्टेरॉयड लेने से आप व्यायाम या कोई भी एथलेटिक एक्टिविटी लगातार कर सकते है। आपको थकान महसूस नही होती है। इससे होगा ये की आप लगातार एब्स या बाइसेप्स, ट्राइसेप्स की एक्सरसाइज कर सकते हो।जिससे आपके एब्स या बाइसेप्स जल्दी बनते है।
    • स्टेरॉयड लेने से मसल्स साइज तेजी से बढ़ता है। यह हमारे मसल साइज को इंप्रूव करने में मदद करता है. जब हमारे बॉडी के हिसाब से हमारा testosterone  बढ़ जाता है तो हमारे मसल्स की साइज बढ़ने लगती है और ज्यादातर हमारी बाइसेप और leg की muscle सबसे ज्यादा इंप्रूव होती है.

    स्टेरोइड लेने के नुकसान स्टेरॉयड के नुकसान

    कॉर्टिकोस्टेरॉइड के साइड इफेक्ट

    • भूख कम होना
    • मूड में बदलाव
    • सोने में कठिनाई

    एनाबॉलिक स्टेरॉयड के दुष्प्रभाव

    मुँहासे, ब्लोटिंग, पेशाब करते समय दर्द या परेशानी हो सकती है, पुरुषों में छाती का बढ़ना, रेड ब्लड सेल की संख्या खतरनाक स्तर तक बढ़ना, एचडीएल कोलेस्ट्रॉल कम होना, एलडीएल कोलेस्ट्रॉल बढ़ना  बाल झड़ना, स्पर्म क्वांटिटी कम होना, नपुंसकता। लिबिडो में कमी, कार्डियोवैस्कुलर समस्या, लिवर की समस्याएं, ट्यूमर, ऑस्टियोपोरोसिस, विकास का रुक जाना, स्त्रियों में अनियमित माहवारी, वॉइस चेंज, क्लाइटोरिस की लम्बाई बढ़ना, फैशियल हेयर, ब्रैस्ट की त्वचा का सिकुड़ना, सेक्स ड्राइव में वृद्धि, लिवर को नुकसान, आदि

    इसलिए जब भी आप स्टेरॉयड का सेवन करने का विचार करे। उसके फायदे नुकसान पर भली भांति विचार कर ले।

    error: Content is protected !!