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क्या है नोरोवायरस के लक्षण और इलाज-Norovirus ke lakshan aur Ilaz

norovirus

रात दिन मिलने वाली नयी नयी बीमारियां और होने वाली मेडिकल रिसर्च से पता चलता है कि कोरोना वायरस, टोमैटो फ्लू, निपाह और स्वाइन फ्लू के बाद अब केरल में नोरोवायरस (Norovirus) का मामला भी सामने आया है, केरल की स्वास्थ्य मंत्री वीणा जॉर्ज ने बताया कि दो स्कूली बच्चे नोरोवायरस से संक्रमित मिले हैं, उन्होंने बताया कि तिरुवनंतपुरम के एक स्कूल में फूड पॉइजनिंग और डायरिया की शिकायत आने के बाद दो बच्चों के सैम्पल की जांच की गई, जिनमें नोरोवायरस की पुष्टि हुई, फिलहाल दोनों बच्चों की हालत स्थिर है…!

केरल में नोरोवायरस का पहला मामला नवंबर 2021 में सामने आया था. तब वायनाड में एक वेटरनरी कॉलेज के 13 छात्र इस वायरस से संक्रमित मिले थे, उल्टियां और दस्त इस वायरस का मुख्य लक्षण हैं।
नोरोवायरस से कोई भी व्यक्ति अपने जीवनकाल में कई बार संक्रमित हो सकता है, क्योंकि इसके कई सारे प्रकार होते हैं, इसलिए अगर आप एक बार संक्रमित हो गए हैं तो आगे भी आप इस वायरस से संक्रमित हो सकते हैं।

अगर आप नोरोवायरस के किसी एक प्रकार से संक्रमित हुए हैं तो उसके खिलाफ इम्युनिटी बन सकती है, लेकिन दूसरे प्रकार से आप फिर से संक्रमित हो सकते हैं. इस बात को लेकर भी अभी कोई जानकारी नहीं है कि इससे एक बार संक्रमित होने के बाद कितने समय तक इम्युनिटी बनी रहती है।
अमेरिका के सेंटर फॉर डिसीज कंट्रोल (CDC) के मुताबिक, किसी भी उम्र में कोई भी व्यक्ति इससे संक्रमित हो सकता है, नोरोवायरस से आप कितना संक्रमित होते हैं , ये आपके जीन पर भी निर्भर करता है। नोरोवायरस को कई बार ‘स्टमक फ्लू’ या ‘स्टमक बग’ भी कहा जाता है. हालांकि, इससे संक्रमित होने के बाद फ्लू जैसी बीमारी नहीं होती है।

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लक्षण

उल्टी, दस्त, पेट दर्द और जी मिचलाना इसके प्रमुख लक्षण हैं. कई बार मरीज को बुखार, सिरदर्द और शरीर में दर्द की शिकायत भी हो सकती है। इस वायरस से संक्रमित होने पर पेट या आंतों में जलन हो सकती है,संक्रमित होने के 12 से 48 घंटे बाद इसके लक्षण दिखने शुरू होते हैं,एक से तीन दिन में इससे राहत भी मिलने लगती है।

अगर आप नोरोवायरस से संक्रमित होते हैं तो आपको बुखार हो सकता है, दिन में कई बार उल्टियां और दस्त हो सकते हैं, इसके अलावा डिहाइड्रेशन की शिकायत भी हो सकती है।

नोरोवायरस से दूषित कोई खाना खाने या पेय पदार्थ पीने से भी ये संक्रमण फैल सकता हैं, इसलिए मरीज का जूठा ना खाएं, इसके अलावा नोरोवायरस से दूषित किसी सतह या चीज को छूने से भी संक्रमण फैल सकता है, नोरोवायरस से संक्रमित किसी व्यक्ति के संपर्क में आने पर भी संक्रमित होने का खतरा बढ़ जाता है।

नोरोवायरस से संक्रमित व्यक्ति इसके अरबों पार्टिकल छोड़ सकता है, और इसके महज कुछ पार्टिकल ही दूसरे व्यक्ति को बीमार कर सकते हैं, इसलिए साफ सफाई और आइसोलेशन जरूरी है।

इलाज

नोरोवायरस से संक्रमित होने पर एक से तीन दिन में ही ठीक हुआ जा सकता है. इससे संक्रमित होने पर डिहाईड्रेशन की समस्या बढ़ जाती है, इसलिए ज्यादा से ज्यादा पानी पीना जरूरी है।

कई मामलों में डिहाईड्रेशन की समस्या बहुत बढ़ जाती है, जिसके बाद अस्पताल में भर्ती होना जरूरी है. अस्पताल में नसों के जरिए लिक्विड डाला जाता है।

सावधानियाँ

नोरोवायरस का नया संक्रमण तिरुअनंतपुरम के विहिंजम में सामने आया है,केरल की स्वास्थ्य मंत्री वीना जॉर्ज ने कहा कि बीमारी को फैलने से रोकने के इंतजाम शुरू कर दिए गए हैं।

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इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक, स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने ये भी कहा है कि पहली नजर में ऐसा लग रहा है कि स्कूलों में जो मिड डे मील बांटा गया, उसे खानें से छात्रों में फूड प्वाइजनिंग हुई है, राज्य के स्वास्थ्य विभाग और जनरल एजुकेशन व सिविल सप्लाई विभाग ने रविवार को उच्च स्तरीय बैठक करके बीमारी को फैलने से रोकने के उपायों का ऐलान किया, इनमें मिड डे मील को तैयार करने में साफ सफाई का विशेष ध्यान रखना, पानी के टैंकों की सफाई और स्टाफ को जागरुक करना शामिल है।

क्योंकि आमतौर पर ये दूषित पानी, दूषित खाने और संक्रमित व्यक्ति के संपर्क में आने से फैलता है, ये वायरस बार-बार व्यक्ति को अपना शिकार बना सकता है क्योंकि इसके बहुत सारे वैरिएंट होते हैं. इस वायरस पर कीटाणुनाशक भी काम नहीं करते और ये 60 डिग्री के तापमान पर भी जिंदा रह सकता है। मतलब ये कि पानी को उबालने या क्लोरीन डालने से इस वायरस को नहीं मारा जा सकता है, ये वायरस हैंड सैनिटाइजर के इस्तेमाल के बावजूद जिंदा रह सकता है।

आमतौर पर यह संक्रमण जानलेवा नहीं होता लेकिन बच्चों और बुजुर्गों को विशेष सतर्क रहने की सलाह दी जाती है, संक्रमण लगने और ज्यादा उल्टी-दस्त होने से उनकी स्थिति गंभीर हो सकती है. ज्यादातर मरीज कुछ दिनों में ठीक हो जाते हैं. इसकी कोई खास दवा नहीं है।
हर स्तर पर साफ सफाई और सावधानी ही इसका इलाज़ है।

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